भारत की प्रगति गांवों के विकास पर निर्भर है: प्रधानमंत्री मोदी
ग्रामीण और शहरी भारत के बीच की खाई को ख़त्म करने की जरूरत: प्रधानमंत्री मोदी
महात्मा गांधी कहा करते थे कि भारत का दिल यहाँ के गांवों में बसता है: प्रधानमंत्री
ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों को यह मानना चाहिए कि अपने कार्यकाल के दौरान उनके पास कुछ परिवर्तनकारी करने का अवसर है: पीएम मोदी
पंचायतों में महिला प्रतिनिधियों को सुनिश्चित करना चाहिए कि गांव में पर्याप्त शौचालय हैं या नहीं: प्रधानमंत्री मोदी
हमें पंचायतों को मजबूत करने की जरूरत है। ग्राम सभाओं का वही महत्व है जो संसद का है: प्रधानमंत्री मोदी

विशाल संख्या में पधारे हुए झारखण्ड के मेरे भाईयों और बहनों और देश भर की पंचायतों से आये हुए सभी पंचायतों के प्रतिनिधि और आज technology के माध्यम से देश भर की लाखों पंचायतों में बैठ कर के इस कार्यक्रम में भागीदार हुए उन सभी ग्रामवासियों को आज पंचायत राज दिवस पर मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

सामान्‍य रूप से पंचायत राज दिवस दिल्‍ली में विज्ञान भवन में हुआ करता था। कुछ प्रतिनिधि आते थे मान-सम्‍मान यही परंपरा चलती थी। हमने आ करके एक प्रयास किया कि देश बहुत बड़ा है। दिल्‍ली ही देश है, इस भ्रम में से बाहर आना चाहिए। और इसलिए हमारी कोशिश रही है कि भारत सरकार को दिल्‍ली से बाहर निकाल करके हिंदुस्‍तान के अलग-अलग इलाकों में ले जाया करे। और इसलिए भारत से कई कार्यक्रम, अब हम दिल्‍ली के बाहर जनता जनारदन के बीच में ले जाने का एक निरंतर प्रयास करते हैं।

जब देश के किसानों के लिए soil health card का प्रारंभ करना था, तो हमने राजस्‍थान चुना था, जहां पर पानी की किल्‍लत रहती है, जहां किसान को बहुत सारा झूझना पड़ता है। जब हमने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान प्रारंभ किया, तो हमने हरियाणा की धरती से किया था। क्‍यों‍ हरियाणा देश में बालकों की तुलना में कम से कम बालिकाओं वाला राज्‍य था। एक बहुत बड़ी चिंता का विषय था और उस एक कार्यक्रम का परिणाम यह आया कि हरियाणा ने साल भर के भीतर-भीतर gender ratio में अमूलचून परिवर्तन कर दिया। बालक और बालिकाओं की संख्‍या बराबर करने की दिशा में वो तेज गति से सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहे हैं। हमें जब सामान्‍य मानव को सुरक्षा देने वाली जीवन योजनाओं का एक नया संस्‍करण सामान्‍य नागरिकों के लिए लाना था। जिन राज्‍यों में अधिकतम गरीबी है उनमें से एक पश्चिम बंगाल में हमने उस कार्यक्रम का आरंभ किया था। और आज मुझे खुशी है कि ‘ग्राम उदय से भारतोदय’, पंयायत राज व्‍यवस्‍था गांवों में बसने वाले हिंदुस्‍तान की ओर भारत सरकार का और भारत का प्रतिबद्धता, commitment इस अवसर को झारखंड की भगवान बिरसा मुंडा की धरती को हमने पसंद किया है। और आज इस धरती से देश के गांववासियों से बातचीत करने का मुझे सौभाग्‍य मिला है।

महात्‍मा गांधी कहा करते थे कि भारत गांवों में बसा हुआ है, लेकिन हम देख रहे हैं कि आजादी के इतने सालों के बाद, गांव और शहर के बीच खाई बढ़ती ही चली गई। जो सुविधाएं शहर में हैं क्‍या गांव उसका हकदार नहीं है क्‍या? अगर बिजली शहर को मिलती है तो बिजली गांव के घर तक जानी चाहिए कि नहीं जानी चाहिए? अगर शहर में बढि़या सड़क है तो गांव के लोगों को भी आने-जाने में काम आ जाए ऐसी तो सड़क मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए? और इन बातों को ले करके अब की बार का आपने बजट देखा होगा, पूरे देशभर में वाह-वाही हो रही है कि आजादी के कई वर्षों के बाद पहली बार गांवों का आदमी जी-जान से कह सके कि यह मेरा बजट है, मेरे लिए बजट है, गांव के लिए बजट है, किसान के लिए बजट है। ऐसा विश्‍वास इस बजट से प्रस्‍तावित हुआ है।

भाईयों-बहनों 14 अप्रैल से 24 अप्रैल यह पंचायत राज दिवस तक ‘ग्राम उदय से भारतोदय’ देश के लाखों गांवों में 10 दिन का एक बड़ा अभियान चलाया गया। 14 अप्रैल को इस अभियान का प्रांरभ मैंने भारत के संविधान निर्माता श्रीमान बा‍बा साहब की जन्‍म स्‍थली मध्‍यप्रदेश के मऊ से किया था। लाखों की तादाद में मध्‍यप्रदेश के नागरिक उसमें सम्मिलित हुए थे। और 14 अप्रैल से आरंभ हुआ यह अभियान पूरे देश में अलग-अलग विषयों पर फोकस करता हुआ, योजनाओ का आरंभ करता हुआ, नये संकल्‍प करता हुआ, जागृति की नई ऊंचाईयों को पार करता हुआ, पूरे देश में चलता रहा। और यह कार्यक्रम इतना व्‍यापक हुआ और मैं चौधरी वीरेंद्र सिंह और उनके विभाग के सभी लोगों को, मैं राज्‍य सरकारों को हृदय से अभिनंदन करना चाहता हूं कि ऐसी चमचमाती धूप में भी, ऐसी गर्मी में भी सरकार के बड़े-बड़े अधिकारी गांव में गए। राजनेता गांव में गए, गांव में कार्यक्रम की भरमार बनी रही और गांव को आगे बढ़ाने का एक माहौल गांव के भीतर पैदा हुआ और अपने बलबूते पर अपने पास जो उपलब्‍ध resources हैं, उन resources के आधार पर गांव को आगे बढ़ाने का संकल्‍प आज हिंदुस्‍तान भर में नजर आ रहा है।

