गुरुदेव की धरती पर टीएमसी सरकार ने असामाजिक तत्वों को, लोगों का शोषण करने की खुली छूट दी: बोलपुर में पीएम मोदी
सौ साल पुरानी सोच पर चलने वाला इंडी गठबंधन, कभी भविष्य की सोच पर नहीं चल सकता: बोलपुर में पीएम मोदी

नमोशकार,

वीर भोम माने लाल माटिर देश बोलपुर एबांग वीरभूम एरांगा माटिर मानुष बालो चिंता.. सबसे पहले पांचों शक्ति पीठों को मेरा सत-सत प्रणाम। यहां इतनी विशाल संख्या में जो हमारी शक्ति स्वरूपा माताएं-बहने आशीर्वाद देने आई है उन सब माताओं-बहनों को सर झुकाकर मेरा प्रणाम।

भाइयों और बहनों,

बोलपुर आकर एक अलग ही सुख मिलता है। ये भूमि विश्व शांति के लिए गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की प्रयोगशाला रही है। यहां ऐतिहासिक विश्व भारती विश्वविद्यालय है और मुझे प्रधानमंत्री दायित्व के नाते इस महान संस्थान का चांसलर होने का सौभाग्य प्राप्त है। इसलिए वीरभूम से, बोलपुर से, मेरा आत्मीय और गहरा रिश्ता हो जाता है।

साथियों,

आज मैं यहां अलग ही मिजाज देख रहा हूं। जितने लोग यहां है ना, उससे चार गुना ज्यादा लोग हेलीपैड पर थे। मैं वहां चारों तरफ जाकर के सबको प्रणाम करके उनका आशीर्वाद लेने का प्रयास किया और अब आप सबका आशीर्वाद लेने के लिए आया हूं। साल 2014 में आपने मोदी को सिर्फ सरकार चलाने के लिए नहीं चुना था। प्रधानमंत्री पद पर रौब जमाने के लिए नहीं चुना था। आपने मुझे देश के लिए बड़े-बड़े लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए चुना था। जरा आप जो फोटो लेकर आई है मैं आपका बहुत आभारी हूं। जरा उनसे वो फोटो ले लीजिए और आप पीछे अपना एड्रेस ले लीजिए, मैं आपको चिट्ठी लिख दूंगा। आपने बढ़िया फोटो लेकर आई है। मैं आपका आभारी हूं। वो दे दीजिए मेरी टीम ले लेगी। आप अपना उस पर एड्रेस लिख लेना ताकि मैं चिट्ठी भेजूंगा आपको। हां ठीक है, धन्यवाद जी धन्यवाद। चलिए परमात्मा के आशीर्वाद बने रहे आप पर जी।

साथियों,

बीते 10 साल, मोदी ने उन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए दिन-रात मेहनत की है। मैंने अपने समय का पल-पल आपकी सेवा में, देश की सेवा में, पूरे कर्तव्य भाव से, पूरी नम्रता से, मैंने समर्पित किया है। इसलिए आज देश ने वो उपलब्धियां भी हासिल की है जो कांग्रेस 60 साल में नहीं कर पाई थी। ये जो छोटा बालक एक तस्वीर लेकर आया है, बेटे थोड़ा आगे आ जाओ वो ले लेगा। वो तस्वीर उनसे ले लीजिए वो छोटे बालक से, आप बैठिए। बड़े बड़े बाबू बैठे जरा ये छोटा बालक इतने प्यार से आशीर्वाद लेकर आया है। हां वो, थैंक यू बेटा बहुत-बहुत धन्यवाद थैंक यू। अब ये कागज ऊपर करने वाले नीचे बैठ जाओ। मेहरबानी करके आप रख दो नीचे। आप रख दो नीचे। हो गया भाई अब मुझे इतने लोग इंतजार कर रहे हैं। आप वो तस्वीर नीचे रखो मैं आपके प्यार के लिए आपका आभारी हूं, नीचे रखो मैं आपको कह रहा हूं, नीचे रखो।

