प्रधानमंत्री मोदी ने इकोनॉमिक टाइम्स ग्लोबल समिट को संबोधित किया
वैसे सुधारों को ही सफ़ल कहा जा सकता है जिनके फ़लस्वरूप नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए: प्रधानमंत्री मोदी
हमें अपने नागरिकों के विकास के लिए नए अवसर पैदा करने चाहिए और उनकी पसंद के अवसर उपलब्ध कराने चाहिए: प्रधानमंत्री
मुझे विश्वास है कि चुनौतियों के बावजूद हम आम लोगों के कल्याण की दिशा में सफलतापूर्वक आगे बढ़ सकते हैं: प्रधानमंत्री
उद्यमिता भारत की पारंपरिक शक्तियों में से एक है, यह दुख की बात है कि पिछले कुछ वर्षों में इसकी उपेक्षा की गई लेकिन अब स्थिति बदली है: पीएम
मैं सशक्तीकरण की राजनीति में विश्वास करता हूं। मैं लोगों को खुद का जीवन सुधारने के लिए सक्षम बनाने में यकीन करता हूं: प्रधानमंत्री
हम भारत को 2 वर्ष से कम समय में विदेशी निवेश और विकास की वैश्विक लीग तालिका के शीर्ष तक पहुँचाया है: पीएम मोदी
जब लोगों की शक्ति हमारे साथ है, मुश्किल चुनौतियां भी बहुत बड़ा अवसर बन जाती हैं: प्रधानमंत्री

श्री विनीत जैन, सम्मानित मेहमानों, मैं आज यहां आकर बेहद खुश हूं। वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। ऐसे वक्त में मैं यहां पर भारत ही नहीं विदेश से आए लोगों की भागीदारी देखकर खुश हूं। मुझे भरोसा है कि हम सभी भारतीयों को दूसरे देशों के अनुभवों से फायदा होगा। इस अवसर पर मैं आपको भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रगति और कारोबारी परिदृश्य के बारे में अपने विचारों से अवगत कराऊंगा। आप में से कुछ लोगों को याद होगा, जो मैंने पहले कहा था कि वास्तविक सुधार नागरिकों की जिंदगी में बदलाव लाना है। जैसा कि मैंने पहले कहा था, मेरा लक्ष्य है, ‘बदलाव के लिए सुधार।’ चलिए मैं बुनियादी बातों के साथ शुरुआत करता हूं। किसी भी देश की आर्थिक नीति का दिशा निर्देशन करने वाले बुनियादी सिद्धांत क्या होने चाहिए, विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए?

पहले हमें अपने प्राकृतिक और मानव संसाधनों के इस्तेमाल में सुधार करना है, जिससे हम ज्यादा परिणाम हासिल कर सकें। इसका मतलब संसाधनों के आवंटन की कुशलता बढ़ाना है। इसका मतलब ज्यादा प्रबंधन क्षमता है। इसका मतलब अनावश्यक नियंत्रण और मनमानी को खत्म करना है।

दूसरा, हमें अपने नागरिकों के विकास के लिए नए अवसर पैदा करने चाहिए और उनकी पसंद के अवसर उपलब्ध कराने चाहिए। एक आकांक्षी नागरिक के लिए अवसर ऑक्सीजन की तरह काम करते हैं और हम चाहते हैं कि इस दिशा में आपूर्ति की कभी कमी नहीं रहे। सरल शब्दों में इसी का मतलब है ‘सबका साथ, सबका विकास।’

तीसरा, हमें आम आदमी के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है और उससे भी ज्यादा गरीबों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो। जीवन की गुणवत्ता के आर्थिक पहलू हो सकते हैं, लेकिन यह सिर्फ आर्थिक नहीं है। यदि एक सरकार प्रगतिशील हो और ईमानदारी व कुशल प्रशासन से चल रही है तो सबसे ज्यादा फायदा गरीबों को ही होता है। मैं अपने अनुभवों से जानता हूं कि खराब प्रशासन से दूसरों की तुलना में सबसे ज्यादा नुकसान गरीबों को होता है। इसीलिए आर्थिक सुधार के लिए प्रशासन में सुधार बेहद अहम है। हम वैश्विक स्तर पर आपस में जुड़ी हुई दुनिया में रहते हैं। एक देश के कार्यों का असर दूसरों पर पड़ता है। ये कदम सिर्फ कारोबार और निवेश के मामले में ही नहीं होते, बल्कि प्रदूषण और पर्यावरण के मामलों में भी होते हैं। एक कवि ने कहा था कि कोई भी व्यक्ति एक द्वीप नहीं है। आज यह कहा जा सकता है कि कोई भी देश अकेले नहीं रह सकता। यह अक्सर कहा जाता है कि हर तरह की राजनीति स्थानीय होती है। मेरे लिए हर तरह की अर्थव्यवस्था वैश्विक है। घरेलू मामलों और विदेशी मामलों में भेदभाव का औचित्य तेजी से खत्म हो रहा है। आधुनिक युग में एक देश के लिए यह पर्याप्त नहीं है कि आर्थिक नीतियां सिर्फ घरेलू प्राथमिकताओं को देखते हुए बनाई जाएं। मेरे लिए भारत की नीतियां ऐसी होनी चाहिए, जिनका बाकी दुनिया पर भी सकारात्मक असर पड़े।

आप में से कई लोगों को मालूम होगा कि भारत के अंशदान से वैश्विक अर्थव्यवस्था को फायदा हो सकता है, जब दुनिया के कई हिस्सों में स्थिरता का माहौल है। बीती चार तिमाहियों से भारत दुनिया की सबसे तेजी से विकसित होने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है। 2014-15 में भारत ने क्रय शक्ति के मामले में वैश्विक जीडीपी में 7.4 प्रतिशत का योगदान किया। लेकिन इसने वैश्विक वृद्धि में 12.5 फीसदी का योगदान किया। इस प्रकार वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी की तुलना में भारत का योगदान 68 फीसदी ज्यादा रहा। बीते 18 महीनों के दौरान भारत में एफडीआई में 39 प्रतिशत का इजाफा हुआ, जब वैश्विक स्तर पर एफडीआई में कमी आ रही थी।

लेकिन एक देश का योगदान अर्थव्यवस्थाओं से आगे होता है। जलवायु परिवर्तन से अपने ग्रह की रक्षा इस पीढ़ी के लिए सबसे ज्यादा अहम कार्य है। यदि एक देश पर्यावरण के हित में काम करता है, तो इससे दूसरे देशों को भी फायदा होता है। यही वजह है कि सीओपी 21 समिट में भारत ने पृथ्वी के ज्यादा कल्याण के लिए अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की। इतिहास में जिस भी देश ने विकास किया है, उसने प्रति व्यक्ति ज्यादा उत्सर्जन किया है। हम इतिहास के पुनर्लेखन के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमने 2030 तक अपने जीडीपी की तुलना में उत्सर्जन में 33 फीसदी की कमी लाने के लिए प्रतिबद्धता जाहिर की है। एक ऐसा देश जो पहले से ही प्रति व्यक्ति कम उत्सर्जन कर रहा है, के लिए यह बेहद महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। हमने प्रतिबद्धता जाहिर की है कि 2030 तक हमारी बिजली क्षमता गैर जीवाश्म ईंधन से पैदा होगी। हमने अतिरिक्त कार्बन सिंक के निर्माण की भी प्रतिबद्धता जाहिर की है, जो 2.5 अरब टन कार्बन के समान होगी। ऐसा 2030 तक अतिरिक्त वन्य क्षेत्र तैयार करके किया जाएगा। यह प्रतिबद्धता एक ऐसे देश की तरफ से है, जहां प्रति व्यक्ति जमीन की उपलब्धता पहले से काफी कम है। हमने इंटरनेशनल सोलर अलायंस के शुभारंभ की अगुआई की है, जिसमें 121 देश शामिल हैं। इस पहल से अफ्रीका से दक्षिण अमेरिका तक कई विकासशील देशों को फायदा होगा, जो अक्षय ऊर्जा का फायदा उठा सकते हैं।

