प्रधानमंत्री आवास योजना से उन लोगों को लाभ मिलेगा जो अपना घर बनाने में समर्थ नहीं हैं: प्रधानमंत्री मोदी
केवल जनसांख्यिकीय लाभांश के बारे में बात करके नहीं होगा। हमारे युवाओं में कौशल होना चाहिए और उन्हें रोजगार बनाने वाला बनाना होगा: पीएम
प्रधानमंत्री आवास योजना से आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी: प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री आवास योजना 2022 तक ‘सभी के लिए आवास’ के लक्ष्य की पूर्ति की दिशा में एक कदम है: प्रधानमंत्री
कौशल विकास युवाओं के लिए अनेक अवसर लेकर आता है: प्रधानमंत्री मोदी
मुद्रा योजना से नए उद्यमियों को बढ़ावा और मौजूदा उद्यमियों को लाभ मिल रहा है: प्रधानमंत्री मोदी

मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठ महानुभाव, उपस्थित भाइयों और बहनों, साईं राम वेकैंया जी ने मेरा काम सरल कर दिया कि अब किसी का नाम बोलना नहीं है। न कभी चिंता रहती है किसी का नाम छूट जाता है। वेंकैया जी का सुपर फास्ट एक्सप्रेस की तरह भाषण सुन लिया आपने।

अभी रमन सिंह वर्णन कर रहे थे कि 6 बजे निकले हैं मोदी जी संडे होलीडे होता है। तो मेरे लिये real sense में होलीडे होता है। मैं होलीडे के संबंध में कहता हूं पवित्र दिवस। सारे काम जितने कर सकते हैं करना चाहिए। और मैं जब शाम को बिस्तर पर जाऊंगा तब तक पांच राज्यों का आज मेरा दौरा हो गया होगा। दिल्ली से चला हूँ छत्तीसगढ़ आया हूं यहां से ओड़िशा जाऊंगा, ओड़िशा से पश्चिम बंगाल जाऊंगा फिर वहां से उत्तर प्रदेश जाकर के सो जाऊंगा।

जनता जनार्दन जब कोई जिम्मेदारी देती है तो उसको पूरे मनो योग से पूर्ण करने का प्रयास करना चाहिए। और हर किसी ने कोशिश करनी चाहिए। आज यहां मुझे साईं बाबा की प्रतिमा का लोकार्पण करने का अवसर मिला। ये अस्पताल गरीबों की निःशुल्क सेवा करने का काम करती है, खासकर के बालकों के हृदय का ऑपरेशन, जो लोग पुट्टापर्थी गये होंगे वहां एक बहुत बड़ा अस्पताल और साईं बाबा का जो सामाजिक काम था उस चीज पर लोगों का बहुत कम ध्यान जाता है। चमत्कारों की चर्चा बहुत होती है। लेकिन उन्होंने जो पानी में काम किया है। शिक्षा में काम किया है। स्वास्थ में जो काम किया है। ये सचमुच में बहुत प्रेरक है। एक भी चमत्कार की चर्चा न करें तो भी ये काम अपने आप में बहुत बड़ा चमत्कार है। मैं बाबा के इस महान सामाजिक कामों को प्रणाम करता हूं। आज यहां एक नई नीति का प्रारूप आपके सामने प्रस्तुत किया गया। innovation and Entrepreneurship के संबंध में। मैं रमण सिंह जी उनकी सरकार को बधाई देता हूं कि उन्होंने इस दिशा में सोचा और सरकार क्या करेगी, क्या कर सकती है लोगों को क्या करना चाहिए और सरकार और लोग मिलकर के क्या कर सकते हैं। इसका उसमें एक खाका है। दुनिया में पिछले 50 वर्ष में जिन देशों ने प्रगति की है। अगर उसकी तरफ हम नजर करें तो हमें ध्यान में आता है। उन देशों के प्रगति के मूल में एक बात है innovation अनेक नई चीजों को लेकर के आए। अनेक नई कल्पना को लेकर के आए, जिसको दुनिया ने स्वीकार किया। और वो innovation समाज हितकारी बना लेकिन वो उस राष्ट्र के लिये आर्थिक उन्नती का कारण बन गया। और innovation नहीं होता है तो एक ठहराव आ जाता है। रुकावट आ जाती है। जीवन समाज का एक सहज स्वभाव होना चाहिए वो युगानुकूल परिवर्तन करता रहे। आविष्कार की परम्परा निभाए रखे। और नये -नये आविष्कारों को समाज उपयोगी, जनोपयोगी कैसे बनाएं उस दिशा में प्रयास करे। Entrepreneurship, हमारे देश 65 प्रतिशत जहां पर नौजवान हैं demographic division ये भारत के एक बहुत बड़ी शक्ति के रूप में दुनिया देख रहा है। लेकिन अगर हम इस demographic division के सिर्फ माला जपते रहेंगे कि हमारे पास 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 साल से कम उम्र की है, तो बात बनने वाली नहीं है। ये 65 प्रतिशत जनसंख्या उसके हाथों में हुनर हो। अपना कौशलय दिखाने के लिए वो आर्थिक व्यवस्था का प्रबंधन हो। सरकार की नीतियां ऐसे छोटे-छोटे उद्यमकारों को प्रोत्साहित करने वाले हों। हमारा युवा जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बनें। वो खुद नौकरी खोजने कि बजाय मैं खुद दो चार लोगों को नौकरी दूंगा। ये सपने लेकर के काम करे। और ये एक माहौल देश में बन सकता है। सरकार ने जो योजना बनाई है। वो सारी योजनाएं इन बातों को बल देती है। ग्रेजुएट होना, सर्टिफिकेट लेकर के दर दर भटकते रहना। ये मेरे देश के युवा की जिन्दगी नहीं हो सकती है। मेरे देश के युवा की जिन्दगी उसके सपनों को साकार करने के लिए अनुकूल माहौल बना कर के उस सपनों को पूरा करने वाले होने चाहिए। और दिशा में सरकार के एक के बाद एक कदम उस स्थितियों को प्राप्त करने के लिए है।

