प्रसारण क्षेत्र से जुड़ी लगभग 250 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शुभारंभ और शिलान्यास किया
“यह बहुत खुशी की बात है कि खेलो इंडिया यूथ गेम्स खूबसूरत शहर चेन्नई में आयोजित किए जा रहे हैं”
“खेलो इंडिया गेम्स - 2024 को आरंभ करने का शानदार तरीका है”
“तमिलनाडु चैंपियनों को पैदा करने वाली धरती है”
“विशाल खेल कार्यक्रमों का आयोजन भारत को एक शीर्ष खेल राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है”
“वीरा मंगई वेलु नचियार नारी शक्ति की प्रतीक हैं आज उनका व्यक्तित्व सरकार के अनेक निर्णयों में प्रतिबिम्‍बित होता है।”
“पिछले 10 वर्षों में, सरकार ने सुधार किया, खिलाड़ियों ने प्रदर्शन किया और भारत में खेल की पूरी व्‍यवस्‍था ही बदल गई”
“आज, हम खेलों में युवाओं के आने का इंतज़ार नहीं कर रहे हैं, बल्कि हम खेलों को युवाओं तक ले जा रहे हैं”
“आज स्कूल-कॉलेजों में पढ़ने वाले हमारे युवा जो खेल से जुड़े क्षेत्रों में अपना करियर बनाने के इच्‍छुक हैं, उनका बेहतर भविष्य भी मोदी की गारंटी है”

वणक्कम चेन्नई।

तमिलनाडु के गवर्नर श्री आर. एन. रवि जी, मुख्यमंत्री श्रीमान एम. के. स्टालिन जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सदस्य अनुराग ठाकुर, एल. मुरुगन, निशीथ प्रमाणिक, तमिलनाडु सरकार के मंत्री उदयनिधि स्टालिन, और भारत के कोने-कोने से यहां आए मेरे युवा साथियों।

I welcome everyone to the 13th Khelo India Games. For Indian sports, this is a great way to start 2024. My young friends gathered here represent a Young India, a New India. Your energy and enthusiasm is taking our country to new heights in the world of sports. I extend my best wishes to all the athletes and sport-lovers who have come to Chennai from across the country. Together, you are showcasing the true spirit of Ek Bharat Shreshtha Bharat. The warm people of Tamil Nadu, the beautiful Tamil language, culture and cuisine will surely make you feel at home. I am sure that their hospitality will win your hearts. The Khelo India Youth Games will certainly provide you with an opportunity to showcase your skills. But it will also help you make new friendships that will last a lifetime.

साथियों,

आज यहां दूरदर्शन और आकाशवाणी की अनेक परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी हुआ है। 1975 में प्रसारण शुरू करने वाला चेन्नई दूरदर्शन केंद्र, आज से एक नई यात्रा शुरू कर रहा है। आज यहां डीडी तमिल चैनल को भी नए रूप के बाद लॉन्च किया गया है। 8 राज्यों में 12 नए FM ट्रांसमीटर्स के शुरू होने से करीब डेढ़ करोड़ लोगों को फायदा होगा। आज 26 नई FM ट्रांसमीटर्स परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी गई है। मैं तमिलनाडु के लोगों को, देश के लोगों को इसके लिए भी बधाई देता हूं।

साथियों,

भारत में खेलों के विकास में तमिलनाडु का विशेष स्थान रहा है। ये चैंपियन्स पैदा करने वाली धरती है। इस भूमि ने टेनिस में नाम रौशन करने वाले अमृतराज ब्रदर्स को जन्म दिया। इसी धरती से हॉकी टीम के कप्तान भास्करन निकले, जिनकी कप्तानी में भारत ने ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीता। शतरंज के खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद, प्रज्ञानंद और पैरालंपिक चैंपियन मरियप्पन भी तमिलनाडु की ही देन हैं। ऐसे कितने ही खिलाड़ी इस धरती से निकले हैं, हर स्पोर्ट्स में कमाल कर रहे हैं। मुझे विश्वास है, आप सभी को तमिलनाडु की इस धरती से और ज्यादा प्रेरणा मिलेगी।

साथियों,

हम सभी भारत को दुनिया के Top Sporting Nations में देखना चाहते हैं। इसके लिए बहुत जरूरी है कि देश में लगातार बड़े स्पोर्ट्स इवेंट हों, खिलाड़ियों का अनुभव बढ़े और ग्राउंड लेवल से खिलाड़ी चुनकर बड़े इवेंट्स में खेलने आएं। खेलो इंडिया अभियान, आज इसी भूमिका को निभा रहा है। 2018 से अब तक 12 खेलो इंडिया गेम्स का आयोजन हो चुका है। इंडिया यूथ गेम्स, खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स, खेलो इंडिया विंटर गेम्स और खेलो इंडिया पैरा गेम्स, आपको खेलने का मौका भी दे रहे हैं और नए टेलेंट को सामने भी ला रहे हैं। अब एक बार फिर, खेलो इंडिया यूथ गेम्स का शुभारंभ हो रहा है। चेन्नई, त्रिचि, मदुरै और कोयम्बटूर, तमिलनाडु के ये चार शानदार शहर अपने यहां चैंपियन्स का स्वागत करने के लिए तैयार हैं।

