भाजपा राजस्थान को एक विकसित, भ्रष्टाचार मुक्त और महिला सशक्तिकरण वाला राज्य बनाना चाहती है।
देश की असाधारण प्रगति नागरिकों द्वारा भाजपा के लिए और भारत के विकास के लिए दिए गए 'वोट' के कारण है।
तुष्टिकरण, आतंक राज को प्रोत्साहन और महिलाओं के भरोसे को छल कर उनके विरुद्ध हिंसा को बढ़ावा देना राजस्थान कांग्रेस की बुनियाद है।
दलितों के प्रति कांग्रेस की नफरत जगजाहिर है। भारत के मुख्य सूचना आयुक्त हीरालाल सामरिया और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के प्रति उसका रवैया उसी नफरत का प्रकटीकरण है।
भ्रष्टाचार के लेखा-जोखा वाली 'लाल डायरी', बड़े पैमाने पर महंगाई और माफिया राज को बढ़ावा देने वाली नीतियां राजस्थान में कांग्रेस सरकार की पहचान हैं।

भारत माता की...

भारत माता की...

भारत माता की...

राधा रानी की... राधा रानी की... राधा रानी की... बंसी वाले की... बंसी वाले की...बंसी वाले की.. भगवान देवनारायण की... भगवान देवनारायण की... मीन भगवान की... मीन भगवान की... ब्रज भूमि के आप सभी निवासियों को मैं आदरपूर्वक प्रणाम करता हूं। कुशल प्रशासक परम प्रतापी महाराजा सूरजमल को भी श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं। अब से ठीक एक हफ्ते बाद राजस्थान में मतदान होने वाला है। हर तऱप एक ही गूंज है जन-जन की यही पुकार... जन-जन की यही पुकार... जन-जन की यही पुकार... जन-जन की यही पुकार... आ रही है भाजपा सरकार। कुछ लोग यहां खुद को जादूगर कहते हैं। अब उन्हें आज राजस्थान की जनता कह रही है तीन दिसंबर... तीन दिसंबर... कांग्रेस छू-मंतर।

साथियों,
मैं आज सबसे पहले राजस्थान भारतीय जनता पार्टी को, यहां के सभी नेताओं को बहुत-बहुत बधाई दूंगा,क्योंकि राजस्थान भाजपा ने एक शानदार संकल्प पत्र जारी किया है। भाजपा का संकल्प है राजस्थान को देश का अग्रणीय राज्य बनाएंगे। भाजपा का संकल्प है राजस्थान में भ्रष्टाचार पर करारा प्रहार करेंगे। भाजपा का संकल्प है बहनों-बेटियों के लिए सुरक्षित माहौल बनाएंगे। राजस्थान बीजेपी ने जो वायदे किए हैं इन्हें पूरा करने के लिए हम जी जान लगा देंगे। और आप से किए ये वायदे जरूर पूरे होंगे क्योंकि ये मोदी की भी गारंटी है।

मेरे परिवारजनों,
आज पूरी दुनिया भारत का लोहा मान रही है। मान रही है कि नहीं मान रही है? भारत का लोहा मान रही है कि नहीं मान रही है? हम दुनिया की पांचवें नंबर की आर्थिक ताकत बन चुके हैं और बहुत ही जल्द भारत तीसरे नंबर की आर्थिक ताकत के रूप में अपनेआप को प्रतिस्थापित करेगा। भारत का चंद्रयान वहां पहुंचा है जहां दुनिया का कोई देश पहुंच नहीं पाया है। भारत में ऐतिहासिक जी-20 सम्मेलन हुआ जहां पूरी दुनिया के लिए बहुत ब़ड़े-बड़े फैसले हुए। आपको लगता है आज दुनिया में हिंदुस्तान का नाम बढ़ रहा है? आपको लगता है? लगता है तो बताइए... लगता है? सचमुच में लगता है? दुनिया में हिंदुस्तान का डंका बज रहा है। अमेरिका में भी बज रहा है। यूके में भी बज रहा है। आस्ट्रेलिया में भी बज रहा है। यूरोप में भी बज रहा है। एशिया में भी बज रहा है। आपको गर्व हो रहा है? खुशी हो रही है? संतोष हो रहा है? ये सब किसके कारण हो रहा है...? किसके कारण हो रहा है...? किसके कारण हो रहा है...? आपका जवाब पूरी तरह गलत। जी नहीं ये मोदी के कारण नहीं, बल्कि ये कमाल आपका एक वोट कर रहा है, ये आप के कारण हो रहा है। क्योंकि, आपने एक वोट देकर दिल्ली में स्थिर और मजबूत सरकार बनाई, इसलिए आज भारत हर मैदान में जीत रहा है।


मेरे परिवारजनों,
एक तरफ तो भारत दुनिया में अग्रणी बन रहा है, दूसरी तरफ राजस्थान में बीते पांच वर्ष में क्या हुआ? क्या हुआ? पांच साल में क्या हुआ? पांच साल में जो बर्बादी हुई उसके लिए जिम्मेवार कौन है? राजस्थान को पीछा धकेलने के लिए जिम्मेवार कौन है? राजस्थान के नौजवानों का भविष्य बर्बाद करने वाला कौन है? यहां कांग्रेस ने राजस्थान को भ्रष्टाचार, दंगों और अपराधों में अग्रणी बना दिया। और इसलिए राजस्थान कह रहा है.. जादूगर जी कौनी मिले वोट जी...

मेरे परिवारजनों,
अपने यहां ब्रज क्षेत्र की बड़ी मशहूर कहावत है- जा पत्तल में खानौ वा में छेद करनौ। कांग्रेस ने यहां आपके साथ ऐसा ही किया है। यहां कांग्रेस सरकार की जिम्मेदारी थी कि वो हर नागरिक के जान-माल की सुरक्षा करे। लेकिन हुआ क्या? बीते 5 वर्षों में बहनों-बेटियों पर, दलितों पर वंचितों पर सबसे ज्यादा अपराध हुआ, सबसे ज्यादा जुल्म हुआ। होली हो, रामनवमी हो, हनुमान जयंति हो, कोई भी त्योहार आप लोग शांति से नहीं मना पाए। दंगे-पत्थरबाज़ी, कर्फ्यू, राजस्थान में यही सब चलता रहा। कांग्रेस जहां-जहां आती है, वहां-वहां आतंकवादी, अपराधी और दंगाई, बेलगाम हो जाते हैं। कांग्रेस के लिए तुष्टिकरण ही सब कुछ है। कांग्रेस तुष्टिकरण के लिए किसी भी हद तक जा सकती है, चाहे इसमें आपका जीवन तक दांव पर क्यों न लगाना पड़े। कांग्रेस ने राजस्थान की महिलाओं के विश्वास को भी चकनाचूर कर दिया है। जो मुख्यमंत्री खुद कहे कि महिलाएं रेप के फर्जी मामले दर्ज करवाती हैं, क्या वो महिलाओं की सुरक्षा कर सकता है? क्या कोई मां, बहन, बेटी ऐसी बात खुद कह सकती है कि मेरे साथ... और ये क्या हो गया है कांग्रेस के लोगों को। क्या ऐसे मुख्यमंत्री को, ऐसे जादूगर को एक मिनट भी कुर्सी पर रहने का हक है क्या? एक मिनट भी रहने का हक है क्या? अब उनकी विदाई करोगे कि नहीं करोगे आपलोग? पक्का करोगे? 25 तारीख आपके हाथ में है।

