महाकवि सुब्रमण्य भारती की रचनाओं के संग्रह का विमोचन करते हुए मैं सम्मानित महसूस कर रहा हूं, समृद्ध भारत और प्रत्येक व्यक्ति के सशक्तीकरण के लिए उनका दृष्टिकोण पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा: प्रधानमंत्री
हमारे देश में शब्दों को महज अभिव्यक्ति नहीं माना जाता, हम एक ऐसी संस्कृति का हिस्सा हैं जो शब्द ब्रह्म की बात करती है, शब्दों की अनंत शक्ति की बात करती है: प्रधानमंत्री
सुब्रमण्य भारती जी मां भारती की सेवा के लिए समर्पित एक प्रखर विचारक थे: प्रधानमंत्री
सुब्रमण्य भारती जी के विचार और बौद्धिक प्रतिभा आज भी हमें प्रेरित करती है: प्रधानमंत्री
महाकवि भारती जी की साहित्यिक कृतियां तमिल भाषा की धरोहर है : प्रधानमंत्री

केंद्रीय मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत जी, राव इंद्रजीत सिंह , एल मुरुगन जी, और इस कार्यक्रम के केंद्र बिंदू साहित्य सेवी, सीनी विश्वनाथन जी, प्रकाशक वी श्रीनिवासन जी, उपस्थित सभी विध्वतजन महानुभाव...देवियों और सज्जनों...

आज देश महाकवि सुब्रह्मण्य भारती जी की जन्म जयंती मना रहा है। मैं सुब्रह्मण्य भारती जी को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं। उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। आज भारत की संस्कृति और साहित्य के लिए भारत के स्वतन्त्रता संग्राम की स्मृतियों के लिए और तमिलनाडु के गौरव के लिए एक बहुत बड़ा अवसर है। महाकवि सुब्रह्मण्य भारती के कार्यों का, उनकी रचनाओं का प्रकाशन एक बहुत बड़ा सेवायज्ञ, एक बहुत बड़ी साधना आज उसकी पूर्णावर्ती हो रही है। 21 खंडों में ‘कालवरिसैयिल् भारतियार् पडैप्पुगळ्' का संकलन 6 दशकों की अथक मेहनत का ऐसा साहस, असाधारण है, अभूतपूर्व है। सीनी विश्वनाथन जी का ये समर्पण, ये साधना है, ये परिश्रम, मुझे पूरा विश्वास है, आने वाली पीढ़ियों को बहुत इसका लाभ मिलने वाला है। हम कभी कभी एक शब्द तो सुनते थे। वन लाइफ, वन मिशन। लेकिन वन लाइफ वन मिशन क्या होता है ये सीनी जी ने देखा है। बहुत बड़ी साधना है ये। उनकी तपस्या आज ने मुझे महा-महोपाध्याय पांडुरंग वामन काणे की याद दिला दी है। उन्होंने अपने जीवन के 35 वर्ष History of धर्मशास्त्र लिखने में लगा दिये थे। मुझे विश्वास है, सीनी विश्वनाथन जी का ये काम एकैडमिक जगत में एक बेंच-मार्क बनेगा। मैं इस कार्य के लिए विश्वनाथन जी को उनके सभी सहयोगियों को और आप सभी को बहुत बहुत बधाई देता हूँ।

साथियों,

मुझे बताया गया है, “कालवरिसैयिल् भारतियार् पडैप्पुगळ्" के इन 23 खंडों में केवल भारतियार जी की रचनाएँ ही नहीं हैं, इनमें उनके साहित्य के बैक-ग्राउंड की जानकारी और दार्शनिक विश्लेषण भी शामिल है। हर खंड में भाष्य, विवरण और टीका को जगह दी गई है। इससे भारती जी के विचारों को गहराई से जानने, उसकी गहराई को समझने में और उस कालखंड के परिदृश्य को समझने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी। साथ ही, ये संकलन रिसर्च स्कॉलर्स के लिए, विद्वानों के लिए भी बहुत मददगार साबित होगा।

साथियों,

आज गीता जयंती का पावन अवसर भी है। श्री सुब्रह्मण्य भारती जी की गीता के प्रति गहरी आस्था थी, और गीता-ज्ञान को लेकर उनकी समझ भी उतनी ही गहरी थी। उन्होंने गीता का तमिल में अनुवाद किया, उसकी सरल और सुगम व्याख्या भी की। और आज देखिए...,आज गीता-जयंती, सुब्रह्मण्य भारती जी की जयंती और उनके कामों के प्रकाशन का संयोग यानी एक प्रकार से त्रिवेणी संगम है। मैं इस कार्यक्रम के माध्यम से आप सभी को और सभी देशवासियों को गीता जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ भी देता हूँ।

