भारत माता के मस्तक पर तिलक 'मेवाड़ की माटी' के स्वाभिमान को कांग्रेस ने चोट पहुंचाने का काम किया: पीएम मोदी
कांग्रेस सरकार की तुष्टिकरण की नीति ने राजस्थान की संस्कृति, विरासत और गौरव को खतरे में डाला: पीएम मोदी
जनता के मुद्दों से बेपरवाह सत्ता पर काबिज होने की कांग्रेसियों की आपसी लड़ाई से राजस्थान के पांच साल बर्बाद गए: पीएम मोदी
राजस्थान को लूटकर अपनी तिजोरी भरना ही कांग्रेस का एकमात्र एजेंडा: पीएम मोदी

भारत माता की, भारत माता की।


भगवान एकलिंगनाथ जी की जय।


सांवलिया सेठ की जय।


माता त्रिपुरा सुंदरी की जय।


मेवाड़ की रक्षक बायण माता, कालिका माता, सगरा माता को मेरा बार-बार प्रणाम। महाराणा प्रताप और गोविन्द गुरु की ये धरती पूरे देश के स्वाभिमान और सम्मान की प्रतीक है। यहां के कण-कण में देशप्रेम की महक है, महान ऋषियों की साधना की अनुभूति है। रानी पद्मिनी, रानी कर्णावती, रानी फूल कंवर के बलिदान ने इस धरती का गौरव बढ़ाया है। ये पन्ना धाय की धरती है, जिन्होंने कर्तव्य का पालन करने के लिए अपनी संतान का बलिदान देने में एक क्षण नहीं लगाया। इस जगह की पहचान मीराबाई से है, उनके प्रेम और समर्पण जैसा दूसरा कोई और उदाहरण नहीं है। मैं मेवाड़ की इस पावन भूमि को कोटि-कोटि प्रणाम करता हूं।

मेरे परिवारजनों,


राजस्थान की विरासत, संस्कृति और इतिहास की गाथा मेवाड़ के बिना पूरी नहीं हो सकती। ये मेवाड़ की माटी भारत माता के मस्तक पर तिलक की तरह है। लेकिन इस धरती को जब-जब कांग्रेस की नजर लगी है, तब-तब इसके स्वाभिमान को गहरी चोट पहुंची है। कांग्रेस की सरकार में राजस्थान के लोगों के साथ मानवता को शर्मसार करने वाली वारदातें हो रही हैं। उदयपुर में कन्हैयालाल जी के साथ आतंकी घटना कांग्रेस सरकार पर बहुत बड़ा दाग है। ऐसी जघन्य वारदात उदयपुर में इसलिए हुई क्योंकि यहां आतंकियों के साथ सहानुभूति रखने वाली कांग्रेस की सरकार है।

साथियों,


कांग्रेस सरकार की तुष्टिकरण की नीति ने राजस्थान की संस्कृति, राजस्थान की विरासत, राजस्थान के गौरव को खतरे में डाल दिया है। जैसे हालात राजस्थान में पहले कभी नहीं बने, वो पिछले पांच साल में हमने देखे हैं। किसने सोचा था कि राजस्थान में कभी रामनवमी की शोभायात्रा और कांवड़ यात्रा पर भी प्रतिबंध लग सकता है। लेकिन ये पाप कांग्रेस सरकार ने किया। क्या ऐसी कांग्रेस सरकार को राजस्थान में रहने देना चाहिए। ऐसी कांग्रेस को राजस्थान में जगह मिलनी चाहिए। आज यहां कांग्रेस सरकार है, इसलिए PFI जैसे आतंकी संगठन बेखौफ होकर रैलियां निकालते हैं। आतंकियों की हमदर्द कांग्रेस सरकार राजस्थान को तबाह करके मानेगी। क्या हम राजस्थान को तबाह होने देंगे। क्या हम राजस्थान को तबाह होने देंगे। क्या हम राजस्थान को बर्बाद होने देंगे। राजस्थान के कितने ही क्षेत्रों में अब गरीबों के पलायन की खबरें आने लगी हैं। राजस्थान में कांग्रेस सरकार रही, तो ये और भी बढ़ेगा। इसलिए अब राजस्थान को देर नहीं करनी है। 25 नवंबर को पूरे उदयपुर को, पूरे राजस्थान को इस संकल्प के साथ वोट डालने निकलना है कि कांग्रेस सरकार को अब हटाकर ही रहेंगे।

मेरे परिवारजनों,


आज राजस्थान में न दलित, पिछड़े और गरीब सुरक्षित हैं और ना ही हमारी बहनें-बेटियां सुरक्षित हैं। कांग्रेस ने महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में राजस्थान को नंबर वन बना दिया है। कांग्रेस सरकार, महिलाओं के खिलाफ अपराध को काबू कर पाने में पूरी तरह नकारा साबित हुई है। और शर्मनाक ये कि कानून-व्यवस्था के सवाल पर कांग्रेस के मंत्री मजाक उड़ाते हुए कहते हैं कि ये मर्दों का प्रदेश है। डूब मरो, डूब मरो कांग्रेस के लोगों। आपके मुंह से ऐसे शब्द निकलते हैं। आपने सिर्फ राजस्थान की माताओं-बहनों का अपमान नहीं किया, आपने राजस्थान के मर्दों का भी अपमान किया है। राजस्थान के मर्द अपनी मात-बहन की इज्जत के लिए अपना सर कटाने के लिए तैयार होने वाले लोग होते हैं। उनकी मर्दांगनी माता-बहनों की रक्षा के लिए समर्पित होती है। और तुम्हारे मंत्री सबके बीच बेशर्मी से ऐसी भाषा का प्रयोग करे। मेरे प्यारे परिवारजनों कांग्रेस की यही असली सोच है। इसलिए कांग्रेस के राज में बहनों-बेटियों की इतनी बुरी गत बनी हुई है। अभी उदयपुर में ही कुछ दिन पहले ही दो बहनों की निर्मम हत्या की गई थी। इसके बाद यहां की एक और बेटी कांग्रेस के राज में अत्याचार की भेंट चढ़ गई। अपनी गाय बकरियां चरा कर पेट भरने वाली आदिवासी बहन की निर्मम हत्या कर दी गई। ऐसे अपराधी सोच वाले लोगों को कांग्रेस की सरकार में ही बढ़ावा मिला है। उन्हें सर्टिफिकेट मिल गया मर्दानगी का, इन पापियों को। राजस्थान में कानून की स्थिति ये हो गई है कि अब बहन बेटियां अपने काम से खेत खलिहान जाने से भी डरने लगी हैं।


