कोरिया गणतंत्र के राष्‍ट्रपति पार्क ग्‍यून ही, दोनों देशों के प्रख्‍यात सीईओ, व्‍यापार और उद्योग जगत के अन्‍य प्रतिनिधियों तथा भाईयों और बहनों!

      मैं आज सुबह यहां आप लोगों के साथ अति प्रसन्‍न हूं। मैं आप सभी का हमारा साथ निभाने के लिए धन्‍यवाद देता हूं। मुझे आशा है कि दोनों पक्षों के सीईओ के बीच बातचीत लाभप्रद होगी।

      मित्रों! भारत और कोरिया के बीच सौहार्द्रपूर्ण संबंधों का प्राचीन इतिहास रहा है। दोनों देशों के बीच संबंधों की शुरूआत पहली सदी में हुई जब उत्‍तरी भारत के अयोध्‍या साम्राज्‍य से एक भारतीय राजकुमारी ने नाव से कोरिया की यात्रा की।

      राजकुमारी ने कोरिया के राजा शूरौ से विवाह किया और वह दक्षिण कोरिया सम्राज्‍य की पहली रानी बनी। कोरिया के कई निवासियों की वंश बेल उनसे जुड़ीं हैं।



हम बौद्ध परंपरा से भी जुड़े हैं। कोरिया के एक प्रसिद्ध बौद्ध भिक्षु हिचो ने आठवीं शताब्‍दी में बुद्ध की भूमि की भाषा और संस्‍कृति का अध्‍ययन करने के लिए भारत का भ्रमण किया था। इस पर उन्‍होंने एक पुस्‍तक  'पांच भारतीय साम्राज्‍यों के दौरे का विवरण' लिखी थी।

      हमारे बीच बहुत कुछ समानता है। इसमें कोई आश्‍चर्य नहीं कि बॉलीवुड की फिल्‍में कोरिया में बहुत लोकप्रिय हैं।

      मित्रों! मैं इस संबंध को और मजबूत करने यहां आया हूं। वास्‍तव में मैं हमेशा कोरिया से बहुत अधिक प्रभावित रहा हूं। मैं जब गुजरात का मुख्‍यमंत्री था तब यहां आया था और उससे पहले भी मैं कोरिया का दौरा कर चुका हूं। ईमानदारी से कहूं तो जब मैं गुजरात में था तो सोचा करता था कि गुजरात के क्षेत्रफल का यह देश इतनी अधिक आर्थिक प्रगति कैसे कर सकता है। मैं कोरिया के लोगों की उद्यम के जज्‍बे का सम्‍मान करता हूं। जिस प्रकार से उन्‍होंने अपने ग्‍लोबल ब्रांड तैयार किए और उन्‍हें बनाए रखा उनकी मैं सराहना करता हूं।

आईटी और इलैक्‍ट्रोनिक्‍स से लेकर ऑटोमोबाइल और स्‍टील तक कोरिया ने विश्‍व को अनुकरणीय उत्‍पाद दिए हैं। इसी प्रकार से कोरिया की कंपनियां निर्माण क्षेत्र में बहुत मजबूत हैं और दुनियाभर में प्रतिष्ठित भवन बनाने में शामिल हैं। आप लोगों के बीच एक प्रभावशाली आधारभूत ढांचे के साथ ही अनुसंधान, विकास और नवाचार में भी प्रगति के कीर्तिमान हैं।

      हमें भारत में वो सब प्राप्‍त करना है जो कोरिया पहले ही हासिल कर चुका है। इसीलिए मैं एक बड़े व्‍यावसायिक प्रतिनिधिमंडल के साथ यहां हूं। एक अच्‍छा समाचार यह है कि जनवरी 2010 में कोरिया- भारत सीपा पर हस्‍ताक्षर होने के बाद भारत और कोरिया के बीच द्वीपक्षीय व्‍यापार में वृद्धि हुई है।

