#AdvantageAssam की टैगलाइन सिर्फ एक टैगलाइन नहीं, एक समग्र विजन है: प्रधानमंत्री मोदी
‘आयुष्मान भारत’ गरीबों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए विश्व का सबसे बड़ा कार्यक्र: पीएम मोदी
जीएसटी के परिणामस्वरूप सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग के व्यवसाय हुए संगठित, जिससे एमएसएमई को वित्तीय क्षेत्र से क्रेडिट का लाभ लेने में मदद मिलेगी: प्रधानमंत्री
सरकार अगले 3 वर्षों तक सभी सेक्टर के नए कर्मचारियों के ईपीएफ में उनके वेतन का 12% का योगदान करेगी: प्रधानमंत्री मोदी
पिछले 3 वर्षों में हमारी सरकार ने कई साहसिक आर्थिक सुधार किए हैं जिससे व्यापार करने की प्रक्रिया सरल हुई है: पीएम मोदी

भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे जी 

असम के राज्यपाल प्रोफेसर जगदीश मुखी जी, 
मुख्यमंत्री श्री सर्वानंद सोनेवाल जी, 

विश्व भर से और विशेषकर आसियान देशों से आए प्रतिनिधिगण, 

देश भर से आए उद्यमी और यहां उपस्थित अन्य महानुभाव,

आजि एई होन-मिलोनत उपोस्थित आपोना-लोक होकोलोके मोई आंतोरिक हुभेसा ज्ञापोन कोरिसों।

लोगोते ओखोमोर होमुहो राईजो-लोई मोर गोभीर श्रोधा ज्ञापोन कोरिसो।

‘Global Investors Summit’ में, मैं आप सभी का स्वागत करता हूं। 

इस समिट में आप सभी की उपस्थिति ये दिखा रही है कि असम किस तरह प्रगतिपथ पर आगे बढ़ रहा है। विशेष कर मुख्य अतिथि के तौर पर प्रधानमंत्री टोबगे की उपस्थिति भारत और भूटान की अटूट मित्रता की गवाही दे रही है। 

Friends!

We created the Act East Policy and the North-east is at the heart of it. 

The Act East Policy requires increased people to people contact, trade ties and other relations with countries on India’s east, particularly ASEAN countries. The tag-line of this Summit is very appropriate and gives a big Message.

‘Advantage Assam: India’s Express way to ASEAN’ is not just a Statement but it is a holistic Vision. Recently, we had the ASEAN India Summit celebrating 25 years of our partnership. 

ASEAN-India partnership,   may be 25 years old but our ties with these nations go back to thousands of years.  It was a privilege for India to host Heads of 10 ASEAN countries as honoured Guests  at our Republic Day function  in New Delhi.

Bangladesh has recently opened a consulate in Guwahati, becoming the first country to do so. I am happy to learn that The Royal Government of Bhutan has opened Bhutanese Consulate in Guwahati yesterday.

भाइयों और बहनों, 
भारत की ग्रोथ स्टोरी में और गति तभी आएगी जब देश के पूर्वोत्तर में रहने वाले लोगों का, यहां के समाज का, इस पूरे क्षेत्र का संतुलित विकास भी तेज गति से हो।

मेरा मानना है कि इंफाल से लेकर गुवाहाटी तक और कोलकाता से लेकर पटना तक, पूर्वी भारत को भारत के विकास का नया ऊर्जा केंद्र बनना चाहिए। यही हमारा विजन है, यही हमारी अप्रोच है।

इस विजन पर चलते हुए पिछले साढ़े तीन वर्ष में केंद्र सरकार की तरफ से और पिछले डेढ़ वर्ष में, असम सरकार की तरफ से किए गए प्रयासों का परिणाम अब और बेहतर तरीके से दिखाई देने लगा है। 

आज जितने व्यापक पैमाने पर ये आयोजन हो रहा है, वो कुछ वर्ष पहले तक कोई सोच भी नहीं सकता था।

ये इसलिए संभव हुआ है क्योंकि “देश में कुछ बदल नहीं सकता” कि सोच बदल गई है। लोगों में हताशा की जगह अब हौसला और आशा है।

साथियों, 
आज देश में दोगुनी रफ्तार से सड़कें बन रही हैं, दोगुनी रफ्तार से रेल लाइन का दोहरीकरण हो रहा है, लगभग दोगुनी रफ्तार से रेल लाइन का बिजलीकरण हो रहा है।

भाइयों और बहनों, 
हम सारी योजनाओं को उस दिशा की तरफ ले जा रहे हैं जो गरीब, निम्न मध्यम वर्ग और मध्यम वर्ग की जिंदगी में Qualitative Change लाए। 

हम अपनी योजनाओं को लोगों की आवश्यकताओं से जोड़ रहे हैं। ऐसी योजनाएं जो उनकी जिंदगी को आसान बनाए, ‘Ease Of Living को बढ़ाए’।
 
आपकी जानकारी में होगा कि सरकार ने बजट में ‘आयुष्मान भारत योजना’ का एलान किया है। अपनी तरह की दुनिया की ये सबसे बड़ी योजना है। 

साथियों, 
जो गरीबी में पला-बढ़ा है, जो गरीबी के कष्ट सहते हुए आगे बढ़ा है, उसे इस बात का हमेशा एहसास होता है कि गरीब के लिए सबसे बड़ी चिंता होती है - बीमारी का इलाज। 

जब कोई एक व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हुआ तो पूरा परिवार लंबे समय तक आर्थिक संकट से बाहर नहीं आ पाया। 

गरीबों को इस संकट, इस चिंता से मुक्त करने के लिए हम देश के 10 करोड़ से ज्यादा परिवारों को ‘आयुष्मान भारत’ से जोड़ रहे हैं।

इस योजना के तहत, हर गरीब परिवार को चिह्नित अस्पतालों में साल में 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज की सुविधा दी जाएगी इस योजना से करीब-करीब देश के 45 से 50 करोड़ लोगों को फायदा होगा। 

इस योजना के कारण टियर-2 ओर टियर-3 सिटिज में हॉस्पिटल्स की chain बनाने की संभावनाए बढ़ गई हे। युवाओ के लिए यह assured Income का जरिया बनेगा। 

इससे भारत के अंदरूनी इलाकों में पूंजी निवेश के बडे अवसर पैदा होंगे। मै राज्य सरकारो से भी आग्रह करुगा की नए हॉस्पिटल्स के निर्माण के लिए पालिसीज बनाये।  ‘आयुष्मान भारत’ के अलावा भी सरकार ने अपनी दो और योजनाओं के जरिए, गरीबों की सेहत से जुड़ी चिंता को बहुत कम किया है। 