हम देख रहे हैं कि कुछ गांव कल्‍पना बाहर शहरों से भी उत्‍तम कभी-कभी व्‍यवस्‍थाएं बनाने में सफल हुए हैं। अगर गांव की पंचायत व्‍यवस्‍था में बैठे हुए प्रतिनिधि यह संकल्‍प करे कि गावं के लोगों ने पांच साल के लिए मुझ पर भरोसा किया है। क्‍या पांच साल के अंदर मैं गांव को कुछ ऐसा दे करके जाऊं, ताकि आने वाली पीढि़या भी याद करे कि फलाने-फलाने वर्ष में फलाने पंचायत के प्रधान थे, फलाने पंचायत के मेम्‍बर थे, इन्‍होंने हमारे गांव में यह बढि़या काम कर करके गए। हर किसी के मन में सभी जनप्रतिनिधियों के मन में यह संकल्‍प होना चाहिए कि मैं मेरे कार्यकाल में, जिन लोगों का मैं पतिनिधि हूं, उस क्षेत्र की भलाई में कुछ न कुछ उत्‍तम ऐसे काम करके जाऊंगा, जो आने वाले दिनों में गांव को आगे जाने के लिए एक मजबूत नींव का काम करेंगे, एक सही दिशा का काम करेंगे, एक सही गति पर ले जा करके मैं रखूंगा, यह संकल्‍प हर किसी का होना चाहिए।

यह ‘ग्राम उदय से भारतोदय’ यात्रा के द्वारा दुनिया के लोगों को अजूबा लगता है। आज हमारे देश में इन पंचायतों में करीब-करीब 30 लाख चुने हुए प्रतिनिधि बैठे हैं। और उसमें 40 प्रतिशत महिलाएं बैठी हैं। कुछ राज्‍यों ने झारखंड जैसे राज्‍यों ने 50 प्रतिशत किया है, कुछ राज्‍यों में 33 प्रतिशत है। उसके कारण औसत मैं बताता हूं करीब 40 प्रतिशत संख्‍या महिलाओं की है। यह महिलाओं की संख्‍य...अब काफी समय हुआ है। मैं आज इस पंचायती राज दिवस के अवसर पर इन लाखों मेरी महिला प्रतिनिधियों से आग्रह करना चाहता हूं। हाथ जोड़ करके विनती करना चाहता हूं कि मेरी माताएं-बहनें आपके गांव ने आप पर भरोसा रखा है। और आप एक मां हैं, आप एक महिला है। क्‍या आप अपने पंचायत में कुछ बातों के विषय में नेतृत्‍व करे परिवर्तन ला सकती हो क्‍या? अरग 40 प्रतिशत महिलाएं पंचायत में बैठी हो, कानून ने अपना काम कर दिया। मतदाताओं ने मत दे करके अपना काम कर दिया, लेकिन चुने हुए प्रतिनिधि और विशेष करके महिलाएं यह संकल्‍प कर सकती है कि जिस गांव में 40 प्रतिशत बहनें हम पंचायत में जा करके फैसले करते हैं, निणर्य में भागीदार बनते हैं, क्‍या हम यह तय कर सकते है कि हम जिस गांवमें बैठी हैं, अब हमारे गांव में हमारी एक भी माता या बहन या बेटी को खुले में शौचालय के लि एनहीं जाना पड़ेगा। हम शौचालय बना करके रहेंगे। भारत सरकार राज्‍य सरकार की शौचालय बनाने की योजना को हम खुद समय निकाल करके जाएंगे, लागू करके रहेंगे और अगर मैंने कई गांव देखे हैं एक आध बुढि़या मां भी संकल्‍प कर ले कि मैं अब गांव में किसी को खुले में शौच जाने के लिए मजबूर होने दूं, ऐसी स्थिति नहीं रहने दूंगी, तो ऐसे गांव में हर घर में शौचालय बन गए। आज भी मेरी माताओं-बहनों को खुले में शौच के लिए जाना पड़े इससे बड़ी शर्मिंदगी की कोई बात नहीं है। और इसलिए मैं विशेष लाखों की तादाद में चुनी हुई मेरी माताआं-बहनों से मैं आग्रह करता हूं कि आप इस बात पर ध्‍यान दें। 


मैं दूसरी बात उनसे करना चाहता हूं कि सरकार की तरफ से बजट मिलता है, स्‍कूलों में बच्‍चों के लिए मध्‍याह्न भोजन चलता है। आप जनप्रतिनिधि है आप चौकसी करे कि सरकार के पाई-पाई का उपयोग अच्‍छा मध्‍याह्न भोजन करके उन छोटे-छोटे बालकों के पेट में जाता है कि नहीं जाता है। बालक तो भगवान का रूप होता है हमारे गांव का बालक कुपोषण से पीडि़त हो यह बात अगर जनप्रतिनिधि एक महिला हो तो मुझे कभी गंवारा नहीं होनी चाहिए। मैं इसमें बदलाव लाने के लिए एक जनप्रतिनिधि के नाते मैं अपने कर्तव्‍य का पालन करूंगी, यह संकल्‍प मेरी उन 40 प्रतिशत माताएं बहनें, एक तिहाई गांव में प्रधान महिलाएं हैं। क्‍या हम यह संकल्‍प कर नहीं सकते। ताकि हमारे गांव में हमारे गरीब से गरीब बालक भी कुपोषण के शिकार न हो, उसके लिए हम चिंता कर सके।

