4 जून के बाद, हर भ्रष्टाचारी का और घोटालों की काली कमाई का हिसाब होगा: शाहजहांपुर में पीएम मोदी
बहनों के जीवन से मुश्किलें कम करने के लिए आपका भाई दिन-रात काम कर रहा है: शाहजहांपुर में पीएम मोदी

भारत माता की, भारत माता की, भारत माता की।

(ये जो बड़े-बड़े पोस्टर वाले हैं, पोस्टर नीचे कीजिए ताकि पीछे वाले देख पाएं। अब पोस्टर मुझे दिखाकर क्या करोगे, मैं कांग्रेस वाला थोड़ा हूं। कांग्रेस के नेता कांग्रेस को वोट नहीं दे पाएंगे। मोदी तो बीजेपी को वोट देने वाला है। आपको पता है न, ये चुनाव ऐसा है जिस चुनाव में कांग्रेस का जो शाही परिवार जो दिल्ली में रहता है, ये शाही परिवार कांग्रेस को वोट नहीं देगा, क्योंकि वो सीट पर कांग्रेस का उम्मीदवार ही नहीं है।)

भारत माता की, भारत माता की, भारत माता की।

शहीदन की धरती पर पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफ़ाक़ उल्ला खां कउ शत-शत नमन, बाबा विश्वनाथ औरु भगवान परशुराम के चरणन मा हमारो प्रणाम...!!

मैं क्रांतिकारियों की जननी शाहजहांपुर की धरती को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं। चौबीस का ये चुनाव एक ऐतिहासिक चुनाव है।

(देखिए भैया, एक बात बताऊं आपको। सुनोगे आपलोग, देखिए, ये मैदान छोटा पड़ गया है। अब हिलने की भी जगह नहीं है। अब आप थोड़ा सा भी आगे आने की कोशिश करते हैं तो सारा यहां तूफान मच जाता है। मेरी आप सब साथियों को करबद्ध प्रार्थना है कृपा करके जहां हैं वहां खड़े रहें। आगे जगह नहीं है। आपको असुविधा हो रही हो तो मुझे क्षमा कीजिए। लेकिन कृपा करके आगे आने की कोशिश मत कीजिए।)

भारत माता की, भारत माता की, भारत माता की।

साथियों,

ये सामान्य चुनाव नहीं है। ये चुनाव कौन एमपी बने, कौन एमपी न बने, किसकी सरकार बने, किसकी सरकार न बने, कौन जीते कौन हारे, इतने मात्र के लिए ये चुनाव नहीं है। ये चुनाव आपका एक-एक वोट सशक्त भारत के संकल्प को मजबूती देने की गारंटी है। और ये मोदी की गारंटी से भी ज्यादा आपके वोट की गारंटी है। साथियों, इस बार आपको अपने वोट से देश-विरोधी मानसिकता वाले लोगों को कड़ा संदेश देना है। ये आपका वोट ही है, जो आतंकवाद को काबू में रखेगा। ये आपका वोट ही है जो भारत को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाएगा। और, मुझे विश्वास है, क्रांतिकारियों की ये धरती इतने बड़े राष्ट्रयज्ञ में सबसे आगे खड़ी होगी। आपका ये उत्साह भी बता रहा है, शाहजहांपुर ने सोच लिया है- फिर एक बार, मोदी सरकार! फिर एक बार, मोदी सरकार! फिर एक बार, मोदी सरकार!

साथियों,

शाहजहांपुर और ये पूरा क्षेत्र आज बीजेपी के विकास का गवाह बन रहा है। ये वही क्षेत्र है, जो योगी जी के आने से पहले, ‘समाजवादी सब कुछ ठप्प परियोजना’ का सबसे बड़ा शिकार था। यहां का सड़क इनफ्रास्ट्रक्चर ठप्प था। बिजली व्यवस्था ठप्प थी। स्वास्थ्य सेवाएं ठप्प थीं। कानून व्यवस्था ठप्प थी। भाइयों बहनों, जब से योगी जी आए, और उनकी पूरी टीम जीजान से काम में जुट गई। ‘समाजवादी सब कुछ ठप्प परियोजना’ बंद हुई, और विकास की गाड़ी तेजी से दौड़ना शुरू हुई। पहले जहां सलामत सड़कें नहीं थीं, अब वहां एक्सप्रेसवे गुजर रहा है। आधुनिक गंगा एक्स्प्रेसवे की नींव यहीं शाहजहांपुर से ही रखी गई थी, ये सौभाग्य भी आप सबने मुझे दिया था। शाहजहांपुर बाईपास, शाहजहांपुर-पीलीभीत नेशनल हाईवे और सीतापुर-लखनऊ हाइवे का बड़ा लाभ भी यहां के लोगों को मिलेगा। इस विकास ने लखनऊ और दिल्ली की दूरी तो कम की ही है, इससे ये क्षेत्र डिफेंस कॉरिडॉर से भी जुड़ेगा। यहां जरी-जरदोज़ी जैसे जिन कामों को हमारी सरकार ODOP योजना के तहत आगे बढ़ा रही है, उसके कारीगरों को भी बहुत बड़ा लाभ होगा। इससे इस क्षेत्र के किसानों की किस्मत भी बदलेगी। योगी जी की सरकार में गन्ने का भुगतान तो समय से होता ही है, गन्ना किसानों के लिए एथानॉल के दो प्लांट भी यहां लगाए गए हैं। आप मुझे बताइये, दो लड़कों की जोड़ी जो खुद कई बार फ्लॉप हो चुकी है, आप उनसे विकास की कोई उम्मीद कर सकते हैं क्या?

