प्रधानमंत्री कृषि संपदा योजना से मत्स्यपालन के क्षेत्र से जुड़े लोगों को बड़े पैमाने पर लाभ होगा: प्रधानमंत्री मोदी
हमारा उद्देश्य है कि अगले 3-4 वर्षों में हम अपने उत्पादन को दोगुना करें और मत्स्य क्षेत्र को बढ़ावा दें: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना नए सिरे से श्वेत क्रांति (डेयरी क्षेत्र) और स्वीट रेवोल्यूशन (एपिकल्चर सेक्टर) के लिए मार्ग प्रशस्त होगा: प्रधानमंत्री

रउआ सभे के प्रणाम बा।

देशवा खातीर, बिहार खातीर, गांव के जिनगी के आसान बनावे खातीर और व्‍यवस्‍था मजबूत करे खातीर, मछरी उत्‍पादन, डेयरी, पशुपालन और कृषि क्षेत्र में पढ़ाई और रिसर्च से जुड़ल सैकड़न करौड़ रूपया के योजना के शिलान्‍यास और लोकार्पण भइल ह। ऐकरा खातीर सउसे बिहार के भाई-बहन लोगन के अनघा बधाई दे तनी।

बिहार के गवर्नर फागू चौहान जी, मुख्यमंत्री श्रीमान नीतीश कुमार जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथी श्रीमान गिरिराज सिंह जी, कैलाश चौधरी जी, प्रताप चंद्र सारंगी जी, संजीव बालियान जी, बिहार के उप मुख्यमंत्री भाई सुशील जी, बिहार विधानसभा के अध्यक्ष श्रीमान विजय चौधरी जी, राज्य मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यगण, सांसदगण, विधायक गण, और मेरे प्रिय साथियों,

साथियों, आज जितनी भी ये योजनाएं शुरू हुई हैं उनके पीछे की सोच ही यही है कि हमारे गांव 21वीं सदी के भारत, आत्मनिर्भर भारत की ताकत बनें, ऊर्जा बनें। कोशिश ये है कि अब इस सदी में Blue Revolution यानि मछली पालन से जुड़े काम, White Revolution यानि डेयरी से जुड़े काम, Sweet Revolution यानि शहद उत्पादन से जुड़े काम, हमारे गांवों को और समृद्ध और सशक्त करे। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई है। आज देश के 21 राज्यों में इस योजना का शुभारंभ हो रहा है। अगले 4-5 वर्षों में इस पर 20 हज़ार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए जाएंगे। इसमें से आज 1700 करोड़ रुपए का काम शुरु हो रहा है। इसी के तहत ही बिहार के पटना, पूर्णियां, सीतामढ़ी, मधेपुरा, किशनगंज और समस्तीपुर में अनेक सुविधाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया है। इससे मछली उत्पादकों को नया इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा, आधुनिक उपकरण मिलेंगे, नया मार्केट भी मिलेगा। इससे खेती के साथ ही अन्य माध्यमों से भी कमाई का अवसर बढ़ेगा।

साथियों, देश के हर हिस्से में, विशेषतौर पर समंदर और नदी किनारे बसे क्षेत्रों में मछली के व्यापार-कारोबार को, ध्यान में रखते हुए, पहली बार देश में इतनी बड़ी व्‍यापक योजना बनाई गई है। आज़ादी के बाद इस पर जितना निवेश हुआ, उनसे भी कई गुना ज्यादा निवेश प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना पर किया जा रहा है। जब अभी गिरिराज जी बता रहे थे तो शायद ये आंकड़ों को सुनकर भी कई लोगों को अचरज लगेगा कि ऐसे चला था लेकिन जब आप हकीकत को जानेंगे तो आपको लगेगा कि यह सरकार कितने-कितने क्षेत्रों में कितने-कितने लोगों की भलाई के लिए कैसे-कैसे लंबे कामों की योजना को आगे बढ़ा रही है।

देश में मछली से जुड़े व्यापार-कारोबार को देखने के लिए अब अलग से मंत्रालय भी बनाया गया है। इससे भी हमारे मछुआरे साथियों को, मछली के पालन और व्यापार से जुड़े साथियों को सुविधा हो रही है। लक्ष्य ये भी है कि आने वाले 3-4 साल में मछली निर्यात को दोगुना किया जाए। इससे सिर्फ फिशरीज सेक्टर में ही रोज़गार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे। अभी जिन साथियों से मैं बात कर रहा था, उनसे संवाद के बाद तो मेरा विश्वास और ज्यादा बढ़ गया है। जब मैंने राज्‍यों का विश्‍वास देखा और मैंने भाई ब्रजेश जी से बातें की, भाई ज्‍योति मंडल से बातें की और बेटी मोणिका से बात की, देखिए कितना विश्‍वास झलकता है।

साथियों, मछली पालन बहुत कुछ साफ पानी की उपलब्धता पर निर्भर करता है। इस काम में गंगा जी को स्वच्छ और निर्मल बनाने के मिशन से भी मदद मिल रही है। गंगा जी के आस-पास बसे इलाकों में रीवर ट्रांसपोर्ट को लेकर जो काम चल रहा है, उसका लाभ भी फिशरीज सेक्टर को मिलना तय है। इस 15 अगस्त को जिस मिशन डॉल्फिन की घोषणा की गई है, वो भी फिशरीज सेक्टर पर अपना प्रभाव स्‍वाभाविक, यानि एक प्रकार से बायो-प्रोडक्‍ट मदद, एक्‍स्‍ट्रा बेनिफि‍ट होने ही वाला है। मुझे पता चला है कि हमारे नीतीश बाबू जी इस मिशन से जऱा ज्‍यादा ही उत्साहित हैं। और इसलिए मुझे पक्‍का विश्‍वास है कि जब गंगा डॉल्फिन की संख्या बढ़ेगी, तो इसका लाभ गंगा तट के लोगों को तो बहुत मिलनेवाला है, सभी को मिलेगा।