साथियों,

ये तो युवा सपनों को दिशा देने वाली नगरी है। मोदी ने ठाना है नए भारत की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाना है। मोदी ने ठाना है नए भारत की शिक्षा व्यवस्था, गुणवत्ता युक्त हो। मोदी ने ठाना है देश में ज्यादा से ज्यादा शिक्षा संस्थान खुले। मैं नहीं चाहता हमारे बच्चे उच्च शिक्षा के लिए इधर-उधर भटके, उनके लिए सीटों की कमी हो। मैं आपसे जानना चाहता हूं पिछली शताब्दी की सोच पर चलने वाला इंडी गठबंधन कभी भविष्य के लिए सोच भी सकता है क्या? कभी ऐसा कर भी सकता है क्या? ये लोग तो तीन दशक तक नई एजुकेशन पॉलिसी तक नहीं ला पाए। ये काम आपके सेवक मोदी ने किया। मोदी देश की शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए एक के बाद एक कदम उठा रहा है और आज देश इसके शुभ नतीजे भी देख रहा है। बीते 10 सालों में औसतन हर हफ्ते एवरी वीक एक नया यूनिवर्सिटी खुली है देश में, आपको खुशी होगी एवरी वीक वन न्यू यूनिवर्सिटी। बीते 10 सालों में एवरी डे, हर दिन दो नए कॉलेज खुले हैं। 60 सालों में जितने मेडिकल कॉलेज देश में बने उतने मेडिकल कॉलेज हमने 10 साल में बना कर के आपको दे दिए। 60 साल में कांग्रेस सिर्फ सात एम्स ही बना पाई थी सेवन, आज 22 एम्स 22 एम्स देश में बने। 2014 में देश में सिर्फ नाइन ट्रिपल आईटी थी 9 ट्रिपल आईटी आज 25 है। ये सब मोदी किसके लिए कर रहा है? आपके नौजवान बेटे बेटियों के लिए, आपके भविष्य के लिए, क्यों हमारे बच्चे विदेशों पर आश्रित हो? क्यों आपकी मेहनत की कमाई उसका बड़ा हिस्सा दूसरे देशों में चला जाए?

साथियों,

2014 में ग्लोबल यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भारत के सिर्फ चार पांच इंस्टिट्यूट्स ही आते थे। इस वर्ष करीब 70 संस्थान टॉप 400 में है, 70 इन 400 और कई तो टॉप 50 में भी आ गए। इंस्टिट्यूट ऑफ नेशनल इंपॉर्टेंस की संख्या भी 75 से बढ़कर 150 के आसपास हो गई है। साथियो, ये काम मोदी ने सिर्फ 10 साल में करके दिखाए हैं और ये तो अभी ट्रेलर है। ये तो अभी ट्रेलर है। अभी तो मुझे बहुत काम करना है। एका तो शुदु ट्रेलर एखन तो अनेकी छु कोरा बाकी। इसलिए ही मैं आपसे तीसरे कार्यकाल के लिए आशीर्वाद मांगने आया हूं। साथियों, मैंने लाल किले से कहा था यही समय है, सही समय है और इसलिए हर समय देश को आगे बढ़ाने में जुटा हूं। देश के लोगों ने 2004 में इंडी गठबंधन को भी मौका दिया था लेकिन इन लोगों ने क्या किया? इंडी गठबंधन ने अपने 10 साल में लाखों करोड़ रुपए घोटाला, घोटाला और घोटाला। करप्शन, करप्शन, करप्शन। जब देश को टेलीकॉम नेटवर्क बढ़ाना था इन लोगों ने 2जी घोटाला कर दिया। जब देश को अपनी सेनाएं मजबूत करनी थी, इन लोगों ने पनडुब्बी, सबमरीन घोटाला और हेलीकॉप्टर घोटाला कर दिया। जब देश को स्पोर्ट्स की दुनिया में छा जाना था, इन लोगों ने कॉमनवेल्थ घोटाला कर दिया। यहां टीएमसी भी यही कर रही है। टीएमसी के नेताओं ने यहां हर तरह के घोटाले करने का रिकॉर्ड बना दिया है। ऐसे- ऐसे घोटाले जो कोई सोच भी नहीं सकता, और आपने देखा नोटों के ढेर, चोरी का माल और बैंक के मशीन, नोटों के ढेर गिनते- गिनते थक जाते हैं। पोंजी स्कीम घोटाला, राशन घोटाला, भरती घोटाला, कोयला घोटाला, पशु तस्करी घोटाला और हर घोटाला, मामूली नहीं सैकड़ों करोड़ रुपए का घोटाला। इन लोगों ने हर तरह से आपको लूटा है। आपके जेब काटे हैं। आपके बच्चों के भविष्य के सामने खाई बना दी है, खाई।

