किसान को कोई आगे नहीं लाता बल्कि किसान देश को आगे ले जाता है: प्रधानमंत्री मोदी
साल 2022 तक जब आजादी के 75 साल होंगे देश के किसान की आय दोगुनी हो, इसके लिए सरकार संकल्पबद्ध है: पीएम मोदी
हमें तकनीक आधारित कुछ ऐसे ठोस उपायोंकी तरफ बढ़ना होगा जिससे हमारे किसान भाइयों के सामने पराली जलाने की मजबूरी खत्म हो जाए और इससे पर्यावरण की भी रक्षा हो: प्रधानमंत्री

नमस्कार!

मंत्रिपरिषद के मेरे साथी राधामोहन सिंह जी, उत्तर प्रदेश के लोकप्रिय एवं यशस्‍वी ऊर्जावान मुख्यमंत्री श्रीमान योगी आदित्यनाथ जी, जापान सरकार के असिस्टेंट डिप्युटी मिनिस्टर तकामी नाकाडा जी, इजराइल की प्रभारी राजदूत माया काडोश जी, कृषि जगत के वैज्ञानिक गण, अन्य महानुभाव और यूपी के कोने-कोने से पहुंचे मेरे प्‍यारे किसान बहनों और भाइयों!

प्रयागराज में लगने वाले अर्धकुंभ के लिए तो अभी कुछ महीने बाकी है। लेकिन यूपी की धरती पर एक और कुंभ आज से शुरु हो गया है। यूपी के अलग-अलग गांवों से करीब 50 हज़ार किसान, देश-विदेश से आए वैज्ञानिक, उद्यमी, लखनऊ में इस कृषि कुंभ का हिस्सा बन रहे हैं। मैं आप सभी का अभिवादन करता हूं, स्वागत करता हूं। और यूपी के सांसद के नाते भी ये मेरा कर्तव्‍य बनता है कि आपके सुख-दु:ख के साथी बनकर के आपके विकास यात्रा के लिए कुछ न कुछ प्रयास करता रहूं।

कुछ महीने पहले कृषि उन्नति मेले के दौरान मैंने वृहद किसान मेले लगाने की सलाह दी थी। इसका ही विस्तार आज हम कृषि-कुंभ के तौर पर देख रहे हैं। इस उत्तम प्रयास के लिए मैं योगी जी और उनकी पूरी टीम को बधाई देता हूं। मैं इजराइल और जापान की सरकारों का भी आभार व्यक्त करना चाहूंगा जो इस आयोजन में हमारे पार्टनर हैं। वहीं पार्टनर राज्य के रूप में हिस्सा ले रहे हरियाणा को भी इस आयोजन से बहुत लाभ होने वाला है।

साथियों, कुंभ शब्द जब भी किसी आयोजन के साथ जुड़ता है तो उसका महत्व और व्यापक हो जाता है। कुंभ एक तरह से मानवता का, विचार का, विमर्श का एक अनंत अंतर-प्रवाह है। मुझे विश्वास है कि इसी परंपरा, इसी भावना को ये कृषि कुंभ साकार करेगा और आने वाले तीन दिनों में कृषि क्षेत्र को बेहतर बनाने के लिए तकनीक और अन्‍य अवसरों का नया रास्ता खोलेगा।

साथियों, मुझे बताया गया है कि इस मेले मेंलगभग 200 स्टाल लगाए गए हैं, जिनमें किसानों को नई तकनीकों की जानकारी दी जा रही है, कृषि से जुड़ी नई मशीनें वहां रखी गई हैं। मुझे विश्‍वास है कि जो भी किसान यहां आएगा वो इससे लाभान्वित होगा और उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ, गुणवत्ता भी सुनिश्चित करने में भी किसानों को मदद मिलेगी। 

साथियों, देश भर में खरीफ का सीज़न करीब-करीब पूरा होने जा रहा है। सभी किसान भाई-बहन आजकल बहुत व्यस्त हैं। इस बार भी रिकॉर्ड उत्पादन होने की उम्मीद है। यूपी तो वो जगह है जहां के मेहनती किसानों द्वारा देश के खाद्यान्न का लगभग 20 प्रतिशत उत्पादन किया जाता है।इसके लिए मैं आप सभी का अभिनंदन करता हूं।देशभर की मंडियों में धान और दालों समेत तमाम फसलों की खरीददारी आज चल रही है। मुझे बताया गया है कि प्रदेश के अनेक हिस्सों में इसके लिए व्यापक प्रबंध भी किए गए हैं। इस बार तो किसानों को जो मूल्य मिल रहा है वो नए समर्थन मूल्य के आधार पर मिल रहा है।आप सभी की जानकारी में है कि सरकार ने रबी और खरीफ की 21 फसलों के समर्थन मूल्य में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की है।इन फसलों पर अब लागत का कम से कम 50 प्रतिशत सीधा लाभ किसान को मिले यहतय किया गया है।