साथियों,

हमारे देश में शब्दों को केवल अभिव्यक्ति ही नहीं माना गया है। हम उस संस्कृति का हिस्सा हैं, जो ‘शब्द ब्रह्म’ की बात करती है,शब्द के असीम सामर्थ्य की चर्चा करती है। इसीलिए, ऋषियों और मनीषियों के शब्द, ये केवल उनके विचार नहीं होते। ये उनके चिंतन, उनके अनुभव और उनकी साधना का सार होता हैं। उन असाधारण चेतनाओं के सार को आत्मसात करना और उसे अगली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना, ये हम सबका कर्तव्य है। आज इस तरह के संकलन का जितना महत्व आधुनिक संदर्भ में है, हमारी परंपरा में भी इसकी उतनी ही प्रासंगिकता है। उदाहरण के लिए, हमारे यहाँ भगवान व्यास की लिखी कितनी ही रचनाओं की मान्यता है। वो रचनाएँ आज भी हमारे पास उपलब्ध हैं, क्योंकि वो पुराण की एक व्यवस्था के रूप में संकलित हैं। इसी तरह, Complete work of Swami Vivekananda, Dr. Babasaheb Ambedkar Writings and Speech, दीन दयाल उपाध्याय संपूर्ण वांग्मय, आधुनिक समय के ऐसे संकलन हमारे समाज और academia के लिए बहुत उपयोगी साबित हो रहे हैं। 'थिरुक्कुरल' को भी अलग-अलग भाषाओं में अनुवाद करने का काम जारी है। अभी पिछले ही साल जब मैं पापुआ न्यू गिनी गया था, तो वहां की स्थानीय टोक पिसिन भाषा में 'थिरुक्कुरल' को रिलीज करने का सौभाग्य मिला। इससे पहले यहीं लोक कल्याण मार्ग में, मैंने गुजराती में भी 'थिरुक्कुरल' के अनुवाद को लोकार्पित किया था।

साथियों,

सुब्रह्मण्य भारती जी ऐसे महान मनीषी थे जो देश की आवश्यकताओं को देखते हुए काम करते थे। उनका विजन इतना व्यापक था। उन्होंने हर उस दिशा में काम किया, जिसकी जरूरत उस कालखंड में देश को थी। भारतियार केवल तमिलनाडु और तमिल भाषा की ही धरोहर नहीं हैं। वो एक ऐसे विचारक थे, जिनकी हर सांस माँ भारती की सेवा के लिए समर्पित थी। भारत का उत्कर्ष, भारत का गौरव,ये उनका सपना था। हमारी सरकार ने कर्तव्य भावना से भारतियार जी के योगदान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए हो सके उतना प्रयास किया है। 2020 में कोविड की कठिनाइयों से पूरा विश्व परेशान था, लेकिन उसके बावजूद हमने सुब्रह्मण्य भारती जी की 100वीं पुण्यतिथि बहुत भव्य तरीके से मनाई थी। मैं खुद भी इंटरनेशनल भारती फेस्टिवल का हिस्सा बना था। देश के भीतर लालकिले की प्राचीर हो या दुनिया के दूसरे देश, मैंने निरंतर भारत के विज़न को महाकवि भारती के विचार के जरिए दुनिया के सामने रखा है। और अभ सिनी जी ने उल्लेख किया कि विश्व में जब मैं जहां गया मैंने भारती जी की चर्चा की है है और उसका गौरवगान सीनी जी ने किया। और आप जानते हैं मेरे और सुब्रह्मण्य भारती जी के बीच एक जीवंत कड़ी, एक आत्मिक कड़ी हमारी काशी भी है। मेरी काशी से उनका रिश्ता, काशी में बिताया गया उनका समय,ये काशी की विरासत का एक हिस्सा बन चुका है। वो काशी में ज्ञान प्राप्त करने आए, और वहीं के होकर रह गए। उनके परिवार के कई सदस्य आज भी काशी में रहते हैं। और मेरा सौभाग्य है मेरा उनसे संपर्क है। ऐसा कहा जाता है कि अपनी शानदार मूंछें रखने की प्रेरणा भी भारतियार को काशी में रहते हुए ही मिली थी। भारतियार ने अपनी बहुत सी रचनाएँ गंगा के तट पर काशी में रहते हुए लिखी थीं। इसलिए आज मैं उनके शब्द संकलन के इस पवित्र काम का काशी के सांसद के रूप में भी स्वागत करता हूं, अभिनंदन करता हूं। ये हमारी सरकार का सौभाग्य है कि महाकवि भारतियार के योगदान को समर्पित एक चेयर की स्थापना BHU में की गई है|