साथियों,

हमारी सरकार के लिए युवा, गरीब और महिला और हमारा अन्नदाता पहली प्राथमिकता हैं। हमने 4 करोड़ गरीबों को पीएम-आवास दिये हैं, तो इनमें से अधिकांश महिलाओं के नाम पर बनवाए गए हैं। शौचालय, उज्जवला योजना, और जलजीवन मिशन से हमारी बहनों के जीवन से मुश्किलें कम करने के लिए ये आपका भाई दिन-रात काम कर रहा है। शाहजहांपुर ने तो जलजीवन मिशन के तहत हर घर जल पहुंचाने के काम में पूरी यूपी में टॉप किया है। अब अगले 5 वर्षों में हम 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाएंगे। आप कल्पना कीजिए गांवों में जब 3 करोड़ लखपति दीदी होगी, तो वो परिवार कितना आगे बढ़ेगा, उस गांव की इकोनॉमी कितनी आगे बढ़ेगी। और ये तीन करोड़ लखपति दीदी ये मोदी की गारंटी है।

साथियों,

मोदी अपने काम का देश के विकास का लेखाजोखा देकर आपसे आशीर्वाद और वोट मांगता है। लेकिन, क्या आपने कभी सपा और कांग्रेस को अपने कार्यकाल पर हिसाब देते हुए देखा है क्या? मोदी ने तो मेडिकल कॉलेज भी बनाए हैं, एक तरफ मेडिकल कॉलेज भी मोदी बनाता है तो अयोध्या में रामलला का भव्य मंदिर भी बना है। मोदी तो बता सकता है ये कांग्रेस और सपा वाले क्या बताएंगे। जब ये सत्ता में थे तब अयोध्या, बनारस, लखनऊ, कानपुर आए दिन आतंकी हमले होते थे। बम धमाके होते थे। इसके अलावा ये क्या बता सकते थे। और ऐसी हालत में ये लोग क्या करते थे।

मेरा एक काम है, करोगे। देखिए, ये जो फर्स्ट टाइम वोटर हैं ना, जो पहली बार वोट डालने वाले हैं। जिनकी उम्र अभी-अभी 18-20 साल की हुई है। ये लोग पहली बार वोट डालने वाले हैं। जब कांग्रेस की सरकार थी तब उनकी उम्र 8-10 साल थी, उस समय क्या होता था उनको कुछ पता नहीं होगा। जैसे आपको याद होगा। जो बड़े हैं उनको याद होगा। मोदी के आने से पहले रेलवे स्टेशन पर जाओ तो माइक से एक सूचना सुनाई देती थी। बस स्टेशन पर जाओ तो माइक से एक सूचना सुनाई देती थी। आप अपने अखबार पढ़ें तो उस पर एक सूचना सुनाई देती थी। आप टीवी देखें तो उस पर एक सूचना आती थी। क्या आती थी- अगर आप कहीं पर भी कोई लावारिश चीज देंखें तो उसको छूना मत, कहीं कोई लावारिश चीज दिखे तो उससे दूर जाना, कहीं कोई लावारिश बैग पड़ी है, कहीं कोई लावारिश टिफिन पड़ा है। कहीं पर कोई लावारिश कूकर पड़ा है तो आप दूर रहिए। क्यों, क्योंकि डर रहता था कि ये जो लावारिश चीजें पड़ी है उसमें बम होगा। इसलिए पूरी सरकार आए दिन उनको लोगों को ये बताना पड़ता था। मुझे बताइए भाइयों 2014 के बाद मोदी के आने के बाद कभी भी आपने ऐसी सूचना सुनी है क्या। बम धमाका होने का डर बताया जाता था वो है क्या। ये बम धमाके वाले चुप हो गए की नहीं हो गए। बम बंद हो गए कि नहीं हो गए , कैसे हुआ….कितने किया…मोदी ने नहीं किया, ये आपके एक वोट ने किया। ये आपके वोट की ताकत है कि बड़े बड़े धमाकों को बंद करवा सकती है, क्योंकि आपने सही वोट दिया और सही लोगों को वोट दिया। जो आए दिन बम धमाके होते थे निर्दोष बिना कारण मरते थे उनकी जिंदगी आपके वोट ने बचाई है। इसलिए भाइयों बहनों और ये तो कहां तक जाते थे, आतंकियों के मरने पर कांग्रेस की सबसे बड़ी नेता आंसू बहा रही थी, बताइए। क्या आतंकियों के मरने पर आंसू बहाने वाले आपको मंजूर हैं क्या। इस देश में ऐसे लोगों को सरकार दी जा सकती है क्या। और ये सपा वाले तो ऐसे हैं कि उनकी सरकार थी जो आतंकी जेल में थे तो उनको रिहा करवाने के लिए भांति भांति के कानूनी रास्ते खोल रहे थे।

