इन परियोजनाओं से क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय किसानों और दुग्ध उत्पादकों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी
"इन एफपीओ के माध्यम से छोटे किसान फूड प्रोसेसिंग से जुड़ी, एक्सपोर्ट से जुड़ी वैल्यू और सप्लाई चेन से सीधे जुड़ पाएंगे"
"किसानों के लिए आय के वैकल्पिक साधन बनाने की रणनीति के अच्छे परिणाम मिल रहे हैं"

भारत माता की – जय , भारत माता की – जय

गुजरात के लोकप्रिय, मृदुल एवं मक्‍कम मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र भाई पटेल, संसद में मेरे वरिष्ठ साथी, गुजरात भारतीय जनता पार्टी के अध्‍यक्ष श्रीमान सी आर पाटिल, गुजरात विधानसभा के डिप्टी स्पीकर श्री जेठाभाई, गुजरात सरकार के सभी मंत्रीगण, सांसदगण और विधायकगण, साबर डेयरी के पदाधिकारी और इससे जुड़े तमाम किसान भाई-बहन, पशुपालक भाई-बहन!

आज साबर डेयरी का विस्तार हुआ है। सैकड़ों रुपए के नए प्रोजेक्ट यहां लग रहे हैं। आधुनिक टेक्नॉलॉजी से लैस मिल्क पाउडर प्लांट और ए-सेप्टिक पैकिंग सेक्शन, उसमें एक और लाइन जुड़ने से साबर डेयरी की क्षमता और अधिक बढ़ जाएगी। आज जिस नए प्लांट का भूमिपूजन हुआ है, वो भी साबर डेयरी के सामर्थ्य को बढ़ाने में मदद करेगा। मैं साबर डेयरी और इस सहकारी आंदोलन से जुड़े सभी किसान भाई-बहनों को, डेयरी के चेयरमैन को, डेयरी के सभी डायरेक्‍टर्स को हृदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं, बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

और जब साबर डेरी की बात आती है, और भूराभाई की याद न आयें, तो बात अधुरी रह जाती है। भूराभाई पटेल ने दशकों पहले जो प्रयास शुरू किया था, वो आज लाखों लोगों का जीवन बदलने में मदद कर रहा है। साबरकांठा आए, तो कुछ नया नहीं लगता। परंतु रोज कुछ नया होता जरुर नजर आता है। साबरकांठा का शायद ही कोई भाग होगा, कि जहाँ मेरा जाना ना हुआ हो। और साबरकांठा में आए तो सब याद आता है। बस अड़्डे पर खडे रहे, और खेर, खेर, खेर,- वडाली, वडाली, वडाली। खेर-वडाली, खेर-भिलोडा, चलो चलो। जब भी साबरकांठा आता हुँ तब यही आवाज कान में गूंजती रहती है। यहाँ मेरे अनेक साथी-सहय़ोगी, यहाँ आता हुं तब सबकी याद भी आते है। दुख की बात है,कि कुछ साथी हमें छोडकर परमात्मा को प्यारे हो गये। हमारे श्रीराम सांखला की याद आती है, हमारे जयेन्द्रसिंहभाई राठोड, हमारे एस.एम.खांट, हमारे धीमंत पटेल, मेरे भाई गजानंद प्रजापति, हमारे विनोद खिलजीभाई के। कितने ही पुराने साथीयों, और आज भी कितने लोगों के चहेरे मेरे सामने घूम रहे है। मेरे वालजीभाई हो, मेरे प्रवीणसिंह देवडा हो, मेरे अनेक साथी, मेरे मोडासा के राजाबली याद आते है। अनेक लोगों की याद, अनेक सदर परिवार उनके साथ मेरा गहरा रिश्ता। बहुत ही सम्मानीय नाम हमारे डायाभाई भट्ट, मेरे मूलजीभाई परमार, ऐसे अनेक बुजुर्गो और साथीयों। अनेको के बीच में काम किया। हमारे रमणीकभाई हो, जिनके यहाँ कईबार ईडर आना हो तो जाउँ। और कई परिवारों के साथ मिलना होता था। लेकिन अब आप सबने ऐसी जिम्मेदारी दी है, कि पुराने दिन याद करके ही आनंद लेना होता है।

