राज्य के लोगों के जीवन में बदलाव लाने के लिए जम्मू, कश्मीर और लद्दाख का संतुलित विकास काफी महत्त्वपूर्ण: पीएम मोदी
जम्मू-कश्मीर में पर्यटन क्षेत्र की अत्यधिक संभावना, हम राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं: प्रधानमंत्री
जम्मू-कश्मीर के युवा देश भर के युवाओं के लिए रोल मॉडल बन रहे हैं: प्रधानमंत्री मोदी
‘न्यू इंडिया’ की इस यात्रा में एक ‘न्यू जम्मू-कश्मीर’ का उज्ज्वल स्थान हो सकता है: पीएम मोदी
शांति और स्थिरता का कोई विकल्प नहीं है, मैं जम्मू-कश्मीर के युवाओं से राज्य के कल्याण और विकास में योगदान देने का आग्रह करता हूं: प्रधानमंत्री
ना गाली से, ना गोली से, समस्य सुलझेगी हर कश्मीरी को गले लगाने से: प्रधानमंत्री मोदी
सभी समस्याओं का समाधान विकास है: पीएम मोदी

मंच पर उपस्थित जम्‍मू-कश्‍मीर के राज्‍यपाल श्रीमान एन.एन.वोहरा जी, मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती जी, मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्रीमान नितिन गडकरी जी, डॉक्‍टर जितेन्‍द्र सिंह जी, आर.के. सिहं जी, जम्‍मू-कश्‍मीर के उप-मुख्‍यमंत्री श्रीमान कवींद्र गुप्‍ता जी, राज्‍य के ऊर्जा मंत्री श्री सुनील कुमार शर्मा जी, विधान सभा के डिप्‍टी स्‍पीकर श्री नजीर अहमद खान जी, सांसद और देश के वरिष्‍ठ नेता, आदरणीय डॉक्‍टर फारूख अब्‍दुल्‍ला जी, सांसद श्रीमान मुज्जफर हुसैन बैग जी, और यहां उपस्थित सभी अन्‍य महानुभाव और जम्‍मू-कश्‍मीर के मेरे प्‍यारे भाइयो और बहनों।

एक बार फिर जम्‍मू-कश्‍मीर में आप सभी के बीच आने का अवसर मुझे मिला है। आपका अपनापन, अपना स्‍नेह ही जो मुझे बार-बार खींचकर यहां लाता है। बीते चार वर्ष में ऐसा कोई साल नहीं रहा जब मेरा यहां आना नहीं हुआ है। जब श्रीनगर में बाढ़ के बाद भी दिवाली थी, मैं यहां पीड़ि़तों के बीच ही अपनी दिवाली मनाई थी। इसके अलावा सीमा पर तैनात जवानों के साथ दिवाली मनाने का मुझे अवसर मिला और आज जब रमजान का पवित्र महीना चल रहा है तब भी मैं आपके बीच में हूं। ये महीना पैगम्‍बर मोहम्‍मद साहब की शिक्षा और उनके संदेश को याद करने का अवसर है। उनके जीवन से समानता और भाईचारे की सीख ही सही मायने में देश और दुनिया को आगे ले जा सकती है।

ये भी सुखद संयोग है कि रमजान के इस मुबारक महीने में हम यहां एक बहुत बड़े सपने को पूरा होने पर इक्‍ट्ठा हुए थे। आज मुझे Kishanganga Hydro Electric Project को देश को समर्पित करने का सौभाग्‍य मिला है। कई मुश्किलों से पार पाने के बाद ये प्रोजेक्‍ट जम्‍मू-कश्‍मीर की विकास यात्रा में नए आयाम जोड़ने के लिए तैयार है। अस अवसर पर मैं आप सभी को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। इससे राज्‍य को सिर्फ मुफ्त ही नहीं, बल्कि पर्याप्‍त बिजली भी मिलेगी। अभी जम्‍मू-कश्‍मीर को जितनी बिजली की आवश्‍यकता होती है उसका एक बड़ा हिस्‍सा देश के दूसरे हिस्‍से से पूरा किया जाता है। 330 मेगावाट की इस परियोजना के शुरू होने से बिजली की कमी की समस्‍या को बहुत हद तक कम किया जा सकेगा।

भाइयो और बहनों, ये प्रोजेक्‍ट इंजीनियरिंग की बेजोड़ मिसाल है। इसे पूरा करने के लिए अनेक लोगों ने तपस्‍या की है। पहाड़ के सीने को चीर करके किशनगंगा के पानी को tunnel के जरिए बांदीपोरा के बोनार नाले में पहुंचाया गया। इस परियोजना से जुड़े हर कामगार, हर कर्मचारी, हर इंजीनियर सब को ही विशेष बधाई के पात्र हैं। आपके ही हौसले का परिणाम है कि इस मुश्किल प्रोजेक्‍ट को हम पूरा कर पाए हैं।

अभी यहां इस मंच से मुझे श्रीनगर रोड के, रिंग रोड के शिलान्‍यास का भी अवसर मिला है। Forty two किलोमीटर की इस सड़क पर five hundred करोड़ रुपये से ज्‍यादा खर्च किया जाएगा। ये रिंग रोड श्रीनगर शहर के भीतरी इलाकों में जो जाम की समस्‍या है उसको काफी हद तक कम करने का कार्य करेगी, आपकी जिंदगी आसान बनाएगी।

साथ में जम्‍मू-कश्‍मीर के लोगों के जीवन में बदलाव लाने के लिए राज्‍य के तीनों हिस्‍सों कश्‍मीर, जम्‍मू और लद्दाख का संतुलित विकास बहुत ही आवश्‍यक है। इसी को ध्‍यान में रखते हुए ढाई साल पहले 80 हजार करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान किया गया था। मुझे खुशी है इतने कम समय में लगभग sixty three thousand करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को स्‍वीकृति दी जा चुकी है और 20 हजार करोड़ रुपये से ज्‍यादा खर्च भी हो चुके हैं। इस राशि से जम्‍मू-कश्‍मीर में IIT बनाने का काम, IIM बनाने का काम, दो AIIMS बनाने का काम, प्राथमिक चिकित्‍सालयों से लेकर जिला अस्‍पतालों के आधुनिकीकरण का काम भी चल रहा है।

नए नेशनल हाइवे, ऑलवेदर रोड, नई सुरंगें, पॉवर ट्रांसमीशन और distribution line, नदियों और झीलों का संरक्षण, किसानों के लिए योजनाएं, cold storage, वेयरहाउसिंग, नौजवानों के लिए रोजगार के नए अवसर ये अनेक नए initiative लिए जा रहे हैं। 21वीं सदी का जम्‍मू-कश्‍मीर यहां के लोगों की आशाओं, आकांक्षाओं के अनुरूप हो, इस पर प्राथमिकता से काम किया जा रहा है।