चलिये अब उन तीन नीतिगत उद्देश्यों पर आते हैं जिसका मैंने जिक्र किया। मैं भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन से बात शुरू करता हूं। अर्थशास्त्री मुख्य आर्थिक मापदंडों के रूप में जीडीपी वृद्धि, महंगाई, निवेश व राजकोषीय घाटे की बात करते हैं। जब से यह सरकार सत्ता में आई है, वृद्धि हुई है और महंगाई कम हुई है। विदेशी निवेश बढ़ा है और राजकोषीय घाटा कम हुआ है। वैश्विक व्यापार में मंदी के बावजूद भुगतान घाटे का संतुलन भी कम हुआ है।

हालांकि, इस तरह के बड़े-बड़े आंकड़ों से हम जो काम कर रहे हैं और जो उपलब्धि है, उसकी केवल आधी तस्वीर दिखेगी। कई बार कहा जाता है कि “व्याख्याओं में ही दानव रहते हैं (द डेविल इज इन द डिटेल)।” लेकिन मैं इसमें विश्वास करता हूं कि ढेर सारे कथित आंकड़ों के सही क्रियान्वयन में ही भगवान हैं। ये कथित आंकड़ें ही हैं जिसे जब ठीक ढंग से इस्तेमाल किया जाए तो एक बड़ी तस्वीर बनती है।

मुझे लगता है कि ये जानने में आपकी रुचि हो सकती है कि-

  • 2015 में भारत में अब तक का सबसे ज्यादा यूरिया खाद का उत्पादन हुआ।
  • 2015 में भारत में अब तक का सबसे ज्यादा मिश्रित ईंधन के रूप में एथेनोल का उत्पादन हुआ, जिससे गन्ना किसानों को लाभ होता है।
  • 2015 में ग्रामीण गरीबों को अब तक का सबसे ज्यादा घरेलू गैस कनेक्शन जारी किया गया।
  • 2015 में अब तक का सबसे ज्यादा कोयले का उत्पादन हुआ।
  • 2015 में अब तक का सबसे ज्यादा बिजली उत्पादन हुआ।
  • 2015 में बड़े बंदरगाहों से अब तक की सबसे ज्यादा मात्रा में सामान की आवाजाही हुई।
  • 2015 में अब तक की सबसे ज्यादा रेलवे पूंजी लागत में बढ़ोत्तरी हासिल की गई। 
  • 2015 में अब तक के सबसे ज्यादा किलोमीटर नए राजमार्ग की ख्याति अर्जित की गई।
  • 2015 में भारत का अब तक का सबसे ज्यादा मोटर गाड़ी का उत्पादन किया गया।
  • 2015 में भारत से अब तक का सबसे ज्यादा साफ्टवेयर का निर्यात किया गया।
  • 2015 में भारत ने वर्ल्ड बैंक डूइंग बिजनेस इंडिकेटर्स के मामले में अब तक की सबसे अच्छी रैंकिंग हासिल की।
  • 2015 में भारत का अब तक सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा भंडार अर्जित किया गया।

मैं जो ये आंकड़े गिना रहा हूं उसके साथ ये भी याद रखने की जरूरत है कि पूर्व के वर्षों में इनमें से कई मापक उल्टी दिशा में जा रहे थे। इनमें से ना केवल कई मापकों में सुधार हुआ है बल्कि उनमें ज्यादा तेजी भी आई है। उदाहरण के लिए, 2013-14 में कुल 3,500 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों की मंजूरी हुई। लेकिन इस सरकार के आने के बाद से इसमें दोगुने से भी ज्यादा की वृद्धि हुई, करीब 8,000 किलोमीटर, जो कि अब तक का सबसे ज्यादा है। इस साल हमारी योजना 10,000 किलोमीटर मंजूर करने की है। 

चलिये इस तरह के बड़े बदलावों के कुछ और उदाहरण आपको बताता हूं। भारतीय जहाजरानी निगम ने 2013-14 में 275 करोड़ रुपये का घाटा उठाया और 2014-15 में इसने 201 करोड़ रुपये का लाभ कमाया। एक साल में ही 575 करोड़ रुपये की आवाजाही हुई।

2013-14 में भारत ने ऊर्जा सक्षम एलईडी लाइट के वैश्विक मांग का केवल 0.1 प्रतिशत हासिल किया। 2015-16 में ये बढ़कर 12 प्रतिशत हो गया। अब भारतीय एलईडी बल्ब सबसे सस्ते हैं और दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले इसकी लागत एक डॉलर से भी कम है जबकि वैश्विक औसत 3 डॉलर का है। 2013-14 में भारत ने 947 मेगावॉट सौर ऊर्जा प्लांट्स को मंजूरी दिया। 2015-16 में यह 2500 मेगावॉट तक बढ़ गया। 2016-17 में इसके 12000 मेगावॉट तक बढ़ने की संभावना है। वैश्विक सौर ऊर्जा बाजार में भारत की हिस्सेदारी 2014 में 2.5 से बढ़कर 2016 में 18 प्रतिशत तक हो जाएगी। भारत केवल स्वच्छ ऊर्जा के मामले में हिस्सेदारी ही नहीं कर रहा बल्कि पूरी दुनिया में इसके बड़े पैमाने पर लागत में भी कमी लाकर योगदान दे रहा है। 2013-14 में 16800 किलोमीटर ट्रांसमीशन लाइनें जोड़ी गईं। पूरे बिजली क्षेत्र में, बिजली उत्पादन की लागत में 30 प्रतिशत की कमी आई।

चलिये, अब मैं दूसरे पहलू- बढ़ते अवसरों, पर बात करता हूं। मैं सशक्तीकरण की राजनीति में विश्वास करता हूं। मैं लोगों को खुद का जीवन सुधारने के लिए सक्षम बनाने में यकीन करता हूं। हमने दुनिया के सबसे बड़े और सबसे सफल आर्थिक समावेशन कार्यक्रम शुरू किए हैं। इससे करीब 20 करोड़ लोग जिनका बैंकों में खाता नहीं था उन्हें बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया है। कार्यक्रम के शुरू के दिनों में कुछ शक्की लोगों को लगा कि इन खातों में एक भी रुपया नहीं होगा। लेकिन आप को ये जानकर आश्चर्य होगा कि आज इन खातों में 30,000 करोड़ रुपये या 4 बिलियन डॉलर से ज्यादा की रकम है। हमने उन लोगों को बड़े पैमाने पर ऋण कार्ड भी जारी किया है। भारत अब उन कुछ देशों में है जहां देशी क्रेडिट कार्ड ब्रांड के बाजार में हिस्सेदारी 33 प्रतिशत से ज्यादा है।  

हमने फसल बीमा के लिए एक नया व विस्तृत कार्यक्रम शुरू किया है। इससे किसानों को बेफिक्र होकर खेती करने में सक्षम बनाया जा सकेगा और किसी जोखिम की स्थिति में राज्य उन्हें सुरक्षा प्रदान करेगा।

हमने अपने किसानों को सशक्त करने के लिए मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड जारी किया है। ये कार्ड हर एक किसान को उसकी मिट्टी के बारे में सटीक जानकारी देगा। इससे उन्हें रासयनिक खादों को अधिक इस्तेमाल को कम करने व मिट्टी की गुणवत्ता को सुधार कर अधिक मात्रा में फसल का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।

उद्यमिता, भारत का पारंपरिक आधारों में से एक रही है। लेकिन दुखद रूप से पिछले कुछ सालों में इसे नजरअंदाज किया जाता रहा है। ‘व्यापार’ और ‘लाभ’ खराब शब्द हो चले थे। हमने इसे बदला है। हमें उद्यमों की साख व कड़ी मेहनत की जरूरत है ना की धन की। मुद्रा से लेकर स्टॉर्ट अप इंडिया व स्टैंड-अप इंडिया जैसे हमारे कार्यक्रम कड़ी मेहनत व उद्यमिता के अवसर मुहैया कराएंगे। इस क्रम में हमने अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्गों व महिलाओं पर विशेष जोर दिया है। हम उन्हें खुद के मुकद्दर का सिंकदर बनने योग्य बनाना चाहते हैं।