साथियों,

दो दशक पहले यहां क्या स्थितियां थीं, ये आप भी जानते हैं मैंने भी भलीभांति देखा है। आजकल हम गुजरात के कई हिस्सों में अतिवर्षा की चुनौती से जूझ रहे हैं। लेकिन गुजराती को बारिश आना यही अपने-आप में इतना बड़ा सुख और संतोष होता है जिसका अंदाज बाहर के लोगों को नहीं हैं। क्योंकि अपने यहाँ तो 10 वर्ष, 5 वर्ष अकाल पडता है, बारिश के लिए तडपते है। और जब भरपुर बारिश होती है, तब मन भई भर जाता है। और अकाल की ये स्थिति का परिणाम क्या आता है, खेती में बारिश हो, तो शायद ही एकाद फसल हो। पशुपालन, उसमें भी घासचारा मिलने में परेशानी, और बच्चों को यहाँ नहीं रखना, बच्चों को शहर में भेजो। हम यहाँ गांव में जिंदगी बिता लेंगे। ये दिन हमने देखे है। और उस समय मैंने संकल्‍प किया था आप लोगों के भरोसे संकल्‍प किया था, आप लोगों के साथ सहयोग पर अटूट विश्‍वास ले करके संकल्‍प किया था कि स्थिति को बदलना है, और इसलिए जैसे-जैसे सिंचाई की सुविधाएं, इसका गुजरात में विस्तार हुआ, वैसे-वैसे कृषि के क्षेत्र में, पशुपालन के क्षेत्र में हमने बहुत विकास किया, वृद्धि की और डेयरी ने उसे बहुत बड़ी ताकत दी। अर्थव्‍यवस्‍था को डेयरी ने स्थिरता भी दी, डेयरी ने सुरक्षा भी दी और डेयरी ने प्रति के नए अवसर भी दिए। अभी, मैं जरा बहनों के साथ बैठा था, जरा हालचाल पुछ रहा था। मैंने कहा कैसा चल रहा है ? नफा कितना मिलता है। फिर मैंने पुछा नफा का क्या करते हो ? साहब नफा मिलता है तो हम सोना खरीदते है। पहला काम सोना खरीदने का करते है।

साथियो,

गुजरात देश का वो राज्य है जहां हमने कई साल पहले पशुओं के लिए हेल्थ कार्ड जारी किए थे, पशु आरोग्य मेलों की शुरुआत की थी। हमने पशुओं के मोतियाबिंद और दांतों के डेंटल ट्रीटमेंट तक की चिंता की थी। और आपको तो पता है पशु आरोग्‍य मेले में कुछ गायें जब उनके पेट को काटते थे तो 15-15, 20-20 किलो प्‍लास्टिक का वेस्‍ट निकलता था और देखने वालों की आंख में पानी आ जाता था। और इसलिए हमने प्लास्टिक के उपयोग को बंद करने का अभियान चलाया है भाई। यह प्लास्टिक हमारे पशुओं के लिए दुश्मन के समान है। दूसरी तरफ पशुओ की चिंता, पशुओ को अच्छा आहार मिले, और आज मुझे बहनों ने आनंद की बात की है।