भाइयों और बहनों,
महिलाओं को लेकर कांग्रेस की सोच कितनी गिरी हुई है, ये कांग्रेस के एक मंत्री के बयान से भी पता चलता है। महिला अत्याचार पर उस मंत्री ने कहा कि ये इसलिए हो रहा है क्योंकि राजस्थान मर्दों का प्रदेश है। (...inaudible...). क्या भाषा बोलते हो आप, क्या राजस्थान के मर्द जिस मिट्टी के लिए मौत को आलिंगन करने वाले शौर्य से भरपूर यहां के मर्द हैं। यहां के मर्द बहन-बेटी की इज्जत की जिंदगी के लिए खुद की जिंदगी दांव पर लगा देते हैं। बेटियों की इज्जत के लिए मरने-मिटने में जो मर्द है वो पीछे नहीं रहता। लेकिन उस राजस्थान में कांग्रेस के जादूगर के प्रिय मंत्री ये कहें कि ये मर्दों का प्रदेश है इसलिए बहनों पर जुल्म होता रहता है। कांग्रेस को शर्म आनी चाहिए कि नहीं आनी चाहिए? इस राजस्थान के मर्दों से माफी मांगनी चाहिए कि नहीं मांगनी चाहिए? यहां की माताओं और बहनों से माफी मांगनी चाहिए कि नहीं मांगनी चाहिए। क्या राजस्थान की कोई भी मां-बहन-बेटी, इस बयान को स्वीकार कर सकती है? ये बयान राजस्थान की हर माता-बहन के सीने में भाले की तरह चुभ रहा है। और कांग्रेस ने इस मंत्री को सजा देने के बजाय ईनाम दे दिया है। टिकट, दिल्ली वाले भी इससे सहमत हो गए और इसलिए दिल्ली में बैठे लोग वे भी इस बात से सहमत हो गए, इस पाप से सहमत हो गए और इसलिए उसे टिकट दे दिया। सवाल ये उठता है कि जादूगर के इस प्रिय मंत्री के पास वो कौन सी दूसरी लाल डायरी है कि दिल्ली को भी झुकना पड़ा और ऐसे व्यक्ति को टिकट देना पड़ा। दिल्ली में बैठे कांग्रेस के हर नेता को इस मंत्री की सच्चाई का पता है...लेकिन फिर भी इस मंत्री के पास कोई ऐसी जानकारी है, दिल्ली में बैठे हुए लोगों की भी कोई जानकारी है, सब उससे कांपते हैं, टिकट दे दिया है। मैं आपको वादा करता हूं यहां भाजपा की सरकार बनने के बाद उस राज को भी खोलने की कोशिश की जाएगी। मेरे साथियों, राजस्थान से कांग्रेस को सदा सर्वदा के लिए हटाने की जरूरत है। और हटाने का मतलब, सिर्फ आपकी विधानसभा में उसकी पराजय हो जाए इतना ही नहीं है। जैसे दिवाली के त्योहारों में, वैसे तो हमारी माताएं-बहनें घऱ में सफाई रोजाना करती हैं, लेकिन दिवाली के समय कोने-कोने से, छोटी-छोटी जगह से इतनी सफाई करती है कि घर को चमका देती है। जैसे दिवाली के त्योहार में माताए-बहनें हर कोने की सफाई करती है ना, ये चुनाव भी वो दिवाली है आपको ऐसी सफाई करनी है ऐसी सफाई करनी है कि किसी कोने में भी कांग्रेस बचनी नहीं चाहिए। करोगे? पक्का करोगे? तब तो देवदिवाली ऐसी मनेगी ऐसी मनेगी।

साथियों,
कांग्रेस के शासन में दलितों के खिलाफ भी अत्याचार के नए रिकॉर्ड बन रहे हैं। कांग्रेस स्वभाव से ही दलित विरोधी है। मैं एक सबसे ताजा उदाहरण आपको देता हूं। अभी हाल में ही, देश को पहला दलित मुख्य सूचना आयुक्त मिला है। चीफ इनफॉरमेशन कमिश्नर, उनका नाम है हीरालाल सामरिया जी, ये दलित मां का बेटा हीरालाल ये आपके ही इसी डीग गांव के रहने वाले हैं, ये डीग थोड़े समय पहले तक ये हमारे भरतपुर जिले का हिस्सा हुआ करता था। लेकिन दुर्भाग्य ये है कि कांग्रेस को एक प्रतिभाशाली दलित अधिकारी की नियुक्ति भी पसंद नहीं आई। इसलिए जो मीटिंग रखी गई थी, उसका भी कांग्रेस ने बॉयकॉट किया था। कांग्रेस, एक दलित अफसर को ऊंचे पद पर पहुंचते हुए देख ही नहीं सकती। ये वही कांग्रेस है जिसने रामनाथ कोविंद जी का विरोध किया था। ये वही कांग्रेस है जिसने बाबा साहेब आंबेडकर को हमेशा अपमानित किया। कांग्रेस ने दो-दो बार बाबा साहेब को चुनाव में हराया, उन्हें राजनीति से दूर करने की कोशिश की। जबकि ये भाजपा है जो बाबा साहेब से जुड़े पुण्य स्थलों को पंच तीर्थ के तौर पर विकसित कर रही है। बाबा साहेब के बाद, देश को दूसरा दलित कानून मंत्री भी भाजपा ने ही बनाया है। हमारे राजस्थान के ही अर्जुन राम मेघवाल जी आज देश के बड़े-बड़े कानूनों को बनाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

मेरे परिवारजनों,
आपका सपना ही मोदी का संकल्प है। और मोदी के लिए तो आप ही उसका परिवार हैं, जो कुछ है वो सब आप ही हैं मेरे लिए। मेरा संकल्प है कि हर गरीब, दलित, पिछड़े, हर परिवार तक जीवन की मूल सुविधाएं पहुंचे। कोई भी ज़रूरतमंद सरकार की योजना से वंचित न रहे, इसलिए देश में अब भारत सरकार आपके गांव आ रही है। 15 नवंबर से देश में विकसित भारत संकल्प यात्रा शुरू हुई है। भरतपुर के गांव-गांव से भी चुनाव के बाद ये यात्रा गुज़रेगी। पीएम आवास हो, गैस कनेक्शन हो, नल से पानी की व्यवस्था हो, मुफ्त इलाज का प्रबंध हो, बीमा हो, पेंशन का प्रबंध हो, ऐसी अनेक योजनाओं का लाभ जिन्हे अब तक पहंचा नहीं है। उनके लिए सुविधाएं पाने का ये नया अवसर सरकार आपके घर आंगन आकर के देने के लिए ये योजना मोदी लेकर आया है।