      राजस्‍थान में दक्षिण कोरिया  निवेश क्षेत्र अच्‍छी प्रगति कर रहा है।

      कई सौ कोरियाई कंपनियां भारत में कार्य कर रही हैं। आपके उत्‍पाद विशेष तौर पर उपभोक्‍ता इलैक्‍ट्रोनिक्‍स से जुड़े उत्‍पाद भारतीयों की पहली पसंद है और इनमें से कई का उत्‍पादन यहां हो रहा है। हुंदै मोटर भारत में दूसरी सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी है।

      हालांकि कई क्षेत्रों में अभी भी प्रगति की भारी संभावनाएं हैं। भारत में प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश करने वालों में दक्षिण कोरिया का स्‍थान 14वां है। मैं इस बात को स्‍वीकार करता हूं कि इस कम प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश का कारण हम से जुड़ा है आपसे नहीं। लेकिन मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि भारत संभावनाओं का देश था और है। अब भारत सुगम नीतिगत माहौल का देश भी है। मेरी सरकार देश के वातावरण में परिवर्तन लाने के लिए प्रतिबद्ध है। हम अपने नागरिकों और उद्योग के आपसी लाभ के लिए मिलजुलकर काम कर सकते हैं। हम एकजुट होकर कई कार्य कर सकते हैं।

      उदाहरण के लिए, भारत के सॉफ्टवेयर और कोरिया के हार्डवेयर उद्योग के बीच सहयोग की संभावना है। आपके कार निर्माण और हमारे डिजाइन करने की क्षमता को मिलाकर काम किया जा सकता है। हालांकि हम इस्‍पात के तीसरे सबसे बड़े उत्‍पादक बन गए हैं, लेकिन हमें इसमें बहुत अधिक मूल्‍यवर्द्धन की आवश्‍यकता है। आपकी स्‍टील निर्माण की क्षमता और हमारी लौह अयस्‍क के संसाधन में समन्‍वय के साथ काम किया जा सकता है। आपके जहाज निर्माण की क्षमता और हमारे  बंदरगाहों पर आधारित विकास का एजेंडा हमारे विकास को नई दिशा दे सकता है। आवास सहित आधारभूत ढांचागत क्षेत्र एक ऐसा क्षेत्र हैं जिसमें हम मिलकर बड़े स्‍तर पर काम कर सकते हैं।

 पिछले बार मैं आपकी बेहतरीन सीमानगुयम परियोजना को देखा था। हमें ऐसी कई सीमानगुयम परियोजनाओं का निर्माण करना है। आइए दोनों देशों के फायदे के लिए  यह कार्य करें।

      मित्रों! मेरी सरकार के गठन के बाद से तीव्र और समेकित वृद्धि का वातावरण तैयार करने के लिए हम दिन-रात काम कर रहे हैं। हम इस सबमें कई गुणा प्रगति करना चाहते हैं। कोरिया जिन क्षेत्रों में मजबूत है वो हमारे देश के विकास के लिए बहुत महत्‍वपूर्ण है। आप में से ज्‍यादातर भारत में उपस्थित हैं जो भारत में उपस्थित नहीं हैं मैं उनको भारत आने और संभावनाओं की खोज करने का निमंत्रण देता हूं।

      भारत में आपकी उपस्थिति और हमारे सीईओ के साथ बातचीत के बाद आपको इस बात का आभास होगा कि हम क्‍या कर रहे हैं और किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मैं इस संबंध में संभावनाओं के स्‍तर पर कुछ प्रकाश डालना चाहता हूं।

      हमारे देश में जल, परिवहन, रेलवे, बंदरगाह, जहाज निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा सहित विद्युत, सूचना प्रौद्योगिकी आधारभूत ढांचा और सेवाएं, इलैक्‍ट्रोनिक्‍स, निर्माण उद्योग क्षेत्रों में काफी संभावनाएं हैं।

