“श्री एम. वेंकैया नायडू गारू की बुद्धिमत्ता और देश की प्रगति के प्रति उनके जुनून की व्यापक तौर पर सराहना की जाती है”
“ये 75 वर्ष असाधारण रहे हैं और इसमें कई शानदार पड़ाव शामिल हैं”
“वेंकैया नायडू जी का जीवन विचारों, दूरदर्शिता और व्यक्तित्व के सम्मिश्रण की एक आदर्श झलक है”
“नायडू जी की बुद्धिमता, सहजता, त्वरित जवाब और एक लाइन वाले बयानों की बराबरी कोई नहीं कर सकता”
“नायडू जी गांवों, गरीबों और किसानों की सेवा करना चाहते थे”
“वेंकैया जी का जीवन युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है”

नमस्कार।

कार्यक्रम में उपस्थित और आज के कार्यक्रम के केंद्रबिंदु हमारे वरिष्ठ साथी श्रीमान वेंकैया नायडू गारू, उनके परिवारजन, विभिन्न राज्यों के गवर्नर्स, अलग-अलग राज्यों के मंत्री, अन्य सभी वरिष्ठ महानुभाव, देवियों और सज्जनों।

कल एक जुलाई को वेंकैया नायडू जी का जन्मदिन है। उनकी जीवनयात्रा को 75 वर्ष हो रहे हैं। ये 75 वर्ष असाधारण उपलब्धियों के रहे हैं। ये 75 वर्ष अद्भुत पड़ावों के रहे हैं। मुझे खुशी है कि आज मुझे उनकी बायोग्राफी साथ-साथ 2 और पुस्तकें रिलीज़ करने का अवसर भी मिला है। मुझे विश्वास है ये पुस्तकें, लोगों को प्रेरणा देंगी, उन्हें राष्ट्रसेवा की सही दिशा दिखाएंगी।

साथियों,

मुझे वेंकैया जी के साथ बहुत लंबे समय तक काम करने का अवसर मिला है। जब वो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, जब वो सरकार में कैबिनेट के वरिष्ठ सहयोगी थे, जब वो देश के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति थे। आप कल्पना कीजिए एक सामान्य से गाँव से निकलकर किसान परिवार का एक संतान बड़े-बड़े दायित्वों को संभालने की ये इतनी लंबी यात्रा, अनेक-अनेक अनुभवों से भरी रही है। वेंकैया जी से मुझे भी और मेरे जैसे हजारों कार्यकर्ताओं को उनसे बहुत कुछ सीखने का मौका मिला है।

साथियों,

वेंकैया जी का जीवन, विचार, विज़न और व्यक्तित्व की एक perfect झलक देता है। आज हम आंध्र और तेलंगाना में इतनी मजबूत स्थिति में हैं। लेकिन, दशकों पहले वहाँ जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी का कोई मजबूत आधार नहीं था। बावजूद इसके नायडू जी ने उस दौर में ABVP के कार्यकर्ता के रूप में राष्ट्र प्रथम की भावना से देश के लिए कुछ न कुछ करने का मन बना लिया। बाद में वो जनसंघ में आए। और अभी-अभी कुछ दिन पहले ही कांग्रेस ने संविधान की प्रतिष्ठा को मिट्टी में मिलाकर के जो इमरजेंसी लगाई थी, उसको 50 वर्ष हुए हैं। वेंकैया जी हमारे उन साथियों में थे, जो इमरजेंसी के खिलाफ जी जान से लड़े, और उस समय वेंकैया जी करीब-करीब 17 महीने जेल में रहे थे। इसीलिए, मैं उन्हें इमरजेंसी की आग में तपा हुआ अपना एक पक्का साथी मानता हूँ।

