‘मेड इन अमेठी’ AK-203 राइफलों से आतंकियों और नक्सलियों के साथ होने वाली मुठभेड़ों में हमारे सैनिकों को निश्चित रूप से बहुत बढ़त मिलने वाली है: प्रधानमंत्री मोदी
ये फैक्ट्री अमेठी के नौजवानों के लिए रोजगार के नए अवसर भी ला रही है और देश के विकास और सुरक्षा लिए भी एक नया रास्ता खोल रही है: पीएम मोदी
वोट लेकर जनता को भूल जाना कुछ लोगों की प्रवृत्ति रही है, वो गरीब को गरीब बनाए रखना चाहते हैं ताकि पीढ़ी दर पीढ़ी गरीबी हटाओ के नारे लगा सकें, हम गरीब को इतनी ताकत दे रहे हैं कि वो अपनी गरीबी से तेजी से बाहर निकले: प्रधानमंत्री

करके जयकारा बोलना है। और तीन अलग-अलग जयकारे मैं बुलवाऊंगा।
भारत माता की जय का जयकारा बोलना है। पराक्रमी भारत के लिए-
भारत माता की – जय
जरा पूरी ताकत से बोलिए- पराक्रमी भारत के लिए-
भारत माता की – जय
विजयी भारत के लिए –
भारत माता की – जय
वीर जवानों के लिए-
भारत माता की – जय
बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

उत्‍तर प्रदेश के लोकप्रिय एवं यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री श्रीमान योगी आदित्‍यनाथ जी, केन्‍द्र में मंत्रिपरिषद के मेरी साथी, देश की रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण जी, मंत्रिपरिषद की साथी बहन स्‍मृति ईरानी जी, राज्‍य सरकार के मंत्री मोहसिन रजा जी, सुरेश पासी जी, विधायक मयंकेश्‍वर शरण सिंह जी, गरिमा‍ सिंह जी, दल बहादुर कोरी जी, उत्‍तर प्रदेश के मेरे प्‍यारे भाइयो और बहनों, जय राम जी की। और आप लोगन का हाल-चाल कैसा है। सब ठीक बा।

आप सभी इतनी भारी संख्‍या में इकट्ठा हुए हैं, आप सभी को मेरा प्रणाम। ये भूमि टीकरमाभी के महाराज की तपोभूमि रही है। ये भूमि जैमिना महापुराण के रचियता बाबा पुरुषोत्‍तम दास की भूमि है, मलिक मोहम्‍मद जयसी, आर्यसमाज के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष और जनसंघ के विधायक रहे, राजा रमण जयसी की है। मैं इस भूमि को नमन करता हूं।

पिछले साढ़े चार साल में उत्‍तर प्रदेश और अमेठी के विकास के लिए हमारी सरकार ने जो विकास कार्य किए, आज उनको और विस्‍तार देने के लिए मैं आपके बीच आया हूं, और मैंने देखा कि आज भी हमारा स्‍वागत करने के लिए मेघराजा ने भी कृपा की है। और मुझे बराबर याद है कि 98 में अटलजी के साथ यहां मैं जनसभा करने आया था और उस दिन भी बड़ी भारी बारिश हुई थी; सारी व्‍यवस्‍थाएं तहस-नहस हो गई थीं और तब से ले करके मैं लगातार किसी न किसी संगठन के काम के लिए अमेठी आता रहा। प्रधानमंत्री बनने के बाद आज फिर एक बार आपके बीच आने का अवसर मिला है।
2014 में चुनाव के समय हमने कहा था- सबका साथ-सबका विकास। अमेठी के मेरे प्‍यारे भाइयो-बहनों, अमेठी एक उत्‍तम उदाहरण है हमारे सबका साथ-सबका विकास के मंत्र का। और जब हम सबका साथ-सबका विकास की बात करते हैं तो मैं तब भी कहता था, आज भी कहता हूं जिन्‍होंने हमें वोट दिया वो भी हमारे हैं, जिन्‍होंने वोट नहीं दिया, वो भी हमारे हैं। जिन्‍होंने सीट हमें दी, वो क्षेत्र भी हमारा है और जिन्‍होंने हमें सीट नहीं दी, वो क्षेत्र भी हमारा है।