      मैं आपको कुछ उदाहरण देना चाहता हूं। हमारी वर्ष 2022 तक 50 मिलियन घर बनाने की योजना है इसके साथ ही हम स्‍मार्ट शहर, लम्‍बे औद्योगिक गलियारे और विशाल निवेश क्षेत्र भी विकसित करने वाले हैं। इस उदे्श्‍य के लिए हमने निर्माण क्षेत्र से संबंधित एफडीआई नी‍ति में सुधार किए हैं। निवेश के लिए हमने रीयल एस्‍टेट निवेश ट्रस्‍ट के शर्तों को सुगम बनाया है। हम इस क्षेत्र के लिए एक नियामक ढांचा भी लेकर आ रहे हैं।

 अगले कुछ वर्षों में 175 गिगा वाट नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्‍य है। उत्‍पादन के साथ-साथ विद्युत वितरण और प्रेषण भी हमारे लिए महत्‍वपूर्ण है।

      हम अपने रेलवे क्षेत्र को आधुनिक बनाना चाहते हैं। हमने 50 शहरों में मैट्रो रेल और विभिन्‍न कॉरिडोर में हाई स्‍पीड की ट्रेनों की योजना बनाई है। हमें अपने राजमार्गों की स्थिति में भी सुधार करना है।

      हमने इस वर्ष इन दो क्षेत्रों के लिए सबसे अधिक आवंटन किया है। इसके साथ ही हमने  रेलवे को 100 प्रतिशत एफडीआई के लिए खोला है।

      हम एक महत्‍वाकांक्षी योजना सागरमाला के द्वारा पुराने बंदरगाहों का आधुनिकीकरण  और नये बंदरगाहों का निर्माण कर रहे हैं। इसी प्रकार से मौजूदा हवाई अड्डों के उन्‍नयन और आर्थिक तथा पर्यटन की दृष्टि से महत्‍वपूर्ण स्‍थानों से संपर्क बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय हवाई अड्डों का निर्माण करने पर ध्‍यान केन्द्रित किया जा रहा है।

      हम विशेष तौर पर निर्माण क्षेत्र को प्रोत्‍साहित करना चाहते हैं जिससे हमारे युवाओं को रोजगार प्राप्‍त हो सके। इस उद्देश्‍य के लिए हमने मेक इन इंडिया की शुरूआत की है। इस अभियान और प्रतिबद्धता में हमारे औद्योगिक आधारभूत ढांचे नीतियों और प्रणालियों को विश्‍व के सर्वोत्‍तम स्‍तरों पर लाना शामिल है ताकि भारत को वैश्विक निर्माण केन्‍द्र के रूप में परिवर्तित किया जा सके। देशभर में डिजिटल आधारभूत ढांचा प्रदान करने के लिए हमने एक अन्‍य अभियान डिजिटल इंडिया अभियान की शुरूआत की है।



स्‍वच्‍छ और हरित विकास और जीरो डिफेक्‍ट, जीरो इफेक्‍ट निर्माण हमारी एक और प्रतिबद्धता है। हमने स्‍वच्‍छ इंडिया अभियान की शुरूआत की है जिसके द्वारा हम उन्‍नत पर्यावरणीय प्रौद्योगिकी अपनाने पर जोर दे रहे हैं।

      इन सब लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करने के लिए हमने पिछले 11 महीनों में व्‍यवसायिक वातावरण को सुधारने और निवेशकों का विश्‍वास बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। हम मानते हैं कि 'व्‍यापार करने में सुगमता'  भारत में निवेश आकर्षित करने में एक महत्‍वपूर्ण कदम बना है। हम यह भी मानते हैं कि प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश महत्‍वपूर्ण है और यह वैश्विक   प्रतिस्‍पर्धी व्‍यापारिक माहौल के बिना देश में नहीं आएगा। इसलिए हम भारत को व्‍यापार करने  में सुगम देश बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं।

