एक भारत-श्रेष्‍ठ भारत के मार्ग पर चलते हुए हम सभी नेताजी की भावनाओं के अनुरूप आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं: प्रधानमंत्री मोदी
केन्‍द्र सरकार बीते साढ़े 4 वर्षों से अपने वैभवशाली इतिहास के हर छोटे से छोटे हिस्‍से को उभारने का प्रयास कर रही है: पीएम मोदी
अबसे रॉस द्वीप को नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप से जाना जाएगा, नील द्वीप को शहीद द्वीप से जाना जाएगा और हैवलॉक द्वीप को स्‍वराज द्वीप के नाम से जाना जाएगा: प्रधानमंत्री

भारत माता की जय

वन्‍दे – मातरम

वन्‍दे – मातरम

वन्‍दे – मातरम 

आप सबसे पहले मेरा आग्रह है कि आज ही के दिन नेताजी यहां आए थे, उनका स्‍मरण करते हुए अपना मोबाइल फोन बाहर निकालिए, सभी अपने मोबाइल की flash light चालू कीजिए और एक साथ सबके मोबाइल की flash light चालू कीजिए और नेताजी को सम्‍मान दीजिए, हरेक के मोबाइल के। मेरे साथ बोलिए  

नेताजी जिंदाबाद

नेताजी जिंदाबाद

नेताजी जिंदाबाद 

सुभाष बाबू जिंदाबाद

सुभाष बाबू जिंदाबाद 

सुभाष बाबू जिंदाबाद  

वन्‍दे – मातरम

वन्‍दे – मातरम

वन्‍दे – मातरम 

बहुत-बहुत धन्‍यवाद 

मंच पर उपस्थितसभी महानुभव, आज विशेष रूप से पधारे हुए सुभाष बाबू के परिवारजन और विशाल संख्‍या में पधारे हुए मेरे प्‍यारे भाइयो और बहनों।

आजादी के लिए अपना जीवन दांव पर लगाने वाले संख्‍य देशभक्‍तों के त्‍याग और पराक्रम से पवित्र हुई इस भूमि को मैं शत-शत नमन करता हूं।अंडमान निकोबार द्वीप समूह भारत के प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक तो है ही, भारतवासियों के लिए ये तीर्थ समान है1 इस भूमि की महानता भूगोल के साथ ही इसके अतीत को उजागर करने वाले स्‍वर्णिम इतिहास में है1 ये द्वीप समूह हमारी आजादी के आंदोलन का आजादी के लिए एक-एक भारतीय के शौर्य का, संकल्‍प का प्रतीक है। 

साथियो, देश के इतिहास, वर्तमान और भविष्‍य के लिए महत्‍वपूर्ण ये द्वीप समूह सशक्‍त बने, देश की विकास गाथा का अहम हिस्‍सा बने; इसके लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। इसी सोच को जमीन पर उतारते हुए आज अंडमान के कोने-कोने को सुविधाओं से जोड़ने वाली सैंकड़ों करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्‍यास भी किया गया है। ये प्रोजेक्‍ट शिक्षा, स्‍वास्‍थ्य, connectivity, tourism  और उद्योग रोजगार से जुड़े हैं। इन सभी विकास परियोजनाओं के लिए आप सब मेरे प्‍यारे भाइयो-बहनों, आपको बहुत-बहुत बधाई देता हूं। 

साथियो, देश की आजादी के संकल्‍प से जुड़े दो महत्‍वपूर्ण स्‍मारकों का दर्शन करने का मुझे सौभाग्‍य मिला है। पहले मैं सेल्‍युलर जेल गया था और उसके बाद उस जगह पर गया जहां 75 वर्ष पहले नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने देश की आजादी का उदघोष करते हुए झंडा फहराया था।

साथियो, सेल्‍युलर जेल के कैम्‍पस में प्रवेश करते ही एक अलग ही एहसास मन-मस्तिष्‍क में भर जाता है। वो लोग न जाने किस मिट्टी के बने थे जिन्‍होंने तब हंसते-हंसते यातनाएं झेली थीं। सेल्‍युलर जेल के कैम्‍पस में चलते हुए ऐसा अनुभव होता है कि भारत मां के वीर सपूत समंदर की लहरों पर अपने खून-पसीने से भारत मां की जय लिख रहे हैं। वे पल-पल, तिल-तिल अपने-आपको जला रहे हैं, अपनी जिंदगी जला रहे हैं, ताकि आजादी की रोशनी प्रकट हो। 