साथियों,

सत्ता सुख का नहीं, सेवा और संकल्पों की सिद्धि का माध्यम होती है। वेंकैया जी ने ये तब भी साबित किया, जब उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार में शामिल होने का मौका मिला। वेंकैया जी का व्यक्तित्व हमारी पार्टी में काफी ऊंचा था और इसलिए स्वाभाविक रूप से जब मंत्रालय की बात होगी तो उनके लिए बहुत ही दुनिया में जरा जिसकी वाहवाही होती रहती है ऐसे डिपार्टमेंट का मन करेगा। वेंकैया जी जानते थे कि शायद मुझे ऐसा ही कोई मंत्रालय मिल जाएगा। तो वो सामने से गए और उन्होंने कहा कृपा करके मुझे ग्रामीण विकास मंत्रालय मिले तो अच्छा होगा। ये छोटी बात नहीं है, और वेंकैया जी ने ऐसा क्यों किया, इसलिए क्योंकि नायडू जी गाँव-गरीब और किसान की सेवा करना चाहते थे। और ये विशेषता देखिए शायद भारत में वो ऐसे मंत्री रहे, जिन्होंने अटल जी के समय ग्रामीण विकास का काम किया। और हमारे साथ कैबिनेट में एक वरिष्ठ साथी के रूप में शहरी विकास मंत्री के रूप में काम किया। यानि एक प्रकार से दोनों विधाओं में पारंगत। और जिस प्रकार से उन्होंने उस काम को किया, अगर मैं उसके विषय में उनके अनेक initiative, उसके पीछे उनका समर्पण, भारत के आधुनिक शहरों की उनकी कल्पना, अगर मैं उसके विषय में कुछ कहने जाऊंगा तो कई घंटे निकल जाएंगे। वेंकैया जी के कार्यकाल में स्वच्छ भारत मिशन, स्मार्ट सिटी मिशन और अमृत योजना जैसे अनेक अभियान शुरू हुए हैं।

साथियों,

वेंकैया जी की बात हो और उनकी वाणी, उनकी वाक्पटुता, उनकी विटिनेस अगर उसकी हम चर्चा न करें तो शायद हमारी बात अधूरी रह जाएगी। वेंकैया जी की alertness, उनकी स्पॉन्टिनिटी, उनकी क्विक काउंटर विट, उनके One-Liners, मैं समझता हूं उसका कोई मुकाबला नहीं है। मुझे याद है, जब वाजपेयी जी की गठबंधन सरकार थी तो वेंकैया जी का ऐलान था- एक हाथ में बीजेपी का झंडा और दूसरे हाथ में NDA का एजेंडा। और 2014 में सरकार बनने के बाद, कुछ दिनों बाद ही उन्होंने कहा- 'Making of Developed India' यानि MODI. मैं तो खुद हैरान रह गया कि वेंकैया जी इतना कैसे सोच लेते हैं। वेंकैया गारू, इसलिए ही वेंकैया जी की स्टाइल में मैंने एक बार राज्यसभा में कहा था- वेंकैया जी की बातों में गहराई होती है, गंभीरता भी होती है। इनकी वाणी में विजन भी होता है और विट भी होता है। warmth भी होता है और wisdom भी होता है।

साथियों,

अपनी इसी खास स्टाइल के साथ आप जितने समय राज्यसभा के सभापति रहे, आपने सदन को Positivity से भरपूर रखा। आपके कार्यकाल में सदन ने कितने ही ऐतिहासिक फैसले लिए, पूरे देश ने देखा था। जम्मू कश्मीर से 370 हटाने का बिल लोकसभा की जगह पहले राज्यसभा में पेश हुआ था। और आप जानते हैं उस समय राज्यसभा में हमारे पास बहुमत नहीं था। लेकिन, 370 हटाने का बिल राज्यसभा में आन-बान-शान के साथ बहुमत से पारित हुआ था। इसमें कई साथियों-पार्टियों और सांसदों की भूमिका तो थी ही! लेकिन, ऐसे संवेदनशील मौके पर सदन को सुचारु रूप से चलाने के लिए वेंकैया जी जैसा अनुभवी नेतृत्व भी उतना ही जरूरी था। आपने इस देश की, इस लोकतंत्र की ऐसी अनगिनत सेवाएँ की हैं। वेंकैया गारू, मैं ईश्वर से कामना करता हूँ, आप ऐसे ही स्वस्थ और सक्रिय रहते हुये दीर्घकाल तक हम सबका मार्गदर्शन करते रहें। और आपने देखा होगा, बहुत कम लोग जानते होंगे वेंकैया जी बहुत ही इमोशनल व्यक्ति हैं। जब हम गुजरात में काम करते थे, वेंकैया जी जब आते थे। अगर कुछ ऐसी घटनाएं घटती थी तो वो सबसे ज्यादा पीड़ित नजर आते थे। वे निर्णायक रहते हैं और आज ये भारतीय जनता पार्टी का विशाल जो वटवृक्ष दिखता है ना उसमें वेंकैया गारू जैसे लाखों कार्यकर्ताओं तीन-तीन, चार-चार पीढ़ी, भारत मां की जय इसी एक संकल्प को लेकर खपती रही है। तब जाकर के आज ये विशाल वटवृक्ष पनपा है। वेंकैया जी जैसे उनकी तुकबंदी के कारण ध्यान आकर्षित करते थे। वैसे हमारे वेंकैया जी खिलाने के भी उतने ही शौकिन रहे हैं। मकर संक्रातिं पर दिल्ली में उनके निवास पर पूरे दिल्ली का हूलहू और एक प्रकार से पूरा तेलगू festival, कभी-कभी पूरा South Indian Festival. शायद अगर किसी साल न हो पाए तो हर कोई याद करता है कि अरे वेंकैया जी कही बाहर तो नहीं है। इतना हर एक के मन में मकर संक्रातिं का उत्सव बहुत ही, यानि वेंकैया जी की जो सहज जीवन की प्रक्रियाएं हैं, उससे भी हम लोग भली-भांति परिचित हैं। मैं तो देखता हूं आज भी कोई भी अच्छी खबर उनके कान में आ जाए, कोई भी अच्छी घटना उनको नजर आ जाए, शायद ही कभी वो फोन करना भूलते होंगे। और वो इतने भाव-विभोर होकर खुशी व्यक्त करते हैं, हम जैसे लोगों को उससे बड़ी प्रेरणा मिलती है, उत्साह मिलता है, उमंग मिलता है। और इसलिए वेंकैया जी का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए और सार्वजनिक जीवन में जो काम करना चाहते हैं ऐसे नौजवानों के लिए बहुत ही प्रेरक है, उत्तम मार्गदर्शन देने वाला है। और ये जो तीनों किताबें हैं। उन तीनों किताबों को, अपने-आप में देखते ही उनकी जर्नी का हमें पता चलता हैं, हम भी उसकी यात्रा में जुड़ जाते हैं, एक के बाद एक घटना प्रवाह से हम अपने-आपको अनुबंध कर लेते हैं।