मैं मेरी माताओं-बहनों से एक और काम के लिए अपेक्षा करना चाहता हूं हमारे गांव में हर साल गरीबी की रेखा के नीचे जीने वाली पांच महिलाएं या दस महिलाएं हर वर्ष उनकी प्रसूति का समय आता होगा। यह प्रसव काल के द‍रमियां मैं जनप्रतिनिधि के नाते अरे गांव में गरीबी की रेखा के नीचे जीने वाले तीन महीनों की प्रसव है या पांच महीनों की है, क्‍या गांव के अंदर एक जन जागृति ला करके नौ महीने तक उसको अच्‍छा आहार मिले, अच्‍छा पोषक खाना मिले, इसके लिए गांव मिल करके इतनी जिम्‍मेवारी उठा सकता है क्‍या? मैं इसलिए नहीं कहतहूं कि सवाल बजट का है, मुद्दा बजट का नहीं होता है, यह जनांदोलन जब बन जाता है, तब हमारी माताएं जो प्रसव पीड़ा के कारण कभी मां मरती है, कभी जन्‍म लेने वाला बच्‍चा मरता है, कभी मां और बच्‍चा दोनों मर जाते हैं। 21वीं सदी के हिंदुस्‍तान में हमारी गांव की माताएं और जब एक प्रसव में जो मां मरती है गांव में, उसकी उम्र क्‍या होती है, 25 साल, 27 साल की वो बेटी जो मां बनने वाली है कितने सपने संजो करके उसने शादी की होगी। कितने सपने संजो करके उस परिवार में वो बहू बन कर आई होगी। और पहली ही प्रसव में अगर वो मौत के शरण हो जाती है,तो वो परिवार कितना तबाह हो जाता होगा। उन परिवारों कीहालत कया होती होगी। जो नौजवान इस उम्र में अपनी पत्‍नी खो देता है उसकी मन:स्थिति क्‍या होती होगी, इतनी बड़ी दर्दनाक पीड़ा, इस पीड़ा से मेरी 40 प्रतिशत माताएं बहनें.. अगर गांव में जनप्रतिनिध हो और उस गांव में प्रसव के कारण मां मरे, बच्‍ची मरे, बेटा मरे, बेटी मरे इस बात को हमें मिटाना है। हम जागरूकता लाए कि हम अब ऐसे गरीब मां-बहनों की प्रसूति है तो उनको आशा-वर्कर से मिलालें। उनकी देखभाल करे और नजदीक के दवाखाने में ही उसकी प्रसूति हो, उसके लिए हम उसको प्रेरित करे। अगर अस्‍पताल में उसकी प्रसूति होती है तो उसकी जान बचने की संभावना बढ़ जाती हैं। मेरी माताएं-बहनें आप जनप्रतिनिधि हैं। आप पंचायत में जाकर के बैठती है और इसके लिए आप कितनी पढ़ी हैं, कितनी नहीं पढ़ी हैं, इसका महत्‍व नहीं है। जिस लगन के साथ आप अपने परिवार को संभालती है वो ही ताकत उस गांव की गरीब महिलाओं के परिवार को संभालने के लिए ताकतवर होती है, उतना अनुभव काफी होता है और उसको लेकर के आप चल सकती हैं।

मैं जनप्रतिनिधियों से भी आग्रह करना चाहता हूं। आज वो स्‍थिति नहीं है। पहले का जमाना था कि गांव के जो एकाध सुखी परिवार होता था, वो पंचायत का प्रधान हुआ करता था। कोई भी सरकारी अफसर आए, गांव में कोई मेहमान आए तो उसी के घर में मीटिंग होती थी, चाय-पान होता था, कभी भोजन होता था। महीने भर में 15-20 मेहमान स्‍वाभाविक होते थे और उसकी आर्थिक स्‍थिति अगर ठीक रही तो लोगों का स्‍वगत वगैरह करता था और गांव वाले भी सोचते थे कि भई इनके जिम्‍मे डाल दो। लेकिन वो तब वो दिन थे जब गांवों के पास अपना कोई बजट नहीं हुआ करता था। गांव को अपने तरीके से ही गुजारा करना होता था। बहुत कम व्‍यवस्‍थाएं साधन की तरफ से होती थी। आज वक्‍त बदल चुका है। आज तो लाखों रुपए हर साल गांव के पास आते हैं और पंचायत प्रधानों के चुनावों में भी जो इतनी स्‍पर्धा आई है, उसका मूल कारण भी ये विपुल मात्रा में धन जो आ रहा है, वो भी एक कारण है। लेकिन मैं चाहता हूं, इस धन का योजनाबद्ध तरीके से अगर जनप्रतिनिधि अपने पांच साल के लिए तय करके, तय करे तो अपने गांव में उत्‍तम से उत्‍तम परिणाम ला सकते हैं।

पिछले 60 साल में जो चीजें आपके गांव में नहीं हो पाई होगी, वो चीजें आप पांच साल के भीतर-भीतर इतने ही धन से कर सकते हैं और इसके लिए हमारी पंचायत व्‍यवस्‍था को हमें मजबूत बनाना चाहिए। नियमित रूप से पंचायत की बैठक हो और मेरा यह विश्‍वास है कि देश का भाग्‍य बदलने के लिए जितना महत्‍व दिल्‍ली की बड़ी से बड़ी संसद का है, उतना ही महत्‍व ये मेरे गांव की संसद का है और इसलिए ग्राम सभा को भी बल देने की आवश्‍यकता है। आज जब ग्राम सभा होती है, तो औसत कितनी संख्‍या आती हैं? एक कहने को, कागज पर लिखने वाली ग्राम सभा होती है। अरे! ग्राम सभा की date पहले से तय हो, उस दिन ग्रामोत्‍सव का माहौल हो, सुबह प्रभात फेरी निकले, बच्‍चे भी ग्राम में जागरूकता लाए, छोटा-मोटा उत्‍सव का माहौल हो और फिर सायं में ग्राम सभा हो तो आज ग्राम सभा में 5%-10%-15% लोग आते हैं, महिलाएं तो बहुत कम आती हैं। कभी-कभी तो जनप्रतिनिधि भी नहीं पहुंचते हैं। क्‍या हम संकल्‍प कर सकते हैं कि हम ऐसी ग्राम सभा करेंगे जिसमें कभी भी गांव की आबादी के 30% लोग absent नहीं रहेंगे, ये हम संकल्‍प करके हम लोगों को लाने का प्रयास कर सकते हैं। और देखिए ग्राम सभा में तय करिए, ये करना है ऐसे करना है, पूरा गांव आपकी मदद करेगा

अगर सफाई का अभियान चलाना है तो गांव उत्‍तम से उत्‍तम सफाई का उदाहरण दे सकता है। आज भी कई गांव है जिन्‍होंने अपने बलबूते पर सफाई का अभियान चलाया है और गांव में जो कूड़ा-कचरा इकट्ठा होता है, वो गांव के बाहर vermin-compost के bed बनाते हैं, गड्ढे बनाते हैं, केंचुएं लाकर डालते हैं और अच्‍छा-सा खाद्य भी मिल जाता है और वे फर्टिलाइजर बेचते हैं, गांव के ही किसान ले जाते हैं। गांव में सफाई भी रहती है और खेत को अच्‍छा खाद भी मिलता है। ये इसलिए नहीं होता है कि पैसे है, इसलिए होता है कि ग्राम पंचायत का प्रधान, गांव के चुने हुए प्रतिनिधि, गांव का शिक्षक, गांव के दो-चार आज्ञावान लोग, ये जब मिलकर के तय करते है, बदलाव आना शुरू हो जाता है। गांव सफाई के विषय में, थोड़े से कदम उठावे, वो आर्थिक रूप से लाभप्रद होता है। ऐसा उत्‍तम खाद्य गांव की सफाई से निकलता है कि हमारे खेतों की हालत को सुधार सकता है।