साथियों,

बंगाल का टीचर भर्ती घोटाला तो टीएमसी नेताओं के चरित्र को उजागर करता है। मैं जरा एक उदाहरण देना चाहता हूं। मैंने कश्मीर के कुछ नेताओं को एक बार बुलाया था। घाटी के 100 के करीब गांवों के लोगों को बुलाया था। दिल्ली में प्रधानमंत्री के घर पर बुलाया था। मैंने कहा मैं एक काम के लिए आपकी मदद चाहता हूं। आतंकवाद जोरों पर था। गांव- गांव में स्कूलें जलाते थे। मैंने उनको बुला कर के कहा मुझे एक मदद चाहिए। बोले क्या? मैंने कहा मैं आतंकवाद से लड़ लूंगा, मैं आतंकवाद को जमीन पर से उखाड़ दूंगा लेकिन अभी मुझे एक मदद चाहिए। बोले क्या? मैंने कहा गांव में ये आतंकवादी स्कूल जलाते हैं, मुझे मदद कीजिए अब एक भी स्कूल जलना नहीं चाहिए। मैंने कहा जब वो स्कूल जलाते हैं तब एक इमारत नहीं जलाते, एक मकान नहीं जलाते, वो आपके गांव के बच्चों का भविष्य जला देते हैं। और आप भाई-बहन मुझे आशीर्वाद देंगे, कश्मीर के वो लोग और ये बात मैं करीब सात-आठ साल पहले की करता हूं तब तो मेरे सामने सवालिया निशान थे। लेकिन उन सभी नेताओं ने मुझे कहा कि साहब, काम कठिन है। लेकिन हम आपकी भावना को समझते हैं। हम इसके लिए कोशिश करेंगे और आज मैं गर्व से कह सकता हूं कि कश्मीर के गांवों में स्कूलों को जलाना बंद हो गया। बच्चों के भविष्य को वो समझे लेकिन ये टीएमसी देखिए बच्चों के भविष्य को दांव पर लगा रही है और शिक्षक भर्ती में घोटाला करके आपके बच्चों के भविष्य को दांव पर लगा दिया। 25000 शिक्षक, आज अदालत ने उनको घर भेज दिया। वो शिक्षक तो गए सो गए आपके बच्चों के भविष्य पर ये भ्रष्टाचारियों ने ताला लगा दिया है। जो आपके बच्चों के भविष्य के साथ खेलते हैं, क्या ऐसे टीएमसी को माफ कर सकते हैं क्या? कर सकते हैं क्या? उनको सजा दोगे? इस बार कमल को वोट देकर के उनको सजा दीजिए।

भाइयो बहनों,

टीएमसी भ्रष्टाचार की दुकान खोल कर के बैठी है यहां हाईकोर्ट के आदेश पर एजेंसियां कारवाई कर रही है। कारवाई शुरू होते ही टीएमसी के नेताओं के घरों से करोड़ों रुपये मिलने लगे हैं। ये टीएमसी वालों के यहां से जो पैसे मिलते हैं वो पैसे किसके हैं भाई? किसके पैसे हैं? ये आपके है कि नहीं है? आपके मालिक के है कि नहीं? कि आपके घर में कोई चोरी कर जाए आप चोर को माफ करोगे क्या? करोगे क्या? आपके बंगाल में चोरी कर ले माफ करोगे क्या? ये पैसे बंगाल की जनता के हैं। चर्चा है एक एक पद के लिए चार चार, पांच पांच, छ-छ लाख रुपए की रिश्वत ली है। पैसे लेकर के ओएमआर सीट तक बदल रहे थे। टीएमसी ने बंगाल के युवाओं को खून के आंसू रोने पर मजबूर किया है। आप मुझे बताइए इनको सजा मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए? सब के सब मुझे बताइए सजा मिलनी चाहिए कि नहीं? कौन सजा दिलवा सकता है? इनको सजा कौन दिलवा सकता है? इनको सजा कौन दिलवा सकता है? मोदी तब दिलवा सकता है जब आपके सब के वोट मिलेंगे तब मुझे ताकत मिलेगी।

साथियों,

मैंने बंगाल बीजेपी के लोगों से कहा है, एक लीगल सेल और एक सोशल मीडिया प्लेटफार्म बनाइए। मैंने बंगाल बीजेपी को कहा है एक लीगल सेल और एक सोशल मीडिया प्लेटफार्म बताइए। इससे उन युवाओं की मदद होगी जो इस घोटाले के शिकार हुए हैं, निर्दोष है। वो अपने मेरिट पे शिक्षक बने हैं। मैं आज बंगाल के युवाओं को गारंटी देता हूं। जिसने हमारे बंगाल के युवाओं को रुलाया है, उन्हें मोदी चैन से नहीं बैठने देगा। बेटी, बेटी आप थक जाओगी, मुझे तुम पर दया आ रही है। भाई ये बेटी एक फोटो लेकर आई है और कब से, आप मेहरबानी करके बंद कीजिए मुझे परेशान मत कीजिए। इस बच्ची को, उनकी फोटो ले लीजिए बेचारी आधे घंटे से खड़ी है। थैंक यू बेटा, थैंक यू। खुश? खुश? आर यू हैप्पी? शाबाश बैठिए अब बैठिए।