साथियों, जब भी मैं पहाड़ पर जाता हूं एक कहावत जरूर याद आती है। पहले कहा जाता था की पहाड़ की जवानी और पहाड़ का पानी कभी पहाड़ के काम नहीं आता है। ये कहावत तब की है जब आधुनिक तकनीक का उतना प्रसार नहीं हुआ था, इंसान प्रकृति के सामने मजबूर था। लेकिन अब वक्‍त बदल चुका है। इस कहावत को आप सभी के सहयोग से हम बदलने में जुटे हैं। जम्‍मू-कश्‍मीर का पानी और यहां की जवानी, दोनों इस धरती के काम आने वाले हैं।

जम्‍मू-कश्‍मीर में कई नदियां हैं जहां जल-विद्युत की अपार संभावनाएं हैं। ये देश का वो हिस्‍सा हैं जो न सिर्फ अपनी जरूरतों को बल्कि देश के लिए भी बिजली पैदा करने का सामर्थ्‍य रखता है। इसी को ध्‍यान में रखते हुए बीते चार वर्षों से हम यहां अनेक परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। किश्‍तवाड़ में 8000 करोड़ रुपये से ज्‍यादा की लागत से बनने वाले hydro power plant पर भी काम जल्‍द ही शुरू हो जाएगा।

जम्मू-कश्मीर के हर घर तक बेरोकटोक बिजली पहुंचाने के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। Smart Grid और Smart meter जैसी Advanced Technology का इस्तेमाल किया जा रहा है। Street Lights का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर के गांव से लेकर कस्बों तक को रोशन करने के लिए, राज्य के बिजली Distribution System को सुधारने के लिए लगभग 4 हज़ार करोड़ रुपए का निवेश किया जा रहा है।

साथियों, सिर्फ गांव और घरों तक बिजली पहुंचाना भर ही मकसद नहीं है। बल्कि जिन घरों में बिजली पहुंच चुकी है उनमें बिजली का बिल बोझ ना बने इसके लिए भी प्रयास हो रहे हैं। उजाला योजना के तहत जम्मू-कश्मीर में भी 78 लाख से अधिक LED बल्ब बांटे जा चुके हैं। इससे यहां की जनता को जो बिजली में बिल में हर वर्ष करीब-करीब 400 करोड़ रुपए से ज्यादा की बचत हो रही है। सरकार राज्य के हर घर तक बिजली पहुंचाने की मुहिम में जुटी हुई है। सौभाग्य योजना के तहत अब जम्मू-कश्मीर के हर उस घर में मुफ्त बिजली कनेक्शन देने का काम चल रहा है, जहां अब तक बिजली नहीं पहुंची है।

साथियों जम्मू-कश्मीर में विकास का सबसे बड़ा माध्यम अगर कोई सेक्टर है, तो वो है टूरिज्म, ये दशकों से हम देखते आ रहे हैं। कम निवेश पर सबसे ज्यादा रोजगार पैदा करने वाला ये सेक्टर जम्मू-कश्मीर के भाग्‍य का भाग्य विधाता रहा है। लेकिन अब ये सेक्टर पुराने तौर-तरीकों पर नहीं चलता। आज का टूरिस्ट, आज की सुविधाएं चाहता है। वो एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए घंटों तक इंतजार नहीं करना चाहता, वो संकरे रास्तों में फंसना नहीं चाहता, वो लगातार बिजली चाहता है, वो साफ-सफाई चाहता है, वो अच्छी हवाई सेवा चाहता है।

टूरिज्म के लिए जिस आधुनिक इकोसिस्टम की आवश्यकता होती है, उसे ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार अनेक योजनाओं पर आगे बढ़ रही है। जितना ये इकोसिस्टम मजबूत होगा, उतना ही जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, इतना ही नहीं, जम्मू-कश्मीर के नौजवानों को रोजगार के लिए नए अवसर भी मिलेंगे, उतना ही आपकी कमाई बढ़ेगी।

साथियों, पूरे विश्व में अनेक क्षेत्र ऐसे हैं, जहां की पूरी अर्थव्यवस्था टूरिज्म पर केंद्रित है, पूरे देश की अर्थव्‍यवस्‍था। अकेले जम्मू-कश्मीर में वो क्षमता है कि वो भारत की अर्थव्यवस्था की गति और बढ़ा सकने का सामर्थ्‍य रखता है। अगर मैं सिर्फ टूरिज्‍म की बात करूं तो लगभग 2 हजार करोड़ रुपए के निवेश से 12 डेवलपमेंट अथॉरिटीज, 3 टूरिज्म सर्किट, 50 टूरिस्ट विलेज बनाने का काम किया जाएगा। लेकिन जैसे मैंने पहले कहा, टूरिज्म, के साथ ही उसके पूरे इकोसिस्टम को मजबूत किया जाना बहुत आवश्यक है।

इस इकोसिस्टम का बहुत बड़ा आधार है कनेक्टिविटी। यही कारण है कि कनेक्टिविटी के लिए जम्मू-कश्मीर में बहुत बड़े स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य को दिए गए पैकेज का लगभग आधा हिस्सा रोड सेक्टर पर ही खर्च किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर में नेशनल हाईवे का जाल बिछाया जा रहा है।

यहां आने से पहले, मैंने देश की सबसे लंबी जोजिला सुरंग के कार्य का शुभारंभ कियाहै। ये टनल जम्मू-कश्मीर में विकास की नई गाथा लिखने वाली है। आप सोचिए, कनेक्टिविटी बढ़ेगी तो अक्सर, पढ़ाई के लिए जाते हुए, रिश्तेदारों से मिलने जाने के लिए, इलाज के लिए जाते हुए, व्यापार के लिए आते-जाते समय, सामान की खरीद-बिक्री के समय, आपको परेशान कम होना पड़ेगा। रास्ते में देरी के चलते जो हमारे सेब खराब हो जाते हैं, हमारी वेजिटेबल्‍स खराब हो जाती हैं, यहां के किसानों का जो नुकसान होताहै, वो भी हम बहुत बड़ी मात्रा में कम कर सकेंगे।

यहां श्रीनगर में बनने वाली रिंग रोड हो, श्रीनगर-शोपियां-काज़ीगुंड नेशनल हाईवे हो या फिर चेनानी-सुधमहादेव-गोहा रोड हो, इनके पूरा होने पर आप लोगों का समय भी बचेगा और संसाधनों की बर्बादी भी कम होगी। राज्य के ऐसे इलाके जो बर्फबारी में महीनों के लिए कट जाते हैं, उन्हें भी जोड़ा जा रहा है, उनके लिए हेलीकॉप्टर सर्विस मुहैया कराई जा रही है। ये भी आपकी जानकारी में है कि सरकार द्वारा श्रीनगर और जम्मू को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए भी काम प्रगति पर है।

शहरों में पानी की सप्लाई और सीवेज की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए अमृत योजना के तहत लगभग साढ़े 5 सौ करोड़ व्यय किए जा रहे हैं।जब आधुनिक सुविधाएं होंगी, आधुनिक सड़कें होंगी, तो आपकी जिंदगी तो आसान बनेगी ही, जम्मू-कश्मीर में, उसकी सुदंरता में भी और नए चार चांद लगने वाले हैं।

भाइयों और बहनों, जब हम गांव और शहरों को Smart बनाने की बात करते हैं तो स्वच्छता इसका एक अहम हिस्सा है। मुझे खुशी है कि जम्मू-कश्मीर की जनता भी इस अभियान को पूरी शक्ति से आगे बढ़ा रही है।

