हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हमारे युवाओं को स्किल का प्रदर्शन करने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय मंच मिले : प्रधानमंत्री
दुनिया भारत को भरोसेमंद और उभरते भागीदार के रूप में देखती है: प्रधानमंत्री मोदी
पैन-आईआईटी मूवमेंट का सामूहिक बल आत्मनिर्भर भारत को गति प्रदान कर सकता है : पीएम मोदी
रि-लर्निंग, रि-थिंकिंग, रि-इनोवेटिंग और रि-इंवेंटिंग, कोविड-19 के बाद की व्यवस्था होगी: प्रधानमंत्री

श्री सुंदरम श्रीनिवासन

अध्यक्ष

पैन आईआईटी यूएसए

प्रतिष्ठित पूर्व छात्र

मित्रों,

मैं आज आप सभी लोगों से जुड़कर प्रसन्न हूं। मुझे चेन्नई, मुंबई, गुवाहाटी और हाल ही में दिल्ली में आईआईटी के दीक्षांत समारोहों को संबोधित करने का अवसर मिला। मैं आईआईटी के छात्रों के साथ बातचीत के बाद हमेशा प्रभावित होता हूं। मैं भारत और हमारी दुनिया के भविष्य को लेकर नई ऊर्जा और नए भरोसे को लेकर लौटता हूं।

मित्रों,

आप भारत के बेटे और बेटियां हैं, जो मानवता की सेवा कर रहे हैं। आपकी नवाचार करने की भावना दुनिया को बड़ा सपना देखने में मदद कर रही है। यह आपकी व्यापक क्षमताओं में से एक है। शायद यह आपकी तकनीकी और प्रबंधन कौशल के ठीक बाद दूसरे स्थान पर आती है। किसी को पूरी दुनिया में आईआईटी के पूर्व छात्रों के संचयी योगदान के आर्थिक मूल्य को आंकना चाहिए। मुझे यकीन है कि यह एक उचित आकार वाले किसी देश की जीडीपी के बराबर होगा।

मित्रों,

एक समय था, जब ऐसी किसी सभा में सिर्फ पांच या छह आईआईटी के ही पूर्व छात्र शामिल होते थे। अब यह संख्या बढ़ रही है, और लगभग दो दर्जन तक पहुंच चुकी है। छात्रों और पूर्व छात्रों की संख्या भी बढ़ी है। इसके साथ, हमने यह सुनिश्चित किया है कि आईआईटी का ब्रांड और मजबूत बने। हम भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए मजबूती से प्रतिबद्ध हैं। आपने देखा होगा कि हाल के कुछ समय में भारत में हैकथॉन की एक संस्कृति विकसित हो रही है। मुझे इनमें से कुछ हैकाथॉन में शामिल होने का अवसर भी मिला है। इन हैकाथॉन में मैंने युवा सोच को देश और दुनिया की समस्याओं के जबरदस्त समाधान देते हुए देखा है।

इस क्षेत्र में हम दक्षिण पूर्व एशिया और यूरोप के कई देशों के साथ काम कर रहे हैं। हमारा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि हमारे युवाओं को अपना कौशल दिखाने और दुनिया के बेहतर व्यवहारों से सीखने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय मंच मिले। 2 अक्टूबर, गांधी जयंती पर, से शुरुआत करते हुए भारत ने वैभव शिखर सम्मेलन आयोजित किया।

लगभग एक महीने तक चले इस सम्मेलन ने विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में शीर्ष गुणवत्ता की प्रतिभा को जोड़ने का काम किया। इसमें भाग लेने वालों की संख्या तेईस हजार के आसपास रही। 230 पैनल चर्चा हुईं। लगभग 730 घंटे चर्चा हुईं। यह शिखर सम्मेलन उत्पादक था और इसने विज्ञान और नवाचार क्षेत्र में भविष्य की साझेदारियों की लय को तय कर दिया है।