स्किल डेवलपमेंट देश के नौजवानों को हुनर का अवसर देता है। मुद्रा योजना ऐसे नए Entrepreneur हैं, और पुराने भी हैं जो विस्तार करना चाहते हैं। उनके लिए है without कोई गारंटी देश के सामान्य लोग जो कभी बैंकिंग के दरवाजे तक जा नहीं सकते थे। साहुकार जिनको लूटते थे। ब्याज बेशुमार होता था। और कभी-कभी उसे गांव छोड़कर भागना पड़ता था या संसार छोड़ कर चला जाना पड़ता था। इस चंगुल से उसे बचाने के लिए। छोटे-छोटे लोग, धोबी हो, नाई हो, बर्तन बेचने वाले हो, कपड़े बेचने वाले हो, मोमबत्ती, अगरबत्ती बेचने वाले हो, पूजा का सामान बेचने वाले हो या सामान्य लोग हों। उनको पांच हजार या दस हजार रुपये चाहिए तो भी वो साहूकार के यहां जाकर के एक प्रकार से अपने आपको गिरवी रखना पड़ता था। मुद्रा योजना के तहत 50 हजार से लेकर के दस लाख तक without गारंटी ऐसे लोगों को पैसा देने का प्रबंध शुरू कर दिया है। अब तक दो करोड़ लोगों को राशि दे दी गई है। और करीब-करीब एक लाख करोड़ से ज्यादा राशि दे दी गई है। किसी भी प्रकार की गारंटी मांगे बिना दे दी गई है। और इरादा यह है कि वो अपने कारोबार को बढ़ाएं। ताकि उसमें गरीबों को रोजगार दें। एक को दें, दो को दें, चार को दें। लेकिन इसी से काम बढ़ने वाला है। और इसलिए दुनिया में प्रचलित मान्यता रही है कि आर्थिक विकास के लिए एक प्राइवेट सैक्टर, दूसरा पब्लिक सैक्टर यानी Government के PSUs होंगे या कॉर्पोरेट हाउसेस होंगे। भारत जैसे देश में तीसरी विधा की आवश्यकता है। उस तीसरी विधा में मैं बल दे रहा हूं और वो है परसनल सैक्टर।