भाइयों-बहनों,

क्या ऐसे लोगों के हाथ में आपका जीवन, भविष्य और रोजी रोटी सुरक्षित है। और अभी भी ये सुधरने को तैयार नहीं हैं। आपने देखा होगा राम मंदिर उनको निमंत्रण दिया गया। अब देखिए, मैं तो हैरान हूं, ये जो राम मंदिर के ट्रस्टी हैं ना, उनकी जितनी तारीफ करें उतनी कम है। जो सपा वालों ने कारसेवकों पर गोलियां चलाई थी, जिन सपा वालों ने राम मंदिर ना बने इसके लिए ढेर सारे खेल खेले थे, ये कांग्रेस वाले 7-7 दशक तक राम मंदिर बनाने से रोक रहे थे। अदालत में भांति भांति से रोकने की कोशिश करते थे। सब रोकने के लिए पाप करते थे, सपा हो या कांग्रेस। इन सबके पाप माफ करके ये मंदिर के ट्रस्टी उनको घर जाकर निमंत्रण दिया। चलो भाई जो हुआ सो हुआ सब भूल जाओ, आओ भाई भगवान राम मंदिर बना है प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम है आइए। राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठ का निमंत्रण मिलना ये तो सात जन्म के पुण्य है तब मिलता है भाई। इन्होंने तो इसको भी ठुकरा दिया। जिन्होंने राम मंदिर के निमंत्रण को ठुकरा दिया और इस बार रामनवमी आई पहली बार भव्य मंदिर में रामलला विराजमान थे। टेंट से बाहर निकलकर पहली बार वे अपना बर्थ डे मना रहे थे। उसी समय ये सपा वाले कह रहे थे राम मंदिर जाने वाले भक्त तो पाखंडी होते हैं। भाइयों-बहनों, इस देश में ऐसे लोगों की राजनीति चलनी चाहिए क्या? ऐसे लोग एक वोट के भी हकदार हैं क्या। क्या हर बूथ में से चुन चुन कर उनको साफ करना चाहिए की नहीं करना चाहिए। करेंगे पूरे ताकत से बोलिए पक्का करेंगे।

साथियों,

कांग्रेस पार्टी की एक पहचान रही है- इन्हें जब कोई बड़ा कुकृत्य करना होता है तो ये देश और संविधान के नाम पर शोर मचाने लगते हैं। 70 के दशक में ऐसे ही नारे लगाकर कांग्रेस ने देश में आपातकाल लगा दिया था। देश को जेलखाना बना दिया। देश के लाखों लोकतंत्र प्रेमी लोगों को जेल की सलाखों के भीतर बंद कर दिया था। अखबारों पर ताले लगा दिए गए थे। अगर कोई बोले तो जेल जाने का डर लगता था। फिर से इन दिनों एक बार फिर कांग्रेस ने अपनी फ्लॉप फिल्म रिलीज़ की है। कांग्रेस की इस फिल्म में दो डायलॉग हैं। वो सारे लोग ऊपर से नीचे गुनगुना रहे हैं। पहला- मोदी जीत जाएगा तो तानाशाही आ जाएगी। आप इससे सहमत हैं क्या। फिर भी उनकी फ्लॉप फिल्म चलती रहती है। दूसरा- मोदी जीत जाएगा तो आरक्षण चला जाएगा। ऐसा झूठ चलाते रहते हैं, लेकिन, आपने देखा होगा, जैसे ही कांग्रेस की फिल्म का ट्रेलर, उनके घोषणापत्र आया, इनके असली इरादे और पर्दे के पीछे कांग्रेस का हिडन एजेंडा क्या है देश को उसकी भनक लग गई। देश के कान खड़े हो गए, देश चौंक गया। अब तो एक-एक करके इनकी सारी सच्चाई सामने आने लगी है।