आज राजस्थान में घर से बाहर निकलने के बाद कोई छात्रा सुरक्षित महसूस क्यों नहीं करती? आज राजस्थान की हर बहन-बेटी पूछ रही है कि क्या उसे सम्मान से जीने का अधिकार नहीं है। मैं राजस्थान की माताओं, बहनों, बेटियों का दर्द समझता हूं। मैं आपका आक्रोश समझता हूं। बहनों- बेटियों पर अत्याचार तब ही रुकेगा जब यहां से कांग्रेस की विदाई होगी। कांग्रेस की विदाई होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए। बहन-बेटियों की रक्षा होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए। बहन बेटियों को सम्मान से जीने का अधिकार है कि नहीं है। माताओं बहनों को गौरव से जीने का अधिकार है कि नहीं है। राजस्थान से भाजपा, गुंडाराज और अपराध पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। भाजपा, राजस्थान की हर बेटी-बहू को ये विश्वास दिलाती है कि उसे सम्मान से जीने और सुरक्षित माहौल में घर से निडर होकर निकलने का अवसर मिलेगा। और ये मोदी की गारंटी है।

साथियों,


कांग्रेस ने राजस्थान के पांच साल बर्बाद किए हैं। पांच साल तक राजस्थान की सरकार इसी में उलझी रही कि कुर्सी पर कौन बैठेगा। कुर्सी की इस लड़ाई में कांग्रेस ने जनता के मुद्दों की परवाह नहीं की। कांग्रेस ने राजस्थान के गरीबों, दलितों, वंचितों के लिए कुछ नहीं किया। वो कुर्सी के लिए लड़ते रहे। और अब चुनाव आए हैं तो पहले वो झूठे वादों का झुनझुना लेकर मैदान में आदतन आ गई है। लेकिन राजस्थान के लोग उनके वादों की सच्चाई जानते हैं। जिन राज्यों में कांग्रेस को चुनाव जीतने का अवसर मिला है। वहां कैसे उनके हर वायदे झूठे साबित हो रहे हैं, उसे हम सब देख रहे हैं। सौगंध लेना मेवाड़ का संस्कार है, लेकिन मेवाड़ सौगंध को जीतना जानता है। सौगंध के लिए मरना जानता है। मेवाड़ किसी को धोखा नहीं देता। लेकिन यहां की कांग्रेस सरकार 5 साल से जनता को धोखा ही दे रही है। कांग्रेस की हर योजना में एक धोखा जरूर होता है। कांग्रेस ने मिडिल क्लास को राहत देने का वादा किया था, लेकिन कांग्रेस सरकार पेट्रोल-डीजल पर रिकॉर्ड टैक्स वसूल कर रही है। मध्य प्रदेश से पेट्रोल यहां महंगा है, गुजरात से पेट्रोल यहां महंगा है। गोवा से यहां पेट्रोल महंगा है, अरे उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य से भी राजस्थान में महंगा है। कांग्रेस ने राजस्थान में गरीबों को राशन देने का वादा किया, लेकिन यहां की सरकार बच्चों का राशन तक खा गई है। कांग्रेस ने यहां बिजली बिल में सब्सिडी देने का वादा किया था, लेकिन अब लोगों से बकाए बिल के नाम पर 10 गुना ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं। कांग्रेस की नीतियों की वजह से यहां बिजली की इतनी किल्लत हो गई है कि उद्योग तबाह हो गए हैं।

परिवारजनों,


कांग्रेस का एक ही एजेंडा है- राजस्थान को लूटो...कांग्रेसियों की तिजोरी भरो। भ्रष्टाचार कांग्रेस के लिए हवा-पानी की तरह है, जैसे हवा-पानी के बिना कोई रह नहीं सकता ...ये कांग्रेस भी उसके बगैर कांग्रेस का काम चल ही नहीं सकता। राजस्थान में कांग्रेस के नेता खुद कह रहे हैं कि यहां ऐसी लूट मची है, जैसी देश में कहीं और नहीं है। ये उनके नेता कह रहे हैं। यहां के भ्रष्ट अधिकारियों के लॉकर से भारी मात्रा में सोना बरामद हो रहा है। अब ये आलू से बना सोना है कि लोगों की जेब काटकर बना हुआ सोना है। ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां सीएम के करीबी अफसर एक साल में दो-दो दर्जन फ्लैट खरीद रहे हैं। राजस्थान को इस जंगलराज से निकालना बहुत जरूरी है। निकालना चाहिए न। इस जंगल राज से मुक्ति मिलनी चाहिए न। राजस्थान को उसका गौरव फिर से मिलना चाहिए न। इसके लिए कांग्रेस का जाना जरूरी है न। यहां भाजपा सरकार आने के बाद हर भ्रष्टाचारी पर सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। जिन्होंने राजस्थान को लूटा है उन्होंने लौटाना ही पड़ेगा।