साथियों, नीतीश जी के नेतृत्व में बिहार में गांव-गांव पानी पहुंचाने के लिए बहुत प्रशंसनीय काम हो रहा है। 4-5 साल पहले बिहार में सिर्फ 2 प्रतिशत घर पीने के साफ पानी की सप्लाई से जुड़े थे। आज ये आंकड़ा बढ़कर 70 प्रतिशत से अधिक हो गया है। इस दौरान करीब-करीब डेढ़ करोड़ घरों को पानी की सप्लाई से जोड़ा गया है। नीतीश जी के इस अभियान को अब जल जीवन मिशन से नई ताकत मिली है। मुझे जानकारी दी गई है कि कोरोना के इस समय में भी बिहार में करीब 60 लाख घरों को नल से जल मिलना सुनिश्चित किया गया है। ये वाकई बहुत बड़ी उपलब्धि है। ये इस बात का भी उदाहरण है कि इस संकट काल में जब देश में लगभग सब कुछ थम गया था, तब भी हमारे गांवों में किस तरह एक आत्‍मविश्‍वास के साथ काम चलता रहा। ये हमारे गांवों की ही ताकत है कि कोरोना के बावजूद अनाज हो, फल हो, सब्जियां हो, दूध हो, जो भी आवश्‍यक चीजें थीं, मंडियों तक, डेयरियों तक बिना किसी कमी, तकनीक के बिना आता ही रहा, लोगों तक पहुंचता ही रहा।

साथियों, इस दौरान अन्न उत्पादन हो, फल उत्पादन हो, दूध का उत्‍पादन हो, हर प्रकार से बंपर पैदावार हुई है। यही नहीं सरकारों ने, डेयरी उद्योग ने भी इस मुश्किल परिस्थिति के बावजूद रिकॉर्ड खरीद भी की है। पीएम किसान सम्मान निधि से भी देश के 10 करोड़ से ज्यादा किसानों के बैंक खातों में सीधा पैसा पहुंचाया गया है। इसमें करीब-करीब 75 लाख किसान हमारे बिहार के भी हैं। साथियों, जब से ये योजना शुरु हुई है, तब से अब तक करीब 6 हज़ार करोड़ रुपए बिहार के किसानों के बैंक खाते में जमा हो चुके हैं। ऐसे ही अनेक प्रयासों के कारण गांव पर इस वैश्विक महामारी का प्रभाव हम कम से कम रखने में सफल हुए हैं। ये काम इसलिए भी प्रशंसनीय है क्योंकि बिहार कोरोना के साथ-साथ बाढ़ की विभीषिका का भी बहादुरी से सामना कर रहा है।

साथियों, कोरोना के साथ-साथ भारी बरसात और बाढ़ के कारण बिहार समेत आसपास के क्षेत्रों में जो स्थिति बनी है, उससे हम सभी भलीभांति परिचित हैं। राज्य सरकार और केंद्र सरकार, दोनों का प्रयास है कि राहत के कामों को तेज गति से पूरा किया जाए। इस बात पर बहुत जोर दिया जा रहा है कि मुफ्त राशन की योजना और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोज़गार अभियान का लाभ बिहार के हर जरूरतमंद साथी तक पहुंचे, बाहर से गांव लौटे हर श्रमिक परिवार तक पहुंचे। इसलिए ही, मुफ्त राशन की योजना को जून के बाद दीपावली और छठपूजा तक बढ़ा दिया गया है।

साथियों, कोरोना संकट के कारण शहरों से लौटे जो श्रमिक साथी हैं, उनमें से अनेक साथी पशुपालन की तरफ बढ़ रहे हैं। केंद्र सरकार और बिहार सरकार की अनेक योजनाओं से उनको प्रोत्साहन भी मिल रहा है। मैं ऐसे साथियों को कहूंगा कि आज जो कदम आप उठा रहे हैं, उसका भविष्य उज्‍ज्‍वल है। मेरे शब्‍द लिख करके रखिए, आप जो कर रहे हैं इसका भविष्‍य उज्‍ज्‍वल है। सरकार का ये निरंतर प्रयास है कि देश के डेयरी सेक्टर का विस्तार हो। नए प्रोडक्ट्स बनें, नए इनोवेशंस हों, जिससे किसान को, पशुपालकों को ज्यादा आय मिले। इसके साथ इस बात पर भी फोकस किया जा रहा है कि देश में ही उत्तम नस्ल के पशु तैयार हों, उनके स्वास्थ्य की बेहतर व्यवस्था हो और उनका खान-पान स्वच्छ हो, पोषक हो।

इसी लक्ष्य के साथ आज देश के 50 करोड़ से ज्यादा पशुधन को खुरपका और मुंहपका जैसी बीमारियों से मुक्त करने के लिए मुफ्त टीकाकरण अभियान चल रहा है। पशुओं को बेहतर चारे के लिए भी अलग-अलग योजनाओं के तहत प्रावधान किए गए हैं। देश में बेहतर देसी नस्लों के विकास के लिए मिशन गोकुल चल रहा है। एक वर्ष पहले ही देशव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम शुरु किया गया था, जिसका एक चरण आज पूरा हो चुका है।

साथियों, बिहार अब उत्तम देसी नस्लों के विकास को लेकर देश का एक प्रमुख सेंटर बन रहा है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत आज पूर्णिया, पटना, बरौनी में जो आधुनिक सुविधाएं बनी हैं उससे डेयरी सेक्टर में बिहार की स्थिति और मज़बूत होने वाली है। पूर्णिया में जो सेंटर बना है, वो तो भारत के सबसे बड़े सेंटरों में से एक है। इससे सिर्फ बिहार ही नहीं पूर्वी भारत के बड़े हिस्से को बहुत लाभ होगा। इस केंद्र से ‘बछौर’ और ‘रेड पूर्णिया’ जैसी बिहार की देसी नस्लों के विकास और संरक्षण को भी और ज्यादा बढ़ावा मिलेगा।

साथियों,

एगो गाय सामान्यतः एक साल में एक बच्चा देवेली। लेकिन आई॰वी॰एफ़॰ तकनीक से एक गायकी मदद सेएक साल में अनेकों बच्चा प्रयोगशाला में हो रहल बा। हमार लक्ष्य इ तकनीक के गाँव-गाँव तक पहुँचावे के बा।