हाल में यहां की एक बिटिया का वीडियो मैंने सोशल मीडिया में देखा था। पांच साल की ‘जन्नत’ डल लेक को साफ करने के लिए मिशन में जुटी है। जब देश का भविष्य इतना पवित्र और स्वच्छ सोचता है, तब मुझे इस अभियान का एक सदस्य होने के नाते और भी खुशी होती है। साथियों, ऐसे अनेक लोग हैं जो अपने स्तर पर इस प्रकार के काम कर रहे हैं।

भाइयों और बहनों, मुझे इस बात का एहसास है कि भीषण बाढ़ ने यहां जो तबाही फैलाई उसने आपके जीवन को बदलकर रख दिया है। हमारा ये हर संभव प्रयास है कि जहां-जहां नुकसान हुआ है उसकी भरपाई हो।और इसके लिए राज्य सरकार की निरंतर मदद की जा रही है।

साथियों, एक और बहुत गंभीर विषय है जिस पर पीडीपी-बीजेपी गठबंधन सरकार और केंद्र सरकार मिलकर कार्य कर रही हें। ये विषय है विस्‍थापितों का। जो लोग सीमा पार के हालात से तंग होकर यहां आए हैं, जिन्‍हें स्‍थानीय समस्‍याओं की वजह से घर छोड़ना पड़ा है, अलग-अलग जगहों पर उनके पुनर्वास के लिए करीब-करीब साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं।

साथियों, आज जम्मू-कश्मीर के अनेक युवा, देश के दूसरे राज्यों के नौजवानों के लिए रोल मॉडल बन रहे हैं। सिविल सेवा में जब यहां के नौजवानों का नाम देखता हूं, उनसे मुलाकात करता हूं, तो मेरी खुशी दोगुना हो जातीहै।मुझे याद है देश का सीना तब गर्व से चौड़ा हो गया था, जब यहां बांदीपोरा की बिटिया ने किक बॉक्सिंग में भारत का नाम रोशन किया। तजामुल जैसे Talent को देश बेकार नहीं जाने दे सकता। यही कारण है कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर के Sporting Talent को निखारने के लिए राज्य सरकार के साथ मिल करके प्रयास कर रही है। इसी भावना के तहत यहां Sports Infrastructure विकसित करने का भी पूरा प्रयास किया जा रहा है।

भाइयों और बहनों,जम्मू-कश्मीर के नौजवानों को शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने को लेकर गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार के साथ मिलकर कई नई योजनाओं को साकार किया गया है। हिमायत स्कीम के तहत यहां के एक लाख नौजवानों को ट्रेंड करने की योजना पर काम चल रहा है। 16 हजार से ज्यादा बच्चों को प्रधानमंत्री स्पेशल स्कॉलरशिप स्कीम का लाभ मिला है। उन्हें देश के बेहतरीन कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा का अवसर दिया गयाहै। अलग-अलग वजहों से कॉलेज और स्कूल बीच में छोड़ने वाले लगभग 60 हजार विद्यार्थियों को नौकरियों का प्रस्ताव दिया गया है।

यहां के नौजवान देश और प्रदेश के नागरिकों की सुरक्षा में काम आ सके, इसके लिए भी नए अवसर पैदा किए जा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस को सशक्त करने के लिए 5 Indian Reserve Battalion स्वीकृत की गई है। मुझे बताया गया है कि भर्ती की प्रक्रिया आखिरी चरण में है, जिसके बाद यहां के 5 हजार युवाओं को सुरक्षा के क्षेत्र में रोजगार मिलगा।

भाइयों और बहनों, हमारी सरकार के लिए नागरिकों और राष्ट्र की सुरक्षा, ये सबसे बड़ी प्राथमिकताहै। इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए हमारे सुरक्षा बल लगातार डटे हुए हैं, यहां जम्मू-कश्मीर की पुलिस हो, Paramilitary Forces और सेना के जवान हों, आप सभी से मैं कहना चाहता हूं कि मुश्किल हालात में भी आप शानदार काम कर रहे हैं। आपके बीच जो मेल-जोल है, कॉर्डिनेशन है, उसके लिए ये सभी बहुत-बहुत बधाई के पात्रहैं। चाहे बाढ़ हो या फिर, बर्फीले तूफान हों या फिर आग जैसी आपदाएं हों, मुश्किल में फंसे हर जम्मू-कश्मीर वासी के लिए सुरक्षाबलों का योगदान अतुलनीय है। यहां की जनता के लिए वे जो कुछ भी कर रहे हैं, जो भी कष्ट झेल रहे हैं उसकी एक-एक तस्वीर देश की जनता के दिलो-दिमाग में छाई हुई है।

भाइयों और बहनों देश के सवा सौ करोड़ लोग आज New India के संकल्प पर काम कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर इस New India का सबसे चमकता सितारा बन सकता है। कोई वजह नहीं कि जम्मू-कश्मीर में देश के सबसे अच्छे शिक्षा संस्थान, सबसे अच्छे अस्पताल, सबसे अच्छी सड़कें, सबसे आधुनिक एयरपोर्ट, न हों। कोई वजह नहीं कि यहां के हमारे बच्चे अच्छे डॉक्टर न बनें, अच्छे इंजीनियर न बनें, अच्छे प्रोफेसर और अच्छे अधिकारी न बनें, कोई कारण नहीं है।

साथियों, बहुत सारी शक्तियां हैं, जो नहीं चाहतीं कि जम्मू-कश्मीर का विकास हो, यहां के लोगों का जीवन खुशहाल हो, लेकिन साथियों हमें इन विदेशी ताकतों को जवाब देते हुए आगे बढ़ते रहना है।

यहां महबूबा मुफ्ती जी के नेतृत्व में चल रही पीडीपी-बीजेपी गठबंधन सरकार और केंद्र की एनडीए सरकार निरंतर ऐसे नौजवानों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास कर रही है, जो विदेशी दुष्प्रचार से प्रभावित होकर अपनी ही पवित्र धरती पर प्रहार कर रहे हैं।

साथियों, शांति और स्थायित्व का कोई विकल्प नहीं होता है । मेरा आग्रह है कि जो नौजवान रास्ता भटक गए हैं, वो मुख्य धारा में वापिस लौटें। ये मुख्य धाराहै, उनका परिवार, उनके माता-पिता। ये मुख्य धारा है जम्मू-कश्मीर के विकास में उनका सक्रिय योगदान। इस युवा पीढ़ी पर ही जिम्मेदारी है जम्मू- कश्मीर का गौरव, बढ़ाने की। जम्मू-कश्मीर में इतने साधन हैं, इतने संसाधन हैं, इतना सामर्थ्य है, कि कोई वजह नहीं कि जम्मू- कश्मीर, भारत के अपने दूसरे क्षेत्रों से रत्ती भर भी पीछे रहे। भटके हुए नौजवानों द्वारा उठाया गया हर पत्थर, हर हथियार, उनके अपने जम्मू-कश्मीर को अस्थिर करता है।