साथियों,


आप सब ने मुझे सेवा करने का अवसर दिया है। और आपने मुझे आदेश दिया है। आपके आदेश का मुझे पालन करना है। मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा हूं। क्या मेरा रास्ता सही है। क्या मुझे भ्रष्टाचारियों के खिलाफ लड़ते रहना चाहिए। इस देश से भ्रष्टाचार को नेस्तनाबूद करने के लिए मुझे ताकत लगानी चाहिए। लेकिन मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ काम कर रहा हूं, तो जो जमानत पर घूम रहे हैं न उनका बुखार उतरता नहीं है। ये सारे नेता देखिए, कोई जेल काटकरके जमानत पे हैं, कोई केस चलने पर जमानत पे हैं, ये सारे जमानत पे हैं। और वे सुबह-शाम मोदी-मोदी करते रहते हैं। मैंने सुना, किसी ने कहा था कि राजस्थान में छोटी मछलियों को ही पकड़ा जाता है, बड़ी मछलियों पर कार्रवाई नहीं होती। जरा कान खोलकरके सुन लो, मैं सबको कहना चाहता हूं, छोटी-बड़ी हर मछली पर कार्रवाई होगी। और सिर्फ मछली ही नहीं, जनता को लूटने वाले बड़े मगरमच्छ भी छोड़े नहीं जाएंगे। आपने देखा है, यहां राजस्थान में सिर्फ एक लाल डायरी कांग्रेस के जी का जंजाल बनी हुई है। लाल डायरी में कांग्रेस के काले कारनामे छिपे हुए हैं। भाजपा की सरकार बनने के बाद कांग्रेस के भ्रष्टाचार को बेनकाब करने वाली हर लाल डायरी बाहर आकर के रहने वाली है।

साथियों,


राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने यहां के युवाओं के साथ बहुत बड़ा विश्वासघात किया है। राजस्थान में दर्जन भर से ज्यादा परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। कितनी मेहनत से हमारे युवा परीक्षा की तैयारियां करते हैं। लेकिन कांग्रेस की सरकार को राजस्थान के युवाओं की चिंता नहीं है। वो तो एक ही युवराज के लिए मरे पड़े हैं। भ्रष्टाचार की आदी हो चुकी कांग्रेस अपनी तिजोरी भरने के लिए पेपर लीक माफिया को बढ़ावा दे रही है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं। भाजपा की सरकार छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले माफिया पर कड़ी कार्रवाई करेगी। छात्र-छात्राओं को न्याय दिलाकर रहेगी। भाजपा, राजस्थान में पारदर्शी तरीके से परीक्षा लेने और युवाओं को अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है।

मेरे परिवारजनों,


मेवाड़ के इस क्षेत्र में हमारे जनजातीय समाज के लोग काफी संख्या में रहते हैं। और हम गुजरात वालों को तो उदयपुर ऐसा लगता है जैसे हमारा ही घर है। जनजातीय समाज को मुख्यधारा में लाए बिना देश का विकास नहीं हो सकता। केंद्र की भाजपा सरकार की योजनाओं का बहुत बड़ा लाभ हमारे जनजातीय समाज को, आदिवासी समाज को भी हुआ है। मानगढ़ धाम के सैकड़ों गुमनाम वीरों के साथ इस मेवाड़ी मिट्टी की महक अब दिल्ली में बन रही अमृत वाटिका में भी रच बस गयी हैं। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर हर साल 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस मनाने का निर्णय बीजेपी ने ही किया है। ये दिवस उन करोडों आदिवासी भाई-बहनों के योगदान को समर्पित है जिसे कांग्रेस ने बार बार इतिहास के पन्नों से मिटाने का प्रयास किया। जब केंद्र में कांग्रेस सरकार थी, तो उसने आदिवासियों के कल्याण को कभी प्राथमिकता नहीं दी। जबकि केंद्र की भाजपा सरकार ने आदिवासी कल्याण योजनाओं के लिए करीब-करीब एक लाख करोड़ रुपए खर्च किए हैं। भाजपा सरकार, उनकी छोटी-छोटी आवश्यकताओं का ध्यान रख रही है। पिछले 9 वर्षों में 1 करोड़ 30 लाख आदिवासी घरों में नल से जल पहुंचा है। भाजपा सरकार ने डेढ़ करोड़ आदिवासियों के घर में शौचालय भी बनवाए हैं। करीब एक करोड़ आदिवासी भाई-बहनों को भाजपा सरकार ने आयुष्मान कार्ड भी दिया है। हमारे आदिवासी समाज की बहुत बड़ी ताकत, उनके पास मौजूद पशुधन होता है। उनके पशुधन सुरक्षित रहें इसके लिए भाजपा सरकार 15 हजार करोड़ रुपए खर्च करके पशुओं का टीकाकरण करवा रही है। जैसे कोविड में, कोविड के समय हिंदुस्तान के हर नागरिक को कोविड का वैक्सीन दिया गया। आपको वैक्सीन लगा कि नहीं लगा। एक रुपये भी खर्चा करना पड़ा क्या। जैसे मैंने इंसानों के लिए किया है वैसे ही पशुओं के लिए मुफ्त वैक्सीन के पीछे 15 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं ताकि गरीब आदिवासी पशु को बचा सकें। एक समय था जब सिर्फ 8-10 वन उपज पर ही MSP मिला करता था। भाजपा सरकार में अब करीब-करीब 90 वन-उपज पर MSP मिल रहा है। वनधन विकास केंद्रों के जरिए अब इस वन उपज को नए बाजार भी मिल रहे हैं। जनजातीय समाज के हमारे बेटे-बेटियों को अच्छी शिक्षा मिले इसके लिए हमारी सरकार ने राजस्थान में 30 एकलव्य स्कूल भी खोले हैं।