साथियों,

आपको शायद याद होगा एक बार मैंने राज्यसभा में श्रीमान वेंकैया गारू के लिए कुछ पंक्तियां कही थी। राज्यसभा में जो कहा था मैं आज फिर उन्हें दोहराना चाहता हूं...अमल करो ऐसा अमन में...जहां से गुजरें तुम्हारीं नजरें...उधर से तुम्हें सलाम आए...आपका व्यक्तित्व ऐसा ही है। एक बार फिर आपको 75 वर्ष की यात्रा और मैं तो याद है हमारे एक मित्र है कभी उनको मैंने एक बार फोन करके पूछा भई कितने साल हो गए, क्योंकि उनका भी 75वां जन्मदिन था तो मैंने उनको ऐसे ही फोन किया तो वो साथी ने मुझे ये नहीं बताया कि उनके 75 साल हुए हैं, उन्होंने मुझे जवाब दिया, मैंने कहा कि भई क्या, कितने साल गए नहीं बोले अभी 25 बाकी हैं। देखने का ये नजरिया है। मैं भी आज 75 वर्ष की आपकी यात्रा जिस पड़ाव पर पहुंची है और जब आप शताब्दी बनाएंगे तब देश 2047 में विकसित भारत आजादी की शताब्दी मनाता होगा। आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं! बहुत-बहुत बधाई। आपके परिवारजनों को भी आपकी सफलता में जो उनका योगदान रहा है कंधे से कंधा मिलाकर के और कहीं छा जाने की कोशिश नहीं एक मुख्यसेवक की तरह सबने काम किया है। मैं आपके परिवार के सब लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं, बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!

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दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर इस पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल देगा: उत्तराखंड में पीएम मोदी
April 14, 2026
आज उद्घाटित दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा एक विश्व स्तरीय अवसंरचना परियोजना है जो कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी, अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बढ़ावा देगी: प्रधानमंत्री
उत्तराखंड ने अपने गठन के 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं और अब यह अपने 26वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है; आज दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के साथ एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि अर्जित की गई: प्रधानमंत्री
देहरादून-दिल्ली आर्थिक गलियारा समस्‍त क्षेत्र को रूपांतरित कर देगा: प्रधानमंत्री
यह गलियारा समय बचाएगा, यात्रा सस्ती और तेज होगी, लोग पेट्रोल और डीजल पर कम व्‍यय करेंगे और किराए एवं माल ढुलाई लागत में कमी आएगी; इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे: प्रधानमंत्री
हमारे पहाड़, ये वन क्षेत्र, देवभूमि की यह विरासत, ये बहुत ही पवित्र स्थान हैं; ऐसे स्थानों को स्‍वच्‍छ रखना हमारा कर्तव्य है: प्रधानमंत्री
इन क्षेत्रों में प्लास्टिक की बोतलें, कूड़े के ढेर देवभूमि की पवित्रता को ठेस पहुंचाते हैं; यह बहुत आवश्‍यक है कि हम देवभूमि के इन स्थलों, हमारे तीर्थ स्थलों को स्‍वच्‍छ और सुंदर रखें: प्रधानमंत्री

