मंच पर विराजमान वित्त मंत्री जी, वित्त राज्यमंत्री जी, RBI के गवर्नर, नाबार्ड के चेयरमैन, Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation और देश के विशाल बैंकिंग समूहों के अधिकारीगण, अलग अलग राज्यों में अनेक स्थानों पर उपस्थित मंत्रिपरिषद के मेरे साथी, वहां के सांसद विधायक और वहां रहने वाले सारे Depositors, हमारे सारे जमाकर्ता भाइयों और बहनों,

आज देश के लिए बैंकिंग सेक्टर के लिए और देश के करोड़ों बैंक अकाउंट होल्डर्स के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। दशकों से चली आ रही एक बड़ी समस्या का कैसे समाधान निकाला गया है, आज का दिन उसका साक्षी बन है। आज के आयोजन का जो नाम दिया गया है उसमें Depositors First, जमाकर्ता सबसे पहले की भावना को सबसे पहले रखना, और इसे और सटीक बना रहा है। बीते कुछ दिनों में एक लाख से ज्यादा Depositors को बरसों से फंसा हुआ उनका पैसा उनके खाते में जमा हो गया है। और ये राशि करीब-करीब 1300 करोड़ रुपए से भी ज्यादा है। अभी आज यहां इस कार्यक्रम में और इसके बाद भी 3 लाख और ऐसे Depositors को बैंकों में फंसा उनका पैसा उनके खाते में जमा होने वाला है, पैसा उनको मिलने वाला है। ये अपने आप में छोटी बात नहीं है और मैं खासकर के हमारे देश को हमारे जो मीडिया के साथी हैं। आज मैं उनसे एक request करना चाहता हूं। और मेरा अनुभव है जब स्वच्छता अभियान चला रहा था, मीडिया के मित्रों को request की आज भी उसको वो बराबर मेरी मदद कर रहे हैं। आज मैं फिर से उनसे एक request कर रहा हूं। हम जानते हैं कि बैंक डूब जाये तो कई दिनों तक खबरें फैली रहती हैं टीवी पर अखबारों में, स्वाभाविक भी है, घटना ही ऐसी होती है। बड़ी – बड़ी हेडलाइन्स भी बन जाती हैं। बहुत स्वाभाविक है। देखिये आज जब देश ने एक बहुत बड़ा रिफार्म किया, एक बहुत बड़ी मजबूत व्यवस्था शुरू की है। Depositors को, जमाकर्ताओं को उनका पैसा वापस दिलाया जा रहा है। मैं चाहता हूं उसकी भी उतनी ही चर्चा मीडिया में हो, बार – बार हो। इसलिए नहीं कि मोदी ने किया है इसलिए कर रहा है। ये इसलिए जरूरी है कि देश के Depositors में विश्वास पैदा हो। हो सकता है कुछ लोगों के गलत कारणों से, गलत आदतों से बैंक डूबेगा, हो सकता है, लेकिन जमाकर्ता का पैसा नहीं डूबेगा। जमाकर्ता का पैसा सुरक्षित रहेगा। ये मैसेज से देश के जमाकर्ता में विश्वास पैदा होगा। बैंकिंग व्यव्स्था पर भरोसा होगा, और ये बहुत जरूरी है।

भाइयों और बहनों,

कोई भी देश समस्याओं का समय पर समाधान करके ही उन्हें विकराल होने से बचा सकता है। लेकिन आप भलिभांति जानते हैं। वर्षों तक हमारे यहां एक ही प्रवृत्ति रही की बई समस्या हैं टाल दो। दरी के नीचे डाल दो। आज का नया भारत, समस्याओं के समाधान पर जोर लगाता है, आज भारत समस्यओं को टालता नहीं है। आप जरा याद करिए, कि एक समय था जब कोई बैंक संकट में आ जाता था तो Depositors को जमाकर्ताओं को अपना ही पैसा, ये पैसा उनका खुद का है, जमाकर्ता का पैसा है। उनका खुद का पैसा पाने में नाको दम निकल जाता था। कितनी परेशानी उठानी पड़ती थी। और चारो तरफ जैसे हाहाकार मच जाता था। और ये बहुत स्वाभाविक भी था। कोई भी व्यक्ति बहुत विश्वास के साथ बैंक में पैसा जमा कराता है। खासकर हमारे मध्यम वर्ग के परिवार, जो फिक्सड सैलरी वाले लोग हैं वो, फिक्सड इनकम वाले लोग हैं, उन लोगों के जीवन में तो बैंक ही उनका आसरा होती हैं। लेकिन कुछ लोगों की गलत नीतियों के कारण जब बैंक डूबता था, तो सिर्फ इन परिवारों को सिर्फ पैसा नहीं फसता था, एक तरह से उनकी पूरी जिंदगी ही फंस जाती थी। पूरा जीवन, सारा एक प्रकार से अंधकार सा लगता था। अब क्या करेंगे। बेटे-बेटी की कॉलेज की फीस भरनी है - कहां से भरेंगे? बेटे-बेटी की शादी करनी है- कहां से पैसा आएगें? किसी बुजुर्ग का इलाज कराना है- कहां से पैसा लाएंगें? अभी बहन जी मुझे बता रही थी। कि उनके परिवार में हार्ट का ऑपरेशन कराना था। कैसे दिक्कत आई और अब ये कैसा काम हो गया। इन सवालों का पहले कोई जवाब नहीं होता था। लोगों को बैंक से अपना ही पैसा प्राप्त करने में निकलवाने में बरसों लग जाते थे। हमारे गरीब भाई-बहनों ने, निम्न मध्यम वर्ग के लोगों ने, हमारे मध्यम वर्ग ने दशकों तक इस स्थिति को भोगा है, सहा है। विशेष रूप से को-ऑपरेटिव बैंकों के मामले में समस्याएं और अधिक हो जाती थी। आज जो लोग अलग-अलग शहरों से इस कार्यक्रम में जुड़े हैं, वो इस दर्द, इस तकलीफ को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। इस स्थिति को बदलने के लिए ही, हमारी सरकार ने बहुत संवेदनशीलता के साथ फैसले लिए, रिफार्म किया, कानून में बदलाव किया। आज का ये आयोजन, उन फैसलों का ही एक परिणाम है। और मुझे बराबर याद है मैं मुख्यमंत्री रहा हूं और बैंक में उफान खड़ा हो जाता था। तो लोग हमारा ही गला पकड़ते थे। या तो निर्णय भारत सरकार को करना होता था या उन बैंक वालों को करना था लेकिन पकड़ते थे मुख्यमंत्री को। हमारे पैसों को कुछ करो, मुझे काफी परेशानियां उस समय रहती थी, और उनका दर्द भी बहुत स्वाभाविक था। और उस समय मैं भारत सरकार को बार – बार रिक्वेस्ट करता था। कि एक लाख रुपये की राशि हमें पांच लाख बढ़ानी चाहिए ताकि अधिकतम परिवारों को हम satisfy कर सकें। लेकिन खैर, मेरी बात नहीं मानी गई। उन्होंने नहीं किया तो लोगों ने ही किया, मुझे भेज दिया यहां। मैने कर भी दिया।