साथियों,
ये इतिहास गवाह है, हर पल गवाब है, हर इलाका गवाह है... मोदी जो भी गारंटी देता है, वो हर लाभार्थी तक पहुंचती है। शत-प्रतिशत लाभार्थी तक पहुंचती है। मोदी ने आपके राशन कार्ड को, भूख से मुक्ति का गारंटी कार्ड भी बना दिया है। किसी भी गरीब परिवार को रोटी की चिंता नहीं करनी पड़ेगी, क्योंकि आपका ये बेटा, आपका ये भाई, दिल्ली में आपका सेवक बनकर बैठा है। मोदी ने तय किया है कि मुफ्त राशन की योजना, आप सबको याद होगा, जब कोविड की बीमारी ने पूरी दुनिया को अपने चपेट में लिया था। मौत मंडरा रही थी अस्पतालों में मरीज से मृतक नजर आते थे। परिवार भी चिंता में दबे हुए थे। अगर मां बीमार है तो बेटे को कहती थी बेटा मेरे कमरे में मत आना जो होगा सो होगा। बेटा बीमार होता था तो मां को कहता था कि मां मैं सहन कर लूंगा तुम कमरे में मत आना कहीं तुम्हें ये बीमारी न लग जाए। हर परिवार में मौत दरबाजे पर दस्तक दे रहा था। वैसी हालत हो गई थी, कौन बचेगा कौन चला जाएगा, भय का वातावरण पसरा था। दुनिया ठप पड़ी थी, व्यापार और रोजगार पर मुसीबतें आई थी, और तब ये मोदी गरीब मां के बेटे के रूप में जब आपकी सेवाओं में बैठा है तब उसने सोचा कुछ भी हो जाए गरीब का चूल्हा बूझने नहीं दूंगा...मेरे देश का कोई बच्चा भूखा ना सो जाए, मेरी कोई मां बच्चों की भूख देखकर के आंसू पीकर रह न जाए, इसलिए हमने निर्णय किया था। अन्न के भंडार खोल दिए थे मुफ्त राशन दिया था, हर परिवार को मुफ्त राशन देना शुरू किया। आज भी 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन मिल रहा है। ये योजना दिसंबर महीने में पूरी हो रही है, लेकिन मोदी ने संकल्प कर लिया है, निश्चय कर लिया है कि ये मुफ्त राशन वाली योजना अगले पांच साल तक चालू रहेगी। अब किसी परिवार को भोजन की थाली की चिंता नहीं रहेगी। इतना बड़ा पवित्र काम करने का निर्णय किया है। मुझे जरा बताइये भइया... राजस्थान के लोग तो वीरता से भरे हुए लोग है जब ऐसा काम करते हैं तो पुण्य मिलता है कि नहीं मिलता है? ऐसे नहीं जरा जोर से बताइए, माताएं-बहनें बताइए पुण्य मिलता है कि नहीं मिलता है? पुण्य मिलता है कि नहीं मिलता है? अब पांच साल के लिए गरीब के घर में चूल्हा जलता रहेगा, बच्चों को रोटी मिलेगी क्या पुण्य मिलेगा कि नहीं मिलेगा? मिलेगा कि नहीं मिलेगा? ये किसको मिलेगा? ये पुण्य किसको मिलेगा? ये पुण्य किसको मिलेगा? ये पुण्य आपको मिलेगा। ये पुण्य के हकदार आप हैं क्योंकि आपने वोट देकर के मोदी से ये पवित्र काम करवाया है। और इसलिए इस पुण्य के अधिकारी आप हैं। लेकिन ये कांग्रेस पार्टी को देखिए, कमाल की पार्टी है, गरीब को मुफ्त राशन से कांग्रेस तिलमिलाई हुई है, गुस्से में है। और इसलिए कांग्रेस इलेक्शन कमीशन को जा कर के मेरे खिलाफ इतनी बड़ी चिट्ठी देकर के आए गई है। अदालत में जाने की धमकियां दे रही है। अरे अगर गरीब को रोटी खिलाने में जेल भी जाना पड़े तो क्या गम है चले जाएंगे।

साथियों,
राजस्थान में बनने वाली भाजपा सरकार, किसानों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी। जहां-जहां भाजपा सरकार है, वहां के किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि के 12 हज़ार रुपए मिल रहे हैं। 6 हज़ार केंद्र के और 6 हज़ार राज्य के। राजस्थान भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में आप को ये भी वादा किया है कि जैसे ही यहां भाजपा सरकार बनेगी...राजस्थान के किसानों को भी पीएम किसान सम्मान निधि के 12 हजार रुपए मिलना शुरू हो जाएंगे। राजस्थान में भाजपा सरकार बनने के बाद आपके पशुधन के टीकाकरण के अभियान को भी तेज किया जाएगा। आपको याद होगा कोविड के समय टीकाकरण अभियान चलाया, दो सौ करोड़ से ज्यादा डोज लगाए, दुनिया आंकड़ा सुनकर हैरान हो जाती है.. दो सौ करोड़ डोज.. मुफ्त में आपका टीकाकरण हुआ था कि नहीं हुआ था? हर किसी को मुफ्त में टीकाकरण हुआ कि नहीं हुआ? आपकी जिंदगी से बढ़कर मेरे लिए कुछ भी नहीं है, और इसलिए ये काम भी कर दिया। अब वैसे ही पशु को मुफ्त टीकाकरण का अभियान चल रहा है जैसे ही बीजेपी की सरकार यहां पर बनेगी राजस्थान में भी ये लागू हो जाएगा।

मेरे परिवारजनों,
कांग्रेस ने राजस्थान को आकंठ भ्रष्टाचार में डुबोने का काम किया है। आपने देखा है कि जयपुर में कैसे लॉकर से काली कमाई और लूट का सोना निकल रहा है। सोना निकल रहा है मालूम है न आपको.. आमतौर किसी को कहते हैं कि भाई एक्जाम कैसी गई, बोलता है मेहनत तो की थी बाकी तो लक पर है। चुनाव में किसी कैंडिडेट को आप पूछोगे तो कहेगा, मेहनत तो अच्छी की है, लोगों का प्यार भी है लेकिन आखिर लक पर है। लेकिन राजस्थान में कांग्रेस के लोगों से पूछोगे तो कहेगा बाकी कुछ भी हो लेकिन लॉकर न खुल जाए। बाकियों को लक दिखता है इनको लॉकर दिखता है, इनकी नींद हराम हो गई है कि मोदी लॉकर खोल रहा है। और लॉकर में से सोना निकल रहा है सोना और कोई ये गलती मत करना कि ये आलू से बना हुआ सोना है। ये आप से लूटा हुआ, चोरी किया हुआ माल से निकला हुआ असली सोना है। ये काला धन, ये सोने के भंडार, जो लॉकर से निकल रहे हैं, ये राजस्थान के नौजवानों को धोखा देकर लूटे गए हैं। ये पेपरलीक घोटाले का पैसा है। ये पानी से जुड़ी योजनाओं में हुए घोटालों का पैसा है। ये बच्चों के मिड डे मील से लूटा हुआ पैसा है। ये ट्रांसफर-पोस्टिंग से कमाया हुआ पैसा है। कांग्रेस ने राजस्थान को जितना लूटा है, उसकी गवाही आज यहां का हर कारोबारी दे रहा है। अब तो कांग्रेस के काले कारनामों की लाल डायरी के पन्ने खुलने लगे हैं। लाल डायरी के 4 पन्ने, 40 पन्नों से कम नहीं हैं। कुछ लोग कहते हैं, लाल डायरी में एक बेटे का कबूलनामा भी है। बेटा खुद कह रहा है कि पापा की सरकार रिपीट नहीं होगी। लाल डायरी के जो पन्ने बाहर आए हैं, उनमें लिखा है कि जादूगर सरकार ने कैसे राजस्थान को खनन माफिया के हवाले कर दिया है।
यहां भी आदिबद्री और कनकांचल पहाड़ियों में क्या हुआ, ये भरतपुर के लोग अच्छी तरह जानते हैं। आप अवैध खनन का विरोध करते रहे, साधु-संत विरोध करते रहे। लेकिन जो कांग्रेस खुद खनन माफिया हो, वो आपकी आवाज़ भला कैसे सुनती। कांग्रेस के इस माफिया राज के कारण ही, संत बाबा विजय दास जी को हमें खोना पड़ा। लेकिन उनका ये बलिदान बेकार नहीं जाएगा। भरतपुर की, पूर्वी राजस्थान की जनता कांग्रेस के माफिया राज को उखाड़ फेंकेगी।