 

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह जी, यहां के लोकप्रिय और कर्मठ युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथी नितिन गड़करी जी, अजय टमटा जी, टेक्नॉलोजी के माध्यम से जुड़े उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, गर्वनर आनंदी बेन, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी, मंच पर उपस्थित प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट जी, पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी जी, पूर्व मुख्यमंत्री भाई रमेश पोखरियाल, विजय बहुगुना जी, तीरथ सिंह रावत जी, त्रिवेंद्र सिंह रावत जी, उत्तराखंड सरकार के सभी मंत्रीगण, सांसद और विधायकगण और विशाल संख्या में पधारे मेरे प्यारे भाईयों बहनों।

देवभूमि उत्तराखंड़ की इस पावन धरती पर आप सभी को मेरा प्रणाम। बहुत बडी संख्या में आए हुए पूज्य संतगण को भी प्रणाम। उत्तराखंड का प्यारा भुलों-भैबंदों, बौड़ी-भूलियों, स्याणा-बुजुर्गों, आप सबु तैं नमस्कार! मेरो प्यारो दाजी भाई, दीदी-बैनी, आमा-बाबा सबई लाई मेरो तरफ़ देखी ढोग दिनछू।

इस कार्यक्रम से टेक्नोलॉजी के जरिये भी दिल्ली, यूपी से अनेक लोग जुड़े हैं, मैं सभी का अभिनन्दन करता हूं। सबसे पहले तो मैं आप सबकी क्षमा चाहता हूं, उत्तरप्रदेश और दिल्ली के कार्यक्रम में जुड़े हुए लोगों की भी क्षमा मांगता हूं, कि मुझे यहां पहुंचने में एक घंटे से भी ज्यादा देर हो गई, सब स्थान पर लंबे समय तक आप सबको इंतजार करना पड़ा, और कारण यही था, मैं निकला तो समय पर था, लेकिन करीब-करीब 12 किलोमीटर का रोड शो, काली मंदिर से लेकर के यहां तक, इतना उत्साह इतना उमंग, कि मेरे लिए तेज गति से गाड़ी चलाना बड़ा मुश्किल हो गया। तो धीरे-धीरे लोगों को प्रणाम करते-करते, जनता जनार्दन के आशीर्वाद लेते लेते यहां पहुंचने में मुझे एक घंटे से भी ज्यादा देरी हो गई, और इसके लिए मैं आपकी क्षमा मांगता हूं, और ऐसी धूप में 12 किलोमीटर ये जन सैलाब, ये उत्तराखंड़ का प्यार, माताओं-बहनों का आशीर्वाद, मैं आज उत्तराखंड़ से एक नई ऊर्जा लेकर के जाऊंगा, नई प्रेरणा लेकर के जाऊंगा और मैं इसके लिए हर किसी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

आज देश में पर्व त्योहार की उमंग है। विभिन्न हिस्सों में नववर्ष का आगमन हुआ है। मैं देशवासियों को बैसाखी, बोहाग बीहू और पुथांडु की शुभकामनाएं देता हूं!

साथियों,

अगले कुछ ही दिनों में, यमुनोत्री, गंगोत्री, बाबा केदारनाथ, बद्रीनाथ धाम की यात्रा भी शुरू होने जा रही है। इस पवित्र समय का, देश के कोटि-कोटि आस्थावान, श्रद्धाभाव से इंतज़ार करते हैं। मैं पंच बद्री, पंच केदार, पंच प्रयाग और यहां के आराध्य देवों को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूं। मैं संतला माता को भी नमन करता हूं। यहां आने से पहले मुझे, मां डाट काली के दर्शन करने का सौभाग्य मिला है। देहरादून शहर पर, मां डाट काली की बड़ी कृपा है। दिल्ली-देहरादून इकनॉमिक कॉरिडोर के इतने बड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने में, माता डाट काली का आशीर्वाद बहुत बड़ी शक्ति रहा है।