      देश में रोजगार और स्‍वरोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए हमने स्किल इंडिया अभियान और अन्‍य अनूठे अभियानों की शुरूआत की है। दूसरी ओर हम उद्योग और आधारभूत ढांचे क्षेत्र में तेजी से अनुमति प्रदान कर रहे हैं। इसमें पर्यावरणीय मंजूरी, औद्योगिक और नौवहन लाइसेंस सम्मिलित हैं। इसके साथ ही हमने प्रमुख क्षेत्रों जैसे रक्षा और बीमा क्षेत्रों में विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेश की सीमा को बढ़ाया है। हमने स्‍वास्‍थ्‍य उपकरणों के क्षेत्र में देश में इनके निर्माण को प्रोत्‍साहित करने के लिए प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश नीति में बदलाव किए हैं।

      हमने बहुत ही कम समय में संसद में जीएसटी विधेयक को प्रस्‍तुत किया है। हम अपनी कर नीति को बहुत अधिक स्‍थाई, पारदर्शी और पूर्वानुमेय बना रहे हैं। हमने विदेशी निवेशकों को प्रभावित करने वाले कई कर विवादों का समाधान किया है जिससे भारत में व्‍यापार के लिए उचित माहौल बनाया जा सके और प्रौद्योगिकी और पूंजी को लाना सुगम हो।

      इन शुरूआती कदमों से हमें अच्‍छे परिणाम मिले हैं। निजी निवेश और विदेशी निवेश के सकारात्‍मक संकेत मिले हैं। हमारी वृद्धि दर 7 प्रतिशत से अधिक है। गत वर्ष की समान अवधि की तुलना में अप्रैल 2014 से फरवरी 2015 की अवधि में विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेश में 39 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

      विश्‍व बैंक, अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष, ओईसीडी सहित कई अंतरराष्‍ट्रीय वित्‍तीय संस्‍थानों ने आने वाले वर्षों में और अधिक वृद्धि की संभावना व्‍यक्‍त की है। विभिन्‍न आर्थिक क्षेत्रों में हमारे द्वारा उठाए गए मजबूत कदमों के चलते मूडी ने हाल ही में भारत की रेटिंग को सकारात्‍मक के रूप में परिवर्तित किया है।

       राजनी‍ति, प्रशासन और आर्थिक क्षेत्र में विश्‍व स्‍तर पर हमने भारत की पहले जैसी  स्थिति को फिर से हासिल किया है। लेकिन हम यहां रुकने वाले नहीं हैं हमें इससे और अधिक बेहतर कार्य करना है और हम ऐसा करेंगे।

      मित्रों! मैं एक बार फिर आप सबको भारत में बदलाव देखने के लिए आमंत्रित करता हूं। हम आपके साथ कार्य करने के लिए स्थितियों को और सुगम बनाने के लिए तत्‍पर हैं।

      मैंने कल कोरिया के निवेशकों पर अतिरिक्‍त ध्‍यान देने के लिए एक विशेष प्रक्रिया बनाने की घो‍षणा की थी। इसे कोरिया प्‍लस के नाम से जाना जाएगा। इसके अतिरिक्‍त मैं आश्‍वासन देता हूं कि अगर कोई मुद्दा है तो मैं उस पर व्‍यक्तिगत रूप से ध्‍यान दूंगा।

धन्‍यवाद

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पूर्वी भारत में विकास और समृद्धि का प्रवेश द्वार बनकर उभर रहा ओडिशा: पहाड़पुर में पीएम मोदी
June 20, 2026
I extend my heartfelt birthday greetings to President Smt. Droupadi Murmu Ji, I wish her long life and excellent health: PM
Pahadpur village will now be rapidly developed as a solar village, that is, solar power will be ensured in every home here: PM
The vision of the Central Government is the development of India through the development of Eastern India: PM
To uplift tribal society, we are connecting tribal youth with opportunities for education and employment: PM
These children should get better facilities for studies; for this, around 500 Eklavya Model Schools have been opened across the country: PM