मेरे परिवारजनों,
कांग्रेस की लूट-नीति की वजह से यहां राजस्थान में महंगाई इतनी अधिक है। यहां दूसरे राज्यों से पेट्रोल भी इसलिए महंगा है क्योंकि यहां लुटेरी कांग्रेस की सरकार है। केंद्र सरकार अपनी तरफ से पेट्रोल के पैसे कम कर रही है, लेकिन यहां की कांग्रेस सरकार दाम घटाने के लिए तैयार नहीं है। मैं राजस्थान से सटे हुए बीजेपी राज्यों में पेट्रोल कितने रुपए प्रति लीटर है, ये आपको बताता हूं। पास में यूपी में एक लीटर पेट्रोल 97 रुपए के आसपास है। आपका उधर परोसी गुजरात में एक लीटर पेट्रोल 97 रुपए के आसपास है। आपके ऊपर की तरफ आपका परोसी हरियाणा में एक लीटर पेट्रोल 97 रुपए के आसपास है। तीनो परोसी 97 रुपये लीटर का पेट्रोल और ये राजस्थान में देखिए कैसी लूट चली है। राजस्थान में कांग्रेस सरकार एक लीटर पेट्रोल का 109 रुपए के आसपास लेता है। यानि हर लीटर पर 12 रुपये आपकी जेब से मारती है कांग्रेस। मैं आज आपको वादा करता हूं कांग्रेस सरकार, आपसे पेट्रोल का पैसा लूटकर, अपने नेताओं की तिजोरी में भर रही है। मेरा वादा है, राजस्थान में बीजेपी सरकार बनते ही कांग्रेस का ये खेल भी खत्म किया जाएगा। और मैं आपको विश्वास दिलाता हूं। भाजपा की सरकार बनते ही पेट्रोल के दामों की तुरंत समीक्षा की जाएगी। और जल्द से जल्द लोकहित में निर्णय भी किया जाएगा। और ये भी मोदी की गारंटी है।

मेरे परिवारजनों,
ये पूरा ब्रज क्षेत्र तो, कान्हा की लीलाओं की भूमि है। पूरे ब्रज क्षेत्र के तेज विकास के लिए मैं राज्य सरकारों के साथ संपर्क में हूं। 23 नवंबर को मैं संत मीराबाई जी की पांच सौ पच्चीसवीं जयंती के कार्यक्रम पर मथुरा भी जा रहा हूं। यूपी में पहले ही भाजपा सरकार है और यहां भी 3 दिसंबर को भाजपा सरकार तय होने के बाद पूरे ब्रज का विकास तेज होगा। भरतपुर जिले को NCR की तर्ज़ पर विकसित करने का रोडमैप, सिर्फ और सिर्फ भाजपा के पास ही है। भाजपा सरकार ने ही भरतपुर में मेडिकल कॉलेज बनाया। यहां चौड़ी सड़कों और आधुनिक रेल कनेक्टिविटी की गारंटी भी भाजपा ही पूरी कर रही है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से ये पूरा क्षेत्र, देश के औद्योगिक नक्शे पर अग्रणी बनने वाला है। पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना का खाका भी भाजपा ने खींचा था, और इसे तेज़ी से पूरा भी भाजपा ही करेगी।

मेरे परिवारजनों,
आपने कांग्रेस की करारी हार सुनिश्चित कर दी है। लेकिन ये सीज़न, शादी-ब्याह का भी है। तीज-त्योहार का भी है। इसलिए, ध्यान रखना कि मतदान सबसे पहले करना है। अच्छा, मैं एक बात आपसे बुलबाऊंगा, आप बोलेंगे? बोलेंगे? अच्छा अपना मोबाइल निकालकर के उसका फ्लैश लाइट चालू करेंगे? सब अपने मोबाइल फोन निकाल कर के फ्लैश लाइट चालू कीजिए और मोबाइल फोन ऊपर कीजिए...सबकी फ्लैश लाइट चलनी चाहिए, हर किसी की। अपना मोबाइल फोन से फ्लैश लाइट निकालिए.. और मैं जो बोलूंगा आपको हाथ ऊपर करके बताना है। आपको क्या बोलना है मैं बताता हूं। आपको बोलना है.. कमल चुनेगा राजस्थान.. अरे उत्साही नौजवानों पहले मेरी बात सुनो... कमल चुनेगा राजस्थान... क्या बोलेंगे...? क्या बोलेंगे...? क्या बोलेंगे...? तो मैं बुलवाता हूं...

ब्रज भूमि की बढ़ेगी शान................कमल चुनेगा राजस्थान
महाराजा सूरजमल का शौर्य महान.....कमल चुनेगा राजस्थान
युवा शक्ति का होगा सम्मान............कमल चुनेगा राजस्थान
बहन बेटियों का बढ़ेगा मान...............कमल चुनेगा राजस्थान
भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम................कमल चुनेगा राजस्थान
भरतपुर में बढ़ेगा पर्यटन का काम.......कमल चुनेगा राजस्थान