साथियों,

उत्तराखंड राज्य अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरा करने के साथ ही छब्बीसवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। आज दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के साथ इस प्रगति में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ी है। आपको याद होगा, बाबा केदार के दर्शन के बाद मेरे मुंह से अनायास निकला था, कि इस शताब्दी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा। मुझे बहुत खुशी है कि डबल इंजन सरकार की नीतियों, और उत्तराखंड के लोगों के परिश्रम से, ये युवा राज्य, विकास के नए आयाम जोड़ रहा है। ये प्रोजेक्ट भी, उत्तराखंड के विकास को नई गति देगा। इस एक्सप्रेसवे का बहुत बड़ा हिस्सा यूपी से होकर गुजरता है। इससे गाजियाबाद, बागपत, बड़ौत, शामली और सहारनपुर जैसे अनेक शहरों को भी बहुत फायदा होगा। टूरिज्म के लिहाज से ये प्रोजेक्ट बहुत अहम है। मैं पूरे देश को इस प्रोजेक्ट की बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आज डॉक्टर बाबा साहेब आंबेडकर की जयंती भी है। मैं बाबा साहेब को कोटि-कोटि देशवासियों की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। बीते दशक में हमारी सरकार ने जो नीतियां बनाईं, जो निर्णय लिए, वो संविधान की गरिमा को पुनर्स्थापित करने वाले रहे हैं। आर्टिकल 370 हटने के बाद आज पूरे देश में भारत का संविधान लागू है। जिन दर्जनों जिलों में माओवाद-नक्सलवाद खत्म हुआ है, वहां भी अब संविधान की भावना के अनुरूप काम हो रहा है। देश में समान नागरिक संहिता लागू हो, ये हमारे संविधान की अपेक्षा है। उत्तराखंड ने संविधान की इस भावना को आगे बढ़कर और उस भावना को आगे बढ़ाकर पूरे देश को राह दिखाई है।

साथियों,

बाबा साहेब का जीवन, गरीबों को, वंचितों को, शोषितों को न्यायपूर्ण व्यवस्था देने के लिए समर्पित था। हमारी सरकार आज उसी भावना के साथ, हर गरीब, हर वंचित को सच्चा सामाजिक न्याय देने में जुटी है। और सामाजिक न्याय का एक बहुत बड़ा माध्यम, देश का संतुलित विकास है, सबको सुविधा है, सबकी समृद्धि है। इसलिए ही बाबा साहेब आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की, औद्योगीकरण की भरपूर वकालत करते थे।

साथियों,

भविष्य की दशा और दिशा क्या होगी, अक्सर लोग, इसके लिए हाथ की रेखाओं को देखते हैं, दिखाते हैं। जो भविष्य वक्ता होते हैं ना, वो हस्त रेखाएं देखते हैं, और हर व्यक्ति के भविष्य के विषय में बताते हैं। मैं इस विज्ञान को तो नहीं जानता हूं, लेकिन कहते हैं कि ये भी एक शास्त्र है। अब ये तो हो गई व्यक्ति के भाग्य की जो उसके हाथ में रेखाएं हैं उसकी बात, लेकिन मैं अगर इसी संदर्भ मे बात को, इसी संदर्भ को राष्ट्र-जीवन से जोड़कर के देखूं, तो राष्ट्र की भाग्य रेखाएं कौन सी होती हैं? राष्ट्र की भाग्य रेखाएं ये हमारी ये सड़कें होती हैं, हमारे हाईवे होते हैं, हमारे एक्सप्रेसवे होते हैं, एयरवे, रेलवे, वॉटरवे, ये हमारे राष्ट्र की भाग्य रेखाएं होती हैं। और बीते एक दशक से हमारा देश, विकसित भारत बनाने के लिए विकास की ऐसी ही भाग्य रेखाओं के निर्माण में जुटा हुआ है। ये विकास रेखाएं सिर्फ आज की सुविधाएं नहीं हैं, ये आने वाली पीढ़ियों की समृद्धि की गारंटी हैं और ये मोदी की भी गारंटी है। बीते दशक से हमारी सरकार राष्ट्र की इन विकास-रेखाओं पर अभूतपूर्व निवेश कर रही है। मैं आपको एक आंकड़ा देता हूं। अभी नितिन जी ने बहुत सारे आंकड़ें सिर्फ उत्तराखंड़ से संबंधित बताए हैं आपको। देखिए साल 2014 तक ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए साल में, पूरे देश में, 2 लाख करोड़ रुपए भी खर्च नहीं होते थे। ये मैं पूरे हिन्दुस्तान की बात बताता हूं, 2 लाख करोड़ भी नहीं होते थे, आज ये छह गुना अधिक, 12 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा हो चुका है। यहां उत्तराखंड में ही, सवा दो लाख करोड़ रुपए से अधिक के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है। 2014 के पहले पूरे देश के लिए 2 लाख करोड़, आज अकेले उत्तराखंड़ के लिए सवा दो लाख करोड़ रूपया। कभी उत्तराखंड के गांवों में सड़क के इंतज़ार में पीढ़ियां बदल जाती थीं। आज डबल इंजन सरकार के प्रयासों से, अब सड़क गांव तक पहुंच रही है, जो गांव पहले वीरान पड़ गए थे, वो फिर से जीवंत हो रहे हैं। चारधाम महामार्ग परियोजना हो, रेल परियोजनाओं का विस्तार हो, केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे हो, विकास की ये रेखाएं, इस क्षेत्र के कोने-कोने में जीवन की भी भाग्य रेखाएं बन रही हैं।