साथियों,

पशुओं की अच्छी नस्ल के साथ ही उनकी देखरेख और उसको लेकर सही वैज्ञानिक जानकारी भी उतनी ही ज़रूरी होती है। इसके लिए भी बीते सालों से निरंतर टेक्नॉलॉजी का उपयोग किया जा रहा है। इसी कड़ी में आज ‘ई-गोपाला’ app शुरु किया गया है। ई-गोपाला app एक ऐसा Online digital माध्यम होगा जिससे पशुपालकों को उन्नत पशुधन को चुनने में आसानी होगी, उनको बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी। ये app पशुपालकों को उत्पादकता से लेकर उसके स्वास्थ्य और आहार से जुड़ी तमाम जानकारियां देगा। इससे किसान को ये पता चल पाएगा कि उनके पशु को कब क्या ज़रूरत है और अगर वो बीमार है तो उसके लिए सस्ता इलाज कहां उपलब्ध है। यही नहीं ये app, पशु आधार से भी जोड़ा जा रहा है। जब ये काम पूरा हो जाएगा तो e-GOPALA app में पशु आधार नंबर डालने से उस पशु से जुड़ी सारी जानकारी आसानी से मिल जाएगी। इससे पशुपालकों को जानवर खरीदने-बेचने में भी उतनी ही आसानी होगी।

साथियों, कृषि हो, पशुपालन हो, मछलीपालन हो, इन सबका विकास और तेजी से हो, इसके लिए वैज्ञानिक तौर तरीकों को अपनाना और गांव में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना बहुत ही आवश्यक है। बिहार तो वैसे भी कृषि से जुड़ी पढ़ाई और रिसर्च का अहम सेंटर रहा है। दिल्ली में यहां हम लोग पूसा-पूसा सुनते रहते हैं। बहुत ही कम लोगों को पता है कि असली पूसा, दिल्ली में नहीं बल्कि बिहार के समस्तीपुर में है। यहां वाला तो एक तरह से उसका जुड़वा भाई है।

साथियों, गुलामी के कालखंड में ही, समस्तीपुर के पूसा में राष्ट्रीय स्तर का एग्रीकल्चर रिसर्च सेंटर खुला था। आज़ादी के बाद डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद और जननायक कर्पूरी ठाकुर जैसे विजनरी नेताओं ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। इन्हीं के प्रयासों से प्रेरणा लेते हुए साल 2016 में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्विद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय के रूप में मान्यता दी गई थी। इसके बाद इस यूनिवर्सिटी में और इसके तहत चलने वाले कॉलेज में Courses का भी और सुविधाओं का भी व्यापक विस्तार किया गया है। चाहे मोतिहारी में Agriculture और Forestry का नया कॉलेज हो, पूसा में School of Agribusiness and ruralmanagementहो, बिहार में कृषि विज्ञान और कृषि प्रबंधन की पढ़ाई के लिए शिक्षा व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जा रहा है। इसी काम को और आगे बढ़ाते हुए School of agribusiness and rural managementकी नई बिल्डिंग का उद्घाटन हुआ है। साथ ही, नए हॉस्टल, स्टेडियम और गेस्ट हाउस का भी शिलान्यास किया गया है।

साथियों, कृषि क्षेत्र की आधुनिक जरूरतों को देखते हुए, पिछले 5-6 वर्षों से देश में एक बड़ा अभियान जारी है। 6 साल पहले जहां देश में सिर्फ एक केंद्रीय कृषि विश्विद्यालय था, वहीं आज देश में 3-3 सेंट्रल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटीज़ हैं। यहां बिहार में जो बाढ़ हर साल आती है उससे खेती-किसानी को कैसे बचाया जाए, इसके लिए महात्मा गांधी रिसर्च सेंटर भी बनाया गया है। ऐसे ही मोतीपुर में मछली से जुड़ा रीजनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर, मोतिहारी में पशुपालन से जुड़ा कृषि और डेयरी विकास केंद्र, ऐसे अनेक संस्थान कृषि को विज्ञान और तकनीक से जोड़ने के लिए शुरु किए गए हैं।

साथियों, अब भारत उस स्थिति की तरफ बढ़ रहा है जब गांव के पास ही ऐसे क्लस्टर बनेंगे जहां, फूड प्रोसेसिंग से जुड़े उद्योग भी लगेंगे और पास ही उससे जुड़े रिसर्च सेंटर भी होंगे। यानि एक तरह से हम कह सकते हैं- जय किसान, जय विज्ञान और जय अनुसंधान। इन तीनों की ताकत जब एकजुट होकर काम करेगी, तब देश के ग्रामीण जीवन में बहुत बड़े बदलाव होने तय हैं। बिहार में तो इसके लिए बहुत संभावनाएं हैं। यहां के फल, चाहे वो लीची हो, जर्दालू आम हो, आंवला हो, मखाना हो, या फिर मधुबनी पेंटिंग्स हो, ऐसे अनेक प्रोडक्ट बिहार के जिले-जिले में हैं। हमें इन लोकल प्रोडक्ट्स के लिए और ज्यादा वोकल होना है। हम लोकल के लिए जितना वोकल होंगे, उतना ही बिहार आत्मनिर्भर बनेगा, उतना ही देश आत्मनिर्भर बनेगा।

साथियों, मुझे खुशी है कि बिहार के युवा, विशेषतौर पर हमारी बहनें पहले से ही इसमें सराहनीय योगदान दे रही हैं। श्रीविधि धान की खेती हो, लीज़ पर ज़मीन लेकर सब्जी उगाना हो, अज्जोला सहित दूसरी जैविक खादों का उपयोग हो, कृषि मशीनरी से जुड़ा हायरिंग सेंटर हो, बिहार की स्त्री शक्ति भी आत्मनिर्भर भारत अभियान को ताकत देने में आगे हैं। पूर्णिया जिले में मक्का के व्यापार से जुड़ा ‘अरण्यक FPO’और कोसी क्षेत्र में महिला डेयरी किसानों की ‘कौशिकी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी’, ऐसे अनेक समूह प्रशंसनीय काम कर रहे हैं। अब तो हमारे ऐसे उत्साही युवाओं के लिए, बहनों के लिए केंद्र सरकार ने विशेष फंड भी बनाया है। 1 लाख करोड़ रुपए के इस इंफ्रास्ट्रक्चर फंड से ऐसे FPO-कृषि उत्पादक संघों को, सहकारी समूहों को, गांव में भंडारण, कोल्ड स्टोरेज और दूसरी सुविधाएं बनाने के लिए आर्थिक मदद आसानी से मिल पाएगी। इतना ही नहीं, हमारी बहनों के जो स्वयं सहायता समूह है, उनको भी अब बहुत मदद दी जा रही है। आज बिहार में स्थिति ये है कि वर्ष 2013-14 की तुलना में अब स्वयं सहायता समूहों को मिलने वाले ऋण में 32 गुणा की वृद्धि हुई है। ये दिखाता है कि देश को, बैंकों को, हमारी बहनों के सामर्थ्य पर उनकी उद्यमशीलता पर कितना भरोसा है।