मेरे साथियों,
इतनी बड़ी सभा हो गई, और मैं ज्यादा समय से राजनीति में संगठन का काम कर रहा हूं। मेरे जीवन के काफी वर्ष संगठन के काम में गए हैं, लेकिन, अरे पहले सुनिए नौजवानों, अभी जरा 25 तारीख तक ऊर्जा बनाए रखो, कभी-कभी क्या होता है, चुनाव की सभाएं तो हो जाती है, लेकिन 11 बजे सुबह इतनी बड़ी सभा करना, ये लोहे के चने चबाने का काम होता है। आप सब भी संगठन के यहां कार्यकर्ता हैं मैं जानता हूं, बहुत मुश्किल काम होता है। लेकिन मैं आज यहां के हर कार्यकर्ता को जी भर के बधाई देता हूं कि सुबह 11 बजे इतनी बड़ी सभा कर दी, ये बहुत बड़ा काम किया है आपने। मैं यहां के जनता जनार्दन का भी सर झुकाकर के नमन करता हूं कि इतनी बड़ी तादाद में आकर के आशीर्वाद दे रहे हैं। और मैं देख रहा हूं जितने लोग पंडाल में उससे कहीं ज्यादा बाहर धूप में तप रहे हैं। जो लोग धूप में तप रहे हैं मैं उनसे क्षमा मांगता हूं, क्योंकि हमारी व्यवस्था कम पड़ गई, आपको धूप में तपना पड़ रहा है। लेकिन मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आप जो धूप में तप रहे हैं, आपकी तपस्या बेकार नहीं जाने दूंगा.. विकास कर के लौटाऊंगा। अच्छा अभी मतदान का एक हफ्ता बाकी है तो कहीं ऐसा तो नहीं हो जाएगा ना.. कि यार चारों तरफ वाहवाही है, इतनी बड़ी सभा हो गई, चलो कल तो मैच देखेंगे, फिर परसो सिनेमा देखने जाएंगे...अभी कुछ करने की जरूरत नहीं है। अब थोड़े दिन सो जाएंगे.. ऐसा तो नहीं करोगे ना? कोई आराम नहीं करोगे ना? घर-घऱ जाओगे? बूथ में जाओगे? सफाई का काम करोगे? कमल खिलाओगे? हर बूथ में जिताओगे? भाइयों-बहनों एक और काम करना है करोगे? ये चुनावी काम नहीं है करोगे? देखो ठंडे पड़ गए। ये चुनावी काम नहीं है करोगे? ये मेरा निजी काम है करोगे? पर्सनल काम बताता हूं करोगे? सब करोगे? जो पीछे हैं जरा हाथ ऊपर करें वो भी करेंगे? जो धूप में खड़े हैं वो भी हाथ ऊपर करें आप भी करेंगे? तो मैं बताऊं काम, पक्का करोगे? अच्छा आप एक काम करना, घर-घर जाना, जाकर के नमस्ते करते हुए हर किसी को परिवार में कहना कि अपने मोदी जी भरतपुर आए थे, सबको बताना, अपने मोदीजी, प्रधानमंत्री मत कहना, मैं तो हर परिवार का बेटा हूं, जाकर के कहना अपने मोदी जी भरतपुर आए थे, उन्होंने आपको राम-राम कहा है। इतना कर दोगे? हर घऱ जाकर कह दोगे? जब आप उनको कहोगे ना कि अपने मोदी जी ने आपको राम-राम कहा है, हर परिवार मुझे आशीर्वाद देगा, हर परिवार मुझे आशीर्वाद देगा और हर परिवार जब मुझे आशीर्वाद देता है तो मेरी ऊर्जा कई गुना बढ़ जाती है, मेरा दौड़ने का हौसला बढ़ जाता है, दिन-रात काम करने का मन बना रहता है। ये आशीर्वाद एक बहुत बड़ी ऊर्जा है और इसलिए हर परिवार में जाकर के मेरा राम-राम कहना और वो आशीर्वाद मुझ मिल जाएगा। एक नई शक्ति के साथ आपके लिए जुटा रहूंगा। बोलिए भारत माता की... भारत माता की... भारत माता की...
बहुत-बहुत धन्यवाद

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21वीं सदी के इस दशक में भारत रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार है: ET Now ग्लोबल बिजनेस समिट में पीएम मोदी
February 13, 2026
Amid numerous disruptions, this decade has been one of unprecedented development for India, marked by strong delivery and by efforts that have strengthened our democracy: PM
In this decade of the 21st century, India is riding the Reform Express: PM
We have made the Budget not only outlay-focused but also outcome-centric: PM
Over the past decade, we have regarded technology and innovation as the core drivers of growth: PM
Today, we are entering into trade deals with the world because today's India is confident and ready to compete globally: PM

आप सभी का इस ग्लोबल बिजनेस समिट में, आप सबका मैं अभिनंदन करता हूं। हम यहां A Decade Of Disruption, A Century Of Change, इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं। विनीत जी का भाषण सुनने के बाद मुझे लगता है कि मेरा काम बहुत सरल हो गया है। लेकिन एक छोटी request करूं, इतना सारा आपको पता है, तो कभी ET में तो दिखना चाहिए।

साथियों,

21वीं सदी का बीता दशक अभूतपूर्व डिसरप्शन का रहा है। ग्लोबल Pandemic, ग्लोब के अलग-अलग हिस्सों में तनाव, युद्ध और ग्लोब के संतुलन को हिला देने वाले Supply Chain Breakdowns, दुनिया ने एक दशक के भीतर काफी कुछ देख लिया। लेकिन साथियों, कहते हैं, संकट के समय ही किसी देश के सामर्थ्य पता चलता है और मुझे बहुत गर्व है, अनेक Disruptions के बीच भी भारत के लिए यह दशक, अभूतपूर्व डेवलपमेंट का रहा है, शानदार डिलीवरी का रहा है और डेमोक्रेसी को मजबूत करने वाला रहा है। जब पिछला दशक शुरू हुआ था, तो भारत ग्यारहवें नंबर की अर्थव्यवस्था था। इतनी उथल-पुथल में पूरी आशंका थी कि भारत और नीचे चला जाएगा, लेकिन आज भारत, बहुत तेजी के साथ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने जा रहा है। और आप जिस Century Of Change की बात कर रहे हैं, उसका बहुत बड़ा आधार और यह मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं, इसका बहुत बड़ा आधार भारत ही होने जा रहा है। आज भारत, दुनिया की ग्रोथ में 16 परसेंट से ज्यादा योगदान दे रहा है। और मुझे विश्वास है, इस सेंचुरी के हर आने वाले साल में हमारा योगदान और भी बढ़ता रहेगा, निरंतर बढ़ता रहेगा। मैं वह मदान की तरह astrologer के रूप में नहीं आया हूं। भारत, दुनिया की ग्रोथ को ड्राइव करेगा, दुनिया की ग्रोथ का नया इंजन बनेगा।

साथियों,

दुनिया में सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद एक नई वैश्विक व्यवस्था बनी थी, एक नए वर्ल्ड ऑर्डर ने आकार लिया था। लेकिन सात दशक के बाद, वो व्यवस्था टूट रही है। दुनिया आज एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की तरफ बढ़ रही है। आखिर यह क्यों हो रहा है? ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि तब जो व्यवस्था बनी थी, उसकी नींव One Size Fits All, इसी सोच पर टिकी थी। तब ये माना गया कि World Economy Core में होगी, Supply Chains मजबूत और विश्वसनीय हो जाएगी। इस व्यवस्था में नेशन्स को केवल कंट्रीब्यूटर्स के रूप में ही देखा गया। लेकिन आज, इस मॉडल को चुनौती मिल रही है। यह अपनी प्रासंगिकता खोता जा रहा है। आज हर देश को यह पता चल रहा है कि उसे अपनी रज़ीलियन्स खुद बनानी होगी।