जॉय जगन्नाथ! जॉय मां किचकेश्वरी! मोर सबू भाई,भौणी,मां,मौसी मानंकु मोर नमोस्कार।

माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी, राज्यपाल श्री हरि बाबु जी, यहां के लोकप्रिय मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी जी, उप मुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव जी, प्रवती परीदा जी, ओडिशा के मंत्री गणेश सिंह खूंटिया जी, कृष्ण चंद्र महापात्र जी, सांसद नबा चरण माझी जी, मनमोहन सामल जी, बैजयंत पांडा जी, अन्य महानुभाव, भाइयों और बहनों।

हमारा ओडिशा इन दिनों उत्सवों के आनंद में डूबा हुआ है। यहाँ का गणपर्व रज, पिछले हफ्ते ही धूमधाम से मनाया गया है। महाप्रभु जगन्नाथ जी की रथ यात्रा की तैयारियां भी पुरजोश चल रही है। मयूरभंज के बारीपदा रथ यात्रा को लेकर भी उत्साह का माहौल है। और, इस सबके बीच ही लोकतन्त्र का विकास का उत्सव भी चल रहा है। ओडिशा की बीजेपी सरकार ने अपने 2 साल भी पूर्ण किए हैं। इस मौके पर, आप सबके बीच आना, मयूरभंज आने का ये सौभाग्य, और इतनी बड़ी संख्या में आप सबकी उपस्थिति, ये अवसर मेरे लिए बहुत खास है। आपका अपनापन मुझे बार-बार यहां खींच लाता है। मैं आप सभी का हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूँ। और ओडिशा की जनता को डबल इंजन सरकार में विकास यात्रा की भी बधाई देता हूँ, शुभकामनाएं देता हूं। साथ ही, इस अवसर पर मैं पंडित रघुनाथ मुर्मू जी, डॉ. दमयंती बेश्रा जी, और श्री चरण हेम्ब्रम जी जैसी विभूतियों को भी नमन करता हूँ। रघुनाथ मुर्मू जी ने संथाली भाषा के लिए ओल चिकी लिपि का निर्माण किया था। हमारी सरकार ने संथाली भाषा में भारत के संविधान को प्रस्तुत किया है। ओडिशा की संतानों को पद्म सम्मान देकर सम्मानित किया है। पिछले 2 वर्षों में ओडिशा सरकार भी इन सभी विभूतियों के सपनों को पूरा करने में दिन रात पुरुषार्थ कर रही है।

साथियों,

आज का ये अवसर इसलिए भी विशेष है, क्योंकि मयूरभंज की धरती पर पली-बढ़ीं, ओडिशा की बेटी, माननीय राष्ट्रपति जी हमारे बीच उपस्थित हैं। आज उनका जन्मदिन भी है। मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकमानाएं देता हूं, मैं उनके दीर्घायु होने और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं। जनगन्नाथ जी भगवान के श्री चरणों में प्रार्थना करता हूं। ओडिशा की बेटी आज देश के इतने बड़े पद पर पहुंची हैं, हमारा मार्गदर्शन कर रही हैं, ये हम सभी के लिए बहुत गौरव की बात है। राष्ट्रपति जी का व्यक्तित्व, उनका उदार और सहृदय स्वभाव, राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए उनका अटल समर्पण, उन्होंने मयूरभंज ही नहीं, पूरे ओडिशा की पहचान सशस्त की है। मैं इस अवसर पर, उनका विशेष रूप से अभिनंदन करता हूँ।

साथियों,

ये कार्यक्रम जब बना, तो इसमें मूल कारण तो लॉजिस्टिक था, लंबे अर्से से यहां आने के लिए चर्चा चल रही थी, लेकिन कोई तालमेल नहीं बैठता था। 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस कोलकाता में तय हुआ, तो फिर मैंने कहा अच्छा है, आज बंग दिवस भी है, तो क्यों न मैं सुबह मयूरभंज होकर के शाम को फिर कोलकाता के कार्यक्रम में जाऊं। और इसके कारण ये 20 जून तय हुई। लेकिन कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जिसकी मंगल कामनाएं ईश्वरआधीन होती हैं, और इसलिए आज एक शुभ मंगल हो गया, कि राष्ट्रपति का जन्मदिन भी, मुझे आज उनके गांव में जाकर के, उनको शुभकामनाएं देने का अवसर मिला।