साथियों,


राजस्थान का चौतरफा विकास ये भाजपा का संकल्प है। लेकिन राजस्थान डबल इंजन की सरकार ना होने का खामियाजा भुगत रहा है। केंद्र की सरकार यहां विकास के लिए जो पैसे भेजती है, वो राजस्थान में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है। राजस्थान की हमारी माताओं-बहनों को पानी की समस्या से जूझना पड़ता है। पूरे देश की तरह राजस्थान में भी जल जीवन मिशन चलाया जा रहा है। लेकिन यहां की कांग्रेस सरकार ने इस योजना में लूटने का रास्ता खोज लिया। यहां कबाड़ के भाव में पाइप खरीदकर जमीन के नीचे बिछा दिया गया। यहां की कांग्रेस सरकार से सहयोग ना मिलने के बावजूद केंद्र सरकार राजस्थान की बहनों-बेटियों को सशक्त करने में जुटी है। राजस्थान के करीब 48 लाख घरों को नल से जल की सुविधा मिली है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में बने लाखों शौचालय महिलाओं की गरिमा की रक्षा कर रहे हैं। राजस्थान में करीब 70 लाख बहनों को उज्जवला एलपीजी कनेक्शन की सुविधा मिली है। इनमें से करीब 30 लाख कनेक्शन सबसे गरीब हमारी SC/ST बहनों को दिए गये हैं। राजस्थान में जनधन खाता हो या मुद्रा लोन, बड़ी संख्या में हमारी माताओं-बहनों को इसका लाभ मिला है। पीएम आवास योजना के तहत यहां राजस्थान में करीब 17 लाख पक्के घर बने हैं। इनमें से भी ज्यादातर घरों का मालिकाना हक हमारी बहनों को ही मिला है। हम जानते हैं हमारे यहां घर होगा तो किसके नाम पर, पति के नाम या पिता के नाम पर। खेत होगा तो पिता के नाम पर या पति के नाम या बेटे के नाम पर। दुकान होगी तो पिता के नाम पर या पति के नाम पर। गाड़ी खरीदेंगे तो पति के नाम या पिता के नाम। ट्रैक्टर लाएंगे तो पति के नाम या पिता के नाम। महिलाओं के नाम कुछ होता ही नहीं है। सही बात है न। लेकिन ये आपका बेटा महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता देता है इसीलिए मैंने तय किया है कि पीएम आवास के मकान मैं महिलाओं के नाम दूंगा ताकि मेरी माताएं-बहनें मालकिन बनें। घर की मालकिन माताएं बहनें बनें, ये काम मैं कर रहा हूं।

साथियों,


केंद्र की भाजपा सरकार की प्राथमिकता गरीब, वंचित और किसान हैं। किसानों को सशक्त बनाने के लिए राजस्थान के करीब 80 लाख किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि से मदद मिल रही है। अब तक यहां 17 हजार करोड़ रुपए सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर हो चुके हैं। गरीबों को भूखे पेट नहीं सोना पड़े, इसके लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना चलाई जा रही है। हमें मालूम है कोविड का समय कैसा था, घर से बाहर निकलना मुश्किल था। एक कमरे में बेटा बीमार हो तो मां भी उस कमरे में जा नहीं सकती थी। मां बीमार हो तो बेटा नहीं जा पाता था। पूरी दुनिया के ऊपर मौत मंडरा रहा था। पता नहीं कौन किसको बीमारी लग जाए और कौन चला जाए, हर कोई तनाव में था। डेढ़-दो साल ऐसे समय गया। बाहर की दुनिया ठप पड़ी थी। बाहर निकलना मुश्किल था। और तब मोदी ने संकल्प किया था। कुछ भी हो जाए, मौत से मुकाबला है, मैं पीछे नहीं हटूंगा। मेरे देशवासियों की रक्षा करने के लिए मुझसे जो हो सकेगा वो करूंगा। और मैंने ये भी तय किया, मुसीबत बहुत बड़ी है। लेकिन मेरी कोशिश रहेगी कि कभी भी गरीब के घर का चूल्हा बुझना नहीं चाहिए। कभी भी गरीब का बेटा भूखे पेट रात गुजारने के लिए मजबूर न हो। कभी भी गरीब मां अपने भूखे संतानों को देखकर रात भर बिलखती न रहे, ये आपका बेटा देख रहा था, आप सो सको, इसीलिए मैं जाग रहा था। और इसीलिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना शुरू की। उस प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना से देश के 80 करोड़ लोगों को आज भी मुफ्त राशन मिल रहा है।

भाइयों-बहनों,


ये पुण्य का काम है कि नहीं है। भूखे को अन्न मिलता है तो आशीर्वाद देता है कि नहीं देता है। ये पुण्य के हकदार कौन है। ये पुण्य किसका है। ये पुण्य किसका है। ये पुण्य किसका है। ये पुण्य मोदी का नहीं है। ये पुण्य आपका है। इस पुण्य के हकदार आप हैं, क्योंकि आपने एक वोट डालकर के मोदी को बिठाया था। और इसीलिए जो भी पुण्य कार्य कर रहा हूं न उसके हकदार आप हैं। अगर आपने वोट देकर मुझे न बिठाया होता तो ये पुण्य का काम न होता, और ये पुण्य का काम न होता तो पुण्य के काम पर किसी का हक भी न होता। ये पुण्य के काम पर हक आपका है। राजस्थान में भी 4 करोड़ से ज्यादा लोगों को ये मुफ्त राशन का लाभ मिला है। साथियों, आप जानते हैं कि ये योजना दिसंबर महीने में पूरी हो रही है। लेकिन ये पुण्य का काम है, पवित्र काम है, मेरा मन करता था इसको बंद नहीं होना चाहिए। गरीब के आशीर्वाद लेते हैं। और इसीलिए, मैंने मनोमन संकल्प कर लिया, मैंने निश्चय कर लिया कि गरीबों को जो ये राशन मिलता है न अब पांच साल और मिलेगा। मैंने इसको पांच साल के लिए मंजूर कर लिया। पांच साल और देंगे, ये हमने निर्णय किया।