राज्य को अब अस्थिरता के इस माहौल से बाहर निकलना ही होगा। भविष्यकेलिए, अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए, उन्हें सिर्फ कश्मीर ही नहीं, भारत के विकास की मुख्यधारा से भी जुड़ना होगा। हजारों वर्षों से, हम एक भारत मां की संतानें हैं। दुनिया की कोई शक्ति ऐसी नहीं, जो भाई को भाई से दूर कर सकती है। मां के दूध में कभी दरार नहीं हो सकती। जो लोग दशकों से इस प्रयास में लगे हुए थे, वो अब खुद बिखरने की कगार पर हैं।

भाइयों और बहनों मैं फिर कहूंगा, पिछले वर्ष मैंने दीवाली गुरेज़ में जवानों के साथ मनाई थी तो इस वर्ष रमज़ान के मौके पर यहां आप सबके बीच में हूं। यही तो कश्मीर की भावना है, यही तो इस धरती की देश और दुनिया को देन है। यहां सबका स्वागत है, यहां सबका सत्कार है। ये उस परंपरा की धरती है जो देश-दुनिया में कहीं नहीं मिलती। इसी धरती को पंथ और संप्रदायों से ज्यादा परंपराओं ने सींचा है। इसलिए-

कश्मीरियत के अटल जी भी कायल रहे हैं और इसी कश्मीरियत का मोदी भी मुरीद है।

और मैंने तो लालकिले से भी कहा था कि:

न गाली से समस्या सुलझने वाली है, न गोली से समस्या सुलझेगी, हर कश्मीरी को गले लगाने से समस्‍या सुलझेगी।

जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए राज्य और केंद्र सरकार के पास नीति भी है, नीयत भी है, और निर्णय लेने में भी हम कभी पीछे नहीं रहते हैं। छात्रों पर हजारों मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया हो या फिर अभी रमजान के इस मुबारक महीने में लिया गया सीज फायर का फैसला, उसके पीछे की सोच यही है कि कश्मीर के हर नौजवान को, यहां के हर व्यक्ति को स्थायित्व मिले, स्थिरता मिले और विकास मिले।

साथियों, ये सिर्फ सीजफायर नहीं है, ये इस्लाम की आड़ में आतंकवाद फैलाने वालों को उजागर करने का एक माध्यम भी है। मैं समझता हूं कि जम्मू-कश्मीर के लोग इस बात को देख रहे हैं कि कैसे उन्हें भ्रम में रखने की कोशिश की जाती रही है। स्थायित्व की इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने एक प्रतिनिधि को भी नियुक्त किया है। वो जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों से, यहां के अलग-अलग संगठन-संस्थाओं से मिल रहे हैं। और मैं चाहता हूं कि जो भी अपनी बात है जाके बताएं। हर व्‍यक्ति से बातचीत करके वो शांति प्रक्रिया को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।

भाइयों और बहनों, सरकार अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ रही। लेकिन कश्मीरियत और जम्हूरियत के गठबंधन को कायम रखने में आप सभी लोगों की भी और मैं जम्‍मू-कश्‍मीर के सभी नागरिकों से अपील करता हूं आप सभी की भी, यहां के हर माता-पिता की, यहां के युवाओं की, बुद्धिजीवियों की और धर्मगुरुओं की सबसे बड़ी जिम्‍मेदारी है सबसे बड़ी भूमिका है।

मैं चाहूंगा कि आप, हम, सभी अपनी सारी शक्ति सिर्फ और सिर्फ जम्मू-कश्मीर के विकास पर लगाएं। हर समस्या, हर विवाद, हर मतभेद का, उसका हल एक ही है- विकास, विकास, और सिर्फ विकास।

New India के साथ ही New Jammu-Kashmir, शांत और समृद्ध जम्मू-कश्मीर बदलते भारत की विकास गाथा को और मजबूत करेगा, और ऐसा मेरा पूरा विश्वास है। और मैं इसी विश्‍वास के साथ आप लोगों के बीच में भी अपनी भावनाओं को मैं खोल करके प्रकट करता हूं। अपनी बात को खोल करके बताता हूं। और मैं दुनिया के लोगों को भी कहता हूं- सारी दुनिया के देश, जो भी इन रास्‍तों पर चल पड़े हैं, सारे पछता रहे हैं। सब वापस लौट रहे हैं। वो वापिस लौटने का रास्‍ता ढूंढ रहे हैं। और इसलिए अमन-चैन की जिंदगी, भाईचारे की जिंदगी, शांति और समृद्धि की जिंदगी, सुख-चैन की जिंदगी, इसी विरासत को हमने आगे बढ़ाना है और इसके लिए केंद्र सरकार की तरफ से कोई कमी नहीं रहेगी। जहां जरूरत होगी सारे कदम उठाते चले जाएंगे। आपका साथ और सहयोग रहेगा; हम जिस चाह को ले करके निकले हैं वो चाह हम पूरी करके रहेंगे और फिर एक बार हमारा ये कश्‍मीर, हमारा ये जम्‍मू-कश्‍मीर, लेह-लद्दाख, पूरा इलाका सारे हिन्‍दुस्‍तानियों के लिए वही मुकुट मणि के रूप में हर किसी को प्‍यार से गले लगाने का मौका देगा।

इसी भावना के साथ सेठा-सेठा शुक्रिया, अज़ दीयू इज़ाजत, खुदाई थई नव खोशत खुशहाल

धन्‍यवाद

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स्वर साधना, मनोकामना, आराधना। एक बहुत ही शुभ शुरुआत के बाद। अच्छा होता आप ही का कार्यक्रम चलता। आप सबको नमस्कार।

रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के सभी दर्शक और अब तो बहुत सारी भाषाओं में भी है, तो उन सबको भी मेरा प्रणाम! मैं इस समिट में हिस्सा लेने आए सभी साथियों का भी अभिनंदन करता हूं। 24 घंटे चलने वाले चैनलों में ब्रेकिंग न्यूज इसका बहुत बड़ा महत्व होता है। और आजकल तो दुनिया में ही, पूरी दुनिया में कहीं पर भी नजर डालो, पूरी दुनिया ब्रेकिंग न्यूज के मोड पर ही है, और इतनी भागदौड़ में आप सभी, इस समिट को होस्ट कर रहे हैं, इसका हिस्सा बने हैं। और इसलिए आप विशेष बधाई के पात्र हैं। और इस बार आपकी चर्चा का विषय भी उतना ही अहम है...Great Power India: Nation First...