साथियों,

हमारे देश में बैंक डिपॉजिटर्स के लिए इंश्योरेंस की व्यवस्था 60 के दशक में बनाई गई थी। यानि उसमें भी करीब 60 साल हो गए। पहले बैंक में जमा रकम में से सिर्फ 50 हजार रुपए तक की राशि पर ही गारंटी थी। फिर इसे बढ़ाकर एक लाख रुपए कर दिया गया था। यानि अगर बैंक डूबा, तो Depositors को, जमाकर्ताओं को सिर्फ एक लाख रुपए तक ही मिलता था, लेकिन वो भी गारंटी नहीं कब मिलेगा। 8-8 व 10-10 साल तक मामला लटका रहता था। कोई समय सीमा नहीं थी। गरीब की चिंता को समझते हुए, मध्यम वर्ग की चिंता को समझते हुए हमने इस राशि को 1 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दिया है। यानि आज की तारीख में कोई भी बैंक संकट में आता है, तो Depositors को, जमाकर्ताओं को, 5 लाख रुपए तक तो जरूर वापस मिलेगा। और इस व्यवस्था से लगभग 98 प्रतिशत लोगों के अकाउंट्स पूरी तरह से कवर हो चुके हैं। यानि 2% को ही थोड़ा – थोड़ा रह जाएगा। 98% प्रतिशत लोगों का जितना पैसा उनका है सारा कवर हो रहा है। और आज डिपॉजिटर्स का लगभग, ये आंकडा भी बहुत बड़ा है। आजादी का 75 साल चल रहा है। अमृत महोत्सव चल रहा है। ये जो हम निर्णय कर रहे हैं। इससे 76 लाख करोड़ रुपए पूरी तरह से insured है। इतना व्यापक सुरक्षा कवच तो विकसित देशों में भी नहीं है।

साथियों,

कानून में संसोधन करकेा, रिफार्म करके एक और समस्या का समाधान करने की कोशिश की है। पहले जहां पैसा वापसी की कोई समय सीमा नहीं थी, अब हमारी सरकार ने इसे 90 दिन यानि 3 महीने के भीतर ये करना ही होगा ये कानूनन तय कर लिया है। यानि हमने ही सारे बंधन हम पर डाले हैं। क्योंकि इस देश के सामान्य मानवी, इस देश के मध्यम वर्ग की, इस देश के गरीब की हमे चिंता है। इसका मतलब ये हुआ कि अगर बैंक वीक हो जाती है। बैंक अगर डूबने की स्थिति में भी है, तो 90 दिन के भीतर जमाकर्ताओं को उनका पैसा वापस मिल जाएगा। मुझे खुशी है कि कानून में संशोधन के 90 दिन के भीतर ही, हजारों डिपॉजिटर्स के क्लेम सेटल भी किये जा चुके हैं।

साथियों,

हम सब बड़े विद्वान, बुद्धिमान, अर्थशास्त्री तो बात को अपने – अपने तरीके से बताते हैं। मैं अपनी सीधी साधी भाषा में बताता हूं। हर कोई देश प्रगति चाहता है, हर देश विकास चाहता। लेकिन ये बात हमें याद रखनी होगी। देश की समृद्धि में बैंकों की बड़ी भूमिका है। और बैंकों की समृद्धि के लिए Depositors का पैसा सुरक्षित होना वो भी उतना ही जरूरी है। हमें बैंक बचाने हैं तो Depositors को सुरक्षा देनी ही होगी। और हमने ये काम करके बैंकों को भी बचाया है, Depositors को भी बचाया है। हमारे बैंक, जमाकर्ताओं के साथ-साथ हमारी अर्थव्यवस्था के लिए भी भरोसे के प्रतीक हैं। इसी भरोसे, इसी विश्वास को सशक्त करने के लिए बीते सालों से हम निरंतर प्रयास कर रहे हैं। बीते वर्षों में अनेक छोटे सरकारी बैंकों को बड़े बैंकों के साथ मर्ज करके, उनकी कैपेसिटी, कैपेबिलिटी और ट्रांसपेरेंसी, हर प्रकार से सशक्त की गई है। जब RBI, को-ऑपरेटिव बैंकों की निगरानी करेगा तो, उससे भी इनके प्रति सामान्य जमाकर्ता का भरोसा और बढ़ेगा। हमने को-ऑपरेटिव की एक नई व्यवस्था की है, नई मिनिस्ट्री बनाई है। इसके पीछे भी को-ऑपरेटिव संस्थाओं को ताकतवर बनाने का इरादा है। को-ऑपरेटिव मिनिस्ट्री के रूप में विशेष व्यवस्था बनने से भी को-ऑपरेटिव बैंक अधिक सशक्त होने वाले हैं।