मित्रों,

भारत अपने काम करने के तरीके में एक आमूल-चूल परिवर्तन का साक्षी बन रहा है। चीजें, जिनके बारे में हम सोचते थे कि कभी हो नहीं सकेंगी, आज बड़ी रफ्तार से उपलब्ध कराई जा रही हैं। मैं एक ऐसे क्षेत्र से छोटा सा उदाहरण देता हूं जिसे आप अच्छी तरह से जानते हैं। पहले, जब आईआईटी एयरो-स्पेस इंजीनियर्स को तैयार करता था, तो उन्हें रोजगार देने के लिए घरेलू स्तर पर एक मजबूत इंडस्ट्रियल इको-सिस्टम नहीं था। आज अंतरिक्ष क्षेत्र में हमारे ऐतिहासिक सुधारों के साथ, मानवता के सामने मौजूद अंतिम मोर्चा भारतीय प्रतिभा के लिए खुला है।

यही वजह है कि भारत में प्रति दिन नए स्पेस टेक स्टार्टअप्स आ रहे हैं। मुझे यकीन है कि आप में से कुछ लोग साहस के साथ उस जगह पर पहुंचेंगे, जहां अब से पहले कोई नहीं पहुंचा है। भारत में कई क्षेत्रों में अत्याधुनिक और नए तरीके के काम हो रहे हैं। हमारी सरकार “रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म” (सुधार, प्रदर्शन, परिवर्तन) के सिद्धांत के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

हमारे सुधारों से कोई क्षेत्र छूटा नहीं है। कृषि, परमाणु ऊर्जा, रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी ढांचा, वित्त, बैंकिंग, टैक्सेशन। यह लिस्ट जारी है। हम श्रम क्षेत्र में व्यापक सुधार लाए हैं, श्रम से जुड़े 44 कानूनों को सिर्फ 4 कोड में शामिल कर दिया गया है। हमारे कॉरपोरेट टैक्स की दर दुनिया में सबसे कम है।

कुछ सप्ताह पहले, भारतीय मंत्रिमंडल ने दस मुख्य क्षेत्रों में व्यापक बदलाव वाली उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है। यह फैसला निर्यात के साथ-साथ विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए लिया गया था। इसमें बैट्री, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, ऑटोमोबाइल, टेलिकॉम, सौर ऊर्जा और अन्य क्षेत्र शामिल हैं। ये सारे क्षेत्र प्रौद्योगिकी से जुड़े हैं। ये अवसर इस्तेमाल होने का इंतजार कर रहे हैं।

कोविड-19 के इस मुश्किल भरे वक्त में, भारत ने रिकॉर्ड निवेश हासिल किया है। इस निवेश का ज्यादातर हिस्सा तकनीकी क्षेत्र में आया है। स्पष्ट है, विश्व, भारत को एक भरोसेमंद और उम्मीद से भरे साथी के रूप में देखता है।

मित्रों,

पैन आईआईटी आंदोलन की सामूहिक शक्ति आत्मनिर्भर भारत या सेल्फ रिलायंट इंडिया बनने के हमारे सपने को रफ्तार दे सकता है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में कुछ अहम मोड़ों पर, दुनिया भर में फैले भारतीय प्रवासियों ने एक उभरते हुए भारत में अपना भरोसा जताया। वे नए भारत के एंबेस्डर बन गए। और, उनकी आवाज यह सुनिश्चित करने में बेहद महत्वपूर्ण थी कि दुनिया सही अर्थों में भारत के दृष्टिकोण को समझे।

मित्रों,

दो साल बाद, 2022 में भारत आजादी के 75 साल पूरे कर लेगा। मैं पैन आईआईटी आंदोलन से “गिविंग बैक टू इंडिया” (भारत को वापस लौटाने) पर एक उच्च मानदंड स्थापित करने का आग्रह करता हूं। अपने शिक्षण संस्थान के लिए आपके प्रयास जगजाहिर हैं और प्रेरणा देने वाला हैं। मुझे मालूम है कि आप में से कई लोग अपने जूनियर्स को- शिक्षा दो या उद्योग, करियर का सही रास्ता चुनने में सलाह देते हैं। आज, उनमें से कई लोग खुद के उपक्रम शुरू करना चाहते हैं। वे तेज दिमाग और आत्मविश्वास से भरे युवा हैं, जो अपनी कड़ी मेहनत और नवाचार से एक छाप छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