साथियों,

21वीं सदी का भारत आज जिस स्पीड और जिस स्केल पर काम कर रहा है, उसकी पूरी दुनिया चर्चा कर रही है। मैं आपको उत्तराखंड, पश्चिमी यूपी और दिल्ली का ही उदाहरण देता हूं। कुछ सप्ताह पहले ही, दिल्ली मेट्रो का विस्तार हुआ, मेरठ में मेट्रो-सेवा की शुरुआत हुई, दिल्ली-मेरठ नमो-भारत रेल देश को समर्पित की गई, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की शुरुआत हुई, हवाई जहाजों के लिए MRO फेसिलिटी पर काम शुरू हुआ, और आज, देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे शुरु हो रहा है।

साथियों,

इतने छोटे से रीजन में ये सब इतने कम समय में हो रहा है। कल्पना कीजिए, देश में कितने बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है। और इसलिए ही मैं कहता हूं - 21वीं सदी का भारत, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जिस नए युग में प्रवेश कर रहा है, वो अभूतपूर्व है, अकल्पनीय है।

साथियों,

आज भारत के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने वाले, अनेक इकोनॉमिक कॉरिडोर्स, उस पर काम चल रहा है। जैसे दिल्ली-मुबंई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, बेंगलुरू-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, ईस्ट कोस्ट इकोनॉमिक कॉरिडोर, अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, ऐसे बहुत से इकोनॉमिक कॉरिडोर देश में बनाए जा रहे हैं। ये इकोनॉमिक कॉरिडोर, प्रगति के नए द्वार हैं, गेटवे हैं, डोर हैं। और इनसे उम्मीदों की डोर भी जुड़ी हुई है। ये इकोनॉमिक कॉरिडोर, सड़क के अलावा नए-नए व्यापार-कारोबार का मार्ग बनाते हैं। फैक्ट्रियों के लिए, गोदामों के लिए पूरा नेटवर्क, उसका आधार तैयार करते हैं।

साथियों,

देहरादून-दिल्ली इकोनॉमिक कॉरिडोर से भी इस पूरे क्षेत्र का कायाकल्प होने जा रहा है। पहला फायदा तो ये है कि इससे समय बचेगा, आना-जाना सस्ता और तेज होगा, लोगों का पेट्रोल-डीजल कम खर्च होगा, किराया-भाड़ा कम होगा, और दूसरा बड़ा फायदा रोजगार का होगा। अभी इसके निर्माण में 12 हजार करोड़ रुपए खर्च हुए, तो हज़ारों श्रमिकों को काम मिला है। साथ ही, जो इंजीनियर हैं, अन्य स्किल्ड वर्कफोर्स हैं, ट्रांसपोर्ट से, उससे जुड़े साथी हैं, उनको भी बहुत बड़ी मात्रा में काम मिला है। किसानों और पशुपालकों की उपज भी, अब तेज़ गति से, बड़ी मंडियों और बड़े बाज़ारों तक पहुंचेगी।

साथियों,

इस शानदार एक्सप्रेस-वे से उत्तराखंड के टूरिज्म को बहुत ही बड़ा फायदा होगा। देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, मसूरी और चारधाम यात्रा के लिए ये सबसे प्रमुख मार्ग बनेगा। और हम सभी जानते हैं, जब टूरिज्म का विकास होता है, तो हर कोई कुछ न कुछ कमाता है। होटल हो, ढाबे वाले हो, टैक्सी हो, ऑटो हो, होम स्टे हो, सबको इसका फायदा होता है।