साथियों,

ये, जिन्होनें आपको लूटा है ना मोदी उनको छोड़ेगा नहीं। भ्रष्टाचारी देर के छोरबोनाश ये छा मोदी गारंटी।
भाइयो और बहनों टीएमसी हो या कांग्रेस इन्हें आपके भविष्य की चिंता नहीं है। इन्हें सिर्फ अपने वोट बैंक से मतलब है आप भी जानते हैं कि कांग्रेस ने धर्म के आधार पर देश का बंटवारा किया तब बहुत सारे हिंदू, सिख, बुद्ध, जैन, पारसी दूसरी तरफ रह गए थे। उनके साथ वायदा किया गया था कि भारत उनकी रक्षा करेगा लेकिन ये वादा करके कांग्रेस उन लोगों को भूल गई। उनके साथ सीमा पार अत्याचार होता रहा। वो खत्म होने की कगार पर आ गए, आज सीएए के माध्यम से मोदी कांग्रेस सरकारों को उस गलती को सुधार रहा है और ये लोग अपनी गलती मानने के बजाय झूठ फैला रहे हैं। मैं हर शरणार्थी परिवार को कहूंगा, टीएमसी के झूठ पर बिल्कुल ध्यान मत दीजिए।


साथियों,

टीएमसी, लेफ्ट और इंडी एलायंस की नियत देश को तबाह करने की है। बीते तीन-चार महीने में कितने उदाहरण सामने आए हैं, कांग्रेस के अध्यक्ष राम भक्तों और शिव भक्तों को लड़ाने में जूटे हैं। कांग्रेस के शहजादे शक्ति का विनाश करने में जुटे हैं। ये सारे मिलकर संविधान की भावना को तार-तार करने में जुटे हैं। बाबा साहेब आंबेडकर की पीठ में छुरा भोंक रहे हैं। ये लोग संविधान को बदलना चाहते हैं ताकि एससी, एसटी, ओबीसी के हक का आरक्षण धर्म के आधार पर बांट दें। कांग्रेस का घोषणा पत्र तो ये तक कहता है कि सरकारी टेंडर में भी माइनॉरिटी को कोटा देंगे और मैं उनको घेर रहा हूं, सवाल पूछ रहा हूं, 10 दिन हो गए मुंह पे ताला लगा के बैठ गए हैं। मैंने कांग्रेस को, इंडी गठबंधन को तीन चुनौतियां दी है। मैंने कहा है कि कांग्रेस लिख कर के दें वो संविधान नहीं बदलेगी। धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं देंगी। ओबीसी कोटा कम नहीं करेंगी। लेकिन इन चुनौतियों का आज तक जवाब नहीं आया। मैं जवाब नहीं देने और मुझे मालूम है वो जवाब नहीं देंगें इनकी नियत में खोट है।

साथियों,

यहां बंगाल में कांग्रेस का कोई वजूद नहीं है। लेकिन आपको कांग्रेस के इरादों से जरूर परिचित रहना है। कांग्रेस के शहजादे एक्सरे मशीन लेकर के आए हैं। कहते हैं, आपके पास घर, दुकान, खेत, सोना, चांदी, मंगलसूत्र जो भी है उसकी जांच कराएंगे। और जांच के बाद ज्यादा है ले लेंगे और उसका एक हिस्सा अपने वोट बैंक को बांट देंगे। क्या आप आपकी संपत्ति जाने देंगे क्या? आपका सोना- चांदी जाने देंगे क्या? आपका घर जाने देंगे क्या? आपका खेत जाने देंगे क्या? इसलिए कांग्रेस से सावधान रहो। टीएमसी से सावधान रहो। लेफ्ट वालों से सावधान रहो।