साथियों,

हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है...यतो धर्मस्ततो जयः ! यानि जय का, शक्ति का, मूल धर्म है। और धर्म यानि ड्यूटी, धर्म यानि जस्टिस, धर्म यानि समभाव, धर्म यानि संवाद, धर्म यानि संवेदना और यही तो नेशन फर्स्ट की भावना में भी समाहित है। भारत, अपनी पावर को इसी लैंस से देखता है, इसी तराज़ू पर तौलता है।

साथियों,

भारत की एक और विशेषता है और अब तो दुनिया ने भी मान लिया है। हम किसी क्षणिक घटना पर उतावले होने वाले देश नहीं है, हम वो हैं जिसने विकास और विनाश, देखा भी झेला भी है। हम वो देश हैं, जिसके जेहन में युगों की मेमरी चिप लगी हुई है, हम युगों की मेमरी चिप वाले नेशन हैं। और इसलिए भारत आज जो कर रहा है, और ये मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ, भारत जो कर रहा है वो आने वाले एक हज़ार वर्ष का फ्यूचर लिखने वाला है। और यही दुनिया के लिए सबसे बड़ी भारत की गारंटी है। भारत, Fast-Growing Economy भी है। एक Credible Economy भी है। और भारत, rising power के साथ-साथ और अभी आप तो ढेर सारी डिक्शनरी लेकर बैठ गए थे, सुपर पावर तक ले गए। लेकिन मैं इतना जरूर कहूँगा कि भारत Reliable power है। मैं अभी दो-तीन दिन पहले G7 समिट से लौटा हूं और दुनिया का हर नेता हर देश इस बात को भली-भांति समझता है कि आज के भारत के लिए नेशन फर्स्ट ही सबसे बड़ा मंत्र है, सबसे बड़ा सिद्धांत है।

साथियों,

कुछ दिन पहले ही, हमारी सरकार को 12 साल पूरे हो चुके हैं। उसके लिए भी अर्नब ने आपको तालियाँ बजाने के लिए मजबूर कर दिया। पिछले बारह वर्षों की जो भी सिद्धियां देश की रही हैं, उनके मूल में अगर आप तराजू से तौलोगे, हर निर्णय, हर कदम, हर प्रयास उनके मूल में राष्ट्र प्रथम की भावना ही केंद्र में है। स्वच्छ भारत अभियान से लेकर मेक इन इंडिया खादी खरीदने पर जोर स्थानीय वस्तुएं खरीदने पर जोर ये सारे Initiative इसलिए सफल हुए क्योंकि देश की जनता ने देश को सबसे ऊपर रखते हुए अपना कर्तव्य निभाया। देश के नागरिकों को मैं सलाम करता हूँ।

साथियों,

यहां हमारे साथी श्रीधर वेंबु जी बैठे हैं। जब हमारे उद्यमी नेशन फर्स्ट की भावना के साथ चलते हैं, जब वो देश की आवश्यकताओं को समझते हुए अपने लक्ष्य बनाते हैं तो संस्थाएं भी बनती हैं और देश भी समृद्ध होता है। श्रीधर वेंबु जी ने क्या काम किया है, शायद यहाँ बातों में कितना निकला होगा मुझे मालूम नहीं, लेकिन अभी मैं फ़्रांस में vivatech में गया था, करीब डेढ़ 2 लाख नौजवान वहाँ होंगे, चलने के लिए भी मैं और फ्रांस के राष्ट्रपति अलग अलग स्टॉल पर जा रहे थे, देखने के लिए भई नौजवानों ने क्या काम किया है। तो हम जोहो के स्टॉल पर गए, मैं हैरान था जी, और गर्व होता था कि जोहो के स्टाल पर यूरोप के नौजवानों की जो भीड़ लगी थी और वो समझना चाहते है कि क्या है ये दुनिया में नई चीज, भारत में शायद उतनी चर्चा नहीं होगी, जितनी मैंने वहाँ फ्रांस में देखी, बधाई हो आपको।

साथियों,

सरकार की नीति और निर्णयों में नेशन फर्स्ट का क्या प्रभाव होता है, इसका एक उदाहरण हमारा आदिवासी क्षेत्र है। मैं आज कोई फिलोस्फी झाड़ने वाला नहीं हूँ, कुछ बातें जो हुई है वो हल्की फुल्की बता दूंगा और उससे आप अंदाज लगा लेंगे कि काम कैसे होता है। मैं आदिवासी क्षेत्र की बात करता हूँ। भारत के 10 करोड़ से अधिक आबादी की चर्चा, मतलब कि आदिवासी समाज की चर्चा और हम सबको पता है कि दशकों से माओवादी आतंक वहाँ अपने डेरा तंबू डालकर बैठ हुआ था। जहां 21वीं सदी में भी इन आतंकियों ने एक भी सुविधा पहुंचने नहीं दी, सरकारी एक वेहिकल नहीं गुजर सकता था वहाँ से। गोलियों से भून दिया जाता था। अनेक सरकारें आई-गईं, कई पीढ़ियां आई-गईं, लगता था कि हिंसा का ये दुर्भाग्य ऐसे ही रहेगा। आप कल्पना कर सकते हैं, 2004 से 2014 के बीच, मैं उस दस साल का हिसाब बताता हूँ, 2004 से 2014 के बीच माओवादी आंतक के कारण, 17 हज़ार से भी अधिक हिंसक घटनाएं हुईं थीं। और करीब-करीब 7 हज़ार से ज्यादा जानें गईं थी।

साथियों,

आज आपके लिए वन लाइन न्यूज होगा या टीवी पर आधे घंटे डिबेट होगी कि माओवाद आतंकवाद खत्म हो गया, चीजें ऐसी नहीं होती। उसके लिए खपना पड़ता है और इसलिए मैं बताना चाहता हूँ। और इसलिए मैं बताना चाहता हूं और आजकल जो लोग, कुछ लोग संविधान दिखाते रहते हैं, लेकिन जब ये लोग सरकार में थे और नक्सल प्रभावित इलाकों में संविधान का नाम लेने पर गोली मार दी जाती थी और तब ये लोग चुप बैठे थे, तब उनके हाथो में संविधान नहीं दिखता था, कांप रहे थे उनके हाथ। उस दर्दनाक स्थिति से कांग्रेस को कोई खास फर्क नहीं पड़ता था।

साथियों,

2014 के बाद, हालात को बदलने के लिए हम राष्ट्र प्रथम के भाव से आगे बढ़े, हम निकल पड़े। बोलते नहीं थे, बताते भी नहीं थे, करते जरूर थे। हमने संकल्प लिया कि नक्सलवाद-माओवाद को जड़ से उखाड़ फेकेंगे और आज पूरा देश नतीजा देख रहा है, आज देश में माओवादी आतंक, अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।

और साथियों,

कई बार अंतिम परिणाम इतना बड़ा और व्यापक होता है कि उसके पीछे की मेहनत पर ध्यान नहीं जाता। रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को मैं खासतौर पर इसके बारे में बताना चाहता हूं।

साथियों,

जिन नक्सल प्रभावित इलाकों में दिन में जाने से भी, यानी सामान्य मानवी डरा रहता था, उसको लगता था कहीं अपहरण हो जाएगा तो, कभी वसूली का डर रहता था, कभी साथ में जो कुछ भी है वो लूट लेने का डर रहता था। और जहां पर विकास की बात बोल तक नहीं सकते थे आप, लेकर के जा नहीं सकते थे, सब नामुमकिन था, ऐसे क्षेत्रों में हम हम विकास का संकल्प लेकर आगे बढ़े। वहां बीते 12 वर्षों में हमारी सरकार ने 12 हज़ार किलोमीटर से अधिक की सड़कें बनाईं। और कई बार तो हमने देखा, कई बार तो हमने देखा कि सड़क बनाने के जो हमारा साजो सामान होता है उसको जला दिया जाता था। कांट्रेक्टर को भगा दिया जाता था। अगर 25 लोग रोड पर काम करते तो 200 लोग पुलिस सुरक्षा रखते थे ताकि काम चले। यह सब इसलिए करते थे- तय किया था।