मैं गांव पंचायत के मेरे प्रधानों से आग्रह करना चाहता हूं। यहाँ हम इतनी बड़ी मात्रा में प्रतिनिधि बैठे हैं। हम चाहते होंगे कि गांव में road बने, गांव में पंचायत का घर बने, ये सब तो चाहते होंगे, लेकिन क्‍या गांव में शिक्षक हो, गांव में स्‍कूल हो। सरकारी बजट खर्च होता है लेकिन उसके बावजूद भी अगर मेरे गांव के बच्‍चे महीने-दो महीने स्‍कूल जाकर के फिर जाना बंद कर दे, तो इसकी चिन्‍ता पंचायत के लोगों को होती है कि नहीं होती है? अगर हमें चिन्‍ता नहीं होती है, तो हम गांव के मुखिया नहीं है। अगर आज एक बच्‍चा उसकी कुल स्‍कूल छूट जाती है, इसका मतलब यह हुआ कि भविष्‍य में अपने गांव में हम एक ऐसा नौजवान तैयार कर रहे है जिसके भविष्‍य में अंधकार लिखा हुआ है। अगर वह बच्‍चा स्‍कूल गया। हर हफ्ते हमने थोड़ी जानकारी ली, पूछताछ की। कोई बच्‍चा अगर स्‍कूल नहीं जाता है तो गांव का प्रधान अगर उसके मॉ-बाप से बात कर लेता है कि देखो भई, मास्‍टर जी आए थे। कह रहे थे कि फलाने का बेटा स्‍कूल नहीं आ रहा है, क्‍या हुआ, बीमार तो नहीं है? इतना-सा अब अगर गांव का प्रधान पूछ ले, पंचायत का सदस्‍य पूछ ले, तो गांव में बच्‍चों को स्‍कूल ले जाने के लिए मॉ-बाप भी जागरूक हो जाएंगे। वो शिक्षक भी अगर उदासीन होगा, उसकी अगर रुचि नहीं होगी लेकिन अगर गांव के पंचायत के लोग जागरूक है, गांव जागरूक है तो वो शिक्षक भी अपनी पूरी ताकत से पढ़ाई के अंदर ध्‍यान देगा और आपके गांव के बच्‍चों की जिन्‍दगी बदल देगा। और इसलिए हम पंचायत के प्रधान के नाते, हम सिर्फ road बना कि नहीं बना, बजट आया कि नहीं आया, इससे सीमित रहते हुए, जनसुविधा की ओर भी ध्‍यान दे।

हमारे यहां पल्‍स पोलियो का खुराक पिलाया जाता है। कितने जनप्रतिनिधि है कि जो हफ्ते पहले से पल्‍स पोलियो के काम को अपने कंधों पर उठा लेते हैं और तय करते हैं कि हमारे गांव का कोई बच्‍चा टीकाकरण से बाकी नहीं रह जाएगा। पोलियो की खुराक से बाकी नहीं रह जाएगा। हम पांच साल, हमारे कार्यकाल के दौरान शत-प्रतिशत टीकाकरण करवा लेते हैं, पोलियो का खुराक पहुंचा देते हैं, तो हमारा सौभाग्‍य होगा कि हमारे गांव में कोई भी ऐसा बच्‍चा नहीं होगा, कोई भी ऐसी बच्‍ची नहीं होगी जिसको कभी लकवा मार जाए, वो जीवन भर दिव्‍यांग के रूप में रहने के लिए मजबूर हो जाए और पूरा गांव जीवन भर उसकी तरफ दया भाव से देखता रहे। हम चाहते हैं कि हमारा गांव स्‍वस्‍थ रहे, तो हमारे बालक स्‍वस्‍थ होने चाहिए, हमारे बालक स्‍वस्‍थ रखने है तो हमें जो सरकार की योजनाएं हैं, एक पंचायत के चुने हुए प्रतिनिधि के नाते उसे परिपूर्ण करने के लिए हमें जागरूकता दिखानी होगी। हमें स्‍वयं नेतृत्‍व करना होगा।

इंद्रधनुष योजना। पुराने जितने ऐसे बालक छूट गए है, उन बालकों को अब इस health के cover में लाने का बड़ा अभियान है। करोड़ों-करोड़ों बालक अभी भी ऐसे है जो किसी न किसी की कारण से इसका फायदा नहीं ले पाए हैं, या हम फायदा नहीं पहुंचा पाए हैं। मैं पंचायत में चुनकर के बैठा हूं। मेरे गांव में मेरा संकल्‍प होना चाहिए कि अब किसी भी बालक को अपंग होने की, दिव्‍यांग होने की, उसके शरीर का कोई भाग लकवा मार जाए, ऐसी परिस्‍थिति मैं होने नहीं दूं, यह मेरा संकल्‍प होना चाहिए। अगर एक के बाद एक, पंचायत में चुने हुए मेरे प्रतिनिधि मेरे गांव के जीवन को बदलना तय करे।

हम जानते हैं वर्षा पर हमारी खेती निर्भर है। अगर गांव में किसान परेशान है, तो गांव के बाकी कारोबार भी बंद हो जाते हैं। लुहार की कमाई भी बंद हो जाती है, सुधार की भी कम हो जाती है, मोची की भी कम हो जाती है, हर किसी की तकलीफ हो जाती है, पूरा अर्थ कारण गांव का नष्‍ट हो जाता है। लेकिन कृषि भी, क्‍या हम ‘per drop, more crop’. क्‍या ऐसे गांव नहीं हो सकते कि जो संकल्‍प करे कि हमारे गांव के जितने किसान है, उनकी जितनी भी जमीन है, हजार बीघा होगी, दो हजार बीघा होगी, जितनी जमीन होगी। हम पूरा गांव तय करते हैं कि हमारे गांव का एक भी किसान अब ऐसा नहीं होगा कि जो drip irrigation और sprinkler का उपयोग न करता हो। हम पानी बचाएंगे, हम आधुनिक खेती करेंगे, हम Soil health card लेंगे, हम पशुपालन करवाएंगे, हम शहद के लिए मधुमक्‍खी का उपयोग करवाएंगे, जहां मत्‍स्‍य उद्योग होता होगा वहां मछली पालन का करवाएंगे। हम कोशिश करेंगे कि हमारा किसान ये जो योजनाएं हैं, उन योजनाओं का लाभ लेने के लिए आगे कैसे आए।