साथियों,

सुब्रह्मण्य भारती ऐसा व्यक्तित्व सदियों में कभी एकआध बार मिलता है। उनका चिंतन, उनकी मेधा, उनका बहु-आयामी व्यक्तित्व, ये आज भी हर किसी को भी हैरान करता है। केवल 39 वर्ष के जीवन में भारती जी ने हमें इतना कुछ दिया है, जिसकी व्याख्या में विद्वानों का जीवन निकल जाता है। 39 ईयर और उनको काम करते करते 60 साल गए। बचपन में खेलने और सीखने की उम्र में वो राष्ट्रप्रेम की भावना जगा रहे थे। एक ओर वो आध्यात्म के साधक भी थे, दूसरी ओर वो आधुनिकता के समर्थक भी थे। उनकी रचनाओं में प्रकृति के लिए प्यार भी दिखता है, और बेहतर भविष्य की प्रेरणा भी दिखती है। स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान उन्होंने आज़ादी को केवल मांगा नहीं, बल्कि भारत के जन-मानस को आज़ाद होने के लिए झकझोरा भी था। और ये बहुत बड़ी बात होती है! उन्होंने देशवासियों से कहा था, मैं तमिल में ही बोलने का प्रयास कर रहा हूं। उच्चारण दोष के लिए आप सब विध्वतजन मुझे माफ करना। महाकवि भारतियार ने कहा था

एन्रु तणियुम्, इन्द सुदन्तिर,दागम्। एन्रु मडियुम् एंगळ् अडिमैयिऩ्मोगम्।

यानि, आजादी की ये प्यास कब बुझेगी? गुलामी से हमारा ये मोह कब खत्म होगा? यानी उस समय एक वर्ग था जिनको गुलामी का भी मोह था, उनको डांटते थे। ...गुलामी का ये मोह कब खत्म होगा? ये आवाहन वही व्यक्ति कर सकता है, जिसके भीतर आत्म अवलोकन का साहस भी हो, और जीतने का विश्वास भी हो! और यही भारतियार की विशेषता थी। वो दो टूक कहते थे, समाज को दिशा दिखाते थे। पत्रकारिता के क्षेत्र में भी उन्होंने अद्भुत कार्य किए हैं।1904 में वो तमिल अखबार स्वदेशमित्रन से जुड़े। फिर 1906 में लाल कागज पर इंडिया नाम का वीकली न्यूजपेपर छापना शुरू किया। ये तमिलनाडु में पॉलिटिकल कार्टून छापने वाला पहला न्यूजपेपर था। भारती जी समाज को कमजोर और वंचित लोगों की मदद के लिए प्रेरित करते थे। अपनी कविता संग्रह कण्णन पाट्टु में उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की कल्पना 23 रूपों में की है। अपनी एक कविता में वो गरीब परिवारों के लिए सबसे जरूरतमंद लोगों के लिए कपड़ों का उपहार मांगते हैं। इस तरीके से वो उन लोगों तक संदेश पहुंचा रहे थे, जो दान कर पाने में सक्षम थे। परोपकार की प्रेरणा से भरी उनकी कविताओं से हमें आज भी प्रेरणा मिलती है।

साथियों,

भारतियार अपने समय से बहुत आगे देखने वाले, भविष्य को समझने वाले व्यक्ति थे। उस दौर में भी, जब समाज दूसरी मुश्किलों में उलझा था। भारतियार युवा और महिला सशक्तिकरण के प्रबल समर्थक थे। भारतियार का विज्ञान और इनोवेशन में भी अपार भरोसा था। उन्होंने उस दौर में ऐसी कम्युनिकेशन की परिकल्पना की थी, जो दूरियों को कम करके पूरे देश को जोड़ने का काम करे। और आज जिस टेक्नोलॉजी को हम लोग जी रहे हैं। भारतीयार जी ने उस टेक्नोलॉजी की चर्चा उस जमाने में की थी। उन्होंने कहा था-