साथियों,

मुझे विश्वास है, चाहे खिलाड़ी हों या दर्शक, हर किसी को चेन्नई के खूबसूरत beaches का सम्मोहन अपनी ओर खींचेगा। आप लोगों को मदुरै के अद्वितीय मंदिरों की आभा महसूस होगी। त्रिचि के मंदिर, वहां का आर्ट एंड क्राफ्ट आपका मन मोह लेगा...और कोयम्बटूर के मेहनती उद्यमी आपका दिल खोलकर स्वागत करेंगे। तमिलनाडु के इन सभी शहरों में आपको एक ऐसी दिव्य अनुभूति होगी, जिसे आप कभी भूलना नहीं चाहेंगे।

साथियों,

खेलो इंडिया यूथ गेम्स के दौरान 36 states के एथलीट अपनी प्रतिभा और प्रतिबद्धता का प्रदर्शन करेंगे। मैं कल्पना कर सकता हूं कि जब 5 हजार से ज्यादा युवा एथलीट अपने जुनून, अपने उत्साह के साथ मैदान पर आएंगे तो यहां क्या वातावरण होगा। हमें इंतजार है, आर्चरी, एथलेटिक्स और बैडमिंटन जैसे खेलों में मुकाबले का जो हमें आनंद से भर देंगे। हमें इंतजार है, स्क्वैश में दिखने वाले जोश का, जिसे पहली बार खेलो इंडिया यूथ गेम्स में शामिल किया गया है। हमें इंतजार है, सिलम्बम का, जो तमिलनाडु के प्राचीन गौरव और heritage sport को नई ऊंचाई देगा। अलग-अलग राज्यों के, अलग-अलग खेलों के खिलाड़ी एक संकल्प, एक प्रतिबद्धता और एक भावना के साथ एकजुट होंगे। खेल के प्रति आपका समर्पण, खुद पर आपका भरोसा, मुश्किलों से जूझने का हौसला और असाधारण प्रदर्शन का जज्बा, पूरा देश देखेगा।

साथियों,

तमिलनाडु महान संत तिरुवल्लुवर जी की धरती है। संत तिरुवल्लुवर ने अपनी रचनाओं से युवाओं को नई दिशा दी थी, उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया था। खेलो इंडिया यूथ गेम्स के logo में भी महान तिरुवल्लुर की छवि है। संत तिरुवल्लुवर ने लिखा था, अरुमई उदैथथेंद्रु असावामई वेनडुम, पेरुमै मुयारची थारुम अर्थात्, विपरीत परिस्थियों में भी हमें कमजोर नहीं पड़ना चाहिए, हमें कठिनाई से नहीं भागना चाहिए। हमें अपने मन को मजबूत करके लक्ष्य को सिद्ध करना चाहिए। एक खिलाड़ी के लिए ये बहुत बड़ी प्रेरणा है। मुझे खुशी है कि इस बार खेलो इंडिया यूथ गेम्स का मस्कट वीरा मंगई वेलु नाचियार को बनाया गया है। किसी real-life personality को मस्कट चुना जाना, अभूतपूर्व है। वीरा मंगई वेलु नाचियार नारी शक्ति की प्रतीक हैं। आज सरकार के अनेक फैसलों में उनके ही व्यक्तित्व का प्रतिबिंब है। उनकी प्रेरणा से सरकार स्पोर्ट्स वूमन को भी Empower करने के लिए लगातार काम कर रही है। खेलो इंडिया अभियान के तहत 20 खेलों में women’s लीग्स का आयोजन किया गया। इसमें 50 हजार से ज्यादा महिला एथलीट्स ने हिस्सा लिया। दस का दम’जैसी पहल ने भी 1 लाख से ज्यादा महिला एथलीट्स को अपना टैलेंट दिखाने का अवसर दिया था।

साथियों,

आज बहुत लोगों को हैरानी होती है कि अचानक ऐसा क्या हुआ कि 2014 के बाद हमारे एथलीट्स का प्रदर्शन इतना बेहतर कैसे हो गया? आपने देखा है कि भारत ने टोक्यो ओलंपिक और पैरालंपिक गेम्स में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। एशियन गेम्स और एशियन पैरा गेम्स में भी भारत ने इतिहास रच दिया। यूनिवर्सिटी गेम्स में भी भारत ने मेडल्स का नया रिकॉर्ड बनाया। ये अचानक ही नहीं हुआ है। देश के खिलाड़ी की मेहनत और जज्बे में पहले भी कमी नहीं थी। लेकिन बीते 10 वर्षों में उसे नया आत्मविश्वास मिला है, कदम-कदम पर सरकार का साथ मिला है। पहले खेलों में भी जिस प्रकार के खेल होते थे, उनको हमने बंद किया है। बीते 10 वर्षों में सरकार ने Reform किया, खिलाड़ियों ने perform किया और sports का पूरा सिस्टम transform हो गया। आज खेलो इंडिया अभियान के माध्यम से देश के हजारों एथलीट्स को हर महीने 50 हजार रुपए से ज्यादा की मदद दी जा रही है। 2014 में हमने TOPS यानी, TOPS यानी टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम को लॉन्च किया था। इसके जरिए हमने टॉप एथलीट्स की ट्रेनिंग, international exposure और बड़े sports events में उनका participation सुनिश्चित किया है। अब हमारी नजर इस साल पेरिस, और 2028 के लॉस एंजेल्स ओलंपिक गेम्स पर है। इसके लिए भी TOPS के तहत खिलाड़ियों को हर संभव मदद की जा रही है।

Friends

Today, we are not waiting for youth to come to sports, we are taking sports to youth!