वीर सावरकर को लेकर जितनी भी बातें सुनी और पढ़ी हैं, वो एक-एक घटना दृश्‍य बनकर जीवंत हो जाती है। वो कोठरियां जिनमें सावरकर, बाबा भान सिंह, महावीर सिंह, इन्‍द्रभूषण रॉय, जैसे सैंकड़ों-हजारों महान क्रान्ति वीरों को यातनाएं दी गई थीं। जहां पर उन्‍होंने इतने वर्ष बिताए, वो व्‍यक्तिगत रूप से हम सबके लिए किसी मंदिर से कम नहीं है। बारेन्‍द्र कुमार घोष, उल्‍लासकर दत्‍त, पृथ्‍वी सिंह आजाद, त्रैलोक्‍य नाथ चक्रवर्ती, भाई परमानंद, ऐसे अनेक आजादी के नायकों ने से सेल्‍युलर जेल के चप्‍पे-चप्‍पे को गौरवान्वित किया है। आजादी के इन गुमनाम नायकों को ये कृतज्ञ राष्‍ट्र कभी भूल नहीं सकता।

मेरे साथ बोलिए-

शहीदों – अमर  रहो

शहीदों – अमर रहो

साथियो, जब आजादी के नायकों की बात आती है तो नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नाम हमें गौरव से भर देता है, नई ऊर्जा से भर देता है। आजाद हिंद सरकार के पहले प्रधानमंत्री सुभाष बाबू ने अंडमान की इस धरती को भारत की आजादी की संकल्‍प–भूमि बनाया था। नेताजी के आह्वान पर अंडमान के अनेक वीरों ने देश की आजादी के लिए खुद को समर्पित कर दिया था, जिसके बाद आजाद हिंद फौज ने यहां आजादी का तिरंगा फहराया था। 

30 दिसम्‍बर, 1943 की उस ऐतिहासिक घटना को आज 75 वर्ष पूरे हो गए हैं। आज उसी की याद में यहां 150 फीट ऊंचा ध्‍वज फहराकर हमने अपने इस दिन को देशवासियों की चिर स्‍मृति में अंकित करने का एक नम्र प्रयास किया है। सौभाग्‍य से कुछ महीने पहले ही मुझे लालकिले पर भी ऐसा ही अवसर मिला था। तब आजाद हिंद सरकार के 75 वर्ष पूरे हुए थे। 

भाइयो और बहनों, इतिहास के इस गौरवमय पल की स्‍मृति में सिक्‍का और postal stamp भी जारी किए गए हैं। इतना ही नहीं, नेताजी समेत आजादी के नायकों की स्‍मृति अंडमान के कोने-कोने में अमिट रहे, पूरा देश यहां से प्रेरणा लेता रहे, इसके लिए एक महत्‍वपूर्ण फैसला सरकार ने लिया है। इस समय जब मैं आपसे बात कर रहा हूं तो एक notification किया जा रहा है। और मैं अब आप सबके सामने बड़े गर्व के साथ उस घोषणा को करने जा रहा हूं। अबसे रॉस द्वीप को नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप से जाना जाएगा, नील द्वीप को शहीद द्वीप से जाना जाएगा और हैवलॉक द्वीप को स्‍वराज द्वीप के नाम से जाना जाएगा। 

भाइयो और बहनों, नेताजी ने स्‍वयं भारत भूमि के इस द्वीप समूह पर झंडा फहराकर इसे ब्रिटिश शासन से मुक्‍त घोषित किया था। इसी दिन उन्‍होंने भारतीयों की एक बड़ी जनसभा को इसी ग्राउंड में संबोधित किया था, जो अब नेताजी स्‍टेडियम बन गया है। तब उन्‍होंने कहा था कि इस इलाके पर अधिकार के साथ ही अंतरिम सरकार की राष्‍ट्रीय अस्मिता अब सत्‍यता और वास्‍तविकता का चोला ओढ़ चुकी है। इस वचन के चार वर्ष बाद ही मां भारती दासता की बेड़ियों से मुक्‍त हो गई। 