साथियों,

कुछ ही दिनों में कोची से बैशाख के दिन गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की जन्मजयंती है और आज से जब मैं पहली बार प्रधानमंत्री बना था, तो उस समय रवींद्रनाथ टागोर जी की जन्मजयंती पर यहां आया था और बंगाल में आकर के मैंने सामाजिक सुरक्षा की योजना लॉन्च की थी। 90 पैसे में इंश्योरेंस, ये योजना लॉन्च की थी मैंने। और आज देश के करोड़ों गरीबों को इसका लाभ हो रहा है। मैं बोलपुर के इस मंच से गुरुदेव के चरणों में प्रणाम करता हूं। उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं। मैं जब भी बंगाल आता हूं, कई सवाल मेरे मन में चलते हैं। आज जो पश्चिम बंगाल की स्थिति है, क्या ऐसी ही बंगाल की कल्पना हमारे पूर्वजों ने की थी? बीते अनेक दशकों में जैसी खूनी राजनीति, भ्रष्ट राजनीति यहां चली है वो देखकर हमारे पूर्वज क्या सोचते होंगे। गुरुदेव की इस धरती पर टीएमसी ने असामाजिक तत्वों को लोगों का शोषण करने की खुली छूट दे रखी है। गांवों पर टीएमसी का कब्जा, अस्पतालों पर टीएमसी का कब्जा, थानों पर टीएमसी का कब्जा, खदानों पर टीएमसी का कब्जा, ऐसे कोई पोलिटिकल पार्टी जो ऐसे गिरोह की तरह काम करती है क्या? माफिया चलाती है क्या? ये संदेश खाली में बहनों के साथ जो कुछ भी हुआ वो ऐसे ही माफिया राज का परिणाम है। ऐसे न जाने कितने संदेशखाली यहां अभी भी दबे पड़े हैं। जब जांच एजेंसी अपना काम करने आती है तो उन पर हमले किये जाते हैं और सरकार के लोग हमलावरों का साथ देते है। बंगाल में टीएमसी भीड़ तंत्र चला रही है गणतंत्र की उसने कब्र खोद ली है। आए दिन कोर्ट को छोटी-छोटी बातों के लिए यहां सरकार को फटकार लगानी पड़ती है। देश को लोकतंत्र और संविधान के विरुद्ध चलने वाले ऐसे कारनामों पर लगाम लगानी जरूरी है और इसके लिए आपको मोदी को मजबूत करना है।

भाइयो और बहनों,

बीजेपी को दिया गया हर एक वोट टीएमसी के शोषण के खिलाफ दिया वोट होने वाला है। बीजेपी को दिया हर एक वोट बंगाल की शांति के लिए दिया वोट होगा। आपको बोलपुर से हमारी छोटी बहन पिया साह को और वीरभूम से बायदेव तनु भट्टाचार्य जी को संसद में भेजना है। मेरे साथी के रूप में भेजना है। आपका एक-एक वोट जब आप इनको वोट देंगे ना वो सीधा-सीधा मोदी को पहुंचेगा। मोदी की ताकत बढ़ाएगा। अब मेरा एक और काम है करेंगे? मेरा एक और काम करेंगे? सब के सब करेंगे? घर- घर जाइएगा और सबको कहिएगा, अपने मोदी जी आए थे आप सबको नमस्कार कहा है। मेरा नमस्कार पहुंचाएंगे?

बोलो भारत माता की... भारत माता की... भारत माता की...

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
Engineering goods exports up 10.4% in January,2026, crosses $100 billion mark in April-January Period of FY26

Media Coverage

Engineering goods exports up 10.4% in January,2026, crosses $100 billion mark in April-January Period of FY26
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Text of PM’s address at the News18 Rising Bharat Summit
February 27, 2026

इजराइल की हवा यहाँ भी पहुँच गई है।

नमस्कार!

नेटवर्क 18 के सभी पत्रकार, इस व्यवस्था को देखने वाले सभी साथी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी राइजिंग भारत की चर्चा कर रहे हैं। और इसमें strength within पर आपका जोर है, यानी साधारण शब्दों में कहूं, तो देश के अपने खुद के सामर्थ्य पर आपका फोकस है। और हमारे यहां तो शास्त्रों में कहा गया है - तत् त्वम असि! यानी जिस ब्रह्म की खोज मे हम निकले हैं, वो हम ही हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो सामर्थ्य हमारे भीतर है उसे हमें पहचानना है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपना वही सामर्थ्य पहचाना है, और इस सामर्थ्य को सशक्त करने के लिए आज देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