शायद इसका प्रचार बहुत कम हुआ है। उन्‍होंने कहा कि हम, पशु अगर बीमार होते हैं तो आजकल आयुर्वेदिक दवाई से भी पशुओं को ठीक करते हैं। यानी पशुओं के लिए जो हमारी परंपरागत आदिमआदि परंपराएं घरों में रहती थीं, वे पुनर्जीवित हुई हैं। आयुर्वेदिक दवाओं से पशुओं की देखभाल, मैं गुजरात के डेयरी क्षेत्र के लोगों का, साबर डेयरी का हृदय से अभिनंदन करता हूं कि उन्‍होंने अपने पशुपालकों को आयुर्वेद दवा के सहारे पशुओं की चिकित्‍सा का रास्‍ता और उसमें मदद की है। हमें पता है जब मैं 2001 में आया तब लोग कहते थे कि, साहब शाम को खाना खाते वक्त तो बिजली दो। शाम को गुजरात में बिजली नहीं मिलती थी गुजरात में। हमने ज्योतिग्राम योजना का अभियान चलाया। आज 20-22 वर्ष के लडके-लडकीयों को तो पता भी नहीं होगा कि अंधेरा किसे कहते है। और गुजरात में ज्योतिग्राम योजना लाये। और ज्योतिग्राम योजना ने मात्र गुजरात के घरों में उजाला किया, टीवी चालु किया इतना ही नहीं। हमारे गाँव में डेयरी ने मिल्क चिल्ड युनिट खडे करने में इस बिजली ने बहुत बडी मदद की। जिसके कारण दुध का कलेक्शन बढा, और दुध बिगडना बंद हुआ। गाडी आए तब तक चिलींग सेन्टर में दुध सुरक्षित रहता था। और उसके कारण नुकसान भी कम होने लगा। और यह बिजली के कारण हो सका है। गुजरात में बीते 2 दशकों में जो व्यवस्थाएं तैयार हुई हैं, आज उसके बेहतर परिणाम मिल रहे हैं। आज गुजरात का डेयरी मार्केट 1 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है।

साथियों,

मुझे याद है मैं 2007 में भी यहां आया, 2011 में भी आया। उस समय मैंने प्रोसेसिंग प्लांट करने का एक कार्यक्रम किया था। और उस दिन मैंने हमारे डेयरी के साथियों के साथ बात की थी। मैंने कहा, देखिए जी अब आप महिलाओं की भागीदारी बढ़ाइए। और मुझे आज खुशी है कि दुग्‍ध समितियों में महिलाओं को पहले न के बराबर काम था, आज कम से कम तीन महिलाएं आज मंडली के उस कार्यकारी के रूप में रहती हैं, वो मंडली को चलाती हैं और कुछ जगह पर तो पुरुषों से ज्‍यादा महिलाएं काम संभालती हैं। गुजरात में हमने ये भी नियम बनाया था और मैंने आज सब बहनें मिलीं तो पूछा, उस समय मैंने नियम बनाया था, कि दूध भरने के लिए कोई भी आए लेकिन दूध का पैसा किसी भी पुरुष को नहीं देना, दूध का पैसा महिलाओं को ही मिलना चाहिए। और अगर महिलाओं के पास पैसे जाएंगे, पाई-पाई का सही उपयोग होगा, परिवार की भलाई के लिए होगा, पशुओं के कल्‍याण के लिए होगा। और आज गुजरात में दूध का पेमेंट सिर्फ और सिर्फ महिलाओं को मिलता है और उसके कारण मेरी महिलाओं, बहनों की, माताओं की ता‍कत भी बहुत बढ़ गई है। गुजरात में सहकारिता की एक समृद्ध परंपरा रही है और संस्‍कार भी हैं, तभी तो सहकार है और सहकार है तभी तो समृद्धि है। दूध से जुड़े सहकारी आंदोलन की जो सफलता है, उसका विस्तार अब हम खेती से जुड़े बाकी क्षेत्रों में भी कर रहे हैं। देश में आज 10 हज़ार किसान उत्पादक संघ–FPOs, इसके निर्माण का काम तेज़ी से चल रहा है। इन FPOs के माध्यम से छोटे किसान फूड प्रोसेसिंग से जुड़ी, एक्सपोर्ट से जुड़ी वैल्यू और सप्लाई चेन से सीधे जुड़ पाएंगे। इसका बहुत अधिक लाभ मेरे गुजरात के किसानों भाई-बहनों को होने वाला है।