साथियों,

खेलो इंडिया जैसे अभियान, गांव-गरीब, आदिवासी और lower middle class परिवारों के युवाओं के सपने साकार कर रहे हैं। आज जब हम वोकल फॉर लोकल कहते हैं, तो इसमें स्पोर्टिंग टैलेंट भी शामिल है। आज हम लोकल लेवल पर खिलाड़ियों के लिए बेहतरीन सुविधाएं और अच्छे कंपीटिशन्स ऑर्गेनाइज़ कर रहे हैं। इससे उन्हें इंटरनेशनल लेवल का एक्सपोजर मिलता है। बीते 10 वर्षों में ऐसे अनेक इंटरनेशनल टूर्नामेंट्स हमने पहली बार भारत में आयोजित किए हैं। आप कल्पना कर सकते हैं, देश की इतनी बड़ी कोस्टल-लाइन है, इतने सारे beaches हैं। लेकिन अब जाकर पहली बार दीव में beach games का आयोजन हुआ है। इन गेम्स में मल्लखंब जैसे पारंपरिक भारतीय खेलों के साथ-साथ 8 sports शामिल थे। देशभर के 1600 एथलीट्स ने इनमें कंपीट किया। इससे भारत में beach games और sports tourism का एक नया चैप्टर शुरु हुआ है। इससे हमारी costal cities को बहुत लाभ होने वाला है।

साथियों,

हमारे young athletes को international exposure मिले और भारत global sports ecosystem का अहम केंद्र बने, ये हमारा संकल्प है। इसलिए, हम 2030 में यूथ ओलंपिक्स और 2036 में ओलंपिक गेम्स, भारत में कराने के लिए पूरी मेहनत से काम कर रहे हैं। आप सभी जानते हैं कि स्पोर्ट्स सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं है। बल्कि स्पोर्ट्स, अपने आप में एक बहुत बड़ी इकॉनॉमी है। इसमें युवाओं के लिए रोज़गार की अनेक संभावनाएं हैं। मैंने आने वाले 5 वर्षों में भारत को दुनिया की तीसरी बड़ी इकॉनॉमी बनाने की गारंटी दी है। इस गारंटी में स्पोर्ट्स इकॉनॉमी की हिस्सेदारी भी बढ़े, ये हमारा प्रयास है। इसलिए, बीते 10 वर्षों से हम स्पोर्ट्स से जुड़े अन्य सेक्टर्स का भी विकास कर रहे हैं।

आज देश में स्पोर्ट्स से जुड़े प्रोफेशनल्स तैयार करने के लिए स्किल डेवलपमेंट पर बल दिया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ, हम, स्पोर्ट्स equipment manufacturing और services से जुड़ा इकोसिस्टम विकसित कर रहे हैं। देश में sports science, innovation, manufacturing, sports coaching, sports psychology, sports nutrition, इससे जुड़े प्रोफेशनल्स को हम प्लेटफॉर्म दे रहे हैं। बीते वर्षों में देश को पहली नेशनल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी मिली। आज खेलो इंडिया अभियान से देश की 300 से ज्यादा प्रतिष्ठित एकेडमीज़ बन चुकी हैं। एक हजार, खेलो इंडिया सेंटर्स औऱ 30 से ज्यादा सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस जुड़े हुए हैं। देश की नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी में हमने sports को मुख्य करिकुलम का हिस्सा बनाया है। इससे स्पोर्ट्स को एक करियर के रूप में चुनने की एक जागरुकता बचपन में ही आ रही है।

साथियों,

एक अनुमान है कि आने वाले कुछ सालों में ही भारत की स्पोर्ट्स इंडस्ट्री करीब-करीब एक लाख करोड़ रुपए की हो जाएगी। इसका सीधा लाभ हमारे युवा साथियों को होगा। बीते वर्षों में स्पोर्ट्स को लेकर जो ये जागरूकता देश में आई है, इससे broadcasting, sports goods, sports tourism और sports apparel जैसे बिजनेस में तेजी से वृद्धि हो रही है। हमारा प्रयास है कि Sports Equipment manufacturing में भी भारत आत्मनिर्भर बने। आज हम 300 प्रकार के sports equipment मैन्युफेक्चर कर रहे हैं। हमारा प्रयास है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में इससे जुड़े manufacturing clusters का निर्माण हो।