शहरों व कस्बों की वृद्धि के लिए अवसर पैदा करना बहुत निर्णायक है। शहरी क्षेत्र वृद्धि के चालक हैं। शहरी क्षेत्रों में बदलाव के लिए स्मार्ट सिटी मिशन जैसी महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। इस मिशन में कई तरह के ‘पहली बार’ होंगे। यह पहली बार होगा कि शहरों में कुछ हिस्सों का व्यवस्थित व गुणवत्तापूर्ण तरीके से उनका समग्र विकास किया जाएगा। ये हिस्से प्रकाश स्तंभ की तरह काम करेंगे जो शहर के बाकी हिस्सों को भी आमतौर पर प्रभावित करेंगे। इसने व्यापक पैमाने पर नागरिक परामर्श पहली बार शुरू किया जा रहा है। MyGov मंच के जरिये करीब 25 लाख लोग इसमें परिचर्चाओं, जनमत, ब्लॉग व बातचीत के जरिये अपने विचार देने के लिए भाग ले रहे हैं। शहरी योजनाओ में ऊपर से नीचे तक के दृष्टिकोण में पहली बार बड़ा बदलाव आया है। यह पहली बार है कि सरकारी योजनाओं में फंड का आवंटन मंत्रियों या अधिकारियों के फैसलों से नहीं बल्कि प्रतियोगिता के आधार पर हो रहा है। यह प्रतिस्पर्धी व सहयोगी संघवाद का अच्छा उदाहरण है।

जैसे कि मैंने पहले कहा था कि सरकार की भूमिका केवल अर्थव्यवस्था के साथ ही खत्म नहीं हो जाती। लोगों की भलाई के लिए कई सारे गैर-आर्थिक आयाम भी हैं जिनका ध्यान रखा जाना चाहिए। सुशासन निर्णायक है। हमने कई ऐसे कदम उठाए हैं जिनमें बदलाव लाने की क्षमता है। हम लोगों ने उच्च स्तर के भ्रष्टाचार का दौर खत्म किया है। यह ऐसा तथ्य है जिसे भारत व विदेशों में भी इस सरकार के आलोचकों व समर्थकों द्वारा स्वीकार किया जा रहा है। यह आसान उपलब्धि नहीं है। हमने राष्ट्रीयकृत बैंकों में राजनीतिक हस्तक्षेप व आवारा पूंजी को खत्म किया है। हमने पहली बार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में निजी क्षेत्र के लोगों को सर्वोच्च पदों पर नियुक्त किया है। घोटालों से भरे प्राकृतिक संसाधन क्षेत्रों में नीलामी की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया है। 

कई सारे विशेषज्ञों ने सब्सिडी खत्म करने की जरूरत पर जोर दिया है। नई जन धन योजना के जरिये बैंकिग से सभी को जोड़कर सब्सिडी के बंदरबांट को रोका है। विकासशील देशों में आमतौर पर ईंधन पर दी जाने वाली सब्सिडी को संभालना मुश्किल होता है। हमने सफलतापूर्वक खाना बनाने के गैस के मूल्यों को विनियंत्रित किया है। अब हम घरेलू गैस के मामले में दुनिया के सबसे बड़े प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजना पर काम कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक प्रमाण के जरिये फर्जी सब्सिडी को खत्म किया गया है। इससे जरूरत मंद लोगों को उनका लाभ मिला है और जो गैर-जरूरतमंद हैं उन्हें इसका लाभ बंद किया गया है। इससे सब्सिडी में अहम कमी आई है।

एक अन्य सस्ता ईँधन केरोसीन है जिसका उपयोग गरीबों द्वारा खाना बनाने व रोशनी के लिए किया जाता है जो कि राज्य सरकारों द्वारा वितरित किया जाता है। इस बात के पक्के सुबूत हैं कि केरोसीन पर दी जाने वाली सब्सिडी का बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल हो रहा है और वो कहीं और जा रही है। हमने 33 जिलों में बाजार भाव पर केरोसीन बेचना शुरू किया है। बाजार भाव के केरोसीन व सब्सिडी वाले केरोसीन के दाम में अंतर को उन गरीब लोगों के खातों में जमा किया जाएगा। गरीबों की पहचान बैंक खातों व बायोमैट्रिक पहचान पत्र आधार के जरिये की जाएगी। इससे नकली, अयोग्य व फर्जी उपभोक्ताओं को खत्म किया जा सकेगा। इस खात्मे से कुल सब्सिडी में कमी आएगी। हमने तय किया है कि इस तरह की बचत का 75 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकारों को देंगे। इसीलिए, हम लोगों ने राज्य सरकारों को प्रोत्साहित कर रहे हैं कि वो सभी जिलों में इसे लागू करें।

चंडीगढ़ का अनुभव ये जाहिर करता है कि ये संभव है। अप्रैल 2014 में चंडीगढ़ में सब्सिडी वाले केरोसीन के 68,000 लाभार्थी थे। सभी योग्य परिवारों को गैस कनेक्शन देने का अभियान शुरू किया गया। 10,500 नए गैस कनेक्शन जारी किए गए। 42,000 उन परिवारों का केरोसीन कोटा बंद कर दिया गया जिनके पास पहले से ही गैस कनेक्शन थे। 31 मार्च, 2016 के अंत तक चंडीगढ़ केरोसीन मुक्त घोषित हो जाएगा। आप इस पर विश्वास करें या नहीं लेकिन अभी तक के इस पहले से केरोसीन की खपत में 73 प्रतिशत की बचत हुई है।

दो दिन पहले राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ बैठक में मैं कई सारी पेंशन योजनाओं की समीक्षा कर रहा था। मुझे ये जानकर सुखद आश्चर्य हुआ कि जिन लोगों का नाम पेंशन सूची में दो-दो बार है व जो अयोग्य हैं उन्हें खत्म कर सब्सिडी की बर्बादी में महत्वपूर्ण कमी आई है। कुछ राज्यों में बिना गरीबों को नुकसान पहुंचाए सब्सिडी में 12 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

सब्सिडी का एक बहुत बड़ा भाग हिस्सा उर्वरकों में व्यय होता है। सब्सिडी वाले यूरिया का एक बहुत बड़ा हिस्सा गैर-कानूनी रूप से रसायनों के निर्माण के लिए प्रयोग किया जाता है। हमने इसके लिए एक आसान लेकिन प्रभावी तकनीक यूरिया पर नीम की परत चढ़ाने की शुरूआत की है। जैविक नीम की यह परत उर्वरक को अन्य प्रयोगों के लिए अनुपयोगी बना देती है। हमने घरेलू और आयात किए गए यूरिया में सौ प्रतिशत नीम की परत चढ़ाने का लक्ष्य प्राप्त किया है। इसके कई अन्य दूसरे लाभ भी हैं। यूरिया के लिए नीम की पत्तियों को जमा करना ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का एक नया साधन बन गया है।

मैं जानता हूं कि आप में से कई अर्थशास्त्री हैं। अर्थशास्त्री सामान्य तौर पर विश्वास करते हैं कि मानव तर्कसंगत होते हैं। वे विश्वास करते हैं कि लोग उन लाभों को नहीं छोड़ेंगे, जिसके लिए वे योग्य नहीं हैं। गतवर्ष मैंने नागरिकों से एक अनुरोध किया। मैंने उनसे गैस-सब्सिडी छोड़ने का अनुरोध किया, अगर वे महसूस करते हैं कि वह उसे पाने के योग्य गरीब नहीं हैं। हमने एक वायदा भी किया, हर कनेक्शन छोड़ने पर हम एक निर्धन परिवार को गैस कनेक्शन प्रदान करेंगे। ग्रामीण भारत में निर्धन महिलाएं मुख्य रूप से लकड़ी या जैव ईंधन का इस्तेमाल करती हैं और धूएं के कारण समस्याग्रस्त रहती हैं। यह योजना पूर्ण रूप से वैकल्पिक है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि लगभग 65 लाख लोगों ने भारत में मेरे अनुरोध का उत्तर दिया। मुझे यह जानकर बहुत प्रसन्नता हुई कि उनमें से कई लोग आगे आए और गरीबों को लाभ देने की शर्त के बिना भी उन्होंने अपनी सब्सिडियां छोड़ दीं। अब तक निर्धनों को 50 लाख नये कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। यह लोगों की भावना और भारतीयों के बीच स्वयं का सम्मान करने की भावना को प्रदर्शित करता हूं और नागरिकों के कार्यों की क्षमता का प्रदर्शन करता है। एक और उदाहरण जहां नागरिकों ने मेरे अनुरोध को स्वीकार किया, वह है खादी। अक्टूबर, 2014 में मैंने सभी भारतीयों से कम से कम खादी का एक वस्त्र खरीदने का अनुरोध किया था। इसके जवाब में खादी की बिक्री में बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है।