भाइयों और बहनों,

किसानों की आय बढ़ाने के लिए जो प्रयास बीते 8 वर्षों में केंद्र सरकार ने किए हैं, उसकी वजह से गुजरात समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में किसानों की आय में बढ़ोतरी देखी जा रही है। किसानों की आय में बागवानी, पशुपालन, मछलीपालन इसकी वजह से भी काफी वृद्धि हुई है और इसमें भी सबसे बड़ी बात ये निकलकर सामने आ रही है कि जो भूमिहीन किसान हैं, जो सबसे गरीब होते हैं, उनकी आय में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी तरह, बहुत छोटी जमीन वाले किसानों की आय में भी वृद्धि हुई है। यानि फसलों के अलावा आय के वैकल्पिक माध्यमों पर काम करने की रणनीति आज काम आ रही है।

खादी और ग्रामोद्योग भी इसका एक उत्तम उदाहरण है। खादी और ग्रामोद्योग का टर्नओवर पहली बार 1 लाख करोड़ रुपए से ऊपर गया है। यही कारण है कि बीते 8 वर्षों में इसी क्षेत्र से डेढ़ करोड़ से ज्‍यादा नए रोज़गार गांव में बने हैं। 2014 से पहले के 7-8 सालों की तुलना में बीते 8 सालों में मधुमक्खी का पालन, मधु का उत्पादन और मुझे तो साबर डेयरी ने कहा, कि अब हम भी पूरे साबरकांठा में मधु के उत्पादन के लिए किसानों को तैयार कर रहे है। उन्हें बोक्स दे रहे है। और इतने कम समय में मधु का उत्पादन दोगुना होने जा रहा है, लगभग दोगुना । यह एक अन्य लाभ, और खेत में मधुमक्खी हो तो वह भी आपके साथी की तरह काम करती है। खेत मजदूर की तरह आपकी मदद करे। मधमक्खी खेती में पूरक होती है। इतना ही नहीं, पेट्रोल में इथेनोल ब्लेडिंग बनाकर 10 प्रतिशत से ज्य़ादा, आज हम पेट्रोल में इथोनोल को मिलाते है। यह ईथोनोल कैसे बनता है, गन्ने के लकडी में से, गन्ने में से, मकई में से, यानि कि अभी तक खाडी से तेल आता था। अब उसमें झाडी का तेल भी मिलने लगा है। और झाडी और खाडी का तेल मिलने से आज हमारे साधन चल रहे है, और पर्यावरण का भी रक्षण हो रहा है। 2014 तक देश में 40 करोड़ लीटर से भी कम इथेनॉल की ब्लेंडिंग होती थी। आज ये करीब 400 करोड़ लीटर तक पहुंच रहा है। हमारी सरकार ने बीते 2 वर्षों में विशेष अभियान चलाकर 3 करोड़ से अधिक किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड भी दिए हैं। पहली बार पशुपालकों और मछुआरों को भी किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा दी गई है।

भाइयों और बहनों,

खेती की लागत कम करने पर भी हम लगातार काम कर रहे हैं। नीम कोटेड यूरिया, खाद के बंद पड़े कारखाने, उनको फिर से शुरू करना, नैनो फर्टिलाइज़र पर काम करना, और नेनो फर्टिलाईजर तो ऐसा है कि ऐक थेला भरकर फर्टिलाईजर लाते हो, उतना अब एक बोटल में आ जाता है। और उतना ही लाभ मिले। मेहनत कम, लाभ उतने का उतना ही। आज नेनो फर्टीलाईजर पर काम चल रहा है। बीते कुछ महीनों में पूरी दुनिया में यूरिया के दाम में कई गुणा बढ़ोतरी हुई है, लेकिन देश के किसानों पर हमने इसका बोझ नहीं पड़ने दिया। दुनिया में से फर्टीलाईजर बाहर से लाना पडता है। कई गुना भाव बढ गये अचानक। लेकिन दिल्ली में बैठी हुई आपकी इस सरकार ने इतने सारे युरिया के भाव बढे, परंतु उसका बोझ हमारे किसानों के उपर नहीं आने दिया। उसका बोझ आज भारत सरकार वहन कर रही है। युरिया की 50 किलो की बेग सरकार को साढ़े तीन हजार रुपिये में पडती है। जरा बोलेंगे आप कितने में? साढ़े तीन हजार रुपिये की एक थेली । साढ़े तीन हजार रुपिया, कितना ? और सरकार किसानों को कितने रुपिये में देती है ? 300 रुपिये में। 350 हजार की थेली मेरे किसान भाईयों को बोझ न लगे, इसलिए पूरे देश में मात्र 300 रुपिये में दी जाती है। एक प्रकार से DAP के 50 किलो के बैग पर पहले सरकार 500 रुपए का बोझ वहन करती थी, सरकार पर 500 रुपए का बोझ आता था। आज वो दुनिया में महंगाई बढ़ने के कारण आज सरकार को 2500 रुपए का बोझ वहन करना पड़ता है लेकिन किसानों के सिर पर हम बोझ जाने नहीं देते।

