प्रधानमंत्री मोदी ने रवांडा में भारतीय समुदाय के साथ बातचीत की
भारतवंशी पूरी दुनिया पर अपनी छाप छोड़ रहे हैं और वे भारत के ‘राष्ट्रदूत’ हैं: पीएम मोदी
वर्षों से भारतीय समुदाय रवांडा में हाई कमीशन की स्थापना चाहता था, लंबे समय से की जा रही यह मांग पूरी की जाएगी ताकि आप भारत के साथ और घनिष्ठ रूप से जुड़ सकें: प्रधानमंत्री

नमस्ते, कैसे हैं। केम छो।

अभी हमारे High Commissioner बता रहे थे कि प्रधानमंत्री ने समय निकाला। हकीकत ये है कि आप लोगों ने मेरे लिए समय निकाला। क्‍योंकि ये कोई जगने का तो समय नहीं है। आप लोग कब से खाना खाकर सोने की तैयारी करते हो, लेकिन मेरे लिए आप जाग रहे हैं और इतनी देर रात यहां तक आए हैं और इतना ही नहीं, अड़ोस-पड़ोस के देशों से भी आए हैं। तो आपका ये प्‍यार, आपके आशीर्वाद, इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

जब स्‍टेडियम में बैठ करके क्रिकेट का मैच देखते हैं, तो बहुत पता नहीं चलता है कि बॉल कहां गया, लेकिन दूर घर में बैठ करके टीवी पर देखते हैं, हर चीज का पता रहता है बॉल कहां गया, बॉलर कहां गया, बैट्समैन कहां खड़ा है, उसका पैर कहां है, सब पता चलता है। इसलिए भारत में हम जो भी कुछ कर रहे हैं; भारत में रहने वालों को जितना पता होता है उससे ज्‍यादा वहां दूर रहने वालों को रहता है। हर बारीकी को उनको अंदाज होता है। और स्‍वाभाविक है दुनिया में कहीं पर भी हो भारतीय, भारत से आने वाली हर अच्‍छी खबर, उसको एक नई खुशी, नया उत्‍साह देती है।

क्‍या लगता है पिछले चार साल में आपका तजुर्बा कुछ बढ़ा है या ऐसा ही है? आपको लगता है भारत के पासपोर्ट की ताकत बढ़ गई है? अब आपको लगता होगा दुनिया में कहीं पर भी एयरपोर्ट पर उतरते हैं कहीं immigration काउंटर पर जाते होंगे और हिन्दुस्‍तानी हैं कहते ही अपनी आंख मिला करके कोई खुशी व्‍यक्‍त करता है के नहीं करता? पहले आप हाथ मिलाते तो ठीक है, अब मिलाते हैं तो छोड़ता ही नहीं है। बदल आया कि नहीं आया? ये बदल इसलिए आया है कि देश में बदल आया है, और देश बहुत तेज गति से प्रगति कर रहा है।

ये मोदी के कारण नहीं है, ये सवा सौ करोड़ हिन्‍दुस्‍तानियों के कारण है। आज कोई खिलाड़ी खेल में अगर दुनिया में जाकर भी गोल्‍ड मैडल ले आता है, उसमें मोदी ने कहां पसीना बहाया, लेकिन ये इसलिए संभव होता है कि मोदी ने आ करके selection process को इतना transparent किया है; तो सही व्‍यक्ति सही जगह पर जाता है और इसलिए गोल्ड मैडल लाता है।

पारदर्शिता के साथ जिसको जिसका हक है, वो अगर मिलता है तो वो कुछ कमाल करके दिखाता है। और सरकार का यही काम है और हमारा तो मंत्र है, ‘सबका साथ सबका विकास‘ और ये ‘सबका साथ सबका विकास’ के मंत्र की ताकत बहुत बड़ी है। और इसी में देश के हर व्‍यक्ति को लगता है कि अब देश को आगे बढ़ाने का मौका आया है और देश को आगे बढ़ाना हमारी जिम्‍मेदारी है।