आपने देखा होगा कि जिस गांव का प्रधान सक्रिय होता है, जिस गांव के चुने हुए प्रतिनिधि सक्रिय होते हैं तो सरकार को भी, सरकारी अधिकारियों को भी, उस गांव में काम करने का जरा मजा आता है, क्‍योंकि उनको भी अपने target पूरे करने होते हैं, अपने लक्ष्‍यार्थ पूरे करने होते हैं। सरकारें उनसे हिसाब मांगती है इसलिए वो भी क्‍या करते हैं कि जो गांव जागरूक है, अच्‍छा कर सकता है, उन्‍हीं गांव के पास जाते हैं और कहते हैं कि देखो ये योजना आई है आप लागू कर दो। उसके कारण होता क्‍या है कि एक इलाके में जो 12-15 बहुत सक्रिय पंचायत हैं, उनको सारे फायदे पहुंच जाते हैं और जो निष्‍क्रिय पंचायते, हैं वहां अफसरों का जाने का मन ही नहीं करता है, सरकार का जाने का मन नहीं करता है और पैसे एक तरफ चले जाते हैं। मेरे भाइयो-बहनों स्‍थिति अच्‍छी नहीं है। आप स्‍वयं जागरूक बनिए, आप सक्रिय बनिए, आप नेतृत्‍व कीजिए। अगर आप सक्रिय बनते हैं, आप नेतृत्‍व करते हैं तो मैं नहीं मानता हूं कि अफसरों को कहीं और जाने का मन करेगा। उनको तो विश्‍वास होगा कि यहां के 20 गांव मेरे जिम्‍मे है, बीसों गांव इतने अच्‍छे हैं कि सारी योजनाएं लागू हो जाएंगी। वो सारी योजनाएं उन बीसों गांव में जाएंगी। आज पैसे की कमी नहीं है, मेरे भाइयो-बहनों। योजनाओं की कमी नहीं है, दृष्‍टि की कमी नहीं है, आवश्‍यकता है कि धरती पर बैठे हुए, मेरे गावं का कल्‍याण करने वाले पंचायत राज व्‍यवस्‍था से जुड़े हुए मेरे पंचायत के भाई-बहन इसके लिए समर्पित भाव से काम करें।

क्‍या हम संकल्‍प कर सकते हैं कि सरकार की योजनाओं के द्वारा गांव की अपनी सफलताओं का एक हिसाब होता है लेकिन पांच साल के लिए गांव पांच कार्यक्रम ले सकता है। एक साल के लिए एक कार्यक्रम। जैसे अगर कोई गांव तय करे कि हम ऐसा गांव बनाएंगे, जो हरित गांव होगा। इस वर्ष में हम गांव में इतने पेड़ लगाएंगे और उस पेड़ को लगाकर के पूरे गांव को हरा-भरा कर देंगे, ये संकल्‍प कर सकते हैं? दूसरे साल कोई संकल्‍प करे कि हम ऐसा गांव बनाएंगे जहां से एक बूंद भी वर्षा का पानी हम बाहर नहीं जाने देंगे। हम बूंद-बूंद पानी को रोकने का प्रबंध करेंगे, हम जल संचय के लिए पूरी तरह काम करेंगे। हम यह तय कर सकते हैं कि हमारे गांव का एक भी किसान ऐसा नहीं रहेगा जिसका Soil health card नहीं होगा। हमारे गांव में ऐसा एक भी किसान नहीं होगा, जिसके खेत में sprinkler या drip irrigation न हो। ऐसा मैं गांव, किसान मित्र गांव बना सकता हूं क्‍या? क्‍या मैं यह सोच सकता हूं कि मेरा गांव जहां पर एक भी बालक dropout नहीं करेगा? मैं ऐसा गांव बना सकता हूं जहां पर मेरा एक भी बालक किसी भी टीकाकरण की व्‍यवस्‍था से बाकी नहीं रह जाएगा, बाहर नहीं रह जाएगा, ये मैं संकल्‍प कर सकता हूं क्‍या? अगर मैं यह योजना बनाऊं कि मेरे गांव में Digital India का जो movement चलने वाला है, मेरे गांव तक fiber का नेटवर्क आने वाला है, मैं मेरे गांव में अभी से यह technology का उपयोग करने वाले नौजवानों की टोली तैयार करके मेरे नगर गांव को भी ई-ग्राम बनाने की दिशा में मैं काम कर सकता हूं क्‍या? मैं संकल्‍प कर सकता हूं क्‍या कि मेरे गांव में एक भी बालक जन्‍म के कारण और जन्‍म के तुरंत बाद मृत्‍यु नहीं होगी, उसकी भी मैं चिन्‍ता करूंगा? मैं यह तय कर सकता हूं कि मेरा गांव यह बाल-मित्र गांव होगा, मेरा गांव यह बालिका-मित्र गांव होगा, मेरा गांव दहेज मुक्‍त गांव होगा। ऐसे-ऐसे सामाजिक संकल्‍प अगर हम गांव के अंदर लेने का एक माहौल बनाए, हर वर्ष गांव का जन्‍मदिन मनाए, हम तय करे कि हमारे गांव का फलाना जन्‍मदिन है और उस समय गांव के जितने लोग शहरों में गए हैं वो खास उस गांव में आने चाहिए, पूरे दिन उत्‍सव चलना चाहिए। गांव एक साल का संकल्‍प करे कि एक साल के अंदर हमें गांव को कहां ले जाना है। पंचायत राज व्‍यवस्‍था एक structure है। पंचायत राज व्‍यवस्‍था एक संवैधानिक व्‍यवस्‍था है। लेकिन जब तक जनप्रतिनिधि और जनसामान्‍य जुड़कर के जन आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए संकल्‍प लेकर के जी-जान से जुटते नहीं है, परिणाम नहीं मिलता है।

भाइयो-बहनों, गांव के अर्थ-कारण को ताकतवर बनाना है। गांव का अर्थ-कारण ताकतवर बनेगा तभी देश का अर्थ कारण ताकतवर बनेगा। जब तक गांव के गरीब की खरीद शक्‍ति नहीं बढ़ती, देश की economy में बल नहीं आता है और इसलिए हमारी कोशिश है कि गांव के सामान्‍य मानविकी की आय कैसे बढ़े? गांव के सामान्‍य मानविकी की खरीद शक्‍ति कैसे बढ़े? हमारी पाई-पाई का उपयोग.. मनरेगा की योजनाएं चलती हैं, लाखों रुपया-करोड़ों रुपया आते हैं, अरबों-खरबों रुपया जाते हैं लेकिन अगर हम तय करे कि हम गांव में मनरेगा के पैसे तो आएंगे, लोगों को काम भी मिलेगा लेकिन उसमें से हम assets निर्माण करेंगे। जल संचय की व्‍यवस्‍थाएं करेंगे, तालाब है तो उसको गहरा करेंगे, पानी ज्‍यादा आए उसकी व्‍यवस्‍था करेंगे, पेड़-पौधे लगाने हैं तो पैसे उसमें लगाएंगे। आप देखिए, पैसों का सही उपयोग भी हमारे गांव के जीवन को बदल सकता है।