साथियों, बिहार के गांवों को, देश के गांवों को आत्मनिर्भर भारत का अहम केंद्र बनाने के लिए हमारे प्रयास लगातार बढ़ने वाले हैं। इन प्रयासों में बिहार के परिश्रमी साथियों का रोल भी बड़ा है और आपसे देश को उम्मीदें भी बहुत अधिक हैं। बिहार के लोग, देश में हों या विदेश में, अपने परिश्रम से, अपनी प्रतिभा से अपना लोहा मनवाते रहे हैं। मुझे विश्वास है कि बिहार के लोग, अब आत्मनिर्भर बिहार के सपने को पूरा करने के लिए भी निरंतर इसी तरह काम करते रहेंगे। विकास योजनाओं की शुरुआत के लिए मैं फिर से एक बार बहुत-बहुत बधाई देता हूं लेकिन एक बार फि‍र से मैं अपनी भावनाएं प्रकट करूंगा, मेरी आपसे कुछ अपेक्षाएं हैं, वो बताऊंगा और मेरी अपेक्षा यही है मास्क और दो गज़ की दूरी के नियम का पालन अवश्‍य करते रहिए, सुरक्षित रहिए, स्वस्थ रहिए।

अपने घर में बड़े आयु के जो परिवार के जन हैं उनको बराबर संभालकर रखिए, ये बहुत आवश्‍यक है, कोरोना को लाइट मत लीजिए और हर नागरिक को, क्‍योंकि हमारे पास वैज्ञानिकों के द्वारा वैक्‍सीन जब आये तब आये, लेकिन ये जो सोशल वैक्‍सीन है, वो कोरोना से बचने का उत्‍तम उपाय है, बचने का यही रास्‍ता है और इसलिए दो गज की दूरी, मास्‍क, कहीं पर थूकना नहीं, बुजुर्गों की चिंता करना, इन विषयों को मैं बार-बार याद कराता हूं। आज आपके बीच आया हूं, फि‍र से याद कराता हूं कि मुझे फि‍र एक बार आपके बीच आने का मौका मिला, मैं बहुत-बहुत राज्‍य सरकार का, हमारे गिरिराज जी का, सबका धन्‍यवाद करता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद !!!

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दुनिया भारत को ग्रोथ और उम्मीद की नई किरण के रूप में देख रही है: इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2026 में पीएम मोदी
August 21, 2026
दुनिया भारत को विकास और उम्मीद की एक नई किरण के रूप में देखती हैः प्रधानमंत्री
भारत नीतिगत स्तर पर अगली पीढ़ी के सुधार लागू कर रहा है, शासन में भी सुधार किए जा रहे हैं: प्रधानमंत्री
पहले उत्पादन बढ़ाने पर सजा मिलती थी लेकिन आज, हमारी सरकार उत्पादन बढाने के लिए प्रोत्साहन दे रही है
भारत में राजनीतिक स्थिरता और नीतियों में निरंतरता हैः प्रधानमंत्री
पहले नियमों का तरीका था ‘जब तक अनुमति नहीं मिले तब तक मना’, हम इसे बदल कर ‘जब तक मना न हो तब तक अनुमति’ कर रहे हैंः प्रधानमंत्री
सरकार और नागरिकों के बीच का रिश्ता शक पर नहीं, बल्कि भरोसे पर आधारित होना चाहिएः प्रधानमंत्री
हम ऐसी नीतियां बना रहे हैं जो जनता, विकास और प्रगति के पक्ष में होंः प्रधानमंत्री

World Leaders Forum का ये प्रतिष्ठित मंच, Business और Industry की दुनिया के सभी जाने माने दिग्गज, पॉलिसी मेकर्स, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों।

आप सबके बीच आकर के खुश होना बहुत स्वाभाविक भी है। इस साल समिट का फोकस Shared Future पर है। पिछले कुछ वर्षों में दुनिया ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं। और इन अनुभवों ने एक बात बहुत स्पष्ट कर दी है, कोई चाहे या ना चाहे, हर देश का भविष्य, उसका फ्यूचर, एक-दूसरे से जुड़ा हुआ ही है, Isolation में कुछ संभव नहीं है। इसीलिए Shared Futures की ये theme, आज और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है। और भारत तो हमेशा से इसी भावना को लेकर चला है। जी-20 की अध्यक्षता में इसलिए ही भारत का मंत्र रहा, One Earth, One Family, One Future. Shared Future की ये भावना और इसके साथ जुड़ा दायित्वबोध, 21वीं सदी के इस विश्व की अनेक समस्याओं का समाधान देता है।

साथियों,

आज दुनिया में growth को लेकर के कई तरह की चिंताएं हैं। दुनिया ने बड़ा भयंकर एक रूप देखा है इन दिनों। Resources का वेपनाइजेशन हो रहा है। अविश्वास का वातावरण विश्व के लिए अनेक नई चुनौतियां लेकर के आ रहा है। लेकिन ऐसे समय में भी, दुनिया भारत को growth और hope के bright spot के रूप में देख रही है। भारत ने पिछले 10-12 साल में अपनी 25 करोड़ आबादी को गरीबी से बाहर निकाला है। इतना ही नहीं, अगर आने वाले दिनों की चर्चा करें, तो IMF का forecast है कि भारत दुनिया की fastest growing major economy बना रहेगा। और भारत निरंतर वो कदम उठा रहा है, जो उसके विकास को गति दे रहे हैं।