अब पहले पता नहीं था कि टॉयलेट होना चाहिए? क्‍या इसके लिए मोदी के आने का इंतजार करना था क्‍या? घर में टॉयलेट होना चाहिए इसके लिए ये आदमी प्रधानमंत्री बनेगा ये इंतजार होता है क्या? लेकिन चलता है, होता है, कोई ध्‍यान देता नहीं था। अब बदल आ गया। इतने कम समय में आठ करोड़ टॉयलेट बन गए, लाखों गांव open defecation फ्री हो गए।

एक बार अगर काम करने के लिए तय करते हैं और हमारी कार्यशैली ऐसी हैं कि, ऐसा तो नहीं कि हिन्‍दुस्‍तान में समस्‍याएं नहीं हैं, समस्‍याएं हैं, लंबे कालखंड से हैं। लेकिन अब समस्‍याओं को गिनते रहेंगे कि चलो भाई हमें जितना समय मिला है, जितनी समस्‍याओं से देश को मुक्‍त कर सकते हैं, करें। अब आजादी के 70 साल के बाद भी 18 हजार गांव 18वीं शताब्‍दी में जी रहे थे, eighteen century में। बिजली नहीं थी किसी गांव में, हमने तय किया 1000 दिन में पहुंचाना है पहुंचा दिया। अभी भारत में चार करोड़ घर ऐसे हैं जिसमें घरों में बिजली नहीं है। हमने तय किया है समय सीमा तय है, एक साल में पहुंचाना है तो पहुंचाना है; पहुंचा देंगे, चैन से बैठेंगे नहीं।

समस्‍याओं के समाधान से विश्‍वास पैदा होता है। हर किसी को लगता है ये हो सकता है, ये हम कर सकते हैं। जब दुनिया में कहीं पर भी हिन्‍दुस्‍तान का नागरिक सुनता है कि भारत ने एक साथ 100 सेटेलाइट छोड़े, कितना गर्व होता है, अच्‍छा भई! एक साथ सौ सेटेलाइट! ये काम हिन्‍दुस्‍तान कर रहा है आज।

भारत ने अपनी एक ताकत दिखाई है, आज हिन्‍दुस्‍तान इतनी प्रगति कर रहा है, यहां जितने नागरिक हैं उससे ज्‍यादा मोबाइल फोन हैं। भारत आधुनिकता की ओर आगे बढ़ रहा है। जब हम आए थे तब दुनिया में हम 9 या 10 नंबर पर रहते थे इकोनॉमी में, अभी हम छह पर पहुंच गए। और पहली बार फ्रांस को पीछे छोड़कर आगे निकले हैं। और बहुत ही जल्‍द, 5, 4, 3 होंगे, देखिएगा।

आज दुनिया के सबसे तेज गति से, बड़ी economy में सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाला अगर कोई देश है तो उस देश का नाम हिन्‍दुसतान है। तो बहुत तेजी से देश प्रगति कर रहा है, विकास नई ऊंचाइयों को पार कर रहा है।

आप लोगों का मन करता है कि नहीं करता है, हिन्‍दुस्‍तान आने का? हर दो महीने में? वाह! अभी देखिए, इस 2019 में बहुत सारे मौके हैं। मैं समझ गया कि मैं जब 2019 के मौके कह रहा था तो आपकी नजर कहां थी। लेकिन मैं तो कुछ और कहना चाहता था।

2019 के जनवरी में, 22-23 जनवरी, काशी में बनारस में, हमारा अंतर्राष्‍ट्रीय प्रवासी भारतीय दिवस का कार्यक्रम है। दुनिया भर में जितने भारतीय हैं, वो दो साल में एक बार इकट्ठे होते हैं; इस बार काशी में है । और आपको मालूम है ना मैं काशी का प्रतिनिधि हूं। और इसलिए मैं जब निमंत्रण देता हूं तो स्‍पेशल निमत्रण बन जाता है।