साथियों, यूपी के किसान जहां उत्पादन का रिकॉर्ड बना रहे हैं तो योगी जी की सरकार किसानों से खरीद के रिकॉर्ड तोड़ती ची जा रही है। और इसलिए मैं योगी जी की सरकार को बधाई देता हूं।गेहूं के मामले में इस बार करीब 50-55 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है। जबकि पहले की सरकार में यही खरीद मात्र 7-8 लाख मीट्रिक टन हुआ करती थी। यानि करीब-करीब 7-8 गुणा किसानों से ख्‍रीददारी करके उनको सही दाम मिले इसकी चिंता भारतीय जनता पार्टी योगी जी की सरकार ने की है। यही नहीं ये जो खरीदारी की गई है ये ई-उपार्जन यानि तकनीक के माध्यम से सीधे किसान से की गई है, जिससे बिचौलियों को हटाने में भी मदद मिली है।

साथियों, ये बदलाव सिर्फ धान और गेहूं की खरीद में ही नहीं बल्कि गन्ने की खरीद प्रक्रिया को लेकर भी परिवर्तन स्पष्ट दिख रहा है। इस सीज़न का करीब 27 हजार करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किसानों को किया जा चुका है। इतना ही नहीं पिछले बकाए में से भी करीब 11 हजार करोड़ रुपए किसानों को दे दिए जा चुके हैं। मुझे बताया गया है कि चीनी मिलों पर जो बकाया है उसको भी जल्द दिलवाने का प्रयास योगी सरकार कर रही है।मुझे ये जानकर भी खुशी हुई कि यूपी सरकार ने पहली बार आलू खरीदने का भी फैसला लिया है। इससे निश्चित तौर पर उन किसानों को लाभ मिलने वाला है जिनको आलू का उचित मूल्य मिलने में समस्या आती थी।

साथियों, यूपी में हो रहे ये प्रयास केंद्र सरकार की उस प्रतिबद्धता का हिस्सा हैं, जिससे गांव और किसान हमारे आर्थिक चिंतन का एक प्रखर हिस्सा बने हैं। हमारा ये स्पष्ट मत है कि किसान को कोई आगे नहीं लाता बल्कि किसान देश को आगे ले जाता है। यही कारण है कि सरकार कृषि और किसान से जुड़ी समस्याओं पर टुकड़ों में काम करने की पुरानी सोच के बजाय अब पूरी समग्रता से काम कर रही है। हमारा ध्यान किसानों की छोटी-छोटी मुश्किलों को दूर करने पर है।

साथियों, साल 2022 तक जब आजादी के 75 साल होंगे देश के किसान की आय दोगुनी हो, इसके लिए सरकार संकल्पबद्ध है।किसानों की आय बढ़ाने के लिए कम लागत, अधिक लाभ की नीति पर चलते हुएखेती में वैज्ञानिक तरीकों का अभूतपूर्व समावेश किया जा रहा है। बीज से लेकर बाजार तक की एक मज़बूत व्यवस्था देश में तैयार की जा रही है।मिट्टी की सेहत से लेकर मंडियों में सुधार को लेकर अनेक कदम उठाए जा रहे हैं। देशभर में करीब 16 करोड़ से अधिक सॉयल हैल्‍थ कार्ड किसानों को दिए जा चुके हैं, जिसमें से करीब 3 करोड़ यहीं यूपी में बांटे गए हैं। इससे किसानों को ये तय करने में आसानी होती है कि कौन सी फसल उस मिट्टी के लिए उपयुक्त रहेगी और कौन सा फर्टिलाइजर, कितनी मात्रा में डालना जरूरी है।

साथियों, मिट्टी की गुणवत्ता के साथ-साथ इसकी उपजाऊ शक्ति को बनाए रखने के लिए आर्गेनिक फॉरमिंग को प्रोत्साहन दिया जा रहा है, wasteसे जो खाद बनती है उसके अधिक उपयोग के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। लेकिन देश की आवश्यकताओं के हिसाब से उत्पादन भी हो इसके लिए यूरिया जैसे फर्टिलाइजर की पर्याप्त उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई है। वहीं सिंचाई की व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। बड़े सिंचाई प्रोजेक्ट्स के अलावासिंचाई कीनई तकनीक को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। Per Drop, More Crop एक-एक बूंद से फसल को कैसे फायदा मिला। Per Drop, More Crop के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। Drip Irrigation, Sprinkler irrigation,यानि टपक सिंचाई, सूक्ष्‍म सिंचन पद्धतिजैसे वैज्ञानिक तरीके हमारी सिंचाई व्यवस्था का हिस्सा बन रहे हैं।

इजरायलको तो सिंचाई के इन नए तरीकों में महारथ हासिल है। वहीं जापान भी कृषि से जुड़ी तकनीक के मामले में बहुत व्यापक काम कर रहा है। लिहाज़ा इस कृषि कुंभ का पार्टनर होने के नाते आप सभी को, पूरे देश को इन दोनों देशों की विशेषज्ञता का लाभ मिलने वाला है।