साथियों,

दशकों-दशक तक देश में ये धारणा बन गई थी कि बैंक सिर्फ ज्यादा पैसे वालों के लिए होते हैं। ये अमीरों का घराना है ऐसा लगता था। जिसके पास अधिक पैसा है वही जमा करता है। जिसके पास बड़ा बिजनेस है, उसी को जल्दी और ज्यादा लोन मिलता है। ये भी मान लिया गया था कि पेंशन और बीमा जैसी सुविधाएं भी उसी के लिए हैं, जिसके पास पैसा है, धन है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए ये ठीक नहीं थी। न ये व्यवस्था ठीक है न ये सोच ठीक है। और इसको बदलने के लिए भी हम निरंतर प्रयास कर रहे हैं। आज किसान, छोटे दुकानदार, खेत मज़दूर, कंस्ट्रक्शन और घरों में काम करने वाले श्रमिक साथियों को भी पेंशन की सुविधा से जोड़ा जा रहा है। आज देश के करोड़ों गरीबों को 2-2 लाख के दुर्घटना और जीवन बीमा के सुरक्षा कवच की सुविधा मिली है। पीएम जीवन ज्योति बीमा योजना और पीएम सुरक्षा बीमा योजना के तहत लगभग 37 करोड़ देशवासी इस सुरक्षा कवच के दायरे में आ चुके हैं। यानि एक प्रकार से अब जाकर देश के फाइनेंशियल सेक्टर का, देश के बैंकिंग सेक्टर का सही मायने में लोकतंत्रिकरण हुआ है।

साथियों,

हमारे यहां समस्या सिर्फ बैंक अकाउंट की ही नहीं थी, बल्कि दूर-सुदूर तक गांवों में बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने की भी थी। आज देश के करीब-करीब हर गांव में 5 किलोमीटर के दायरे में बैंक ब्रांच या बैंकिंग कॉरस्पोंडेंट की सुविधा पहुंच चुकी है। पूरे देश में आज लगभग साढ़े 8 लाख बैंकिंग टच प्वाइंट्स हैं। डिजिटल इंडिया के माध्यम से हमने देश में बैंकिंग और वित्तीय समावेश को नई बुलंदी दी है। आज भारत का सामान्य नागरिक कभी भी, कहीं भी, सातों दिन, 24 घंटे, छोटे से छोटा लेनदेन भी डिजिटली कर पा रहा है। कुछ साल पहले तक इस बारे में सोचना तो दूर, भारत के सामर्थ्य पर अविश्वास करने वाले लोग इस बात का मज़ाक उड़ाया करते थे।

साथियों,

भारत के बैंकों का सामर्थ्य, देश के नागरिकों का सामर्थ्य बढ़ाए, इस दिशा में हमारी सरकार लगातार काम कर रही है। क्या कभी किसी ने सोचा था कि रेहड़ी, ठेले, फेरी-पटरी वाले को भी, street vendors को भी बैंक से ऋण मिल सकता है? ना उसने कभी सोचा न हम भी सोच सकते। लेकिन आज मुझे बड़े संतोष के साथ कहना है। आज ऐसे लोगों को स्वनिधि योजना से ऋण भी मिल रहा है और वो अपने व्यापार को भी बढ़ा रहे हैं। आज मुद्रा योजना, देश के उन क्षेत्रों, उन परिवारों को भी स्वरोज़गार से जोड़ रहे हैं, जिन्होंने कभी इस बारे में सोचा तक नहीं था। आप सभी ये भी जानते हैं कि हमारे यहां, छोटी ज़मीन वाले किसान, हमारे देश में 85 पर्सेंट किसान छोटे किसान बहुत छोटा सा जीमन का टुकड़ा है उनके पास। इतने बैंकों के होते हुए भी हमारा छोटा किसान बाजार से किसी तीसरे से, महंगे ब्याज़ पर ऋण लेने के लिए मजबूर था। हमने ऐसे करोड़ों छोटे किसानों को भी किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा से जोड़ा और इसका दायरा पशुपालक और मछुआरों तक हमने बढा दिया। आज बैंकों से मिला लाखों करोड़ रुपए का आसान और सस्ता ऋण, इन साथियों का जीवन आसान बना रहा है।

 

साथियों,

अधिक से अधिक देशवासियों को बैंकों से जोड़ना हो, बैंक लोन आसानी से सुलभ कराना हो, डिजिटल बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट्स का तेज़ी से विस्तार करना हो,ऐसे अनेक सुधार हैं जिन्होंने 100 साल की सबसे बड़ी आपदा में भी भारत के बैंकिंग सिस्टम को सुचारु रूप से चलाने में मदद की है। मैं बैंक के हर साथी को बधाई देता हूं इस काम के लिए, कि संकट की घड़ी में उन्होंने लोगों को असहाय नहीं छोड़ा। जब दुनिया के समर्थ देश अपने नागरिकों तक मदद पहुंचाने में संघर्ष कर रहे थे, तब भारत ने तेज़ गति से देश के करीब-करीब हर वर्ग तक सीधी मदद पहुंचाई। देश के बैंकिंग सेक्टर में जो सामर्थ्य बीते सालों में हमने विकसित किया है, उसी आत्मविश्वास के कारण देशवासियों का जीवन बचाने के लिए सरकार बड़े फैसले ले पाई। आज हमारी अर्थव्यस्था तेज़ी से सुधरी तो है ही बल्कि भविष्य के लिए बहुत सकारात्मक संकेत हम सब देख रहे हैं।