तो एक तो उसका लाभ मिलना चाहिए; बहुत बड़ी संख्‍या में जाना चाहिए प्रवासी भारतीय दिवस में। दूसरा 2019, 14 जनवरी, मकर संक्रांति, प्रयागराज में कुंभ मेला शुरू हो रहा है। दुनियाभर के लोग कुंभ के मेले में आते हैं। तो काशी में प्रवासी भारतीय दिवस, फिर वहां से प्रयाग जा करके प्रयागराज में और फिर 26 जनवरी को दिल्‍ली में। और उसके पहले एक और कार्यक्रम है, 20-21 को अहमदाबाद में गुजरात में Vibrant Gujarat Global Investor Summit है। यानी एक पूरा पैकेज बना करके आप जा सकते हैं, VibrantSummit गुजरात के लिए, फिर वहां से बनारस, बनारस से प्रयागराज, प्रयागराज से दिल्‍ली; और उसके बाद रह जाना है तो मई तक रह जाइए। हम आपके लिए काम ढूंढ कर निकाल देंगे।

आप इतनी बड़ी मात्रा में आए, आपने आशीर्वाद दिए, शुभकामनाएं दीं, मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

मैं दुनियाभर में फैले हुए भारतीय समुदाय से यही कहूंगा कि हिन्‍दुस्‍तान आप पर गर्व करता है। दुनिया में जहां-जहां भारतीय गए हैं, उन्‍होंने भारतीयों का नाम रोशन करने का काम किया है, भारतीयों का गौरव बढ़ाने का काम किया है। और मैं आज राष्‍ट्रपति जी के साथ बैठा था। आते ही एयरपोर्ट से ही कार्यक्रम में चला गया था। तो राष्‍ट्रपति जी ने आपकी इतनी तारीफ की, यानी भारतीय समुदाय के लिए वो गर्व अनुभव करते थे, और ये जब मैं सुनता था मुझे इतना आनंद आ रहा था, पूरी मेरे हिन्‍दुस्‍तान से आने की पूरी थकान उतर गई। और एक बात उन्‍होंने बड़ी सटीक बताई, उन्‍होंने कहा कि हिन्‍दुस्‍तान के लोग यहां रहते हैं, वो हमारे देश की प्रगति में काफी कुछ contribute कर रहे हैं, अपना रोजी-रोटी कमाते हैं, लेकिन निरूपद्रवी है। उनकी तरफ से कोई तकलीफ ही नहीं होती है।

और दूसरा उन्‍होंने कहा, यहां जो भारतीय समाज रहता है उसकी विशेषता है वो यहां के सामाजिक काम में कोई-कोई मदद करते ही रहते हैं। यहां के लोगों की भलाई के लिए कुछ न कुछ करते हैं। देखिए ये जो आपके गुण हैं ना, इसी के कारण आपने लोगों का दिल जीता हुआ है। ये अपने-आप में एक बहुत बड़ी बात है कि जिस देश में हम आए हैं उस देश के लोग हमारे सेवा भाव से प्रभावित हैं, सेवा करने के हमारे स्‍वभाव से प्रभावित हैं।

कानून-नियमों का पालन करने वाली जिंदगी जीने वाले, किसी प्रकार का उपद्रव न करने वाले समाज के रूप में और ये खबर दुनिया भर से आती है जी। भारतीय समुदाय का ये व्‍यवहार दुनिया के किसी देश में किसी को अखरता नहीं है। अच्‍छे लगते हैं; भारतीय लोग लोगों को अच्‍छे लगते हैं। अनेक प्रकार से हर हिन्‍दुस्‍तानी दुनिया में जहां भी है वो राजदूत से भी बढ़ करके राष्‍ट्रदूत है।

जब मैंने आते ही आज आपकी तारीफ सुनी तो मेरी सारी थकान उतर गई, मुझे खुशी हुई और अब आपके दर्शन करने का मौका मिला तो और अच्‍छा लगा। मेरा आप सबको बहुत‍-बहुत धन्‍यवाद, आप यहां आए। बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