साथियो, गुलामी के लंबे कालखंड में अगर भारत की एकता को लेकर कोई शक और संदेह पैदा हुआ है तो वो सिर्फ मानसिकता का प्रश्‍न है, संस्‍कारों का नहीं। सुभाष बाबू का भी ये मानना था कि हम सभी प्राचीन काल से ही एक हैं; हां, गुलामी के समय में इस एकता को छिन्‍न-भिन्‍न करने का प्रयास जरूर हुआ है। नेताजी का ये दृढ़ विश्‍वास था कि एक राष्‍ट्र के रूप में अपनी पहचान पर बल देकर उस मानसिकता को भी बदला जा सकता है। आज मुझे प्रसन्‍नता है कि एक भारत-श्रेष्‍ठ भारत के मार्ग पर चलते हुए हम सभी नेताजी की भावनाओं के अनुरूप आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। 

सा‍थियो, कई बार कुछ लोग जाने-अनजाने में चर्चा के दौरान mainland और आईलैंड की बात करते हैं, हमारी जुबान पर चढ़ गया है। 

मेरे प्‍यारे भाइयो-बहनों, मेरे लिए समूचा भारत, यहां का कण-कण, जर्रा-जर्रा mainland है। पोर्ट ब्‍लेयर उतना ही mainland है, जितना दिल्‍ली, मुम्‍बई और चेन्नई है। यही कारण है कि हमारी सरकार उन क्षेत्रों में connectivity पर बल दे रही है जो किसी भी वजह से पीछे रहगए थे। देश के फिजीकल और इमोशनल integration  को और मजबूत करने का हमारा निश्‍चय अटल है। 

भाइयो और बहनों, integration  की ये भावना तब और मजबूत हो जाती है जब हम इतिहास के अपने नायकों को स्‍मरण रखते हैं। मैं बार-बार ये कहता रहा हूं कि जो देश अपने वास्‍तविक नायकों, अपने इतिहास को, अपने सम्‍मान को नहीं सहज पाता है; वो कभी भी तरक्‍की नहीं कर सकता है। जो देश अपने इतिहास, विरासत को जितना संभाल लेता है, उसका विकास उतना ही सशक्‍त होता है। 

केन्‍द्र सरकार बीते साढ़े चार वर्षों से अपने वैभवशाली इतिहास के हर छोटे से छोटे  हिस्‍से को उभारने का प्रयास कर रही है। उसे देशवासियों के सामने प्रेरणा के तौर पर रखने में जुटी है क्‍योंकि इतिहास घटना है तो इतिहास गहना भी है। इतिहास बीता हुआ कल है तो इतिहास आने वाले कल का एहसास भी है। इतिहास पुरुषार्थ, पराक्रम, पीड़ा को संजोए है तो इतिहास पुरुषाथ, पराक्रम भी प्रेरणा भी है। इतिहास हमारे प्रयत्‍नों का परखी है तो इतिहास हमारे परिश्रम का प्रतिबिंब भी है। इतिहास हमें सर्तक करता है तो इतिहास हमें सजग रहना भी सिखाता है। इतिहास समय से बंधा हुआ है तो इतिहास नए संकल्‍प की ऊर्जा भी है। इतिहास हमें नई उम्‍मीदों, नए सपनों को देखने का हौसला देता है तो इतिहास हमें भविष्‍य के लिए खुद को समर्पित करने का साहस भी देता है। 

साथियो, इसी सोच के साथ सरकार ने कई वर्षों से लटके पुलिस मेमोरियल के सपने को साकार किया। बाबा साहेब भीमराम अम्‍बेडकर के पंचतीर्थों का निर्माण किया। राष्‍ट्रीय एकता और किसान आंदोलन के प्रणेता सरदार वल्‍लभ भाई पटेल को सम्‍मान देने के लिए दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा Statue of Unity आज देश को गौरवान्वित कर रही है। ये तमाम स्‍मारक सिर्फ इतिहास को संजोने की क्रिया नहीं बल्कि देश को एक करने वाले अपने सच्‍चे और वीर सपूतों को हमारा नमन भी है।

इतना ही नहीं, नेताजी सुभाषचंद्र बोस और सरदार पटेल के नाम पर हमने राष्‍ट्रीय पुरस्‍कारों की घोषणा भी की है। आज मैं यहां पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस Deemed University की भी घोषणा कर रहा हूं। 