भाइयों और बहनों,

Financial inclusion और Ease of access to credit का सबसे बड़ा लाभ अगर हुआ है, तो हमारी बहनों को हुआ है, हमारी माताओं को हमारी बेटियों को हुआ है।ये देश का दुर्भाग्य था कि आज़ादी के इतने दशकों तक हमारी अधिकतर बहनें-बेटियां इस लाभ से वंचित रहीं। स्थिति ये थी कि माताएं-बहनें अपनी छोटी बचत को रसोई में राशन के डिब्बों में रखती थीं। उसके लिए पैसा रखने की जगह वोही थी, अनाज के अंदर रखे रखना, कुछ लोग तो इसे भी सेलिब्रेट करते थे। जिस बचत को सुरक्षित रखने के लिए बैंक बनाए गए हैं, उसका उपयोग आधी आबादी ना कर पाए, ये हमारे लिए बहुत बड़ी चिंता थी। जनधन योजना के पीछे इस चिंता के समाधान का भी अहम रोल रहा है। आज इसकी सफलता सबके सामने है। जनधन योजना के तहत खुले करोड़ों बैंक अकाउंट्स में से आधे से अधिक बैंक अकाउंट्स हमारी माताओं – बहनों के हैं, महिलाओं के हैं। इन बैंक अकाउंट्स का महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर जो असर हुआ है, वो हमने हाल में आए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में भी देखा है। जब ये सर्वे किया गया, तबतक देश में लगभग 80 प्रतिशत महिलाओं के पास अपना खुद का बैंक अकाउंट था। सबसे बड़ी बात ये है कि जितने बैंक अकाउंट शहरी महिलाओं के लिए खुले हैं, लगभग उतने ही ग्रामीण महिलाओं के लिए भी हो चुके हैं। ये दिखाता है कि जब अच्छी योजनाएं डिलीवर करती हैं तो समाज में जो असमानताएं हैं, उनको दूर करने में भी बहुत बड़ी मदद मिलती है। अपना बैंक अकाउंट होने से महिलाओं में आर्थिक जागरूकता तो बढ़ी ही है, परिवार में आर्थिक फैसले लेने की उनकी भागीदारी में भी विस्तार हुआ है। अब परिवार कुछ निर्णय करता है तो मां – बहनों को बिठाता है, उनका opinion लेता है।

साथियों,

मुद्रा योजना में भी लगभग 70 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं। हमारा ये भी अनुभव रहा है जब महिलाओं को ऋण मिलता है तो उसको लौटाने में भी उनका ट्रैक रिकॉर्ड बहुत ही प्रशंसनीय है। उनको अगर बुधवार को पैसा जमा करने की आखिरी डेट है तो सोमवार को जाकर के दे आती हैं। उसी प्रकार से self help groups, स्वयं सहायता समूहों का प्रदर्शन, ये भी बहुत बेहतरीन है। एक प्रकार से पांई-पांई जमा करा देते हैं हमारी माताएं-बहनें। मुझे विश्वास है कि सबके प्रयास से, सबकी भागीदारी से, आर्थिक सशक्तिकरण का ये अभियान बहुत तेजी से आगे बढ़ने वाला है। और हम सब इसको बढ़ाने वाले हैं।

साथियों,

आज समय की मांग है कि भारत का बैंकिंग सेक्टर, देश के लक्ष्यों को प्राप्त करने में पहले से ज्यादा सक्रियता से काम करे। आजादी के अमृत महोत्सव में हर बैंक ब्रांच, 75 साल में उन्होंने किए हैं, उन सारे रिकॉर्डों को पीछे छोड़कर के उसको डेढ़ गुणा, दो गुणा करने का लक्ष्य लेकर के चलें। देखिये स्थिति बदलती है कि नहीं बदलती है। पुराने अनुभवों की वजह से, ऋण देने में आपकी जो भी हिचक रही है, उससे अब बाहर निकलना चाहिए। देश के दूर-सुदूर क्षेत्रों में, गांवों-कस्बों में बड़ी संख्या में देशवासी, अपने सपने पूरे करने के लिए बैंकों से जुड़ना चाहते हैं। आप अगर आगे बढ़कर लोगों की मदद करेंगे, तो ज्यादा से ज्यादा लोगों की आर्थिक शक्ति भी बढ़ेगी और इससे आपकी खुद की ताकत में भी वृद्धि होगी। आपके ये प्रयास, देश को आत्मनिर्भर बनाने में, हमारे लघु उद्यमियों, मध्यम वर्ग के युवाओं को आगे बढ़ने में सहायता करेंगे। बैंक और जमाकर्ताओं का भरोसा नई बुलंदी पर पहुंचेगा और आज का ये अवसर कोटि-कोटि डिपोजीटर्स में एक नया विश्वास भरने वाला अवसर है। और इससे बैंको की risk taking capacity अनेक गुणा बढ़ सकती है। अब बैंको के लिए भी अवसर है, डिपॉजिटर्स के लिए भी अवसर है। ऐसे शुभ अवसर पर मेरी आप सबको बहुत –बहुत शुभकामनाएं, बहुत- बहुत शुभकामनाएं ! धन्यवाद !