साथियों,

इन तमाम योजनाओं का लाभ गुजरात के किसानों को भी मिल रहा है। बीते वर्षों में अरवल्ली के 50 हज़ार से अधिक किसानों के खेत माइक्रो इरीगेशन की सुविधा से जुड़ चुके हैं। और में विशेषकर अरवल्ली जिला के किसान भाईयों को बधाई देना चाहता हुँ। यह काम लेने के लिए। आज अरवल्ली के अनेक गांव ऐसे हैं जहां किसान शत-प्रतिशत ड्रिप इरीगेशन से सिंचाई कर रहा है। सुजलाम-सुफलाम योजना से साबरकांठा की अनेक ऐसी तहसीलों में पानी पहुंचा है, जहां पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। हाथमती नहर उसका सुंदरीकरण प्रोजेक्ट पूरा होने से पूरे क्षेत्र की सुंदरता बढ़ी है। शहर में पानी की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए हर घर जल अभियान के तहत भी करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं।

साथियों,

आज साबरकांठा और आसपास के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी का अभूतपूर्व इंफ्रास्ट्रक्चर बन चुका है। रेलवे लाईनों चौडाई, रेलवे के ब्रिज बनाना, हाई-वे को चौडा करना, हाई-वे को दूर तक आगे लेकर जाना, अपना यह शामलाजी-मोडासा 150 किलोमीटर लंबी फोरलेन रोड आगे जाकर दक्षिण गुजरात के साथ सीधा जुड जाता है। दक्षिण गुजरात मध्य गुजरात के साथ यह मेरा साबरकांठा जुड जाएगा। और इसके कारण खेडब्रह्मा हो, मेघरज हो, मालपुर हो, भिलोडा हो यह मेरा पूरा आदिवासी पट्टा विकास के अंदर तेजी से जुड रहा है। हिंमतनगर से खेडब्रह्मा ब्रोडगेज लाईन उस प्रोजेक्ट पर तेजगति से काम चल रहा है। भाईयो-बहनों आपको याद होगा कि, अपने यहाँ हिंमतनगर से महेसाणा जाना हो तो सात बार सोचेंगे कि इस रोड पर कैसे जाउंगा, कब पहुंचुगा। घंटो लग जाते थे, लेकिन अब नये रोड बनने कारण तीन साढे घंटे में फटाफट पहुंच जाते है। हिंमतनगर, महेसाणा, विजापुर फट फट पहुंच जाते है। हिंमतनगर से अंबाजी चार लेन सडक बनी, और मां अंबा के दर्शन के लिए आने वाले लोग, अब सबको उत्तर गुजरात से जाना हो, दक्षिण गुजरात-मध्य गुजरात के लोग यहीं रास्ता पकडते है। यानि की आसपास के लोगों को भी रोजी-रोटी मिलती रहे। और अब शामलाजी से अहमदाबाद 6 लाईन का हाई-वे यह बनाने का काम तेजी से चल रहा है। 1300 करोड रुपिये इस पर खर्च किए जा रहे है। हिंमतनगर में मेडिकल कोलेज, और हमें कोरोना की लडाई में यह मेडीकल कोलेज कितनी काम में आई, कितना आर्शिवाद मिला यह आप लोग भी जानते है मैं भी जानता हुँ।