"काशी नगर,पुलवर पेसुम्,उरै तान् ॥ कांचियिल्, केट्पदर्कोर्,करुवि चेय्वोम ॥

यानि एक ऐसा उपकरण होना चाहिए जिससे कांची में बैठकर ये सुन सकें कि बनारस के संत क्या कह रहे हैं। आज हम ये देख रहे हैं, डिजिटल इंडिया कैसे इन सपनों को हकीकत में बदल रहा है। भाषिणी जैसे Apps ने इसमें भाषा की तमाम मुश्किलों को भी समाप्त कर दिया है। जब भारत की हर भाषा के प्रति सम्मान का भाव हो, जब भारत की हर भाषा के प्रति गौरव हो, जब भारत की हर भाषा को संरक्षित करने की नेक नीयत हो, तो ऐसे ही हर भाषा के लिए सेवा का काम होता है।

साथियों,

महाकवि भारती जी का साहित्य विश्व की सबसे प्राचीन तमिल भाषा के लिए एक धरोहर की तरह है। और हमें गर्व है कि दुनिया की सबसे पुरातन भाषा हमारी तमिल भाषा है। जब हम उनके साहित्य का प्रसार करते हैं,तो हम तमिल भाषा की भी सेवा करते हैं। जब हम तमिल की सेवा करते हैं, तो हम इस देश की प्राचीनतम विरासत की भी सेवा करते हैं।

भाइयों बहनों,

पिछले 10 वर्षों में तमिल भाषा के गौरव के लिए देश ने समर्पित भाव से काम किया है। मैंने यूनाइटेड नेशंस में तमिल के गौरव को पूरी दुनिया के सामने रखा था। हम दुनिया भर में थिरुवल्लवर कल्चरल सेंटर्स भी खोल रहे हैं। एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना में सुब्रह्मम्य भारती के विचारों का प्रतिबिंब है। भारतियार ने हमेशा देश की विभिन्न संस्कृतियों को जोड़ने वाली विचारधारा को मजबूत किया। आज काशी तमिल संगमम् और सौराष्ट्र तमिल संगमम् जैसे आयोजन वही काम कर रहे हैं। इससे देश भर में लोगों को तमिल के बारे में जानने सीखने की उत्सुकता बढ़ रही है। तमिलनाडु की संस्कृति का भी प्रचार हो रहा है। देश की हर भाषा को हर देशवासी अपना समझे, हर भाषा पर हर भारतीय को गौरव हो,ये हमारा संकल्प है। हमने तमिल जैसी भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए मातृभाषा में हायर एजुकेशन का विकल्प भी युवाओं को दिया है।

साथियों,

मुझे भरोसा है, भारती जी का साहित्य संकलन तमिल भाषा के प्रचार-प्रसार से जुड़े हमारे इन प्रयासों को बढ़ावा देगा। हम सब मिलकर विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुंचेंगे, भारतियार के सपनों को पूरा करेंगे। मैं एक बार फिर, आप सभी को इस संकलन और प्रकाशन के लिए बधाई देता हूँ। और मैं देख रहा था उम्र के इस पड़ाव में तमिल में रहना और दिल्ली की ठंड में आवाज देखिए कितना बड़ा सौभाग्य है जी और जीवन कितना तपस्या से जिया होगा और मैं उनके हेंड राइटिंग देख रहा था। इतने सुंदर हेंड राइटिंग्स हैं। इस आयु में हम हस्ताक्षर करते समय भी हिल जाते हैं। ये सच्चे अर्थ में आपकी साधना है, आपकी तपस्या है। मैं आपको सच्ची श्रद्धा से प्रणाम करता हूं। आप सबको वणक्कम,बहुत-बहुत धन्यवाद!

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June 18, 2026

नमस्ते!

बों जू!

ऐसा लग रहा है, आप सब छुट्टी के मूड में हैं।

साथियों,

ये पेरिस शहर, Lights का शहर है, रंगों का शहर है, यहां Art है, Ideas हैं, और innovation की प्रेरणा भी है। इस शहर को भारत के अलग-अलग राज्यों से आए आप सभी लोग और भी खूबसूरत बना देते हैं। नए नए रंगों से भर देते हैं।

कोई तमिल है, कोई पंजाबी है, कोई गुजराती है, तो कोई मराठी है, और कोई बंगाली है। भारत के हर कोने का प्रतिनिधित्व यहां दिखाई देता है।

साथियों,

मैं जब 14 जून को नीस पहुंचा था तो सबसे पहले भारत इनोवेट्स कार्यक्रम में शामिल हुआ था। आज जब मैं फ्रांस से वापसी की तैयारी में हूं तो लग रहा है जैसे भारत कनेक्ट्स कार्यक्रम में आ गया हूं।