साथियों,

सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता, सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वो ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है, लेकिन इतिहास के एक लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों में, हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को ही हीनता से भर दिया गया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर ये भर दिया था, कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी यानी, फॉलोअर हैं, हमारे यहां ये भी कहा गया है – यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी। यानी जैसी जिसकी भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती है। जब भावना में ही हीनता थी, तो सिद्धि भी वैसी ही मिल रही है। हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे, विदेशी मुहर का इंतजार करते थे, ये वो गुलामी थी जो राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी, भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया। और इसका नुकसान हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण, हम ट्रेड डील्स में हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि अरे ये क्या हो गया, कैसे हो गया, विकसित देश भारत से ट्रेड डील्स करने में इतने उत्सुक क्यों हैं। इसका उत्तर है हताशा, निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत। अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा होता, अगर ये हाल होते तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील्स करता, अरे हमारी तरफ देखता भी नहीं।

लेकिन साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोये हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। एक समय में जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा दबदबा था, तो हमारा क्या सामर्थ्य था? भारत की मैन्युफैक्चरिंग, भारत के प्रोडक्टस की क्वालिटी, भारत की अर्थ नीति, अब आज का भारत फिर से इन बातों पर फोकस कर रहा है। इसलिए हमने मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया, हमने मेक इन इंडिया पर बल दिया, हमने अपनी बैंकिंग सिस्टम को सशक्त किया, महंगाई जो डबल डिजिट की दर से भाग रही थी, उसका कंट्रोल किया और भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन बनाया। भारत का यही सामर्थ्य है कि दुनिया के विकसित देश सामने से भारत के साथ ट्रेड डील करने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

साथियों,

जब किसी राष्ट्र के भीतर, छिपी हुई उसकी शक्ति जागती है, तो वह नई उपलब्धियां हासिल करता है। मैं आपको कुछ और उदाहरण देता हूं। जैसे मैं जब कभी दूसरी देशों के हेड ऑफ द गर्वमेंट से मिलता हूं, तो वो जनधन, आधार और मोबाइल की इतनी शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं। जिस भारत में एटीएम भी, दुनिया की विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली? जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था, वो भारत डीबीटी के जरिये 24 लाख करोड़ रूपये, यानी Twenty four trillion रुपीज कैसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है? भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है।

साथियों,

दुनिया हैरान होती है, कि जिस भारत में 2014 तक, करीब तीन करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वो आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गया? जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद ना थी, वो भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया? जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट-लतीफी और धीमी-रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत, नमो भारत, ऐसी सेमी-हाईस्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है?

साथियों,

एक समय था, जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था। आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है। और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचाना है, जिस Strength Within की आप चर्चा कर रहे हैं, ये उसका ही उदाहरण है।

साथियों,

जब हम गर्व से आगे बढ़ते हैं, तो दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है, वो नजर भी बदली है। आप याद कीजिए, कुछ साल पहले तक दुनिया में, ग्लोबल मीडिया में, भारत के किसी इवेंट की कितनी कम चर्चा होती थी। भारत में होने वाले इवेंट्स को उतनी तवज्जो ही नहीं दी जाती थी। और आज देखिए, भारत जो करता है, जो एक्शन यहां होते हैं, उसका वैश्विक विश्लेषण होता है। AI समिट का उदाहरण आपके सामने है, इसी भवन में हुआ है। AI समिट में 100 से ज्यादा देश शामिल हुए, ग्लोबल नॉर्थ हो या फिर ग्लोबल साउथ, सभी एक साथ, एक ही जगह, एक टेबल पर बैठे। दुनिया के बड़े-बड़े कॉर्पोरेशन्स हों या फिर छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स, सभी एक साथ जुटे।

साथियों,

अब तक जितनी भी औद्योगिक क्रांतियां आई हैं, उनमें भारत और पूरा ग्लोबल साउथ सिर्फ फॉलोअर रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस युग में, भारत निर्णयों में सहभागी भी है और उन्हें शेप भी कर रहा है। आज हमारे पास खुद का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम है, डेटा-सेंटर में निवेश करने की ताकत है और AI डेटा को स्टोर करने के लिए, प्रोसेस करने के लिए, जिस पावर की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उस पर भी भारत तेजी से काम कर रहा है। हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में जो Reform किया है, वो भी भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूती देने में मदद करेगा।

साथियों,

AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था। लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने, देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे, बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालिएपन को भी expose कर दिया है। जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। ज़ाहिर है, कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है। इसलिए, इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छुपाना हो तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, और जब अपना गौरवगान करना हो, तो एक ही परिवार को सारा क्रेडिट देती है।