और आज पांच साल के बाद मैं अमेठी के नागरिकों के सामने नतमस्‍तक हो करके बड़े गौरव के साथ कह सकता हूं कि बहन स्‍मृति ईरानी जी उम्‍मीदवार के रूप में आपके बीच आई थीं; आपके लिए नया चेहरा था, नया परिचय था, लेकिन आपने बहुत आशीर्वाद दिए। भले हम चुनाव उस समय नहीं जीत पाए, लेकिन आपका दिल जीतने में हम सफल हो गए। आपने इतना प्‍यार दिया कि पांच साल से स्‍मृति जी ने इतनी मेहनत इस क्षेत्र के विकास के लिए की है, कभी आपको ये लगने नहीं दिया कि आपने उनको हराया है या जिताया है; जीते हुए से ज्‍यादा काम करके दिखाया है। मैं जरा अमेठी के लोगों को पूछना चाहता हूं- क्‍या आप हमारे काम से संतुष्‍ट हैं? क्‍या हमने आपकी चिंता की है? क्‍या हमने आपका भला करने का ईमानदारी से प्रयास किया है? कहीं पर रत्‍तीभर भी हमने कोई अन्‍याय किया है? पूरी तरह न्‍याय किया है? यही सबका साथ-सबका विकास मंत्र है हमारा।

थोड़ी देर पहले अमेठी के विकास से जुड़ी सैंकड़ों करोड़ इन परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्‍यास किया गया है। इसमें स्‍कूल, सड़क है, चिकित्‍सा केन्‍द्र है, गोशाला है, बिजली है, खेती से जुड़ी अनेक परियोजनाएं शामिल हैं।

भाइयो और बहनों, इन प्रोजेक्‍ट के साथ ही आज मैं एक बहुत महत्‍वपूर्ण घोषणा करने जा रहा हूं। ये घोषणा अमेठी की नई पहचान, नई शान से जुड़ी हुई है। कितने ही बड़े-बड़े लीडर यहां आए होंगे; अ‍ब भविष्‍य में अमेठी उनके नाम से नहीं; आज जो योजना मैं लाया हूं, उसके नाम से जाना जाएगा।

भाइयो ओर बहनों, अब कोरबा की ordnance factory में दुनिया की सबसे आधुनिक, दुनिया की सबसे आधुनिक उन बंदूकों में से एक- AK203 यानी kalashnikovs राइफलों की सीरिज का सबसे नवीन हथियार, ये हमारे अमेठी में बनाया जाएगा। ये राइफलें रूस और भारत का एक joint venture मिलकर बनाएगा। थोड़ी देर पहले हमारे देश की पहली रक्षा मंत्री निर्मला जी ने रूस के राष्‍ट्रपति जी का संदेश भी यहां पढ़ा है। मैं अपने और भारत के बहुत करीबी दोस्‍त राष्‍ट्रपति पुतिन का इस साझेदारी के लिए बहुत-बहुत आभार व्‍यक्‍त करता हूं। ये joint venture बहुत कम समय में उनके सहयोग से संभव हुआ है। उनके मित्रतापूर्ण संदेश और शुभकामनाओं के लिए भी मैं राष्‍ट्रपति पुतिन का बहुत-बहुत आभारी हूं; साथ ही इस joint venture से जुड़े रूसी मित्रों को भी मैं धन्‍यवाद और बधाई और इसकी सफलता के लिए शुभकामनाएं देता हूं।

साथियो, कुछ लोग दुनिया में घूमते-घूमते बताते रहते हैं हर गांव में जाकर- मेड इन उज्‍जेन, मेड इन जयपुर, मेड इन जेसलमेर, मेड इन बड़ोदा- भाषण करते रहते हैं। उनके भाषण, भाषण ही रह जाते हैं। ये मोदी है, अब मेड इन अमेठी, ये मेड इन अमेठी, मेड इन अमेठी AK203 राइफलों से आतंकियों और नक्‍सलियों के साथ होने वाली मुठभेड़ों में हमारे सैनिकों को निश्चित रूप से बहुत बढ़त मिलने वाली है। अमेठी की फैक्‍टरी में अब लाखों की तादाद में ये राइफलें बनाई जाएंगी। आगे जा करके यहां जो राइफल बनेगी, वो दुनिया के दूसरे देशों में भी निर्यात की जाएगी। इसलिए ये फैक्‍टरी अमेठी के नौजवानों के लिए रोजगार के नए अवसर भी ला रही है और देश के विकास और सुरक्षा के लिए भी एक नया रास्‍ता खोल रही है।