भाइयों बहनों,

कांग्रेस, पूरे देश में आरक्षण का कर्नाटका मॉडल लागू करना चाहती है। आपको मालूम है कर्नाटका मॉडल क्या है। ये जरा इस चीज को समझ लीजिए भाई, और घर-घर जाकर समझाइए। ये कर्नाटका मॉडल बड़ा भयंकर, खतरनाक है। मैं भी ओबीसी हूं, मैं तो डर ही गया। अगर मैं डर गया तो आपका क्या हुआ होगा। इनका कर्नाटका का मॉडल ये है, कर्नाटका में जहां कांग्रेस की सरकार है, वहां OBC को जो आरक्षण का 27 परसेंट का कोटा मिला हुआ है। संविधान ने दिया हुआ है, भारत की संसद ने दिया हुआ है। बाबा साहब अंबेडकर ने दिया हुआ है। उसी 27 परसेंट ओबीसी के कोटे में से मुस्लिमों की सभी जातियों को आरक्षण दे दिया गया है। ओबीसी का लूट लिया गया, रातोंरात कोई कानूनी प्रक्रिया किए बिना, एक कागज पर ठप्पा मार करके उन्होंने कर्नाटक के सभी मुसलमानों को वो कितना ही धनी हो, कितना ही पढ़ा-लिखा हो, डॉक्टर हो, इंजीनियर हो, वकील हो, कितना ही उच्च वर्ग का हो, सभी मुसलमानों को एक कागज पर ठप्पा मार करके रातोंरात उन सबको ओबीसी बना दिया। अब जब ओबीसी बन गए तो ओबीसी आरक्षण के हकदार बन गए। और जो ओबीसी समाज के छोटे-छोटे लोगों को आरक्षण मिलता था वो सारा का सारा उन्होंने लूट लिया। मुझे बताइए, ऐसा मॉडल आपको मंजूर है, कर्नाटका का ओबीसी को बर्बाद करने वाला मॉडल क्या देश स्वीकार कर सकता है। ओबीसी के हक को जाने देंगे। ओबीसी के हक की रक्षा करेंगे कि नहीं करेंगे। उनके आरक्षण की रक्षा करेंगे कि नहीं करेंगे। इतना ही नहीं, जब ये कांग्रेस वाले केंद्र सरकार में थे, तब 2011 में भी इन्होंने पिछड़ों के आरक्षण का हिस्सा कम करके, उसे धर्म के आधार पर बांटने के लिए आदेश जारी किया था। कांग्रेस सरकार के उस आदेश पर कोर्ट ने स्टे लगा दिया था। अब फिर से कांग्रेस ने नए तरीके से आरक्षण को लूटने का प्रोजेक्ट शुरू किया है। कांग्रेस की मंशा संविधान बदलकर दलितों, पिछड़ों के आरक्षण को छीनकर अपने खास लोगों, अपने वोटबैंक को देने की है। आप मुझे बताइये, OBC आरक्षण में इस डाके पर सपा पूरी तरह मौन क्यों धारण किए हैं? क्या कांग्रेस के साथ रहकर समाजवादी पार्टी भी पिछड़ों के आरक्षण की विरोधी बन गई है। सत्ता पाने की लालच में ओबीसी के पीठ में छुरा भोंकने का खेल चल रहा है। क्या यूपी का पिछड़ा समाज, यादव-कुर्मी-मौर्या-कुशवाहा समाज इस अत्याचार को बर्दाश्त करेगा?

साथियों,

हमारे देश में सालों से सामान्य वर्ग के गरीबों की भी अपेक्षा थी कि उन्हें भी आरक्षण का लाभ मिले। चाहे ब्राह्मण का बेटा हो, बनिये का बेटा हो, क्षत्रिय का बेटा हो, जो गरीब थे उन्हें लगता था हमारा कौन देखेगा, हमारी कौन चिंता करेगा। भाइयों-बहनों मैं गरीब मां का बेटा हूं, मैं हर किसी का दर्द समझता हूं। और इसलिए भारतीय जनता पार्टी को आपने सेवा करने का मौका दिया। मुझे आपने प्रधान सेवक के रूप में सेवा करने का मौका दिया। तो मैंने पार्लियामेंट में जो सामान्य वर्ग के लोग हैं उनमें जो गरीब हैं उनकी भी चिंता की और उनके लिए 10 प्रतिशत आरक्षण बनाया। और किसी का भी चोरी किए बिना, किसी का भी आरक्षण लूटे बिना, देश में कोई जिंदाबाद-मुर्दापबाद के नारे लगाए बिना, सबको समझाकर प्रेम से सबके गले उतरा कि ब्राह्मण, बनिया, क्षत्रिय का बेटा भी गरीब होता है। और मैंने एक भी तनाव के बिना ये काम किया। और आज उसका लाभ मेरे इन गरीब परिवारों को मिल रहा है। जबकि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी, ST-SC-OBC का अधिकार छीनकर अपने वोटबैंक को मजबूत बनाने के लिए धर्म के आधार पर आरक्षण देना चाहते हैं।