साथियों,

खेलो इंडिया अभियान के तहत देशभर में जो sports infra बन रहा है, वो भी रोज़गार का बड़ा माध्यम बन रहा है। आज अलग-अलग स्पोर्ट्स से जुड़ी लीग्स भी तेज़ी से बढ़ रही हैं। इससे भी सैकड़ों नए रोजगार बन रहे हैं। यानि आज हमारे जो युवा स्कूल-कॉलेज में हैं, जो Sports related sectors में अपना करियर बनाना चाहते हैं, उनका बेहतर फ्यूचर, ये भी- मोदी की गारंटी है।

साथियों,

आज सिर्फ खेल ही नहीं, हर सेक्टर में भारत का डंका बज रहा है। नया भारत पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त करने, नया गढ़ने, नया रचने और नए कीर्तिमान बनाने चल पड़ा है। मुझे यकीन है अपने युवाओं के सामर्थ्य पर, उनके जीतने की ललक पर। मुझे भरोसा है आपके दृढ़ निश्चय और मानसिक शक्ति पर। आज के भारत में बड़े लक्ष्य तय करने और उसे हासिल करने की क्षमता है। कोई रिकॉर्ड इतना बड़ा नहीं कि हम उसे तोड़ ना सकें। इस वर्ष हम नए रिकॉर्ड बनाएंगे, खुद के लिए और दुनिया के लिए नई लकीर खीचेंगे। आपको आगे बढ़ना है, क्योंकि आपके साथ भारत आगे बढ़ेगा। जुट जाइए, खुद जीतीए और देश को जिताइए। एक बार फिर सभी एथलीट्स को अनेक-अनेक शुभकामनाएं।

धन्यवाद।

I declare Khelo India Youth Games 2023 open.

Explore More
अमृतकाल में त्याग और तपस्या से आने वाले 1000 साल का हमारा स्वर्णिम इतिहास अंकुरित होने वाला है : लाल किले से पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

अमृतकाल में त्याग और तपस्या से आने वाले 1000 साल का हमारा स्वर्णिम इतिहास अंकुरित होने वाला है : लाल किले से पीएम मोदी
India sets sights on global renewable ammonia market, takes strides towards sustainable energy leadership

Media Coverage

India sets sights on global renewable ammonia market, takes strides towards sustainable energy leadership
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
प्रधानमंत्री मोदी का ‘IANS’ के साथ इंटरव्यू
May 27, 2024

पहले तो मैं आपकी टीम को बधाई देता हूं भाई, कि इतने कम समय में आपलोगों ने अच्छी जगह बनाई है और एक प्रकार से ग्रासरूट लेवल की जो बारीक-बारीक जानकारियां हैं। वह शायद आपके माध्यम से जल्दी पहुंचती है। तो आपकी पूरी टीम बधाई की पात्र है।

Q1 - आजकल राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल को पाकिस्तान से इतना endorsement क्यों मिल रहा है ? 370 ख़त्म करने के समय से लेकर आज तक हर मौक़े पर पाकिस्तान से उनके पक्ष में आवाज़ें आती हैं ?

जवाब – देखिए, चुनाव भारत का है और भारत का लोकतंत्र बहुत ही मैच्योर है, तंदरुस्त परंपराएं हैं और भारत के मतदाता भी बाहर की किसी भी हरकतों से प्रभावित होने वाले मतदाता नहीं हैं। मैं नहीं जानता हूं कि कुछ ही लोग हैं जिनको हमारे साथ दुश्मनी रखने वाले लोग क्यों पसंद करते हैं, कुछ ही लोग हैं जिनके समर्थन में आवाज वहां से क्यों उठती है। अब ये बहुत बड़ी जांच पड़ताल का यह गंभीर विषय है। मुझे नहीं लगता है कि मुझे जिस पद पर मैं बैठा हूं वहां से ऐसे विषयों पर कोई कमेंट करना चाहिए लेकिन आपकी चिंता मैं समझ सकता हूं।

 

Q 2 - आप ने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ मुहिम तेज करने की बात कही है अगली सरकार जब आएगी तो आप क्या करने जा रहे हैं ? क्या जनता से लूटा हुआ पैसा जनता तक किसी योजना या विशेष नीति के जरिए वापस पहुंचेगा ?