अब, मैं आपको उनकी इन कोशिशों में सलाह देने के लिए आमंत्रित करता हूं। मैं आपसे अपने विचारों और सुझावों को साझा करने का भी आग्रह करता हूं कि हम अपनी आजादी की 75वें वर्ष को कैसे अंकित कर सकते हैं। आप अपने विचारों को माय गॉव से साझा कर सकते हैं या आप इसे नरेन्द्र मोदी ऐप पर सीधे मेरे साथ साझा कर सकते हैं।

मित्रों,

आज के हमारे कार्य हमारी कल की दुनिया को आकार देंगे। कोविड-19 के बाद की व्यवस्था लगभग सभी क्षेत्रों में रि-लर्निंग (नए सिरे से सीखने), रि-थिंकिंग (नए सिरे से सोचने), रि-इनोवेटिंग (नए सिरे से नवाचार करने) और रि-इंवेंटिंग (नए सिरे से खोज करने) की होगी। आर्थिक सुधारों की एक सीरीज के साथ, यह हमारी दुनिया को दोबारा ऊर्जावान बनाएगी। यह ‘जीवन जीने में सरलता’ को सुनिश्चित करेगी और गरीबों के साथ-साथ कमजोर तबकों पर भी सकारात्मक असर डालेगी।

हमने यह भी देखा है कि कैसे उद्योग और शिक्षा के बीच साझेदारी की वजह से महामारी के दौरान बहुत से नवाचार सामने आए। आज दुनिया को नए हालात में ढलने के लिए व्यावहारिक समाधानों की जरूरत है, और, इस पर बात करने के लिए आप लोगों से बेहतर दूसरा कौन होगा? आज बड़ी संख्या में आईआईटी के पूर्व छात्र वैश्विक नेतृत्व से जुड़े पदों पर मौजूद हैं। आपका मजबूत नेटवर्क उद्योग, शिक्षा, कला और सरकारों तक फैला हुआ है। आप व्यावहारिक रूप से इंसानी गतिविधि और उत्कृष्टता के सभी क्षेत्रों में मौजूद हैं। मैं खुद रोजाना नहीं तो हर हफ्ते आप लोगों के समूह के एक-दो लोगों से बातचीत करता रहता हूं। मैं आप लोगों से न्यू वर्ल्ड टेक ऑर्डर में समाधान उपलब्ध कराने पर बहस, चर्चा और सहयोग करने का आग्रह करता हूं। यह जिम्मेदारी भारी है, लेकिन मैं जानता हूं कि आपके कंधे सक्षम हैं।

इसके साथ, मैं आपको इस वर्ष के सम्मेलन के लिए अपनी शुभकामनाएं देता हूं, जिसकी थीम सही है- “भविष्य अब है”। निश्चित तौर पर यही है।

शुभकामनाएं।

और आपको धन्यवाद।

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January 29, 2026
राष्ट्रपति का संबोधन 140 करोड़ भारतीयों के आत्मविश्वास और आकांक्षाओं को दर्शाता है: प्रधानमंत्री
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता युवाओं, किसानों और निर्माताओं के लिए व्यापक अवसर खोलता है : प्रधानमंत्री
हमारी सरकार सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन में विश्वास करती है; देश तेजी से सुधार के मार्ग पर कदम बढ़ा रहा है : प्रधानमंत्री
भारत का लोकतंत्र और जनसांख्यिकी विश्व के लिए आशा की किरण है: प्रधानमंत्री
यह समाधानों, सशक्त निर्णय और सुधारों में तेजी लाने का समय है : प्रधानमंत्री

नमस्कार साथियों!