साथियों,

आज मैं राष्ट्रपति जी के साथ पहाड़पुर भी गया था। मैं इस क्षेत्र के बच्चों के लिए उनके द्वारा बनवाए गए स्कूल भी गया। बच्चों के साथ कुछ यादगार समय बिताने का अवसर मुझे मिला। मैं देख रहा था, बच्चों के चेहरों की चमक, राष्ट्रपति जी की उपस्थिति और आत्मीयता, वहां मुझे ऐसा कुछ भी नहीं लगा, किसी बच्चे को ये लगा हो कि राष्ट्रपति जी आई हैं, हर बच्चे को लगता था उनकी मां आई है। वे बच्चे भी बहुत भाग्यवान हैं, कैसे इस क्षेत्र के गरीब, वंचित और आदिवसी समाज के बच्चों को प्रेरणा मिल रही है, उन्हें देश के लिए कुछ बड़ा करने का आत्मविश्वास मिल रहा है। मैं राष्ट्रपति जी का आभारी हूं कि उन्होंने इन अनुभवों से गुजरने का आज मुझे अवसर दिया। ये मेरा दिन, एक प्रकार से मेरी शिक्षा का दिवस था, कुछ सीखने का अवसर था मेरे लिए।

साथियों,

मैं आपको सरकार का ये निर्णय भी बताना चाहता हूं कि पहाड़पुर गांव को, अब तेजी से सुर्यग्राम, सोलर विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। यानी यहां हर घर में सोलर बिजली बने, इसे सुनिश्चित किया जाएगा। और हम तो बड़ा गर्व के साथ कह सकते हैं कि यही ओडिशा है, जहां कोणार्क में सुर्य मंदिर की एक पहचान है, वैसे ही पहाड़पुर सुर्यग्राम की पहचान बन जाएगा। सुर्यग्राम, से पूरा गांव सोलर विलेज के रूप में पहचाना जाए, इस दिशा में काम तुरंत शुरू हो ऐसा मेरा प्रयास रहेगा। इस अभियान से, पहाड़पुर के लोगों को मुफ्त सोलर बिजली भी मिलेगी और जो ज्यादा बिजली होगी, वो उनकी आय भी बढ़ाएगी।

साथियों,

ओडिशा में डबल इंजन सरकार के 2 साल कई मायनों में ऐतिहासिक रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी जी के नेतृत्व में, आज ओडिशा तेज गति से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। आज यहां गरीब कल्याण की योजनाओं से सामान्य मानवी का जीवन बदल रहा है। ओडिशा में आर्थिक गतिविधियाँ निवेश और उद्योगों को आकर्षित करने का सामर्थ्य आज नज़र आ रहा है। यहाँ रोजगार के नए अवसरों के लिए तेजी से काम हो रहा है।

साथियों,

केंद्र सरकार का विज़न है- पूर्वी भारत के विकास से भारत का विकास। इसीलिए, हम पूर्वोदय की नीति पर काम कर रहे हैं। जिस पूर्वी भारत को काँग्रेस के दौर में पिछड़ेपन का पर्याय बना दिया गया था, आज वो प्रगति का प्रवेश द्वार बन रहा है। आज ओडिशा खुद इस बदलाव का साक्षी बन रहा है।