साथियों,


आप सभी जानते हैं कि अगले साल लोकसभा के चुनाव के बाद केंद्र में तीसरी बार आप मुझे सेवा का अवसर देने वाले हैं। और मैं आपको गारंटी देता हूं, मेरे तीसरे टर्म में भारत का दुनिया की टॉप तीन अर्थव्यवस्थाओं में आना तय है। भारत के इस तेज विकास का लाभ राजस्थान को भी मिले, इसके लिए राजस्थान में भी भाजपा सरकार होनी जरूरी है। डबल इंजन सरकार, राजस्थान में डबल तेजी से विकास करके दिखाएगी।

साथियों,


समृद्ध राजस्थान के भाजपा, अभी से इस पूरे क्षेत्र को तैयार कर रही है। राजस्थान में केंद्र सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विकास किया जा रहा है। जामनगर अमृतसर एक्सप्रेसवे, दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे हमारे इसी संकल्प का प्रमाण है। वंदे भारत एक्सप्रेस और मेवाड़ के सौंदर्य को दिखने वाली हेरिटेज विस्टाडोम ट्रेन से यहां के पर्यटन को और बढ़ावा मिलने वाला है। कृष्णा सर्किट, हेरिटेज सर्किट, आध्यात्मिक सर्किट के माध्यम से अनेकों तीर्थ स्थलों पर पर्यटन की संभावना कई गुना बढ़ गई है। नाथद्वारा में पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। मेवाड़ और मारवाड़ को जोड़ने वाली मावली रेल गेज के विस्तार और चित्तौड़गढ़-नीमच रेललाइन, कोटा-चित्तौडग़ढ़ रेललाइन के इलेक्ट्रिफिकेशन ने मेवाड़ के लोगों का जीवन आसान किया है। इन सारे कामों की गति और तेज हो जाएगी, जब यहां डबल इंजन की सरकार होगी।

मेरे परिवारजनों,


जब मैं टूरिज्म की बात करता हूं न। आप जरा देखिए, मैं बार-बार कहता हूं, जरा मेरी बात गौर से समझना, मैं बार-बार कहता हूं कि जो भी टूरिस्ट जो भी कहीं पर जाते हैं वे टूरिस्ट अपना जो टूरिस्ट का बजट है, घर निकलने और वापस घर जाने तक उसमें से कुछ हिस्सा, जहां वो गए हैं देखने के लिए, घूमने-फिरने के लिए, कुछ चीजें लोकल वहां से खरीदें, कुछ पैसे वहां खर्च करें। ताकि दूर-सुदूर जो इलाके होते हैं, वहां के लोगों को रोजी-रोटी मिले। ये मैं बार-बार कहता हूं। ये लोगों की भलाई के लिए है कि नहीं। जो उदयपुर आते हैं उनको मैं कहता हूं कि भई उदयपुर जाते हो तो उदयपुर की स्थानीय चीजें खरीदो, ये उदयपुर की भलाई के लिए है कि नहीं है। जरा बोलिए,है कि नहीं है, अगर वो एकनाथ जी जाते हैं तो इसके लिए है कि नहीं है। श्रीनाथ गए तो ये है कि नहीं है। अब एक बात मुझे बताइए, जो बात... इसमें कोई भाजप-वाजप है क्या। क्या ये बात यहां के कांग्रेस के मुख्यमंत्री बोल सकते हैं कि नहीं बोल सकते हैं। क्यों नहीं बोलते भाई। क्या उदयपुर के लोगों का सामान बिक्री हो इसमें कांग्रेस के पेट में क्या दर्द हो रहा है। मैं इन दिनों कह रहा हूं कि भई आपलोग वोकल फॉर लोकल, स्थानीय चीजों को खरीदिए, गरीब से गरीब के पास से खरीदिए। साड़ी चाहिए तो लोकल बनी हुई खरीदिए। आज देश में सब चीजें अच्छी बनती हैं। ये मैं सबको कहता हूं। दिवाली में कोई बाहर की चीज मत लीजिए, हिंदुस्तान की चीज लीजिए। ये मैं बार-बार कह रहा हूं। मुझे बताइए देशवासियों का भला होगा कि नहीं होगा। क्या इसमें मेरा कोई स्वार्थ है। क्या इसमें भाजपा का कोई स्वार्थ है। क्या ये काम भाजपा वाले करते हैं, कांग्रेस वाले नहीं कर सकते हैं क्या। कौन रोकता है उनको। लेकिन उनको देश की भलाई का काम करना ही नहीं है। देश के गरीब चीज बिके उसमें उनको कोई ...रस... नहीं है।