इस सरकार ने प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और जीवन ज्योति योजना से देश के 18 करोड़ से ज्यादा गरीबों को सुरक्षा कवच प्रदान किया है। उन्हें बड़ी चिंता से मुक्त किया है। 

इसके अलावा, 3 हजार से ज्यादा जन औषधि केंद्रों पर 800 से ज्यादा सस्ती दवाईयों की बिक्री, स्टेंट की कीमत में 85 प्रतिशत तक की कमी, Knee इम्प्लांट की कीमत पर नियंत्रण, जैसे अनेक कार्य इस सरकार ने किए हैं जो मध्यम वर्ग को भी बड़ी राहत दे रहे हैं।

साथियों, 
आसियान देश हों, बांग्लादेश-भूटान-नेपाल हों, हम सभी एक तरह से कृषि प्रधान देश हैं। 
किसानों की उन्नति, इस पूरे क्षेत्र के विकास को नई ऊँचाई पर पहुंचा सकती है।

 इसलिए हमारी सरकार देश के किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य पर काम कर रही है।

इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जहां एक तरफ सरकार का जोर इस बात पर है की किसान खेती पर होने वाले खर्च को कम कर सके, वहीं किसानों को उनकी फसलों की उचित कीमत मिले इस ओर भी कार्य किया जा रहा है इस वर्ष सरकार एग्रीकल्चर और ग्रामीण सेक्टर पर 14 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करने जा रही है। हमने अभी दो दिन पहले किसानों को फसलों की उचित कीमत दिलाने के लिए एक और बड़े फैसले का ऐलान किया है। इसके अंतर्गत किसानों को उनकी फसलों का कम से कम 50 प्रतिशत यानी डेढ़ गुना मूल्य सुनिश्चित होगा। 

इसके अलावा सरकार 22 हजार ग्रामीण हाट को ग्रामीण एग्रीकल्चर मार्केट के तौर पर विकसित करेगी और उन्हें e-NAM यानि Electronic National Agriculture Market प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा।

भाइयों और बहनों, 
कुछ हफ्तों पहले हमने एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया है और आज मैं उत्तर-पूर्व में हूँ तो इस फैसले का जरूर जिक्र करना चाहता हूँ। 

साथियों, 
वैज्ञानिक तौर पर बांस, घास की श्रेणी में आता है। लेकिन करीब 90 साल पहले हमारे यहां कानून बनाने वालों ने इसे पेड़ का दर्जा दिया था। इसका नतीजा ये हुआ कि बांस चाहे कहीं भी उगे, उसे काटने के लिए, उसे ट्रांसपोर्ट करने के लिए, परमिट की जरूरत पड़ती थी, मंजूरी चाहिए होती थी। 

मुझे लगता है, पूरे देश में अगर किसी क्षेत्र के लोगों को सब से ज्यादा नुकसान इस कानून से हुआ तो उत्तर-पूर्व के लोगों का ही नुकसान हुआ। 

इतने वर्षों में देश आजाद हुआ, कितनी ही सरकारें आईं, गईं, लेकिन बांस को पेड़ की परिभाषा से अलग करके देश के लाखों किसानों, आदिवासियों को लाभ पहुँचाने वाला काम हमारी ही सरकार ने किया। 

अब हम लगभग 1300 करोड़ की लागत राशि से ‘National Bamboo mission’ को री-स्ट्रक्चर कर रहे हैं। उत्तर-पूर्व के लोगों को, खासकर यहां के किसानों को बजट के द्वारा एक और फायदा मिलने जा रहा है। 

भाइयों और बहनों, 
हमारे यहां खेती के लिए कर्ज मिलना आसान रहा है, लेकिन जो खेती से जुड़े अन्य व्यवसाय होते हैं, जैसे पोल्ट्री, मछली पालन, मधुमक्खी पालन, पशु-पालन, इसके लिए कर्ज लेने में किसानों को दिक्कतें होती थीं। अब हमने 10 हजार करोड़ रुपए की राशि से विशेषकर फिशरीज और एनीमल हस्बेंडरी को ध्यान में रखते हुए दो इंफ्रास्ट्रक्चर फंड गठित करने का निर्णय किया है। 

सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड द्वारा कर्ज लिए जाने की राह भी आसान की है। 
 
इस सरकार ने affordable Housing के क्षेत्र में भी ऐसे-ऐसे नीतिगत निर्णय लिए हैं, सुधार किए हैं, जो देश के हर गरीब को घर देने के सरकार के लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेंगे। 

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पिछले तीन वर्ष में  लगभग एक करोड़ घर बनाए गए हैं। हमने अभी बजट में ऐलान किया है कि इस वर्ष के साथ-साथ अगले वर्ष भी 51 लाख नए घर बनाए जाएंगे।

निम्न मध्यम वर्ग और मध्यम वर्ग की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार इस वर्ग को ब्याज में काफी छूट भी दे रही है। 

इसके अलावा RERA- यानि रीयल इस्टेट रेग्यूलेशन और डवलपमेंट एक्ट की वजह से भी इस सेक्टर में पारदर्शिता आई है और मध्यम वर्ग को घर मिलने में आसानी हुई है।

Affordable Housing के क्षेत्र में पिछले दिनों पूंजी निवेश काफी बढ़ा है, मै विदेश के लोगो से भी इस क्षेत्र में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने की अपील करता हु 
भाइयों और बहनों, 
सरकार की एक योजना, कैसे देश में ऊर्जा क्रांति ला रही है, कैसे मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दे रही है, उसका उदाहरण है- उजाला योजना। पहले की सरकार के समय साढ़े तीन सौ रुपए में बिकने वाला एक LED बल्ब अब 40 से 45 रुपए में मिल रहा है। एक अनुमान है कि जिन घरों में 5 LED बल्ब लगे हैं, उन परिवारों को हर महीना कम से कम 400 से 500 रुपए बिजली बिल में बचत हो रही है। अब तक उजाला योजना के तहत देश में 28 करोड़ से ज्यादा LED बल्ब बांटे जा चुके हैं। इसकी वजह से देश के ज्यदातर मध्यम वर्ग के लोगों को हर साल लगभग 15 हजार करोड़ रुपए की बचत बिजली बिल में हो रही है। 
ASEAN देशो में भी LED बल्ब की मांग बढ़ी है और यह भारतीय ट्रेडर्स के लिए अच्छा अवसर है

