भारत टैलेंट का एक पावर हाउस है, जो योगदान देने के लिए उत्सुक है: प्रधानमंत्री मोदी
भारतीयों के पास जो असंभव माना जाता है उसे हासिल करने की भावना है, यह कोई आश्चर्य वाली बात नहीं है कि हम भारत में आर्थिक रिकवरी के संकेतों को देख रहे हैं: पीएम मोदी
महामारी ने एक बार फिर दिखाया है कि भारत का फार्मा उद्योग न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए एक संपत्ति है: प्रधानमंत्री

सभी क्षेत्रों से आए प्रतिष्ठित मेहमानों को नमस्कार। भारत की ओर से मैं आप सबको बधाई देता हूं। मैं इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए इंडिया इंक ग्रुप की तारीफ करता हूं। वर्तमान कार्यक्रम पिछले कुछ वर्षों के दौरान इंडिया इंक द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों का एक हिस्सा है। आपके कार्यक्रमों ने भारत में वैश्विक दर्शकों को बुलाने के अवसर दिलाने में काफी मदद की है। आपने भारत और यूके के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने में मदद की है। मुझे इस बात की खुशी है कि इस साल के आयोजन में दूसरे भागीदारों को भी शामिल किया गया है। इसके लिए आपको एक बार फिर से बधाई। उम्मीद है कि अगले साल आपको सेंटर कोर्ट में होने का अवसर मिलेगा और विंबलडन का आनंद भी मिलेगा।

दोस्तों,

अभी के माहौल में पुनरुत्थान के बारे में बात करना स्वाभाविक है। इसमें वैश्विक पुनरुत्थान और भारत को जोड़ना भी उतना ही स्वाभाविक है। मुझे विश्वास है कि वैश्विक पुनरुत्थान की कहानी में भारत की अग्रणी भूमिका होगी। मैं इसे दो कारकों के साथ बड़ी निकटता से देखता हूं। पहला है- भारतीय प्रतिभा। दुनिया भर मेंआपने भारत की प्रतिभाशक्ति का योगदान देखा है। इसमें भारतीय पेशेवर,डॉक्टर,नर्स,बैंकर,वकील,वैज्ञानिक,प्रोफेसर, हमारे मेहनतकश मजदूर शामिल हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी उद्योग और प्रौद्योगिकी पेशेवरों को भला कौन भूल सकता है। वे दशकों से रास्ता दिखा रहे हैं। भारत प्रतिभा का एक खजाना है,जो योगदान करने के लिए सदा उत्सुक है, हमेशा कुछ सीखने के लिए तैयार है। इसमें दोतरफा तालमेल है जो बहुत फायदेमंद है।

दोस्तों,

दूसरा कारक- सुधार और कायाकल्प करने की भारत की क्षमता है। भारतीय स्वाभाविक तौर पर सुधारक हैं! इतिहास में यह दर्ज है कि भारत ने हर चुनौती को पार किया है,चाहे वह सामाजिक चुनौती हो या आर्थिक। भारत ने ऐसा सुधार और कायाकल्प की भावना के साथ किया है। भारतीयों में ऐसी ही भावना अब भी जारी है।

दोस्तों,

एक तरफ भारत वैश्विक महामारी के खिलाफ एक जबर्दस्त लड़ाई लड़ रहा है। लोगों के स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही हम अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य पर भी समान रूप से ध्यान दे रहे हैं। जब भारत पुनरुद्धार की बात करता है तो यह देखभाल के साथ पुनरुद्धार, करुणा के साथ पुनरुद्धार की बात करता है।वह पुनरुद्धार जो पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए टिकाऊ हो। हम भारत में उस संस्कृति से संबंध रखते हैंजहां माता के स्वरूप की पूजा सभी करते हैं। भारत में यह माना जाता है कि पृथ्वी हमारी माता है और हम उसके बच्चे हैं।

दोस्तों,

पिछले छह वर्षों के दौरान, भारत ने कुल वित्तीय समावेशन,रिकॉर्ड स्तर परआवास और बुनियादी ढांचागत निर्माण, व्यापार करने को सुगम बनाना (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस),जीएसटी सहित ठोस कर सुधारों,दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य देखभाल पहल- आयुष्मान भारत जैसे क्षेत्रों में महान कार्य संपन्न किए हैं। इन लाभकारी कार्यों ने विकास की पहल के अगले दौर के लिए नींव निर्धारित कर दी है।

दोस्तों,

भारतीयों में जो असंभव माना जाता है उसे हासिल करने की भावना होती है। कोई आश्चर्य नहीं कि भारत में,हम जब आर्थिक सुधार की बात आती है तो पहले से ही ग्रीन-शूट्स की अहमियत समझ रहे हैं। महामारी के इस कठिन समय में,हमने अपने नागरिकों को राहत प्रदान की है और ठोस संरचनात्मक सुधार किए हैं। हम ऐसी अर्थव्यवस्था बना रहे हैं जो अधिक उत्पादक,निवेश के अनुकूल और प्रतिस्पर्धी हो।