Friends,

अभी पिछले हफ्ते ही, 15 अगस्त को मैंने लाल किले से सप्त-धारा की सप्त-शक्तियों की बात की है। मैन्यूफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, फूड प्रोसेसिंग, ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी समेत, मैंने ऐसे सात सेक्टर्स की बात की है, जिन पर भारत का आज बहुत ज्यादा फोकस है। और इसलिए भारत आज, Policy level पर, नेक्स्ट जनरेशन reforms कर रहा है, ताकि हमारा future सुरक्षित हो। Governance पर reforms कर रहा है, Ease of Living के लिए reforms कर रहा है। पिछली बार जब मैं इसी मंच के माध्यम से आपसे जुड़ा था, तब भी मैंने कहा था, ये Reforms हमारे लिए Compulsion नहीं है। ये हमारा commitment है, ये हमारा conviction है।

साथियों,

2014 में, जब हमारी सरकार बनी, तो उसके बाद से ही रिफॉर्म्स ने कैसे देश की दिशा और दशा बदली है, मैं इसका एक बहुत दिलचस्प उदाहरण आपको देना चाहता हूं। यहां मौजूद शायद ही किसी को PLP के बारे में पता होगा, कोई है, जिसको PLP के बारे में पता है? अपना हाथ उठाएं। यहां इतने मीडिया के दिग्गज बैठे हैं, PLP आपको पता है? और आप सुनकर के हैरान हो जाएंगे। PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट, इसके बारे में किसी को पता नहीं है। और एक दूसरा टर्म आपने जरूर सुना है PLI, ये ज्यादातर लोगों को पता होगा। PLI- यानी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव।

साथियों,

ये दोनों टर्म, भारत के दो अलग-अलग Time Period को डिफाइन करते हैं। आजकल Explainer का जमाना है, तो मैं आपको Explain करता हूं।

साथियों,

आज की युवा पीढ़ी को ये सुनकर हैरानी होगी, कि हमारे देश में एक समय ऐसा भी था, कि अगर कोई कंपनी तय लिमिट से ज्यादा प्रॉडक्शन कर दे, तो उसे पनिशमेंट दिया जाता था। ये पहले की लाइसेंस राज वाली सरकारों का, PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट मॉडल था। ऐसे भी उदाहरण रहे हैं कि अगर किसी फैक्ट्री ने ज्यादा डिमांड देखते हुए ज्यादा प्रॉडक्शन कर दिया, तो उसे नोटिस भेज दिया जाता था। मजबूरी में वो कंपनी अपना प्रॉडक्ट मार्केट में बेचने के बजाय, उसे खुद ही नष्ट कर देती थी।

साथियों,

आज जो लोग Make In India और आत्मनिर्भर भारत अभियान का मजाक उड़ाते हैं, उनके पुरखों की सोच यही थी, PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट। ऐसा करने के पीछे एक विशेष तरह की विकृत मानसिकता काम करती थी। ऐसी मानसिकता वाले लोग हमेशा चाहते थे कि जरूरी चीजों की किल्लत बनी रहे। देश के नागरिकों को अभाव में रखना उनकी पॉलिसी थी। वो चाहते थे कि जनता उनके सामने हाथ जोड़े, हाथ फैलाए, आप समझ गए मैं किन लोगों की बात कर रहा हूं। लोगों से हाथ जुड़वाने के बाद उपकार करना, उन सरकारों का तरीका था, इसलिए वो प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट मॉडल पर चलते थे। आप कल्पना कर सकते हैं, ऐसे करके उन लोगों ने Employment Generation के बेसिक principal का गला घोंट दिया था। और हैरानी ये, इन लोगों के दरबारियों ने again I repeat, इन लोगों के दरबारियों ने, कभी इसके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाई।

साथियों,

हर reform की शुरुआत सबसे पहले, आपके सोचने के तरीके, आपके मानसिक, किस रेंज में आप काम कर रहे हैं, इस सोच के reform से ही होती है। जहां पहले production बढ़ाने पर पनिशमेंट मिलता था, वहीं आज हमारी सरकार production बढ़ाने पर incentive दे रही है। और आज PLI स्कीम की सक्सेस दुनिया देख रही है। सिर्फ इस एक योजना की वजह से, मैं सारी योजनाओं की बात नहीं करता हूं, एक की बात करता हूं, करीब ढाई लाख करोड़ रुपए का actual investment हुआ है। 22 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का production और sales हुई है। 15 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का exports हुआ है, और 14 लाख से ज्यादा direct और indirect jobs बनी हैं। और मैं फिर याद दिलाउंगा, ये आंकड़े सिर्फ एक स्कीम के हैं। आप सोचिए, पहले का लाइसेंस राज वाली सरकार का पनिशमेंट मॉडल जहां बेरोजगारी बढ़ाता था, वहीं आज का हमारा incentive मॉडल लाखों नई जॉब्स क्रिएट कर रहा है।

साथियों,

आज भारत में ये तेज विकास, ये तेज रिफॉर्म इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि भारत में और जिसका अभी सत्य ने उल्लेख किया, political stability है, हमारी policy में continuity है। पहले देश में रिफॉर्म्स की बात करने वाले घोषणा तो कर देते थे, बाद में भूल जाते थे। लेकिन हमने रिफॉर्म्स को लेकर एक क्लियर रोडमैप बनाया। इस रोडमैप की प्रमुख दिशा रही है- गवर्नेंस लेवेल के रिफॉर्म्स हों! इसके लिए, आज 21वीं सदी के भारत में, हम सिर्फ regulations नहीं बदल रहे हैं, हम regulation की पूरी philosophy बदल रहे हैं। पहले regulations की अप्रोच थी- “Prohibited unless permitted.” यानी जब तक सरकार इजाजत ना दे, तब तक आप वो काम नहीं कर सकते। हम इस approach को बदलकर, “Permitted unless prohibited” की तरफ ले जा रहे हैं। यानी, जो काम कानून ने स्पष्ट रूप से मना नहीं किया है, उसके लिए हर कदम पर permission की कोई जरूरत नहीं होनी चाहिए। और इसके पीछे सोच बहुत सीधी है, सरकार और नागरिक के रिश्ते का आधार, Suspicion नहीं, trust होना चाहिए।

साथियों,

यही सोच आपको Jan Vishwas बिल में भी दिखाई देती है। मैं मानता हूं, हर procedural गलती को criminal offence मान लेना ठीक नहीं है। इसीलिए अनेक offences को decriminalise किया गया है। कई मामलों में जेल की जगह केवल आर्थिक penalty का प्रावधान किया गया है। Government और enterprise के रिश्ते में, हम इसी reform mindset को आगे बढ़ा रहे हैं। बीते वर्षों में 40 हजार से ज्यादा compliances हटाए गए हैं, 40 thousand. डेढ़ हजार से ज्यादा, 15 hundred, डेढ़ हजार से ज्यादा, पुराने और बेकार हो चुके कानून हमने खत्म किए, और जब इन सारे reforms को एक साथ देखते हैं, तो अंदाजा होता है, हमारी industries और businesses के कंधों से कितना बड़ा बोझ कम हुआ है।