भाइयो और बहनों, इन तमाम राष्‍ट्र पुरुषों की प्रेरणा से जिस नए भारत के निर्माण का बीड़ा हम सभी ने उठाया है, उसके स्‍वभाव में मूल तत्‍व विकास है। विकास हमारे संसाधनों का भी और हमारी संस्‍कृति का भी हो, ये सुनिश्चित किया जा रहा है। देश के कोने-कोने का, देश के जन-जन का विकास यानी सबका साथ सबका विकास। जब हम संसाधनों के विकास की बात करते हैं तो औद्योगिक विकास भी उसका एक महत्‍वपूर्ण पहलू है। 

सरकार यहां की परिस्थितियां, यहां के पर्यावरण के अनुकूल उद्योगों के विकास  के लिए प्रतिबद्ध है। सोलर पॉवर हो, LNG से बिजली बनाना हो, इलेक्ट्रिक कार हो, यहां की ट्रैफिक व्‍यवस्‍था का हिस्‍सा बनाना हो; ये सारी कोशिशें विकास और पर्यावरण में संतुलन बनाने के लिए की जा रही हैं। 

साथियो, इस क्षेत्र के औद्योगिक विकास के लिए भी सरकार ने एक बड़ी योजना बनाई है। जिसका ऐलान भी आप सबसे बीच आज मैं करने जा रहा हूं। इस ऐतिहासिक पल पर करने जा रहा हूं। इस योजना का नाम है लक्षद्वीप एंड अंडमान निकोबार आईलैंड इं‍डस्ट्रियल डेवलमेंट स्‍कीम। इसके तहत यहां जो भी उद्ययमी इको फ्रैंडली उद्योग लगाएंगे, उनको सरकार मदद देगी, रियायतें देगी। इस योजना से यहां अनेक उद्योग आने वाले समय में लगेंगे जिससे यहां के युवाओं को रोजगार मिलेगा।

इस योजना से टूरिज्‍म, फूड प्रोसेसिंग और इन्‍फोरमेशन टेक्‍नोलॉजी से जुड़े सैंकड़ों उद्यमों को लाभ मिलेगा। आज यहां स्‍टार्टअप्स के लिए भी एक पॉलिसी बुक का विमोचन किया गया है। इन तमाम प्रयासों से यहां के युवा साथियों को लाभ होना तय है। यहां की पहचान को, यहां की संस्‍कृति को संरक्षित रखते हुए पर्यटन को भी विकसित करने की कोशिश हो रही है। आज पर्यटन से जुड़े इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को लेकर अनेक बड़ी योजनाओं का शिलान्‍यास और लोकार्पण किया गया है।हैवलॉक पोर्ट पर बनने वाला पैसेंजर टर्मिनल हो या फिर याट मरीना का विस्‍तारीकरण, इससे हाई एंड टूरिज्‍म के क्षेत्र में संभावनाएं बढ़ेंगी। यहां 20 यार्ड की जगह 100 यार्ड तक खड़े किए जा सके, इसके लिए योजना पर काम चल रहा है। 

साथियो, औद्योगिक और टूरिज्‍म का विकास तब होता है जब connectivity अच्‍छी होती है। यहां की connectivity को मजबूत करने के लिए इस वर्ष चार जहाज यहां के परिवहन बेड़े में आ चुके हैं। इसके अलावा चार जहाजों को मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत कोच्चि शिपयार्ड में तेजी से बनाया जा रहा है। हमारी कोशिश है कि ये द्वीप समूह ज्‍यादा से ज्‍यादा आत्‍मनिर्भर बन सके। यहां के बड़े जहाजों का रख-रखाव अभी देश के दूसरे हिस्‍सों में होता है। अब पोर्ट ब्‍लेयर के डॉक यार्ड को विस्‍तार दिया जा रहा है। 

साथियो, मुझे बताया गया कि चाथम से बोम्बूफ्लैटजाने में काफी समय लगता था। अब वहां एक पुल बनाने को मंजूरी दे दी गई है। आज जो स्‍थानीय प्रतिनिधियों के साथ मेरी बैठक हुई है, उनमें सड़कों से जुड़ा एक विषय उठाया गया था। मुझे बताया गया‍ कि यहां के rural इलाकों में सड़कों के repair और maintenance की समस्‍या है। मेरा लेफ्टिनेंट गवर्नर जी से आग्रह रहेगा कि सड़कों की स्थिति की समीक्षा की जाए और केन्‍द्रसरकार को दो हफ्ते के भीतर रिपोर्ट भेजी जाए। और रिपोर्ट के अध्‍ययन के बादकेन्‍द्रसरकार हर संभव मदद करेगी। 