साथियों, 
लक्ष्य तय करके काम पूरा करना इस सरकार की कार्य-संस्कृति है, Work-Culture है। 

असम के लोगों को इस बात का ऐहसास है कि कैसे जिस ढोला सादिया ब्रिज का मैंने लोकार्पण किया था, वो अगर पहले की रफ्तार से चलता, तो वो ब्रिज आज भी बन ही रहा होता।
 
हमने सरकार में पूरे शासन तंत्र के काम करने के तरीके को बदलने का काम किया है। इसी का नतीजा है कि हम ना सिर्फ समय पर योजनाएं पूरी कर रहे हैं बल्कि अब उस स्थिति में हैं कि योजनाओं को समय से पहले पूरा कर सकें।  
इसी तरह गरीब महिलाओं को लकड़ी के धुएं से मुक्ति दिलाने वाली उज्ज्वला योजना को भी हम समय से पहले पूरा करने की तरफ बढ़ रहे थे। 

हमारा लक्ष्य था कि 2019 तक पाँच करोड़ गरीब महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन देंगे। अब तक इस योजना के माध्यम से 3 करोड़ 30 लाख से ज्यादा महिलाओं को लाभ दिया जा चुका है। अब इस बजट में हमने तय किया है कि अब उज्ज्वला योजना के तहत 8 करोड़ महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिया जाएगा।
 
साथियों, 
2014 से पहले के दस वर्षों में हमारी नौजवान पीढ़ी की Aspiration को जिस तरह नजर अंदाज किया गया, वो कभी भुलाए नहीं भूला जा सकता। 

देश के नौजवान की इच्छा थी अपने दम पर कुछ करने की। लेकिन जब वो बैंक से कर्ज मांगने जाता था, तो उससे बैंक गारंटी मांगी जाती थी। मुद्रा योजना के माध्यम से बैंक गारंटी देने की इस बाध्यता को ही हमने खत्म कर दिया। 

इस योजना ने पिछले तीन वर्षों में देश को तीन करोड़ नए आंत्रप्रन्योर्स दिए हैं। ये वो लोग हैं जिन्होंने अपना काम शुरू किया है, जो स्वरोजगार कर रहे हैं। 

इस वर्ष के बजट में सरकार ने मुद्रा योजना के द्वारा लोगों को स्वरोजगार के लिए 3 लाख करोड़ रुपए कर्ज देने का लक्ष्य रखा है। 

इसके अलावा स्टैंड अप इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया, स्किल इंडिया मिशन के माध्यम से भी युवाओं को सशक्त करने का काम ये सरकार कर रही है। इसके अलावा सरकार, श्रमएव जयते के सिद्धांत पर चलते हुए,श्रम कानूनों में भी निरंतर सुधार कर रही है, प्रक्रियाओं को सरल बना रही है। 

पहले जहां उद्यमियों को श्रम कानूनों के पालन के लिए 50 से ज्यादा रजिस्टर रखने पड़ते थे, वहीं अब सिर्फ और सिर्फ पाँच रजिस्टर से काम चल जाता है। 

श्रम सुविधा पोर्टल के माध्यम से हमने अधिकांश प्रक्रियाओं को ऑनलाइन कर दिया है। अब तो देश में सिर्फ एक दिन में नई कंपनी का रजिस्ट्रेशन हो सकता है, जबकि पहले इसमें एक-एक हफ्ते लग जाते थे। 

इन सारे सुधारों का बड़ा लाभ देश के नौजवानों को, देश के छोटे उदयमियों को सबसे ज्यादा हुआ है।

Friends!
Development of MSME sector is a priority for us as this is the back-bone of our industries.

 In this year’s budget we are giving a big relief to MSMEs by reducing rate of income tax to 25% on companies reporting a turn-over of up to Rs. 250 crore. This will benefit almost 99% of companies. 

The formalisation of businesses of MSMEs due to introduction of GST, will help MSMEs to access credit from financial sector. Now, Government will contribute 12% to EPF for new employees in all sectors for three years. 

This Budget has provided additional deduction to the employees of 30% of the wages paid for new employees under the Income Tax Act. 

We are also rolling out e-assessment of income tax across the country to eliminate corruption and bring efficiency and transparency. Further, the women employees’ contribution to EPF will be 8% for first three years against existing rate of 12%.   

Paid maternity leave has been increased from 12 weeks to 26 weeks, along with provision of crèches to incentivise women employment in the formal sector. All these efforts, will strongly support ‘Make in India’ Also. 

साथियों, 
सरकार की ऐसी योजनाएं गरीबों को सशक्त कर रही हैं। लेकिन उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान अगर किसी चीज से होता है, तो वो है भ्रष्टाचार, कालाधन। 

हमारी सरकार का कालेधन और भ्रष्टाचार को खत्म करने का कमिटमेंट है 
साथियों, 
आज इस मंच से मैं अपने देश के उद्यमी वर्ग का आभार व्यक्त करना चाहता हूं जिसने देश के आर्थिक एकीकरण की व्यवस्था- जीएसटी को ना सिर्फ स्वीकार किया बल्कि आज उसे अपने बिजनेस कल्चर में शामिल कर लिया है। 

हमारी सरकार ने देश में Economic Transparency लाने के लिए एक और बड़ा कदम Insolvency and Bankruptcy Code के तौर पर भी उठाया है। 

कई बरसों से भारत में अंतरराष्ट्रीय मान्यताओं के अनुरूप इस तरह के Code की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इस आवश्यकता का भी समाधान इसी सरकार ने किया है।
  
Friends!

The Union Government has taken up many path breaking economic reforms in last three years, which have simplified procedures  for doing business. 

 It is a result of these reforms that India today ranks 100 among 190 countries in the Doing Business Report, of the World Bank, after climbing up 42 ranks! 

The position of India has improved in many other ratings like Global Competitive--ness Index of World Economic Forum and Moody’s rating upgrade from stable to positive in November 2017.

Our policies have ensured that inflation remains below 5% mark.  Now, we have Foreign Exchange Reserves of US Dollars 418 Billion. Many new sectors have been opened for 100% FDI through automatic route like Automobiles,   Textiles, Tourism, Ports, Roads & Highways.Today, India is one of the most preferred destinations for FDI.  India has received highest ever annual FDI of USD 60 Billion in 2016-17.  

The world sees India today, as an emerging power house for economic growth.

 I am happy to note that Assam is ranked first among the North Eastern States in the Ease of Doing Business report. I am sure that with the present leadership of the State Government,  Assam is going to further improve its current position to emerge as one of the most sought after states for industrial investment in the country. 