साथियों,

कांग्रेस अब विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की टूलकिट बनकर रह गई है। और ये अंध-विरोध की मानसिकता इतनी बढ़ गई है, कि ये देश को हर मंच, हर प्लेटफॉर्म पर नीचा दिखाने से नहीं चूकते। देश कुछ भी अच्छा करे, देश के लिए कुछ भी शुभ हो रहा हो, कांग्रेस को विरोध ही करना है।

साथियों,

मेरे पास एक लंबी सूची है, देश की संसद की नई इमारत बनी, उसका विरोध। संसद के ऊपर अशोक स्तंभ के शेरों का विरोध। अब जिनके बब्बर शेर सामान्य नागरिकों के जूते खाकर के भाग रहे थे, उनके संसद भवन के शेर के दांत देखकर के डर लग गया उनको। कर्तव्य भवन बना, उसका भी विरोध। सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की, उसका भी विरोध। बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, उसका भी विरोध। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, उसका भी विरोध। यानी देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस के टूलकिट से एक ही चीज निकलती है- विरोध।

साथियों,

देश ने आर्टिकल 370 की दीवार गिराई, देश खुश हुआ। लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया। हमने CAA का कानून बनाया- उसका विरोध। हम महिला आरक्षण कानून लाए- उसका विरोध। तीन तलाक के विरुद्ध कानून लाए- उसका विरोध। हम UPI लेकर आए, उसका विरोध। स्वच्छ भारत अभियान लेकर आए, उसका विरोध। देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई, तो उसका भी विरोध।

साथियों,

लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध-विरोध नहीं होता, डेमोक्रेसी में विपक्ष का मतलब वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता, कांग्रेस को सबक सिखा रही है, आज से नहीं, बीते चार दशकों से लगातार ये काम देश की जनता कर रही है। मैं जो कहने जा रहा हूं, मीडिया के साथी उसका भी ज़रा एनालिसिस करिएगा। आपको पता लगेगा कि कांग्रेस के वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि देश के लोग अब कांग्रेस को वोट देने लायक ही नहीं मानते। और इसकी शुरुआत 1984 के बाद ही होनी शुरू हो गई थी। 1984 में कांग्रेस को 39 परसेंट वोट मिले थे, और 400 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस के वोट कम ही होते चले गए। और आज कांग्रेस की हालत ये है कि, देश में सिर्फ, सिर्फ चार राज्य ऐसे बचे हैं, जहां कांग्रेस के पास 50 से ज्यादा विधायक हैं। बीते 40 वर्षों में युवा वोटर्स की संख्या बढ़ती गई और कांग्रेस साफ होती गई। कांग्रेस, परिवार की गुलामी में डूबे लोगों का एक क्लब बनकर रह गई है। इसलिए पहले मिलेनियल्स ने कांग्रेस को सबक सिखाया, और अब जेन जी भी तैयार बैठी है।

साथियों,

कांग्रेस और उसके साथियों की सोच इतनी छोटी है, कि उन्होंने दूरदृष्टि से काम करने को भी गुनाह बना दिया है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं— “इतनी दूर की बात अभी क्यों कर रहे हो?” कुछ लोग ये भी कहते हैं कि तब तक मोदी जिंदा थोड़ी रहेगा, सच्चाई यह है कि राष्ट्र निर्माण कभी भी तात्कालिक सोच से नहीं होता। वो एक बड़े विजन, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से होता है। मैं कुछ और तथ्य नेटवर्क 18 के दर्शकों के सामने रखना चाहता हूं। भारत हर साल विदेशी समुद्री जहाजों से मालढुलाई पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है किराए पर। फर्टिलाइजर के आयात पर हर साल सवा दो लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम आयात पर हर साल 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे हैं। अगर यही निवेश 20–25 वर्ष पहले आत्मनिर्भरता की दिशा में किया गया होता, तो आज ये पूंजी भारत के इंफ्रास्ट्रचर, रिसर्च, इंडस्ट्री, किसान और युवाओं की क्षमताओं को मजबूत कर रही होती। आज हमारी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। विदेशी जहाजों को 6 लाख करोड़ रुपए ना देना पड़े इसलिए भारतीय शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। फर्टिलाइजर का domestic प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नए प्लांट लग रहे हैं, नैनो-यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।