भाइयो और बहनों, आज से जो काम यहां शुरू हो रहा है, ये काम 8-9 साल पहले शुरू हो जाना चाहिए था। कोरबा की इस फैक्‍टरी को बनाया ही इसलिए गया था कि यहां आधुनिक राइफल बनाई जाए, लेकिन इसकी पूर्ण क्षमता का कभी इस्‍तेमाल ही नहीं किया गया है। अमेठी की ये फैक्‍टरी इस बात की गवाह है कि पहले कैसे हमारी सेना और सुरक्षाबलों की आवश्‍यकताओं को नजरअंदाज कर दिया गया।

साथियो, देश की सुरक्षा के लिए हमारी सेना ने साल 2005 में आधुनिक हथियार की अपनी जरूरत को तबकी सरकार के सामने रखा था। इसी को देखते हुए अमेठी में उस फैक्‍टरी के लिए काम शुरू हुआ। आपके यहां के सांसद, जब 2007 में इसका शिलान्‍यास किया- तब ये कहा गया था कि साल 2010 से इसमें काम शुरू हो जाएगा। हुआ क्‍या, हुआ क्‍या? उन्‍होंने कहा था कि नहीं कहा था? उनकी सरकार थी‍ कि नहीं थी? वो जो कहें, वो होना चाहिए था कि नहीं होना चाहिए था? हुआ क्‍या? अरे जो इतना ही नहीं कर पाते, उनका भरोसा काहे को करते हो? लेकिन साथियो, काम शुरू होना तो दूर, शिलान्‍यास के बाद के तीन साल तक पहले की सरकार ये ही तय नही कर पाई कि यहां की ordnance factory में किस तरह के हथियार बनाए जाएंगे। इतना ही नहीं- ये फैक्‍टरी बनेंगी कहां, इसके लिए जमीन तक उपलब्‍ध नहीं कराई गई।

साथियो, सोचिए- जिस फैक्‍टरी में साल 2010 में काम शुरू हो जाना चाहिए था, उसकी बिल्डिंग 2013 तक लटकी रही। बिल्डिंग बनने के बाद जैसे-तैसे यहां काम तो शुरू हुआ, क्‍योंकि सामने चुनाव था, कुछ तो दिखावा करना जरूरी था, लेकिन आधुनिक राइफल तब भी नहीं बनी। और यहां हां, ये भी मत भू‍लिए कि फैक्‍टरी में इन्‍होंने वादा किया था- ये कहते हैं ना कि हम वादा करके निभाते हैं, हम कभी झूठ बोलते नहीं हैं- ये भी बहुत बड़ा झूठ बोलते हैं। और ये भी मत भू‍लिए- उन्‍होंने कहा था कि 1500 नौजवानों को रोजगार देने का वादा किया था। किया था भाई, 1500 लोगों को फैक्‍टरी में वादा किया था? इस अमेठी की बात है, देश की नहीं कर रहा हूं। लेकिन इतनी बड़ी बातें करने वाले लोगों ने अमेठी के लोगों की आंखों में धूल झोंकी और सिर्फ 200 लोगों को काम मिला, और आज देशभर में रोजगार के भाषण देते घूम रहे हैं।

अमेठी के मेरे भाइयो और बहनों, अब आज इतने वर्षों के इंतजार के बाद अमेठी की ordnance factory में दुनिया की सबसे आधुनिक राइफलों में से एक का निर्माण शुरू होने जा रहा है।
साथियो, मैं आपसे जानना चाहता हूं क्‍या आधुनिक राइफलें न बनाकर हमारे वीर जवानों के साथ अन्‍याय हुआ कि नहीं हुआ? अन्‍याय हुआ कि नहीं हुआ? क्‍या ordnance factory की पूर्ण क्षमता का इस्‍तेमाल न करके यहां के संसाधनों के साथ अन्‍याय हुआ कि नहीं हुआ? क्‍या रोजगार न देकर अमेठी के नौजवानों के साथ अन्‍याय हुआ कि नहीं हुआ?