साथियों,

आज दुनिया जिसकी चर्चा कर रही है। उसको भारत ने 2015 में, आज से 10 साल से पहले, 2015 में ही अपनी नीति का हिस्सा बना लिया था। दस साल पहले जब नीति आयोग बना, तो उसके फाउंडिंग डॉक्यूमेंट में ही भारत ने अपना विजन क्लीयर कर दिया था और विजन यह कि भारत किसी दूसरे देश से कोई सिंगल डेवलपमेंट मॉडल इंपोर्ट नहीं करेगा। हम भारत के विकास के लिए भारतीय अप्रोच को लेकर ही चलेंगे। इस नीति ने भारत को अपने हिसाब से, अपनी रिक्वायरमेंट के हिसाब से, अपने हित में फैसले लेने का आत्मविश्वास दिया और यह एक बड़ा कारण है कि डिसरप्शन के दशक में भी भारत की इकोनॉमी कमजोर नहीं पड़ी, निरंतर मजबूत होती गई।

साथियों,

आज 21वीं सदी के इस दशक में भारत Reform Express पर सवार है और इस Reform Express की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हम इसे compulsion में नहीं, बल्कि conviction के साथ, Reform के कमिटमेंट के साथ गति दे रहे हैं। यहां तो बहुत बड़ी-बड़ी संख्या में बड़े-बड़े expert बैठे हैं, अर्थजगत के दिग्गज बैठे हैं। आपने भी 2014 से पहले का दौर देखा है। जब तक हालात मजबूर न कर दें, जब तक कोई संकट न आ जाए, जब कोई और रास्ता न बचे, तब मजबूरन रिफॉर्म्स किए जाते थे। आप याद करिए, 1991 का रिफॉर्म्स भी तब हुआ, जब देश पर दिवालिया होने का खतरा आ गया था। जब देश को सोना गिरवी रखना पड़ा था। पहले की सरकारों का यही तरीका था, वो reforms compulsion में ही किया करती थीं। जब 26/11 का आतंकी हमला हुआ, कांग्रेस सरकार की कलई खुल गई, तो NIA का गठन किया गया। जब पावर सेक्टर बर्बाद हो गया, ग्रिड फेल होने लगे, तब मजबूरी में कांग्रेस को पावर सेक्टर में याद आई।

साथियों,

ऐसी एक लंबी सूची है, जो याद दिलाती है कि जब compulsion में, मजबूरी में reform होता है, तो न सही नतीजे मिलते हैं, न देश को सही परिणाम मिलते हैं।

साथियों,

आज मुझे गर्व है कि बीते 11 वर्षों में हमने पूरे conviction के साथ रिफॉर्म किए हैं और यह रिफॉर्म Policy में हुए हैं, Process में हुए, Delivery में हुए और इतना ही नहीं, Mindset में भी reform हुआ है। क्योंकि साथियों, अगर पॉलिसी बदले, लेकिन प्रोसेस वही रहे, माइंडसेट वही रहे, डिलीवरी ठीक से ना हो, तो रिफॉर्म्स सिर्फ और सिर्फ कागज का टुकड़ा बनकर रह जाता है। इसलिए हमने पूरे सिस्टम को बदलने के लिए ईमानदारी से कोशिश की है।

साथियों,

मैं प्रोसेस की बात करूं, तो एक साधारण लेकिन बहुत जरूरी प्रोसेस है, कैबिनेट नोट्स का। यहां कई लोगों को अंदाजा होगा कि पहले की सरकारों में एक कैबिनेट नोट बनने में ही कुछ महीने लग जाते थे, महीने। अब इस स्पीड से देश का विकास कैसे होता? इसलिए हमने इस process को बदला। हमने डिसीजन मेकिंग को time-bound और technology-driven बनाया। हमने यह तय कर दिया कि इस अफसर की टेबल पर यह कैबिनेट नोट इतने घंटे से ज्यादा रहेगा ही नहीं। या तो रिजेक्ट करो या निर्णय लो और इसका नतीजा आज देश देख रहा है।

साथियों,

मैं आपको रेलवे ओवर ब्रिज के अप्रूवल का भी उदाहरण दूंगा। पहले R.O.B का एक डिजाइन अप्रूव कराने के लिए कई वर्ष लग जाते थे, कई सारी क्लीयरेंस की ज़रूरत थीं, कई जगह चिट्ठियां लिखनी पड़ती थीं और यह मैं प्राइवेट के लिए नहीं कह रहा हूं, सरकार को। हमने इसको भी बदला और आज देखिए कितनी तेजी से रोड और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है। विनीत जी ने बहुत विस्तार से इस बात को बताया।

साथियों,

एक बड़ा Interesting उदाहरण बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर का है। अब बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर देश की security से जुड़ा हुआ होता है। आप कल्पना कर सकते हैं, एक समय था, जब बॉर्डर एरियाज़ में एक साधारण सी सड़क बनाने के लिए भी कुछ परमिशन दिल्ली से लेनी पड़ती थी। जिला स्तर पर निर्णय लेने के यानी इसके सामने एक प्रकार से उसका कोई अधिकारी ही नहीं थे, दीवार ही दीवार थीं, वो निर्णय नहीं कर सकता था और इसलिए तो दशकों बाद भी हमारे देश में बॉर्डर इंफ्रा इतना बेहाल रहा। 2014 के बाद हमने इस प्रोसेस में भी रिफॉर्म किया, हमने स्थानीय प्रशासन को Empower किया और आज हम देश के बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से डेवलप होते देख रहे हैं।

साथियों,

बीते दशक में भारत के जिस Reform ने दुनिया में हलचल मचा दी है, वो है UPI, भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम। यह सिर्फ एक App नहीं है, यह policy, process और delivery के एक शानदार कन्वर्जेंस का प्रमाण है। जो लोग कभी बैंकिंग और फाइनेंस से जुड़े बेनिफिट्स के बारे में सोच भी नहीं सकते थे, UPI देश के ऐसे नागरिकों को सर्व कर रहा है। यह जो डिजिटल इंडिया है, डिजिटल पेमेंट सिस्टम है, जनधन आधार मोबाइल की ट्रिनिटी है, यह रिफॉर्म किसी compulsion से नहीं हुआ, यह हमारा कन्विक्शन था। और कन्विक्शन यह था कि जिन लोगों तक पहले की सरकारें कभी नहीं पहुंची, हमें ऐसे नागरिकों का इंक्लूजन करना है। जिसे कोई नहीं पूछता, उसे मोदी पूजता है। और इसलिए यह रिफॉर्म्स किए गए हैं और आज भी हमारी सरकार इसी सोच के साथ चल रही है।