हमने घाटा उठाने वाली विद्युत वितरण कंपनियों की समस्या का समाधान करने में नई नीति अपनाई है। उदय कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य सरकारों द्वारा बैंक ऋणों के संबंध में लघु अवधि की ऋण राहत प्रदान की गई है। लेकिन यह दीर्घकालिक वितरण कंपनियों और राज्य सरकारों को समर्थन देने के साथ जुड़ी है। इससे चौबीसों घंटे विद्युत वितरण करने में सहायता प्राप्त होगी।

हमारा देश पुराने और गैर-जरूरी कानूनों से दबा पड़ा है, जो लोगों और व्यापार में बाधा उत्पन्न करते हैं। हमने गैर-जरूरी कानूनों की पहचान करने और उन्हें वापस लेने का कार्यक्रम शुरू किया है। वापस लेने के लिए 1827 केन्द्रीय कानूनों की पहचान की गई है। इनमें से 125 पहले ही वापस लिए जा चुके हैं, जबकि अन्य 758 कानूनों को वापस लेने संबंधी प्रस्ताव लोकसभा द्वारा पास किए जा चुके हैं और इन्हें राज्यसभा की अनुमति मिलना शेष है।

मैंने उन्नत सुशासन की क्षमता के कुछ उदाहरण दिए हैं। उन्नत सुशासन और कम भ्रष्टाचार के लाभ दीर्घकालिक और गहरे होते हैं। अगर आप हमारी नीतियों का गंभीरता से अध्ययन करेंगे तो आप पाएंगे कि इनमें से कई लोकप्रिय हैं, लेकिन कोई भी जनवादी नहीं है। हमारे द्वारा किया गया हरेक परिवर्तन सुशासन और तर्कसंगत की दिशा में है।

मैं खाने की गैस, उर्वरक और मिट्टी के तेल में दी जा रही सब्सिडी के संदर्भ में बता रहा हूं। मुझे यह स्वीकार करना चाहिए कि इस संदर्भ में विशेषज्ञों द्वारा प्रयोग किए गए शब्दों से मैं आश्चर्यचकित हूं, जब कोई लाभ किसानों या निर्धनों को दिया जाता है तो विशेषज्ञ और सरकारी अधिकारी सामान्य तौर पर इसे सब्सिडी कहते हैं, लेकिन मैंने महसूस किया है कि जब कोई लाभ उद्योग या वाणिज्य क्षेत्र को प्रदान किया जाता है तो इसे प्रोत्साहन या अनुदान कहा जाता है। हमें स्वयं से पूछना चाहिए कि भाषा का यह अंतर क्या हमारे नजरिए को भी प्रदर्शित करता है। आखिर संपन्न लोगों को दी जाने वाली सब्सिडी सकारात्मक पहलु में क्यों देखी जाती है। मैं आपको एक उदाहरण देना चाहता हूं। कार्पोरेट करदाताओं को दिए जाने वाले प्रोत्साहन से 62 हजार करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व नुकसान होता है। शेयर बाजार में शेयरों पर लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ और लाभांश को आयकर से पूर्ण छूट दी गई है, जबकि सामान्य तौर पर इसे निर्धन अर्जित नहीं करते। पूर्ण छूट में शामिल होने के कारण इसकी गणना 62 हजार करोड़ रुपए में नहीं की जाती। दोहरा कराधान समझौतों के कारण दोहरा कर नहीं लगता। इसकी गणना भी 62 हजार करोड़ रुपए में नहीं की जाती। लेकिन इनका संदर्भ सामान्य तौर पर सब्सिडी में कमी की मांग करने वाले लोगों द्वारा दिया जाता है। शायद इसे निवेश के लिए प्रोत्साहन के रूप में देखा जाता है। मैं सोचता हूं कि यदि उर्वरक सब्सिडी को कृषि उत्पादन के लिए प्रोत्साहन के रूप में बुलाया जाए तो क्या कुछ विशेषज्ञ इसे दूसरे नजरिए से देखेंगें।

मैं सभी सब्सिडी के अच्छा होने का पक्ष नहीं ले रहा हूं। मेरा मानना है कि इन मुद्दों पर कोई भी सैद्धांतिक स्थिति नहीं हो सकती। हमें प्रयोगात्मक होना होगा। हमें बुरी सब्सिडी को समाप्त करना होगा, चाहे वे सब्सिडी कही जाती हो या नहीं। लेकिन कुछ सब्सिडी निर्धनों की रक्षा करने के लिए आवश्यक है और वह उन्हें सफल होने का एक अवसर प्रदान करती है। इस लिए मेरा लक्ष्य सब्सिडी को समाप्त करना नहीं, बल्कि उन्हें तर्कसंगत बनाना और लक्ष्य निर्धारित करना है।

गत 19 माह में हमने काफी कुछ प्राप्त किया है और हमसे अधिक कार्य करने की आशा है। हमारे सामने कई चुनौतियां हैं, लेकिन मुझे विश्वास है कि हम सफलतापूर्वक आगे बढ़ेंगे और सफलतापूर्वक तेजी से बढ़ेंगे और हम आम आदमी को लाभ पहुंचाने की दिशा में कार्य करेंगे।

जब देश के लोग आगे बढ़ने का निर्णय लेते हैं और जब लोगों की शक्ति हमारे साथ हो तो कठिन चुनौतियां भी बड़े अवसरों में बदल जाती है। मेरा यह विश्वास गत 19 माह के अनुभवों पर आधारित है।

हमें एक संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था प्राप्त हुई थी, जो मुद्रा संकट से निपटी ही थी। हमने दो वर्ष से भी कम अवधि में भारत को विदेशी निवेश और विकास के मुख्यधारा में ला खड़ा किया है। दोस्तों, हमें एक लंबे रास्ते पर जाना है, लेकिन मैं महसूस करता हूं कि हमारी यात्रा की शुरूआत अच्छी हुई है। सभी लंबी यात्राओं के समान हमारे मार्ग में भी बाधाएं आएंगी, लेकिन मुझे भरोसा है कि हम अपने लक्ष्य तक पहुंचेंगे। हमने भविष्य और नये भारत के लिए एक मंच का निर्माण किया हैः

भारत जहां सभी बच्चों का सुरक्षित जन्म हो और जहां नवजात शिशु और माता मृत्यु दर विश्व स्तर से कम हो।

भारत जहां कोई भी बिना आवास के न हो

भारत जहां हर कस्बा और हर गांव, हर स्कूल और ट्रेन, हर गली और घर स्वच्छ हो

भारत जहां हर गांव में चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध हो

भारत जहां हर शहर रहने योग्य और जोशपूर्ण हो

भारत जहां सभी लड़कियां शिक्षित और सशक्त हों

भारत जहां हर लड़का और लड़की कौशल युक्त हो और उत्पादक रोजगार के लिए तैयार हो

भारत जहां कृषि, उद्योग और सेवा प्रदाता, सभी रोजगार की आवश्यकता वाले लोगों को उचित वेतन वाले रोजगार देने की क्षमता रखते हों

भारत जहां किसान भूमि की स्थिति जानते हों, श्रेष्ठ उपकरण और बीजों से लैश हो और उत्पादकता के विश्वस्तर तक पहुंच वाले हों

भारत जहां उद्यमियों चाहे वो बड़े या छोटे हों सभी की पूंजीगत और ऋण सुविधा तक पहुंच हो