जवाब – आपका सवाल बहुत ही रिलिवेंट है क्योंकि आप देखिए हिंदुस्तान का मानस क्या है, भारत के लोग भ्रष्टाचार से तंग आ चुके हैं। दीमक की तरह भ्रष्टाचार देश की सारी व्यवस्थाओं को खोखला कर रहा है। भ्रष्टाचार के लिए आवाज भी बहुत उठती है। जब मैं 2013-14 में चुनाव के समय भाषण करता था और मैं भ्रष्टाचार की बातें बताता था तो लोग अपना रोष व्यक्त करते थे। लोग चाहते थे कि हां कुछ होना चाहिए। अब हमने आकर सिस्टमैटिकली उन चीजों को करने पर बल दिया कि सिस्टम में ऐसे कौन से दोष हैं अगर देश पॉलिसी ड्रिवन है ब्लैक एंड व्हाइट में चीजें उपलब्ध हैं कि भई ये कर सकते हो ये नहीं कर सकते हो। ये आपकी लिमिट है इस लिमिट के बाहर जाना है तो आप नहीं कर सकते हो कोई और करेगा मैंने उस पर बल दिया। ये बात सही है..लेकिन ग्रे एरिया मिनिमल हो जाता है जब ब्लैक एंड व्हाइट में पॉलिसी होती है और उसके कारण डिसक्रिमिनेशन के लिए कोई संभावना नहीं होती है, तो हमने एक तो पॉलिसी ड्रिवन गवर्नेंस पर बल दिया। दूसरा हमने स्कीम्स के सैचुरेशन पर बल दिया कि भई 100% जो स्कीम जिसके लिए है उन लाभार्थियों को 100% ...जब 100% है तो लोगों को पता है मुझे मिलने ही वाला है तो वो करप्शन के लिए कोई जगह ढूंढेगा नहीं। करप्शन करने वाले भी कर नहीं सकते क्योंकि वो कैसे-कैसे कहेंगे, हां हो सकता है कि किसी को जनवरी में मिलने वाला मार्च में मिले या अप्रैल में मिले ये हो सकता है लेकिन उसको पता है कि मिलेगा और मेरे हिसाब से सैचुरेशन करप्शन फ्री गवर्नेंस की गारंटी देता है। सैचुरेशन सोशल जस्टिस की गारंटी देता है। सैचुरेशन सेकुलरिज्म की गारंटी देता है। ऐसे त्रिविध फायदे वाली हमारी दूसरी स्कीम, तीसरा मेरा प्रयास रहा कि मैक्सिमम टेक्नोलॉजी का उपयोग करना। टेक्नोलॉजी में भी..क्योंकि रिकॉर्ड मेंटेन होते हैं, ट्रांसपेरेंसी रहती है। अब डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर में 38 लाख करोड़ रुपए ट्रांसफर किए हमने। अगर राजीव गांधी के जमाने की बात करें कि एक रुपया जाता है 15 पैसा पहुंचता है तो 38 लाख करोड़ तो हो सकता है 25-30 लाख करोड़ रुपया ऐसे ही गबन हो जाते तो हमने टेक्नोलॉजी का भरपूर उपयोग किया है। जहां तक करप्शन का सवाल है देश में पहले क्या आवाज उठती थी कि भई करप्शन तो हुआ लेकिन उन्होंने किसी छोटे आदमी को सूली पर चढ़ा दिया। सामान्य रूप से मीडिया में भी चर्चा होती थी कि बड़े-बड़े मगरमच्छ तो छूट जाते हैं, छोटे-छोटे लोगों को पकड़कर आप चीजें निपटा देते हो। फिर एक कालखंड ऐसा आया कि हमें पूछा जाता था 19 के पहले कि आप तो बड़ी-बड़ी बातें करते थे क्यों कदम नहीं उठाते हो, क्यों अरेस्ट नहीं करते हो, क्यों लोगों को ये नहीं करते हो। हम कहते थे भई ये हमारा काम नहीं है, ये स्वतंत्र एजेंसी कर रही है और हम बदइरादे से कुछ नहीं करेंगे। जो भी होगा हमारी सूचना यही है जीरो टोलरेंस दूसरा तथ्यों के आधार पर ये एक्शन होना चाहिए, परसेप्शन के आधार पर नहीं होना चाहिए। तथ्य जुटाने में मेहनत करनी पड़ती है। अब अफसरों ने मेहनत भी की अब मगरमच्छ पकड़े जाने लगे हैं तो हमें सवाल पूछा जा रहा है कि मगरमच्छों को क्यों पकड़ते हो। ये समझ में नहीं आता है कि ये कौन सा गैंग है, खान मार्केट गैंग जो कुछ लोगों को बचाने के लिए इस प्रकार के नैरेटिव गढ़ती है। पहले आप ही कहते थे छोटों को पकड़ते हो बड़े छूट जाते हैं। जब सिस्टम ईमानदारी से काम करने लगा, बड़े लोग पकड़े जाने लगे तब आप चिल्लाने लगे हो। दूसरा पकड़ने का काम एक इंडिपेंडेंट एजेंसी करती है। उसको जेल में रखना कि बाहर रखना, उसके ऊपर केस ठीक है या नहीं है ये न्यायालय तय करता है उसमें मोदी का कोई रोल नहीं है, इलेक्टेड बॉडी का कोई रोल नहीं है लेकिन आजकल मैं हैरान हूं। दूसरा जो देश के लिए चिंता का विषय है वो भ्रष्ट लोगों का महिमामंडन है। हमारे देश में कभी भी भ्रष्टाचार में पकड़े गए लोग या किसी को आरोप भी लगा तो लोग 100 कदम दूर रहते थे। आजकल तो भ्रष्ट लोगों को कंधे पर बिठाकर नाचने की फैशन हो गई है। तीसरा प्रॉब्लम है जो लोग कल तक जिन बातों की वकालत करते थे आज अगर वही चीजें हो रही हैं तो वो उसका विरोध कर रहे हैं। पहले तो वही लोग कहते थे सोनिया जी को जेल में बंद कर दो, फलाने को जेल में बंद कर दो और अब वही लोग चिल्लाते हैं। इसलिए मैं मानता हूं आप जैसे मीडिया का काम है कि लोगों से पूछे कि बताइए छोटे लोग जेल जाने चाहिए या मगरमच्छ जेल जाने चाहिए। पूछो जरा पब्लिक को क्या ओपिनियन है, ओपिनियन बनाइए आप लोग।