साथियों,

मुझे खुशी है कि आज उत्तराखंड, विंटर टूरिज्म, विंटर स्पोर्टस और wed in india, शादी के लिए, बहुत बेहतरीन डेस्टिनेशन बनता जा रहा है।

साथियों,

उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के लिए बारहमासी पर्यटन बहुत जरूरी है। इसलिए मेरा सर्दियों में होने वाली धार्मिक यात्राओं को लेकर बहुत आग्रह रहा है। और मुझे खुशी है कि हर साल इन यात्राओं में लोगों की संख्या बढ़ रही है। आपको याद होगा, मैं 2023 में आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा पर गया था। पहले बहुत जाता था, बीच में बिल्कुल जा नहीं पाया, कई वर्षों के बाद मैं गया, और मुझे मुख्यमंत्री जी बता रहे थे, गर्वनर साहब बीच मे आए, वो भी बता रहे थे कि 2023 में वहां गया और उसके बाद, बहुत बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां जा रहे हैं। पहले वहां कुछ सौ लोग ही सर्दियों में यात्रा के लिए जाते थे। साल 2025 में, करीब-करीब 40 हजार से अधिक लोगों ने इन पवित्र स्थानों की यात्रा की है। कभी एक हजार नहीं होते थे, अगर चालीस हजार पहुंचते हैं तो यहां के लोगों की रोजी-रोटी की कितनी बड़ी ताकत आ जाती है। इसी तरह साल 2024 में शीतकालीन चारधाम यात्रा में, करीब अस्सी हज़ार श्रद्धालु आए थे। 2025 में ये संख्या डेढ़ लाख पार कर चुकी है।

साथियों,

हम ऐसा विकसित भारत बनाने में जुटे हैं, जहां प्रगति भी हो, प्रकृति भी हो और संस्कृति भी हो। और इसलिए, आज होने वाले हर निर्माण को, इन्हीं त्रिवेणी, प्रगति, प्रकृति और सांस्कृति की त्रिवेणी, इन्हीं मूल्यों के आधार पर विकसित किया जा रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर से इंसानों को भी सुविधा हो, और वहां रहने वाले वन्यजीवों को भी असुविधा न हो, ये हमारा प्रयास है। और इसलिए ही इस एक्सप्रेसवे पर, करीब 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर भी बनाया गया है। हाथियों को भी असुविधा न हो, इसका भी ध्यान रखा गया है।

वैसे साथियों,

मैं आज देशभर के सभी पर्यटकों और तीर्थयात्रियों से भी एक आग्रह करना चाहता हूं। हमारे पहाड़, ये वन क्षेत्र, ये देवभूमि की धरोहर, ये बहुत ही बहुत पवित्र स्थान हैं। ऐसे स्थानों को साफ-सुथरा रखना, ये हम सभी का कर्तव्य है। यहां रहने वालों का भी और यात्री के रूप में आने वालों का भी। इन इलाकों में प्लास्टिक की बोतलें, कूड़े-कचरे का ढेर, ये देवभूमि की पवित्रता को ठेस पहुंचाता है। इसलिए बहुत आवश्यक है कि हम देवभूमि के इन स्थलों को, हमारे इन तीर्थ स्थलों को स्वच्छ रखें, सुंदर रखें।

साथियों,

अगले वर्ष हरिद्वार में कुंभ का भी आयोजन होना है। हमें आस्था के इस संगम को दिव्य-भव्य और स्वच्छ बनाने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़नी है।

साथियों,

उत्तराखंड में नंदा देवी राजजात यात्रा भी होती है। ये आस्था का उत्सव तो है ही, ये हमारी सांस्कृतिक चेतना का भी जीवंत उदाहरण है। जहां मां नंदा को बेटी मानकर पूरे सम्मान के साथ विदा किया जाता है। इस यात्रा में बहनों-बेटियों की भागीदारी, इसे विशेष बनाती है। मैं मां नंदा को प्रणाम करते हुए, देशभर की बहनों-बेटियों को भी विशेष संदेश देना चाहता हूं। विकसित भारत के निर्माण में आपकी बहुत बड़ी भूमिका है। इस देश की बेटियों की, इस देश की माताओं की, बहनों की बहुत बड़ी भूमिका मैं देख रहा हूं। और बहनों-बेटियों की सुविधा, सुरक्षा और लोकतंत्र में भागीदारी, ये डबल इंजन सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता है। आप अभी देख रही हैं, कि दुनिया में कितना बड़ा संकट आया है। इससे दुनिया के विकसित देशों में भी कितना हाहाकार मचा है। ऐसे मुश्किल हालात में भी, सरकार का निरंतर प्रयास है कि हमारी बहनों को कम से कम परेशानी हो।