और इसलिए मेरे पंचायत के प्‍यारे भाइयो-बहनों, आज जिनको इनाम मिला है। जिन्‍होंने कुछ अच्‍छा करने का प्रयास किया है, उन सबको, सम्‍मान प्राप्‍त करने वाले राज्‍यों को, उन गांवों को और उन अधिकारियों या प्रतिनिधियों का हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं कि उन्‍होंने आज देश के सामने एक उत्‍तम कार्य की मिसाल रखकर के भारत सरकार से सम्‍मान प्राप्‍त किया है। लेकिन मैं आशा करूंगा कि जो उत्‍तम कार्य करके सम्‍मान प्राप्‍त करने वाले लोग है वो वहीं पर न अटके, और नई चीजें सोचें, और नई चीजें करें और देश-दुनिया के सामने एक उत्‍तम उदाहरण प्रस्‍तुत करे।

उसी प्रकार से, गांव के बाकी कामों के साथ हमें गांव की आर्थिक बाबतों को भी देखना होगा। कुछ चौकसी की जरूरत है। मैं जब सरकार में आया तो मैंने पूछा, 18 हजार गांव ऐसे निकले कि जहां बिजली का खंभा भी नहीं पहुंचा, बिजली का तार भी नहीं पहुंचा। अगले साल आजादी के 70 साल हो जाएंगे, 18 हजार गांव में अगर बिजली का तार नहीं पहुंचा है, तो वे 18वीं शताब्‍दी में अंधेरे में जी रहे हैं। हमने बीड़ा उठाया है कि उन 18 हजार गांवों में बिजली पहुंचानी है। एक हजार दिन में मैंने काम करने का तय किया है। मैं बराबर पीछे लगा हूं, भारत सरकार पीछे लगी हैं, राज्‍य सरकारों को भी दौड़ा रहे हैं। काम हो रहा है लेकिन कभी-कभार खबर आ जाती है, जाहिर हो जाता है कि फलाने गांव में बिजली पहुंच गई और कोई अखबार वाला पहुंच जाता है तो पता चलता है कि वहां तो अभी खंभा पहुंचा है। मैं गांव वालों से कहता हूं कि आप जागरूक रहिए। आप देखिए कि अब कोई गलत जानकारी तो नहीं देता है न। अगर आप जागरूक रहे तो मुझे इतनी चिन्‍ता नहीं करनी पड़ेगी। क्‍या मेरी चिन्‍ता का थोड़ा हिस्‍सा मेरे गांव के मेरे साथी नहीं उठा सकते क्‍या? मेरे गांव के प्रतिनिधि इस बात को नहीं उठा सकते? मैं देश के प्रतिनिधियों से कहता हूं कि आइए, कंधे से कंधा मिलाकर के जो एक-एक सपने देखे हैं, उन सपनों को हम पूरा करे।

भाइयो-बहनों, गांव में आज भी हमारी गरीब मॉं लकड़ी का चूल्‍हा जला करके खाना पकाती है। और आप को जान कर के हैरानी होगी, वैज्ञानिको का कहना है की जब एक माँ लकड़ी का चूल्हा जला कर के खाना पकती है, तो उसके शरीर में 400 सिगरेट जितनी धुंआ जाता है। अगर मेरी मां के शरीर में 400 सिगरेट का धुंआ चला जाए, तो उस मां की तबीयत का हाल क्‍या होगा, उन बच्‍चों की तबीयत का क्‍या हाल होगा। क्‍या हम आजादी के इतने सालों के बाद 21वीं सदी में खाना बनाने के कारण हमारी गरीब माताओं को मरने देंगे। भाईयों-बहनों अब यह नहीं चल सकता है। हम उन्‍हें लकड़ी के चूल्‍हे से धुएं से, 400 सिगरेट के जुल्म से मुक्ति दिलानी पड़ेगी और इसलिए हमने बीड़ा उठाया है, आने वाले तीन साल में पांच करोड़ परिवारों में गैस का सिलेंडर देना है। आपके गांव में भी होंगे। आप स्‍वयं गांव में देखें कि सरकार ने जो काम उठाया है, उसका फायदा पहुंच रहा है कि नहीं पहुंच रहा है। सही व्‍यक्ति को पहुंच रहा है कि नहीं पहुंच रहा है। इन गरीबों की मदद करना, आप देखिए कि उनकी जिंदगी में बदलाव आना शुरू हो जाएगा। गांव के बगल के जंगल बच जाएंगे। लकड़ी कटती है, जंगल कटते हैं वो बच जाएंगे। हम पर्यावरण की भी रक्षा करेंगे, माताओं के स्‍वास्‍थ्‍य की भी चिंता करेंगे, बच्‍चों के भविष्‍य की भी चिंता करेंगे। और इसलिए मैं आपसे आग्रह करता हूं कि हम एक भागीदारी के साथ, सहभागिता के साथ कंधे से कंधा मिला करके देश का बड़े से बड़ा मुखिया क्‍यों न हो गांव के बड़े से बड़े मुखिया से कोई बड़ा नहीं होता है। मेरे लिए गांव का मुखिया बहुत बड़ा होता है, क्‍योंकि वो चाहे तो अपने नेतृत्‍व, अपने दिशा-दर्शन से गांव के जीवन को बदल सकता है और एक बार हिंदुस्‍तान के गांव बदलने लग गए, तो इस देश को बदलते हुए देर नहीं लगेगी।

भाईयों-बहनों जो सुविधाएं शहर में हैं वो सुविधाएं गावं को भी मिलनी चाहिए। हमने अभी e-NAM नाम की योजना शुरू की है। यह e-NAM योजना किसानों को बहुत बड़ा भला करेगी। अभी वो प्रारंभिक अवस्‍था में है। अभी थोड़ी कमियां भी होगी, सुधार करते-करते अच्‍छाइयों की ओर जाएंगे भी, लेकिन ईनाम योजना National Agriculture Market अब किसान अपने मोबाइल फोन से तय कर सकता है कि उसने अपनी फसल कहां बेचनी है, अपनी पैदावर कहां बेचनी है, जहां ज्‍यादा पैसा मिलेगा वहां बेचेगा। इसके लिए हमारे में जागरूकता चाहिए। इन चीजों का फायदा उठाने के लिए हमारे पास व्‍यवस्‍था होनी चाहिए, अगर हम उन बातों को करेंगे तो आप देखिए परिणाम आना शुरू हो जाएगा।