इसके अलावा air connectivity को और सशक्‍त करने के लिए वीर सावरकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक नई integrated terminal building बन रही है। ये बिल्डिंग बहुत जल्‍द पूरी हो जाएगी। चेन्‍नई और कलकत्‍ता से पोर्ट ब्‍लेयर की चार्टर्ड फ्लाइट subsidized किराये पर आप सभी को उपलब्‍ध कराई जाएगी।

साथियो, water-way, air-way और road-way के साथ-साथ I-way भीआज की बहुत बड़ीजरूरत है।फोन और इंटरनेट connectivity को भी बेहतर किया जा रहा है। चेन्‍नई से आ रही under sea optical fibreसे अब पोर्ट ब्‍लेयर में उतना ही अच्‍छा इंटरनेट चलेगा जितना की दिल्‍ली या चेन्‍नई में चलता है। 

इतना ही नहीं SWAN यानी state wide area network, वो भी आज से शुरू किया गया है। इसके तहत पहले फेज में यहां के जो बड़े द्वीप हैं, जहां रिहायश है, वहां के 12 locations को जोड़ा जा रहा है। इससे जिला और ब्‍लॉक स्‍तर के सभी सरकारी दफ्तरों को हाई स्‍पीड इंटरनेट की सुविधा मिलेगी जिससे सरकार की सेवाओं की ऑनलाइन डिलीवरी में आसानी होगी। एक प्रकार से अंडमान और निकोबार सहित तमाम द्वीपों में डिजीटल इंडिया की मजबूती को सुनिश्चित करेगी।

साथियो, उद्योगों और टूरिज्‍म के अलावा अपने पुराने व्‍यवसायों से भी युवाओं को रोजगार मिले, इसके लिए 19 fish landing centreबनाए जा रहे हैं, 9 पूरे हो चुके हैं और बाकी 10 पर तेजी से काम चल रहा है। इसके साथ ही कृषि, मछली पालन और पशुपालन को प्रगति देने के लिए 200 करोड़ की मदद की जा रही है। 

भाइयो और बहनों, यहां बिजली, पीने का पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी आज अहम प्रोजेक्‍ट्स का शिलान्‍यास और लोकार्पण किया गया है। अगले 20 साल के लिए पोर्ट ब्‍लेयर और आसपास के इलाकों को पानी की समस्‍या न हो, इसके लिए धनीकारी बांध की ऊंचाई बढ़ाई जा रही है। 

जहां तक बिजली की बात है, तो बीते छह महीने में ही यहां 7 मेगावाट के सोलर पॉवर प्‍लांट्स को मंजूरी दी जा चुकी है। इसके अलावाआज जिस एलएनजी पॉवर प्‍लांट का शिलान्‍यास किया गया है, उससे अगले 25 वर्षों तक यहां बिजली की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

साथियो, waste to energy की दिशा में भी पोर्ट ब्‍लेयर अहम भूमिका निभा रहा है। जो नया प्‍लाज्मा गैस प्‍लांट यहां बनेगा उससे पीने के साफ पानी के साथ-साथ clean energy और green fuel भी आपको उपलब्‍ध होगा। 

भाइयो और बहनों, स्‍वच्‍छता को लेकर भी आपका संकल्‍प प्रशसंनीय है और इसके लिए मैं नागरिकों को बधाई देता हूं। मुझे बहुत खुशी है कि यहां के लोगों ने पूरे द्वीप समूह को खुले में शौच से मुक्‍त घोषित किया है। स्‍वच्‍छता से यहां का सौन्‍दर्य तो निखर रहा है, वहीं स्‍वास्‍थ्‍य भी बेहतर हो रहा है। 

भाइयो और बहनों, देशवासियों के स्‍वास्‍थ्‍य को हमारी सरकार बहुत अधिक प्राथमिकता दे रही है। इसका लाभ आप सभी को भी मिल रहा है। दो वर्ष पहले  पोर्ट ब्‍लेयर में अंडमान एंड निकोबार आईलैंड इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस शुरू किया गया था। सरकार की योजना अंडमान निकोबार आइलैंड स्‍कीम पर हेल्‍थ इंश्‍योरेस के तहत ढाई हजार से ज्‍यादा गरीब और सेवानिवृत्‍त लोगों ने अपना इलाज कराया है, वहीं आयुष्‍मान भारत योजना के तहत यहां के भी अनेक गरीब परिवारों को लाभ मिल रहा है। देशभर के बड़े-बड़े अस्‍पतालों में गंभीर बीमारी की स्थिति- पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज यहां भी सु‍निश्चित हो रहा है। 