मेरे परिवारजनों,


कांग्रेस के 5 साल के कुशासन से छुटकारा पाने का अवसर अब राजस्थान के सामने है। राजस्थान को ऐसी भाजपा चाहिए, जो राजस्थान की पगड़ी का मान रखे। राजस्थान की पगड़ी को लात मारकर गिराने वाली कांग्रेस को अब हमें हटाकर ही रहना है। और उसने एक पगड़ी को लात नहीं मारी, पूरे राजस्थान की पगड़ी को उछाला है भाइयों-बहनों। ये राजस्थान का अपमान हुआ है। आपकी एकजुटता ने हमेशा इतिहास की धारा बदली है। एक बार फिर आपको परिवर्तन के लिए एकजुट होना है। 25 नवम्बर को आप परिवर्तन के संकल्प के साथ ज्यादा से ज्यादा संख्या में घर से निकलें और कमल का बटन दबाएं। घर-घर जाएंगे, लोगों को जगाएंगे। कमल की बात बताएंगे। भाजपा को वोट दिलवाएंगे। जरा जोर से बोलिए, भाजपा की सरकार बनाएंगे। हर पोलिंग बूथ में भाजपा सरकार बनाएंगे। हर पोलिंग बूथ को जीतेंगे। पक्का जीतेंगे, घर-घर जाएंगे न। अच्छा ये तो बात हो गई चुनाव की राजनीति की। अब मेरा एक निजी काम है। करोगे, मेरा पर्सनल काम है, चुनाव वाला काम नहीं है। करोगे, जरा पीछे वाले बताओ, करोगे, वो जो दूर-दूर खड़े हैं, बताओ करोगे। अच्छा इधर वाले करेंगे, पक्का करेंगे। अच्छा एक काम करना है, घर-घर जाकरके, घर के सभी लोगों को प्रणाम करते हुए कहना कि हमारे मोदी जी उदयपुर आए थे, और उन्होंने आपको प्रणाम भेजा है। इतना मेरा काम कर दोगे। पक्का कर दोगे। आप मेरा प्रणाम उनको पहुंचाओगे न तो वो मन से मुझे आशीर्वाद देंगे। दिल से मुझ आशीर्वाद देंगे। और जब वो मुझे आशीर्वाद देते हैं तो वो आशीर्वाद मेरे लिए जड़ी-बूटी बन जाता है। मेरे में एक नई ऊर्जा भर देता है। मेरे में एक विश्वास भर देता है। देश के लिए मरने-मिटने वाले लोगों के लिए दौड़ने की मुझे ताकत दे देता है। और इसीलिए भाइयों-बहनों मुझे हर परिवार से आशीर्वाद चाहिए। मेरा प्रणाम पहुंचा दोगे न। इतना छोटा मेरा काम है। क्योंकि मेरे लिए हर देशवासी का आशीर्वाद बहुत जरूरी है। और इसीलिए एक काम जरूर कीजिए। हर घर जाकरके मेरा प्रणाम जरूर पहुंचाइएगा। मेरा एक और काम करना है। आप जरा अपना मोबाइल फोन बाहर निकालिए, उसके फ्लैश लाइट चालू कीजिए। और फ्लैशलाइट के बाद जो मैं बोलूंगा वो आपको बोलते रहना है। उसके बाद जब मैं बोलूंगा तो आपको बोलना होगा कि कमल चुनेगा राजस्थान। क्या बोलना है...क्या बोलना है...क्या बोलना है...। आपके मोबाइल का फ्लैशलाइट चालू रखकर बोलना है। मैं बोलता हूं उसके बाद आपको बोलना है कमल चुनेगा राजस्थान।

महाराणा प्रताप का स्वाभिमान... कमल चुनेगा राजस्थान


सूरजमल का शौर्य महान... कमल चुनेगा राजस्थान


होगा बहन-बेटियों का सम्मान... कमल चुनेगा राजस्थान


भ्रष्टाचार का मिटेगा निशान... कमल चुनेगा राजस्थान


खुशहाल बनेंगे गांव-किसान... कमल चुनेगा राजस्थान

आप सबका बहुत-बहुत आभार।


बोलिए भारत माता की...बोलिए भारत माता की...बोलिए भारत माता की...


बहुत-बहुत धन्यवाद।

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Text of PM’s address at the News18 Rising Bharat Summit
February 27, 2026
Developed nations are eager to sign trade deals with India because a confident India is rising beyond doubt and despair: PM
In the last 11 years, a new energy has flowed into the nation's consciousness, India is determined to regain its rightful strength: PM
India's Digital Public Infrastructure has today become a subject of global discussion: PM
Today, every move India makes is closely watched and analysed across the world, the AI Summit is a clear example of this: PM
Nation-building never happens through short-term thinking; It is shaped by a long-term vision, patience and timely decisions: PM

इजराइल की हवा यहाँ भी पहुँच गई है।

नमस्कार!

नेटवर्क 18 के सभी पत्रकार, इस व्यवस्था को देखने वाले सभी साथी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी राइजिंग भारत की चर्चा कर रहे हैं। और इसमें strength within पर आपका जोर है, यानी साधारण शब्दों में कहूं, तो देश के अपने खुद के सामर्थ्य पर आपका फोकस है। और हमारे यहां तो शास्त्रों में कहा गया है - तत् त्वम असि! यानी जिस ब्रह्म की खोज मे हम निकले हैं, वो हम ही हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो सामर्थ्य हमारे भीतर है उसे हमें पहचानना है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपना वही सामर्थ्य पहचाना है, और इस सामर्थ्य को सशक्त करने के लिए आज देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

साथियों,

सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता, सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वो ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है, लेकिन इतिहास के एक लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों में, हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को ही हीनता से भर दिया गया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर ये भर दिया था, कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी यानी, फॉलोअर हैं, हमारे यहां ये भी कहा गया है – यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी। यानी जैसी जिसकी भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती है। जब भावना में ही हीनता थी, तो सिद्धि भी वैसी ही मिल रही है। हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे, विदेशी मुहर का इंतजार करते थे, ये वो गुलामी थी जो राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी, भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया। और इसका नुकसान हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण, हम ट्रेड डील्स में हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि अरे ये क्या हो गया, कैसे हो गया, विकसित देश भारत से ट्रेड डील्स करने में इतने उत्सुक क्यों हैं। इसका उत्तर है हताशा, निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत। अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा होता, अगर ये हाल होते तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील्स करता, अरे हमारी तरफ देखता भी नहीं।

लेकिन साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोये हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। एक समय में जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा दबदबा था, तो हमारा क्या सामर्थ्य था? भारत की मैन्युफैक्चरिंग, भारत के प्रोडक्टस की क्वालिटी, भारत की अर्थ नीति, अब आज का भारत फिर से इन बातों पर फोकस कर रहा है। इसलिए हमने मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया, हमने मेक इन इंडिया पर बल दिया, हमने अपनी बैंकिंग सिस्टम को सशक्त किया, महंगाई जो डबल डिजिट की दर से भाग रही थी, उसका कंट्रोल किया और भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन बनाया। भारत का यही सामर्थ्य है कि दुनिया के विकसित देश सामने से भारत के साथ ट्रेड डील करने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

साथियों,

जब किसी राष्ट्र के भीतर, छिपी हुई उसकी शक्ति जागती है, तो वह नई उपलब्धियां हासिल करता है। मैं आपको कुछ और उदाहरण देता हूं। जैसे मैं जब कभी दूसरी देशों के हेड ऑफ द गर्वमेंट से मिलता हूं, तो वो जनधन, आधार और मोबाइल की इतनी शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं। जिस भारत में एटीएम भी, दुनिया की विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली? जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था, वो भारत डीबीटी के जरिये 24 लाख करोड़ रूपये, यानी Twenty four trillion रुपीज कैसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है? भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है।

साथियों,

दुनिया हैरान होती है, कि जिस भारत में 2014 तक, करीब तीन करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वो आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गया? जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद ना थी, वो भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया? जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट-लतीफी और धीमी-रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत, नमो भारत, ऐसी सेमी-हाईस्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है?