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प्रधानमंत्री मोदी का ‘IANS’ के साथ इंटरव्यू
May 27, 2024

पहले तो मैं आपकी टीम को बधाई देता हूं भाई, कि इतने कम समय में आपलोगों ने अच्छी जगह बनाई है और एक प्रकार से ग्रासरूट लेवल की जो बारीक-बारीक जानकारियां हैं। वह शायद आपके माध्यम से जल्दी पहुंचती है। तो आपकी पूरी टीम बधाई की पात्र है।

Q1 - आजकल राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल को पाकिस्तान से इतना endorsement क्यों मिल रहा है ? 370 ख़त्म करने के समय से लेकर आज तक हर मौक़े पर पाकिस्तान से उनके पक्ष में आवाज़ें आती हैं ?

जवाब – देखिए, चुनाव भारत का है और भारत का लोकतंत्र बहुत ही मैच्योर है, तंदरुस्त परंपराएं हैं और भारत के मतदाता भी बाहर की किसी भी हरकतों से प्रभावित होने वाले मतदाता नहीं हैं। मैं नहीं जानता हूं कि कुछ ही लोग हैं जिनको हमारे साथ दुश्मनी रखने वाले लोग क्यों पसंद करते हैं, कुछ ही लोग हैं जिनके समर्थन में आवाज वहां से क्यों उठती है। अब ये बहुत बड़ी जांच पड़ताल का यह गंभीर विषय है। मुझे नहीं लगता है कि मुझे जिस पद पर मैं बैठा हूं वहां से ऐसे विषयों पर कोई कमेंट करना चाहिए लेकिन आपकी चिंता मैं समझ सकता हूं।

 

Q 2 - आप ने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ मुहिम तेज करने की बात कही है अगली सरकार जब आएगी तो आप क्या करने जा रहे हैं ? क्या जनता से लूटा हुआ पैसा जनता तक किसी योजना या विशेष नीति के जरिए वापस पहुंचेगा ?

जवाब – आपका सवाल बहुत ही रिलिवेंट है क्योंकि आप देखिए हिंदुस्तान का मानस क्या है, भारत के लोग भ्रष्टाचार से तंग आ चुके हैं। दीमक की तरह भ्रष्टाचार देश की सारी व्यवस्थाओं को खोखला कर रहा है। भ्रष्टाचार के लिए आवाज भी बहुत उठती है। जब मैं 2013-14 में चुनाव के समय भाषण करता था और मैं भ्रष्टाचार की बातें बताता था तो लोग अपना रोष व्यक्त करते थे। लोग चाहते थे कि हां कुछ होना चाहिए। अब हमने आकर सिस्टमैटिकली उन चीजों को करने पर बल दिया कि सिस्टम में ऐसे कौन से दोष हैं अगर देश पॉलिसी ड्रिवन है ब्लैक एंड व्हाइट में चीजें उपलब्ध हैं कि भई ये कर सकते हो ये नहीं कर सकते हो। ये आपकी लिमिट है इस लिमिट के बाहर जाना है तो आप नहीं कर सकते हो कोई और करेगा मैंने उस पर बल दिया। ये बात सही है..लेकिन ग्रे एरिया मिनिमल हो जाता है जब ब्लैक एंड व्हाइट में पॉलिसी होती है और उसके कारण डिसक्रिमिनेशन के लिए कोई संभावना नहीं होती है, तो हमने एक तो पॉलिसी ड्रिवन गवर्नेंस पर बल दिया। दूसरा हमने स्कीम्स के सैचुरेशन पर बल दिया कि भई 100% जो स्कीम जिसके लिए है उन लाभार्थियों को 100% ...जब 100% है तो लोगों को पता है मुझे मिलने ही वाला है तो वो करप्शन के लिए कोई जगह ढूंढेगा नहीं। करप्शन करने वाले भी कर नहीं सकते क्योंकि वो कैसे-कैसे कहेंगे, हां हो सकता है कि किसी को जनवरी में मिलने वाला मार्च में मिले या अप्रैल में मिले ये हो सकता है लेकिन उसको पता है कि मिलेगा और मेरे हिसाब से सैचुरेशन करप्शन फ्री गवर्नेंस की गारंटी देता है। सैचुरेशन सोशल जस्टिस की गारंटी देता है। सैचुरेशन सेकुलरिज्म की गारंटी देता है। ऐसे त्रिविध फायदे वाली हमारी दूसरी स्कीम, तीसरा मेरा प्रयास रहा कि मैक्सिमम टेक्नोलॉजी का उपयोग करना। टेक्नोलॉजी में भी..क्योंकि रिकॉर्ड मेंटेन होते हैं, ट्रांसपेरेंसी रहती है। अब डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर में 38 लाख करोड़ रुपए ट्रांसफर किए हमने। अगर राजीव गांधी के जमाने की बात करें कि एक रुपया जाता है 15 पैसा पहुंचता है तो 38 लाख करोड़ तो हो सकता है 25-30 लाख करोड़ रुपया ऐसे ही गबन हो जाते तो हमने टेक्नोलॉजी का भरपूर उपयोग किया है। जहां तक करप्शन का सवाल है देश में पहले क्या आवाज उठती थी कि भई करप्शन तो हुआ लेकिन उन्होंने किसी छोटे आदमी को सूली पर चढ़ा दिया। सामान्य रूप से मीडिया में भी चर्चा होती थी कि बड़े-बड़े मगरमच्छ तो छूट जाते हैं, छोटे-छोटे लोगों को पकड़कर आप चीजें निपटा देते हो। फिर एक कालखंड ऐसा आया कि हमें पूछा जाता था 19 के पहले कि आप तो बड़ी-बड़ी बातें करते थे क्यों कदम नहीं उठाते हो, क्यों अरेस्ट नहीं करते हो, क्यों लोगों को ये नहीं करते हो। हम कहते थे भई ये हमारा काम नहीं है, ये स्वतंत्र एजेंसी कर रही है और हम बदइरादे से कुछ नहीं करेंगे। जो भी होगा हमारी सूचना यही है जीरो टोलरेंस दूसरा तथ्यों के आधार पर ये एक्शन होना चाहिए, परसेप्शन के आधार पर नहीं होना चाहिए। तथ्य जुटाने में मेहनत करनी पड़ती है। अब अफसरों ने मेहनत भी की अब मगरमच्छ पकड़े जाने लगे हैं तो हमें सवाल पूछा जा रहा है कि मगरमच्छों को क्यों पकड़ते हो। ये समझ में नहीं आता है कि ये कौन सा गैंग है, खान मार्केट गैंग जो कुछ लोगों को बचाने के लिए इस प्रकार के नैरेटिव गढ़ती है। पहले आप ही कहते थे छोटों को पकड़ते हो बड़े छूट जाते हैं। जब सिस्टम ईमानदारी से काम करने लगा, बड़े लोग पकड़े जाने लगे तब आप चिल्लाने लगे हो। दूसरा पकड़ने का काम एक इंडिपेंडेंट एजेंसी करती है। उसको जेल में रखना कि बाहर रखना, उसके ऊपर केस ठीक है या नहीं है ये न्यायालय तय करता है उसमें मोदी का कोई रोल नहीं है, इलेक्टेड बॉडी का कोई रोल नहीं है लेकिन आजकल मैं हैरान हूं। दूसरा जो देश के लिए चिंता का विषय है वो भ्रष्ट लोगों का महिमामंडन है। हमारे देश में कभी भी भ्रष्टाचार में पकड़े गए लोग या किसी को आरोप भी लगा तो लोग 100 कदम दूर रहते थे। आजकल तो भ्रष्ट लोगों को कंधे पर बिठाकर नाचने की फैशन हो गई है। तीसरा प्रॉब्लम है जो लोग कल तक जिन बातों की वकालत करते थे आज अगर वही चीजें हो रही हैं तो वो उसका विरोध कर रहे हैं। पहले तो वही लोग कहते थे सोनिया जी को जेल में बंद कर दो, फलाने को जेल में बंद कर दो और अब वही लोग चिल्लाते हैं। इसलिए मैं मानता हूं आप जैसे मीडिया का काम है कि लोगों से पूछे कि बताइए छोटे लोग जेल जाने चाहिए या मगरमच्छ जेल जाने चाहिए। पूछो जरा पब्लिक को क्या ओपिनियन है, ओपिनियन बनाइए आप लोग।