साथियों,

साढ़े 9 हज़ार से अधिक मोबाइल टावर बनाए। एक टावर नहीं लगने और लगा हुआ टावर तोड़ देते थे। क्योंकि उनको हमेशा वहां आक्रोश पैदा करना था। करीब 45,000 गांव में मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाई। नक्सल प्रभावित जिलों में 1800 से अधिक बैंक ब्रांच खोली गई। करीब 75,000 बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट और 6000 से अधिक नए पोस्ट ऑफिस बनाए गए। सिर्फ बम, बंदूक और गोली के सहारे काम नहीं किया है साथियों, हमने दिलों को जीतने के लिए, ईश्वर ने जो भी शक्ति दी थी उसको खपाया था।

साथियों,

हम बुलंद इरादों के साथ नक्सल प्रभावित इलाकों में जनसामान्य की आशा, आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए जा रहे थे। आप हैरान हो जाएंगे एक मशहूर नक्सली, करोड़ों रुपए का इनाम थे उसके, उसकी मां के पास हम पहली बार राशन कार्ड लेकर गए। बेटा अपनी मां को राशन कार्ड लेने नहीं देता था, आतंकवाद अपना चलाने के लिए। इतनी घटनाएं हैं, मैं हैरान था। और सरकार चुप बैठी थी, उनको संविधान उस समय तो दिखता नहीं था। लेकिन इन सारे प्रयासों का परिणाम यह आया कि जन सामान्य में एक विश्वास का नया दौर आया। आज आप देखिए बस्तर जैसे इलाकों में बम बंदूक नहीं बस्तर ओलंपिक्स की धूम है। और अब तक इस ओलंपिक के दो एडिशन हो चुके हैं। पहली बार डेढ़ लाख से अधिक युवाओं ने और दूसरी बार करीब 4 लाख युवाओं ने बस्तर ओलंपिक्स में हिस्सा लिया। यानी जहां कभी टेरर था, वहां टैलेंट को अवसर मिल रहा है, वहां स्पोर्ट्स फल-फूल रहा है।

साथियों,

12 वर्षों के इस सेवाकाल की एक और बड़ी सिद्धि रही है, यह सिद्धि है, निराशा से निकलकर आशा-आकांक्षा सबसे भरे भारत का निर्माण।

साथियों,

नक्सल कहीं और होगा लेकिन घटनाओं की पीड़ा हिंदुस्तान के हर कोने में होती थी और जिस समय नक्सल खत्म होने की बातें आने लगी तो विश्वास सिर्फ नक्सली इलाके का नहीं, हिंदुस्तान के कोने-कोने में जगने लगा। 2014 से पहले के 10 वर्षों में जो कांग्रेस सरकार चली, उससे नाराजगी केवल गवर्नेंस की नहीं थी। तब देश की निराशा इससे कहीं अधिक थी, देश उम्मीद खो चुका था, लोगों को लगता था कि कुछ हो ही नहीं सकता, कुछ बदल ही नहीं सकता।

साथियों,

पिछले 12 वर्षों में भारत ने उसी निराशा को आशा में बदला है और मुझे इस बात का सबसे ज्यादा संतोष है। आज हर किसी को यह लगता है कि थोड़ी और मेहनत करेंगे, तो यह हो सकता है। वो दिन चले गए जब एक ही बात सुनाई देती थी, कतई नहीं हो सकता, कतई नहीं हो सकता, वो जमाना चला गया, आज ये होकर रहेगा। ये जो भाव आया है यही भारत की असली सिद्धि है, और यही रियल पावर है। चुनौतियां तो आज भी बहुत है और हमेशा रहेगी और चुनौतियां बहुरूपिया होती है, वो नए-नए अवतार में सामने आती रहती है, अरे आएगी, जिस रूप में आएगी, जंग उससे भी लड़ लेंगे जी और जीत भी लेंगे। लेकिन यह हो सकता है और हम यह करके रहेंगे, जब इस भाव से देश आगे बढ़ता है, तब सपने पूरे होते हैं।

साथियों,

मैं यहां भारत के 100 से ज्यादा जिलों और 500 से ज्यादा ब्लॉक्स की चर्चा करना चाहूंगा। यह विकास के हर पैरामीटर पर पीछे छूट गए थे और पहले की सरकार ने इन पर पिछड़ा होने का ठप्पा लगा दिया था, यह तो बैकवर्ड डिस्ट्रिक्ट है, ये तो बैकवर्ड इलाका है। हमने देश के इस बहुत बड़े क्षेत्र को पिछड़ेपन की निराशा से बाहर निकालकर डेवलपमेंट की एस्पिरेशन जगाई। सबसे पहले तो हमने पहचान ही बदल दी, हमने कहा ये एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट है, ये एस्पिरेशनल ब्लॉक है, हमने एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट का प्रोग्राम बनाया, एस्पिरेशनल ब्लॉक का प्रोग्राम बनाया और सरकार ने विकास के हर पैरामीटर पर बहुत बारीकी से काम शुरू किया। इस डिस्ट्रिक्ट में ये तीन पहलू है, पहले उसमें से बाहर निकलो। यहां छह पहलू है, पहले इसमें से बाहर निकलो। बड़ा फोकस वे में काम शुरू किया। आज यह एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट और ब्लॉक्स राज्य की ओवरऑल ग्रोथ को आगे बढ़ाने का काम करने लगे हैं। जो पहले ग्रोथ को पीछे खींचते थे, इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट में बहुत बड़ी आबादी गरीब थी, अभाव में थी। बीते वर्षों में 25 करोड़ गरीबों ने गरीबी को परास्त किया है। तो इसमें इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट की एक बहुत बड़ी भूमिका है।

साथियों,

हम देखते हैं कि जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो सिर्फ घर का वो व्यक्ति ठीक होता है ऐसा नहीं है। जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो पूरा परिवार ठीक हो जाता है। ऐसे ही, जब घर का कोई एक बेटा-बेटी कुछ अचीव करता है, तो सिर्फ वो व्यक्ति अचीव करके नहीं आता, वो पूरा परिवार, पूरा परिवार अचीवमेंट से भर जाता है, विश्वास बदल जाता है। ऐसे ही, जब कोई गरीबी से बाहर आता है, तो सम्पूर्ण समाज का फायदा होता है, देश का फायदा होता है। 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, निओ मिडिल क्लास में आए हैं, तो इसका फायदा केवल उन परिवारों तक नहीं रहता, बल्कि मिडिल क्लास का भी इसमें फायदा होता है। क्योंकि यह नया कंज्यूमर है, जो इकोनॉमी को ड्राइव करता है, उससे अल्टीमेटली मिडिल क्लास के लिए अवसर बनते हैं। यानी गरीबी कम होना केवल वेलफेयर का ही विषय नहीं है, यह अवसरों के विस्तार की गाथा है, नई एस्पिरेशंस की प्रेरणा है।