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प्रधानमंत्री की सेशेल्स की राजकीय यात्रा
June 28, 2026

27 से 29 जून 2026 तक सेशेल्स की अपनी राजकीय यात्रा के अंतर्गत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति महामहिम डॉ. पैट्रिक हर्मिनी ने आज माहे द्वीप के विक्टोरिया स्थित स्टेट हाउस में आधिकारिक वार्ता की।

वार्ता में द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा हुई, जिसमें दोनों नेताओं ने स्वास्थ्य, शिक्षा, क्षमता विकास, डिजिटल परिवर्तन, सतत् विकास, सामाजिक अवसंरचना, अक्षय ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा तथा रक्षा के क्षेत्रों में सहयोग को और सुदृढ़ करने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने हिंद महासागर क्षेत्र में अवैध मत्स्यन, मादक पदार्थों की तस्करी और समुद्री डकैती जैसी चुनौतियों सहित क्षेत्रीय एवं वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। दोनों नेताओं ने भारत द्वारा घोषित विशेष आर्थिक पैकेज के अंतर्गत परियोजनाओं और पहलों के कार्यान्वयन में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की विकास प्राथमिकताओं के समर्थन तथा दोनों देशों के बीच घनिष्ठ और स्थायी साझेदारी को और गहरा करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

आधिकारिक वार्ता के उपरांत दोनों नेताओं ने भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक संयुक्त स्मारक लोगो जारी किया। इसके बाद क्षमता विकास, यूपीआई, स्वास्थ्य, कृषि, पोत परिवहन, अंतरिक्ष, प्रत्यर्पण तथा ऋण सहायता (लाइन ऑफ क्रेडिट) के क्षेत्रों में कई समझौता ज्ञापनों/समझौतों का आदान-प्रदान किया गया। ऋण सहायता (लाइन ऑफ क्रेडिट) की राशि 1,250 करोड़ रुपये है। समझौता ज्ञापनों/समझौतों की पूरी सूची यहाँ [link] देखी जा सकती है। इसके अतिरिक्त, सेशेल्स की विकास आवश्यकताओं के समर्थन में खाद्य सुरक्षा, अवसंरचना, स्वास्थ्य, व्यावसायिक प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा तथा रक्षा के क्षेत्रों में कई घोषणाएँ भी की गईं। इन घोषणाओं का विवरण यहाँ [link] देखा जा सकता है। सेशेल्स ने आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (सीडीआरआई) में शामिल होने की भी घोषणा की।

दिन के बाद के हिस्‍से में प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की राष्ट्रीय विधानसभा के विशेष अधिवेशन को संबोधित किया और ऐसा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। अपने संबोधन में उन्होंने भारत और सेशेल्स के बीच मित्रता के ऐतिहासिक संबंधों पर प्रकाश डाला तथा लोकतंत्र, विधि का शासन और जन-केंद्रित सुशासन जैसे साझा मूल्यों को रेखांकित किया, जो दोनों देशों का मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने कहा कि परस्पर विश्वास और घनिष्ठ सहयोग ने विकास सहयोग, समुद्री सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्वास्थ्य तथा क्षमता विकास जैसे क्षेत्रों में विस्तृत एक मजबूत साझेदारी को आकार दिया है। प्रधानमंत्री ने दोनों लोकतंत्रों के बीच संसदीय आदान-प्रदान को और बढ़ाने का भी आह्वान किया। प्रधानमंत्री का पूरा संबोधन यहाँ [link] देखा जा सकता है।

सेशेल्स के विपक्ष के नेता महामहिम श्री बर्नार्ड जॉर्जेस ने भी प्रधानमंत्री से भेंट की। दोनों नेताओं ने भारत-सेशेल्स द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की और दोनों देशों के बीच विशेष मित्रता को और सुदृढ़ बनाने के प्रति अपना दृढ़ समर्थन व्यक्त किया।