साथियों,

इन दिनों कांग्रेस के शहजादे के एक और इरादे ने देशभर में हड़कंप मचा दिया है। ये कह रहे हैं कि कांग्रेस हर देशवासी की संपत्ति की एक्स-रे जांच करवाएगी। आपकी भी एक्सरे जांच होगी। आपके घर की एक्सरे जांच होगी, आपकी आलमारी की एक्सरे जांच होगी। आपका बैंक में लॉकर हो तो उसकी एक्सरे जांच होगी और आपके पास कितने पैसे हैं क्या कमाया है, कितना सोना है, कितने गहने हैं, माताओं-बहनों का मंगलसूत्र कितने सोने का है, ये सारी जानकारी वे इकट्ठी करेंगे। आपने जो गाढ़ी कमाई से इकट्ठा किया है। वो कहते हैं एक्सरे करके ले लिया जाएगा। और जिनके पास नहीं है, उनमें बांटा जाएगा। आपकी कमाई का पैसा, आपके पैसों को उनकी वोट बैंक को मजबूत करने के लिए खैरात कर दिया जाएगा भाइयों बहनों। क्या आपकी कमाई हुई पूंजी किसी को लूटने देंगे क्या। कांग्रेस आपकी कमाई उस वोटबैंक में बांट देगी जिनके बारे में वो कहती है कि उनका इस देश के संसाधनों पर पहला हक है। शाहजहांपुर का ये क्षेत्र तो खेती-किसानी का क्षेत्र है। यानि अब कांग्रेस की नजर किसानों के खेतों पर भी है। कांग्रेस ने कहा है कि वो आपके खेत-खलिहानों की भी जांच कराएगी। इसके बाद कांग्रेस का इरादा आपकी जमीन छीनकर, अपने पसंदीदा वोटबैंक को देने का है। क्या आपको ये मंजूर होगा? क्या देश मंजूर कर सकता है। और इतना ही नहीं, कांग्रेस एक और साजिश देश के किसानों के खिलाफ कर रही है। आज देश के ज्यादातर किसानों के पास उनकी पुरखों की जमीन है। आपके दादा-परदादा ने बहुत मेहनत से ये जमीन जुटाई है। उनके दिए हुए खेत-खलिहान से ही आपके परिवार का पालन-पोषण हुआ। उसी खेत से आपके घर में धन-संपत्ति आई। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई हुई..शादी-ब्याह हुआ। लेकिन कांग्रेस चाहती है कि अब आप ये खेत अपने बच्चों को देंगे, तो वो उस पर 50 प्रतिशत से ज्यादा टैक्स लगाएगी। कांग्रेस आपकी जमीन, आपका घर और जो कुछ भी पुरखों का दिया आपके पास है, वो सब छीनकर ले जाएगी, ताकि उसका वोटबैंक को बांटा जा सके। और कांग्रेस की इस साजिश में समाजवादी पार्टी भी बराबर की भागीदारी कर रही है। दो शहजादों के फिर से साथ आने का सबसे बड़ा आधार तुष्टिकरण की यही राजनीति है। इसलिए आज पूरा देश कह रहा है - कांग्रेस की लूट-जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी।

साथियों,

आपकी कमाई पर पंजा डालने की प्लानिंग करने वाले ये वो लोग हैं, जिन्होंने देश में लाखों करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले किए हैं। ये लोग आपकी संपत्ति का, उसको हड़पने का खेल खेलना चाहते हैं, मोदी उनको साफ-साफ बता देना चाहता है, 4 जून के बाद आपके आशीर्वाद से फिर से मोदी जब सरकार बनाएगा, हर भ्रष्टाचारी का हिसाब होगा, घोटालों की काली कमाई का हिसाब होगा। और ये मोदी की गारंटी है।

साथियों,

आप शाहजहांपुर से भाई अरुण कुमार सागर और धौरहरा से बहन रेखा वर्मा को जितनी बड़ी जीत देंगे, मोदी की ताकत उतनी ही बढ़ेगी। साथ ही, पार्टी के जनप्रिय नेता मानवेंद्र सिंह जी की दुखद अनुपस्थिति का कष्ट भी हम सबको है। दादरौल में हमें मानवेंद्र सिंह जी के संकल्पों को पूरा करना है।

मेरा एक और करेंगे। पर्सनल काम है करोगे। घर-घर जाना और कहना अपने मोदी जी आए थे, मोदी जी आपको प्रणाम कहा है। मेरा प्रणाम पहुंचा देंगे।

बोलिए... भारत माता की, भारत माता की, भारत माता की।

बहुत बहुत धन्यवाद

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Text of PM’s address at the News18 Rising Bharat Summit
February 27, 2026
Developed nations are eager to sign trade deals with India because a confident India is rising beyond doubt and despair: PM
In the last 11 years, a new energy has flowed into the nation's consciousness, India is determined to regain its rightful strength: PM
India's Digital Public Infrastructure has today become a subject of global discussion: PM
Today, every move India makes is closely watched and analysed across the world, the AI Summit is a clear example of this: PM
Nation-building never happens through short-term thinking; It is shaped by a long-term vision, patience and timely decisions: PM

इजराइल की हवा यहाँ भी पहुँच गई है।

नमस्कार!