साथियो, यहां की स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं को विस्‍तार देते हुए 2 पीएससी और सीएससी को अपग्रेड कर जिला अस्‍पताल बनाया जा रहा है। इसके अलावा एक आयुष अस्‍पताल का भी आज शिलान्‍यास किया गया है। इन सुविधाओं के बन जाने के बाद आपको इलाज के लिए दूर-दूर तक नहीं जाना पड़ेगा। 

भाइयो और बहनों, दवाई के साथ-साथ पढ़ाई पर भी सरकार का फोकस है। चार वर्ष पहले यहां नया डिग्री कॉलेज खोला गया था और साल 2016 में लॉ कॉलेज भी शुरू हो गया। अब आपको नेताजी सुभाषचंद्र बोस के नाम से नेताजी सुभाषचंद्र डीम्ड यूनिवर्सिटी की सुविधा भी मिल चुकी है। डिगलीपुर में ploy technical collage की शुरूआत की गई है और थोड़ी देर पहले निकोबार में आईटीआई को भी मैं आप सभी के लिए समर्पित करके आया हूं।

भाइयो और बहनों, पूरे देश में विकास की पंचधारा, बच्‍चों की पढ़ाई, युवा को कमाई, बुजुर्गों को दवाई, किसानों को सिंचाई और जन-जन की सुनवाई- ये सुनिश्चित करने के लिए सरकार निरंतर ईमानदार प्रयास कर रही है। आज जितनी भी योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्‍यास यहां हुआ है, ये सभी इसी सोच से जुड़ी हुई हैं। 

इसके साथ-साथ हमारे शौर्य और बलिदान से भरे गौरवपूर्ण इतिहास, हमारी संस्‍कृति, हमारे नायकों का सम्‍मान हो- इसके लिए भी हम संकल्‍पबद्ध हैं। 

एक बार फिर इस ऐतिहासिक अवसर के लिए, जीवन आसान बनाने वाली सभी परियोजनाओं के लिए आप सब मेरे प्‍यारे भाइयो-बहनों को हृदयपूर्वक बहुत-बहुत बधाई देता हूं। 

2018 का कल आखिरी दिन है। परसों 2019 का नया साल प्रारंभ हो रहा है- आप सभी अंडमान निकोबार और लक्षद्वीप वासियों और पूरे देश के लिए नया उत्‍साह, नया जोश, नई ऊर्जा और नए उत्‍तम स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर आए- इसी मंगल कामना के साथ आप सबसे फिर से आग्रह करता हूं- एक बार मोबाइल फोन बाहर निकालिए, अपनी फ्लैश लाइट चालू कीजिए, सबके मोबाइल फोन बाहर हों, आपकी फ्लैश लाइट बाहर हो-  और मेरे साथ पूरी ताकत से बोलना है- 

सुभाष बाबू ने स्‍वराज की नींव जहां रखी, 75 साल के इस पर्व पर सुराज की मजबूत यात्रा हम प्रारंभ करने का संकल्‍प ले करके चल रहे हैं, तब आप सबसे, आपके मोबाइल की फ्लैश लाइट चालू करके मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिए- 

वंदे – मातरम

वंदे – मातरम

वंदे – मातरम 

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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उत्तर प्रदेश अब देश में सबसे ज्यादा इंटरनेशनल एयरपोर्ट वाले राज्यों में शामिल: जेवर में पीएम मोदी
March 28, 2026
The inauguration of Phase-I of Noida International Airport marks a major step in Uttar Pradesh’s growth story and India’s aviation future: PM
UP has now emerged as one of the states with the highest number of international airports in India: PM
Airports are not just basic facilities in any country, they give wings to progress: PM
Our government is making unprecedented investments in modern infrastructure to build a Viksit Bharat: PM