 

Q3- नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक सबने गरीबी हटाने की बात तो की लेकिन आपने आत्मनिर्भर भारत पर जोर दिया, इसे लेकर कैसे रणनीति तैयार करते हैं चाहे वो पीएम स्वनिधि योजना हो, पीएम मुद्रा योजना बनाना हो या विश्वकर्मा योजना हो मतलब एकदम ग्रासरूट लेवल से काम किया ?

जवाब – देखिए हमारे देश में जो नैरेटिव गढ़ने वाले लोग हैं उन्होंने देश का इतना नुकसान किया। पहले चीजें बाहर से आती थी तो कहते थे देखिए देश को बेच रहे हैं सब बाहर से लाते हैं। आज जब देश में बन रहा है तो कहते हैं देखिए ग्लोबलाइजेशन का जमाना है और आप लोग अपने ही देश की बातें करते हैं। मैं समझ नहीं पाता हूं कि देश को इस प्रकार से गुमराह करने वाले इन ऐलिमेंट्स से देश को कैसे बचाया जाए। दूसरी बात है अगर अमेरिका में कोई कहता है Be American By American उसपर तो हम सीना तानकर गर्व करते हैं लेकिन मोदी कहता है वोकल फॉर लोकल तो लोगों को लगता है कि ये ग्लोबलाइजेशन के खिलाफ है। तो इस प्रकार से लोगों को गुमराह करने वाली ये प्रवृत्ति चलती है। जहां तक भारत जैसा देश जिसके पास मैनपावर है, स्किल्ड मैनपावर है। अब मैं ऐसी तो गलती नहीं कर सकता कि गेहूं एक्सपोर्ट करूं और ब्रेड इम्पोर्ट करूं..मैं तो चाहूंगा मेरे देश में ही गेहूं का आटा निकले, मेरे देश में ही गेहूं का ब्रेड बने। मेरे देश के लोगों को रोजगार मिले तो मेरा आत्मनिर्भर भारत का जो मिशन है उसके पीछे मेरी पहली जो प्राथमिकता है कि मेरे देश के टैलेंट को अवसर मिले। मेरे देश के युवाओं को रोजगार मिले, मेरे देश का धन बाहर न जाए, मेरे देश में जो प्राकृतिक संसाधन हैं उनका वैल्यू एडिशन हो, मेरे देश के अंदर किसान जो काम करता है उसकी जो प्रोडक्ट है उसका वैल्यू एडिशन हो वो ग्लोबल मार्केट को कैप्चर करे और इसलिए मैंने विदेश विभाग को भी कहा है कि भई आपकी सफलता को मैं तीन आधारों से देखूंगा एक भारत से कितना सामान आप..जिस देश में हैं वहां पर खरीदा जाता है, दूसरा उस देश में बेस्ट टेक्नोलॉजी कौन सी है जो अभीतक भारत में नहीं है। वो टेक्नोलॉजी भारत में कैसे आ सकती है और तीसरा उस देश में से कितने टूरिस्ट भारत भेजते हो आप, ये मेरा क्राइटेरिया रहेगा...तो मेरे हर चीज में सेंटर में मेरा नेशन, सेंटर में मेरा भारत और नेशन फर्स्ट इस मिजाज से हम काम करते हैं।

 

Q 4 - एक तरफ आप विश्वकर्माओं के बारे में सोचते हैं, नाई, लोहार, सुनार, मोची की जरूरतों को समझते हैं उनसे मिलते हैं तो वहीं दूसरी तरफ गेमर्स से मिलते हैं, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की बात करते हैं, इन्फ्लुएंसर्स से आप मिलते हैं इनकी अहमियत को भी सबके सामने रखते हैं, इतना डाइवर्सीफाई तरीके से कैसे सोच पाते हैं?