साथियों,

भारत का यह जो नया मिज़ाज है, वो हमारे बजट में भी रिफ्लेक्ट होता है। पहले जब बजट की चर्चा होती थी, तो फोकस सिर्फ Outlay पर होता था। कितना पैसा आवंटित हुआ, क्या सस्ता हुआ, क्या महंगा हुआ और उस दिन टीवी देखेंगे, तो पूरी टीवी एक ही यानी इनके लिए, बजट मतलब इंकम टैक्‍स ऊपर गया कि नीचे गया, इसके आगे उनको देश दिखता ही नहीं है। और होता क्‍या था, कितनी नई ट्रेनें घोषित हुईं, यही चलता रहता था, उन घोषणाओं का बाद में क्या हुआ, कोई पूछने वाला ही नहीं था। और इसलिए हमने बजट को Outlay के साथ-साथ Outcome सेंट्रिक बनाया।

साथियों,

बजट में एक और बड़ा बदलाव आया है। 2014 से पहले Off-Budget Borrowing पर बहुत अधिक चर्चा होती थी। लेकिन अब Off-Budget Reforms की चर्चा होती है। बजट से बाहर, नेक्स्ट जनरेशन GST रिफॉर्म्स हुए, प्लानिंग कमीशन की जगह नीति आयोग बनाया, आर्टिकल 370 की दीवार गिरा दी, तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाया, नारी शक्ति वंदन अधिनियम बनाया।

साथियों,

बजट में घोषित हों, या बजट से बाहर, रिफॉर्म एक्सप्रेस लगातार गति पकड़ रही है। अगर मैं पिछले एक साल की ही बात करूं तो हमने Ports & Maritime सेक्टर में Reform किया, शिप बिल्डिंग इंडस्ट्री के लिए अनेक Initiative लिए, जन-विश्वास एक्ट के तहत रिफॉर्म्स को और आगे बढ़ाया, Energy Security के लिए Shanti Act बनाया, लेबर कानूनों से जुड़े रिफॉर्म्स को लागू किया, भारतीय न्याय संहिता लेकर आए, वक्फ कानून में Reform किया गया है, गांव में रोजगार के लिए नया G RAM G कानून बनाया, ऐसे अनेक Reforms साल भर होते रहे हैं।

साथियों,

इस साल के बजट ने रिफॉर्म एक्सप्रेस को और आगे बढ़ाया है। वैसे तो बजट के बहुत सारे आयाम हैं, लेकिन मैं दो Important फैक्टर्स की बात करूंगा। Capex और Technology, बीते वर्षों की भांति इस बजट में भी, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च को बढ़ाकर करीब 17 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है। और आप जानते हैं कि कैपेक्स का मल्टीप्लायर effect कितना बड़ा होता है। इससे देश की कैपेसिटी और प्रोडक्टिविटी बढ़ती है। अनेकों सेक्टर्स में बहुत बड़ी संख्या में जॉब क्रिएशन भी होती है। पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप का निर्माण, देश के टीयर-2, टीयर-3 शहरों के लिए सिटी इकोनॉमिक रीजन्स का निर्माण और सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, ऐसे बजट अनाउंसमेंट्स, सही मायने में युवाओं पर, देश के फ्यूचर पर, यह इन्वेस्टमेंट हैं।

साथियों,

बीते दशक में हमने टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को ग्रोथ का कोर ड्राइवर माना है। इसी सोच के साथ, देश में स्टार्टअप कल्चर, हैकाथॉन कल्चर, उसको हमने प्रमोट किया। आज देश में, दो लाख से अधिक स्टार्टअप, रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स हैं और यह डायवर्स सेक्टर्स में काम कर रहे हैं। हमने युवाओं को प्रोत्साहित किया, देश में रिस्क टेकिंग कल्चर को पुरस्कृत करने का भाव जगाया और परिणाम हमारे सामने है। इस साल का बजट, हमारी इसी प्राथमिकता को और मजबूत करता है। विशेष तौर पर बायोफार्मा, सेमीकंडक्टर और AI जैसे सेक्टर के लिए, इस बजट में महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं।

साथियों,

आज जब देश की आर्थिक ताकत बढ़ी है, तो हम राज्यों को भी उतना ही ज्यादा सशक्त कर रहे हैं। मैं एक और आंकड़ा आपको देना चाहता हूं। 2004 से 2014, 10 साल, इस दरमियान राज्यों को टैक्स डिवोल्यूशन के तौर पर 18 लाख करोड़ रुपए के आसपास ही मिले थे, 2004 से 2014 तक। जबकि 2014 से लेकर 2025 तक, राज्यों को 84 लाख करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। अगर मैं इस साल बजट में प्रस्तावित लगभग 14 लाख करोड़ का आंकड़ा और जोड़ दूं, तो हमारी सरकार में राज्यों को टैक्स डिवोल्यूशन के करीब-करीब 100 लाख करोड़ रुपए मिलने तय हुए हैं। यह राशि केंद्र सरकार की तरफ से अलग-अलग राज्य सरकारों को मिली है, ताकि वो अपने यहां विकास के कार्यों को आगे बढ़ा सकें।

साथियों,

आजकल आप लोग भारत के FTA’s यानि फ्री ट्रेड डील्स पर काफी चर्चा कर रहे हैं और मैं यहां enter हुआ, वहीं से शुरू हो गए लोग। दुनियाभर में इसका एनालिसिस हो रहा है। लेकिन मैं आज इसका एक और इंटरेस्टिंग एंगल आपको बताता हूं, मीडिया को जो चाहिए, वो तो इसमें नहीं होगा शायद, लेकिन हो सकता है कि कुछ काम में आ जाए। और मैं पक्का मानता हूं, जो बात मैं कहने जा रहा हूं, आपने भी इसके बारे में विचार नहीं किया होगा। क्या आपने कभी सोचा है कि आज इतने सारे विकसित देशों के साथ फ्री-फ्री ट्रेड डील्स हो रहे हैं, क्या यही काम 2014 से पहले क्यों नहीं हो पाए? देश वही, युवा शक्ति वही, सरकारी सिस्टम वही, तो बदला क्या? बदलाव, सरकार के विजन में आया है, नीति और नीयत में बदलाव आया है, भारत के सामर्थ्य में बदलाव आया है।