साथियों, इसके साथ-साथ हम बिजली और डीजल पर चलने वाले पंपों को सोलर पंप में बदलने की तरफ तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। इन व्यवस्थाओं के अतिरिक्त सिंचाई का बहुत बड़ा साधन हमारे पंप हैं, लिहाज़ा इसकी तरफ भी बहुत बड़ा प्रयास हो रहा है। बिजली या डीजल पर चल रहे इन पंपों को सूर्य ऊर्जा से चलने वाले सौर पंपों से बदलने का एक व्यापक अभियान चल रहा है। इसके तहत आने वाले चार वर्षों में, देशभर में करीब 28 लाख किसानों के खेतों में सोलर पंप लगाए जाने हैं।इससे किसानों को एक तो मुफ्त बिजली मिलेगी, दूसरा, जरूरत के अतिरिक्त जो बिजली पैदा होती है उसको वो बिजली वितरण कंपनियोंको बेच भी पाएंगे।

साथियों,एक समय था कल जो हमारा किसान अन्‍नदाता था वो आज ऊर्जादाता भी बनने की संभावना भी पैदा हो गई है। वो अन्‍नदाता भी है अब ऊर्जादाता भी बन जाएगा। साथियों,इस अभियान से किसानों के जीवन में कितना परिवर्तन आ रहा है इसका साक्षी मैं कुछ दिन पहले गुजरात जब गया तो मुझे देखने को मिला वहां एक गांव में कुछ किसान परिवारों ने मिलकर खेत के अंदर ही सोलर पैनल और सोलर पंप का काम शुरु किया। सूर्य किरणों से बिजली पैदा करना शुरू किया उससे अपना खेता का काम चलता था, पंप चलता था। इससे उनकी बिजली की जरूरत तो पूरी हुई ही, साथ में करीब 50 ह़जार रुपए प्रतिवर्ष वो बिजली बेचकर कमा रहे हैं।

साथियों, विज्ञान का सीधा लाभ किसान को मिले इसके लिए सरकार ने गंभीर प्रयास किए हैं। किसानों और वैज्ञानिकों से, अनुसंधान केन्‍द्रों से सीधे जोड़ने का काम किया जा रहा है। ताकि जो भी नई खोज खेती से जुड़ी हुई हो, बीज से जुड़ी हो, उसकी सही जानकारी कम से कम समय में किसान तक पहुंच सके।इसके लिए देशभर के लगभग 700 कृषि विज्ञान केन्‍द्रों को भी बहुत बड़ी भूमिका दी गई है। खेती पर रिसर्च से जुड़े आधुनिक संस्थान तैयार किए जा रहे हैं। वाराणसी में बन रहा Rice Research Centre इसी दिशा में एक बड़ा प्रयास भी है।किसान की पैदावार का अधिक दाम दिलाने के लिए Value Addition के लिए भी बड़े कदम सरकार ने उठाए हैं। Food Processing Sector में सौ प्रतिशत FDI का फैसला सरकार ने लिया है।

हम भी जानते हैं कि टमाटर बेचें तो सस्‍ते में जाता है लेकिन टमाटर का सूप बेचें और बोतल में भरकर बेचें तो ज्‍यादा पैसे मिलता है। कच्‍चे आम का कम पैसा मिलता है लेकिन कच्‍चे आम का अचार बनाकर बेचें तो अधिक पैसा मिलता है। हरी मिर्च का कम पैसा मिलता है लकिन मिर्ची का पाउडर बनाकर बेचें तो ज्‍यादा पैसा मिलता है। यह है Value Addition. इसके अलावा, इस साल बजट में टमाटर, प्याज और आलू की पैदावार से जुड़े Value addition के लिए 500 करोड़ रुपए की राशि से TOPयोजना का भी ऐलान किया गया। इससे भी यूपी के आलू किसानों को काफी लाभ मिलेगा।इससे कृषि क्षेत्र में निवेश के रास्ते खुले हैं, जिसका बहुत बड़ा लाभ उत्तर प्रदेश को हो रहा है। मुझे बताया गया है कि यूपी Investors Summit में Food Processing sectorयानि कृषि उत्‍पादन सेक्‍टर में मूल्‍य वृद्धिमें करीब 16 हजार करोड़ रुपए के निवेश के प्रस्ताव आए थे। इसमें से साढ़े 3 हज़ार करोड़ की 14 परियोजनाओं का लोकार्पण भी हो चुका है।

साथियों, ये तो वो काम हैं जो खेती को लाभकारी बनाने के लिए किए जा रहे हैं, इसके अलावा दूसरे माध्यमों से भी किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास हो रहे हैं।Green Revolution के सफल प्रयोग के बाद अब हम White Revolution, Sweet Revolution, Blue Revolution जैसे नए रास्तों पर निकल पड़े हैं। दूध उत्पादन हो, शहद उत्पादन हो, अंडा या मछली उत्पादन हो, देश नए-नए रिकॉर्ड बना रहा है।दो दिन पहले ही भारत सरकार ने मछली उत्पादन से जुड़े किसान परिवारों को, मछुआरे भाई-बहनों के लिए एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने साढ़े 7 हज़ार करोड़ रुपए के एक नए फंड को मंज़ूरी दे दी है।