नेटवर्क 18 के सभी पत्रकार, इस व्यवस्था को देखने वाले सभी साथी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी राइजिंग भारत की चर्चा कर रहे हैं। और इसमें strength within पर आपका जोर है, यानी साधारण शब्दों में कहूं, तो देश के अपने खुद के सामर्थ्य पर आपका फोकस है। और हमारे यहां तो शास्त्रों में कहा गया है - तत् त्वम असि! यानी जिस ब्रह्म की खोज मे हम निकले हैं, वो हम ही हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो सामर्थ्य हमारे भीतर है उसे हमें पहचानना है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपना वही सामर्थ्य पहचाना है, और इस सामर्थ्य को सशक्त करने के लिए आज देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

साथियों,

सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता, सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वो ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है, लेकिन इतिहास के एक लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों में, हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को ही हीनता से भर दिया गया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर ये भर दिया था, कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी यानी, फॉलोअर हैं, हमारे यहां ये भी कहा गया है – यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी। यानी जैसी जिसकी भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती है। जब भावना में ही हीनता थी, तो सिद्धि भी वैसी ही मिल रही है। हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे, विदेशी मुहर का इंतजार करते थे, ये वो गुलामी थी जो राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी, भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया। और इसका नुकसान हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण, हम ट्रेड डील्स में हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि अरे ये क्या हो गया, कैसे हो गया, विकसित देश भारत से ट्रेड डील्स करने में इतने उत्सुक क्यों हैं। इसका उत्तर है हताशा, निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत। अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा होता, अगर ये हाल होते तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील्स करता, अरे हमारी तरफ देखता भी नहीं।

लेकिन साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोये हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। एक समय में जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा दबदबा था, तो हमारा क्या सामर्थ्य था? भारत की मैन्युफैक्चरिंग, भारत के प्रोडक्टस की क्वालिटी, भारत की अर्थ नीति, अब आज का भारत फिर से इन बातों पर फोकस कर रहा है। इसलिए हमने मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया, हमने मेक इन इंडिया पर बल दिया, हमने अपनी बैंकिंग सिस्टम को सशक्त किया, महंगाई जो डबल डिजिट की दर से भाग रही थी, उसका कंट्रोल किया और भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन बनाया। भारत का यही सामर्थ्य है कि दुनिया के विकसित देश सामने से भारत के साथ ट्रेड डील करने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

साथियों,

जब किसी राष्ट्र के भीतर, छिपी हुई उसकी शक्ति जागती है, तो वह नई उपलब्धियां हासिल करता है। मैं आपको कुछ और उदाहरण देता हूं। जैसे मैं जब कभी दूसरी देशों के हेड ऑफ द गर्वमेंट से मिलता हूं, तो वो जनधन, आधार और मोबाइल की इतनी शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं। जिस भारत में एटीएम भी, दुनिया की विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली? जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था, वो भारत डीबीटी के जरिये 24 लाख करोड़ रूपये, यानी Twenty four trillion रुपीज कैसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है? भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है।

साथियों,

दुनिया हैरान होती है, कि जिस भारत में 2014 तक, करीब तीन करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वो आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गया? जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद ना थी, वो भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया? जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट-लतीफी और धीमी-रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत, नमो भारत, ऐसी सेमी-हाईस्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है?

साथियों,

एक समय था, जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था। आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है। और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचाना है, जिस Strength Within की आप चर्चा कर रहे हैं, ये उसका ही उदाहरण है।

साथियों,

जब हम गर्व से आगे बढ़ते हैं, तो दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है, वो नजर भी बदली है। आप याद कीजिए, कुछ साल पहले तक दुनिया में, ग्लोबल मीडिया में, भारत के किसी इवेंट की कितनी कम चर्चा होती थी। भारत में होने वाले इवेंट्स को उतनी तवज्जो ही नहीं दी जाती थी। और आज देखिए, भारत जो करता है, जो एक्शन यहां होते हैं, उसका वैश्विक विश्लेषण होता है। AI समिट का उदाहरण आपके सामने है, इसी भवन में हुआ है। AI समिट में 100 से ज्यादा देश शामिल हुए, ग्लोबल नॉर्थ हो या फिर ग्लोबल साउथ, सभी एक साथ, एक ही जगह, एक टेबल पर बैठे। दुनिया के बड़े-बड़े कॉर्पोरेशन्स हों या फिर छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स, सभी एक साथ जुटे।