और साथियों,

हमें भविष्य की ओर देखते हुए भी आज ही निर्णय लेने हैं। इसलिए आज भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। रक्षा उत्पादन में, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में, ड्रोन टेक्नोलॉजी में, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में, और उसमें निवेश, आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा की नींव है। 2047 का लक्ष्य कोई राजनीतिक नारा नहीं है। यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का संकल्प भी है, जहाँ कांग्रेस की सरकारों के समय कई क्षेत्रों में समय रहते निवेश नहीं किया। आज अगर हम ख़ुद स्वदेशी जहाज, स्वदेशी शिप्स बनाएँगे, ख़ुद एनर्जी का प्रोडक्शन करेंगे, ख़ुद नई टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे, तो आने वाली पढ़ियाँ इम्पोर्ट के बोझ की नहीं, एक्सपोर्ट की क्षमता पर चर्चा करेंगी। राष्ट्र की प्रगति “आज की सुविधा” से नहीं, “कल की तैयारी” से तय होती है। और दूरदृष्टि से की गई मेहनत ही 2047 के आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत की आधारशिला है। और इसके लिए कांग्रेस अपने कितने ही कपड़े फाड़ ले, हम निरंतर काम करते रहेंगे।

साथियों,

राष्ट्र निर्माण की, Nation Building की एक बहुत अहम शर्त होती है- नेक नीयत की। कांग्रेस और उसके साथी दल, इसमें भी फेल रहे हैं। कांग्रेस और उसके साथियों ने कभी नेक नीयत के साथ काम नहीं किया। गरीब का दुख, उसकी तकलीफ से भी इन्हें कोई वास्ता नहीं है। जैसे बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई। अगर नेक नीयत होती तो क्या गरीबों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका जाता क्या? नहीं। आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं। नेटवर्क 18 के दर्शकों को मैं एक और आंकड़ा देता हूं। तमिलनाडु के गरीब परिवारों के लिए, करीब साढ़े नौ लाख पक्के घर एलोकेट किए गए हैं, साढ़े नौ लाख। लेकिन इनमें से तीन लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्यों, क्योंकि DMK सरकार गरीबों के इन घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह है, नीयत नेक नहीं है।

साथियों,

मैं आपको एग्रीकल्चर सेक्टर का भी उदाहरण देता हूं। कांग्रेस के समय में खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। छोटे किसानों को कोई पूछता नहीं था, फसल बीमा का हाल बेहाल था, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई थी, कांग्रेस बजट में घोषणाएं जरूर करती थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था, क्योंकि उसकी नीयत ही नहीं थी। हमने देश के किसानों के लिए नेक नीयत के साथ काम करना शुरू किया, और आज उसके परिणाम दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर एक्सपोर्टर्स में से एक बन रहा है। हमने हर स्तर पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खाते में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक जमा किए गए हैं। हमने लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया और रिकॉर्ड खरीद भी की है। मैं आपको सिर्फ दाल का ही आंकड़ा देता हूं। UPA सरकार ने 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दाल, किसानों से MSP पर खरीदी- 6 लाख मीट्रिक टन। और हमारी सरकार अभी तक, करीब 170 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 30 गुणा अधिक दाल MSP पर खरीद चुकी है। अब आप तय करिये, कौन किसानों के लिए काम करता है।

साथियों,

यूपीए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किसानों को मदद देने में कंजूसी करती थी। अपने 10 साल में यूपीए सरकार ने सात लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण किसानों को दिया। 7 lakh crore rupees. जबकि हमारी सरकार इससे चार गुणा अधिक यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है। यूपीए सरकार के दौरान जहां सिर्फ पांच करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलता था, आज ये संख्या दोगुने से भी अधिक करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को पहुंची है। यानी देश के छोटे किसान को भी पहली बार मदद मिली है। हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी किसानों को दिया। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं। हम नेक नीयत से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, और आय में भी वृद्धि हो रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अब अगला चरण भारत के विकास का निर्णायक दौर है। वर्तमान में लिए गए निर्णय ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। हमें अपने सामर्थ्य को पहचानते हुए, उसे बढ़ाते हुए आगे चलना है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता को लक्ष्य बनाए, हर संस्था excellence को अपना संस्कार बनाए, हम सिर्फ उत्पाद न बनाएं, best-quality product बनाएं, हम सिर्फ रुटीन काम न करें, world-class काम करें, हम क्षमता को performance में बदलें। मैंने लाल किले से कहा है- यही समय है, सही समय है। यही समय है, भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।