साथियों, इस कृषि कुंभ में मौजूद आप सभी किसान, खेती से जुड़े एक्सपर्ट, वैज्ञानिक, भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। क्योंकि आप जो कुछ भी कर रहे हैं उसका आने वाले समय में तेज़ी से बढ़ते हमारे आर्थिक सामर्थ्य पर बहुत बड़ा असर होने वाला है।मेरी आपसे अपेक्षा है कि इस कृषि कुंभ में किसानों के साथ बैठकर खेतीसे जुड़ीतकनीक पर और गहन मंथन हो। खाद का उपयोग कैसे कम हो, कम पानी का उचित उपयोग कैसे हो, फसल के भंडारण की तकनीक बेहतर कैसे हो, रोबोट और ड्रोन जैसी तकनीक का खेती में प्रभावी उपयोग कैसे किया जाए, ऐसे अनेक विषय हैं जिन पर अधिक कार्य करने की जरूरत है।

इसके अलावा पराली को, जो कि एक Waste के रूप में देखा जाता है, उसे भी नई तकनीक के माध्यम से Wealth में कैसे बदला जाए, कचड़े को भी कंचन बनाया जा सकता है। खेत के अंदर कोई चीज निक्‍कमी नहीं होती है, फसल के पहले भी नहीं फसल के बाद भी नहीं। खेत की हर चीज सोना ही तो है। किसान अगर उसे जोहरी की तरह उपयोग कर लो तो उसकी खेत की एक भी चीज बेकार नहीं जाएगी। कचड़ा भी कंचन बन सकता है, waste में भी wealth create हो सकता है। इसपर भी और व्यापक तरीके से काम करने की आवश्यकता है। सरकार अभी पराली जलाने से रोकने के लिए किसानों को मशीनों के लिए 50 से 80 प्रतिशत तक की छूट दे रही है। लेकिन हमें तकनीक आधारित कुछ ऐसे ठोस उपायोंकी तरफ बढ़ना होगा जिससे हमारे किसान भाइयों के सामने पराली जलाने की मजबूरी खत्म हो जाए और इससे पर्यावरण की भी रक्षा हो।

मुझे विश्वास है कि आने वाले तीन दिनों के दौरान कृषि को लाभकारी बनाने के लिए इन विषयों पर, और इनमेंValue Addition कैसे हो, इस पर आप चिंतन करेंगे। विशेष रूप से यूपी के अलग-अलग जिलों में, वहां की ज़रूरत के हिसाब से कैसे नए प्रयोग किए जा सकते हैं, इस पर भी चर्चा करेंगे।

ये कृषि कुंभ यूपी के साथ-साथ पूरे देश की कृषि व्यवस्था को नई दिशा देगा, इसी कामना के साथ एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

बहुत-बहुत धन्यवाद!

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उत्तर प्रदेश अब देश में सबसे ज्यादा इंटरनेशनल एयरपोर्ट वाले राज्यों में शामिल: जेवर में पीएम मोदी
March 28, 2026
नोएडा अंतरराष्ट्रीय विमान पत्तन के प्रथम चरण का उद्घाटन उत्तर प्रदेश की विकास गाथा और भारत के विमानन भविष्य में एक महत्वपूर्ण कदम है: प्रधानमंत्री
उत्तर प्रदेश अब भारत में सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय विमान पत्तनों वाले राज्यों में से एक बन गया है: प्रधानमंत्री
विमान पत्तन किसी भी देश में केवल बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, वे प्रगति को उड़ान देते हैं: प्रधानमंत्री
हमारी सरकार एक विकसित भारत के निर्माण के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व निवेश कर रही है: प्रधानमंत्री

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

उद्धघाटन हो गया? उद्धघाटन हो गया? नहीं, अभी आधा काम हुआ है। मैंने सिर्फ वो पर्दा हटाया है, लेकिन मैं आज चाहता हूं इस एयरपोर्ट का उद्धघाटन यहां जो भी उपस्थित हैं, आप सब करें, और इसलिए आप अपना मोबाइल फोन निकालिये, अपने मोबाइल फोन का फ्लैश लाईट कीजिए और आपका इसका उद्धघाटन कर रहे हैं। आप दीया जलाकर के यहां उपस्थित हर व्यक्ति, आज इस एयरपोर्ट का उद्धघाटन कर रहा है। ये आपकी अमानत है, ये आपका भविष्य है, ये आपका पुरूषार्थ है और इसलिए इसका उद्धघाटन भी आपके हाथों से हो रहा है, आप अपने भारत माता की जय बोलकर के, हाथ ऊपर करके, फ्लैश लाईट पूरी तरह से दिखाइये। भारत माता जी जय। भारत माता जी जय। भारत माता जी जय। बहुत-बहुत धन्यवाद। अब उद्धघाटन हो गया।