 

Q3- नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक सबने गरीबी हटाने की बात तो की लेकिन आपने आत्मनिर्भर भारत पर जोर दिया, इसे लेकर कैसे रणनीति तैयार करते हैं चाहे वो पीएम स्वनिधि योजना हो, पीएम मुद्रा योजना बनाना हो या विश्वकर्मा योजना हो मतलब एकदम ग्रासरूट लेवल से काम किया ?

जवाब – देखिए हमारे देश में जो नैरेटिव गढ़ने वाले लोग हैं उन्होंने देश का इतना नुकसान किया। पहले चीजें बाहर से आती थी तो कहते थे देखिए देश को बेच रहे हैं सब बाहर से लाते हैं। आज जब देश में बन रहा है तो कहते हैं देखिए ग्लोबलाइजेशन का जमाना है और आप लोग अपने ही देश की बातें करते हैं। मैं समझ नहीं पाता हूं कि देश को इस प्रकार से गुमराह करने वाले इन ऐलिमेंट्स से देश को कैसे बचाया जाए। दूसरी बात है अगर अमेरिका में कोई कहता है Be American By American उसपर तो हम सीना तानकर गर्व करते हैं लेकिन मोदी कहता है वोकल फॉर लोकल तो लोगों को लगता है कि ये ग्लोबलाइजेशन के खिलाफ है। तो इस प्रकार से लोगों को गुमराह करने वाली ये प्रवृत्ति चलती है। जहां तक भारत जैसा देश जिसके पास मैनपावर है, स्किल्ड मैनपावर है। अब मैं ऐसी तो गलती नहीं कर सकता कि गेहूं एक्सपोर्ट करूं और ब्रेड इम्पोर्ट करूं..मैं तो चाहूंगा मेरे देश में ही गेहूं का आटा निकले, मेरे देश में ही गेहूं का ब्रेड बने। मेरे देश के लोगों को रोजगार मिले तो मेरा आत्मनिर्भर भारत का जो मिशन है उसके पीछे मेरी पहली जो प्राथमिकता है कि मेरे देश के टैलेंट को अवसर मिले। मेरे देश के युवाओं को रोजगार मिले, मेरे देश का धन बाहर न जाए, मेरे देश में जो प्राकृतिक संसाधन हैं उनका वैल्यू एडिशन हो, मेरे देश के अंदर किसान जो काम करता है उसकी जो प्रोडक्ट है उसका वैल्यू एडिशन हो वो ग्लोबल मार्केट को कैप्चर करे और इसलिए मैंने विदेश विभाग को भी कहा है कि भई आपकी सफलता को मैं तीन आधारों से देखूंगा एक भारत से कितना सामान आप..जिस देश में हैं वहां पर खरीदा जाता है, दूसरा उस देश में बेस्ट टेक्नोलॉजी कौन सी है जो अभीतक भारत में नहीं है। वो टेक्नोलॉजी भारत में कैसे आ सकती है और तीसरा उस देश में से कितने टूरिस्ट भारत भेजते हो आप, ये मेरा क्राइटेरिया रहेगा...तो मेरे हर चीज में सेंटर में मेरा नेशन, सेंटर में मेरा भारत और नेशन फर्स्ट इस मिजाज से हम काम करते हैं।

 

Q 4 - एक तरफ आप विश्वकर्माओं के बारे में सोचते हैं, नाई, लोहार, सुनार, मोची की जरूरतों को समझते हैं उनसे मिलते हैं तो वहीं दूसरी तरफ गेमर्स से मिलते हैं, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की बात करते हैं, इन्फ्लुएंसर्स से आप मिलते हैं इनकी अहमियत को भी सबके सामने रखते हैं, इतना डाइवर्सीफाई तरीके से कैसे सोच पाते हैं?