साथियो, पहले जो सरकार थी, उसने सुरक्षाबलों की सुरक्षा को नजरअंदाज करने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी। हमारे वीर जवानों को बुलेटप्रूफ जैकेट के लिए कैसे तरसाया गया, इसे देश को बार-बार याद कराना आवश्‍यक है। साल 2009 में सेना ने एक लाख 88 हजार बुलेट प्रूफ जैकेट की मांग की थी। बिना बुलेट प्रूफ जैकेट के हमारा जवान दुश्‍मन की सेना की गोलियों और आतंकियों की छापामार कार्रवाई का सामना कर रहा था। अपनी जान की बाजी लगाकर आतंकियों के साथ खतरनाक एनकाउंटर करता था। 2009 से लेकर 2014 तक, पांच साल- पांच साल कम समय नहीं होता है, लेकिन सेना के लिए बुलेट प्रूफ जैकेट नहीं खरीदी गई। ये हमारी ही सरकार है,‍ जिसने बीते साढ़े चार वर्षों में दो लाख 30 हजार से ज्‍यादा बुलेट प्रूफ जैकेट खरीदने का ऑर्डर दे दिया।

मैं आज अमेठी में आया हूं तो आप लोगों से जानना चाहता हूं कि देश के वीर जवानों को राइफल का इंतजार कराने वाले, बुलेट प्रूफ जैकेट का इंतजार कराने वाले ये लोग कौन थे? कौन लोग थे? मैं किसी का नाम नहीं लूंगा, लेकिन आप भलीभांति जानते हैं कि ये कौन लोग थे, आप भलीभां‍ति जानते हैं कि कौन लोग थे। और इसलिए भाइयो-बहनों- भारत माता की जय। और इसलिए भाइयो-बहनों, आप जानते हैं मुझे किसी का नाम लेने की जरूरत नहीं है।

भाइयो और बहनों, हमारे देश को आधुनिक राइफल ही नहीं, आधुनिक बुलेट प्रूफ जैकेट ही नहीं, आधुनिक तोप के लिए भी इन्‍हीं लोगों ने इंतजार कराया है। ये हमारी ही सरकार है जिसने आधुनिक तोप को सौदा किया और अब तो भारत में ही ये बनाई जा रही है।

साथियो, आधुनिक तोप की ही तरह आधुनिक लड़ाकू विमानों के लिए हमारी वायुसेना दशकों से कह रही थी, लेकिन जिनकी नीयत ही खराब हो, उनको भला वायुसेना की आवाज कहां सुनाई देगी। ये लोग सालों तक राफेल विमानों के सौदे पर बैठे रहे और जब सरकार जाने की बारी आई तो उसको ठंडे बस्‍ते में फेंक दिया। ये हमारी ही सरकार का प्रयास है कि अगले ही कुछ महीनों में पहला राफेल विमान भारत के आसमान में होगा। लेकिन ये लोग, अभी भी ये राफेल विमानों के सौदे को अपने निजी स्‍वार्थ के लिए, निजी हित के लिए, उसको भी नाकाम कराने के लिए, फेल कराने के लिए, कुछ न कुछ नए-नए नखरे कर रहे हैं।

भाइयो और बहनों, सुप्रीम कोर्ट से लेकर सीएजी तक, हर संस्‍था कह रही है कि भारत सरकार ने सही निर्णय किया है, सही समय पर किया है, सही सौदा किया है और देश के हित में किया है। लेकिन ये लोग झूठ पर झूठ बोले जा रहे हैं। रक्षा सौदे में कमीशन न‍ मिलने की बौखलाहट क्‍या होती है, ये कुछ लोगों के चेहरों पर साफ देखी जा सकती है।
सा‍थियो, आधे-अधूरे मन से जैसे इन लोगों ने देश की सुरक्षा की परवाह नहीं की, वैसा ही व्‍यवहार अमेठी के लोगों के साथ भी किया गया है। अमेठी के‍ लिए क्‍या-क्‍या कहा गया था, लेकिन आज अमेठी की स्थिति कया है, ये आपसे बेहतर कौन जानता है।