उत्तरप्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, यहां के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या, ब्रजेश पाठक, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्री राममोहन नायडू जी, पंकज चौधरी जी, ज्यूरिक एयरपोर्ट के चेयरमैन जोसेफ फेल्डर जी, अन्य मंत्रिगण, सांसद, विधायक, अन्य महानुभाव और मेरे प्यारे भाइयों और बहनों।

मैं देख रहा हूं, आज जहां भी मेरी नजर पड़ रही है, सारे युवा मुझे नजर आ रहे हैं, उत्साह से भरे युवा हैं, जोश से भरे हुए युवा हैं, क्योंकि इन युवाओं को पता है, ये जो काम हो रहा है ना, ये नौजवानों के भविष्य को नई उड़ान देने वाला काम हो रहा है। आज हम विकसित यूपी-विकसित भारत अभियान का एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं। देश का सबसे बड़ा प्रदेश, आज देश के सबसे अधिक इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स वाले राज्यों में से एक हो गया है। और आज मेरे लिए गर्व और प्रसन्नता के दो कारण हैं। एक तो ये है कि इस एयरपोर्ट का शिलान्यास भी करने का सौभाग्य आप सबने मुझे दिया था और आप सबने इस एयरपोर्ट के उद्धघाटन का सौभाग्य भी मुझे दिया, लेकिन मैंने उस सौभाग्य को आपके साथ बांट दिया और आपके हाथों से उद्धघाटन करवा दिया। दूसरा, जिस उत्तर प्रदेश ने मुझे अपना प्रतिनिधि चुना, जिस उत्तर प्रदेश ने मुझे सांसद बनाया, उसकी पहचान के साथ, उस उत्तर प्रदेश की पहचान के साथ इस भव्य एयरपोर्ट का नाम भी जुड़ गया है।

साथियों,

नोएडा का ये एयरपोर्ट, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, गाजियाबाद, मेरठ, इटावा, बुलंदशहर, फरीदाबाद, इस पूरे क्षेत्र को बहुत बड़ा लाभ होने वाला है। हिन्दुस्तान को और उत्तर प्रदेश को तो होना ही होना है। ये एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों, छोटे और लघु उद्योगों, यहां के नौजवानों के लिए, अनेक नए अवसर लेकर आने वाला है। यहां से दुनिया के लिए विमान तो उड़ेंगे ही, साथ ही, ये विकसित उत्तर प्रदेश की उड़ान का भी प्रतीक बनेगा। मैं उत्तर प्रदेश को, विशेष रूप से पश्चिम उत्तर प्रदेश की जनता को इस भव्य एयरपोर्ट के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आज का ये कार्यक्रम, भारत के नए मिज़ाज का प्रतीक है। आप सभी देख रहे हैं कि आज पूरा विश्व कितना चिंतित है। पश्चिम एशिया में एक महीने से युद्ध चल रहा है। युद्ध की वजह से कई सारे देशों में खाने-पीने के सामान, पेट्रोल-डीज़ल-गैस, खाद, ऐसी कई ज़रूरी चीज़ों का चारो तरफ संकट पैदा हो गया है। हर देश इस संकट का सामना करने के लिए कुछ न कुछ कोशिश कर रहा है, प्रयास कर रहा है। और हमारा भारत भी इस संकट का पूरी शक्ति से मुकाबला कर रहा है, देशवासियों की ताकत के भरोसे कर रहा है। भारत तो बहुत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस, ये जहां युद्ध चल रह है ना, इस युद्ध से प्रभावित इलाके से मंगाता रहा है। इसलिए सरकार हर वो कदम उठा रही है, जिससे सामान्य परिवारों पर, हमारे किसान भाई-बहनों पर, इस संकट का बोझ न पड़े।

साथियों,

संकट के इस समय में भी, भारत ने अपने तेज़ विकास को निरंतर जारी रखा है। मैं सिर्फ पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ही बात करुं, तो पिछले कुछ सप्ताह में ही, ये चौथा बड़ा प्रोजेक्ट है, जिसका शिलान्यास या लोकार्पण हुआ है। इन कुछ ही सप्ताह में, इस दौरान नोएडा में बहुत बड़ी सेमीकंडक्टर फैक्ट्री का शिलान्यास हुआ, इसी कालखड में देश की पहली दिल्ली-मेरठ नमो-भारत ट्रेन ने गति पकड़ी, इसी कालखंड में मेरठ मेट्रो का विस्तार किया गया, और इतने कम समय में आज नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का आप सबके हाथों से उद्धघाटन भी हो गया।

