प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम के निधन पर शोक व्यक्त किया।
अपने शोक संदेश में उन्होंने कहा कि डॉ कलाम हम सभी के मार्गदर्शक थे और देश के लिए की गई उनकी सेवाओं के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। अपने शोक संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा, " भारत के पूर्व राष्ट्रपति, और विशेष करके युवायों के प्रिय श्रीमान अब्दुल कलाम जी के निधन के समाचार पूरे देश के लिए और विश्व के वैज्ञानिक आलम के लिए एक बहुत ही दुखद समाचार है। राष्ट्रपति के रूप में उनका कार्य, उनका जीवन, उनकी हर बात देश के लिए आज भी दिशादर्शक है। एक वैज्ञानिक के रूप में उन्होंने भारत को नयीं उंचाईयों पर पहुँचाया था। भारत को सशक्त बनाने में, वैज्ञानिक शक्ति को जोड़ने का उनका जीवन भर का प्रयास भारत की बहुत बड़ी पूँजी है। वे राष्ट्रपति थे तब भी और बाद में भी यही कहते थे कि मैं तो एक teacher हूँ, मैं एक professor हूँ। पढ़ाना..ये मेरी passion है। और आज जीवन का अंत काल भी विद्यार्थिओं के बीच, अपने प्रिय काम को करते-करते ही उन्होंने वो अंतिम क्षण भी बितायी।
सामान्य परिवार में जन्मे हुए तमिलनाडु में दूर-सुदूर रामेश्वरम से जीवन की यात्रा प्रारम्भ की और हिंदुस्तान के जन-जन से लेकर के विश्व के अन्दर भारत की प्रतिष्ठा को बढ़ाने में आपका बहुत बड़ा योगदान रहा।
व्यक्तिगत मेरे जीवन में एक उत्तम, वरिष्ठ मार्गदर्शक रहे थे। उनके साथ बहुत निकटता से काम करने का मुझे अवसर मिला था। मैंने व्यक्तिगत जीवन में तो एक उत्तम मार्गदर्शक को खोया है, देश ने अपने एक ऐसे सपूत को खोया है, जिसने भारत की सेवा की, भारत को सशक्त बनाने के लिए। जिसने अपनी पल-पल लगायी, भारत की युवा पीड़ी को सशक्त बनाने के लिए, सामर्थवान बनाने के लिए। ऐसे महापुरुष की विदाई, मैं नहीं मानता कि कोई भर पायेगा। देश ने बहुत कुछ आज गंवाया है।
मैं उस महान आत्मा के प्रति अपने श्रधा-सुमन अर्पित करता हूँ। देश आज शोक-मग्न है। उनका कार्य हमें देश को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरणा देता रहेगा।
मैं फिर एक बार इस महापुरुष के जीवन को, उनके कार्य को, उनकी प्रेरणा को नमन करते हुए, देशवासियों को इस शोक-संतप्त अवस्था में, गहरे सदमे की इस अवस्था में, मेरे पास अधिक कुछ कहने के लिए शब्द नहीं बचे... ।“
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने संस्कृत में रचित सुभाषितम् को साझा किया, जिसमें पावन पृथ्वी को राष्ट्र की शक्ति के स्रोत के रूप में वर्णित किया गया है।
“यार्णवेऽधि सलिलमग्र आसीद्यां मायाभिरन्वचरन्मनीषिणः।
यस्या हृदयं परमे व्योमन्त्सत्येनावृतममृतं पृथिव्याः।
सा नो भूमिस्त्विषिं बलं राष्ट्रे दधातूत्तमे॥”
सुभाषितम् का अर्थ है कि पृथ्वी, जो महासागरों के रूप में जल से परिपूर्ण है और बाहरी रूप से जल से घिरी है, जिसे विद्वानों ने अपने ज्ञान से जाना है और जिसका हृदय विशाल आकाश में शाश्वत सत्य से ओत-प्रोत है - वह पृथ्वी एक महान राष्ट्र के रूप में हमारी ऊर्जा और शक्ति को बनाए रखे।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा;
“यार्णवेऽधि सलिलमग्र आसीद्यां मायाभिरन्वचरन्मनीषिणः।
यस्या हृदयं परमे व्योमन्त्सत्येनावृतममृतं पृथिव्याः।
सा नो भूमिस्त्विषिं बलं राष्ट्रे दधातूत्तमे॥”
यार्णवेऽधि सलिलमग्र आसीद्यां मायाभिरन्वचरन्मनीषिणः।
— Narendra Modi (@narendramodi) March 10, 2026
यस्या हृदयं परमे व्योमन्त्सत्येनावृतममृतं पृथिव्याः।
सा नो भूमिस्त्विषिं बलं राष्ट्रे दधातूत्तमे॥ pic.twitter.com/mfz8yB6SIq