कल राष्ट्रपति जी का उद्बोधन 140 करोड़ देशवासियों के आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति था, 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ का लेखा-जोखा था और 140 करोड़ देशवासी और उसमें भी ज्यादातर युवा, उनके एस्पिरेशन को रेखांकित करने का बहुत ही सटीक उद्बोधन, सभी सांसदों के लिए कई मार्गदर्शक बातें भी, कल आदरणीय राष्ट्रपति जी ने सदन में सबके सामने रखी हैं। सत्र के प्रारंभ में ही और 2026 के प्रारंभ में ही, आदरणीय राष्ट्रपति जी ने सांसदों से जो अपेक्षाएं व्यक्त की हैं, उन्होंने बहुत ही सरल शब्दों में राष्ट्र के मुखिया के रूप में जो भावनाएं व्यक्त की हैं, मुझे पूरा विश्वास है कि सभी माननीय सांसदों ने उसको गंभीरता से लिया ही होगा और यह सत्र अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण सत्र होता है। यह बजट सत्र है, 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है, यह दूसरी चौथाई का प्रारंभ हो रहा है, और 2047 विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह महत्वपूर्ण 25 वर्ष का दौर आरंभ हो रहा है और यह दूसरे क्वार्टर का, इस शताब्दी के दूसरे क्वार्टर का यह पहला बजट आ रहा है और वित्त मंत्री निर्मला जी, देश की पहली वित्त मंत्री ऐसी हैं, महिला वित्त मंत्री ऐसी हैं, जो लगातार 9वीं बार देश के संसद में बजट प्रस्तुत करने जा रही है। यह अपने आप में एक गौरव पल के रूप में भारत के संसदीय इतिहास में रजिस्टर हो रहा है।

साथियों,

इस वर्ष का प्रारंभ बहुत ही पॉजिटिव नोट के साथ शुरू हुआ है। आत्मविश्वास से भरा हिंदुस्तान आज विश्व के लिए आशा की किरण भी बना है, आकर्षण का केंद्र भी बना है। इस क्वार्टर के प्रारंभ में ही भारत और यूरोपीय यूनियन का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आने वाली दिशाएं कितनी उज्ज्वल हैं, भारत के युवाओं का भविष्य कितना उज्ज्वल है, उसकी एक झलक है। यह फ्री ट्रेड फॉर एंबिशियस भारत है, यह फ्री ट्रेड फॉर एस्पिरेशनल यूथ है, यह फ्री ट्रेड फॉर आत्मनिर्भर भारत है और मुझे पक्का विश्वास है, खास करके जो भारत के मैन्युफैक्चरर्स हैं, वे इस अवसर को अपनी क्षमताएं बढ़ाने के लिए करेंगे। और मैं सभी प्रकार के उत्पादकों से यही कहूंगा कि जब भारत यूरोपियन यूनियन के बीच मदर ऑफ ऑल डील्स जिसको कहते हैं, वैसा समझौता हुआ है तब, मेरे देश के उद्योगकार, मेरे देश के मैन्युफैक्चरर्स, अब तो बहुत बड़ा बाजार खुल गया, अब बहुत सस्ते में हमारा माल पहुंच जाएगा, इतने भाव से वो बैठे ना रहे, यह एक अवसर है, और इस अवसर का सबसे पहले मंत्र यह होता है, कि हम क्वालिटी पर बल दें, हम अब जब बाजार खुल गया है तो उत्तम से उत्तम क्वालिटी लेकर के बाजार में जाएं और अगर उत्तम से उत्तम क्वालिटी लेकर के जाते हैं, तो हम यूरोपियन यूनियन के 27 देशों के खरीदारों से पैसे ही कमाते हैं इतना ही नहीं, क्वालिटी के कारण से उनका दिल जीत लेते हैं, और वो लंबे अरसे तक प्रभाव रहता है उसका, दशकों तक उसका प्रभाव रहता है। कंपनियों का ब्रांड देश के ब्रांड के साथ नए गौरव को प्रस्थापित कर देता है और इसलिए 27 देशों के साथ हुआ यह समझौता, हमारे देश के मछुआरे, हमारे देश के किसान, हमारे देश के युवा, सर्विस सेक्टर में जो लोग विश्व में अलग-अलग जगह पर जाने के उत्सुक हैं, उनके लिए बहुत बड़े अवसर लेकर के आ रहा है। और मुझे पक्का विश्वास है, एक प्रकार से कॉन्फिडेंस कॉम्पिटेटिव और प्रोडक्टिव भारत की दिशा में यह बहुत बड़ा कदम है।