साथियों,

ओडिशा के पास समुद्र है, खनिज संपदा है, कृषि की शक्ति है और सबसे सामर्थ्यवान यहां युवा प्रतिभा है। इस सामर्थ्य का पूरा उपयोग करने के लिए हम मिलकर काम कर रहे हैं। इसीलिए, आज ओडिशा में रेलवे इनफ्रास्ट्रक्चर में रिकॉर्ड निवेश हो रहा है। नई सड़कें और आर्थिक कॉरिडोर बन रहे हैं। पोर्ट्स का विस्तार हो रहा है। ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी और आधुनिक उद्योगों में निवेश आ रहा है। आज भी यहां ओडिशा के विकास से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है। इन परियोजनाओं पर लगभग 47 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बिजली, सड़क, रेलवे, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी इन परियोजनाओं से, आप सभी लोगों को बहुत सुविधा होने वाली है। मैं इन परियोजनाओं के लिए ओडिशा के लोगों को बहुत बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

हमारी सरकार ओडिशा के संसाधनों को, ओडिशा की संभावनाओं में बदल रही है। ओडिशा में बड़ा निवेश आए, यहाँ नए उद्योग लगें, इसके लिए उत्कर्ष ओडिशा जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके तहत, अब तक करीब 20 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। साढ़े 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की अनेक मेगा परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है। उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण बने, इसके लिए ओडिशा के समग्र विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। पावर सेक्टर में 6 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश हो रहा है। समृद्ध शहर योजना के तहत शहरी विकास को गति दी जा रही है। आने वाले वर्षों में इन प्रयासों का परिणाम हमें देखने को मिलने वाला है।

साथियों,

डबल इंजन सरकार की बड़ी विशेषता ये है कि वो खुद जनता तक पहुँचती है। हमारा प्रयास है कि सामान्य नागरिक को किसी समस्या के समाधान के लिए अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़े। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि युवाओं, महिलाओं, किसानों और आम लोगों की अपेक्षाएँ आज पूरी हो रही हैं। आप देखिए, धान खरीद में किसानों को 3,100 रुपये प्रति क्विंटल देने का निर्णय लिया गया। सुभद्रा योजना के माध्यम से एक करोड़ से अधिक माताओं और बहनों तक आर्थिक सहायता पहुंचाई गई। आयुष्मान भारत को लागू करके ओडिशा के परिवारों के लिए देशभर के अस्पतालों में इलाज का रास्ता खोला गया। आदिवासी विद्यार्थियों की पढ़ाई बीच में न छूटे, इसके लिए माधो सिंह हाथ-खर्चा योजना शुरू की गई। महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी के भक्तों की भावनाओं का सम्मान करते हुए श्रीमंदिर के श्रद्धालुओं के लिए सारे द्वार खोल दिए गए, चारों-चार द्वार खोल दिए गए। डबल इंजन की ताकत मिलने से आज यहां चारों दिशाओं में विकास सुनिश्चित हो रहा है।

साथियों,

यहां बीते दिनों स्वच्छता को लेकर जो विशेष अभियान चला है, उसकी भी मुझे जानकारी मिली है। और मैं देख रहा था सोशल मीडिया में तो सफाई अभियान छाया हुआ है, यानी स्वच्छता से स्वागत, मैं ओडिशा की इस पहल के लिए, यहां के नगारिको का, सरकार का, मुख्यमंत्री जी का, इस प्रशंसनीय पहल के लिए बहुत ही प्रशंसा करता हूं, संतोष व्यक्त करता हूं।

साथियों,

स्वच्छता हमारे जीवन शैली का हिस्सा होनी चाहिए, हर रोज की आदत होनी चाहिए। मैं यहां स्वच्छता अभियान से जुड़े सभी लोगों का हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