जवाब- आप देखिए, भारत विविधताओं से भरा हुआ है और कोई देश एक पिलर पर बड़ा नहीं हो सकता है। मैंने एक मिशन लिया। हर डिस्ट्रिक्ट का वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट पर बल दिया, क्यों? भारत इतना विविधता भरा देश है, हर डिस्ट्रिक्ट के पास अपनी अलग ताकत है। मैं चाहता हूं कि इसको हम लोगों के सामने लाएं और आज मैं कभी विदेश जाता हूं तो मुझे चीजें कौन सी ले जाऊंगा। वो उलझन नहीं होती है। मैं सिर्फ वन डिस्ट्रिक, वन प्रोडक्ट का कैटलॉग देखता हूं। तो मुझे लगता है यूरोप जाऊंगा तो यह लेकर जाऊंगा। अफ्रीका जाऊंगा तो यह लेकर जाऊंगा। और हर एक को लगता है एक देश में। यह एक पहलू है दूसरा हमने जी 20 समिट हिंदुस्तान के अलग-अलग हिस्से में की है। क्यों? दुनिया को पता चले कि दिल्ली, यही हिंदुस्तान नहीं है। अब आप ताजमहल देखें तो टूरिज्म पूरा नहीं होता जी मेरे देश का। मेरे देश में इतना पोटेंशियल है, मेरे देश को जानिए और समझिए और इस बार हमने जी-20 का उपयोग भारत को विश्व के अंदर भारत की पहचान बनाने के लिए किया। दुनिया की भारत के प्रति क्यूरियोसिटी बढ़े, इसमें हमने बड़ी सफलता पाई है, क्योंकि दुनिया के करीब एक लाख नीति निर्धारक ऐसे लोग जी-20 समूह की 200 से ज्यादा मीटिंग में आए। वह अलग-अलग जगह पर गए। उन्होंने इन जगहों को देखा, सुना भी नहीं था, देखा वो अपने देश के साथ कोरिलिरेट करने लगे। वो वहां जाकर बातें करने लगे। मैं देख रहा हूं जी20 के कारण लोग आजकल काफी टूरिस्टों को यहां भेज रहे हैं। जिसके कारण हमारे देश का टूरिज्म को बढ़ावा मिला।

इसी तरह आपने देखा होगा कि मैंने स्टार्टअप वालों के साथ मीटिंग की थी, मैं वार्कशॉप करता था। आज से मैं 7-8 साल पहले, 10 साल पहले शुरू- शुरू में यानी मैं 14 में आया। उसके 15-16 के भीतर-भीतर मैंने जो नए स्टार्टअप की दुनिया शुरू हुई, उनकी मैंने ऐसे वर्कशॉप की है तो मैं अलग-अलग कभी मैंने स्पोर्ट्स पर्सन्स के की, कभी मैंने कोचों के साथ की कि इतना ही नहीं मैंने फिल्म दुनिया वालों के साथ भी ऐसी मीटिंग की।

मैं जानता हूं कि वह बिरादरी हमारे विचारों से काफी दूर है। मेरी सरकार से भी दूर है, लेकिन मेरा काम था उनकी समस्याओं को समझो क्योंकि बॉलीवुड अगर ग्लोबल मार्केट में मुझे उपयोगी होता है, अगर मेरी तेलुगू फिल्में दुनिया में पॉपुलर हो सकती है, मेरी तमिल फिल्म दुनिया पॉपुलर हो सकती है। मुझे तो ग्लोबल मार्केट लेना था मेरे देश की हर चीज का। आज यूट्यूब की दुनिया पैदा हुई तो मैंने उनको बुलाया। आप देश की क्या मदद कर सकते हैं। इंफ्लुएंसर को बुलाया, क्रिएटिव वर्ल्ड, गेमिंम अब देखिए दुनिया का इतना बड़ा गेमिंग मार्केट। भारत के लोग इन्वेस्ट कर रहे हैं, पैसा लगा रहे हैं और गेमिंग की दुनिया में कमाई कोई और करता है तो मैंने सारे गेमिंग के एक्सपर्ट को बुलाया। पहले उनकी समस्याएं समझी। मैंने देश को कहा, मेरी सरकार को मुझे गेमिंग में भारतीय लीडरशिप पक्की करनी है।

इतना बड़ा फ्यूचर मार्केट है, अब तो ओलंपिक में गेमिंग आया है तो मैं उसमें जोड़ना चाहता हूं। ऐसे सभी विषयों में एक साथ काम करने के पक्ष में मैं हूं। उसी प्रकार से देश की जो मूलभूत व्यवस्थाएं हैं, आप उसको नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। हमें गांव का एक मोची होगा, सोनार होगा, कपड़े सिलने वाला होगा। वो भी मेरे देश की बहुत बड़ी शक्ति है। मुझे उसको भी उतना ही तवज्जो देना होगा। और इसलिए मेरी सरकार का इंटीग्रेटेड अप्रोच होता है। कॉम्प्रिहेंसिव अप्रोच होता है, होलिस्टिक अप्रोच होता है।

 

Q 5 - डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया उसका विपक्ष ने मजाक भी उड़ाया था, आज ये आपकी सरकार की खास पहचान बन गए हैं और दुनिया भी इस बात का संज्ञान ले रही है, इसका एक उदहारण यूपीआई भी है।