फ्रांस में रहने वाले आप लोगों ने 21वीं सदी के भारत-फ्रांस रिश्तों को जिस तरह कनेक्ट किया है, वो हमारी Strategic Partnership की बहुत बड़ी ताकत बन रही है। मैं आप सभी के लिए भारत से 140 करोड़ देशवासियों की शुभकामनाएं लेकर आया हूं। इस आत्मीय स्वागत के लिए, मैं आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

आज मैं ऐसे समय में फ्रांस आया हूं जब कुछ ही दिन पहले हमारी सरकार के 12 वर्ष पूरे हुए हैं। चुने हुए प्रधानमंत्री के रूप निरंतर 12 साल तक देश की सेवा करना मेरे जीवन का बहुत बड़ा सौभाग्य रहा है। यह भारत के लोकतंत्र की शक्ति है जिसने एक चायवाले को यहां तक पहुंचा दिया।

साथियों,

बीते 12 वर्ष, 140 करोड़ भारतीयों के अद्भुत सामर्थ्य के रहे हैं। 12 साल के इस कालखंड में भारत का GDP दोगुना हुआ है। Airports की संख्या दोगुनी हुई है। Universities की संख्या भी दोगुनी हो गई है। Highway Construction की स्पीड तीन गुना बढ़ गई। और Metro Network, चार गुणा बड़ा हो गया है।

मैं आपको कुछ और फैक्ट्स दूंगा, उससे आप अंदाजा लगा पाएंगे कि भारत किस स्पीड और कितने बड़े स्केल पर काम कर रहा है। पिछले 12 वर्षों में भारत का Defence Export 35 गुणा यानि Thirty Five Times बढ़ गया है।

औऱ एक फैक्ट सुनिए भारत में मोबाइल मैन्यूफैक्टरिंग यूनिट्स में, 100 गुणा की बढ़ोतरी हुई है। 100 times. भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा mobile phone manufacturer है। इसी गति, इसी प्रगति का नतीजा है कि आज भारत दुनिया की Fastest Growing Major Economy है।

साथियों,

आज भारत की कहानी सिर्फ Economic Progress की कहानी नहीं है। सिर्फ यहाँ अटक नहीं जाती है। ये Social Transformation की भी कहानी है।

पिछले 12 साल में देश में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। यानि एक ऐसी प्रगति जिसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। फ्रांस में जितने घर हैं, उससे भी अधिक पक्के घर बीते 12 वर्ष में हमने जरूरतमंदों के लिए बनाए हैं।

अब हर परिवार के पास, गरीब से गरीब क्यों न हो, Bank Account है। Financial Inclusion एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का अभियान बना है।

साथियों,

इन 12 वर्षों की उपलब्धियों में, एक उपलब्धि ऐसी भी है जिसे किसी आंकड़े से, या अंकों से, नहीं मापा जा सकता। वह है 140 करोड़ भारतीयों का आत्मविश्वास।

आज का भारत और आज के भारत का युवा बहुत बड़े सपने देख रहा है। भारत का किसान नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत की महिलाएं नए नेतृत्व का परिचय दे रही हैं। इसलिए ये सिर्फ Achievements के 12 साल नहीं हैं, ये भारत की एस्पिरेशन्स को नई बुलंदी देने का कालखंड रहा है।

साथियों,

एक समय था जब दूर-दराज के गांवों तक आधुनिक सुविधाएं पहुंचाना वाकई बहुत मुश्किल भरा था। आज उन्हीं गांवों में बिजली भी है, इंटरनेट भी है, और डिजिटल सेवाओं की पूरी दुनिया भी है। आज एक क्लिक पर, कभी भी, कहीं भी बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध हैं।

आज मोबाइल फोन, भारत के नागरिकों को अनेक सुविधाओं से कनेक्ट कर रहा है। हमारे किसान, हमारे मछुआरे, हमारे dairy farmers, हमारी महिलाएं, हमारे स्टूडेंट्स, सभी टेक्नोलॉजी के माध्यम से सशक्त हो रहे हैं, और अपने लिए नए अवसर बना रहे हैं।