जवाब- आप देखिए, भारत विविधताओं से भरा हुआ है और कोई देश एक पिलर पर बड़ा नहीं हो सकता है। मैंने एक मिशन लिया। हर डिस्ट्रिक्ट का वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट पर बल दिया, क्यों? भारत इतना विविधता भरा देश है, हर डिस्ट्रिक्ट के पास अपनी अलग ताकत है। मैं चाहता हूं कि इसको हम लोगों के सामने लाएं और आज मैं कभी विदेश जाता हूं तो मुझे चीजें कौन सी ले जाऊंगा। वो उलझन नहीं होती है। मैं सिर्फ वन डिस्ट्रिक, वन प्रोडक्ट का कैटलॉग देखता हूं। तो मुझे लगता है यूरोप जाऊंगा तो यह लेकर जाऊंगा। अफ्रीका जाऊंगा तो यह लेकर जाऊंगा। और हर एक को लगता है एक देश में। यह एक पहलू है दूसरा हमने जी 20 समिट हिंदुस्तान के अलग-अलग हिस्से में की है। क्यों? दुनिया को पता चले कि दिल्ली, यही हिंदुस्तान नहीं है। अब आप ताजमहल देखें तो टूरिज्म पूरा नहीं होता जी मेरे देश का। मेरे देश में इतना पोटेंशियल है, मेरे देश को जानिए और समझिए और इस बार हमने जी-20 का उपयोग भारत को विश्व के अंदर भारत की पहचान बनाने के लिए किया। दुनिया की भारत के प्रति क्यूरियोसिटी बढ़े, इसमें हमने बड़ी सफलता पाई है, क्योंकि दुनिया के करीब एक लाख नीति निर्धारक ऐसे लोग जी-20 समूह की 200 से ज्यादा मीटिंग में आए। वह अलग-अलग जगह पर गए। उन्होंने इन जगहों को देखा, सुना भी नहीं था, देखा वो अपने देश के साथ कोरिलिरेट करने लगे। वो वहां जाकर बातें करने लगे। मैं देख रहा हूं जी20 के कारण लोग आजकल काफी टूरिस्टों को यहां भेज रहे हैं। जिसके कारण हमारे देश का टूरिज्म को बढ़ावा मिला।

इसी तरह आपने देखा होगा कि मैंने स्टार्टअप वालों के साथ मीटिंग की थी, मैं वार्कशॉप करता था। आज से मैं 7-8 साल पहले, 10 साल पहले शुरू- शुरू में यानी मैं 14 में आया। उसके 15-16 के भीतर-भीतर मैंने जो नए स्टार्टअप की दुनिया शुरू हुई, उनकी मैंने ऐसे वर्कशॉप की है तो मैं अलग-अलग कभी मैंने स्पोर्ट्स पर्सन्स के की, कभी मैंने कोचों के साथ की कि इतना ही नहीं मैंने फिल्म दुनिया वालों के साथ भी ऐसी मीटिंग की।

मैं जानता हूं कि वह बिरादरी हमारे विचारों से काफी दूर है। मेरी सरकार से भी दूर है, लेकिन मेरा काम था उनकी समस्याओं को समझो क्योंकि बॉलीवुड अगर ग्लोबल मार्केट में मुझे उपयोगी होता है, अगर मेरी तेलुगू फिल्में दुनिया में पॉपुलर हो सकती है, मेरी तमिल फिल्म दुनिया पॉपुलर हो सकती है। मुझे तो ग्लोबल मार्केट लेना था मेरे देश की हर चीज का। आज यूट्यूब की दुनिया पैदा हुई तो मैंने उनको बुलाया। आप देश की क्या मदद कर सकते हैं। इंफ्लुएंसर को बुलाया, क्रिएटिव वर्ल्ड, गेमिंम अब देखिए दुनिया का इतना बड़ा गेमिंग मार्केट। भारत के लोग इन्वेस्ट कर रहे हैं, पैसा लगा रहे हैं और गेमिंग की दुनिया में कमाई कोई और करता है तो मैंने सारे गेमिंग के एक्सपर्ट को बुलाया। पहले उनकी समस्याएं समझी। मैंने देश को कहा, मेरी सरकार को मुझे गेमिंग में भारतीय लीडरशिप पक्की करनी है।

इतना बड़ा फ्यूचर मार्केट है, अब तो ओलंपिक में गेमिंग आया है तो मैं उसमें जोड़ना चाहता हूं। ऐसे सभी विषयों में एक साथ काम करने के पक्ष में मैं हूं। उसी प्रकार से देश की जो मूलभूत व्यवस्थाएं हैं, आप उसको नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। हमें गांव का एक मोची होगा, सोनार होगा, कपड़े सिलने वाला होगा। वो भी मेरे देश की बहुत बड़ी शक्ति है। मुझे उसको भी उतना ही तवज्जो देना होगा। और इसलिए मेरी सरकार का इंटीग्रेटेड अप्रोच होता है। कॉम्प्रिहेंसिव अप्रोच होता है, होलिस्टिक अप्रोच होता है।

 

Q 5 - डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया उसका विपक्ष ने मजाक भी उड़ाया था, आज ये आपकी सरकार की खास पहचान बन गए हैं और दुनिया भी इस बात का संज्ञान ले रही है, इसका एक उदहारण यूपीआई भी है।