साथियों,

बहनों-बेटियों की भागीदारी का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव अब देश के सामने है। 4 दशकों के इंतज़ार के बाद संसद ने, नारीशक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था। इससे विधानसभा और लोकसभा में महिलाओं के लिए तैंतीस प्रतिशत आरक्षण तय हो गया। सभी दलों ने आगे आकर इस महत्वपूर्ण कानून को समर्थन दिया। अब महिलाओं को ये जो हक मिला है ना, इस हक को लागू करने में देर नहीं होनी चाहिए। अब ये लागू होना चाहिए। अब जो 2029 में लोकसभा के चुनाव होंगे, अब तब से लेकर विधान सभा के भी चुनाव आते रहेंगे, जो भी चुनाव आते रहेंगे, 2029 से ही ये लागू हो जाना चाहिए। ये देश की भावना है, ये देश की हर बहन-बेटी की इच्छा है। मातृशक्ति की इसी इच्छा को नमन करते हुए, 16 अप्रैल से संसद में विशेष चर्चा तय की गई है। देश की बहनों-बेटियों के हक से जुड़े इस काम को, सभी राजनीतिक दल मिलकर के सर्वसम्मति से आगे बढ़ाएं, उसको पूरा करे। और मैंने आज देश की सभी बहनों के नाम एक खुला पत्र लिखा है, सोशल मीडिया में शायद ये मेरा पत्र आप तक पहुंचा होगा, हो सकता है टीवी और अखबार वाले भी इस पत्र का जिक्र करते होंगे। मैंने बड़े आग्रह के साथ देश की माताओं-बहनों को इस कार्य में भागीदार बनने के लिए निमंत्रित किया है। मुझे पक्का विश्वास है कि पत्र मेरे देश की माताएं-बहनें जरूर पढ़ेंगी। एक एक शब्द पर मनन करेंगी, और इतना बड़ा पवित्र कार्य करने के लिए 16-17-18 को संसद में आने वाले सभी सांसदों को उनके आशीर्वाद भी मिलेंगे। मैं आज देवभूमि से देश के सभी दलों से फिर अपील करूंगा कि नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन का जरूर समर्थन करें। 2029 में हमारे देश की 50 प्रतिशत जनसंख्या हमारी माताएं-बहनें, हमारी बेटियां, उनको उनका हक हम देकर रहें।

साथियों,

मैं उत्तराखंड आउं और फौज की बात ना हो, तो बात अधूरी ही रहती है। ये गढ़ी कैंट, ये सभा स्थल, ये उत्तराखंड की महान सैन्य परंपरा का प्रमाण है। यहां पास ही देश की रक्षा सुरक्षा से जुड़े कई संस्थान हैं, 1962 की लड़ाई में, शहीद जसवंत सिंह रावत जी के शौर्य को देश कभी भुला नहीं सकता।

साथियों,

सेना के सामर्थ्य को सशक्त करना हो, या हमारे सैनिक परिवारों की सुविधा और सम्मान हो, हमारी सरकार इसके लिए निरंतर प्रयासरत है। वन रैंक वन पेंशन के माध्यम से हमारी सरकार ने, अब तक करीब सवा लाख करोड़ रुपए पूर्व फौजियों को उनके खाते में जमा कर दिए हैं। उत्तराखंड के भी हजारों परिवारों को इसका लाभ मिला है। इसके अलावा, इस वर्ष पूर्व फौजियों के लिए health scheme का बजट भी छत्तीस प्रतिशत बढ़ाया गया है। 70 वर्ष और इससे अधिक के ex-servicemen के लिए, दवाईयों की door step home delivery भी शुरू की गई है। पूर्व फौजियों के बच्चों की एजुकेशन ग्रांट भी डबल की गई है। और बेटियों के विवाह के लिए जो सहायता मिलती है, उसको भी 50 हज़ार से बढ़ाकर एक लाख रुपए किया गया है।

साथियों,

देशभक्ति, देवभक्ति और प्रगति, ऐसे हर आयाम को जोड़ते हुए, हमें देश को विकसित बनाना है। एक बार फिर दिल्ली-वासियों को, उत्तर प्रदेश वासियों को, और एक प्रकार से देशवासियों को, इस शानदार एक्सप्रेसवे की मैं बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

मेरे साथ बोलिये-

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

बहुत-बहुत धन्यवाद !