जवाब – यह बात सही है कि हमारे देश में जो डिजिटल इंडिया मूवमेंट मैंने शुरू किया तो शुरू में आरोप क्या लगाए इन्होंने? उन्होंने लगाई कि ये जो सर्विस प्रोवाइडर हैं, उनकी भलाई के लिए हो रहा है। इनको समझ नहीं आया कि यह क्षेत्र कितना बड़ा है और 21वीं सदी एक टेक्नॉलॉजी ड्रिवन सेंचुरी है। टेक्नोलॉजी आईटी ड्रिवन है। आईटी इन्फोर्स बाय एआई। बहुत बड़े प्रभावी क्षेत्र बदलते जा रहे हैं। हमें फ्यूचरस्टीक चीजों को देखना चाहिए। आज अगर यूपीआई न होता तो कोई मुझे बताए कोविड की लड़ाई हम कैसे लड़ते? दुनिया के समृद्ध देश भी अपने लोगों को पैसे होने के बावजूद भी नहीं दे पाए। हम आराम से दे सकते हैं। आज हम 11 करोड़ किसानों को 30 सेकंड के अंदर पैसा भेज सकते हैं। अब यूपीआई अब इतनी यूजर फ्रेंडली है तो क्योंकि यह टैलेंट हमारे देश के नौजवानों में है। वो ऐसे प्रोडक्ट बना करके देते हैं कि कोई भी कॉमन मैन इसका उपयोग कर सकता है। आज मैंने ऐसे कितने लोग देखे हैं जो अपना सोशल मीडिया अनुभव कर रहे हैं। हमने छह मित्रों ने तय किया कि छह महीने तक जेब में 1 पैसा नहीं रखेंगे। अब देखते हैं क्या होता है। छह महीने पहले बिना पैसे पूरी दुनिया में हम अपना काम, कारोबार करके आ गए। हमें कोई तकलीफ नहीं हुई तो हर कसौटी पर खरा उतर रहा है। तो यूपीआई ने एक प्रकार से फिनटेक की दुनिया में बहुत बड़ा रोल प्ले किया है और इसके कारण इन दिनों भारत के साथ जुड़े हुए कई देश यूपीआई से जुड़ने को तैयार हैं क्योंकि अब फिनटेक का युग है। फिनटेक में भारत अब लीड कर रहा है और इसलिए दुर्भाग्य तो इस बात का है कि जब मैं इस विषय को चर्चा कर रहा था तब देश के बड़े-बड़े विद्वान जो पार्लियामेंट में बैठे हैं वह इसका मखौल उड़ाते थे, मजाक उड़ाते थे, उनको भारत के पोटेंशियल का अंदाजा नहीं था और टेक्नोलॉजी के सामर्थ्य का भी अंदाज नहीं था।

 

Q 6 - देश के युवा भारत का इतिहास लिखेंगे ऐसा आप कई बार बोल चुके हैं, फर्स्ट टाइम वोटर्स का पीएम मोदी से कनेक्ट के पीछे का क्या कारण है?

एक मैं उनके एस्पिरेशन को समझ पाता हूं। जो पुरानी सोच है कि वह घर में अपने पहले पांच थे तो अब 7 में जाएगा सात से नौ, ऐसा नहीं है। वह पांच से भी सीधा 100 पर जाना चाहता है। आज का यूथ हर, क्षेत्र में वह बड़ा जंप लगाना चाहता है। हमें वह लॉन्चिंग पैड क्रिएट करना चाहिए, ताकि हमारे यूथ के एस्पिरेशन को हम फुलफिल कर सकें। इसलिए यूथ को समझना चाहिए। मैं परीक्षा पर चर्चा करता हूं और मैंने देखा है कि मुझे लाखों युवकों से ऐसी बात करने का मौका मिलता है जो परीक्षा पर चर्चा की चर्चा चल रही है। लेकिन वह मेरे साथ 10 साल के बाद की बात करता है। मतलब वह एक नई जनरेशन है। अगर सरकार और सरकार की लीडरशिप इस नई जनरेशन के एस्पिरेशन को समझने में विफल हो गई तो बहुत बड़ी गैप हो जाएगी। आपने देखा होगा कोविड में मैं बार-बार चिंतित था कि मेरे यह फर्स्ट टाइम वोटर जो अभी हैं, वह कोविड के समय में 14-15 साल के थे अगर यह चार दीवारों में फंसे रहेंगे तो इनका बचपन मर जाएगा। उनकी जवानी आएगी नहीं। वह बचपन से सीधे बुढ़ापे में चला जाएगा। यह गैप कौन भरेगा? तो मैं उसके लिए चिंतित था। मैं उनसे वीडियो कॉन्फ्रेंस से बात करता था। मैं उनको समझाता था का आप यह करिए। और इसलिए हमने डेटा एकदम सस्ता कर दिया। उस समय मेरा डेटा सस्ता करने के पीछे लॉजिक था। वह ईजिली इंटरनेट का उपयोग करते हुए नई दुनिया की तरफ मुड़े और वह हुआ। उसका हमें बेनिफिट हुआ है। भारत ने कोविड की मुसीबतों को अवसर में पलटने में बहुत बड़ा रोल किया है और आज जो डिजिटल रिवॉल्यूशन आया है, फिनटेक का जो रिवॉल्यूशन आया है, वह हमने आपत्ति को अवसर में पलटा उसके कारण आया है तो मैं टेक्नोलॉजी के सामर्थ्य को समझता हूं। मैं टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देना चाहता हूं।

प्रधानमंत्री जी बहुत-बहुत धन्यवाद आपने हमें समय दिया।

नमस्कार भैया, मेरी भी आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं, आप भी बहुत प्रगति करें और देश को सही जानकारियां देते रहें।