साथियों,

आप ज़रा सोचिए, फ्रेजाइल फाइव इकोनॉमी जब थी, तब कौन हमारे साथ डील करता? गांव में भी गरीब की बेटी को कोई रईस के परिवार वाला शादी करता है क्या? वो उसको छोटा मानता है, हमारा भी यही हाल था भाई दुनिया में। जब देश पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा था, चारों तरफ घोटाले और घपले थे, तब कौन भारत पर भरोसा कर पाता? 2014 से पहले भारत में मैन्युफैक्चरिंग का बेस बहुत कमजोर था और जिसके कारण, पहले की सरकारें भी डरती थी, एक तो कोई आता नहीं था और जरा सा भी कोई कोशिश करें, तो यह लोग भी डरते थे और डर यह था कि अगर विकसित देशों के साथ डील हो गई, तो वो हमारे बाजार पर कब्जा कर लेंगे, वो यहां अपने प्रोडक्ट डंप करने लगेंगे, हताशा-निराशा के उस माहौल में 2014 से पहले यूपीए सरकार सिर्फ चार देशों के साथ ही कॉम्प्रिहेंसिव ट्रेड एग्रीमेंट कर पाई थी। जबकि, बीते दशक में भारत ने जो ट्रेड डील्स की हैं, उनमें दुनिया के 38 कंट्री कवर होते हैं, 38 कंट्री। और यह दुनिया के अलग-अलग रीजन्स में हैं। आज हम इसलिए दुनिया के साथ ट्रेड डील्स कर रहे हैं क्योंकि आज का भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। आज का भारत, दुनिया के साथ कंपीट करने के लिए तैयार है। बीते 11 वर्षों में भारत ने मैन्युफैक्चरिंग का एक मजबूत इकोसिस्टम देश में विकसित किया है। इसलिए, आज भारत समर्थ है, सशक्त है और इसलिए दुनिया भी हम पर भरोसा करती है। यही बदलाव हमारी Trade Policy में आए Paradigm Shift का आधार बने और यही Paradigm Shift विकसित भारत की हमारी यात्रा का अनिवार्य स्तंभ बना है।

साथियों,

आज हमारी सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ देश के हर नागरिक को विकास में सहभागी बनाते हुए कार्य कर रही है। जो विकास की दौड़ में पीछे छूट गया, हम उसके विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं। पहले की सरकारों ने दिव्यांग जनों के लिए सिर्फ घोषणाएं कीं, हम भी उसी रास्ते को जारी रख सकते थे, लेकिन ये सरकार की संवेदनशीलता का उदाहरण है। आप में से शायद जो बातें मैं बता रहा हूं, आप जिस लेवल के लोग हैं, शायद उसमें फिट नहीं बैठती होगी। हमारे दिव्यांग जनों के लिए जैसे हमारे यहां Language में बिखराव है ना, Sign Language का भी वही हाल था जी। तमिलनाडु में जाओ तो एक Sign Language, उत्तर प्रदेश में जाओ तो दूसरी, गुजरात में जाओ तो तीसरी, असम में जाओ तो चौथी, अगर यहां का दिव्‍यांग असम गया, तो बेचारा समझ ही नहीं पाता था। अब यह कोई बड़ा काम तो नहीं था। अगर संवेदनशील सरकार होती है ना, तो उसको यह काम छोटा नहीं लगता है। और देश ने पहली बार Indian Sign Language को institutionalise किया, common किया, व्यवस्था बनाई है। ऐसे ही, देश की Transgender community कब से अपने अधिकारों के लिए लड़ रही थी। हमने उनके लिए भी कानून बनाकर उन्हें सम्मान से जीने का कवच दिया है। बीते दशक में ही देश की करोड़ों बहनों को तीन-तलाक की कुरीति से मुक्ति मिली, लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण पक्का हुआ।

साथियों,

आज सरकारी मशीनरी की सोच भी बदली है, उसमें संवेदनशीलता आई है। सोच का अंतर क्या होता है, यह हम जरूरतमंदों को मुफ्त अनाज देने वाली स्कीम में भी देखते हैं। विपक्ष के कुछ लोग हमारा मजाक उड़ाते हैं और कुछ अखबारों में जरा छपता भी ज्यादा है। कोई मजाक उड़ाता है कि जब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकल ही गए हैं, तो उनको मुफ्त राशन क्यों मिलता है? अजीबोगरीब सवाल है। अगर आप बीमार हैं, अस्पताल में गए और अस्पताल से आपको छुट्टी मिली, तो भी डॉक्टर कहता है कि सात दिन तक यह-यह संभालना, पंद्रह दिन तक यह-यह संभालना, कहता है कि नहीं कहता है? गरीबी से बाहर निकले हैं, लेकिन यह सवाल पूछ रहे हैं कि निकले हैं, तो फिर अनाज क्यों देते हो? ऐसी संकीर्ण मानसिकता वाले लोग, यह नहीं सोचते कि सिर्फ गरीबी से बाहर निकालना काफी नहीं होता, बल्कि जो व्यक्ति नियो मिडिल क्लास में आया है, वो फिर गरीबी के चंगुल में न फंस जाए, यह भी सुनिश्चित करना पड़ता है। इसलिए उसे आज अनाज मुफ्त की सुविधा मिल रही है, यह आवश्यक है। बीते वर्षों में केंद्र सरकार ने इस योजना पर लाखों करोड़ रुपए खर्च किए हैं, इससे गरीब और नियो मिडिल क्लास को बहुत बड़ा संबल मिला है।

साथियों,

सोच का एक और फर्क हम अपने आसपास भी देखते हैं। कुछ लोग हैं, जो कहते हैं कि ये मोदी 2047 की बात क्यों करता है? 2047 में विकसित भारत बनेगा, नहीं बनेगा, किसने देखा? हम रहें या ना रहें, उससे हमारा लेना देना क्या है? अब देखिए, यह सोच है और यह बड़े-बड़े लोगों की सोच है, यह कोई मैं अपने शब्द नहीं बता रहा हूं।

साथियों,

जिन लोगों ने आजादी के लिए लड़ाई लड़ी, लाठियां खाईं, कालापानी की सज़ाएं पड़ी, फांसी के तख्त पर चढ़ गए, अगर वो भी यही सोचते कि आजादी पता नहीं कब मिले, हम क्यों आज आजादी के लिए लाठी खाएं, तो सोचिए, क्या उस सोच के साथ देश कभी आजाद हो पाता क्या? जब राष्ट्र प्रथम का भाव हो, जब देश हित सर्वोपरि हो, तो हर निर्णय देश के लिए होता है, हर नीति देश के लिए बनती है। हमारी सोच स्पष्ट है, विजन साफ है, हमें देश को विकसित बनाने के लिए निरंतर काम करना है। 2047 तक हम रहें न रहें, लेकिन यह देश रहेगा, इस देश की संतानें रहेंगी। इसलिए हमें और इसलिए हमें अपना आज खपाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों का कल सुरक्षित रहे, उज्ज्वल रहे। मैं आज अपनी आज बो रहा हूं क्योंकि कल की पीढ़ी को फल खाने को मौका मिले।

साथियों,

दुनिया को अब डिसरप्शन के साथ जीने के लिए तैयार रहना होगा। समय के साथ इनके नेचर में बदलाव आएगा, लेकिन यह तय है कि अब व्यवस्थाएं बहुत तेजी से बदलेंगी। AI से जो Disruption हो रहे हैं, वो तो आप देख ही रहे हैं। आने वाले समय में AI और भी क्रांतिकारी बदलाव लेकर आने वाली है, भारत इसके लिए भी तैयार है। कुछ ही दिनों में भारत में ग्लोबल AI इम्पैक्ट समिट होने जा रही है। दुनिया के अनेक देश, दुनियाभर के टेक लीडर्स, इस समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं। सभी के साथ मिलकर, हम एक बेहतर विश्व बनाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे। इसी भरोसे के साथ, एक बार फिर इस Summit के लिए आप सभी को बहुत सारी मेरी शुभकामनाएं।

बहुत-बहुत धन्यवाद!

वंदे मातरम!