साथियों,

जब कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर होता है तो इसका बहुत बड़ा लाभ पर्यटन को होता है, हमारे युवा नौजवानों को रोजगार में होता है। और अपना तो साबरकांठा, बनासकांठा यह दो आस्था, जनजातिय परंपरा, प्राकृतिक वातावरण से भरा हुआ है। और मेरा तो सौभाग्य रहा कि शामलाजी मंदिर का जीर्णोध्दार करने का अवसर मुझे मिला है। आज कोई भी जाता है उसे पता नहीं होगा कि शामलाजी का क्या हाल था। और इस क्षेत्र में जो विकास हो रहा है उसके कारण यात्रियों की संख्या बढ रही है, रोजी-रोटी के अवसर बढ रहे है।

भाइयों और बहनों,

मैं साबरकांठा ऐसे समय में आया हूं, जब देश आज़ादी के 75 वर्ष पूरे करने वाला है और आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। इसी वर्ष आजादी के अमृत वर्ष के दरमियान आदिवासी नरसंहार, बाल चितरीया की यह घटना उसे भी 100 साल पूरा हो रहा है। आदिवासी नायक मोतीलाल तेजावत जी उनके नेतृत्व में आदिवासीय़ों ने अंग्रेजो के सामने जंग छेडा। और उन्होनें अंग्रेजो को हिला दिया था, यह मेरा साबरकाँठा । और अंग्रेजो ने आदिवासीयों का नरसंहार किया, मोत के घाट उतारा। पंरतु दुर्भाग्य आजादी के बाद यह घटना भूला दी गई। य़ह मेरा सौभाग्य था कि, जनजातिय समुदाय का त्याग और बलिदान यह आनेवाली पीढी को पता चलना चाहिए। और इसलिए हमने बालचितरीया के अंदर शहीदों के स्मारक को फिर से दुनिया के सामने लाने में हम सफल हुए। आज शहीद स्मृति वन, उन अमर बलिदानियों से की प्रेरणा से नई पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति का रास्ता दिखा रहा है। मेरा ये भी सौभाग्य है कि मुझे प्रधानमंत्री के रूप में, आज़ादी के लिए आदिवासी समाज के योगदान को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का भी अवसर मिला है। 15 नवम्बर भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिन को जनजातिय गौरव दिन के रुप में पूरा देश मनायें। यह हमने निर्णय किया है। हमारी सरकार देशभर में आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की याद में विशेष संग्रहालय भी बनवा रही है।

साथियों,

आज़ादी के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर एक और बड़ा संयोग हुआ है। पहली बार जनजातीय समाज से आने वाली देश की बेटी भारत के सबसे बड़े संवैधानिक पद पर पहुंची हैं। देश ने श्रीमती द्रोपदी मुर्मू जी को राष्ट्रपति बनाया है। ये 130 करोड़ से अधिक भारतवासियों के लिए बहुत गौरव का क्षण है। जिस समावेशी लोकतंत्र का सपना आजादी के लिए अपना बलिदान देने वाले हमारे पूर्वजों ने देखा था, वो आज साकार हो रहा है।