भाइयो और बहनों, जब नीयत न हो, जब गरीब का भला करने की मंशा न हो, जब लोगों से सिर्फ झूठ ही झूठ बोलना हो तो यही परिणाम आता है। आप याद करिए, यहां पर लगी स्‍टील फैक्‍टरी भी सिर्फ इसलिए चली गई क्‍योंकि इसके लिए गैस की व्‍यवस्‍था नहीं की गई। यहां के मेघापुर foodpark के साथ भी यही किया गया। वहीं हमने स्‍टील फैक्‍टरी के बारे में सोचा तो गैस पाइप लाइन की व्‍यवस्‍था की। अब ये स्‍टील फैक्‍टरी अमेठी को रोजगार देने के लिए और देश में स्‍टील उत्‍पादन को और गति देने के लिए तैयार है।

भाइयो और बहनों, यही हाल गोलीगंज में साइकिल की फैक्‍टरी लगनी थी, उसका भी क्‍या हुआ। किसानों से जमीन ले ली, हां किसानों से जमीन ले ली, फैक्‍टरी नहीं लगाई और जमीन पिछले दरवाजे से अपने नाम कर ली। अमेठी के विकास के नाम पर आपकी भावनाओं से इसी तरह खेला गया है।

साथियो, जब सत्ता स्‍वार्थ बन जाती है, विरासत को विस्‍तार देना ही एकमात्र लक्ष्‍य बन जाता है, तब देश की जरूरतों का पीछे छूट जाना बहुत स्‍वाभाविक होता है। जब अपने लोगों का, अपने रिश्‍तेदारों का भला करना प्राथमिकता बन जाता है तो सामान्‍य मानवी के कल्‍याण की भावना खत्‍म हो जाती है। दुर्भाग्‍य से अमेठी के साथ यही हुआ है।

मैं एक टीवी रिपोर्ट देख रहा था। उसमें यहां एक दलित बस्‍ती की रिपोर्ट दिखाई गई। बताया गया कि 2008 में दलितों को जो घर दिए गए थे, वो दस साल के भीतर की गिरने की स्थिति के कगार पर आकर खड़े हो गए हैं। उन बस्तियों के लोग बता रहे थे कि यहां के सांसद ने बस्तियों को अपना नाम तो दे दिया लेकिन उसे बाद उन लोगों को वो भुला दिया गया

साथियो, अमेठी के लोगों के साथ किस तरह का बर्ताव किया गया, आप इसके गवाह हैं। और आज आप ये भी देख रहे हैं कि हमारी सरकार ने यहां कैसे विकास का कार्य किया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अमेठी में ऐसे 9 हजार से अधिक घरों का निर्माण किया गया है। उज्‍ज्‍वला योजना के तहत मुफ्त गैस कनेक्‍शन देकर, सौभाग्‍य योजना के तहत मुफ्त बिजली कनेक्‍शन देकर, शौचालयों का निर्माण कराकर यहां के लोगों का जीवन आसान बनाने की कोशिश की गई है।

भाइयो और बहनों, वोट लेकर जनता को भूल जाना कुछ परिवारों की प्रवृत्ति है, कुछ लोगों की प्रवृत्ति होती है। वो गरीब को गरीब बनाए रखना चाहते हैं ताकि पीढ़ी-दर-पीढ़ी गरीबी हटाओ के नारे लगा सकें। हम गरीब को सशक्‍त बना करके उसे इतनी ताकत दे रहे हैं कि वो अपनी गरीबी से तेजी से बाहर‍ निकले। यही वजह है कि आज भारत उन देशों में गिना जाता है जहां बेहद तेजी के साथ गरीबी कम हो रही है। गरीबों के प्रति, उनकी जरूरतों के प्रति संवेदनशीलता कुछ लोगों में रही नहीं है।

साथियो, गरीबों के साथ जो किया गया, वही देश के किसानों के साथ भी हुआ। इन लोगों ने कभी किसानों को सशक्‍त करने की कोशिश ही नहीं की। उसकी छोटी-बड़ी दिक्‍कत को ये नजरअंदाज करते रहे। जब किसान इनकी योजनाओं से परेशान हो जाता था तो ये कर्ज माफी के भ्रम में उसे फंसा देते थे। पिछली बार साल 2008 में इन्‍होंने 52 हजार करोड़ रुपये की कर्ज माफी की जबकि देश के किसानों पर 6 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था।