मैंने अपने जीवन का कुछ महत्वपूर्ण कालखंड जनजातीय क्षेत्रों में एक वालंटियर के रूप में काम करते हुए बिताया है। माननीय राष्ट्रपति जी तो बरसों तक ऐसे क्षेत्रों में चुनौतियां का सामना करती रही हैं। आप और हम जानते हैं कि जनजातीय क्षेत्रों में जीवन की सुविधाएं आसानी से नहीं पहुंचती थीं। इसलिए, हमारी सरकार ने जनजातीय विकास को बहुत प्राथमिकता दी है। हमने ऐसे इलाकों को सुविधाओं से जोड़ने के लिए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान शुरू किया। इसके तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, आवास से जुड़े विभाग मिलकर के सर्वागीण विकास के लिए काम कर रहे हैं। ताकि वहां रहने वाले लोगों की कठिनाइयां दूर हो सकें। इसी तरह, पीएम जनमन अभियान तो राष्ट्रपति जी के साथ हुई चर्चाओं का, उनके मार्गदर्शन का ही परिणाम है। ये विशेष रूप से देश के ऐसे जनजातीय समूहों के लिए है, जो जनजातीय समुदाय में भी सबसे पीछे रह गए हैं। ऐसे जनजातीय समुदायों तक अब सरकार स्वयं चलकर उनके गांव, उनके दरवाजे तक पहुंच रही है।

साथियों,

आदिवासी समाज के उत्थान के लिए हम आदिवासी युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसरों से जोड़ रहे हैं। इन बच्चों को पढ़ाई की बेहतर सुविधा मिले, इसके लिए देश में करीब 500 एकलव्य मॉडल स्कूल खोले गए हैं। करीब साढ़े सात सौ एकलव्य स्कूल स्वीकृत किए गए हैं। प्री-मैट्रिक और पोस्ट मैट्रिक लेवल पर, डेढ़ करोड़ से अधिक आदिवासी बच्चों को सैकड़ों करोड़ रुपए की स्कॉलर्शिप दी गई है। मुझे ये बताते हुए भी खुशी है कि यहां मयूरभंज में एक और नवोदय विद्यालय बनाने के लिए भी स्वीकृति दे दी गई है।

साथियों,

दूर-दराज इलाकों में रहने के कारण, जनजातीय समाज स्वास्थ्य से जुड़ी कठिनाइयों का भी शिकार रहा है। सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारियाँ एक बहुत बड़ी चुनौती रही हैं। हमने इनके खिलाफ देश भर में अभियान चलाया, चार करोड़ से ज्यादा हेल्थ कार्ड बांटे, मुफ्त इलाज के लिए करोड़ों आदिवासी लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड दिये। जल जीवन मिशन के तहत घर-घर साफ पानी पहुंचाया जा रहा है। इन प्रयासों का परिणाम आज हमें दिख रहा है। आदिवासी समाज दशकों पुरानी कठिनाइयों से बाहर आ रहा है, और, विकास की मुख्यधारा का हिस्सा बन रहा है।

साथियों,

आने वाले समय में हमारे सामने दो महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। 2036 में ओडिशा के गठन के 100 वर्ष पूरे होंगे। और, 2047 में भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने वाले हैं। यानी, ओडिशा और देश का लक्ष्य एक ही दिशा में है। ओडिशा की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, तो भारत मजबूत होगा। मुझे ओडिशा के सामर्थ्य पर भरोसा है। हमें मिलकर ओडिशा को विकास की बुलंदियों पर पहुंचाना है।

साथियों,

कल 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भी मनाया जाना है। ज्ञान और योग की धरती ओडिशा, योग यहाँ के संस्कारों का हिस्सा रहा है। मैं ओडिशा की धरती से पूरे देश से, पूरी दुनिया के लोगों से आह्वान करता हूँ, आप सब ज्यादा से ज्यादा संख्या में योग दिवस में हिस्सा लें। मैं एक बार फिर आप सभी को आज के अवसर, और विकास परियोजनाओं की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मैं माननीय राष्ट्रपति जी का विशेष रूप से आभार प्रकट करता हूं, कि मुझे उनके साथ उनकी कर्मभूमि को देखने का मौका मिला। एक बार फिर उन्हें जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई। बहुत-बहुत धन्यवाद।

जय जगन्नथ।

जय जगन्नथ।

जय जगन्नथ।