साथियों,

आपने 125 करोड़ से अधिक Aadhaar IDs के बारे में सुना है। लेकिन आज भारत सिर्फ पहचान को डिजिटल नहीं बना रहा। आज करीब 90 करोड़ भारतीयों की Unique Digital Health IDs बनाई जा चुकी हैं। जिससे मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित और accessible बन गए हैं। इससे हेल्थकेयर डिलीवरी और अधिक आसान और efficient हो रही है।

साथियों,

इन उपलब्धियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें से अधिकांश चीजें कुछ वर्ष पहले तक कल्पना जैसी लगती थीं। कौन सोच सकता था कि गांव-गांव तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचेगा ? कौन सोच सकता था कि दूर-सुदूर के गांवों में भी QR code जीवन का हिस्सा बन जायेगा ? गांव में कोई बहन, ड्रोन से खेती करने में मदद करेगी, ये भी असंभव लगता था।

लेकिन आज यह सब, भारत के करोड़ों लोगों के जीवन का सामान्य हिस्सा बनता जा रहा है। और आपको गर्व होगा साथियों, यही नए भारत की पहचान है।

जो कभी सपना था, वह आज सच्चाई है। जो कभी नामुमकिन लगता था, वो आज मुमकिन हुआ है, औऱ ये करने के पीछे सबसे बड़ी ताकत क्या है? किसकी वजह से ये सब संभव हुआ है? यह मोदी के कारण नहीं, वो ताकत है- भारत का लोकतंत्र, भारत की डेमोक्रेसी। इस डेमोक्रेसी में सबका साथ है, सबका विकास है।

साथियों,

आज से 50 या 100 साल बाद जब भारत के इस कालखंड की समीक्षा होगी, तो ये बात उभरकर सामने आएगी कि इस कालखंड को भारत की Aspirations ने ड्राइव किया। यह भारत के एस्पिरेशन्स का नया युग है।

जहां बिजली पहुंची है, वहां लोग सिर्फ बिजली नहीं चाहते, वे Smart Living चाहते हैं। जहां ट्रेन पहुंची है, वहां लोग High-Speed Connectivity चाहते हैं। जहां हाईवे बने हैं, वहां लोग World-Class Expressways चाहते हैं। जहां इंटरनेट पहुंचा है, वहां लोग AI और Digital Innovation में नेतृत्व चाहते हैं।

यानि आज भारत के लोग अपने जीवन को भी Next Level पर ले जाना चाहते हैं, और भारत को भी Next Level पर ले जाना उनका मकसद है, उनका संकल्प है, उनके सपने है।

और साथियों,

यही Aspirations आज भारत की विकास यात्रा की सबसे बड़ी शक्ति हैं। मैं आपको भारत की Space Journey का उदाहरण दूंगा।

भारत ने चंद्रयान को चंद्रमा के South Pole पर उतारा। दुनिया ने इसे एक बहुत बड़ी उपलब्धि माना। लेकिन भारत इसे अपनी मंजिल मानकर रुका नहीं। आज देश गगनयान की तैयारी कर रहा है। भारत अंतरिक्ष में अपना Space Station बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

हमारे Space Startups Global Space Economy में अपनी जगह बनाने के लिए पुरजोश काम कर रहे हैं, आगे बढ़ रहे हैं।

साथियों,

Green Energy के क्षेत्र में भी भारत की यही एस्पिरेशंस दिखाई देती है। Solar Power में भारत की उपलब्धियों की दुनिया भर में लगातार चर्चा हो रही हैं। लेकिन भारत अगली छलांग की तैयारी कर रहा है।

Green Hydrogen में बड़े निवेश हो रहे हैं। Advanced Nuclear Energy पर तेजी से काम हो रहा है। आपने भारत के Fast Breeder nuclear Reactor से जुड़ी प्रोग्रेस के बारे में भी सुना ज़रूर होगा। ये भारत के न्यूक्लियर एनर्जी लैंडस्केप में क्रांतिकारी परिवर्तन करने का बहुत बड़ा अचीवमेंट हमारे सीसेन्टिस्टों ने किया है।

साथियों,

आज का भारत भविष्य का पूरा Ecosystem बना रहा है। भारत एक साथ हर उस क्षेत्र में निवेश कर रहा है, जो आने वाले दशकों की दिशा तय करेगा।

अभी आपने कुछ दिन पहले ही देखा है नीस में भारत इनोवेट्स का एक आयोजन किया। ये इवेंट भारत के डीप टेक सामर्थ्य को दुनिया तक पहुंचाने का एक और माध्यम था। इसमें भारत के 120 Deep-Tech Startups उपस्थित थे। Bharat Innovates में करीब एक हजार चार सौ B2B Meetings हुईं है। कई Startups के लिए Investment Commitments आगे बढ़ीं, Commercial Orders के लिए रास्ते खुले। French और European Universities तथा Incubators के साथ Engagements बढ़ रही हैं।