साथियों,

देश का ध्यान बजट की तरफ होना बहुत स्वाभाविक है, लेकिन इस सरकार की यह पहचान रही है- रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म। और अब तो हम रिफॉर्म एक्सप्रेस पर चल पड़े हैं, बहुत तेजी से चल पड़े हैं और मैं संसद के भी सभी साथियों का आभार व्यक्त करता हूं, इस रिफॉर्म एक्सप्रेसवे को गति देने में वे भी अपनी सकारात्मक शक्ति को लगा रहे हैं और उसके कारण रिफॉर्म एक्सप्रेस को भी लगातार गति मिल रही है। देश लॉन्ग टर्म पेंडिंग प्रॉब्लम अब उससे निकल करके, लॉन्ग टर्म सॉल्यूशन के मार्ग पर मजबूती के साथ कदम रख रहा है। और जब लॉन्ग टर्म सॉल्यूशंस होते हैं, तब predictivity होती है, जो विश्व में एक भरोसा पैदा करती है! हमारे हर निर्णय में राष्ट्र की प्रगति यह हमारा लक्ष्य है, लेकिन हमारे सारे निर्णय ह्यूमन सेंट्रिक हैं। हमारी भूमिका, हमारी योजनाएं, ह्यूमन सेंट्रिक है। हम टेक्नोलॉजी के साथ स्पर्धा भी करेंगे, हम टेक्नोलॉजी को आत्मसात भी करेंगे, हम टेक्नोलॉजी के सामर्थ्य को स्वीकार भी करेंगे, लेकिन उसके साथ-साथ हम मानव केंद्रीय व्यवस्था को जरा भी कम नहीं आकेंगे, हम संवेदनशीलताओं की महत्वता को समझते हुए टेक्नोलॉजी की जुगलबंदी के साथ आगे बढ़ने के व्यू के साथ आगे सोचेंगे। जो हमारे टिकाकार रहते हैं साथी, हमारे प्रति पसंद ना पसंद का रवैया रहता है और लोकतंत्र में बहुत स्वाभाविक है, लेकिन एक बात हर कोई कहता है, कि इस सरकार ने लास्ट माइल डिलीवरी पर बल दिया है। योजनाओं को फाइलों तक नहीं, उसे लाइफ तक पहुंचाने का प्रयास रहता है। और यही हमारी जो परंपरा है, उसको हम आने वाले दिनों में रिफॉर्म एक्सप्रेस में नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म के साथ आगे बढ़ाने वाले हैं। भारत की डेमोक्रेसी और भारत की डेमोग्राफी, आज दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद है, तब इस लोकतंत्र के मंदिर में हम विश्व समुदाय को भी कोई संदेश दें, हमारे सामर्थ्य का, हमारे लोकतंत्र के प्रति समर्पण का, लोकतंत्र की प्रक्रियाओं के द्वारा हुए निर्णय का सम्मान करने का यह अवसर है, और विश्व इसका जरूर स्वागत भी करता है, स्वीकार भी करता है। आज जिस प्रकार से देश आगे बढ़ रहा है आज समय व्यवधान का नहीं है, आज समय समाधान का है। आज प्राथमिकता व्यवधान नहीं है, आज प्राथमिकता समाधान है। आज भूमिका व्यवधान के माध्यम से रोते बैठने का नहीं है, आज हिम्मत के साथ समाधानकारी निर्णयों का कालखंड है। मैं सभी माननीय सांसदों से आग्रह करूंगा कि वे आएं, राष्ट्र के लिए आवश्यक समाधानों के दौर को हम गति दें, निर्णयों को हम शक्ति दें और लास्ट माइल डिलीवरी में हम सफलतापूर्वक आगे बढ़ें, साथियों आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद, बहुत-बहुत शुभकामनाएं।