इतना ही नहीं, जितनी कर्ज माफी की, उसका लाभ भी औसतन देश के तीन-साढ़े तीन करोड़ यानी अगर आपके गांव में 100 किसान हैं तो मुश्किल से 20 या 25 किसानों को लाभ मिला। बाकी कर्ज माफी का लाभ तो इनके सारे सिपहसलार, ठेकेदार, दलाल, बिचौलिए ले गए। वहीं हमारी सरकार जो प्रधानमंत्री किसान सम्‍मान निधि योजना लेकर आई है उसका लाभ देश के 12 करोड़ किसानों को मिलना सुनिश्चित हुआ है। कुछ दिन पहले ही करोड़ों किसानों के खाते में दो हजार रुपये की पहली किश्‍त पहुंच भी गई है। जिन किसानों के खाते में पैसे नहीं आए हैं, उन्‍हें भी बहुत ही जल्‍द इसका लाभ मिलने वाला है।

साथियो, ये योजना इतनी बड़ी है कि आने वाले दस वर्ष के तहत साढ़े सात लाख करोड़ रुपये किसानों के खाते में सीधे पहुंच जाएंगे। सोचिए, देश के गांवों को, किसानों को, ग्रामीण अर्थव्यवस्‍था को इससे कितनी बड़ी ताकत मिलने जा रही है। इससे अमेठी के भी हजारों किसानों को बहुत फायदा होगा। खाद खरीदना हो, बीज खरीदना हो, बिजली का बिल भरना हो, कीटनाशक खरीदना हो; ऐसे तमाम काम वो इस पैसे से कर पाएगा।

भाइयो और बहनों, किसान हो, जवान हो या फिर हमारे देश के नौजवान बेटे-बेटियां हों, आपका ये प्रधान सेवक आज काम कर पा रहा है तो इसके पीछे आपकी शक्ति है, आपका आशीर्वाद है। आपका ये उत्‍साह देख करके मैं कह सकता हूं कि अमेठी और अमेठी के लोग नया इतिहास रचने जा रहे हैं। एक ऐसा इतिहास, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई देगी।

साथियो, मैं अमेठी के विकास के अनेक काम कराने वाली स्‍मृतिजी को भी विशेष धन्‍यवाद देता हूं। साथ में फिर एक बार रूस के राष्‍ट्रपति पुतिन जी, जिनका संदेश देश की पहली रक्षामंत्री निर्मलाजी ने पढ़ा; उनको भी धन्‍यवाद देता हूं, और दुनिया ने भारत की नारी शक्ति क्‍या होती है, अब भलीभांति समझ लिया है। जिस देश की रक्षामंत्री नारी है, उसने दुनिया को दिखा दिया कि देश की रक्षा के लिए कैसे कदम उठाए जाते हैं।

एक बार फिर, अमेठी से इतनी बड़ी मात्रा में इस विराट जनसागर को मैं यहां देख रहा हूं। आप हमें आशीर्वाद देने के लिए आए, मैं आपका हृदयसे बहुत-बहुत आभार व्‍यक्‍त करता हूं। मेरे साथ बोलिए-

भारत माता की – जय

भारत माता की – जय

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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January 29, 2026
राष्ट्रपति का संबोधन 140 करोड़ भारतीयों के आत्मविश्वास और आकांक्षाओं को दर्शाता है: प्रधानमंत्री
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता युवाओं, किसानों और निर्माताओं के लिए व्यापक अवसर खोलता है : प्रधानमंत्री
हमारी सरकार सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन में विश्वास करती है; देश तेजी से सुधार के मार्ग पर कदम बढ़ा रहा है : प्रधानमंत्री
भारत का लोकतंत्र और जनसांख्यिकी विश्व के लिए आशा की किरण है: प्रधानमंत्री
यह समाधानों, सशक्त निर्णय और सुधारों में तेजी लाने का समय है : प्रधानमंत्री

नमस्कार साथियों!