भारत जहां स्टार्टअप और अन्य व्यवसायों, नवाचार समाधान प्रदान करते हों

भारत जो वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में अग्रणी हो

भारत जो स्वच्छ ऊर्जा में अग्रणी हो

भारत जहां हर नागरिक को मूल सामाजिक सुरक्षा और वृद्धावस्था में पेंशन उपलब्ध हो

भारत जहां नागरिक सरकार पर भरोसा और सरकार उन पर भरोसा करती हो

      और इन सब से ऊपर एक बदला हुआ भारत, जहां सभी नागरिकों को उनकी क्षमताओं को प्राप्त करने का अवसर प्राप्त हो।

      धन्यवाद।

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
India among Asia's fastest-growing green economies with $110 billion revenue in 2025: LSEG

Media Coverage

India among Asia's fastest-growing green economies with $110 billion revenue in 2025: LSEG
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
भारत न केवल फास्ट- ग्रोइंग इकोनॉमी है, बल्कि एक क्रेडिबल इकोनॉमी भी है: पीएम मोदी
June 22, 2026
भारत न केवल तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है, बल्कि एक भरोसेमंद अर्थव्यवस्था भी है: प्रधानमंत्री
एक उभरती हुई ताकत होने के साथ-साथ, भारत एक विश्वसनीय ताकत भी है: प्रधानमंत्री
भारत के लिए 'राष्ट्र प्रथम' ही सबसे बड़ा मार्गदर्शक सिद्धांत है: प्रधानमंत्री
भारत में माओवादी आतंक अब अपने अंतिम चरण में है: प्रधानमंत्री
"यह कभी नहीं हो सकता" वाली सोच से बदलकर "यह होकर रहेगा" वाली सोच अपनाना भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि है: प्रधानमंत्री
सरकार गरीबों और मध्यम वर्ग को सशक्त बना रही है: प्रधानमंत्री
140 करोड़ भारतीयों के सामूहिक प्रयासों से ही 'विकसित भारत' का सपना साकार होगा: प्रधानमंत्री

स्वर साधना, मनोकामना, आराधना। एक बहुत ही शुभ शुरुआत के बाद। अच्छा होता आप ही का कार्यक्रम चलता। आप सबको नमस्कार।

रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के सभी दर्शक और अब तो बहुत सारी भाषाओं में भी है, तो उन सबको भी मेरा प्रणाम! मैं इस समिट में हिस्सा लेने आए सभी साथियों का भी अभिनंदन करता हूं। 24 घंटे चलने वाले चैनलों में ब्रेकिंग न्यूज इसका बहुत बड़ा महत्व होता है। और आजकल तो दुनिया में ही, पूरी दुनिया में कहीं पर भी नजर डालो, पूरी दुनिया ब्रेकिंग न्यूज के मोड पर ही है, और इतनी भागदौड़ में आप सभी, इस समिट को होस्ट कर रहे हैं, इसका हिस्सा बने हैं। और इसलिए आप विशेष बधाई के पात्र हैं। और इस बार आपकी चर्चा का विषय भी उतना ही अहम है...Great Power India: Nation First...

साथियों,

हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है...यतो धर्मस्ततो जयः ! यानि जय का, शक्ति का, मूल धर्म है। और धर्म यानि ड्यूटी, धर्म यानि जस्टिस, धर्म यानि समभाव, धर्म यानि संवाद, धर्म यानि संवेदना और यही तो नेशन फर्स्ट की भावना में भी समाहित है। भारत, अपनी पावर को इसी लैंस से देखता है, इसी तराज़ू पर तौलता है।

साथियों,

भारत की एक और विशेषता है और अब तो दुनिया ने भी मान लिया है। हम किसी क्षणिक घटना पर उतावले होने वाले देश नहीं है, हम वो हैं जिसने विकास और विनाश, देखा भी झेला भी है। हम वो देश हैं, जिसके जेहन में युगों की मेमरी चिप लगी हुई है, हम युगों की मेमरी चिप वाले नेशन हैं। और इसलिए भारत आज जो कर रहा है, और ये मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ, भारत जो कर रहा है वो आने वाले एक हज़ार वर्ष का फ्यूचर लिखने वाला है। और यही दुनिया के लिए सबसे बड़ी भारत की गारंटी है। भारत, Fast-Growing Economy भी है। एक Credible Economy भी है। और भारत, rising power के साथ-साथ और अभी आप तो ढेर सारी डिक्शनरी लेकर बैठ गए थे, सुपर पावर तक ले गए। लेकिन मैं इतना जरूर कहूँगा कि भारत Reliable power है। मैं अभी दो-तीन दिन पहले G7 समिट से लौटा हूं और दुनिया का हर नेता हर देश इस बात को भली-भांति समझता है कि आज के भारत के लिए नेशन फर्स्ट ही सबसे बड़ा मंत्र है, सबसे बड़ा सिद्धांत है।

साथियों,

कुछ दिन पहले ही, हमारी सरकार को 12 साल पूरे हो चुके हैं। उसके लिए भी अर्नब ने आपको तालियाँ बजाने के लिए मजबूर कर दिया। पिछले बारह वर्षों की जो भी सिद्धियां देश की रही हैं, उनके मूल में अगर आप तराजू से तौलोगे, हर निर्णय, हर कदम, हर प्रयास उनके मूल में राष्ट्र प्रथम की भावना ही केंद्र में है। स्वच्छ भारत अभियान से लेकर मेक इन इंडिया खादी खरीदने पर जोर स्थानीय वस्तुएं खरीदने पर जोर ये सारे Initiative इसलिए सफल हुए क्योंकि देश की जनता ने देश को सबसे ऊपर रखते हुए अपना कर्तव्य निभाया। देश के नागरिकों को मैं सलाम करता हूँ।

साथियों,

यहां हमारे साथी श्रीधर वेंबु जी बैठे हैं। जब हमारे उद्यमी नेशन फर्स्ट की भावना के साथ चलते हैं, जब वो देश की आवश्यकताओं को समझते हुए अपने लक्ष्य बनाते हैं तो संस्थाएं भी बनती हैं और देश भी समृद्ध होता है। श्रीधर वेंबु जी ने क्या काम किया है, शायद यहाँ बातों में कितना निकला होगा मुझे मालूम नहीं, लेकिन अभी मैं फ़्रांस में vivatech में गया था, करीब डेढ़ 2 लाख नौजवान वहाँ होंगे, चलने के लिए भी मैं और फ्रांस के राष्ट्रपति अलग अलग स्टॉल पर जा रहे थे, देखने के लिए भई नौजवानों ने क्या काम किया है। तो हम जोहो के स्टॉल पर गए, मैं हैरान था जी, और गर्व होता था कि जोहो के स्टाल पर यूरोप के नौजवानों की जो भीड़ लगी थी और वो समझना चाहते है कि क्या है ये दुनिया में नई चीज, भारत में शायद उतनी चर्चा नहीं होगी, जितनी मैंने वहाँ फ्रांस में देखी, बधाई हो आपको।

साथियों,

सरकार की नीति और निर्णयों में नेशन फर्स्ट का क्या प्रभाव होता है, इसका एक उदाहरण हमारा आदिवासी क्षेत्र है। मैं आज कोई फिलोस्फी झाड़ने वाला नहीं हूँ, कुछ बातें जो हुई है वो हल्की फुल्की बता दूंगा और उससे आप अंदाज लगा लेंगे कि काम कैसे होता है। मैं आदिवासी क्षेत्र की बात करता हूँ। भारत के 10 करोड़ से अधिक आबादी की चर्चा, मतलब कि आदिवासी समाज की चर्चा और हम सबको पता है कि दशकों से माओवादी आतंक वहाँ अपने डेरा तंबू डालकर बैठ हुआ था। जहां 21वीं सदी में भी इन आतंकियों ने एक भी सुविधा पहुंचने नहीं दी, सरकारी एक वेहिकल नहीं गुजर सकता था वहाँ से। गोलियों से भून दिया जाता था। अनेक सरकारें आई-गईं, कई पीढ़ियां आई-गईं, लगता था कि हिंसा का ये दुर्भाग्य ऐसे ही रहेगा। आप कल्पना कर सकते हैं, 2004 से 2014 के बीच, मैं उस दस साल का हिसाब बताता हूँ, 2004 से 2014 के बीच माओवादी आंतक के कारण, 17 हज़ार से भी अधिक हिंसक घटनाएं हुईं थीं। और करीब-करीब 7 हज़ार से ज्यादा जानें गईं थी।