Friends, today our focus is on infrastructure investment and next year we will be investing about Rs. 6 lakh crore in this sector.This year we aim to complete more than 9,000 kilometers length of National Highways.   

We will be developing 35,000 kilometers of roads with investment of Rupees 5.35 lakh crore under ‘Bharatmala’ project.  

The Railways will make an investment of Rupees 1.48 lakh crore in 2018-19. 

Our target is to re-develop 600 major Railway Stations in coming years. All these investments decisions will speed up development and are expected to generate lakhs of jobs in the coming years.

साथियों, 
आज मै एक और विषय पर भी बात करना चाहूँगा । 
इस धरती के महान सपूत, भूपेन हजारिका जब सिर्फ 13 वर्ष के थे, तब उन्होंने एक कविता लिखी थी। 

तब अंग्रेजों का शासन था, ये पूरा क्षेत्र, पूरा देश गुलामी के बंधन में जकड़ा हुआ था। 

उस समय, स्वर्गीय भूपेन हजारिका जी ने लिखा था-

ओग्नीजुगौ फिरिन्गौती मोई

नोतुन ऑखम गौढ़ीम

हरबौहारार हर्बस्व

पुनौर फिराई आनीम

नोतुन ऑखम गौढ़ीम

यानि- “अंगारे की तरह धधकते युग में, 
मैं एक चिंगारी की तरह हूं। 

मैं एक नए असम का निर्माण करूंगा। 

जो पीड़ित हैं, जो वंचित हैं, उन्होंने जो खोया है, वो वापस लेकर आऊंगा। 

मैं एक नए असम का निर्माण करूंगा”।

स्वतंत्रता से पूर्व देश के अलग-अलग क्षेत्रों में देखे गए ऐसे लाखों-करोड़ों वीर-वीरांगनाओं के सपने पूरे करने का हम सभी पर दायित्व है। 

इस दायित्व को पूरा करने के लिए हम सभी ने 2022 तक न्यू इंडिया के सपने को पूरा करने का संकल्प लिया हुआ है।

संकल्प से सिद्धि की इस यात्रा में North-East  के लोगों की आवश्यकताओं को देखते हुए, उनकी जरूरतों को समझते हुए, योजनाएं बनाई जा रही हैं और उन्हें लागू किया जा रहा है।

मैं मानता हूं कि North-East  के 
8 राज्य-अष्टलक्ष्मी, देश के विकास के नए ग्रोथ इंजन है और इनकी गति बढ़ने का मतलब है देश के विकास की गति बढ़ना।

इसलिए हमारी सरकार द्वारा  उत्तर-पूर्व में Transformation By Transportation की नीति पर जोर दिया जा रहा है। 

इंफ्रास्ट्रचर में किया जा रहा निवेश इस पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदलने का काम कर रहा है।

पिछले 3 वर्ष में north-east  में सिर्फ रेलवे में ही औसतन 5,300 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष खर्च किये गए हैं। 

लगभग 47 हजार करोड़ रुपए की राशि से उत्तर-पूर्व में 15 नई रेल लाइनों पर काम किया जा रहा है। आने वाले दिनों में जब अगरतला-अखौड़ा रेल का काम पूरा होगा, त्रिपुरा-बांग्लादेश के बीच रेलवे कनेक्टिविटी बनेगी तो इसका पूरा फायदा पूरे क्षेत्र को होगा।सरकार ने लगभग 33 हजार करोड़ रुपए की लागत से north-east में करीब-करीब 4 हजार किलोमीटर National highway के निर्माण को स्वीकृति दी है।

 इसके अलावा सरकार अगले दो से तीन वर्षों में 90 हजार करोड़ रुपए की लागत राशि से उत्तर-पूर्व में रोड और नेशनल हाईवेज का निर्माण करेगी।

भाइयों और बहनों, 
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना अटल जी के समय शुरू हुई थी। पहले जहां ये योजना 2022 तक खत्म होनी थी, वहीं अब हमने इसके पूरा करने का समय कम करके 2019 तक कर दिया है। 

इतना ही नहीं, इस बजट में हमने ये भी ऐलान किया है कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत सिर्फ गांव ही नहीं जोड़े जाएंगे बल्कि गांव के बड़े स्कूल, हॉस्पिटल, बड़े बाजारों को भी जोड़ा जाएगा। 

यहां पावर सेक्टर को मजबूत करने के लिए, Intra State Transmission एवं Distribution System को मजबूत करने के लिए 10 हजार करोड़ रूपए से ज्यादा की योजनाएं शुरू की गई हैं। 

बहुत जल्द ही गुवाहाटी में World Class Airport Terminal Building का काम शुरू होने जा रहा है जो आसियान देशों के साथ उत्तर-पूर्व विशेष कर असम की कनेक्टीविटी को और मजबूत करेगा।
 
‘उड़ान योजना’ के तहत भी सरकार उत्तर-पूर्व को विशेष प्राथमिकता दे रही है। यहां के 19 एयरपोर्ट और हैलीपैड जिसमें से 5 तो सिर्फ असम में हैं, उन्हें देश के अन्य शहरों से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।
 
केंद्र सरकार द्वारा 160 से ज्यादा देशों से आने वाले टूरिस्टों को e-visa की सुविधा दिया जाना भी इस क्षेत्र में टूरिज्म के विकास में अहम भूमिका निभाएगा।

साथियों, 
केंद्र सरकार ने गुवाहाटी में 1100 करोड़ रुपए से ज्यादा की लागत से नए एम्स को भी मंजूरी दी है। 

सरकार उत्तर-पूर्व को भी नेशनल गैस ग्रिड के साथ जोड़ने के लिए काम कर रही है। तीन हजार करोड़ रुपए की लागत से GAIL(गेल)  द्वारा गुवाहाटी तक गैस पाइप लाइन बिछाने का काम स्वीकृत किया गया है।
 
केंद्र सरकार ने हाल ही में एक नई योजना- ‘North-East Special Infrastructure Development Scheme’ को मंजूरी दी है। इसके तहत केंद्र सरकार द्वारा 100 प्रतिशत फंडिंग करके इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी योजनाओं को पूरा किया जाएगा। 

उत्तर-पूर्व में हो रहा ये निवेश, यहां पर टूरिज्म को बढ़ाने में मदद करेगा, यहां के युवाओं के लिए, यहां की महिलाओं के लिए, रोजगार के नए अवसर लेकर आएगा।
 
साथियों,
मैं असम के मुख्यमंत्री श्री सर्वानंद सोनेवाल जी को बधाई देता हूँ जिन्होंने बहुत ही कम समय में असम में business friendly और development friendly वातावरण बनाने का काम किया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ भी असम सरकार ने सख्त फैसले लिए हैं।

असम सरकार उद्योगों को लगाने के लिए, टूरिज्म बढ़ाने के लिए, टैक्स इंसेटिव्स भी दे रही हैं। 

नई IT Policy,

नई start-up policy, 

नई sport policy, 

नई sugar policy, 

नई solar energy policy लागू की गई है।
 
मैं राज्य सरकार की इस बात के लिए भी प्रशंसा करता हूँ कि वो गुवाहाटी को आसियान देशों के साथ व्यापार के लिए एक business hub के तौर पर विकसित कर रही है। 

गुवाहाटी को स्मार्ट सिटी के तौर पर भी Develop किया जा रहा है।

Once again I congratulate the people of Assam and North East for holding such a big event with great fervour. I also express my thanks to the participating dignitaries present from across the ASEAN and BBIN countries in the Global Investor Summit.  

 I am sure the Summit is just a beginning and will add a new chapter to our thousand years old relations with You.  

एक बार फिर मैं उत्तर-पूर्व के लोगों को, असम के लोगों को इस विशेष आयोजन के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। 

अपुना-लोकोक बहुत बहुत धन्यबाद  

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद !!!

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21वीं सदी के इस दशक में भारत रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार है: ET Now ग्लोबल बिजनेस समिट में पीएम मोदी
February 13, 2026
Amid numerous disruptions, this decade has been one of unprecedented development for India, marked by strong delivery and by efforts that have strengthened our democracy: PM
In this decade of the 21st century, India is riding the Reform Express: PM
We have made the Budget not only outlay-focused but also outcome-centric: PM
Over the past decade, we have regarded technology and innovation as the core drivers of growth: PM
Today, we are entering into trade deals with the world because today's India is confident and ready to compete globally: PM

आप सभी का इस ग्लोबल बिजनेस समिट में, आप सबका मैं अभिनंदन करता हूं। हम यहां A Decade Of Disruption, A Century Of Change, इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं। विनीत जी का भाषण सुनने के बाद मुझे लगता है कि मेरा काम बहुत सरल हो गया है। लेकिन एक छोटी request करूं, इतना सारा आपको पता है, तो कभी ET में तो दिखना चाहिए।

साथियों,

21वीं सदी का बीता दशक अभूतपूर्व डिसरप्शन का रहा है। ग्लोबल Pandemic, ग्लोब के अलग-अलग हिस्सों में तनाव, युद्ध और ग्लोब के संतुलन को हिला देने वाले Supply Chain Breakdowns, दुनिया ने एक दशक के भीतर काफी कुछ देख लिया। लेकिन साथियों, कहते हैं, संकट के समय ही किसी देश के सामर्थ्य पता चलता है और मुझे बहुत गर्व है, अनेक Disruptions के बीच भी भारत के लिए यह दशक, अभूतपूर्व डेवलपमेंट का रहा है, शानदार डिलीवरी का रहा है और डेमोक्रेसी को मजबूत करने वाला रहा है। जब पिछला दशक शुरू हुआ था, तो भारत ग्यारहवें नंबर की अर्थव्यवस्था था। इतनी उथल-पुथल में पूरी आशंका थी कि भारत और नीचे चला जाएगा, लेकिन आज भारत, बहुत तेजी के साथ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने जा रहा है। और आप जिस Century Of Change की बात कर रहे हैं, उसका बहुत बड़ा आधार और यह मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं, इसका बहुत बड़ा आधार भारत ही होने जा रहा है। आज भारत, दुनिया की ग्रोथ में 16 परसेंट से ज्यादा योगदान दे रहा है। और मुझे विश्वास है, इस सेंचुरी के हर आने वाले साल में हमारा योगदान और भी बढ़ता रहेगा, निरंतर बढ़ता रहेगा। मैं वह मदान की तरह astrologer के रूप में नहीं आया हूं। भारत, दुनिया की ग्रोथ को ड्राइव करेगा, दुनिया की ग्रोथ का नया इंजन बनेगा।

साथियों,

दुनिया में सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद एक नई वैश्विक व्यवस्था बनी थी, एक नए वर्ल्ड ऑर्डर ने आकार लिया था। लेकिन सात दशक के बाद, वो व्यवस्था टूट रही है। दुनिया आज एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की तरफ बढ़ रही है। आखिर यह क्यों हो रहा है? ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि तब जो व्यवस्था बनी थी, उसकी नींव One Size Fits All, इसी सोच पर टिकी थी। तब ये माना गया कि World Economy Core में होगी, Supply Chains मजबूत और विश्वसनीय हो जाएगी। इस व्यवस्था में नेशन्स को केवल कंट्रीब्यूटर्स के रूप में ही देखा गया। लेकिन आज, इस मॉडल को चुनौती मिल रही है। यह अपनी प्रासंगिकता खोता जा रहा है। आज हर देश को यह पता चल रहा है कि उसे अपनी रज़ीलियन्स खुद बनानी होगी।

साथियों,

आज दुनिया जिसकी चर्चा कर रही है। उसको भारत ने 2015 में, आज से 10 साल से पहले, 2015 में ही अपनी नीति का हिस्सा बना लिया था। दस साल पहले जब नीति आयोग बना, तो उसके फाउंडिंग डॉक्यूमेंट में ही भारत ने अपना विजन क्लीयर कर दिया था और विजन यह कि भारत किसी दूसरे देश से कोई सिंगल डेवलपमेंट मॉडल इंपोर्ट नहीं करेगा। हम भारत के विकास के लिए भारतीय अप्रोच को लेकर ही चलेंगे। इस नीति ने भारत को अपने हिसाब से, अपनी रिक्वायरमेंट के हिसाब से, अपने हित में फैसले लेने का आत्मविश्वास दिया और यह एक बड़ा कारण है कि डिसरप्शन के दशक में भी भारत की इकोनॉमी कमजोर नहीं पड़ी, निरंतर मजबूत होती गई।

साथियों,

आज 21वीं सदी के इस दशक में भारत Reform Express पर सवार है और इस Reform Express की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हम इसे compulsion में नहीं, बल्कि conviction के साथ, Reform के कमिटमेंट के साथ गति दे रहे हैं। यहां तो बहुत बड़ी-बड़ी संख्या में बड़े-बड़े expert बैठे हैं, अर्थजगत के दिग्गज बैठे हैं। आपने भी 2014 से पहले का दौर देखा है। जब तक हालात मजबूर न कर दें, जब तक कोई संकट न आ जाए, जब कोई और रास्ता न बचे, तब मजबूरन रिफॉर्म्स किए जाते थे। आप याद करिए, 1991 का रिफॉर्म्स भी तब हुआ, जब देश पर दिवालिया होने का खतरा आ गया था। जब देश को सोना गिरवी रखना पड़ा था। पहले की सरकारों का यही तरीका था, वो reforms compulsion में ही किया करती थीं। जब 26/11 का आतंकी हमला हुआ, कांग्रेस सरकार की कलई खुल गई, तो NIA का गठन किया गया। जब पावर सेक्टर बर्बाद हो गया, ग्रिड फेल होने लगे, तब मजबूरी में कांग्रेस को पावर सेक्टर में याद आई।

साथियों,

ऐसी एक लंबी सूची है, जो याद दिलाती है कि जब compulsion में, मजबूरी में reform होता है, तो न सही नतीजे मिलते हैं, न देश को सही परिणाम मिलते हैं।

साथियों,

आज मुझे गर्व है कि बीते 11 वर्षों में हमने पूरे conviction के साथ रिफॉर्म किए हैं और यह रिफॉर्म Policy में हुए हैं, Process में हुए, Delivery में हुए और इतना ही नहीं, Mindset में भी reform हुआ है। क्योंकि साथियों, अगर पॉलिसी बदले, लेकिन प्रोसेस वही रहे, माइंडसेट वही रहे, डिलीवरी ठीक से ना हो, तो रिफॉर्म्स सिर्फ और सिर्फ कागज का टुकड़ा बनकर रह जाता है। इसलिए हमने पूरे सिस्टम को बदलने के लिए ईमानदारी से कोशिश की है।

साथियों,

मैं प्रोसेस की बात करूं, तो एक साधारण लेकिन बहुत जरूरी प्रोसेस है, कैबिनेट नोट्स का। यहां कई लोगों को अंदाजा होगा कि पहले की सरकारों में एक कैबिनेट नोट बनने में ही कुछ महीने लग जाते थे, महीने। अब इस स्पीड से देश का विकास कैसे होता? इसलिए हमने इस process को बदला। हमने डिसीजन मेकिंग को time-bound और technology-driven बनाया। हमने यह तय कर दिया कि इस अफसर की टेबल पर यह कैबिनेट नोट इतने घंटे से ज्यादा रहेगा ही नहीं। या तो रिजेक्ट करो या निर्णय लो और इसका नतीजा आज देश देख रहा है।

साथियों,

मैं आपको रेलवे ओवर ब्रिज के अप्रूवल का भी उदाहरण दूंगा। पहले R.O.B का एक डिजाइन अप्रूव कराने के लिए कई वर्ष लग जाते थे, कई सारी क्लीयरेंस की ज़रूरत थीं, कई जगह चिट्ठियां लिखनी पड़ती थीं और यह मैं प्राइवेट के लिए नहीं कह रहा हूं, सरकार को। हमने इसको भी बदला और आज देखिए कितनी तेजी से रोड और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है। विनीत जी ने बहुत विस्तार से इस बात को बताया।

साथियों,

एक बड़ा Interesting उदाहरण बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर का है। अब बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर देश की security से जुड़ा हुआ होता है। आप कल्पना कर सकते हैं, एक समय था, जब बॉर्डर एरियाज़ में एक साधारण सी सड़क बनाने के लिए भी कुछ परमिशन दिल्ली से लेनी पड़ती थी। जिला स्तर पर निर्णय लेने के यानी इसके सामने एक प्रकार से उसका कोई अधिकारी ही नहीं थे, दीवार ही दीवार थीं, वो निर्णय नहीं कर सकता था और इसलिए तो दशकों बाद भी हमारे देश में बॉर्डर इंफ्रा इतना बेहाल रहा। 2014 के बाद हमने इस प्रोसेस में भी रिफॉर्म किया, हमने स्थानीय प्रशासन को Empower किया और आज हम देश के बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से डेवलप होते देख रहे हैं।

साथियों,

बीते दशक में भारत के जिस Reform ने दुनिया में हलचल मचा दी है, वो है UPI, भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम। यह सिर्फ एक App नहीं है, यह policy, process और delivery के एक शानदार कन्वर्जेंस का प्रमाण है। जो लोग कभी बैंकिंग और फाइनेंस से जुड़े बेनिफिट्स के बारे में सोच भी नहीं सकते थे, UPI देश के ऐसे नागरिकों को सर्व कर रहा है। यह जो डिजिटल इंडिया है, डिजिटल पेमेंट सिस्टम है, जनधन आधार मोबाइल की ट्रिनिटी है, यह रिफॉर्म किसी compulsion से नहीं हुआ, यह हमारा कन्विक्शन था। और कन्विक्शन यह था कि जिन लोगों तक पहले की सरकारें कभी नहीं पहुंची, हमें ऐसे नागरिकों का इंक्लूजन करना है। जिसे कोई नहीं पूछता, उसे मोदी पूजता है। और इसलिए यह रिफॉर्म्स किए गए हैं और आज भी हमारी सरकार इसी सोच के साथ चल रही है।

साथियों,

भारत का यह जो नया मिज़ाज है, वो हमारे बजट में भी रिफ्लेक्ट होता है। पहले जब बजट की चर्चा होती थी, तो फोकस सिर्फ Outlay पर होता था। कितना पैसा आवंटित हुआ, क्या सस्ता हुआ, क्या महंगा हुआ और उस दिन टीवी देखेंगे, तो पूरी टीवी एक ही यानी इनके लिए, बजट मतलब इंकम टैक्‍स ऊपर गया कि नीचे गया, इसके आगे उनको देश दिखता ही नहीं है। और होता क्‍या था, कितनी नई ट्रेनें घोषित हुईं, यही चलता रहता था, उन घोषणाओं का बाद में क्या हुआ, कोई पूछने वाला ही नहीं था। और इसलिए हमने बजट को Outlay के साथ-साथ Outcome सेंट्रिक बनाया।

साथियों,

बजट में एक और बड़ा बदलाव आया है। 2014 से पहले Off-Budget Borrowing पर बहुत अधिक चर्चा होती थी। लेकिन अब Off-Budget Reforms की चर्चा होती है। बजट से बाहर, नेक्स्ट जनरेशन GST रिफॉर्म्स हुए, प्लानिंग कमीशन की जगह नीति आयोग बनाया, आर्टिकल 370 की दीवार गिरा दी, तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाया, नारी शक्ति वंदन अधिनियम बनाया।

साथियों,

बजट में घोषित हों, या बजट से बाहर, रिफॉर्म एक्सप्रेस लगातार गति पकड़ रही है। अगर मैं पिछले एक साल की ही बात करूं तो हमने Ports & Maritime सेक्टर में Reform किया, शिप बिल्डिंग इंडस्ट्री के लिए अनेक Initiative लिए, जन-विश्वास एक्ट के तहत रिफॉर्म्स को और आगे बढ़ाया, Energy Security के लिए Shanti Act बनाया, लेबर कानूनों से जुड़े रिफॉर्म्स को लागू किया, भारतीय न्याय संहिता लेकर आए, वक्फ कानून में Reform किया गया है, गांव में रोजगार के लिए नया G RAM G कानून बनाया, ऐसे अनेक Reforms साल भर होते रहे हैं।

साथियों,

इस साल के बजट ने रिफॉर्म एक्सप्रेस को और आगे बढ़ाया है। वैसे तो बजट के बहुत सारे आयाम हैं, लेकिन मैं दो Important फैक्टर्स की बात करूंगा। Capex और Technology, बीते वर्षों की भांति इस बजट में भी, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च को बढ़ाकर करीब 17 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है। और आप जानते हैं कि कैपेक्स का मल्टीप्लायर effect कितना बड़ा होता है। इससे देश की कैपेसिटी और प्रोडक्टिविटी बढ़ती है। अनेकों सेक्टर्स में बहुत बड़ी संख्या में जॉब क्रिएशन भी होती है। पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप का निर्माण, देश के टीयर-2, टीयर-3 शहरों के लिए सिटी इकोनॉमिक रीजन्स का निर्माण और सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, ऐसे बजट अनाउंसमेंट्स, सही मायने में युवाओं पर, देश के फ्यूचर पर, यह इन्वेस्टमेंट हैं।

साथियों,

बीते दशक में हमने टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को ग्रोथ का कोर ड्राइवर माना है। इसी सोच के साथ, देश में स्टार्टअप कल्चर, हैकाथॉन कल्चर, उसको हमने प्रमोट किया। आज देश में, दो लाख से अधिक स्टार्टअप, रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स हैं और यह डायवर्स सेक्टर्स में काम कर रहे हैं। हमने युवाओं को प्रोत्साहित किया, देश में रिस्क टेकिंग कल्चर को पुरस्कृत करने का भाव जगाया और परिणाम हमारे सामने है। इस साल का बजट, हमारी इसी प्राथमिकता को और मजबूत करता है। विशेष तौर पर बायोफार्मा, सेमीकंडक्टर और AI जैसे सेक्टर के लिए, इस बजट में महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं।

साथियों,

आज जब देश की आर्थिक ताकत बढ़ी है, तो हम राज्यों को भी उतना ही ज्यादा सशक्त कर रहे हैं। मैं एक और आंकड़ा आपको देना चाहता हूं। 2004 से 2014, 10 साल, इस दरमियान राज्यों को टैक्स डिवोल्यूशन के तौर पर 18 लाख करोड़ रुपए के आसपास ही मिले थे, 2004 से 2014 तक। जबकि 2014 से लेकर 2025 तक, राज्यों को 84 लाख करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। अगर मैं इस साल बजट में प्रस्तावित लगभग 14 लाख करोड़ का आंकड़ा और जोड़ दूं, तो हमारी सरकार में राज्यों को टैक्स डिवोल्यूशन के करीब-करीब 100 लाख करोड़ रुपए मिलने तय हुए हैं। यह राशि केंद्र सरकार की तरफ से अलग-अलग राज्य सरकारों को मिली है, ताकि वो अपने यहां विकास के कार्यों को आगे बढ़ा सकें।

साथियों,

आजकल आप लोग भारत के FTA’s यानि फ्री ट्रेड डील्स पर काफी चर्चा कर रहे हैं और मैं यहां enter हुआ, वहीं से शुरू हो गए लोग। दुनियाभर में इसका एनालिसिस हो रहा है। लेकिन मैं आज इसका एक और इंटरेस्टिंग एंगल आपको बताता हूं, मीडिया को जो चाहिए, वो तो इसमें नहीं होगा शायद, लेकिन हो सकता है कि कुछ काम में आ जाए। और मैं पक्का मानता हूं, जो बात मैं कहने जा रहा हूं, आपने भी इसके बारे में विचार नहीं किया होगा। क्या आपने कभी सोचा है कि आज इतने सारे विकसित देशों के साथ फ्री-फ्री ट्रेड डील्स हो रहे हैं, क्या यही काम 2014 से पहले क्यों नहीं हो पाए? देश वही, युवा शक्ति वही, सरकारी सिस्टम वही, तो बदला क्या? बदलाव, सरकार के विजन में आया है, नीति और नीयत में बदलाव आया है, भारत के सामर्थ्य में बदलाव आया है।

साथियों,

आप ज़रा सोचिए, फ्रेजाइल फाइव इकोनॉमी जब थी, तब कौन हमारे साथ डील करता? गांव में भी गरीब की बेटी को कोई रईस के परिवार वाला शादी करता है क्या? वो उसको छोटा मानता है, हमारा भी यही हाल था भाई दुनिया में। जब देश पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा था, चारों तरफ घोटाले और घपले थे, तब कौन भारत पर भरोसा कर पाता? 2014 से पहले भारत में मैन्युफैक्चरिंग का बेस बहुत कमजोर था और जिसके कारण, पहले की सरकारें भी डरती थी, एक तो कोई आता नहीं था और जरा सा भी कोई कोशिश करें, तो यह लोग भी डरते थे और डर यह था कि अगर विकसित देशों के साथ डील हो गई, तो वो हमारे बाजार पर कब्जा कर लेंगे, वो यहां अपने प्रोडक्ट डंप करने लगेंगे, हताशा-निराशा के उस माहौल में 2014 से पहले यूपीए सरकार सिर्फ चार देशों के साथ ही कॉम्प्रिहेंसिव ट्रेड एग्रीमेंट कर पाई थी। जबकि, बीते दशक में भारत ने जो ट्रेड डील्स की हैं, उनमें दुनिया के 38 कंट्री कवर होते हैं, 38 कंट्री। और यह दुनिया के अलग-अलग रीजन्स में हैं। आज हम इसलिए दुनिया के साथ ट्रेड डील्स कर रहे हैं क्योंकि आज का भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। आज का भारत, दुनिया के साथ कंपीट करने के लिए तैयार है। बीते 11 वर्षों में भारत ने मैन्युफैक्चरिंग का एक मजबूत इकोसिस्टम देश में विकसित किया है। इसलिए, आज भारत समर्थ है, सशक्त है और इसलिए दुनिया भी हम पर भरोसा करती है। यही बदलाव हमारी Trade Policy में आए Paradigm Shift का आधार बने और यही Paradigm Shift विकसित भारत की हमारी यात्रा का अनिवार्य स्तंभ बना है।

साथियों,

आज हमारी सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ देश के हर नागरिक को विकास में सहभागी बनाते हुए कार्य कर रही है। जो विकास की दौड़ में पीछे छूट गया, हम उसके विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं। पहले की सरकारों ने दिव्यांग जनों के लिए सिर्फ घोषणाएं कीं, हम भी उसी रास्ते को जारी रख सकते थे, लेकिन ये सरकार की संवेदनशीलता का उदाहरण है। आप में से शायद जो बातें मैं बता रहा हूं, आप जिस लेवल के लोग हैं, शायद उसमें फिट नहीं बैठती होगी। हमारे दिव्यांग जनों के लिए जैसे हमारे यहां Language में बिखराव है ना, Sign Language का भी वही हाल था जी। तमिलनाडु में जाओ तो एक Sign Language, उत्तर प्रदेश में जाओ तो दूसरी, गुजरात में जाओ तो तीसरी, असम में जाओ तो चौथी, अगर यहां का दिव्‍यांग असम गया, तो बेचारा समझ ही नहीं पाता था। अब यह कोई बड़ा काम तो नहीं था। अगर संवेदनशील सरकार होती है ना, तो उसको यह काम छोटा नहीं लगता है। और देश ने पहली बार Indian Sign Language को institutionalise किया, common किया, व्यवस्था बनाई है। ऐसे ही, देश की Transgender community कब से अपने अधिकारों के लिए लड़ रही थी। हमने उनके लिए भी कानून बनाकर उन्हें सम्मान से जीने का कवच दिया है। बीते दशक में ही देश की करोड़ों बहनों को तीन-तलाक की कुरीति से मुक्ति मिली, लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण पक्का हुआ।

साथियों,

आज सरकारी मशीनरी की सोच भी बदली है, उसमें संवेदनशीलता आई है। सोच का अंतर क्या होता है, यह हम जरूरतमंदों को मुफ्त अनाज देने वाली स्कीम में भी देखते हैं। विपक्ष के कुछ लोग हमारा मजाक उड़ाते हैं और कुछ अखबारों में जरा छपता भी ज्यादा है। कोई मजाक उड़ाता है कि जब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकल ही गए हैं, तो उनको मुफ्त राशन क्यों मिलता है? अजीबोगरीब सवाल है। अगर आप बीमार हैं, अस्पताल में गए और अस्पताल से आपको छुट्टी मिली, तो भी डॉक्टर कहता है कि सात दिन तक यह-यह संभालना, पंद्रह दिन तक यह-यह संभालना, कहता है कि नहीं कहता है? गरीबी से बाहर निकले हैं, लेकिन यह सवाल पूछ रहे हैं कि निकले हैं, तो फिर अनाज क्यों देते हो? ऐसी संकीर्ण मानसिकता वाले लोग, यह नहीं सोचते कि सिर्फ गरीबी से बाहर निकालना काफी नहीं होता, बल्कि जो व्यक्ति नियो मिडिल क्लास में आया है, वो फिर गरीबी के चंगुल में न फंस जाए, यह भी सुनिश्चित करना पड़ता है। इसलिए उसे आज अनाज मुफ्त की सुविधा मिल रही है, यह आवश्यक है। बीते वर्षों में केंद्र सरकार ने इस योजना पर लाखों करोड़ रुपए खर्च किए हैं, इससे गरीब और नियो मिडिल क्लास को बहुत बड़ा संबल मिला है।

साथियों,

सोच का एक और फर्क हम अपने आसपास भी देखते हैं। कुछ लोग हैं, जो कहते हैं कि ये मोदी 2047 की बात क्यों करता है? 2047 में विकसित भारत बनेगा, नहीं बनेगा, किसने देखा? हम रहें या ना रहें, उससे हमारा लेना देना क्या है? अब देखिए, यह सोच है और यह बड़े-बड़े लोगों की सोच है, यह कोई मैं अपने शब्द नहीं बता रहा हूं।

साथियों,

जिन लोगों ने आजादी के लिए लड़ाई लड़ी, लाठियां खाईं, कालापानी की सज़ाएं पड़ी, फांसी के तख्त पर चढ़ गए, अगर वो भी यही सोचते कि आजादी पता नहीं कब मिले, हम क्यों आज आजादी के लिए लाठी खाएं, तो सोचिए, क्या उस सोच के साथ देश कभी आजाद हो पाता क्या? जब राष्ट्र प्रथम का भाव हो, जब देश हित सर्वोपरि हो, तो हर निर्णय देश के लिए होता है, हर नीति देश के लिए बनती है। हमारी सोच स्पष्ट है, विजन साफ है, हमें देश को विकसित बनाने के लिए निरंतर काम करना है। 2047 तक हम रहें न रहें, लेकिन यह देश रहेगा, इस देश की संतानें रहेंगी। इसलिए हमें और इसलिए हमें अपना आज खपाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों का कल सुरक्षित रहे, उज्ज्वल रहे। मैं आज अपनी आज बो रहा हूं क्योंकि कल की पीढ़ी को फल खाने को मौका मिले।

साथियों,

दुनिया को अब डिसरप्शन के साथ जीने के लिए तैयार रहना होगा। समय के साथ इनके नेचर में बदलाव आएगा, लेकिन यह तय है कि अब व्यवस्थाएं बहुत तेजी से बदलेंगी। AI से जो Disruption हो रहे हैं, वो तो आप देख ही रहे हैं। आने वाले समय में AI और भी क्रांतिकारी बदलाव लेकर आने वाली है, भारत इसके लिए भी तैयार है। कुछ ही दिनों में भारत में ग्लोबल AI इम्पैक्ट समिट होने जा रही है। दुनिया के अनेक देश, दुनियाभर के टेक लीडर्स, इस समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं। सभी के साथ मिलकर, हम एक बेहतर विश्व बनाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे। इसी भरोसे के साथ, एक बार फिर इस Summit के लिए आप सभी को बहुत सारी मेरी शुभकामनाएं।

बहुत-बहुत धन्यवाद!

वंदे मातरम!