साथियों,

गवर्नेंस रिफॉर्म्स की इस प्रक्रिया, उस पर हम निरंतर काम कर रहे है। अभी संसद के मॉनसून सत्र में हमने ‘बैंकर्स बुक एविडेंस बिल’ पारित किया है। और वो भी तब जब विपक्ष ने संसद में लगातार गतिरोध बनाया हुआ था। हमने देश की सेवा करने का काम रूकने नहीं दिया। अब इस कानून ने 19वीं सदी के अंग्रेजी कानून को रिप्लेस किया है। अब बैंकों के डिजिटल रिकॉर्ड्स की स्वीकार्यता को कानूनी मान्यता दी गई है। इससे कानूनी उलझनें कम होंगी, सिस्टम में पारदर्शिता होगी, Ease of Doing Business बढ़ेगा।

साथियों,

गवर्नेंस में रिफॉर्म का एक मतलब ये भी है कि सिस्टम ऐसे बनें, जिसमें एक-एक मानव जीवन और उसके समय के प्रति संवेदनशीलता हो। मैं रेलवे का उदाहरण देता हूं। हमारी रेलवेज में भी इसी अप्रोच के साथ काम हुआ है। आज साढ़े 6 हजार से ज्यादा रेलवे स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की व्यवस्था है। 10 हजार से ज्यादा लेवल क्रॉसिंग गेट्स को भी इंटरलॉकिंग से जोड़ा जा चुका है। इससे ह्यूमन एरर से होने वाले हादसों की आशंका बहुत कम हुई है।

साथियों,

जब 2014 में हमारी सरकार आई, तो करीब 9 हजार फाटक ऐसे थे जो Un-Manned थे। इन्हें हटाना कोई रॉकेट साइंस नहीं था। Un-Manned क्रॉसिंग्स की वजह से हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, लेकिन पहले की सरकारों को इससे बहुत फर्क नहीं पड़ता था। हमने मिशन मोड में, गत दस वर्ष में, इन Un-Manned क्रॉसिंग्स को समाप्त कर दिया। हमने रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज बनाने की गति भी कई गुना बढ़ा दी। और इसी का नतीजा है कि 2014 के पहले के मुकाबले ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या में Ninety Percent तक की कमी आई है, 90, Ninety Percent. 12 साल पहले जहां एक साल में करीब डेढ़ सौ रेल दुर्घटनाएं होती थीं, वहीं अब इनकी संख्या घटकर 15-20 रह गई है। और हम इसे और कम से कम करने का प्रयास लगातार कर रहे हैं।

साथियों,

Railways में स्वच्छता भी गवर्नेंस रिफॉर्म का एक बड़ा उदाहरण है। एक समय था, जब रेल पटरियों पर गंदगी और human waste एक बड़ी समस्या हुआ करती थी। आज स्थिति पूरी तरह बदल गई है। 2014 से पहले हमारी ट्रेनों में जहां लगभग 12 हजार बायो-टॉयलेट्स लगाए गए थे, वहीं 2014 के बाद ट्रेनों में 3 लाख 60 हजार से ज्यादा बायो-टॉयलेट्स लगाए गए हैं। यानी, 97 प्रतिशत से ज्यादा बायो-टॉयलेट्स पिछले 12 वर्षों में लगे हैं। ये बदलाव सिर्फ सफाई का नहीं, यात्रियों की गरिमा, स्वच्छता और आधुनिक भारत के निर्माण की दिशा में गवर्नेंस का एक नया मॉडल है। ये करोड़ों यात्रियों को बेहतर अनुभव देने का अभियान भी है।

साथियों,

गवर्नेंस की क्वालिटी का एक और पैमाना, और वो पैमाना है - समय। जो प्रोजेक्ट शुरू हो, वो समय पर पूरा हो। और जो सर्विस लोगों को मिले, वो भी समय की कसौटी पर खरी उतरे। दिल्ली-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल सिस्टम इसका बहुत अच्छा उदाहरण है। इस कॉरिडोर पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चल रही हैं। ये हमारे देश में पहले कभी सोचा नहीं जा सकता था। अब तक 4 करोड़ से ज्यादा यात्री इसमें ट्रैवल कर चुके हैं। और इसका एक और अहम फैक्टर है, जिसकी चर्चा नहीं होती है। दिल्ली मेरठ नमो भारत रैपिड रेल की पंक्चुअलिटी 99.9 परसेंट है। वरना हम तो हर चीज में कहते हैं, लेट हो तो कहते थे, ये तो इंडियन टाइम है। वक्त बदला है, ये मैं छोटी-छोटी चीजें इसलिए बताता हूं, कि हमें अंदाज आए कि कितने बड़े व्यापक स्तर पर काम हो रहा है। इसी तरह, Delhi Metro की पंक्चुअलिटी। Delhi Metro की पंक्चुअलिटी 99.9 परसेंट है। और ये punctuality, New York, Hong Kong और Paris जैसे शहरों की Metro से करीब-करीब बराबर हो चुकी है। ये सिर्फ समय पर चलती हुई Metro और नमो रेपिड रेल की कहानी नहीं है, ये समय के साथ बदलते हुए भारत की पहचान है। मैं जानता हूं कि अभी भी, और र्मैं कोई इतने से संतोष मानकर बैठने वाला व्यक्ति नहीं हूं, अभी भी इस दिशा में हमें बहुत कुछ करना है, बहुत कुछ बाकी है, लेकिन हम लगातार कर रहे हैं। लेकिन एक शुरूआत तो हुई है और ये शुरुआत सराहनीय है।