साथियों,

अब तक जितनी भी औद्योगिक क्रांतियां आई हैं, उनमें भारत और पूरा ग्लोबल साउथ सिर्फ फॉलोअर रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस युग में, भारत निर्णयों में सहभागी भी है और उन्हें शेप भी कर रहा है। आज हमारे पास खुद का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम है, डेटा-सेंटर में निवेश करने की ताकत है और AI डेटा को स्टोर करने के लिए, प्रोसेस करने के लिए, जिस पावर की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उस पर भी भारत तेजी से काम कर रहा है। हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में जो Reform किया है, वो भी भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूती देने में मदद करेगा।

साथियों,

AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था। लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने, देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे, बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालिएपन को भी expose कर दिया है। जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। ज़ाहिर है, कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है। इसलिए, इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छुपाना हो तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, और जब अपना गौरवगान करना हो, तो एक ही परिवार को सारा क्रेडिट देती है।

साथियों,

कांग्रेस अब विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की टूलकिट बनकर रह गई है। और ये अंध-विरोध की मानसिकता इतनी बढ़ गई है, कि ये देश को हर मंच, हर प्लेटफॉर्म पर नीचा दिखाने से नहीं चूकते। देश कुछ भी अच्छा करे, देश के लिए कुछ भी शुभ हो रहा हो, कांग्रेस को विरोध ही करना है।

साथियों,

मेरे पास एक लंबी सूची है, देश की संसद की नई इमारत बनी, उसका विरोध। संसद के ऊपर अशोक स्तंभ के शेरों का विरोध। अब जिनके बब्बर शेर सामान्य नागरिकों के जूते खाकर के भाग रहे थे, उनके संसद भवन के शेर के दांत देखकर के डर लग गया उनको। कर्तव्य भवन बना, उसका भी विरोध। सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की, उसका भी विरोध। बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, उसका भी विरोध। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, उसका भी विरोध। यानी देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस के टूलकिट से एक ही चीज निकलती है- विरोध।

साथियों,

देश ने आर्टिकल 370 की दीवार गिराई, देश खुश हुआ। लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया। हमने CAA का कानून बनाया- उसका विरोध। हम महिला आरक्षण कानून लाए- उसका विरोध। तीन तलाक के विरुद्ध कानून लाए- उसका विरोध। हम UPI लेकर आए, उसका विरोध। स्वच्छ भारत अभियान लेकर आए, उसका विरोध। देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई, तो उसका भी विरोध।

साथियों,

लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध-विरोध नहीं होता, डेमोक्रेसी में विपक्ष का मतलब वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता, कांग्रेस को सबक सिखा रही है, आज से नहीं, बीते चार दशकों से लगातार ये काम देश की जनता कर रही है। मैं जो कहने जा रहा हूं, मीडिया के साथी उसका भी ज़रा एनालिसिस करिएगा। आपको पता लगेगा कि कांग्रेस के वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि देश के लोग अब कांग्रेस को वोट देने लायक ही नहीं मानते। और इसकी शुरुआत 1984 के बाद ही होनी शुरू हो गई थी। 1984 में कांग्रेस को 39 परसेंट वोट मिले थे, और 400 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस के वोट कम ही होते चले गए। और आज कांग्रेस की हालत ये है कि, देश में सिर्फ, सिर्फ चार राज्य ऐसे बचे हैं, जहां कांग्रेस के पास 50 से ज्यादा विधायक हैं। बीते 40 वर्षों में युवा वोटर्स की संख्या बढ़ती गई और कांग्रेस साफ होती गई। कांग्रेस, परिवार की गुलामी में डूबे लोगों का एक क्लब बनकर रह गई है। इसलिए पहले मिलेनियल्स ने कांग्रेस को सबक सिखाया, और अब जेन जी भी तैयार बैठी है।

साथियों,

कांग्रेस और उसके साथियों की सोच इतनी छोटी है, कि उन्होंने दूरदृष्टि से काम करने को भी गुनाह बना दिया है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं— “इतनी दूर की बात अभी क्यों कर रहे हो?” कुछ लोग ये भी कहते हैं कि तब तक मोदी जिंदा थोड़ी रहेगा, सच्चाई यह है कि राष्ट्र निर्माण कभी भी तात्कालिक सोच से नहीं होता। वो एक बड़े विजन, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से होता है। मैं कुछ और तथ्य नेटवर्क 18 के दर्शकों के सामने रखना चाहता हूं। भारत हर साल विदेशी समुद्री जहाजों से मालढुलाई पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है किराए पर। फर्टिलाइजर के आयात पर हर साल सवा दो लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम आयात पर हर साल 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे हैं। अगर यही निवेश 20–25 वर्ष पहले आत्मनिर्भरता की दिशा में किया गया होता, तो आज ये पूंजी भारत के इंफ्रास्ट्रचर, रिसर्च, इंडस्ट्री, किसान और युवाओं की क्षमताओं को मजबूत कर रही होती। आज हमारी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। विदेशी जहाजों को 6 लाख करोड़ रुपए ना देना पड़े इसलिए भारतीय शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। फर्टिलाइजर का domestic प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नए प्लांट लग रहे हैं, नैनो-यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।