प्राइवेट सैक्टर का आपना उपयोग है, पब्लिक सैक्टर का आपना उपयोग है, लेकिन परसनल सैक्टर जहां हर व्यक्ति एक Entrepreneur बनें। और ये जो नीति लेकर के आज छत्तीसगढ़ आया है। उसमें उसकी झलक है। मुद्रा योजना से उसको फाइनेन्स मिले। स्किल डेवलप से उसको स्किल मिले। और मार्केट पॉजिटिव मार्केट का एक Environment Create हो जाए। मुझे खुशी है कि ये जो दो करोड़ लोगों को मदद मिली है। उसमें करीब-करीब 70 प्रतिशत SCs, STs या OBCs के लोग हैं बहुत बड़ी मात्रा में महिला Entrepreneur आगे आई हैं। ये जो ताकत खड़ी हो रही है। वो जो इस नीतियों को लेकर के छत्तीसगढ़ आए हैं। मैं मानता हूं उसके साथ जुड़ कर के ये दोनों की शक्ति काम आएगी। और केन्द्र सरकार और राज्य सरकार की शक्ति मिलती है तो फिर तेजी बहुत बढ़ जाती है। और मुझे विश्वास है कि छत्तीसगढ़ के नौजवानों को इसका लाभ मिलेगा।

आज प्रधानमंत्री आवास योजना का भी आरंभ हो रहा है। देश की आजादी के इतने सालों के बाद पांच करोड़ परिवार ऐसे हैं। जिनके लिए आवास निर्माण आवश्यक है।

करीब दो करोड़ शहरों में हैं, तीन करोड़ गावों में हैं और ये वो लोग हैं कि अपने बल बूते पर मकान बना पाएं संभव नहीं है। न उसके पास जमीन है न उसके पास पैसा है। विकास के लिए व्‍यवस्‍थाएं कभी कभी बहुत बड़ा रोल प्‍ले करतीं हैं। गरीब से गरीब व्‍यक्ति होगा। झुग्‍गी झोंपड़ी में जीता होगा, तो वो जीने के तरीके ऐसे ढूंढ लेता है कि रात को सोने के लिए आता है फिर दिन को चला जाता है। न उसके परिवार का माहौल बनता है न उस व्‍यक्ति के सपने सजते हैं। लेकिन अगर उसको छोटा सा मकान भी दिया जाए, तो वो पैसे भरने के लिए तैयार होता है। सरकार अगर मदद करे, बैंक अगर मदद करे, पब्लिक प्राइवेट partnership मॉडल से आगे बढ़े।

एक बार मकान हो जाता है दूसरा मन कर जाता है। मेहमान आते हैं तो घर में प्रवेश जहां होता है तो पैर पोछने के लिए भी कुछ रखना चाहिए। तो सोचता है कि यार दस रूपये बचा लो तो कुछ ला करके रखना चाहिए। फिर उसको लगता है कि लोग आते हैं झुग्‍गी झोंपड़ी में तो चलता था अब थोड़ा दरी वरी लानी पड़ेगी थोड़ा पैसे बचाता है एक दरी लेता है अगले महीने। फिर थोड़े दिन हो जाते हैं तो उसको लगता है कि बच्‍चों को पढ़ना चाहिए। तो बच्‍चों को पढ़ने के लिए सोचने लगता है।

एक बार चारदीवारी आ जाती है, छत आ जाती है तो उसके सपनों में जान आ जाती है और वो नई नई चीजें करने लग जाता है।

और इसलिए ये प्रधानमंत्री आवास योजना वो Infrastructure नहीं है। ये प्रधानमंत्री आवास योजना, ये उन दीवारों को खड़ी करने के लिए नहीं है। किसी को जगह दे देंगे वो उन सपनों को जान भरने का एक बहुत बड़ा कार्यक्रम है। जो हिन्‍दुस्‍तान के गरीब से गरीब व्‍यक्ति को अपना और इंसान जो सामान्‍य व्‍यक्ति के मन की जो इच्‍छा होती है जो कहीं भी रहता हो यार अपना घर हो तो अच्‍छा हो, हर किसी की इच्‍छा रहती है। लेकिन उस गरीब की इच्‍छा पूरी नहीं होती। कोई गरीब मरने के बाद अपने बच्‍चों को विरासत में गरीबी देना नहीं चाहता है। और गरीब से गरीब मां बाप भी अपने बच्‍चों को गरीबी विरासत में नहीं देना चाहता है। वो भी उसको कुछ दे करके जाना चाहता है। सरकार ने सपना देखा है।