साथियों,

हमारे रिफॉर्म्स रोडमैप का एक और बड़ा आयाम है- पॉलिसी लेवल पर होने वाले रिफॉर्म्स! आज हम ऐसी policies बना रहे हैं, जो pro-people हों, Pro-growth हों, pro development हों! पॉलिसीज़ देश और देश के लोगों की जरूरत के हिसाब से होनी चाहिए न कि पॉलिसीज़ बनाकर देश को उनके हिसाब से चलने को मजबूर होना पड़े! मैं आपको एक और Interesting उदाहरण देना चाहता हूं। कुछ साल पहले तक हमारे यहाँ देश का नक्शा बनाना भी गैर-कानूनी था, मैप बनाए तो गैर कानूनी था, आप जेल चले जाएंगे। बिना परमिशन के आप देश में मैपिंग का काम भी नहीं कर सकते थे। आप सोचिए, विदेशी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के जरिए भारत के किसी भी कोने को मैप कर सकती थी, लेकिन भारत में भारतीयों पर भारत का मैप बनाने पर पाबंदी लगी हुई थी।

साथियों,

आज टेक्नोलॉजी के इस दौर में, इस एक पाबंदी से कितने स्टार्टअप्स की हत्या हो सकती थी! कितने ideas implement होने से वंचित रह सकते थे! हमने इस व्यवस्था को भी बदला। हमने Geospatial डेटा का Deregulation किया और आज Geospatial डेटा कितने ही स्टार्टअप्स का आधार बन रहा है।

साथियों,

आज आप लगातार ड्रोन्स की उपयोगिता बढ़ते हुए देख रहे हैं। एग्रीकल्चर में, डिफेंस में, डिलिवरी में, शूटिंग में, कंटेंट क्रिएशन में, ये सब संभव ही नहीं होता, अगर सरकार ने इससे जुड़े नियमों में Reform नहीं किए होते। पहले देश में ड्रोन फ्लाइंग पूरी तरह नियमों में, बंधनों में जकड़ी हुई थी। हमने उसे बंधनों से आजाद किया, और आज भारत की ड्रोन इंडस्ट्री, एक अभूतपूर्व उड़ान के साथ आगे बढ़ रही है।

साथियों,

पहले border areas को लेकर सरकारों की सोच थी कि बॉर्डर पर roads और infrastructure बढ़ेगा, तो उसका फायदा दुश्मन भी उठा सकता है। हमने इस सोच को बदला। हमने कहा, Border infrastructure कमजोरी नहीं, देश की ताकत है। और इसीलिए आज border areas में roads, bridges और tunnels का network तेजी से बढ़ रहा है। सिर्फ 2024 और 2025 में ही, BRO के 250 infrastructure projects देश को समर्पित किए गए हैं। सोच बदली, तो border infrastructure की तस्वीर भी बदल गई।

साथियों,

एक उदाहरण न्यूक्लियर रिफॉर्म्स का भी है। एक ऐसे समय में, जब विकास पूरी तरह से energy dependent है, बंदिशों और प्रतिबंधों के कारण, देश अपने न्यूक्लियर potential का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा था। हमने शांति बिल के जरिए इसमें भी बड़ा रिफॉर्म किया है। आज भारत में न्यूक्लियर एनर्जी में प्राइवेट सेक्टर के लिए रास्ता खुल चुका है। इसी तरह, हमने एक बड़ा पॉलिसी रिफॉर्म डिफेंस सेक्टर में भी किया। 200 साल के पहले जो व्यवस्था चली आ रही थी, उसे बदलकर हमने 40 से ज्यादा ordnance फैक्ट्रीज़ को मर्ज करके 7 फैक्ट्रीज़ बना दी। और उसका परिणाम हमें देखने को मिल रहा है। आज भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए भी आत्मनिर्भर बन रहा है, और 2014 की तुलना में, हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट 55 गुना बढ़ा है। और इसलिए, कई बार रिफॉर्म्स हमारे जीवन में इस तरह घुल-मिल जाते हैं कि हमारा उनकी तरफ ध्यान ही नहीं जाता। आप सोचिए, आपका कोई सामान्य दिन आज कैसे बीतता है। आप सुबह उठते हैं, फोन पर घर का सामान ऑर्डर कर देते हैं, और जब तक ऑफिस के लिए रेडी होते हैं, वो सारा सामान आपके घर आकर के पहुंच जाता है। आपकी गली के स्ट्रीट वेंडर से लेकर, आपकी गाड़ी के शो रूम तक, आपकी सारी पेमेंट्स, सिर्फ एक क्यूआर कोड स्कैन करके हो जाती है। अगर आपकी बेटी, किसी दूसरे शहर में पढ़ती है, तो आप फोन से उसे पैसे भेज सकते हैं, और वो पैसा, कुछ सेकंड्स में उसके पास भी पहुंच जाता है। कई बार तो बिटिया क्यूआर ही शेयर कर देती है कि ‘पापा-मां मैंने ये ड्रेस ले ली है, इसकी पेमेंट कर दीजिए, और आप उसकी शॉपिंग अपने घर बैठे-बैठे करवा देते हैं। ये चीजें Remarkable हैं, लेकिन अब ये कोई भारत के लोगों को कम से कम हैरानी नहीं होती, बाहर के लोग आते हैं, उनको आश्चर्य होता है, अच्छा ऐसे होता है। भारत के लोगों का रूटीन हो गया है। ये भारत के सामान्य मानवी के जीवन का हिस्सा बन चुका है। आप सोचिए, 2014 से पहले ऐसी कितनी ही बातें क्या पॉसिबल थीं?

साथियों,

भारत ने बीते 10-12 सालों में Ease of Living से जुड़े जो रिफॉर्म्स किए हैं, उसकी वजह से लोगों का, खासतौर पर हमारे मिडिल क्लास का जो जीवन बदला है, वो दुनिया के कई विकसित देशों में आज भी एक सपना ही है।