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

उद्धघाटन हो गया? उद्धघाटन हो गया? नहीं, अभी आधा काम हुआ है। मैंने सिर्फ वो पर्दा हटाया है, लेकिन मैं आज चाहता हूं इस एयरपोर्ट का उद्धघाटन यहां जो भी उपस्थित हैं, आप सब करें, और इसलिए आप अपना मोबाइल फोन निकालिये, अपने मोबाइल फोन का फ्लैश लाईट कीजिए और आपका इसका उद्धघाटन कर रहे हैं। आप दीया जलाकर के यहां उपस्थित हर व्यक्ति, आज इस एयरपोर्ट का उद्धघाटन कर रहा है। ये आपकी अमानत है, ये आपका भविष्य है, ये आपका पुरूषार्थ है और इसलिए इसका उद्धघाटन भी आपके हाथों से हो रहा है, आप अपने भारत माता की जय बोलकर के, हाथ ऊपर करके, फ्लैश लाईट पूरी तरह से दिखाइये। भारत माता जी जय। भारत माता जी जय। भारत माता जी जय। बहुत-बहुत धन्यवाद। अब उद्धघाटन हो गया।

उत्तरप्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, यहां के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या, ब्रजेश पाठक, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्री राममोहन नायडू जी, पंकज चौधरी जी, ज्यूरिक एयरपोर्ट के चेयरमैन जोसेफ फेल्डर जी, अन्य मंत्रिगण, सांसद, विधायक, अन्य महानुभाव और मेरे प्यारे भाइयों और बहनों।

मैं देख रहा हूं, आज जहां भी मेरी नजर पड़ रही है, सारे युवा मुझे नजर आ रहे हैं, उत्साह से भरे युवा हैं, जोश से भरे हुए युवा हैं, क्योंकि इन युवाओं को पता है, ये जो काम हो रहा है ना, ये नौजवानों के भविष्य को नई उड़ान देने वाला काम हो रहा है। आज हम विकसित यूपी-विकसित भारत अभियान का एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं। देश का सबसे बड़ा प्रदेश, आज देश के सबसे अधिक इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स वाले राज्यों में से एक हो गया है। और आज मेरे लिए गर्व और प्रसन्नता के दो कारण हैं। एक तो ये है कि इस एयरपोर्ट का शिलान्यास भी करने का सौभाग्य आप सबने मुझे दिया था और आप सबने इस एयरपोर्ट के उद्धघाटन का सौभाग्य भी मुझे दिया, लेकिन मैंने उस सौभाग्य को आपके साथ बांट दिया और आपके हाथों से उद्धघाटन करवा दिया। दूसरा, जिस उत्तर प्रदेश ने मुझे अपना प्रतिनिधि चुना, जिस उत्तर प्रदेश ने मुझे सांसद बनाया, उसकी पहचान के साथ, उस उत्तर प्रदेश की पहचान के साथ इस भव्य एयरपोर्ट का नाम भी जुड़ गया है।

साथियों,

नोएडा का ये एयरपोर्ट, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, गाजियाबाद, मेरठ, इटावा, बुलंदशहर, फरीदाबाद, इस पूरे क्षेत्र को बहुत बड़ा लाभ होने वाला है। हिन्दुस्तान को और उत्तर प्रदेश को तो होना ही होना है। ये एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों, छोटे और लघु उद्योगों, यहां के नौजवानों के लिए, अनेक नए अवसर लेकर आने वाला है। यहां से दुनिया के लिए विमान तो उड़ेंगे ही, साथ ही, ये विकसित उत्तर प्रदेश की उड़ान का भी प्रतीक बनेगा। मैं उत्तर प्रदेश को, विशेष रूप से पश्चिम उत्तर प्रदेश की जनता को इस भव्य एयरपोर्ट के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आज का ये कार्यक्रम, भारत के नए मिज़ाज का प्रतीक है। आप सभी देख रहे हैं कि आज पूरा विश्व कितना चिंतित है। पश्चिम एशिया में एक महीने से युद्ध चल रहा है। युद्ध की वजह से कई सारे देशों में खाने-पीने के सामान, पेट्रोल-डीज़ल-गैस, खाद, ऐसी कई ज़रूरी चीज़ों का चारो तरफ संकट पैदा हो गया है। हर देश इस संकट का सामना करने के लिए कुछ न कुछ कोशिश कर रहा है, प्रयास कर रहा है। और हमारा भारत भी इस संकट का पूरी शक्ति से मुकाबला कर रहा है, देशवासियों की ताकत के भरोसे कर रहा है। भारत तो बहुत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस, ये जहां युद्ध चल रह है ना, इस युद्ध से प्रभावित इलाके से मंगाता रहा है। इसलिए सरकार हर वो कदम उठा रही है, जिससे सामान्य परिवारों पर, हमारे किसान भाई-बहनों पर, इस संकट का बोझ न पड़े।