2022 भारत की आजादी को 75 साल होंगे। क्‍या अभी से देश का हर नागरिक, देश की सभी सरकारें, देश की स्‍थानीय स्‍वराज की सभी संस्‍थाएं, जो-जो भी सार्वजनिक जीवन में या वैक्तिगत जीवन में सोचने वाले लोग हैं। उन सब ने 2022 के लिए संकल्‍प मन में लेना चाहिए कि 2022 जब देश की आजादी के 75 साल होंगे जिन महापुरूषों ने इस देश की आजादी के लिए बलिदान दिया। जवानी जेलों में खपाई, फांसी के फंदे पर लटक गये, पीठ पर पुलिस के डंडे खाए, उन लोगों ने जिन्होंने इतना त्‍याग किया, तपस्‍या की और हमें आजादी दी उनको आजादी के 75 साल के वर्ष पर हम क्‍या दे सकते हैं उसका संकल्‍प हर देशवासी का होना चाहिए। हम उनको कैसा भारत दें। भारत की आजादी के दीवानों को आजादी के 75 साल पर कैसा भारत दें। ये सपना देखना चाहिए। हमने ये सपना देखा है कि जब आजादी के 75‍साल हों हिन्‍दुस्‍तान के गरीब के गरीब का भी अपना घर हो।

2022 तक पांच करोड़ घर बनाने हैं। काम बहुत बड़ा हैं मैं जानता हूं। मानव संसाधन लगेंगे। लेकिन इससे रोजगार भी बढ़ेगा। सीमेंट बिकेगा, लोहा बिकेगा मेन्शन के काम करने वालों को काम मिलेगा। ईंट माटी, भट्टा,चूना सब काम करने वालों को काम मिलने वाला है। देश के अन्‍दर एक बहुत बड़ी आर्थिक प्रवृत्ति ये भी देश के युवा पीढ़ी के काम आने वाली है। जीवन बदलने वाला है और इसलिए उस कार्यक्रम का आज यहां पर आरंभ होने वाला है। पूरे देश में सभी सरकारें आगे आएं जितना हो सके जल्‍दी अपने यहां जमीन के संबंध में जगह तय करें। भारत सरकार इस काम को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। राज्‍य और केन्‍द्र मिलकरके इस काम को करेंगे और देश के गरीब से गरीब को हम एक छत्‍त देंगे। जिस छत के सहारे उसके सपनों को जान देंगे। और वो जानदार सपनों से देश 2022 में नई ऊंचाइयों को प्राप्‍त करेगा। इसी एक विश्‍वास के साथ मैं फिर एक बार रमन सिंह जी को उनकी टीम को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। श्रीमन वेंकैया जी, इस विभाग के मंत्री हैं दिन रात उन्‍होंने इस काम के पीछे लगे रहे हैं और मुझे विश्‍वास है कि ये सपना साकार होकर रहेगा। बहुत बहुत धन्‍यवाद

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Text of PM’s address at the News18 Rising Bharat Summit
February 27, 2026
Developed nations are eager to sign trade deals with India because a confident India is rising beyond doubt and despair: PM
In the last 11 years, a new energy has flowed into the nation's consciousness, India is determined to regain its rightful strength: PM
India's Digital Public Infrastructure has today become a subject of global discussion: PM
Today, every move India makes is closely watched and analysed across the world, the AI Summit is a clear example of this: PM
Nation-building never happens through short-term thinking; It is shaped by a long-term vision, patience and timely decisions: PM

इजराइल की हवा यहाँ भी पहुँच गई है।

नमस्कार!

नेटवर्क 18 के सभी पत्रकार, इस व्यवस्था को देखने वाले सभी साथी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी राइजिंग भारत की चर्चा कर रहे हैं। और इसमें strength within पर आपका जोर है, यानी साधारण शब्दों में कहूं, तो देश के अपने खुद के सामर्थ्य पर आपका फोकस है। और हमारे यहां तो शास्त्रों में कहा गया है - तत् त्वम असि! यानी जिस ब्रह्म की खोज मे हम निकले हैं, वो हम ही हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो सामर्थ्य हमारे भीतर है उसे हमें पहचानना है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपना वही सामर्थ्य पहचाना है, और इस सामर्थ्य को सशक्त करने के लिए आज देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