साथियों,

आज दुनिया का सबसे सस्ता डेटा भारत में है, हम सस्ते और अच्छे स्मार्टफोन्स बना रहे हैं। अभी सत्या ने उसका वर्णन किया। भारत दुनिया के fastest 5G rollouts करने वाले देशों में से एक है। हमने आधार को बैंकिंग, मोबाइल कनेक्टिविटी और सर्विसेज से जोड़कर, ई-के.वाई.सी और Digital Authentication जैसी सर्विसेज को पॉसिबल किया है। आज आपको अगर बैंक अकाउंट खोलना है, तो उसके लिए बैंक जाने तक की जरूरत नहीं है। सरकार ने बैंक को ही, आपके पास पहुंचा दिया है। आज चाहे कोई बिल जमा करना हो, कोई टिकट करानी हो, किसी सरकारी दफ्तर में जाने की जरूरत नहीं पड़ती, ये सारा काम ऑनलाइन हो जाता है। इनकम टैक्स की फाइलिंग का काम आसान हुआ है। ऐसी व्यवस्था बनी है कि फॉर्म में मैक्सिमम जानकारियां पहले से भरी होती हैं। आप ये इन्फॉर्मेशन वेरिफाई करते हैं, कुछ जोड़ना है तो जोड़ देते हैं, और सबमिट करते हैं, आपका काम पूरा हो जाता है। पहले जो रिफंड आने में महीनों लगते थे, अब वो भी कुछ ही दिनों में आ जाता है।

साथियों,

आज ई-संजीवनी की मदद से, शायद इसकी चर्चा अभी बहुत कम होती है, ई-संजीवनी की मदद से, गांव के दूर दराज के लोग भी, कहीं से भी डॉक्टर्स के साथ सीधी अपनी चर्चा करके अपने उपचार का रास्ता लेते हैं। और इससे जिन लोगों को अस्पताल जाने के लिए कई किलोमीटर का सफर करना पड़ता था, आज डॉक्टर उनके घर पर, उनकी स्क्रीन पर उपलब्ध है। अब तक ये आंकड़ा भी आपको जरूर आश्चर्य करेगा। यानी भारत ने टेक्नोलॉजी को किस प्रकार से अडाप्ट किया है, सामान्य मानवीय के जीवन को कैसे सरल किया है। अब तक ईं-संजीवनी के तहत करीब-करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशंस हो चुकी हैं।

साथियों,

आज भारत में Travel Experience बदल रहा है, भारत के नागरिकों की यात्राएं पूरी तरह बदल गई हैं। यहां इस हॉल में ऐसा व्यक्ति खोजना मुश्किल होगा, जिसने एयरपोर्ट पर डिजी यात्रा का इस्तेमाल ना किया हो। ऐसे ही आजकल बहुत सारा काम Seamless तरीके से हो रहा है। हाइवे पर फास्ट टैग चल रहे हैं, ताकि आप बिना रुके टोल देकर आगे बढ़ सकें। Ease of Living का सही अर्थ यही है। समय की बचत हो रही है, जीवन आसान हो रहा है, और करोड़ों लोग अपनी प्रगति पर फोकस कर पा रहे हैं।

साथियों,

Politics में अक्सर वही फैसले headlines बनते हैं, जिनका असर आज दिखाई दे, यानी उसकी उमर 24 घंटे हो। पहले की सरकारों ने इलेक्शन सामने देख कर भी घोषणाएं करने का फॉर्मूला अपनाया। लेकिन ऐसी घोषणाओं से देश नहीं बदला। देश बदलने वाले फैसले वो होते हैं, जिनका प्रभाव जमीन पर दिखे, जो वर्तमान और भविष्य, दोनों को ध्यान में रखकर के लिए गए होने चाहिए।

साथियों,

पीएम कुसुम योजना और पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना इसका बहुत बड़ा यूनीक Example है। कुसुम योजना से किसानों को बिजली की चिंता से मुक्ति मिली है। और सूर्यघर योजना से मिडिल क्लास को बहुत फायदा हुआ है।

साथियों,

मैं ये जानता हूं कि अगर मैंने ये अनाउंस कर दिया होता कि आज से लाखों-लाख परिवारों के लिए बिजली मुफ्त है, तो सारा मीडिया, सारी स्क्रीन्स, सारे न्यूजपेपर्स, बड़ी-बड़ी हेडलाइन बनाकर के खबर दे देते कि मोदी जी ने आज अनाउंस कर दिया है। लेकिन हमने कुछ दूसरे अप्रोच से काम शुरू किया। हमने हर घर की छत पर एक सूरज उगाने की ठान ली, और आज देश के 50 लाख से ज्यादा परिवार, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से जुड़े हैं। सरकार ने 22 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा इन परिवारों को दिए हैं, ये सोलर सिस्टम लगाने के लिए, ताकि उनकी छत पर सोलर प्लांट लगाकर सोलर पावर पैदा की जा सके। अब ये परिवार, एक्स्ट्रा बिजली को, बिजली ग्रिड में बेचकर, पैसे भी कमा रहे हैं। खुद का बिल तो जीरो हुआ, कमाई भी होने लगी। इस योजना से लोगों के सपनों को भी विस्तार मिल रहा है। बिजली बिल कम हुआ है, तो अब घर में फ्रिज, कूलर, वाशिंग मशीन, टीवी जैसी चीजें लोग खरीदकर रखने लगे हैं। अब ये डर नहीं होता कि बिजली कटौती की वजह से दूध फट जाएगा, अब चिंता नहीं रहती है। अब स्कूल जाने वाले बच्चे रातभर चैन से सो पाते हैं। मैं फिर कहता हूं- इलेक्शन हो या ना हो, लेकिन ये सूर्यघर और उसकी रोशनी बनी रहेगी, इस प्लांट का फायदा, सालों तक देश के परिवारों को होता रहेगा।

साथियों,

आने वाले समय में Ease of Living और Ease of Doing Business का और विस्तार होगा। देश के Youth के लिए, नारीशक्ति के लिए, Farmers के लिए, गरीब और Middle Class के लिए, हमारी सरकार लगातार काम करती रहेगी, हमारी Reform Express और अधिक गति से आगे बढ़ने वाली है। विकसित भारत का लक्ष्य पूरा करने के लिए, हम पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करते रहेंगे। और मैं, मेरे लिए भारत का future अगर सुनिश्चित हो गया ना, तो दुनिया के future में भी स्थिरता लाने का बहुत बड़ा काम इसी धरती से होने वाला है। इस आत्मविश्वास के साथ भारत जितना स्टेबल होगा, भारत का future जितना सुरक्षित होगा, विश्व को सुरक्षत्व का एहसास देने की ताकत यहीं से पैदा होने वाली है। इस सामर्थ्य के साथ, इसी संकल्प के साथ, मैं एक बार फिर, आज के इस कार्यक्रम में मुझे आमंत्रित करने के लिए, Economic Times की पूरी टीम का हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। वन्दे मातरम् !