साथियों,

पिछले 12 वर्ष में जो इतना विशाल मिडिल क्लास देश में तैयार हुआ है, वो सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता रहा है। मिडिल क्लास की Ease of Living के लिए सरकार ने हर स्तर पर काम किया है। अब जैसे अपने घर का सपना है। हर मिडिल क्लास परिवार की एक इच्छा रहती है कि भई खुद का घर हो, हर किसी को पूछोगे एक मन में रहता है मेरा अपना घर हो। 2014 में अगर किसी परिवार को अपना घर खरीदना होता था, तो होम लोन डबल डिजिट के इंटरेस्ट रेट पर मिलता था। लेकिन आज किसी भी बैंक से होम लोन 7-8 परसेंट के रेट पर मिल जाता है। पहले लोन लेना भी किसी युद्ध जीतने जैसा था, युद्ध जीतने में जितनी ताकत लगती थी, उतनी लोन लेने में लगती थी। आज यह घर बैठे ही संभव हो पा रहा है। मैं यहीं की बात बताता हूं, यह दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोग जानते हैं कि कैसे शहरी मिडिल क्लास के हजारों घर अधूरे अटके हुए थे। पैसे दे दिए थे, पूरे जिंदगी भर की कमाई बिल्डर को दे दी थी। उसने भी बढ़िया-बढ़िया पम्पलेट दिखाए, सपने दिखाए। अभी किराए पर घर में रहते हैं, तो किराया भी देना है, घर जल्दी मिलेगा। उधर किराया रहता है, घर मिल नहीं रहा, घर बन नहीं रहा, यह बहुत बुरा हाल था। इन अधूरे घरों को पूरा करने के लिए हमने 25 हजार करोड़ रुपए का स्पेशल फंड बनाया। और आपको जानकर खुशी होगी कि देश में बरसों से अटके करीब 60 हजार घरों को डिलीवरी किया जा चुका है।

साथियों,

एक और चीज है, जो रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है। यह जरूरत है, कनेक्टिविटी की, ट्रांसपोर्ट की। आज आप सोशल मीडिया में देखिए, दुनियाभर से जो भी टूरिस्ट आता है, भारत आता है, वो हमारे मेट्रो सिस्टम को देखकर हैरान रह जाता है।

साथियों,

वर्ष 2014 में करीब 28 लाख लोग, हर रोज मेट्रो से सफर करते थे। आज करीब एक करोड़ अठाइस लाख लोग हर रोज मेट्रो से सफर कर रहे हैं। अब वंदे भारत, नमो भारत और अमृत भारत जैसी हाई स्पीड ट्रेन्स देश को कनेक्ट कर रही हैं। अच्छी सड़कों, अच्छे हाईवे से, समय तो बच ही रहा है, गाड़ियों की मैंटेनेंस पर होने वाला खर्चा भी कम हुआ है। बीते वर्षों में एयरपोर्ट्स की संख्या डबल हुई है। इससे कई छोटे-छोटे शहरों में भी मिडिल क्लास को हवाई यात्रा की सुविधा पहली बार मिली है।

साथियों,

पिछले 12 साल, मिडिल क्लास के लिए कमाई के साथ-साथ बचत के भी रहे हैं। 2013-14 में, लगभग 2 लाख रुपए तक की आय होने पर टैक्स लगता था, आप सबको वो नसीब रहा होगा। और यह टैक्स मिडिल क्लास देता रहता था। आज 12 लाख रुपए तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है। यानी टैक्स फ्री इनकम कई गुणा बढ़ गई है।

साथियों,

GST रिफॉर्म्स के कारण भी मिडिल क्लास को बहुत सुविधा हुई है। टैक्स फाइलिंग का समय और खर्चा भी बच गया है। क्योंकि यह बहुत ही आसान हो गया है। घर बैठे ही ITR फाइल हो रहे हैं, अगर कोई सेटलमेंट का इश्यू है, तो वो फेसलेस हो रहा है।

साथियों,

मिडिल क्लास परिवारों में एक बड़ा खर्चा डायबिटीज या ऐसी लाइफस्टाइल से जुड़े इलाज का भी रहता है। जन औषधि केंद्रों पर 80 परसेंट डिस्काउंट पर ऐसी दवाएं मिल रही हैं। अगर आपका पहले हजार रुपया खर्चा होता था, तो आज 200 रुपये में काम हो जाता है, 800 रुपये बच रहा है और इससे बीते वर्षों में करीब 40 हज़ार करोड़ रुपए की बचत देश के अनेक परिवारों की हुई है। मिडिल क्लास के बजट का एक बड़ा हिस्सा बुजुर्गों के इलाज पर भी जाता है। आज 70 वर्ष से ऊपर के हर नागरिक के लिए 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध है।

साथियों,

एक सामान्य स्वभाव है कि जब कोई सुविधा लगातार मिलती है, तो इंसान पहले की परेशानी भूल जाता है। अब 2 लाख रुपये पर आप टैक्स देते थे, अब 12 लाख तक नहीं देना पड़ रहा, लेकिन जब मैं कहूं, तब ताली बजती है। और बस में, ट्रेन में थोड़ी देर भी अगर कुछ मुसीबत आ गई, तो ढेर सारी गालियां देना शुरू हो जाते हैं और यही क्‍लास सबसे ज्यादा बोलता है।

साथियों,

मैंने जैसा कहा ना कि भई पुरानी तकलीफे भूल जाता है आदमी। आप लोगों को आज ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट से जुड़ी परेशानियां बिल्कुल याद नहीं होंगी। पहले ड्राइविंग लाइसेंस लेना होता था, तो कितनी दिक्कत होती थीं, पासपोर्ट लेना होता था, तो क्‍या-क्‍या कुछ नहीं करना पड़ता था, कितने पापड़ बेलने पड़ते थे। आज ड्राइविंग लाइसेंस लेना भी आसान हुआ है और तत्काल पासपोर्ट भी औसतन 3 दिन में ही मिल जाता है।

साथियों,

मैं जानता हूं, हमारी सरकार जिस तरह काम कर रही है, उसने देश के लोगों की एस्पिरेशन बहुत बढ़ा दी है। एक काम हुआ, तो लोगों की डिमांड वहीं खत्म नहीं हो जाती है। वो उससे भी बेहतर काम चाहते है, उससे भी अपग्रेड सुविधा चाहते हैं। अगर पहले डिमांड नई सड़क की थी, तो सड़क बनने के बाद लोग पूछते हैं, मेट्रो कब आएगी? पहले अपेक्षा होती थी कि ट्रेन समय पर पहुंच जाए, ट्रेन में बैठने की साफ-सुथरी जगह मिल जाए। आज डिमांड है कि हमारे रूट पर वंदे भारत क्यों नहीं चल रही है?

साथियों,

कुछ लोगों को ये असंतोष लगता है, यह एस्पिरेशन है, हमारे देश में एक फौज ऐसी है, उसको लगता है कि यह सब मामला कुछ गड़बड़ है। लेकिन लोग आखिरकार यह अपेक्षाएं किसके पास करेंगे भई, जो करता है, उससे ही करेंगे ना! सामान्‍य लोग हीनहीं, पूरी कांग्रेस पार्टी कहती है कि जरा मोदी जी, यह हो जाना चाहिए, यह होना चाहिए, कहते रहते हैं ना! उनको भरोसा है, करेगा तो ये ही करेगा!