साथियों,

सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता, सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वो ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है, लेकिन इतिहास के एक लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों में, हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को ही हीनता से भर दिया गया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर ये भर दिया था, कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी यानी, फॉलोअर हैं, हमारे यहां ये भी कहा गया है – यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी। यानी जैसी जिसकी भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती है। जब भावना में ही हीनता थी, तो सिद्धि भी वैसी ही मिल रही है। हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे, विदेशी मुहर का इंतजार करते थे, ये वो गुलामी थी जो राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी, भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया। और इसका नुकसान हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण, हम ट्रेड डील्स में हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि अरे ये क्या हो गया, कैसे हो गया, विकसित देश भारत से ट्रेड डील्स करने में इतने उत्सुक क्यों हैं। इसका उत्तर है हताशा, निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत। अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा होता, अगर ये हाल होते तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील्स करता, अरे हमारी तरफ देखता भी नहीं।

लेकिन साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोये हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। एक समय में जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा दबदबा था, तो हमारा क्या सामर्थ्य था? भारत की मैन्युफैक्चरिंग, भारत के प्रोडक्टस की क्वालिटी, भारत की अर्थ नीति, अब आज का भारत फिर से इन बातों पर फोकस कर रहा है। इसलिए हमने मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया, हमने मेक इन इंडिया पर बल दिया, हमने अपनी बैंकिंग सिस्टम को सशक्त किया, महंगाई जो डबल डिजिट की दर से भाग रही थी, उसका कंट्रोल किया और भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन बनाया। भारत का यही सामर्थ्य है कि दुनिया के विकसित देश सामने से भारत के साथ ट्रेड डील करने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

साथियों,

जब किसी राष्ट्र के भीतर, छिपी हुई उसकी शक्ति जागती है, तो वह नई उपलब्धियां हासिल करता है। मैं आपको कुछ और उदाहरण देता हूं। जैसे मैं जब कभी दूसरी देशों के हेड ऑफ द गर्वमेंट से मिलता हूं, तो वो जनधन, आधार और मोबाइल की इतनी शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं। जिस भारत में एटीएम भी, दुनिया की विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली? जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था, वो भारत डीबीटी के जरिये 24 लाख करोड़ रूपये, यानी Twenty four trillion रुपीज कैसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है? भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है।

साथियों,

दुनिया हैरान होती है, कि जिस भारत में 2014 तक, करीब तीन करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वो आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गया? जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद ना थी, वो भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया? जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट-लतीफी और धीमी-रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत, नमो भारत, ऐसी सेमी-हाईस्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है?

साथियों,

एक समय था, जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था। आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है। और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचाना है, जिस Strength Within की आप चर्चा कर रहे हैं, ये उसका ही उदाहरण है।

साथियों,

जब हम गर्व से आगे बढ़ते हैं, तो दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है, वो नजर भी बदली है। आप याद कीजिए, कुछ साल पहले तक दुनिया में, ग्लोबल मीडिया में, भारत के किसी इवेंट की कितनी कम चर्चा होती थी। भारत में होने वाले इवेंट्स को उतनी तवज्जो ही नहीं दी जाती थी। और आज देखिए, भारत जो करता है, जो एक्शन यहां होते हैं, उसका वैश्विक विश्लेषण होता है। AI समिट का उदाहरण आपके सामने है, इसी भवन में हुआ है। AI समिट में 100 से ज्यादा देश शामिल हुए, ग्लोबल नॉर्थ हो या फिर ग्लोबल साउथ, सभी एक साथ, एक ही जगह, एक टेबल पर बैठे। दुनिया के बड़े-बड़े कॉर्पोरेशन्स हों या फिर छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स, सभी एक साथ जुटे।

साथियों,

अब तक जितनी भी औद्योगिक क्रांतियां आई हैं, उनमें भारत और पूरा ग्लोबल साउथ सिर्फ फॉलोअर रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस युग में, भारत निर्णयों में सहभागी भी है और उन्हें शेप भी कर रहा है। आज हमारे पास खुद का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम है, डेटा-सेंटर में निवेश करने की ताकत है और AI डेटा को स्टोर करने के लिए, प्रोसेस करने के लिए, जिस पावर की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उस पर भी भारत तेजी से काम कर रहा है। हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में जो Reform किया है, वो भी भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूती देने में मदद करेगा।

साथियों,

AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था। लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने, देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे, बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालिएपन को भी expose कर दिया है। जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। ज़ाहिर है, कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है। इसलिए, इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छुपाना हो तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, और जब अपना गौरवगान करना हो, तो एक ही परिवार को सारा क्रेडिट देती है।