Student Exchanges, Joint Research, और Innovation Support के नए रास्ते बने। इसलिए Bharat Innovates सिर्फ एक Summit नहीं रहा। यह Innovation Diplomacy का एक नया मॉडल बना है।

और आज ही पेरिस में VivaTech इवेंट के जरिए, इस यात्रा को हमने और आगे बढ़ाया। नीस में हमने Ideas को Capital से जोड़ा और पेरिस में Indian Innovation को Global Scale से जोड़ा। आज दुनिया देख रही है भारत केवल भविष्य के लिए तैयार नहीं हो रहा है। भारत भविष्य को आकार दे रहा है।

साथियों,

एक समय था, जब देशों के बीच रिश्ते केवल व्यापार से तय होते थे। आज व्यापार के साथ-साथ Trust यानि भरोसा भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है।

हर देश Reliable Supply Chains चाहता है। हर देश Stable Partnerships चाहता है। हर देश ऐसे साथियों की तलाश में है, जिन पर लंबे समय तक भरोसा किया जा सके। और ऐसे समय में, भारत विश्व में एक Trusted Partner के रूप में उभर रहा है।

एवियां में G7 बैठक के दौरान मैंने trust based partnerships बनाने पर ज़ोर दिया। ग्लोबल साउथ के देशों के साथ equal पार्टनर्स के रूप में आगे बढ़ने का आह्वान किया। भारत का G7 समिट में संदेश था Global Governance तभी प्रभावी होगी जब वह Inclusive होगी। Global Growth तभी Sustainable होगी जब वह शेयर्ड होगी। और Global Technology तभी मानवता के लिए उपयोगी होगी जब वह Trusted होगी।

साथियों,

भारत और दुनिया के बीच व्यापारिक रिश्तों में नई ऊर्जा नज़र आ रही है। फ्रांस के साथ भारत का ट्रेड लगतार बढ़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने दुनिया के अनेक देशों के साथ Free Trade Agreements किए हैं। यूरोपियन यूनियन हो, यूनाइटेड किंगडम हो दुनिया के हर देश, हर रीजन के साथ भारत समझौते कर रहा है।

अगले महीने से भारत और UK के बीच ट्रेड एग्रीमेंट भी लागू हो जाएगा। यह एग्रीमेंट भारत के farmers, workers और innovators को अनेक नए अवसर प्रदान करेगा।

साथियों,

आज दुनिया Uncertainty और Disruption के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में भारत और फ्रांस की साझेदारी विश्वास, स्थिरता और सहयोग का एक मजबूत स्तंभ बन रहा है।

इस वर्ष हमने भारत और फ्रांस के संबंधों को Special Global Strategic Partnership का दर्जा दिया था। नीस में मेरे मित्र President Macron और मैंने हमारे संबंधों को force for global good बनाने पर चर्चा की। Defence से लेकर space और नुक्लियर तक AI और क्रिटीकल मिनरल्स से लेकर high speed railway तक, हर क्षेत्र में हम मिलकर आगे बढ़ेंगे।

साथियों,

Solar energy हो, या AI के क्षेत्र में सहयोग हो, भारत और फ्रांस मिलकर ऐसे समाधान विकसित कर रहे हैं जो पूरी मानवता के हित में हैं। पिछले वर्ष पेरिस में और इस वर्ष दिल्ली में हमने AI Summit को Co-chair किया।

अब हम साथ मिलकर अगले वर्ष “तृष्णा” satellite को लॉन्च करने जा रहें हैं। यह “तृष्णा” satellite जो विश्व में फूड और वाटर सिक्युरिटी सुनिश्चित करने में योगदान देगा।

और साथियों,

यह सभी गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट पहलो में आप सभी का योगदान बहुत महत्वपूर्ण है। ये आप हैं जो भारत और यूरोप के बीच सबसे मजबूत सेतु हैं। आप दोनों समाजों को समझते हैं। दोनों बाजारों को समझते हैं। आने वाले समय में Talent, Trade, Technology, Tourism और Investment के नए अवसरों को आगे बढ़ाने में आपकी भूमिका लगातार बढ़ने वाली हैं।