और साथियों,

हमें भविष्य की ओर देखते हुए भी आज ही निर्णय लेने हैं। इसलिए आज भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। रक्षा उत्पादन में, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में, ड्रोन टेक्नोलॉजी में, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में, और उसमें निवेश, आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा की नींव है। 2047 का लक्ष्य कोई राजनीतिक नारा नहीं है। यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का संकल्प भी है, जहाँ कांग्रेस की सरकारों के समय कई क्षेत्रों में समय रहते निवेश नहीं किया। आज अगर हम ख़ुद स्वदेशी जहाज, स्वदेशी शिप्स बनाएँगे, ख़ुद एनर्जी का प्रोडक्शन करेंगे, ख़ुद नई टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे, तो आने वाली पढ़ियाँ इम्पोर्ट के बोझ की नहीं, एक्सपोर्ट की क्षमता पर चर्चा करेंगी। राष्ट्र की प्रगति “आज की सुविधा” से नहीं, “कल की तैयारी” से तय होती है। और दूरदृष्टि से की गई मेहनत ही 2047 के आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत की आधारशिला है। और इसके लिए कांग्रेस अपने कितने ही कपड़े फाड़ ले, हम निरंतर काम करते रहेंगे।

साथियों,

राष्ट्र निर्माण की, Nation Building की एक बहुत अहम शर्त होती है- नेक नीयत की। कांग्रेस और उसके साथी दल, इसमें भी फेल रहे हैं। कांग्रेस और उसके साथियों ने कभी नेक नीयत के साथ काम नहीं किया। गरीब का दुख, उसकी तकलीफ से भी इन्हें कोई वास्ता नहीं है। जैसे बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई। अगर नेक नीयत होती तो क्या गरीबों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका जाता क्या? नहीं। आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं। नेटवर्क 18 के दर्शकों को मैं एक और आंकड़ा देता हूं। तमिलनाडु के गरीब परिवारों के लिए, करीब साढ़े नौ लाख पक्के घर एलोकेट किए गए हैं, साढ़े नौ लाख। लेकिन इनमें से तीन लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्यों, क्योंकि DMK सरकार गरीबों के इन घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह है, नीयत नेक नहीं है।

साथियों,

मैं आपको एग्रीकल्चर सेक्टर का भी उदाहरण देता हूं। कांग्रेस के समय में खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। छोटे किसानों को कोई पूछता नहीं था, फसल बीमा का हाल बेहाल था, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई थी, कांग्रेस बजट में घोषणाएं जरूर करती थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था, क्योंकि उसकी नीयत ही नहीं थी। हमने देश के किसानों के लिए नेक नीयत के साथ काम करना शुरू किया, और आज उसके परिणाम दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर एक्सपोर्टर्स में से एक बन रहा है। हमने हर स्तर पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खाते में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक जमा किए गए हैं। हमने लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया और रिकॉर्ड खरीद भी की है। मैं आपको सिर्फ दाल का ही आंकड़ा देता हूं। UPA सरकार ने 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दाल, किसानों से MSP पर खरीदी- 6 लाख मीट्रिक टन। और हमारी सरकार अभी तक, करीब 170 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 30 गुणा अधिक दाल MSP पर खरीद चुकी है। अब आप तय करिये, कौन किसानों के लिए काम करता है।

साथियों,

यूपीए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किसानों को मदद देने में कंजूसी करती थी। अपने 10 साल में यूपीए सरकार ने सात लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण किसानों को दिया। 7 lakh crore rupees. जबकि हमारी सरकार इससे चार गुणा अधिक यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है। यूपीए सरकार के दौरान जहां सिर्फ पांच करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलता था, आज ये संख्या दोगुने से भी अधिक करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को पहुंची है। यानी देश के छोटे किसान को भी पहली बार मदद मिली है। हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी किसानों को दिया। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं। हम नेक नीयत से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, और आय में भी वृद्धि हो रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अब अगला चरण भारत के विकास का निर्णायक दौर है। वर्तमान में लिए गए निर्णय ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। हमें अपने सामर्थ्य को पहचानते हुए, उसे बढ़ाते हुए आगे चलना है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता को लक्ष्य बनाए, हर संस्था excellence को अपना संस्कार बनाए, हम सिर्फ उत्पाद न बनाएं, best-quality product बनाएं, हम सिर्फ रुटीन काम न करें, world-class काम करें, हम क्षमता को performance में बदलें। मैंने लाल किले से कहा है- यही समय है, सही समय है। यही समय है, भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।