हमारे राहत पैकेज को स्मार्ट बनाया गया है और सबसे अधिक गरीबों तक सबसे ज्यादा मदद पहुंचाने को लक्ष्य बनाया गया है। इसके लिए प्रौद्योगिकी को धन्यवाद देता हूं जिसकी बदौलत मदद का प्रत्येक पैसा सीधे लाभार्थियों तक पहुंचा है। राहत में मुफ्त खानापकाने की रसोई गैस,बैंक खातों में नकदी,लाखों लोगों को मुफ्त अनाज और कई अन्य चीजें शामिल हैं। हमने लॉकडाउन खत्म करने के तुरंत बाद ही लाखों श्रमिकों को रोजगार प्रदान करने के लिए दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक कार्यों में से एक कार्यक्रम का शुभारंभ किया है। यह न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फिर से सक्रिय करेगा,बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ बुनियादी ढांचे के निर्माण में भी मदद करेगा।

दोस्तों,

भारत दुनिया की सबसे खुली अर्थव्यवस्थाओं में से अब भी एक बना हुआ है। हम भारत में आने और अपनी कंपनियां स्थापित करने के लिए सभी वैश्विक कंपनियों का स्वागत करते हैं। आज भारत जिस तरह के अवसर दे रहा है, दुनिया के बहुत कम देश ऐसा करेंगे। भारत में विभिन्न उदीयमान क्षेत्रों में कई संभावनाएं और अवसर हैं। कृषि क्षेत्र में हमारे सुधार से भंडारण और रसद में निवेश करने के लिए अभी बहुत ही आकर्षक अवसर हैं। हम अपने किसानों की कड़ी मेहनत वाले क्षेत्र में निवेशकों के सीधे आने और निवेश करने के लिए मौका दे रहे हैं।

दोस्तों,

हमने एमएसएमई क्षेत्र में भी सुधार किए हैं। एक उभरता एमएसएमई क्षेत्र भी बड़े उद्योग का पूरक होगा। रक्षा क्षेत्र में निवेश के अवसर हैं। एफडीआई मानदंडों में राहत के साथ दुनिया की सबसे बड़ी सेना में से एकआपको भारतीय सेना के लिए उत्पाद बनाने को आमंत्रित करती है। अबअंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश के अधिक अवसर हैं। इसका मतलब लोगों के हितमें अंतरिक्ष तकनीक के व्यावसायिक उपयोग के अधिक अवसर मिलेंगे। भारत का टेक और स्टार्ट-अप सेक्टर जीवंत है। डिजिटल रूप से सशक्त होने और आकांक्षी लोगों का लाखों का बाजार है। आप कल्पना कीजिए कि आप उनके लिए किस तरह के उत्पाद बना सकते हैं।

दोस्तों,

कोविड महामारी ने एक बार फिर बता दिया कि भारत का फार्मा उद्योग न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए एक संपत्ति है। इसने खासकर विकासशील देशों के लिए दवाओं की लागत को कम करने में अग्रणी भूमिका निभाई है। भारत में बने टीके दुनिया के बच्चों के टीकाकरण की दो-तिहाई जरूरतें पूरी करते हैं। आज भी हमारी कंपनियां कोविड-19 के टीके के विकास और उत्पादन के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल हैं। मुझे यकीन है कि एक बार दवा की खोज हो जाने के बाद टीके के विकास और उसके उत्पादन में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

दोस्तों,

130 करोड़ भारतीयों ने एक आत्‍म-निर्भर भारत का आह्वान किया है। एक आत्म-निर्भर भारत। आत्म-निर्भर भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ घरेलू उत्पादन और खपत को एक साथ जोड़ता है। आत्म-निर्भर भारत अपने आप में ही निहित होने या दुनिया के लिए खुद को बंद कर देना नहीं है। यह खुद को टिकाए रखने और बेहतर उत्पादन करने के बारे में है। इसके लिए हम दक्षता,इक्विटी और लचीलापन को बढ़ावा देने वाली नीतियों को आगे बढ़ाएंगे।

दोस्तों,

मुझे यह जानकर खुशी हुई कि यह मंच पंडित रविशंकरकी 100वीं जयंतीभी मना रहा है। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत की खूबसूरती को दुनिया तक पहुंचाया। आपने यह भी देखा होगा कि नमस्ते कैसे अभिवादन के रूप में वैश्विक हो गया है। महामारी के इस दौर में दुनिया भर में योग,आयुर्वेद और पारंपरिक दवाओं की बढ़ती अपील को भी देखा गया है। भारत की प्राचीन संस्कृति और भारत की सार्वभौमिकशांतिपूर्ण लोकाचारहमारी ताकत हैं।

दोस्तों,

भारत विश्व की बेहतरी और समृद्धि को आगे बढ़ाने के लिए जो कुछ भी कर सकता है, उसे करने के लिए तैयार है। यह एक ऐसा भारत है जो सुधार,प्रदर्शन और परिवर्तन कर रहा है। यह एक ऐसा भारत है जो नए आर्थिक अवसर प्रदान करता है। यह एक ऐसा भारत है जो विकास के लिए मानव-केंद्रित और समावेशी दृष्टिकोण अपना रहा है।