और इसलिए मेरे प्‍यारे भाईयों-बहनों, खास करके मेरे गांव के प्‍यारे भाईयों-बहनों हमारी कोशिश है, आज शहरों में डिजिटल नेटवर्क है, जितना महत्‍व highways का है उतना ही महत्‍व I-ways का है। information ways गांव के लोगों को भी वो सारी information चाहिए। और इसलिए optical fibre network गांव-गांव पहुंचाना है। जो गांव जागृत होंगे, खेतों में से वो पाइप डालने के लिए सुविधा दे देंगे। इतनी तेजी से काम होगा कि आपके गांव को भी आधुनिक विश्‍व के साथ जोड़ने में सुविधा बनेगी। गांव स्‍वयं जागरूकता दिखाए, योजनाओं की कमी नहीं है, पैसो की कमी नहीं है। समय-सीमा में काम करने के इरादे में कमी नहीं है, आवश्‍यकता है चारों तरफ सहयोग की, आवश्‍यकता है सक्रियता की, आवश्‍यकता है सही दिशा में मिल करके चलने की। एक बार गांव चल पड़ा तो देश चल पड़ेगा।

इस विश्‍वास के साथ आज पंचायत राज दिवस पर 10 दिन का महाअभियान, पहली बार देश के ढ़ाई लाख गांव में इतना बड़ा अभियान चला है। पूरी सरकार की ताकत लग गई इसके साथ। एक प्रकार से कार्यक्रम का समापन, लेकिन इरादों का आरंभ हो रहा है। संकल्‍प का आंरभ हो रहा है। हमने 10 दिन ग्रामोदय का खाका समझ लिया है। अब शुरू होता है कि आने वाले हमारे कार्यकाल के दरमियां जितने भी वर्ष मुझे मिले हैं अगले वर्ष तक पंचायत के प्रधान के रूप में पंचायत के मेम्‍बर के रूप में एक-एक मिनट का उपयोग, एक-एक पाई का उपयोग, एक-एक पल का उपयोग मैं, मेरे गांव को ग्रामोदय के लिए उत्‍तम से उत्‍तम ग्रामोदय की कल्‍पना करके करूंगा। तभी भारतोदय का मेरा सपना पूरा होगा। इस काम के लिए मैं एक बार आप सबको निमंत्रण देता हूं, आपका सहयोग चाहता हूं।

मैं झारखंड सरकार का भी अभिनंदन चाहता हूं। रघुबर दास जी का अभिनंदन करता हूं कि आप उन्‍होंने बड़े-बड़े शहरों में बड़े-बड़े उद्योगों के लिए single window system की तो चर्चा सुनी है, उद्योगकारों single window system के लिए हर सरकार बात करती है। लेकिन रघुबर दास जो है, किसानों के लिए जीने-मरने वाली सरकार वो कहती है हम किसानों के लिए single window प्रारंभ करेंगे। आज किसानों के लिए single window की जो योजना प्रारंभ किया है, उनकी कल्‍पकता के लिए, उनके इस योजनाबद्ध उपक्रम के लिए मैं रघुबर दास जी को और झारखंड की सरकार को हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं। बहुत-बहुत उनकी बधाई करता हूं।

इतना बड़ा कार्यक्रम में देख रहा हूं आज 40-45 डिग्री temperature है, लेकिन जब मैं आया पूरा stadium चकाचक भरा हुआ था। इतना बड़ा उत्‍साह, उमंग, इतना बड़ा सफल कार्यक्रम करने के लिए मैं श्रीमान रघुबर दास जी और सरकार को और झारखंड की जनता को हृदयपूर्वक बहुत-बहत अभिनंदन देता हूं और देशभर में internet के माध्‍यम से टीवी के माध्‍यम से ग्राम सभा में जो लोग बैठे हैं उनकी किसानों व भाईयों को उन ग्राम सभा के भाईयों, उन ग्राम पंयायत के प्रतिनिधियों को फिर से एक बार आभार व्‍यक्‍त करता हूं अभिनंदन करता हूं और मैं फिर से एक बार आग्रह करता हूं कि ग्रामोदय का बीड़ा उठा लीजिए, ग्रामोदय का संकल्‍प ले करके चल पड़िए। आज से हम शुरू करे, अब रूकना नहीं है, थकना नहीं है। अविराम चलते रहना, गावं के सपनों को पूरा करके रहना है। महात्‍मा गांधी की 2019 में डेढ़ सौ साल होंगे, उस समय गांधी के सपनों का गांव बना करके रहेंगे यह निराधार करके चले, इसी एक अपेक्षा के साथ आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं, धन्‍यवाद।

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June 19, 2026
PM to participate in Paschimbanga Divas celebrations in Hooghly on 20 June
PM to launch, dedicate and lay Foundation Stones of various Development Projects across Railways, Agriculture, Rural Development, Fisheries and Animal Husbandry Sectors
PM to kickstart rollout of several key Central Agricultural Schemes in West Bengal
These schemes include Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana, Agri Stack, National Mission on Natural Farming and Pradhan Mantri Dhan-Dhaanya Krishi Yojana
PM to release 23rd PM-Kisan Instalment worth ₹18,880 Crore, benefiting over 9.44 Crore Farmers across the Country
PM to commission three indigenously designed and built naval ships – INS Dunagiri, INS Sanshodhak and INS Agray at Syama Prasad Mookerjee Port, Kolkata
Ships have been built with extensive participation by Indian industry, including more than 200 MSMEs
PM to lead 12th International Day of Yoga Celebrations in Kolkata on 21 June
Theme of IDY 2026: “Yoga for Healthy Ageing”

Prime Minister Shri Narendra Modi will visit West Bengal on 20-21 June 2026. On 20 June, at around 3:45 PM, the Prime Minister will participate in Paschimbanga Divas (West Bengal Day) celebrations at Tarakeswar in Hooghly district. He will launch, dedicate to the nation and lay the foundation stone of multiple development projects in West Bengal. He will also address the gathering on the occasion.

On 21 June, at around 6:30 AM, the Prime Minister will participate in the 12th International Yoga Day celebration in Kolkata. He will also address the gathering on the occasion.

Later, at around 9:15 AM, Prime Minister will commission three indigenously designed and built naval ships - INS Dunagiri, INS Sanshodhak and INS Agray at Syama Prasad Mookerjee Port, Kolkata. He will also address the gathering on the occasion.

PM in Hooghly

Prime Minister will participate in Paschimbanga Divas (West Bengal Day) celebrations. The State-level celebrations are being held at Tarakeswar, Hooghly, a place of historic significance associated with Dr. Syama Prasad Mookerjee.