साथियों,

आज आपके लिए वन लाइन न्यूज होगा या टीवी पर आधे घंटे डिबेट होगी कि माओवाद आतंकवाद खत्म हो गया, चीजें ऐसी नहीं होती। उसके लिए खपना पड़ता है और इसलिए मैं बताना चाहता हूँ। और इसलिए मैं बताना चाहता हूं और आजकल जो लोग, कुछ लोग संविधान दिखाते रहते हैं, लेकिन जब ये लोग सरकार में थे और नक्सल प्रभावित इलाकों में संविधान का नाम लेने पर गोली मार दी जाती थी और तब ये लोग चुप बैठे थे, तब उनके हाथो में संविधान नहीं दिखता था, कांप रहे थे उनके हाथ। उस दर्दनाक स्थिति से कांग्रेस को कोई खास फर्क नहीं पड़ता था।

साथियों,

2014 के बाद, हालात को बदलने के लिए हम राष्ट्र प्रथम के भाव से आगे बढ़े, हम निकल पड़े। बोलते नहीं थे, बताते भी नहीं थे, करते जरूर थे। हमने संकल्प लिया कि नक्सलवाद-माओवाद को जड़ से उखाड़ फेकेंगे और आज पूरा देश नतीजा देख रहा है, आज देश में माओवादी आतंक, अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।

और साथियों,

कई बार अंतिम परिणाम इतना बड़ा और व्यापक होता है कि उसके पीछे की मेहनत पर ध्यान नहीं जाता। रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को मैं खासतौर पर इसके बारे में बताना चाहता हूं।

साथियों,

जिन नक्सल प्रभावित इलाकों में दिन में जाने से भी, यानी सामान्य मानवी डरा रहता था, उसको लगता था कहीं अपहरण हो जाएगा तो, कभी वसूली का डर रहता था, कभी साथ में जो कुछ भी है वो लूट लेने का डर रहता था। और जहां पर विकास की बात बोल तक नहीं सकते थे आप, लेकर के जा नहीं सकते थे, सब नामुमकिन था, ऐसे क्षेत्रों में हम हम विकास का संकल्प लेकर आगे बढ़े। वहां बीते 12 वर्षों में हमारी सरकार ने 12 हज़ार किलोमीटर से अधिक की सड़कें बनाईं। और कई बार तो हमने देखा, कई बार तो हमने देखा कि सड़क बनाने के जो हमारा साजो सामान होता है उसको जला दिया जाता था। कांट्रेक्टर को भगा दिया जाता था। अगर 25 लोग रोड पर काम करते तो 200 लोग पुलिस सुरक्षा रखते थे ताकि काम चले। यह सब इसलिए करते थे- तय किया था।

साथियों,

साढ़े 9 हज़ार से अधिक मोबाइल टावर बनाए। एक टावर नहीं लगने और लगा हुआ टावर तोड़ देते थे। क्योंकि उनको हमेशा वहां आक्रोश पैदा करना था। करीब 45,000 गांव में मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाई। नक्सल प्रभावित जिलों में 1800 से अधिक बैंक ब्रांच खोली गई। करीब 75,000 बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट और 6000 से अधिक नए पोस्ट ऑफिस बनाए गए। सिर्फ बम, बंदूक और गोली के सहारे काम नहीं किया है साथियों, हमने दिलों को जीतने के लिए, ईश्वर ने जो भी शक्ति दी थी उसको खपाया था।

साथियों,

हम बुलंद इरादों के साथ नक्सल प्रभावित इलाकों में जनसामान्य की आशा, आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए जा रहे थे। आप हैरान हो जाएंगे एक मशहूर नक्सली, करोड़ों रुपए का इनाम थे उसके, उसकी मां के पास हम पहली बार राशन कार्ड लेकर गए। बेटा अपनी मां को राशन कार्ड लेने नहीं देता था, आतंकवाद अपना चलाने के लिए। इतनी घटनाएं हैं, मैं हैरान था। और सरकार चुप बैठी थी, उनको संविधान उस समय तो दिखता नहीं था। लेकिन इन सारे प्रयासों का परिणाम यह आया कि जन सामान्य में एक विश्वास का नया दौर आया। आज आप देखिए बस्तर जैसे इलाकों में बम बंदूक नहीं बस्तर ओलंपिक्स की धूम है। और अब तक इस ओलंपिक के दो एडिशन हो चुके हैं। पहली बार डेढ़ लाख से अधिक युवाओं ने और दूसरी बार करीब 4 लाख युवाओं ने बस्तर ओलंपिक्स में हिस्सा लिया। यानी जहां कभी टेरर था, वहां टैलेंट को अवसर मिल रहा है, वहां स्पोर्ट्स फल-फूल रहा है।

साथियों,

12 वर्षों के इस सेवाकाल की एक और बड़ी सिद्धि रही है, यह सिद्धि है, निराशा से निकलकर आशा-आकांक्षा सबसे भरे भारत का निर्माण।

साथियों,

नक्सल कहीं और होगा लेकिन घटनाओं की पीड़ा हिंदुस्तान के हर कोने में होती थी और जिस समय नक्सल खत्म होने की बातें आने लगी तो विश्वास सिर्फ नक्सली इलाके का नहीं, हिंदुस्तान के कोने-कोने में जगने लगा। 2014 से पहले के 10 वर्षों में जो कांग्रेस सरकार चली, उससे नाराजगी केवल गवर्नेंस की नहीं थी। तब देश की निराशा इससे कहीं अधिक थी, देश उम्मीद खो चुका था, लोगों को लगता था कि कुछ हो ही नहीं सकता, कुछ बदल ही नहीं सकता।

साथियों,

पिछले 12 वर्षों में भारत ने उसी निराशा को आशा में बदला है और मुझे इस बात का सबसे ज्यादा संतोष है। आज हर किसी को यह लगता है कि थोड़ी और मेहनत करेंगे, तो यह हो सकता है। वो दिन चले गए जब एक ही बात सुनाई देती थी, कतई नहीं हो सकता, कतई नहीं हो सकता, वो जमाना चला गया, आज ये होकर रहेगा। ये जो भाव आया है यही भारत की असली सिद्धि है, और यही रियल पावर है। चुनौतियां तो आज भी बहुत है और हमेशा रहेगी और चुनौतियां बहुरूपिया होती है, वो नए-नए अवतार में सामने आती रहती है, अरे आएगी, जिस रूप में आएगी, जंग उससे भी लड़ लेंगे जी और जीत भी लेंगे। लेकिन यह हो सकता है और हम यह करके रहेंगे, जब इस भाव से देश आगे बढ़ता है, तब सपने पूरे होते हैं।

साथियों,

मैं यहां भारत के 100 से ज्यादा जिलों और 500 से ज्यादा ब्लॉक्स की चर्चा करना चाहूंगा। यह विकास के हर पैरामीटर पर पीछे छूट गए थे और पहले की सरकार ने इन पर पिछड़ा होने का ठप्पा लगा दिया था, यह तो बैकवर्ड डिस्ट्रिक्ट है, ये तो बैकवर्ड इलाका है। हमने देश के इस बहुत बड़े क्षेत्र को पिछड़ेपन की निराशा से बाहर निकालकर डेवलपमेंट की एस्पिरेशन जगाई। सबसे पहले तो हमने पहचान ही बदल दी, हमने कहा ये एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट है, ये एस्पिरेशनल ब्लॉक है, हमने एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट का प्रोग्राम बनाया, एस्पिरेशनल ब्लॉक का प्रोग्राम बनाया और सरकार ने विकास के हर पैरामीटर पर बहुत बारीकी से काम शुरू किया। इस डिस्ट्रिक्ट में ये तीन पहलू है, पहले उसमें से बाहर निकलो। यहां छह पहलू है, पहले इसमें से बाहर निकलो। बड़ा फोकस वे में काम शुरू किया। आज यह एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट और ब्लॉक्स राज्य की ओवरऑल ग्रोथ को आगे बढ़ाने का काम करने लगे हैं। जो पहले ग्रोथ को पीछे खींचते थे, इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट में बहुत बड़ी आबादी गरीब थी, अभाव में थी। बीते वर्षों में 25 करोड़ गरीबों ने गरीबी को परास्त किया है। तो इसमें इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट की एक बहुत बड़ी भूमिका है।