साथियों,

एक समय था, जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था। आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है। और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचाना है, जिस Strength Within की आप चर्चा कर रहे हैं, ये उसका ही उदाहरण है।

साथियों,

जब हम गर्व से आगे बढ़ते हैं, तो दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है, वो नजर भी बदली है। आप याद कीजिए, कुछ साल पहले तक दुनिया में, ग्लोबल मीडिया में, भारत के किसी इवेंट की कितनी कम चर्चा होती थी। भारत में होने वाले इवेंट्स को उतनी तवज्जो ही नहीं दी जाती थी। और आज देखिए, भारत जो करता है, जो एक्शन यहां होते हैं, उसका वैश्विक विश्लेषण होता है। AI समिट का उदाहरण आपके सामने है, इसी भवन में हुआ है। AI समिट में 100 से ज्यादा देश शामिल हुए, ग्लोबल नॉर्थ हो या फिर ग्लोबल साउथ, सभी एक साथ, एक ही जगह, एक टेबल पर बैठे। दुनिया के बड़े-बड़े कॉर्पोरेशन्स हों या फिर छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स, सभी एक साथ जुटे।

साथियों,

अब तक जितनी भी औद्योगिक क्रांतियां आई हैं, उनमें भारत और पूरा ग्लोबल साउथ सिर्फ फॉलोअर रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस युग में, भारत निर्णयों में सहभागी भी है और उन्हें शेप भी कर रहा है। आज हमारे पास खुद का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम है, डेटा-सेंटर में निवेश करने की ताकत है और AI डेटा को स्टोर करने के लिए, प्रोसेस करने के लिए, जिस पावर की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उस पर भी भारत तेजी से काम कर रहा है। हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में जो Reform किया है, वो भी भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूती देने में मदद करेगा।

साथियों,

AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था। लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने, देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे, बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालिएपन को भी expose कर दिया है। जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। ज़ाहिर है, कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है। इसलिए, इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छुपाना हो तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, और जब अपना गौरवगान करना हो, तो एक ही परिवार को सारा क्रेडिट देती है।

साथियों,

कांग्रेस अब विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की टूलकिट बनकर रह गई है। और ये अंध-विरोध की मानसिकता इतनी बढ़ गई है, कि ये देश को हर मंच, हर प्लेटफॉर्म पर नीचा दिखाने से नहीं चूकते। देश कुछ भी अच्छा करे, देश के लिए कुछ भी शुभ हो रहा हो, कांग्रेस को विरोध ही करना है।

साथियों,

मेरे पास एक लंबी सूची है, देश की संसद की नई इमारत बनी, उसका विरोध। संसद के ऊपर अशोक स्तंभ के शेरों का विरोध। अब जिनके बब्बर शेर सामान्य नागरिकों के जूते खाकर के भाग रहे थे, उनके संसद भवन के शेर के दांत देखकर के डर लग गया उनको। कर्तव्य भवन बना, उसका भी विरोध। सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की, उसका भी विरोध। बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, उसका भी विरोध। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, उसका भी विरोध। यानी देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस के टूलकिट से एक ही चीज निकलती है- विरोध।

साथियों,

देश ने आर्टिकल 370 की दीवार गिराई, देश खुश हुआ। लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया। हमने CAA का कानून बनाया- उसका विरोध। हम महिला आरक्षण कानून लाए- उसका विरोध। तीन तलाक के विरुद्ध कानून लाए- उसका विरोध। हम UPI लेकर आए, उसका विरोध। स्वच्छ भारत अभियान लेकर आए, उसका विरोध। देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई, तो उसका भी विरोध।

साथियों,

लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध-विरोध नहीं होता, डेमोक्रेसी में विपक्ष का मतलब वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता, कांग्रेस को सबक सिखा रही है, आज से नहीं, बीते चार दशकों से लगातार ये काम देश की जनता कर रही है। मैं जो कहने जा रहा हूं, मीडिया के साथी उसका भी ज़रा एनालिसिस करिएगा। आपको पता लगेगा कि कांग्रेस के वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि देश के लोग अब कांग्रेस को वोट देने लायक ही नहीं मानते। और इसकी शुरुआत 1984 के बाद ही होनी शुरू हो गई थी। 1984 में कांग्रेस को 39 परसेंट वोट मिले थे, और 400 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस के वोट कम ही होते चले गए। और आज कांग्रेस की हालत ये है कि, देश में सिर्फ, सिर्फ चार राज्य ऐसे बचे हैं, जहां कांग्रेस के पास 50 से ज्यादा विधायक हैं। बीते 40 वर्षों में युवा वोटर्स की संख्या बढ़ती गई और कांग्रेस साफ होती गई। कांग्रेस, परिवार की गुलामी में डूबे लोगों का एक क्लब बनकर रह गई है। इसलिए पहले मिलेनियल्स ने कांग्रेस को सबक सिखाया, और अब जेन जी भी तैयार बैठी है।