साथियों,

ये सारे प्रोजेक्ट्स, यूपी के विकास के लिए, डबल इंजन सरकार के प्रयासों का शानदार उदाहरण हैं। सेमीकंडक्टर फैक्ट्री, भारत को टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बना रही है। मेरठ मेट्रो और नमो भारत रेल, तेज और स्मार्ट कनेक्टिविटी दे रही है। और ये हमारा जेवर एयरपोर्ट, पूरे उत्तर भारत को दुनिया से जोड़ रहा है। और आपने अभी वीडियो में देखा, ये ऐसा एयरपोर्ट बन रहा है, हर दो मिनट में एक जहाज उड़ेगा, हर दो मिनट में एक जहाज उड़ेगा। पहले सपा वालों ने नोएडा को अपनी लूट का ATM बना लिया था। लेकिन आज भाजपा सरकार में वही नोएडा, यूपी के विकास का सशक्त इंजन बन रहा है।

साथियों,

जेवर का ये एयरपोर्ट, डबल इंजन सरकार की कार्यसंस्कृति का भी बहुत अच्छा उदाहरण है। अब आप सोचिये, इस एयरपोर्ट को अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार ने 2003 में ही फाइल में मंजूरी दे दी थी। 2003 में, आपमें से बहुत होंगे जिसका जन्म नहीं हुआ होगा, बहुत वो लोग होंगे जो उस समय 25-30 साल के 35 साल के हुए होंगे और आज रिटायर भी हो गए, लेकिन एयरपोर्ट नहीं बना। लेकिन केंद्र में कांग्रेस और यहां की पहले की सरकारों ने सालों तक इस एयरपोर्ट की नींव तक नहीं पड़ने दी। 2004 से 2014 तक ये एयरपोर्ट फाइलों में ही दबा रहा। जब हमारी सरकार बनी तो यूपी में सपा की सरकार थी। शुरु के दो-तीन सालों में सपा वालों ने इस पर काम नहीं होने दिया। लेकिन जैसे ही यहां भाजपा-NDA की सरकार बनी, दिल्ली में भाजपा-एनडीए की सरकार बनी, तो जेवर एयरपोर्ट की नींव भी पड़ी, निर्माण भी हुआ और अब ये शुरु भी हो गया है।

साथियों,

एयरपोर्ट के अलावा ये क्षेत्र देश के दो बड़े फ्रेट कॉरिडोर्स का भी हब बन रहा है। ये फ्रेट कॉरिडोर मालगाड़ियों के लिए बिछाई गई स्पेशल पटरियां हैं। इससे उत्तर भारत की बंगाल और गुजरात के समंदर से कनेक्टिविटी बेहतर हो गई है। और दादरी वो स्थान है जहां ये दोनों कॉरिडोर्स आपस में मिलते हैं। यानी यहां किसान जो उगाते हैं, यहां उद्योग जो कुछ बनाते हैं, वो जमीन से, हवाई मार्ग से, दुनिया के कोने-कोने तक तेज़ी से जा पाएगा। ऐसी मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी के कारण, यूपी दुनियाभर के निवेशकों के लिए बहुत बड़ा आकर्षण बन रहा है।

साथियों,

जिस नोएडा को पहले अंधविश्वास के कारण अपने हाल पर छोड़ दिया गया था, कुर्सी जाने के डर से पहले के सत्ताधारी यहां आने से डरते थे, मुझे याद है यहां की सपा सरकार थी और मैंने नोएडा आने का कार्यक्रम बनाया, तो मुख्यमंत्री इतने डरे हुए थे कि वो उस कार्यक्रम में नहीं आए और मुझे भी डराने की लोगों ने कोशिश की, कि नोएडा मत जाओ मोदी जी, अभी-अभी प्रधानमंत्री बने हो। मैंने कहा इस धरती का आशीर्वाद लेने जा रहा हूं, जो मुझे लंबे अर्से तक सेवा करने का मौका देगा। अब वही इलाका पूरी दुनिया का स्वागत करने के लिए तैयार है। ये पूरा क्षेत्र, आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सशक्त कर रहा है।

साथियों,

इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में, खेती-किसानी का बहुत महत्व है। मैं आज उन मेरे किसान भाई-बहनों का विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने इस प्रोजेक्ट को साकार करने के लिए अपनी जमीनें दी है। उन किसानों के लिए जोरदार तालियां बजाइये दोस्तों, मेरे किसान भाई-बहनों के लिए जोरदार तालियां बजाइये। मेरे किसान भाई-बहन, आपके इस योगदान से ही, इस पूरे क्षेत्र में विकास का एक नया दौर शुरु होने जा रहा है। आधुनिक कनेक्टिविटी का जो विस्तार यहां हो रहा है, उससे पश्चिमी यूपी में फूड प्रोसेसिंग की संभावनाओं को और बल मिलेगा। अब यहां के कृषि उत्पाद दुनिया के बाज़ारों में और बेहतर तरीके से जा पाएंगे।