साथियों,

हम देखते हैं कि जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो सिर्फ घर का वो व्यक्ति ठीक होता है ऐसा नहीं है। जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो पूरा परिवार ठीक हो जाता है। ऐसे ही, जब घर का कोई एक बेटा-बेटी कुछ अचीव करता है, तो सिर्फ वो व्यक्ति अचीव करके नहीं आता, वो पूरा परिवार, पूरा परिवार अचीवमेंट से भर जाता है, विश्वास बदल जाता है। ऐसे ही, जब कोई गरीबी से बाहर आता है, तो सम्पूर्ण समाज का फायदा होता है, देश का फायदा होता है। 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, निओ मिडिल क्लास में आए हैं, तो इसका फायदा केवल उन परिवारों तक नहीं रहता, बल्कि मिडिल क्लास का भी इसमें फायदा होता है। क्योंकि यह नया कंज्यूमर है, जो इकोनॉमी को ड्राइव करता है, उससे अल्टीमेटली मिडिल क्लास के लिए अवसर बनते हैं। यानी गरीबी कम होना केवल वेलफेयर का ही विषय नहीं है, यह अवसरों के विस्तार की गाथा है, नई एस्पिरेशंस की प्रेरणा है।

साथियों,

पिछले 12 वर्ष में जो इतना विशाल मिडिल क्लास देश में तैयार हुआ है, वो सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता रहा है। मिडिल क्लास की Ease of Living के लिए सरकार ने हर स्तर पर काम किया है। अब जैसे अपने घर का सपना है। हर मिडिल क्लास परिवार की एक इच्छा रहती है कि भई खुद का घर हो, हर किसी को पूछोगे एक मन में रहता है मेरा अपना घर हो। 2014 में अगर किसी परिवार को अपना घर खरीदना होता था, तो होम लोन डबल डिजिट के इंटरेस्ट रेट पर मिलता था। लेकिन आज किसी भी बैंक से होम लोन 7-8 परसेंट के रेट पर मिल जाता है। पहले लोन लेना भी किसी युद्ध जीतने जैसा था, युद्ध जीतने में जितनी ताकत लगती थी, उतनी लोन लेने में लगती थी। आज यह घर बैठे ही संभव हो पा रहा है। मैं यहीं की बात बताता हूं, यह दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोग जानते हैं कि कैसे शहरी मिडिल क्लास के हजारों घर अधूरे अटके हुए थे। पैसे दे दिए थे, पूरे जिंदगी भर की कमाई बिल्डर को दे दी थी। उसने भी बढ़िया-बढ़िया पम्पलेट दिखाए, सपने दिखाए। अभी किराए पर घर में रहते हैं, तो किराया भी देना है, घर जल्दी मिलेगा। उधर किराया रहता है, घर मिल नहीं रहा, घर बन नहीं रहा, यह बहुत बुरा हाल था। इन अधूरे घरों को पूरा करने के लिए हमने 25 हजार करोड़ रुपए का स्पेशल फंड बनाया। और आपको जानकर खुशी होगी कि देश में बरसों से अटके करीब 60 हजार घरों को डिलीवरी किया जा चुका है।

साथियों,

एक और चीज है, जो रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है। यह जरूरत है, कनेक्टिविटी की, ट्रांसपोर्ट की। आज आप सोशल मीडिया में देखिए, दुनियाभर से जो भी टूरिस्ट आता है, भारत आता है, वो हमारे मेट्रो सिस्टम को देखकर हैरान रह जाता है।

साथियों,

वर्ष 2014 में करीब 28 लाख लोग, हर रोज मेट्रो से सफर करते थे। आज करीब एक करोड़ अठाइस लाख लोग हर रोज मेट्रो से सफर कर रहे हैं। अब वंदे भारत, नमो भारत और अमृत भारत जैसी हाई स्पीड ट्रेन्स देश को कनेक्ट कर रही हैं। अच्छी सड़कों, अच्छे हाईवे से, समय तो बच ही रहा है, गाड़ियों की मैंटेनेंस पर होने वाला खर्चा भी कम हुआ है। बीते वर्षों में एयरपोर्ट्स की संख्या डबल हुई है। इससे कई छोटे-छोटे शहरों में भी मिडिल क्लास को हवाई यात्रा की सुविधा पहली बार मिली है।

साथियों,

पिछले 12 साल, मिडिल क्लास के लिए कमाई के साथ-साथ बचत के भी रहे हैं। 2013-14 में, लगभग 2 लाख रुपए तक की आय होने पर टैक्स लगता था, आप सबको वो नसीब रहा होगा। और यह टैक्स मिडिल क्लास देता रहता था। आज 12 लाख रुपए तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है। यानी टैक्स फ्री इनकम कई गुणा बढ़ गई है।

साथियों,

GST रिफॉर्म्स के कारण भी मिडिल क्लास को बहुत सुविधा हुई है। टैक्स फाइलिंग का समय और खर्चा भी बच गया है। क्योंकि यह बहुत ही आसान हो गया है। घर बैठे ही ITR फाइल हो रहे हैं, अगर कोई सेटलमेंट का इश्यू है, तो वो फेसलेस हो रहा है।

साथियों,

मिडिल क्लास परिवारों में एक बड़ा खर्चा डायबिटीज या ऐसी लाइफस्टाइल से जुड़े इलाज का भी रहता है। जन औषधि केंद्रों पर 80 परसेंट डिस्काउंट पर ऐसी दवाएं मिल रही हैं। अगर आपका पहले हजार रुपया खर्चा होता था, तो आज 200 रुपये में काम हो जाता है, 800 रुपये बच रहा है और इससे बीते वर्षों में करीब 40 हज़ार करोड़ रुपए की बचत देश के अनेक परिवारों की हुई है। मिडिल क्लास के बजट का एक बड़ा हिस्सा बुजुर्गों के इलाज पर भी जाता है। आज 70 वर्ष से ऊपर के हर नागरिक के लिए 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध है।

साथियों,

एक सामान्य स्वभाव है कि जब कोई सुविधा लगातार मिलती है, तो इंसान पहले की परेशानी भूल जाता है। अब 2 लाख रुपये पर आप टैक्स देते थे, अब 12 लाख तक नहीं देना पड़ रहा, लेकिन जब मैं कहूं, तब ताली बजती है। और बस में, ट्रेन में थोड़ी देर भी अगर कुछ मुसीबत आ गई, तो ढेर सारी गालियां देना शुरू हो जाते हैं और यही क्‍लास सबसे ज्यादा बोलता है।

साथियों,

मैंने जैसा कहा ना कि भई पुरानी तकलीफे भूल जाता है आदमी। आप लोगों को आज ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट से जुड़ी परेशानियां बिल्कुल याद नहीं होंगी। पहले ड्राइविंग लाइसेंस लेना होता था, तो कितनी दिक्कत होती थीं, पासपोर्ट लेना होता था, तो क्‍या-क्‍या कुछ नहीं करना पड़ता था, कितने पापड़ बेलने पड़ते थे। आज ड्राइविंग लाइसेंस लेना भी आसान हुआ है और तत्काल पासपोर्ट भी औसतन 3 दिन में ही मिल जाता है।

साथियों,

मैं जानता हूं, हमारी सरकार जिस तरह काम कर रही है, उसने देश के लोगों की एस्पिरेशन बहुत बढ़ा दी है। एक काम हुआ, तो लोगों की डिमांड वहीं खत्म नहीं हो जाती है। वो उससे भी बेहतर काम चाहते है, उससे भी अपग्रेड सुविधा चाहते हैं। अगर पहले डिमांड नई सड़क की थी, तो सड़क बनने के बाद लोग पूछते हैं, मेट्रो कब आएगी? पहले अपेक्षा होती थी कि ट्रेन समय पर पहुंच जाए, ट्रेन में बैठने की साफ-सुथरी जगह मिल जाए। आज डिमांड है कि हमारे रूट पर वंदे भारत क्यों नहीं चल रही है?