जवाब – यह बात सही है कि हमारे देश में जो डिजिटल इंडिया मूवमेंट मैंने शुरू किया तो शुरू में आरोप क्या लगाए इन्होंने? उन्होंने लगाई कि ये जो सर्विस प्रोवाइडर हैं, उनकी भलाई के लिए हो रहा है। इनको समझ नहीं आया कि यह क्षेत्र कितना बड़ा है और 21वीं सदी एक टेक्नॉलॉजी ड्रिवन सेंचुरी है। टेक्नोलॉजी आईटी ड्रिवन है। आईटी इन्फोर्स बाय एआई। बहुत बड़े प्रभावी क्षेत्र बदलते जा रहे हैं। हमें फ्यूचरस्टीक चीजों को देखना चाहिए। आज अगर यूपीआई न होता तो कोई मुझे बताए कोविड की लड़ाई हम कैसे लड़ते? दुनिया के समृद्ध देश भी अपने लोगों को पैसे होने के बावजूद भी नहीं दे पाए। हम आराम से दे सकते हैं। आज हम 11 करोड़ किसानों को 30 सेकंड के अंदर पैसा भेज सकते हैं। अब यूपीआई अब इतनी यूजर फ्रेंडली है तो क्योंकि यह टैलेंट हमारे देश के नौजवानों में है। वो ऐसे प्रोडक्ट बना करके देते हैं कि कोई भी कॉमन मैन इसका उपयोग कर सकता है। आज मैंने ऐसे कितने लोग देखे हैं जो अपना सोशल मीडिया अनुभव कर रहे हैं। हमने छह मित्रों ने तय किया कि छह महीने तक जेब में 1 पैसा नहीं रखेंगे। अब देखते हैं क्या होता है। छह महीने पहले बिना पैसे पूरी दुनिया में हम अपना काम, कारोबार करके आ गए। हमें कोई तकलीफ नहीं हुई तो हर कसौटी पर खरा उतर रहा है। तो यूपीआई ने एक प्रकार से फिनटेक की दुनिया में बहुत बड़ा रोल प्ले किया है और इसके कारण इन दिनों भारत के साथ जुड़े हुए कई देश यूपीआई से जुड़ने को तैयार हैं क्योंकि अब फिनटेक का युग है। फिनटेक में भारत अब लीड कर रहा है और इसलिए दुर्भाग्य तो इस बात का है कि जब मैं इस विषय को चर्चा कर रहा था तब देश के बड़े-बड़े विद्वान जो पार्लियामेंट में बैठे हैं वह इसका मखौल उड़ाते थे, मजाक उड़ाते थे, उनको भारत के पोटेंशियल का अंदाजा नहीं था और टेक्नोलॉजी के सामर्थ्य का भी अंदाज नहीं था।

 

Q 6 - देश के युवा भारत का इतिहास लिखेंगे ऐसा आप कई बार बोल चुके हैं, फर्स्ट टाइम वोटर्स का पीएम मोदी से कनेक्ट के पीछे का क्या कारण है?

एक मैं उनके एस्पिरेशन को समझ पाता हूं। जो पुरानी सोच है कि वह घर में अपने पहले पांच थे तो अब 7 में जाएगा सात से नौ, ऐसा नहीं है। वह पांच से भी सीधा 100 पर जाना चाहता है। आज का यूथ हर, क्षेत्र में वह बड़ा जंप लगाना चाहता है। हमें वह लॉन्चिंग पैड क्रिएट करना चाहिए, ताकि हमारे यूथ के एस्पिरेशन को हम फुलफिल कर सकें। इसलिए यूथ को समझना चाहिए। मैं परीक्षा पर चर्चा करता हूं और मैंने देखा है कि मुझे लाखों युवकों से ऐसी बात करने का मौका मिलता है जो परीक्षा पर चर्चा की चर्चा चल रही है। लेकिन वह मेरे साथ 10 साल के बाद की बात करता है। मतलब वह एक नई जनरेशन है। अगर सरकार और सरकार की लीडरशिप इस नई जनरेशन के एस्पिरेशन को समझने में विफल हो गई तो बहुत बड़ी गैप हो जाएगी। आपने देखा होगा कोविड में मैं बार-बार चिंतित था कि मेरे यह फर्स्ट टाइम वोटर जो अभी हैं, वह कोविड के समय में 14-15 साल के थे अगर यह चार दीवारों में फंसे रहेंगे तो इनका बचपन मर जाएगा। उनकी जवानी आएगी नहीं। वह बचपन से सीधे बुढ़ापे में चला जाएगा। यह गैप कौन भरेगा? तो मैं उसके लिए चिंतित था। मैं उनसे वीडियो कॉन्फ्रेंस से बात करता था। मैं उनको समझाता था का आप यह करिए। और इसलिए हमने डेटा एकदम सस्ता कर दिया। उस समय मेरा डेटा सस्ता करने के पीछे लॉजिक था। वह ईजिली इंटरनेट का उपयोग करते हुए नई दुनिया की तरफ मुड़े और वह हुआ। उसका हमें बेनिफिट हुआ है। भारत ने कोविड की मुसीबतों को अवसर में पलटने में बहुत बड़ा रोल किया है और आज जो डिजिटल रिवॉल्यूशन आया है, फिनटेक का जो रिवॉल्यूशन आया है, वह हमने आपत्ति को अवसर में पलटा उसके कारण आया है तो मैं टेक्नोलॉजी के सामर्थ्य को समझता हूं। मैं टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देना चाहता हूं।

प्रधानमंत्री जी बहुत-बहुत धन्यवाद आपने हमें समय दिया।

नमस्कार भैया, मेरी भी आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं, आप भी बहुत प्रगति करें और देश को सही जानकारियां देते रहें।