कल राष्ट्रपति जी का उद्बोधन 140 करोड़ देशवासियों के आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति था, 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ का लेखा-जोखा था और 140 करोड़ देशवासी और उसमें भी ज्यादातर युवा, उनके एस्पिरेशन को रेखांकित करने का बहुत ही सटीक उद्बोधन, सभी सांसदों के लिए कई मार्गदर्शक बातें भी, कल आदरणीय राष्ट्रपति जी ने सदन में सबके सामने रखी हैं। सत्र के प्रारंभ में ही और 2026 के प्रारंभ में ही, आदरणीय राष्ट्रपति जी ने सांसदों से जो अपेक्षाएं व्यक्त की हैं, उन्होंने बहुत ही सरल शब्दों में राष्ट्र के मुखिया के रूप में जो भावनाएं व्यक्त की हैं, मुझे पूरा विश्वास है कि सभी माननीय सांसदों ने उसको गंभीरता से लिया ही होगा और यह सत्र अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण सत्र होता है। यह बजट सत्र है, 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है, यह दूसरी चौथाई का प्रारंभ हो रहा है, और 2047 विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह महत्वपूर्ण 25 वर्ष का दौर आरंभ हो रहा है और यह दूसरे क्वार्टर का, इस शताब्दी के दूसरे क्वार्टर का यह पहला बजट आ रहा है और वित्त मंत्री निर्मला जी, देश की पहली वित्त मंत्री ऐसी हैं, महिला वित्त मंत्री ऐसी हैं, जो लगातार 9वीं बार देश के संसद में बजट प्रस्तुत करने जा रही है। यह अपने आप में एक गौरव पल के रूप में भारत के संसदीय इतिहास में रजिस्टर हो रहा है।

साथियों,

इस वर्ष का प्रारंभ बहुत ही पॉजिटिव नोट के साथ शुरू हुआ है। आत्मविश्वास से भरा हिंदुस्तान आज विश्व के लिए आशा की किरण भी बना है, आकर्षण का केंद्र भी बना है। इस क्वार्टर के प्रारंभ में ही भारत और यूरोपीय यूनियन का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आने वाली दिशाएं कितनी उज्ज्वल हैं, भारत के युवाओं का भविष्य कितना उज्ज्वल है, उसकी एक झलक है। यह फ्री ट्रेड फॉर एंबिशियस भारत है, यह फ्री ट्रेड फॉर एस्पिरेशनल यूथ है, यह फ्री ट्रेड फॉर आत्मनिर्भर भारत है और मुझे पक्का विश्वास है, खास करके जो भारत के मैन्युफैक्चरर्स हैं, वे इस अवसर को अपनी क्षमताएं बढ़ाने के लिए करेंगे। और मैं सभी प्रकार के उत्पादकों से यही कहूंगा कि जब भारत यूरोपियन यूनियन के बीच मदर ऑफ ऑल डील्स जिसको कहते हैं, वैसा समझौता हुआ है तब, मेरे देश के उद्योगकार, मेरे देश के मैन्युफैक्चरर्स, अब तो बहुत बड़ा बाजार खुल गया, अब बहुत सस्ते में हमारा माल पहुंच जाएगा, इतने भाव से वो बैठे ना रहे, यह एक अवसर है, और इस अवसर का सबसे पहले मंत्र यह होता है, कि हम क्वालिटी पर बल दें, हम अब जब बाजार खुल गया है तो उत्तम से उत्तम क्वालिटी लेकर के बाजार में जाएं और अगर उत्तम से उत्तम क्वालिटी लेकर के जाते हैं, तो हम यूरोपियन यूनियन के 27 देशों के खरीदारों से पैसे ही कमाते हैं इतना ही नहीं, क्वालिटी के कारण से उनका दिल जीत लेते हैं, और वो लंबे अरसे तक प्रभाव रहता है उसका, दशकों तक उसका प्रभाव रहता है। कंपनियों का ब्रांड देश के ब्रांड के साथ नए गौरव को प्रस्थापित कर देता है और इसलिए 27 देशों के साथ हुआ यह समझौता, हमारे देश के मछुआरे, हमारे देश के किसान, हमारे देश के युवा, सर्विस सेक्टर में जो लोग विश्व में अलग-अलग जगह पर जाने के उत्सुक हैं, उनके लिए बहुत बड़े अवसर लेकर के आ रहा है। और मुझे पक्का विश्वास है, एक प्रकार से कॉन्फिडेंस कॉम्पिटेटिव और प्रोडक्टिव भारत की दिशा में यह बहुत बड़ा कदम है।