साथियों,

कांग्रेस और उसके साथियों की सोच इतनी छोटी है, कि उन्होंने दूरदृष्टि से काम करने को भी गुनाह बना दिया है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं— “इतनी दूर की बात अभी क्यों कर रहे हो?” कुछ लोग ये भी कहते हैं कि तब तक मोदी जिंदा थोड़ी रहेगा, सच्चाई यह है कि राष्ट्र निर्माण कभी भी तात्कालिक सोच से नहीं होता। वो एक बड़े विजन, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से होता है। मैं कुछ और तथ्य नेटवर्क 18 के दर्शकों के सामने रखना चाहता हूं। भारत हर साल विदेशी समुद्री जहाजों से मालढुलाई पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है किराए पर। फर्टिलाइजर के आयात पर हर साल सवा दो लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम आयात पर हर साल 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे हैं। अगर यही निवेश 20–25 वर्ष पहले आत्मनिर्भरता की दिशा में किया गया होता, तो आज ये पूंजी भारत के इंफ्रास्ट्रचर, रिसर्च, इंडस्ट्री, किसान और युवाओं की क्षमताओं को मजबूत कर रही होती। आज हमारी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। विदेशी जहाजों को 6 लाख करोड़ रुपए ना देना पड़े इसलिए भारतीय शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। फर्टिलाइजर का domestic प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नए प्लांट लग रहे हैं, नैनो-यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।

और साथियों,

हमें भविष्य की ओर देखते हुए भी आज ही निर्णय लेने हैं। इसलिए आज भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। रक्षा उत्पादन में, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में, ड्रोन टेक्नोलॉजी में, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में, और उसमें निवेश, आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा की नींव है। 2047 का लक्ष्य कोई राजनीतिक नारा नहीं है। यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का संकल्प भी है, जहाँ कांग्रेस की सरकारों के समय कई क्षेत्रों में समय रहते निवेश नहीं किया। आज अगर हम ख़ुद स्वदेशी जहाज, स्वदेशी शिप्स बनाएँगे, ख़ुद एनर्जी का प्रोडक्शन करेंगे, ख़ुद नई टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे, तो आने वाली पढ़ियाँ इम्पोर्ट के बोझ की नहीं, एक्सपोर्ट की क्षमता पर चर्चा करेंगी। राष्ट्र की प्रगति “आज की सुविधा” से नहीं, “कल की तैयारी” से तय होती है। और दूरदृष्टि से की गई मेहनत ही 2047 के आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत की आधारशिला है। और इसके लिए कांग्रेस अपने कितने ही कपड़े फाड़ ले, हम निरंतर काम करते रहेंगे।

साथियों,

राष्ट्र निर्माण की, Nation Building की एक बहुत अहम शर्त होती है- नेक नीयत की। कांग्रेस और उसके साथी दल, इसमें भी फेल रहे हैं। कांग्रेस और उसके साथियों ने कभी नेक नीयत के साथ काम नहीं किया। गरीब का दुख, उसकी तकलीफ से भी इन्हें कोई वास्ता नहीं है। जैसे बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई। अगर नेक नीयत होती तो क्या गरीबों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका जाता क्या? नहीं। आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं। नेटवर्क 18 के दर्शकों को मैं एक और आंकड़ा देता हूं। तमिलनाडु के गरीब परिवारों के लिए, करीब साढ़े नौ लाख पक्के घर एलोकेट किए गए हैं, साढ़े नौ लाख। लेकिन इनमें से तीन लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्यों, क्योंकि DMK सरकार गरीबों के इन घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह है, नीयत नेक नहीं है।

साथियों,

मैं आपको एग्रीकल्चर सेक्टर का भी उदाहरण देता हूं। कांग्रेस के समय में खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। छोटे किसानों को कोई पूछता नहीं था, फसल बीमा का हाल बेहाल था, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई थी, कांग्रेस बजट में घोषणाएं जरूर करती थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था, क्योंकि उसकी नीयत ही नहीं थी। हमने देश के किसानों के लिए नेक नीयत के साथ काम करना शुरू किया, और आज उसके परिणाम दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर एक्सपोर्टर्स में से एक बन रहा है। हमने हर स्तर पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खाते में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक जमा किए गए हैं। हमने लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया और रिकॉर्ड खरीद भी की है। मैं आपको सिर्फ दाल का ही आंकड़ा देता हूं। UPA सरकार ने 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दाल, किसानों से MSP पर खरीदी- 6 लाख मीट्रिक टन। और हमारी सरकार अभी तक, करीब 170 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 30 गुणा अधिक दाल MSP पर खरीद चुकी है। अब आप तय करिये, कौन किसानों के लिए काम करता है।

साथियों,

यूपीए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किसानों को मदद देने में कंजूसी करती थी। अपने 10 साल में यूपीए सरकार ने सात लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण किसानों को दिया। 7 lakh crore rupees. जबकि हमारी सरकार इससे चार गुणा अधिक यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है। यूपीए सरकार के दौरान जहां सिर्फ पांच करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलता था, आज ये संख्या दोगुने से भी अधिक करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को पहुंची है। यानी देश के छोटे किसान को भी पहली बार मदद मिली है। हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी किसानों को दिया। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं। हम नेक नीयत से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, और आय में भी वृद्धि हो रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अब अगला चरण भारत के विकास का निर्णायक दौर है। वर्तमान में लिए गए निर्णय ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। हमें अपने सामर्थ्य को पहचानते हुए, उसे बढ़ाते हुए आगे चलना है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता को लक्ष्य बनाए, हर संस्था excellence को अपना संस्कार बनाए, हम सिर्फ उत्पाद न बनाएं, best-quality product बनाएं, हम सिर्फ रुटीन काम न करें, world-class काम करें, हम क्षमता को performance में बदलें। मैंने लाल किले से कहा है- यही समय है, सही समय है। यही समय है, भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।