साथियों,

कांग्रेस अब विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की टूलकिट बनकर रह गई है। और ये अंध-विरोध की मानसिकता इतनी बढ़ गई है, कि ये देश को हर मंच, हर प्लेटफॉर्म पर नीचा दिखाने से नहीं चूकते। देश कुछ भी अच्छा करे, देश के लिए कुछ भी शुभ हो रहा हो, कांग्रेस को विरोध ही करना है।

साथियों,

मेरे पास एक लंबी सूची है, देश की संसद की नई इमारत बनी, उसका विरोध। संसद के ऊपर अशोक स्तंभ के शेरों का विरोध। अब जिनके बब्बर शेर सामान्य नागरिकों के जूते खाकर के भाग रहे थे, उनके संसद भवन के शेर के दांत देखकर के डर लग गया उनको। कर्तव्य भवन बना, उसका भी विरोध। सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की, उसका भी विरोध। बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, उसका भी विरोध। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, उसका भी विरोध। यानी देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस के टूलकिट से एक ही चीज निकलती है- विरोध।

साथियों,

देश ने आर्टिकल 370 की दीवार गिराई, देश खुश हुआ। लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया। हमने CAA का कानून बनाया- उसका विरोध। हम महिला आरक्षण कानून लाए- उसका विरोध। तीन तलाक के विरुद्ध कानून लाए- उसका विरोध। हम UPI लेकर आए, उसका विरोध। स्वच्छ भारत अभियान लेकर आए, उसका विरोध। देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई, तो उसका भी विरोध।

साथियों,

लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध-विरोध नहीं होता, डेमोक्रेसी में विपक्ष का मतलब वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता, कांग्रेस को सबक सिखा रही है, आज से नहीं, बीते चार दशकों से लगातार ये काम देश की जनता कर रही है। मैं जो कहने जा रहा हूं, मीडिया के साथी उसका भी ज़रा एनालिसिस करिएगा। आपको पता लगेगा कि कांग्रेस के वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि देश के लोग अब कांग्रेस को वोट देने लायक ही नहीं मानते। और इसकी शुरुआत 1984 के बाद ही होनी शुरू हो गई थी। 1984 में कांग्रेस को 39 परसेंट वोट मिले थे, और 400 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस के वोट कम ही होते चले गए। और आज कांग्रेस की हालत ये है कि, देश में सिर्फ, सिर्फ चार राज्य ऐसे बचे हैं, जहां कांग्रेस के पास 50 से ज्यादा विधायक हैं। बीते 40 वर्षों में युवा वोटर्स की संख्या बढ़ती गई और कांग्रेस साफ होती गई। कांग्रेस, परिवार की गुलामी में डूबे लोगों का एक क्लब बनकर रह गई है। इसलिए पहले मिलेनियल्स ने कांग्रेस को सबक सिखाया, और अब जेन जी भी तैयार बैठी है।

साथियों,

कांग्रेस और उसके साथियों की सोच इतनी छोटी है, कि उन्होंने दूरदृष्टि से काम करने को भी गुनाह बना दिया है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं— “इतनी दूर की बात अभी क्यों कर रहे हो?” कुछ लोग ये भी कहते हैं कि तब तक मोदी जिंदा थोड़ी रहेगा, सच्चाई यह है कि राष्ट्र निर्माण कभी भी तात्कालिक सोच से नहीं होता। वो एक बड़े विजन, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से होता है। मैं कुछ और तथ्य नेटवर्क 18 के दर्शकों के सामने रखना चाहता हूं। भारत हर साल विदेशी समुद्री जहाजों से मालढुलाई पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है किराए पर। फर्टिलाइजर के आयात पर हर साल सवा दो लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम आयात पर हर साल 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे हैं। अगर यही निवेश 20–25 वर्ष पहले आत्मनिर्भरता की दिशा में किया गया होता, तो आज ये पूंजी भारत के इंफ्रास्ट्रचर, रिसर्च, इंडस्ट्री, किसान और युवाओं की क्षमताओं को मजबूत कर रही होती। आज हमारी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। विदेशी जहाजों को 6 लाख करोड़ रुपए ना देना पड़े इसलिए भारतीय शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। फर्टिलाइजर का domestic प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नए प्लांट लग रहे हैं, नैनो-यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।