भारत आप सभी का इंतजार करता है

नमस्ते,

आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

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मंत्रिमंडल ने उत्तर प्रदेश में एनएच-34 के कानपुर-कबराई खंड के 4/6 लेन वाले एक्सेस-कंट्रोल्ड खंड के निर्माण को बीओटी (टोल) मोड पर 7145.14 करोड़ रुपये की कुल पूंजी लागत से मंजूरी दी
July 01, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने आज राष्ट्रीय राजमार्ग (ओ) कार्यक्रम के अंतर्गत भोपाल-कानपुर आर्थिक गलियारे के एक महत्वपूर्ण खंड के रूप में 117.7 किलोमीटर लंबे कानपुर-कबराई एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड राजमार्ग के निर्माण को मंजूरी दे दी है। यह चार लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड गलियारा है जिसमें भविष्य में छह लेन तक विस्तारित करने की व्यवस्था भी है। 7145.14 करोड़ रुपये की अनुमानित कुल पूंजी लागत वाली इस परियोजना को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा बीओटी (टोल) मोड पर कार्यान्वित किया जाएगा, साथ ही एनएच-34 के मौजूदा कानपुर-कबराई खंड का संचालन और रखरखाव भी किया जाएगा।

यह परियोजना कानपुर और कबराई के बीच निर्बाध, उच्च गति की कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, साथ ही सागर, भोपाल और मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों तक आगे की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी, जिससे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और वाणिज्यिक केंद्रों को मध्य प्रदेश के खनिज-समृद्ध, विनिर्माण और कृषि क्षेत्रों से जोड़ने वाला एक आधुनिक पहुंच नियंत्रित आर्थिक गलियारा बनेगा और इस प्रकार इसमें सुधार होगा।

80-100 किमी प्रति घंटे की परिचालन गति के लिए डिज़ाइन किया गया यह कॉरिडोर कानपुर और कबराई के बीच यात्रा समय को 3.5 घंटे से घटाकर 1.5 घंटे (58 प्रतिशत) कर देगा, साथ ही सड़क सुरक्षा में सुधार करेगा, वाहन परिचालन लागत को कम करेगा और यात्री एवं माल यातायात की कुशल आवाजाही को सुगम बनाएगा। यह परियोजना एनएच-34, एनएच-35, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, कानपुर रिंग रोड और राज्य राजमार्ग एसएच-46, एसएच-91, एसएच-10बी और एसएच-42 के साथ रणनीतिक संपर्क भी प्रदान करेगी, जिससे क्षेत्रीय राजमार्ग नेटवर्क के साथ एकीकरण मजबूत होगा। यह कॉरिडोर कबराई खनन क्षेत्र से संपर्क को और मजबूत करेगा, खनिजों, औद्योगिक वस्तुओं, निर्माण सामग्री और कृषि उत्पादों की आवाजाही में सुधार करेगा, जिससे रसद दक्षता, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप, यह परियोजना 16 आर्थिक नोड से कनेक्टिविटी में सुधार करेगी, जिनमें उन्नाव, बंथर, पंखी, रनिया, जैनपुर, रूमा, चकेरी, सुमेरपुर और भूरागढ़ औद्योगिक क्षेत्र, ट्रांस गंगा इंटीग्रेटेड टाउनशिप, ग्रोथ सेंटर जयपुर, कानपुर नगर नोड और बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड शामिल हैं। यह 9 सोशल नोड, अर्थात् फतेहपुर, महोबा, कानपुर जूलॉजिकल पार्क, बुद्ध पार्क, जेके मंदिर और जेके मंदिर से कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी। गार्डन, राधा कृष्ण मंदिर, सिद्धेश्वर महादेव मंदिर, गोपेश्वर मंदिर और महोबा पर्यटक स्थल, और 10 लॉजिस्टिक नोड, जिनमें कानपुर, घाटमपुर, हमीरपुर, महोबा, कबरई, भरवा सुमेरपुर और बांदा रेलवे स्टेशन, साथ में कानपुर, चकेरी और खजुराहो हवाई अड्डे शामिल हैं।

कुल मिलाकर, पीएम गतिशक्ति के उद्देश्यों को आगे बढ़ाते हुए, बुंदेलखंड और उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश के आसपास के क्षेत्रों में रसद प्रतिस्पर्धात्मकता, औद्योगिक विकास और आर्थिक विकास में सुधार करना इसका लक्ष्‍य है।

इस परियोजना से निर्माण के दौरान प्रति लेन प्रति किलोमीटर लगभग 11,188 प्रत्यक्ष और 13,985 अप्रत्यक्ष मानव-दिवस रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2028 तक इसकी वार्षिक औसत दैनिक यातायात (एएडीटी) लगभग 18,069 यात्री कार इकाइयों (पीसीयू) तक पहुंचने का अनुमान है, जो इसके दीर्घकालिक आर्थिक, रसद और परिवहन महत्व को दर्शाता है। इस प्रकार प्रस्तावित परियोजना से लगभग 1.2 करोड़ मानव-दिवस प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा।

कॉरिडोर का नक्शा: