भारत की आध्यात्मिक जागृति के पीछे इसकी सभ्यता की दीर्घकालिक लोकनीति है: प्रधानमंत्री
भारत जैसे विशाल देश के लिए ‘अध्यात्म’ देश की ताकत है: प्रधानमंत्री मोदी
राजा राम मोहन राय, ईश्वर चंद्र विद्यासागर भारतीय समाज में सुधार के प्रमुख उदाहरण: प्रधानमंत्री

पश्चिम बंगाल के राज्‍यपाल श्रीमान केसरी नाथ जी त्रिपाठी, त्रिपुरा के राज्यपाल, श्रीमान तथागत राय, केन्द्र में मंत्री परिषद में मेरे साथी श्रीमान बाबुल सुप्रियो जी, पश्चिम बंगाल के मंत्री श्रीमान हकीम जी, गौड़िया मिशन अध्‍यक्ष श्रीमंत भक्ति शौर्य परिराज गोस्वामी महाराज जी, मायापुर से चैतन्य मठ के आचार्य, श्रीमंत भक्ति प्रज्ञानज्योति महाराज जी, भजन कुटीर वृंदावन के आचार्य श्रीमान भक्ति गोपनन्द बोन महाराज जी, देवानन्द गौड़िया मठ के आचार्य श्रीमंत भक्ति वेदांत प्रजाटक महाराज जी, गौड़िया मिशन के सचिव भक्ति सुंदर सन्यासी महाराज जी, गौड़िया संघ के आचार्य श्रीमत भक्ति प्रसून साधू महाराज, नई दिल्ली के पहाड़गंज से गौड़िया मठ के भक्ति विष्णु विचार विष्णु महाराज जी, श्यामवेदी गौड़िया मठ विजयवाड़ा के प्रभारी भक्ति, विदभगता भागवत महाराज जी और विशाल संख्या में पधारे हुए गौड़िया मठ के सभी अनुयायी भक्तजन।

कुछ समय पहले महाराज जी मेरे पास आए थे। उनका आग्रह था कि शताब्‍दी वर्ष का समारोह है, आप उसमें आइए। मेरा ये बड़ा सौभाग्य है कि मुझे इस महान परम्परा के सभी प्रतिनिधियों का एक साथ दर्शन करने का मुझे सौभाग्य मिला है। भारत दुनिया के लोगों को एक अचरज रहा है क्या कारण है इतने घाव और इतने आघातों के बाद भी यह देश आज भी खड़ा है। इस जहां से पता नहीं कौन-कौन मिट गए सारी हम कविताएं पढ़ते रहते हैं। क्या बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी। काल के प्रहारों के बीच वो ही टिक पाता है, जिसके भीतर एक अंतर्भुत आत्मिक शक्ति होती है। इस विशाल भारत की अंतर्भुत आत्मिक शक्ति तो उसका अध्यात्म है। शायद दुनिया में ऐसी आध्यात्मिक परम्परा कहीं नजर नहीं आएगी, जहां पर इस महान विचार को मानने वाले, स्वीकार करने वाले, इतनी विविधताओं से भरे हुए हों। ये समाज इतना विशाल है, व्यापक है, गहन है, गहरा है कि जहां मूर्ति पूजा को मानने वाला भी उसका गौरव गान करता है और मूर्ति पूजा का घोर विरोध करने वाला भी उसकी प्रशंसा करता है।

जो साकार को स्वीकार करता है वो भी इस राह पर चलता है, जो निराकार को समर्पित है वो भी उसी प्रकार से चल रहा है। जो परमात्मा की पूजा करता है वो भी इसे शिरोधार्य मानता है। जो प्रकृति की पूजा करता है वो भी इसे शिरोधार्य मानता है। और ऐसी कौन सी ताकत है? वो ताकत पूजा पाठ सिर्फ नहीं है, सिर्फ ग्रंथ नहीं है, सिर्फ वाणी नहीं है। वो ताकत हमारी आध्यात्मिक चेतना में है। हम सम्प्रदायों से बंधे हुए लोग नहीं हैं। समय रहते सम्प्रदाय आते हैं, जाते हैं, पंथ और परम्पराएं विकसित होती हैं। लेकिन हम अध्यात्मता के एक अटूट नाते के साथ जुड़े हुए लोग हैं और वही शक्ति है, जो हमें सतकर्म की ओर प्रेरणा देती है। चैतन्य महाप्रभू भक्ति के प्रणेता थे। भक्ति युग के पुरोधा थे। भक्त बनना आसान नहीं होता है। हाथ में माला है। मुंह में ईश्वर का जाप है। इतने मात्र से दुनिया की नजर में तो हम भक्त बनते हैं। लेकिन भक्त बनना है, तो भक्त वही होता है, जो विभक्त नहीं होता। जहां मुझ में और मुझ को बनाने वाले के बीच कोई विभक्त नहीं है। मैं और वो दोनों ही एकरूप हैं, तब मैं भक्त बनता हूं और चैतन्य महाप्रभु भक्त थे। जहां कोई विभक्त को स्थान नहीं था, वे कृष्ण में डूबे हुए थे। कृष्ण उनमें समाहित हो चुका था और तब जाकर के ये भक्ति आंदोलन खड़ा होता है। भारत की विशेषता रही है कि अनेक आक्रांत आए, शासकीय व्यवस्थाओं में जय-पराजय की घटनाएं घटती रही। अत्याचार, जुल्म चलते रहे। लेकिन उसके बावजूद भी देश की आध्यात्मिक धारा को खरोंच तक नहीं आई।

अगर हम भारत के आजादी के आंदोलन को देखें तो आजादी की लड़ाई लड़ने वाले महापुरुष हमारे सामने आते हैं। उनका बलिदान, उनका त्याग, तपस्या को कोई कम नहीं आंक सकता है। लेकिन इस बात को हम भूल नहीं सकते कि भारत के आजादी के आंदोलन की पीठिका अगर किसी ने तैयार की थी, तो इस भक्ति आंदोलन ने की थी। चाहे चैतन्य महाप्रभू हों, चाहे आचार्य शंकर देव हों, चाहे तिरुवल्लुवर हों, चाहे बश्वेश्वर हों। अनगिनत ऐसे संत पुरुषों, ऐसे भक्ति मार्गी आध्यात्मिक चेतना से भरे हुए दिव्यांश ऐसे हमारे महात्मा, जिन्होंने भक्ति आंदोलन के माध्यम से भारत की उस आध्यात्मिक धारा को सदा-सर्वदा चेतनमंत रखा। उसको खरोंच तक नहीं आने दी और उसके स्वाभिमान को टिकाए रखा उसके सत्व को टिकाए रखा। और तभी जाकर के जब आजादी के आंदोलन ने विराट रूप लिया, तो ये ताकत उसके साथ एक बहुत बड़ी पीठिका के रूप में काम आ गई।

कभी-कभी हम लोग यहां वैष्णव आंदोलन की चर्चा कर रहे हैं। लेकिन जब हम ‘वैष्‍णव जन तो तेने रे कहिये’ ये जब गाते हैं या सुनते हैं, हम में से कभी किसी को विचार नहीं आया होगा कि जो ‘वैष्‍णव जन तो तेने रे कहिये’ मैं गा रहा हूं जिसको मैं सुनता हूं तो मुझे परिचित लगता है। वो किस भाषा में लिखा गया है। ये सवाल कभी किसी के मन में उठा नहीं है। यहां बैठे हुए लोगों को भी मैं दावे से कहता हूं आपके मन में भी ‘वैष्‍णव जन तो तेने रे कहिये’ ये सुनने के बाद कभी ये सवाल नहीं उठा होगा कि किस भाषा में लिखा गया है? कहने का तात्पर्य यह है कि उसके भाव के साथ हम इतने घुल-मिल गये हैं, उसमें हम इतने विलीन हो चुके हैं कि भाषा हमारे लिए कारण नहीं रही है। भाव ही हैं जो हमें प्रेरणा देते रहते हैं। और ये ‘वैष्‍णव जन तो तेने रे कहिये‘ उसी काल में लिखा गया जब चैतन्य महाप्रभू जिस आंदोलन को चलाते थे, गुजरात की धरती पर नरसिंह मेहता, अस्‍पृश्‍यता के खिलाफ लड़ाई लड़ते थे। और उन्होंने गीत लिखा और महात्मा गांधी को बहुत प्रिय था। लेकिन मैंने कुछ उसमें छेड़छाड़ करने कोशिश की थी कभी। हक़ तो नहीं है मुझे। सैंकड़ों साल पहले जो महापुरुष पैदा हुए, उन्होंने जो बात कही उसको हाथ लगाने का हक़ तो नहीं है, लेकिन लोगों को समझाने के लिए मुझे सरल रहता था। तो मैं कभी उसका उपयोग करता था पहले। मैं कहता था ‘वैष्‍णव जन तो तेने रे कहिये जो पीर पराई जाने रे, पर दुखे उपकार करे तोहे मन अभिमान ना आने रे।‘ तो मैंने कहा कि जो आज जनप्रतिनिधि हैं ये वैष्‍णव जन की जगह प्रतिनिधि शब्द लिख देना चाहिए। ‘जनप्रतिनिधि तेने रे कहिए जो पीड़ पराई जाने रे, पर दुखे उपकार करे तोहे मन अभिमान ना आने रे।‘ वाछ-काछ मन निश्चल राखे, पर धन नवजाले हाथ रे।‘ यानी चार सौ साल पहले भी करप्‍शन की चिंता थी। पर धन नवजाले हाथ रे, लोक प्रतिनिधि तो तेने रे कहिए। वैष्‍णव की बात नरसिंह मेहता जी की बात गांधी जी को क्यों इतनी प्यारी लगी होगी तो मुझे उसके एक-एक शब्द में ताकत नजर आती है। और कृष्णा एक ऐसा विराट रूप, न जाने कितना कुछ लिखा गया है। न जाने कितना कुछ कहा गया है। उसमें शास्त्र की भी अनुभूति होती है और शस्त्र का भी अहसास होता है। कोई ऐसा व्यक्तित्व जिसके हर रूप को भक्त पसंद करते हों और हर रूप की अलग भक्त धारा हो। कुछ लोग हैं जिनको मक्खन चोरी करने वाला ही कन्हैया प्यारा लगता है। तो कुछ लोग हैं जिनको सुदर्शनधारी से नीचे कृष्ण अच्छा नहीं लगता है। उनको तो सुदर्शन चक्रधारी चाहिए। और कुछ लोग हैं जो बांसुरी बजाने वाला, राधा के साथ गोपियों के साथ रास करने वाला कृष्ण पसंद आता है। कितनी विविधता है कितने स्वरूप और हर किसी को मानने वाला एक तबका एक जीवन की ऐसी प्रेरणा दे सकता है, उसका हम अंदाज कर सकते हैं और जिस गीता की रचना हुई, शायद विश्व में ऐसी कोई रचना नहीं है, जो युद्ध भूमि में रची गई हो। यानी निर्लिप्‍त जीवन क्या होता है अपने पास पड़ोस में क्या चल रहा है, उससे भी परे एक व्यक्तित्व की ऊंचाई क्या होती है कि जहां युद्ध होता हो, अपने मरते हों अपने को मरते देखते हो और उस समय एक शास्त्र का सृजन होता हो ये कौन सी ताकत होगी कि जो युद्ध भूमि में पैदा हुई और इसलिए और युद्ध के समय भी जहां जय और पराजय के संघर्ष के बावजूद भी अलिप्तता की चर्चा जिस संदेश में कही गई हो। गीता का संदेश वो ताकत तो देता है। और उस अर्थ में गौड़िया मिशन के द्वारा वैश्णव परम्परा को जीवित रखते हुए और आखिर ये परम्परा जैसा अभी महाराज जी बता रहे थे। दरीद्र नारायण की सेवा, ‘सेवा परमो धर्मः’ यही तो हमारा जीवन का उद्देश्य रहा होना चाहिए। जो औरों के लिए जीना जानता है। जो औरों के लिए अपने आपको आहूत करना जानता है। जो औरों के लिए अपने आपको खपाना जानता है। और हमारे देश के महान महापुरुषों की सारी माला देख लें, उस माला में यही तो संदेश है। हम कभी-कभी एक चिंतन सुनते हैं दुनिया में Live and let Live ‘जिओ और जीने दो।‘ ये देश उससे एक कदम आगे है। ये कहता है जिओ और जीने दो और अगर उसके जीने की क्षमता नहीं है, तो उसको जीने के लिए मदद करो। गुजराती में बहुत अच्छा शब्द है ‘जीवो अने जिवाड़ो।‘ औरों को जीने के लिए हम जो कुछ भी कर सकते हैं करें। सिर्फ उसको उसके नसीब पर न छोड़ें। इस महान विचार और चिंतन को लेकर के हम निकले हुए लोग हैं और वैष्‍णव एक प्रकार से विश्व को अपने-आप में समाने की बात करता है। ‘वसुधैव कुटम्बकम’ ये मंत्र उसी बात का परिचायक है कि जिसमें पूरे ब्रह्माण्ड को अपने में समाने की चर्चा होती है। ऐसी इस महान परम्परा को मैं प्रणाम करता हूं। दुनिया में समय रहते व्यक्ति में जैसे दोष आते हैं, व्यवस्था में जैसे दोष आते हैं, वैसे समाज में भी दोष आते हैं, बहुत सी पुरानी बातें समाज के लिए कालबाह्य होती है। और कभी-कभी उसको लेकर के चलना समाज के लिए बोझ बन जाता है। समाज के लिए संकट बन जाता है। लेकिन बहुत कम समाज ऐसे होते हैं कि जहां अपने अंदर आ रही बीमारियों को पहचान पाएं, अपने अंदर आ रही बुराइयों के खिलाफ आवाज़ उठाने की हिम्मत करें और समाज में भी ऊंचाई देखिए कि समाज के भीतर घुसी हुई बुराइयों के खिलाफ लड़ने वालों को समाज आध्यात्मिक रूप में स्वीकार करता है, उनकी पूजा करता है। भारत में हर सदी में आपने देखा होगा कि समाज की कोई न कोई बुराई के खिलाफ हिन्दू समाज में से ही कोई सुधारक पैदा हुआ। उसने उस समाज को रोका, टोका, बुराइयों से बचने के लिये निकलने के लिए कहा और प्रारंभ में उसको सहना पड़ा। यही तो बंगाल की धरती है। राजा राममोहन राय सती प्रथा के खिलाफ इतनी बड़ी लड़ाई लड़े। ईश्वर चंद विद्यासागर समाज की बुराइयों के प्रति कितनी जागरूकता लाए थे। ये हमारी सदियों पुरानी परम्परा रही है कि हर कालखंड में जब-जब समाज में विकृति आई, समाज में दोष आए बुराइयां आईं। कोई न कोई महापुरुष निकला, इसी समाज में से निकला और उसने समाज को कोसा, डांटा, सुधारने का प्रयास किया और समाज ने उसको महात्मा के रूप में स्वीकार किया, महापुरुष के रूप में स्वीकार किया। दोनों तरफ ताकत नजर आती है। जो समाज सुधार को स्वीकार नहीं करता है। जो समाज कालबाह्य बोझ से मुक्ति पाने का सामर्थ्‍य नहीं रखता है, वो समाज कभी टिक नहीं सकता, जी नहीं सकता, न कभी प्राणवान अवस्था में रह सकता है। एक मुर्दे की तरह वो समय बिताता है।

हमारे समाज में हर कालखंड में, हर भू-भाग में बुराइयों के खिलाफ लड़ने वाले चैतन्य पुरुष मिले हैं हमें। और यही तो हमारी ताकत है। इसी ने तो इस समाज को चैतन्यवत रखा है। और इसलिये गौड़िया संगठन, गौड़िया मिशन को शताब्‍दी का पर्व एक प्रकार से सामाजिक सुधार के आंदोलन की शताब्‍दी है। समाज में भक्ति चेतना जगाने के आंदोलन की शताब्‍दी है। समाज में ‘सेवा परमो धर्म’ को साकार करने का संस्कार अविरत चलाए रखने का, प्रज्जवलित रखने का उस महान कार्य की शताब्‍दी है। ऐसी महान व्यवस्था को, महान परम्परा को इन सभी संतो, महंतो की जिन्दगी को, जिसके कारण ये सतत् परम्परा चली है, मैं आदर पूर्वक नमन करता हूं। चैतन्य महाप्रभू का पुण्य स्‍मरण करता हूं। इस महान परम्परा के सभी योगी पुरुषों का मैं नमन करता हूं। आप सब का बहुत-बहुत धन्यवाद।

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भारत-इटली संयुक्त घोषणा
May 20, 2026

इटली गणराज्य की मंत्रिपरिषद की अध्यक्ष (प्रधानमंत्री) जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर, भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 19-20 मई 2026 को इटली की आधिकारिक यात्रा की। यह यात्रा जून 2024 में जी7 शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री मोदी की इटली यात्रा और 2023 में जी20 शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री मेलोनी की भारत यात्रा के बाद हुई, जिसने द्विपक्षीय संबंधों को नई गति प्रदान की। दोनों नेताओं ने भारत-इटली संबंधों को “विशेष रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया।

राजनीतिक संवाद

दोनों प्रधानमंत्रियों ने उच्च स्तरीय आदान-प्रदान की शानदार प्रगति का स्वागत किया और बहुपक्षीय आयोजनों के इतर बैठकों समेत नेताओं की वार्षिक बैठकें आयोजित करने के साथ-साथ नियमित मंत्रिस्तरीय और संस्थागत-स्तरीय बैठकें करने पर सहमति जताई।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने नवंबर 2024 में रियो डी जेनेरियो में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान अपनी बैठक में दोनों नेताओं द्वारा अपनाई गई 'संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-2029' के विभिन्न स्तंभों में हासिल की गई ठोस प्रगति की सराहना की। दोनों नेताओं ने भारत-इटली संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-29 की समीक्षा और विशेष रणनीतिक साझेदारी को रणनीतिक दिशा देने के लिए विदेश मंत्रियों के नेतृत्व में एक तंत्र (मैकेनिज्म) स्थापित करने पर सहमति जताई।

आर्थिक सहयोग और निवेश

दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय आर्थिक और औद्योगिक सहयोग की बढ़ती गतिशीलता पर संतोष व्यक्त किया, जिसके तहत पिछले वर्ष से अब तक तीन उच्च स्तरीय व्यापार मंच (बिजनेस फोरम) आयोजित किए जा चुके हैं। भारत के तीव्र एवं सतत आर्थिक विकास से पैदा होने वाले अवसरों और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के लिए वार्ताओं के सफल समापन के आधार पर, दोनों पक्षों ने 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक पहुंचाने के साझा लक्ष्य की फिर से पुष्टि की।

दोनों नेताओं ने प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय निवेश में हुई वृद्धि का स्वागत किया और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित करने के लिए उद्योगों को औद्योगिक और तकनीकी साझेदारियां बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने विशेष रूप से वस्त्र, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों (क्लीन टेक), सेमीकंडक्टर, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा, पर्यटन, फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा प्रौद्योगिकियों, डिजिटल प्रौद्योगिकियों, महत्वपूर्ण कच्चे माल, इस्पात, बंदरगाहों और बुनियादी ढांचे में अधिक निवेश की संभावनाओं का स्वागत किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने उद्योगों को दोनों देशों में लागू नीतिगत प्रोत्साहनों और योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया, जो व्यापारिक संबंधों और उत्पादन सुविधाओं को बढ़ाने का प्रयास करती हैं।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने शेयर बाजारों, निवेश कोषों, वेंचर कैपिटल, बैंकों, बीमा कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के बीच संवाद और सहयोग को प्रोत्साहित करने पर सहमति जताई।

उन्होंने आपूर्ति श्रृंखलाओं के मजबूत एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए लघु एवं मध्यम उद्योगों के बीच औद्योगिक साझेदारी को सुगम बनाने पर सहमत व्यक्त की। दोनों नेताओं ने आने वाले महीनों में आपसी हित के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में नए क्षेत्रीय मिशनों को प्रोत्साहित किया।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने 'क्रिटिकल मिनरल्स' यानि महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने सतत विकास और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं पर विशेष ध्यान देते हुए महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने चक्रीय अर्थव्यवस्था की पहलों के एक अभिन्न अंग के रूप में, ई-कचरे और खनन अवशेषों जैसे असामान्य स्रोतों से महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति में संयुक्त प्रयासों को बढ़ावा देने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कृषि और कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में संबंधित मंत्रालयों और संस्थानों के बीच सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का भी स्वागत किया।

कनेक्टिविटी

दोनों प्रधानमंत्रियों ने 'भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे' (IMEC) पर सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और इसे वैश्विक व्यापार, संपर्क और समृद्धि को नया स्वरूप देने वाली परिवर्तनकारी पहल बताया। परियोजना पर प्रारंभिक चर्चाओं की सराहना करते हुए दोनों नेताओं ने 2026 में आयोजित होने वाली पहली आईएमईसी मंत्रीस्तरीय बैठक में ठोस कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।

उन्होंने नौवहन और बंदरगाहों पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया और अपने संबंधित मंत्रालयों/विभागों को जल्द से जल्द इस समझौता ज्ञापन को लागू करने के लिए एक संयुक्त कार्य समूह स्थापित करने का निर्देश दिया।

विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्टार्टअप और कृत्रिम बुद्धिमत्ता

दोनों प्रधानमंत्रियों ने पुनः पुष्टि की कि नवाचार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी भारत-इटली साझेदारी के प्रमुख प्रेरक हैं।

उन्होंने भारत में स्थित “INNOVIT India” नामक नवाचार केंद्र की स्थापना की घोषणा की जिसका उद्देश्य दोनों देशों के नवाचार तंत्रों के बीच सहयोग को मजबूत करना, स्टार्टअप कार्यक्रमों, बाजार पहुंच, संयुक्त अनुसंधान, विश्वविद्यालय सहयोग और प्रतिभा गतिशीलता को बढ़ावा देना है। यह फिनटेक, स्वास्थ्य सेवा, सेमीकंडक्टर, लॉजिस्टिक्स, कृषि तकनीक, ऊर्जा, क्वांटम कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में कार्य करेगा। दोनों नेताओं ने अप्रैल 2025 में दिल्ली में आयोजित भारतीय और इतालवी विश्वविद्यालयों तथा अनुसंधान केंद्रों के बीच उद्घाटन 'विज्ञान और नवाचार संवाद' का स्वागत किया और इस वर्ष के अंत में इटली में इसके अगले संस्करण के आयोजन की उम्मीद जताई।

दोनों नेताओं ने एक खुले, स्वतंत्र, सुरक्षित, स्थिर, सुलभ और शांतिपूर्ण आईसीटी वातावरण के महत्व पर जोर दिया, जो नवाचार और आर्थिक विकास के लिए एक सक्षम कारक है। प्रधानमंत्री मोदी ने 19 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 'एआई इम्पैक्ट समिट' में इटली की रचनात्मक भागीदारी के लिए प्रधानमंत्री मेलोनी को धन्यवाद दिया। दोनों नेताओं ने मानव-केंद्रित, सुरक्षित, भरोसेमंद और मजबूत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। वे तीसरे देशों सहित इस क्षेत्र में सहयोग करने पर सहमत हुए।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने सुपरकंप्यूटिंग के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर विशेष जोर दिया।

2025–2027 वैज्ञानिक सहयोग कार्यकारी कार्यक्रम के आधार पर दोनों देशों ने संयुक्त परियोजनाओं के क्रियान्वयन तथा क्वांटम प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और सतत ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्रों में शोधकर्ताओं की आवाजाही को सुगम बनाने का समर्थन किया। उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन के जारी क्रियान्वयन और अनुसंधान परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए संयुक्त प्रस्ताव आमंत्रण शुरू किए जाने का भी स्वागत किया।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारतीय शिक्षा जगत और ट्राएस्टे स्थित 'इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल फिजिक्स' (आईसीटीपी) के बीच लंबे समय से चले आ रहे वैज्ञानिक सहयोग को स्वीकार किया और भारतीय वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा इटली के ट्राइएस्टे स्थित एलेट्रा सिंक्रोट्रोन केंद्र के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। यह भारतीय शोधकर्ताओं के लिए एलेट्रा की सिंक्रोट्रोन रेडिएशन सुविधा तक पहुंच से संबंधित गतिविधियों के समर्थन हेतु किया गया है।

अंतरिक्ष

इतालवी अंतरिक्ष एजेंसी (एएसआई) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के बीच चल रहे सहयोग की सराहना करते हुए, दोनों नेताओं ने पृथ्वी अवलोकन (अर्थ ऑब्जर्वेशन), हेलियोफिज़िक्स और अंतरिक्ष अन्वेषण पर साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति जताई जिसमें केंद्रित विषयगत जुड़ाव शामिल है। साथ ही अंतरिक्ष तक पहुंच और अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे के संरक्षण पर सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर भी सहमति बनी। उन्होंने अपने संबंधित अंतरिक्ष उद्योग प्रतिनिधिमंडलों की हालिया पारस्परिक यात्राओं पर संतोष जताया और तीसरे देशों में भी विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और संयुक्त पहलों के माध्यम से वाणिज्यिक सहयोग को बढ़ावा देने की उम्मीद जताई।

रक्षा

दोनों प्रधानमंत्रियों ने मंत्रिस्तरीय आदान-प्रदान, सेनाओं के बीच संबंधों, बंदरगाह दौरों सहित रक्षा सहयोग मजबूत होने पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने संयुक्त आशय घोषणा और रक्षा औद्योगिक रोडमैप को अपनाने का स्वागत किया, जो तकनीकी सहयोग, सह-उत्पादन और सह-विकास परियोजनाओं के लिए साझेदारी को बढ़ावा देगा। इनमें हेलीकॉप्टर, नौसैनिक प्लेटफॉर्म, समुद्री हथियार प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली शामिल हैं। उन्होंने औद्योगिक मजबूती के माध्यम से महत्वपूर्ण अवसंरचना और उससे जुड़ी आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा के महत्व को भी स्वीकार किया।

दोनों पक्ष संयुक्त रक्षा समिति और सैन्य सहयोग समूह के काम के पूरक के रूप में एक वार्षिक उच्च स्तरीय सैन्य संरचित संवाद स्थापित करने की व्यवहार्यता की जांच करने और संयुक्त अभ्यास तथा अंतर-बल पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने पर सहमत हुए।

दोनों नेताओं ने समुद्री सुरक्षा सहयोग, समन्वय और समुद्री क्षेत्र में सूचनाओं तथा सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ाने के उद्देश्य से समुद्री सुरक्षा संवाद शुरू करने पर सहमति व्यक्त की।

सुरक्षा

दोनों नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद सहित सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद की कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की और आतंकवादियों, आतंकवादी समूहों और उनके सहयोगियों, जिनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 1267 प्रतिबंध व्यवस्था में सूचीबद्ध लोग शामिल हैं, के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने सभी देशों से वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) के दिशानिर्देशों के अनुरूप, आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों और बुनियादी ढांचे को खत्म करने, आतंकवादी नेटवर्क को रोकने और आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने के लिए काम जारी रखने का आह्वान किया। दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र, एफएटीएफ और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

दोनों नेताओं ने आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने के लिए भारत और इटली के बीच स्थायी टास्क फोर्स की पहली बैठक तथा आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह की आगामी बैठक का स्वागत किया।

दोनों नेताओं ने इटली की 'गार्डिया डी फिनान्ज़ा' और भारत के 'प्रवर्तन निदेशालय' (ईडी) के बीच एक समझौता ज्ञापन के संपन्न होने का स्वागत किया और वर्गीकृत सूचनाओं के आदान-प्रदान और पारस्परिक संरक्षण पर समझौते तथा पुलिस सहयोग को मजबूत करने पर समझौते के शीघ्र संपन्न होने की उम्मीद जताई। उन्होंने प्रत्यर्पण संधि और पारस्परिक कानूनी सहायता संधि समेत अन्य समझौतों पर चल रही चर्चाओं का भी स्वागत किया।

प्रवासन और गतिशीलता

दोनों नेताओं ने विशेष रूप से एसटीईएम क्षेत्रों में छात्रों, शोधकर्ताओं और कुशल कामगारों की आवाजाही बढ़ाने तथा श्रम बाजार की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास में सहयोग का विस्तार करने पर सहमति जताई। इसमें भारत से इटली जाने वाली नर्सों की आवाजाही को सुगम बनाने संबंधी विशेष संयुक्त आशय घोषणा भी शामिल है। इस संदर्भ में उन्होंने संबंधित एजेंसियों के बीच सामाजिक सुरक्षा समझौते (एसएसए) पर जारी चर्चाओं का स्वागत किया।

उन्होंने "आईसीआई- इटली कॉल्स इंडिया: ए यूनिवर्सिटी-एंटरप्राइज टैलेंट ब्रिज" पहल की शुरुआत का स्वागत किया, जिसका उद्देश्य इतालवी विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत भारतीय छात्रों की प्रतिभा को मार्गदर्शन, उपयुक्त अवसरों से जोड़ने और इतालवी उद्यमों में योग्य एकीकरण के ठोस रास्ते उपलब्ध कराकर बढ़ावा देना है।

उन्होंने सुरक्षित और कानूनी प्रवासन सुनिश्चित करने के लिए अनियमित प्रवासन, श्रम शोषण और मानव तस्करी के खिलाफ लड़ने के लिए सहयोग को मजबूत करने की संभावना पर भी चर्चा की।

संस्कृति और शैक्षिक आदान-प्रदान

दोनों नेताओं ने संस्कृति को द्विपक्षीय संवाद के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में रेखांकित किया और लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर के विकास में इटली की भागीदारी के संबंध में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया। उन्होंने 2026 में वेनिस कला बिएनले (वेनिस आर्ट बिएनले) में भारतीय राष्ट्रीय पवेलियन की सराहना की। दोनों नेताओं ने 2027 को “भारत और इटली के बीच संस्कृति और पर्यटन वर्ष” के रूप में मनाने की मंशा व्यक्त की। इसके तहत विभिन्न पहलों का व्यापक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा और भारत तथा इटली के प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों पर एक बड़े प्रदर्शनी आयोजन का मार्ग प्रशस्त होगा, जिसे दोनों देशों के संस्कृति मंत्रालय संयुक्त रूप से आयोजित करेंगे।

दोनों नेताओं ने संस्थाओं, विशेषज्ञों और रचनात्मक उद्योगों के प्रतिनिधियों को एक साथ लाने के लिए एक इटली-भारत सांस्कृतिक मंच के संगठन को प्रोत्साहित किया। दोनों नेताओं ने यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल भारतीय और इतालवी स्थलों के बीच ट्विनिंग कार्यक्रम (ट्विनिंग प्रोग्राम) की शुरुआत की सराहना की, जिसका उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और प्रबंधन में सहयोग को मजबूत करना है।

दोनों नेता दोनों देशों के बीच फिल्म और ऑडियो-विजुअल सहयोग को और विकसित करने पर सहमत हुए, जो उनके उद्योगों की ताकत और नवीन क्षमताओं तथा द्विपक्षीय सह-उत्पादन समझौते द्वारा प्रदान किए गए कानूनी ढांचे पर आधारित है।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने उच्च शिक्षा में सहयोग को मजबूत करने की अपनी मंशा दोहराई और उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान पर भारत-इटली रोडमैप को अपनाने का स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इटली के विश्वविद्यालयों और उत्कृष्ट संस्थानों को भारत की नई शिक्षा नीति के तहत भारत में अपने परिसर खोलने का निमंत्रण दिया।

भारत-यूरोपीय संघ संबंध

नेताओं ने 27 जनवरी 2026 को भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में सहमति व्यक्त किए गए नए संयुक्त भारत-यूरोपीय संघ व्यापक रणनीतिक एजेंडे और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की वार्ताओं के सफल समापन का स्वागत किया। यह समझौता बाजार पहुंच बढ़ाने, व्यापार बाधाओं को कम करने और विविधीकृत मूल्य श्रृंखलाओं तथा नए बाजार अवसरों के माध्यम से आर्थिक सुरक्षा और मजबूती को सुदृढ़ कर संबंधों को नई ऊंचाई देगा।

उन्होंने व्यापार, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और आर्थिक सुरक्षा में सहयोग के प्रमुख मंच के रूप में भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद को मजबूत करने के समर्थन की पुनर्पुष्टि की। नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी का स्वागत किया और गतिशीलता सहयोग में हुई प्रगति की सराहना की, जिसमें व्यापक गतिशीलता ढांचे पर समझौता ज्ञापन भी शामिल है।

बहुपक्षीय सहयोग

दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र को अधिक प्रतिनिधिक और वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने के लिए उसमें तत्काल सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।

दोनों नेताओं ने बहुपक्षवाद की रक्षा करने और नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र और जी20 सहित अन्य वैश्विक मंचों पर मिलकर काम करने के महत्व पर जोर दिया।

अफ्रीका को दोनों देशों द्वारा दी जाने वाली रणनीतिक प्राथमिकता को स्वीकार करते हुए, दोनों प्रधानमंत्रियों ने अफ्रीका में भारत की विकास साझेदारी और इटली की 'मैट्टेई योजना' के अनुरूप डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई), कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कनेक्टिविटी तथा बुनियादी ढांचे और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में अफ्रीकी भागीदारों के साथ त्रिपक्षीय पहलों में मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की।

नेताओं ने यूएनसीएलओएस सहित अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुरूप, एक स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण और समृद्ध भारत-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुनपुष्टि की। उन्होंने भारत-प्रशांत महासागर पहल के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और शैक्षणिक सहयोग स्तंभ में अपनी निरंतर साझेदारी की उम्मीद जताई।

दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया/मध्य पूर्व की स्थिति और उसके क्षेत्र तथा विश्व पर पड़ने वाले प्रभावों पर गहरी चिंता व्यक्त की। नेताओं ने 8 अप्रैल 2026 को घोषित युद्धविराम का स्वागत किया और पश्चिम एशिया/मध्य पूर्व में स्थायी शांति के लिए तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से नौवहन की स्वतंत्रता और वैश्विक आपूर्ति के सामान्य प्रवाह को फिर से शुरू करने का भी आह्वान किया।

दोनों नेताओं ने यूक्रेन में जारी युद्ध पर चिंता व्यक्त की, जो लगातार अत्यधिक मानवीय पीड़ा और नकारात्मक वैश्विक परिणामों का कारण बन रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुरूप संवाद और कूटनीति के माध्यम से यूक्रेन में व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति स्थापित करने के प्रयासों का समर्थन जारी रखने पर सहमति जताई।

निष्कर्ष

भारत-इटली विशेष रणनीतिक साझेदारी की प्रभावशाली वृद्धि और गहराते संबंधों को रेखांकित करते हुए दोनों नेताओं ने सभी क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तारित करने तथा प्रमुख वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर उच्चस्तरीय निकट परामर्श जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रधानमंत्री मोदी ने इटली की सरकार और वहां की जनता द्वारा गर्मजोशी से भरे स्वागत करने तथा शानदार आतिथ्य के लिए प्रधानमंत्री मेलोनी को धन्यवाद दिया और प्रधानमंत्री मेलोनी को पारस्परिक रूप से सुविधाजनक समय पर भारत आने का निमंत्रण दिया।