साथियों,

कुछ लोगों को ये असंतोष लगता है, यह एस्पिरेशन है, हमारे देश में एक फौज ऐसी है, उसको लगता है कि यह सब मामला कुछ गड़बड़ है। लेकिन लोग आखिरकार यह अपेक्षाएं किसके पास करेंगे भई, जो करता है, उससे ही करेंगे ना! सामान्‍य लोग हीनहीं, पूरी कांग्रेस पार्टी कहती है कि जरा मोदी जी, यह हो जाना चाहिए, यह होना चाहिए, कहते रहते हैं ना! उनको भरोसा है, करेगा तो ये ही करेगा!

साथियों,

एस्पिरेशंस वहीं होती है, जहां लोगों को लगता है कि सपने पूरे हो सकते हैं। और भारत के युवाओं की, भारत के गरीब और मिडिल क्लास की यही एस्पिरेशन है। आज भाजपा-एनडीए सरकारों की ऊर्जा बनी हुई है।

साथियों,

एक तरफ, देश का बहुत बड़ा वर्ग एस्पिरेशनल है, तो दूसरी तरफ, राजनीति की एक टोली है, जिसका जीवन मंत्र बन गया है- ऑलवेज अगेंस्ट! यह टोली, क्रॉनिक डिससैटिस्फैक्शन यानी स्थाई असंतोष से भरी हुई है। आज मैं रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को जरा इस टोली के लक्षण बताने जा रहा हूं। Symptoms पता चलेगा, तो आपको समझ आ जाएगा कि मैं क्या कह रहा हूं। आप आसानी से पहचान लेंगे। जैसे मैं उदाहरण देता हूं, आप समझ जाएंगे। इनको आप अक्सर कहते सुनेंगे, अरे फलां जगह तो चौबीस घंटे बिजली आती है, यहां क्यों नहीं? और अगले ही दिन ये लोग डैम्स का, सोलर पार्क का, थर्मल का, न्यूक्लियर प्लांट का विरोध करने के लिए ढपली लेकर के आ जाएंगे। यानी पहले दिन बिजली क्‍यों नहीं और दूसरे दिन तुम हाइड्रो पावर का डैम क्यों बना रहे हो, यह जमात ऐसी है। यह वो लोग हैं, जो खनिजों के खनन का विरोध करते थे, लेकिन आज पूछते हैं कि भारत का रेयर अर्थ मिनरल्स भंडार कहां है, सप्लाई चेन कहां है? और भारत में फलाने देश की तरह, इलेक्ट्रिक व्हीकल का इकोसिस्टम क्यों नहीं है? यह वही लोग हैं, जो कभी डेटा या आटा, इसकी डिबेट चलाते थे। पहले डाटा कि आटा, डाटा कि आटा, बड़ा मजा आता था। आज यही लोग पूछते हैं कि बताओ मोदी जी, AI में क्या काम हुआ? हद देखिए, एक सांस में कहते हैं, एक ही सांस में कहते हैं कि AI में यह होना चाहिए था, वो होना चाहिए था, हुआ क्यों नहीं? लेकिन दूसरी सांस में वही लोग कहते मिलेंगे, अरे यह डेटा सेंटर क्यों बना रहे हो? यह सेमीकंडक्टर प्लांट क्यों लगा रहे हो? और फिर यह लोग उसके 100 नुकसान गिनाने के लिए घंटे-घंटे भर सोशल मीडिया के स्‍क्रीन पर दिखेंगे, टीवी डिबेट पर दिखेंगे, अखबारों में भरे रहेंगे।

साथियों,

यह लोग करप्शन को लेकर दुनियाभर के इंडेक्स उठाकर लाते हैं, भारत को कटघरे में खड़ा करते हैं, इनके इकोसिस्टम का मीडिया भी 24-24 घंटे उछालता रहता है, लेकिन जब करप्शन के विरुद्ध एक्शन होता है, जब कार्रवाई होती है, तो यही लोग चिल्लाते हैं, सबसे पहले हल्ला मचाने का काम कौन करते हैं, यही गलत हो रहा है, फलाना गया ढीकना गया, रेड कर दी, जांच कर दी, harass कर दिया। सवाल उठाए जाते हैं, कार्रवाई ऐसे क्यों हो रही है, वैसे क्यों नहीं, अब क्यों हो रही है, तब क्यों नहीं, A पर क्यों हो रही है, B पर क्यों नहीं हो रही है, यही उनका खेल है।

साथियों,

इन लोगों का कैरेक्टर समझना देश के लिए बहुत जरूरी है। खासतौर पर मेरे देश के युवाओं को इनको पहचानने की जरूरत है और हमारी जेन जी को तो बहुत जल्दी समझना चाहिए, जल्दी समझो वरना अब सूर्यवंशी आया है, वो तेज गति से समझाता है।

साथियों,

यह लोग एक तरफ कहेंगे कि देश की सेनाओं को छूट नहीं है, हथियार नहीं मिल रहे हैं, लेकिन जब सरकार कोई डिफेंस डील करेगी, कोई आधुनिक हथियार खरीदती है, तो सबसे पहले आकर कहते हैं कि यह क्यों खरीदा? यह दुनिया भर में भारत की कूटनीति पर सवाल करेंगे, लेकिन जब भारत कूटनीति के लिए, सुरक्षा के लिए कहीं कोई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बनाने लगेगा, तो यह लोग ढोल-ढपली लेकर हल्ला मचाना शुरू कर देते हैं।

साथियों,

आज भारत जिस अहम कालखंड में है, इसमें ऐसे लोगों को पहचानना होगा, उनके कुतर्क को समझना होगा और उनसे सतर्क रहना बहुत जरूरी होगा। और आज दुर्भाग्य से, आज देश के मुख्य विपक्षी दल, कांग्रेस पर, ऐसे ही लोगों का कब्जा हो गया है। कांग्रेस कभी नेशन फर्स्ट की बात करेगी, यह सोचना भी अब झूठे सपने जैसा हो गया है। कल्पना ही नहीं कर सकते क्या कभी कांग्रेस में यह फिर से आएगी बात, जो गांधी जी के जमाने में थी।

साथियों,

आज दुनिया पुरानी धाराओं को चैलेंज कर रही है, डिसरप्शन्स की स्केल बहुत बड़ी हो गई है, लेकिन इसका एक और पक्ष है। यह चुनौतियां, नए अवसर भी ला रही है। भारत के हर युवा, हर उद्यमी, हर इनोवेटर, हर स्टार्टअप को, इन्हीं अवसरों पर फोकस करना है और इसमें सरकार, नेशन फर्स्ट की भावना के साथ पूरी तरह देश के लोगों के साथ है। भारत आज रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार हो चुका है। यह गति आगे और तेज होगी, मैं रिपब्लिक टीवी के इस मंच से देशवासियों से फिर कहूंगा कि हमारा सपना जितना बड़ा है, हमारे प्रयास भी उतने ही विराट होंगे और 140 करोड़ देशवासियों का यही साझा प्रयास, विकसित भारत बनाकर रहेगा। और आप सब लोग, मैं विश्वास से कहता हूं, अपनी आंखों से विकसित भारत देखने वाले हैं। आने वाली पीढ़ियों तक इंतजार करना पड़े, इस प्रकार से मैं काम नहीं करता, आप खुद अपनी आंखों से देखकर के जाएंगे। इसी विश्वास के साथ, मैं फिर एक बार रिपब्लिक टीवी को, उसके दर्शकों को और आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं! बहुत-बहुत धन्यवाद!