साथियों,

भारत और फ्रांस के रिश्तों को साझा इतिहास, साझा मूल्यों और साझा विश्वास ने आगे बढ़ाया है। विश्व युद्धों के दौरान फ्रांस की धरती पर बलिदान देने वाले भारतीय सैनिकों की स्मृतियां आज भी हमें जोड़ती हैं।

मुझे पहले नव शापेल में श्रद्धांजलि देने का अवसर मिला, पिछले वर्ष प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मार्सेय के वॉर मेमोरियल जाने का अवसर भी मिला। ये हमारी साझा विरासत है।

फ्रांस, भारतीयों के योगदान को संजोता भी है और सराहता भी है। भारतीय मूल की नूर इनायत खान हों, जिन्होंने फ्रांस की Resistance के लिए अपना जीवन बलिदान किया, या महाराजा रणजीत सिंह के साथ काम करने वाले जनरल जां फ्रांस्वा अलार हों ये सभी भारत और फ्रांस की साझा विरासत के प्रतीक हैं।

भारत के राज्य पुडुचेरी में भी फ्रेंच विरासत की झलक दिखाई देती है। वहां का Architecture, वहां की कला-संस्कृति और खान-पान सभी में हमारे संबंधों की महेक है।

साथियों,

इस समय फ्रांस समेत पूरी दुनिया में International Yoga Day की तैयारी भी चल रही है। इस अवसर पर मैं, फ्रांस में योग को आगे बढ़ाने वाले श्रीमान महेश घाट्राड्याल जी को भी आदरपूर्वक श्रद्धांजलि देता हूं। मैं पद्म पुरस्कार से सम्मानित, शार्लोत शोपां जी को भी प्रणाम करता हूं। जिन्होंने सौ वर्ष की आयु में भी, योग के माध्यम से फ़्रांस को भारत की विरासत से जोड़ा है। उनका जीवन यह सिद्ध करता है: Yoga does not add years to life, it adds life to years.

साथियों,

मैं फ्रेद नेग्री जी को भी आदरपूर्वक श्रद्धापूर्वक याद करता हूं। भारतीय विरासत को संरक्षित करने में उनका योगदान अतुल्य रहा है।

साथियों,

भारत और फ्रांस को कनेक्ट करने वाली एक और चीज है, और वो है फुटबॉल। इस वक्त यहां फुटबॉल फीवर पूरे जोर पर है। फ्रांस में इसकी दीवानगी, चप्पे-चप्पे पर दिखती है। लेकिन भारत में भी फुटबॉल का क्रेज़ सिर चढ़कर बोलता है।

खासतौर पर फ्रांस की टीम के फैन्स भारत में बहुत अधिक हैं। फ़्रांस ने इस वर्ल्ड कप की शुरुआत एक जोरदार जीत से शुरू की है। मैं फ्रांस की टीम को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

जाने से पहले, आप सभी के लिए कुछ और अच्छी खबरें भी लेकर के आया हूँ। वो आपके लिए हैं। पिछले वर्ष, मार्सेय में कॉन्सुलेट खोला गया, इससे काफी अधिक सुविधा मिल रही है। कुछ हफ्ते पहले, Indian Nationals के लिए French Airports पर Visa-free Transit की व्यवस्था शुरू हो गई है।

Students और Professionals की Mobility बढ़ाना हो, या Educational Qualifications की Mutual Recognition की बात हो, या फिर French Universities के भारत में Campus खोलना हो, इन सभी पर हम मिलकर आगे बढ़ रहें हैं।

अब फ्रांस में UPI के उपयोग का दायरा भी और बढ़ने जा रहा है। यानि भारत-फ्रांस कनेक्ट भी Instant और आपसी Payment भी Instant!

साथियों,

इन सभी पहलों से, हम भारत और फ़्रांस को और करीब ला रहें हैं। और मैं फिर कहूंगा इस साझेदारी की नींव, इस रिश्ते की असली ताकत आप सभी हैं। आप सब मेरे देशवासी हैं।

आज जब भारत तेज़ी से विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, तो मैं आप सभी से भारत के साथ और गहराई से जुडने का आग्रह करूंगा। इससे भारत की विकास यात्रा को नई शक्ति मिलेगी, और आपको अपनी पुरखों की धरती की सेवा करने का अवसर भी मिलेगा।

इन्हीं शब्दों के साथ आप सभी के प्रेम आपके उत्साह और इस आत्मीय स्वागत के लिए मैं एक बार फिर आप सभी का आभार व्यक्त करता हूं।

भारत माता की जय!

बहुत बहुत धन्यवाद।