साथियों,

यहां मैं अपने किसान साथियों का एक और बात के लिए भी आभार व्यक्त करना चाहता हूं। आपके गन्ने से जो इथेनॉल बनाया गया है, उससे कच्चे तेल, कच्चे तेल पर देश की निर्भरता कम हुई है। अगर इथेनॉल का उत्पादन ना बढ़ता, पेट्रोल में उसकी ब्लेंडिंग ना बढ़ती, तो देश को हर वर्ष साढ़े चार करोड़ बैरल, साढ़े चार करोड़ बैरल यानी लगभग 700 करोड़ लीटर कच्चा तेल विदेशों से मंगवाना पड़ता। किसानों के परिश्रम ने देश को इस संकट के समय में इतनी बड़ी राहत दी है।

साथियों,

इथेनॉल से देश को तो फायदा हुआ ही है, किसानों को भी बहुत बड़ा लाभ हुआ है। इससे करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा बची है। यानी इथेनॉल न बनाते तो ये पैसा विदेश जाना जय था। बीते वर्षों में इतना सारा पैसा, देश के किसानों को मिला है, गन्ना किसानों को मिला है।

साथियों,

यहां के गन्ना किसानों ने तो पहले के वो दिन भी देखे हैं, जब कई-कई सालों तक गन्ने का बकाया लटका रहता था। लेकिन आज भाजपा की डबल इंजन सरकार के प्रयासों से गन्ना किसानों की स्थिति बेहतर हुई है।

साथियों,

किसी भी देश में एयरपोर्ट सिर्फ एक सामान्य सुविधा नहीं होता। ये एयरपोर्ट प्रगति को भी उड़ान देते हैं। साल 2014 से पहले, देश में सिर्फ 74 एयरपोर्ट थे। आज 160 से अधिक एयरपोर्ट्स देश में हैं। अब महानगरों के अलावा, देश के छोटे-छोटे शहरों में भी हवाई कनेक्टिविटी पहुंच रही है। पहले जो सरकारें रही हैं, वे मानती थीं कि हवाई यात्रा सिर्फ अमीरों के लिए ही होनी चाहिए। लेकिन भाजपा सरकार ने, सामान्य भारतीय के लिए हवाई यात्रा को आसान बना दिया है। हमारी सरकार ने उत्तर प्रदेश में हवाई अड्डों के नेटवर्क का तेज़ी से विस्तार करते हुए उनकी संख्या बढ़ाकर सत्रह कर दी है।

साथियों,

भाजपा सरकार का निंरतर प्रयास रहा है कि एयरपोर्ट भी बने और किराया-भाड़ा भी सामान्य परिवारों की पहुंच में रहे। इसलिए, हमने उड़ान योजना शुरु की थी। इस स्कीम के कारण, बीते कुछ सालों में एक करोड़ साठ लाख से अधिक देशवासियों ने उड़ान योजना से टिकट लेकर सस्ती दरों पर हवाई यात्रा की है। और मैं आपको एक और जानकारी देना चाहता हूं। हाल में ही केंद्र सरकार ने उड़ान योजना को और विस्तार दिया है। इसके लिए लगभग 29 हज़ार करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। आने वाले वर्षों में इसके तहत, छोटे-छोटे शहरों में 100 नए एयरपोर्ट और 200 नए हेलीपैड बनाने की योजना है। यूपी को भी इससे बहुत अधिक लाभ होगा।

साथियों,

भारत का एविएशन सेक्टर, बहुत तेज़ से गति और विकास कर रहा है। जैसे-जैसे भारत में नए-नए एयरपोर्ट बन रहे हैं, वैसे-वैसे नए हवाई जहाज़ों की ज़रूरत भी बढ़ती जा रही है। इसलिए देश की अलग-अलग एयरलाइन्स ने सैकड़ों नए जहाजों के ऑर्डर दिए हैं। ये जो नई सुविधाएं हैं, नए जहाज आ रहे हैं, इनको उड़ाने वाले, इनमें सर्विस देने वाले, मेंटनेस से जुड़े, ऐसे हर काम के लिए बहुत बड़ी संख्या में वर्कफोर्स की ज़रूरत रहेगी। ये युवाओं के लिए बहुत बड़ा अवसर है। इसलिए हमारी सरकार, एविएशन सेक्टर में ट्रेनिंग की सुविधाओं का भी विस्तार कर रही है।

साथियों,

आप जब अपनी कोई गाड़ी खरीदते हैं, तो ये जरूर देखते हैं कि उस गाड़ी बनाने वाली कंपनी का सर्विसिंग सेंटर आसपास है या नहीं है। आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि हमारे देश में हवाई जहाजों की सर्विसिंग, यानी उनके मैंटनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल की पुख्ता व्यवस्थाएं ही नहीं थीं। भारत के 85 एयरपोर्ट, 85 परसेंट हवाई जहाजों को आज भी मैंटनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल यानी MRO के लिए, इस काम के लिए विदेश भेजना पड़ता है। इसलिए हमारी सरकार ने ठाना है कि MRO सेक्टर में भी भारत को आत्मनिर्भर बनाएंगे। अब भारत में ही, बहुत बड़े पैमाने पर MRO सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। आज यहां जेवर में भी MRO सुविधा का शिलान्यास हुआ है। ये सुविधा जब तैयार हो जाएगी, तो ये देश-विदेश के विमानों को सेवा देगी। इससे देश को कमाई भी होगी, हमारा पैसा भी देश में ही रहेगा, और युवाओं को अनेक रोजगार भी मिलेंगे।