साथियों,

आज मैं साबरकांठा की इस पवित्र धरती से गुजरात के सभी लोगों से एक आग्रह करता हूं, देशवासियों से भी आग्रह करता हूं और अभी हमारे मुख्‍यमंत्री जी ने भी बताया, आज़ादी के 75 वर्ष पूरे होने पर हर घर तिरंगा अभियान शुरू किया जा रहा है। इस अभियान में 13 अगस्त से ही देश का हर घर अपने यहां तिरंगा लहराएगा, तिरंगा फहराएगा। साबरकांठा, अरवल्ली के साथ-साथ पूरे गुजरात और पूरे देश में ये तिरंगा फहराकर एक भारत, श्रेष्ठ भारत का अमृत संकल्प लेना है। जिन लोगों ने देश की आजादी के लिए बलिदान दिया, उनकी आत्‍मा जहां भी होगी वो आपके घर पर तिरंगा लहराता देख करके उनकी आत्‍मा आपके परिवार को भी आशीर्वाद देने वाली है। आज साबरकांठा ने जो मान-सम्मान, और विराट जनसागर, इतनी बडी संख्या में मेरी माताओं-बहनों, आपका आर्शिवाद वहीं मेरी शक्ति है, वहीं मेरी उर्जा है, वहीं मेरी प्रेरणा है। आपके आर्शिवाद से पुरुषार्थ के मार्ग पर आगे बढकर जन-जन का कल्याण हो, जो संस्कार गुजरात ने दिया है। जो हिन्दुस्तान के गांव-गांव तक पहुंचाना यहीं आर्शिवाद मेरी बहुत बडी पूंजी है। मैं आपका दिल से आभारी हुँ और साबर डेयरी की पूरी टीम को सतत विस्तार और विकास के अभियान को बहुत बधाई देता हुँ। बहुत-बहुत धन्यवाद। दोनों हाथ उपरकर मेर साथ जोर से बोलिए,

भारत माता की – जय

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धन्यवाद !

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PM Modi interacts with Energy Sector CEOs
January 28, 2026
CEOs express strong confidence in India’s growth trajectory
CEOs express keen interest in expanding their business presence in India
PM says India will play decisive role in the global energy demand-supply balance
PM highlights investment potential of around USD 100 billion in exploration and production, citing investor-friendly policy reforms introduced by the government
PM calls for innovation, collaboration, and deeper partnerships, across the entire energy value chain

Prime Minister Shri Narendra Modi interacted with CEOs of the global energy sector as part of the ongoing India Energy Week (IEW) 2026, at his residence at Lok Kalyan Marg earlier today.

During the interaction, the CEOs expressed strong confidence in India’s growth trajectory. They conveyed their keen interest in expanding and deepening their business presence in India, citing policy stability, reform momentum, and long-term demand visibility.

Welcoming the CEOs, Prime Minister said that these roundtables have emerged as a key platform for industry-government alignment. He emphasized that direct feedback from global industry leaders helps refine policy frameworks, address sectoral challenges more effectively, and strengthen India’s position as an attractive investment destination.

Highlighting India’s robust economic momentum, Prime Minister stated that India is advancing rapidly towards becoming the world’s third-largest economy and will play a decisive role in the global energy demand-supply balance.

Prime Minister drew attention to significant investment opportunities in India’s energy sector. He highlighted an investment potential of around USD 100 billion in exploration and production, citing investor-friendly policy reforms introduced by the government. He also underscored the USD 30 billion opportunity in Compressed Bio-Gas (CBG). In addition, he outlined large-scale opportunities across the broader energy value chain, including gas-based economy, refinery–petrochemical integration, and maritime and shipbuilding.

Prime Minister observed that while the global energy landscape is marked by uncertainty, it also presents immense opportunity. He called for innovation, collaboration, and deeper partnerships, reiterating that India stands ready as a reliable and trusted partner across the entire energy value chain.

The high-level roundtable saw participation from 27 CEOs and senior corporate dignitaries representing leading global and Indian energy companies and institutions, including TotalEnergies, BP, Vitol, HD Hyundai, HD KSOE, Aker, LanzaTech, Vedanta, International Energy Forum (IEF), Excelerate, Wood Mackenzie, Trafigura, Staatsolie, Praj, ReNew, and MOL, among others. The interaction was also attended by Union Minister for Petroleum and Natural Gas, Shri Hardeep Singh Puri and the Minister of State for Petroleum and Natural Gas, Shri Suresh Gopi and senior officials of the Ministry.