और साथियों,

हमें भविष्य की ओर देखते हुए भी आज ही निर्णय लेने हैं। इसलिए आज भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। रक्षा उत्पादन में, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में, ड्रोन टेक्नोलॉजी में, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में, और उसमें निवेश, आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा की नींव है। 2047 का लक्ष्य कोई राजनीतिक नारा नहीं है। यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का संकल्प भी है, जहाँ कांग्रेस की सरकारों के समय कई क्षेत्रों में समय रहते निवेश नहीं किया। आज अगर हम ख़ुद स्वदेशी जहाज, स्वदेशी शिप्स बनाएँगे, ख़ुद एनर्जी का प्रोडक्शन करेंगे, ख़ुद नई टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे, तो आने वाली पढ़ियाँ इम्पोर्ट के बोझ की नहीं, एक्सपोर्ट की क्षमता पर चर्चा करेंगी। राष्ट्र की प्रगति “आज की सुविधा” से नहीं, “कल की तैयारी” से तय होती है। और दूरदृष्टि से की गई मेहनत ही 2047 के आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत की आधारशिला है। और इसके लिए कांग्रेस अपने कितने ही कपड़े फाड़ ले, हम निरंतर काम करते रहेंगे।

साथियों,

राष्ट्र निर्माण की, Nation Building की एक बहुत अहम शर्त होती है- नेक नीयत की। कांग्रेस और उसके साथी दल, इसमें भी फेल रहे हैं। कांग्रेस और उसके साथियों ने कभी नेक नीयत के साथ काम नहीं किया। गरीब का दुख, उसकी तकलीफ से भी इन्हें कोई वास्ता नहीं है। जैसे बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई। अगर नेक नीयत होती तो क्या गरीबों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका जाता क्या? नहीं। आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं। नेटवर्क 18 के दर्शकों को मैं एक और आंकड़ा देता हूं। तमिलनाडु के गरीब परिवारों के लिए, करीब साढ़े नौ लाख पक्के घर एलोकेट किए गए हैं, साढ़े नौ लाख। लेकिन इनमें से तीन लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्यों, क्योंकि DMK सरकार गरीबों के इन घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह है, नीयत नेक नहीं है।

साथियों,

मैं आपको एग्रीकल्चर सेक्टर का भी उदाहरण देता हूं। कांग्रेस के समय में खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। छोटे किसानों को कोई पूछता नहीं था, फसल बीमा का हाल बेहाल था, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई थी, कांग्रेस बजट में घोषणाएं जरूर करती थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था, क्योंकि उसकी नीयत ही नहीं थी। हमने देश के किसानों के लिए नेक नीयत के साथ काम करना शुरू किया, और आज उसके परिणाम दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर एक्सपोर्टर्स में से एक बन रहा है। हमने हर स्तर पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खाते में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक जमा किए गए हैं। हमने लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया और रिकॉर्ड खरीद भी की है। मैं आपको सिर्फ दाल का ही आंकड़ा देता हूं। UPA सरकार ने 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दाल, किसानों से MSP पर खरीदी- 6 लाख मीट्रिक टन। और हमारी सरकार अभी तक, करीब 170 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 30 गुणा अधिक दाल MSP पर खरीद चुकी है। अब आप तय करिये, कौन किसानों के लिए काम करता है।

साथियों,

यूपीए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किसानों को मदद देने में कंजूसी करती थी। अपने 10 साल में यूपीए सरकार ने सात लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण किसानों को दिया। 7 lakh crore rupees. जबकि हमारी सरकार इससे चार गुणा अधिक यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है। यूपीए सरकार के दौरान जहां सिर्फ पांच करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलता था, आज ये संख्या दोगुने से भी अधिक करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को पहुंची है। यानी देश के छोटे किसान को भी पहली बार मदद मिली है। हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी किसानों को दिया। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं। हम नेक नीयत से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, और आय में भी वृद्धि हो रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अब अगला चरण भारत के विकास का निर्णायक दौर है। वर्तमान में लिए गए निर्णय ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। हमें अपने सामर्थ्य को पहचानते हुए, उसे बढ़ाते हुए आगे चलना है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता को लक्ष्य बनाए, हर संस्था excellence को अपना संस्कार बनाए, हम सिर्फ उत्पाद न बनाएं, best-quality product बनाएं, हम सिर्फ रुटीन काम न करें, world-class काम करें, हम क्षमता को performance में बदलें। मैंने लाल किले से कहा है- यही समय है, सही समय है। यही समय है, भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।