साथियों,

देश का ध्यान बजट की तरफ होना बहुत स्वाभाविक है, लेकिन इस सरकार की यह पहचान रही है- रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म। और अब तो हम रिफॉर्म एक्सप्रेस पर चल पड़े हैं, बहुत तेजी से चल पड़े हैं और मैं संसद के भी सभी साथियों का आभार व्यक्त करता हूं, इस रिफॉर्म एक्सप्रेसवे को गति देने में वे भी अपनी सकारात्मक शक्ति को लगा रहे हैं और उसके कारण रिफॉर्म एक्सप्रेस को भी लगातार गति मिल रही है। देश लॉन्ग टर्म पेंडिंग प्रॉब्लम अब उससे निकल करके, लॉन्ग टर्म सॉल्यूशन के मार्ग पर मजबूती के साथ कदम रख रहा है। और जब लॉन्ग टर्म सॉल्यूशंस होते हैं, तब predictivity होती है, जो विश्व में एक भरोसा पैदा करती है! हमारे हर निर्णय में राष्ट्र की प्रगति यह हमारा लक्ष्य है, लेकिन हमारे सारे निर्णय ह्यूमन सेंट्रिक हैं। हमारी भूमिका, हमारी योजनाएं, ह्यूमन सेंट्रिक है। हम टेक्नोलॉजी के साथ स्पर्धा भी करेंगे, हम टेक्नोलॉजी को आत्मसात भी करेंगे, हम टेक्नोलॉजी के सामर्थ्य को स्वीकार भी करेंगे, लेकिन उसके साथ-साथ हम मानव केंद्रीय व्यवस्था को जरा भी कम नहीं आकेंगे, हम संवेदनशीलताओं की महत्वता को समझते हुए टेक्नोलॉजी की जुगलबंदी के साथ आगे बढ़ने के व्यू के साथ आगे सोचेंगे। जो हमारे टिकाकार रहते हैं साथी, हमारे प्रति पसंद ना पसंद का रवैया रहता है और लोकतंत्र में बहुत स्वाभाविक है, लेकिन एक बात हर कोई कहता है, कि इस सरकार ने लास्ट माइल डिलीवरी पर बल दिया है। योजनाओं को फाइलों तक नहीं, उसे लाइफ तक पहुंचाने का प्रयास रहता है। और यही हमारी जो परंपरा है, उसको हम आने वाले दिनों में रिफॉर्म एक्सप्रेस में नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म के साथ आगे बढ़ाने वाले हैं। भारत की डेमोक्रेसी और भारत की डेमोग्राफी, आज दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद है, तब इस लोकतंत्र के मंदिर में हम विश्व समुदाय को भी कोई संदेश दें, हमारे सामर्थ्य का, हमारे लोकतंत्र के प्रति समर्पण का, लोकतंत्र की प्रक्रियाओं के द्वारा हुए निर्णय का सम्मान करने का यह अवसर है, और विश्व इसका जरूर स्वागत भी करता है, स्वीकार भी करता है। आज जिस प्रकार से देश आगे बढ़ रहा है आज समय व्यवधान का नहीं है, आज समय समाधान का है। आज प्राथमिकता व्यवधान नहीं है, आज प्राथमिकता समाधान है। आज भूमिका व्यवधान के माध्यम से रोते बैठने का नहीं है, आज हिम्मत के साथ समाधानकारी निर्णयों का कालखंड है। मैं सभी माननीय सांसदों से आग्रह करूंगा कि वे आएं, राष्ट्र के लिए आवश्यक समाधानों के दौर को हम गति दें, निर्णयों को हम शक्ति दें और लास्ट माइल डिलीवरी में हम सफलतापूर्वक आगे बढ़ें, साथियों आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद, बहुत-बहुत शुभकामनाएं।