साथियों,

आज हमारी सरकार की प्राथमिकता देश के नागरिकों की सुविधा है। देश के नागरिक का समय बचे और उसकी जेब पर ज्यादा बोझ भी न पड़े, ये हमारा लक्ष्य है। मेट्रो और वंदे भारत जैसी आधुनिक रेल सेवाओं का इसी भाव से ही विस्तार किया जा रहा है। दिल्ली-मेरठ नमो भारत रेल, इसका कितना फायदा हो रहा है, ये भी हम सब देख रहे हें। अभी तक नमो भारत, ढाई करोड़ से अधिक लोग सफर कर चुके हैं। दिल्ली-मेरठ के जिस सफर में पहले घंटों लग जाते थे, अब वो सफर मिनटों में ही पूरा हो रहा है।

साथियों,

विकसित भारत के विकसित आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमारी सरकार अभूतपूर्व निवेश कर रही है। बीते 11 वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर का बजट छह गुणा से अधिक बढ़ाया गया है। इन वर्षों में 17 लाख करोड़ रुपये हाईवे और एक्सप्रेसवे पर खर्च किए गए हैं, एक लाख किलोमीटर से अधिक के हाईवे का निर्माण किया गया है। 2014 तक रेलवे में सिर्फ 20 हजार किलोमीटर रूट का बिजलीकरण हुआ था। जबकि 2014 के बाद से 40 हजार किलोमीटर से ज्यादा रेलवे ट्रैक का बिजलीकरण किया गया है। आज ब्रॉडगेज नेटवर्क का लगभग शत-प्रतिशत बिजलीकरण हो चुका है। आज कश्मीर घाटी हो या नॉर्थ ईस्ट की राजधानियां, ये पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़ रही हैं। पोर्ट यानी बंदरगाहों की क्षमता, बीते दशक में दोगुने से अधिक हुई है। देश में नदी जलमार्गों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। विकसित भारत के निर्माण के लिए जरूरी हर क्षेत्र में भारत तेज़ी से काम कर रहा है।

साथियों,

विकसित भारत बनाने के लिए सबका प्रयास बहुत ज़रूरी है। ये आवश्यक है कि 140 करोड़ देशवासी कड़े से कड़ा परिश्रम करे, और वैश्विक संकटों का एकजुट होकर सामना करें। अभी जो युद्ध चल रहा है, इससे पैदा हुए संकटों का सामना कैसे करना है, इसके बारे में मैंने संसद में भी विस्तार से बताया है। मेरी कल देश के सभी मुख्यमंत्रियों से भी लंबी चर्चा हुई है और बड़ी सकारात्मक चर्चा हुई है। मैं आज आप सभी जनता-जनार्दन से फिर कहूंगा, मैं देशवासियों से फिर से कहूंगा। हमें शांत मन से, धैर्य के साथ, एकजुटता के साथ, मिल जुलकर के, इस संकट का सामना करना है। ये पूरे विश्व में परेशानी पैदा करने वाला संकट है। हमें अपने देश की सबसे ज्यादा चिंता करनी है। और यही हम भारतीयों की सबसे बड़ी ताकत है। मैं यूपी के, देश के सभी राजनीतिक दलों से भी आग्रहपूर्वक कहना चाहता हूं, विनती पूर्वक कहना चाहता हूं, इस प्रकार के संकट में ऐसी बातें करने से बचें, जो देश के लिए नुकसानदायक हैं। जो भारतीयों के हक में है, जो भारत के हित में है, वही भारत सरकार की नीति और रणनीति है। राजनीति के लिए गलत बयानबाज़ी करने वाले, राजनीतिक बहस में तो कुछ नंबर पा लेंगे, लेकिन देश को नुकसान पहुंचाने वाली हरकतों को देश की जनता कभी माफ नहीं करती। कोरोना के महासंकट के दौरान भी, कुछ लोगों ने अफवाहें फैलाईं, वैक्सीन को लेकर झूठ बोले, ताकि सरकार का काम मुश्किल हो, देश को नुकसान हो। परिणाम क्या हुआ? जनता ने चुनावों के दौरान ऐसी राजनीति को नकार दिया, ठुकरा दिया। मुझे पूरा भरोसा है, कि देश के सभी राजनीतिक दल भी इससे सबक सीखेंगे और देश के एकजुट प्रयासों को वो बल देंगे, ताकत देंगे। इसी आग्रह के साथ, एक बार फिर से उत्तर प्रदेश को इस शानदार एयरपोर्ट के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

मेरे साथ बोलिये-

भारत माता की जय!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

बहुत-बहुत धन्यवाद।