The theme for this year’s Paschimbanga Divas: “West Bengal: Heritage, Harmony and Development,” reflects the State’s cultural richness, social cohesion and developmental aspirations.

During the programme, Prime Minister will launch, dedicate to the nation and lay the foundation stone of multiple development projects. Spanning the sectors of railways, agriculture, rural development, fisheries and animal husbandry, these initiatives will strengthen infrastructure, improve livelihoods, enhance farmer welfare and accelerate socio-economic development across the State.

Prime Minister will release the 23rd instalment of the Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi (PM-KISAN). Under this instalment, more than ₹18,880 crore will be transferred directly into the bank accounts of over 9.44 crore farmers across the country.

In West Bengal alone, more than ₹900 crore will be credited to over 45 lakh beneficiaries, taking the cumulative disbursement under the scheme in the State to over ₹15,000 crore. The total disbursement nationwide to over ₹4.46 lakh crore since the launch of the scheme in 2019.

Prime Minister to kickstart rollout of several key Central Agricultural Schemes in West Bengal. These schemes include Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana, Agri Stack as part of the Digital Agriculture Mission, National Mission on Natural Farming and Pradhan Mantri Dhan-Dhaanya Krishi Yojana

Prime Minister will launch the Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana (PMFBY)in West Bengal, extending the benefits of the world’s largest crop insurance scheme to farmers in the State. During 2026–27, the initiative aims to provide insurance coverage to nearly 50 LAKH farmers across about 14 lakh hectares of agricultural land in the state of West Bengal, protecting crops with an estimated insured value of around ₹28,140 crore while supporting farmers through substantial premium subsidy.

As part of the Digital Agriculture Mission, Prime Minister will launch AgriStack in West Bengal, enabling a unified digital platform for verified agriculture-related services such as fertiliser distribution, Kisan Credit Cards, Direct Benefit Transfers and procurement under the Minimum Support Price system. The initiative will strengthen digital governance in agriculture and facilitate efficient delivery of farmer-centric services.

Prime Minister will further launch the National Mission on Natural Farming in West Bengal to promote sustainable, chemical-free agriculture rooted in traditional Indian practices. Under the approved Annual Action Plan for 2026–27, the State will establish 346 natural farming clusters covering 17,300 hectares, while also creating Bio-Input Resource Centres and mobilising Krishi Sakhis to strengthen adoption of eco-friendly farming practices.

In a major step towards integrated agricultural development, Prime Minister will also initiate the implementation of the Pradhan Mantri Dhan-Dhaanya Krishi Yojana (PMDDKY) in West Bengal. The scheme will cover the districts of Purulia, Darjeeling, Alipurduar and Jhargram with a focus on improving agricultural productivity, promoting crop diversification and sustainable farming, strengthening post-harvest infrastructure and irrigation facilities, enhancing access to institutional credit, and ensuring convergence of multiple Central and State schemes for holistic rural development.

Prime Minister will inaugurate the Modernized and capacity expanded Fishing Harbour at Fraserganj in South 24 Parganas and the newly constructed Modern Fish Market at Sainthia, Birbhum. These projects will strengthen fisheries infrastructure, improve post-harvest management and provide better marketing facilities for fish producers and traders.

Prime Minister will also inaugurate the Regional Semen Production Laboratory and Semen Bank for Goats at Haringhata in Nadia district. Established under the National Livestock Mission of the Department of Animal Husbandry and Dairying, it is the first such facility in Eastern India and will contribute significantly to scientific livestock breeding, genetic improvement and enhanced productivity.

Prime Minister will dedicate to the nation and lay the foundation stone of important railway projects worth around ₹590 crore. Prime Minister will dedicate to the nation the Sankrail–Santragachi Link Line Project in Howrah district. The project will play an important role in decongesting one of the busiest rail corridors in Eastern India, improving operational efficiency and enabling smoother movement of both passenger and freight trains.

Prime Minister will lay the foundation stone of a 300-bed New Divisional Railway Hospital at Howrah. Equipped with modern healthcare infrastructure, advanced diagnostic facilities, specialist medical services and emergency care facilities, the hospital will significantly strengthen healthcare services for railway beneficiaries and the people of the region.

Prime Minister will also lay the foundation stone of a Road Over Bridge between Haur and Radhamohanpur in Purba Medinipur district. The project will enhance safety for both rail and road users and facilitate smooth and uninterrupted movement of traffic.

Prime Minister will inaugurate 49 road infrastructure projects developed under the Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana (PMGSY-III). Covering a total length of more than 315 kilometres across various districts of West Bengal, these projects will improve rural connectivity, facilitate access to markets, educational institutions and healthcare facilities, and contribute to balanced regional development.

These projects collectively represent a major step towards strengthening infrastructure, empowering farmers, enhancing livelihoods and creating new economic opportunities across West Bengal. The initiatives will contribute significantly to the vision of a Viksit West Bengal and Viksit Bharat by promoting inclusive growth, modern infrastructure and sustainable development.

PM in Kolkata

Prime Minister Shri Narendra Modi will lead the national observance of the 12th International Day of Yoga from Red Road in Kolkata. Prime Minister will address the gathering and participate in the Common Yoga Protocol session along with thousands of Yoga practitioners.

The theme of International Day of Yoga 2026, “Yoga for Healthy Ageing”, highlights the role of Yoga in promoting physical health, mental well-being, emotional resilience and active ageing, thereby contributing to an improved quality of life. The theme is particularly relevant in an era of increasing life expectancy and growing emphasis on healthy, active and dignified ageing. Since its inception in 2015, when the United Nations General Assembly (UNGA) adopted India’s proposal to observe 21st June as IDY, Prime Minister has led the celebrations from various locations including New Delhi, Chandigarh, Lucknow, Mysuru, New York (UN Headquarters), and Srinagar and Vishakhapatnam.

Yoga Day celebrations are being organised across nearly 2,500 locations worldwide, with participation from more than 210 Indian Missions and Posts, reaffirming Yoga’s status as a global movement for health, harmony and collective well-being.

Prime Minister will also commission three indigenously designed and built naval ships - INS Dunagiri, an advanced stealth frigate, INS Sanshodhak, a survey vessel (large) and INS Agray, an anti-submarine warfare shallow water craft.

These inductions will significantly bolster the nation’s operational capabilities, enhance maritime domain awareness, and strengthen the security of our coastal waters against geopolitical threats.

All three ships were designed by the Indian Navy’s Warship Design Bureau and constructed in Kolkata by Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE), with extensive participation by Indian industry, including more than 200 MSMEs. With an indigenous content of over 75 percent, these ships are also a testament to India’s commitment to Aatmanirbharta.