साथियों,

एस्पिरेशंस वहीं होती है, जहां लोगों को लगता है कि सपने पूरे हो सकते हैं। और भारत के युवाओं की, भारत के गरीब और मिडिल क्लास की यही एस्पिरेशन है। आज भाजपा-एनडीए सरकारों की ऊर्जा बनी हुई है।

साथियों,

एक तरफ, देश का बहुत बड़ा वर्ग एस्पिरेशनल है, तो दूसरी तरफ, राजनीति की एक टोली है, जिसका जीवन मंत्र बन गया है- ऑलवेज अगेंस्ट! यह टोली, क्रॉनिक डिससैटिस्फैक्शन यानी स्थाई असंतोष से भरी हुई है। आज मैं रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को जरा इस टोली के लक्षण बताने जा रहा हूं। Symptoms पता चलेगा, तो आपको समझ आ जाएगा कि मैं क्या कह रहा हूं। आप आसानी से पहचान लेंगे। जैसे मैं उदाहरण देता हूं, आप समझ जाएंगे। इनको आप अक्सर कहते सुनेंगे, अरे फलां जगह तो चौबीस घंटे बिजली आती है, यहां क्यों नहीं? और अगले ही दिन ये लोग डैम्स का, सोलर पार्क का, थर्मल का, न्यूक्लियर प्लांट का विरोध करने के लिए ढपली लेकर के आ जाएंगे। यानी पहले दिन बिजली क्‍यों नहीं और दूसरे दिन तुम हाइड्रो पावर का डैम क्यों बना रहे हो, यह जमात ऐसी है। यह वो लोग हैं, जो खनिजों के खनन का विरोध करते थे, लेकिन आज पूछते हैं कि भारत का रेयर अर्थ मिनरल्स भंडार कहां है, सप्लाई चेन कहां है? और भारत में फलाने देश की तरह, इलेक्ट्रिक व्हीकल का इकोसिस्टम क्यों नहीं है? यह वही लोग हैं, जो कभी डेटा या आटा, इसकी डिबेट चलाते थे। पहले डाटा कि आटा, डाटा कि आटा, बड़ा मजा आता था। आज यही लोग पूछते हैं कि बताओ मोदी जी, AI में क्या काम हुआ? हद देखिए, एक सांस में कहते हैं, एक ही सांस में कहते हैं कि AI में यह होना चाहिए था, वो होना चाहिए था, हुआ क्यों नहीं? लेकिन दूसरी सांस में वही लोग कहते मिलेंगे, अरे यह डेटा सेंटर क्यों बना रहे हो? यह सेमीकंडक्टर प्लांट क्यों लगा रहे हो? और फिर यह लोग उसके 100 नुकसान गिनाने के लिए घंटे-घंटे भर सोशल मीडिया के स्‍क्रीन पर दिखेंगे, टीवी डिबेट पर दिखेंगे, अखबारों में भरे रहेंगे।

साथियों,

यह लोग करप्शन को लेकर दुनियाभर के इंडेक्स उठाकर लाते हैं, भारत को कटघरे में खड़ा करते हैं, इनके इकोसिस्टम का मीडिया भी 24-24 घंटे उछालता रहता है, लेकिन जब करप्शन के विरुद्ध एक्शन होता है, जब कार्रवाई होती है, तो यही लोग चिल्लाते हैं, सबसे पहले हल्ला मचाने का काम कौन करते हैं, यही गलत हो रहा है, फलाना गया ढीकना गया, रेड कर दी, जांच कर दी, harass कर दिया। सवाल उठाए जाते हैं, कार्रवाई ऐसे क्यों हो रही है, वैसे क्यों नहीं, अब क्यों हो रही है, तब क्यों नहीं, A पर क्यों हो रही है, B पर क्यों नहीं हो रही है, यही उनका खेल है।

साथियों,

इन लोगों का कैरेक्टर समझना देश के लिए बहुत जरूरी है। खासतौर पर मेरे देश के युवाओं को इनको पहचानने की जरूरत है और हमारी जेन जी को तो बहुत जल्दी समझना चाहिए, जल्दी समझो वरना अब सूर्यवंशी आया है, वो तेज गति से समझाता है।

साथियों,

यह लोग एक तरफ कहेंगे कि देश की सेनाओं को छूट नहीं है, हथियार नहीं मिल रहे हैं, लेकिन जब सरकार कोई डिफेंस डील करेगी, कोई आधुनिक हथियार खरीदती है, तो सबसे पहले आकर कहते हैं कि यह क्यों खरीदा? यह दुनिया भर में भारत की कूटनीति पर सवाल करेंगे, लेकिन जब भारत कूटनीति के लिए, सुरक्षा के लिए कहीं कोई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बनाने लगेगा, तो यह लोग ढोल-ढपली लेकर हल्ला मचाना शुरू कर देते हैं।

साथियों,

आज भारत जिस अहम कालखंड में है, इसमें ऐसे लोगों को पहचानना होगा, उनके कुतर्क को समझना होगा और उनसे सतर्क रहना बहुत जरूरी होगा। और आज दुर्भाग्य से, आज देश के मुख्य विपक्षी दल, कांग्रेस पर, ऐसे ही लोगों का कब्जा हो गया है। कांग्रेस कभी नेशन फर्स्ट की बात करेगी, यह सोचना भी अब झूठे सपने जैसा हो गया है। कल्पना ही नहीं कर सकते क्या कभी कांग्रेस में यह फिर से आएगी बात, जो गांधी जी के जमाने में थी।

साथियों,

आज दुनिया पुरानी धाराओं को चैलेंज कर रही है, डिसरप्शन्स की स्केल बहुत बड़ी हो गई है, लेकिन इसका एक और पक्ष है। यह चुनौतियां, नए अवसर भी ला रही है। भारत के हर युवा, हर उद्यमी, हर इनोवेटर, हर स्टार्टअप को, इन्हीं अवसरों पर फोकस करना है और इसमें सरकार, नेशन फर्स्ट की भावना के साथ पूरी तरह देश के लोगों के साथ है। भारत आज रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार हो चुका है। यह गति आगे और तेज होगी, मैं रिपब्लिक टीवी के इस मंच से देशवासियों से फिर कहूंगा कि हमारा सपना जितना बड़ा है, हमारे प्रयास भी उतने ही विराट होंगे और 140 करोड़ देशवासियों का यही साझा प्रयास, विकसित भारत बनाकर रहेगा। और आप सब लोग, मैं विश्वास से कहता हूं, अपनी आंखों से विकसित भारत देखने वाले हैं। आने वाली पीढ़ियों तक इंतजार करना पड़े, इस प्रकार से मैं काम नहीं करता, आप खुद अपनी आंखों से देखकर के जाएंगे। इसी विश्वास के साथ, मैं फिर एक बार रिपब्लिक टीवी को, उसके दर्शकों को और आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं! बहुत-बहुत धन्यवाद!