साथियों,

संकट के इस समय में भी, भारत ने अपने तेज़ विकास को निरंतर जारी रखा है। मैं सिर्फ पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ही बात करुं, तो पिछले कुछ सप्ताह में ही, ये चौथा बड़ा प्रोजेक्ट है, जिसका शिलान्यास या लोकार्पण हुआ है। इन कुछ ही सप्ताह में, इस दौरान नोएडा में बहुत बड़ी सेमीकंडक्टर फैक्ट्री का शिलान्यास हुआ, इसी कालखड में देश की पहली दिल्ली-मेरठ नमो-भारत ट्रेन ने गति पकड़ी, इसी कालखंड में मेरठ मेट्रो का विस्तार किया गया, और इतने कम समय में आज नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का आप सबके हाथों से उद्धघाटन भी हो गया।

साथियों,

ये सारे प्रोजेक्ट्स, यूपी के विकास के लिए, डबल इंजन सरकार के प्रयासों का शानदार उदाहरण हैं। सेमीकंडक्टर फैक्ट्री, भारत को टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बना रही है। मेरठ मेट्रो और नमो भारत रेल, तेज और स्मार्ट कनेक्टिविटी दे रही है। और ये हमारा जेवर एयरपोर्ट, पूरे उत्तर भारत को दुनिया से जोड़ रहा है। और आपने अभी वीडियो में देखा, ये ऐसा एयरपोर्ट बन रहा है, हर दो मिनट में एक जहाज उड़ेगा, हर दो मिनट में एक जहाज उड़ेगा। पहले सपा वालों ने नोएडा को अपनी लूट का ATM बना लिया था। लेकिन आज भाजपा सरकार में वही नोएडा, यूपी के विकास का सशक्त इंजन बन रहा है।

साथियों,

जेवर का ये एयरपोर्ट, डबल इंजन सरकार की कार्यसंस्कृति का भी बहुत अच्छा उदाहरण है। अब आप सोचिये, इस एयरपोर्ट को अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार ने 2003 में ही फाइल में मंजूरी दे दी थी। 2003 में, आपमें से बहुत होंगे जिसका जन्म नहीं हुआ होगा, बहुत वो लोग होंगे जो उस समय 25-30 साल के 35 साल के हुए होंगे और आज रिटायर भी हो गए, लेकिन एयरपोर्ट नहीं बना। लेकिन केंद्र में कांग्रेस और यहां की पहले की सरकारों ने सालों तक इस एयरपोर्ट की नींव तक नहीं पड़ने दी। 2004 से 2014 तक ये एयरपोर्ट फाइलों में ही दबा रहा। जब हमारी सरकार बनी तो यूपी में सपा की सरकार थी। शुरु के दो-तीन सालों में सपा वालों ने इस पर काम नहीं होने दिया। लेकिन जैसे ही यहां भाजपा-NDA की सरकार बनी, दिल्ली में भाजपा-एनडीए की सरकार बनी, तो जेवर एयरपोर्ट की नींव भी पड़ी, निर्माण भी हुआ और अब ये शुरु भी हो गया है।

साथियों,

एयरपोर्ट के अलावा ये क्षेत्र देश के दो बड़े फ्रेट कॉरिडोर्स का भी हब बन रहा है। ये फ्रेट कॉरिडोर मालगाड़ियों के लिए बिछाई गई स्पेशल पटरियां हैं। इससे उत्तर भारत की बंगाल और गुजरात के समंदर से कनेक्टिविटी बेहतर हो गई है। और दादरी वो स्थान है जहां ये दोनों कॉरिडोर्स आपस में मिलते हैं। यानी यहां किसान जो उगाते हैं, यहां उद्योग जो कुछ बनाते हैं, वो जमीन से, हवाई मार्ग से, दुनिया के कोने-कोने तक तेज़ी से जा पाएगा। ऐसी मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी के कारण, यूपी दुनियाभर के निवेशकों के लिए बहुत बड़ा आकर्षण बन रहा है।

साथियों,

जिस नोएडा को पहले अंधविश्वास के कारण अपने हाल पर छोड़ दिया गया था, कुर्सी जाने के डर से पहले के सत्ताधारी यहां आने से डरते थे, मुझे याद है यहां की सपा सरकार थी और मैंने नोएडा आने का कार्यक्रम बनाया, तो मुख्यमंत्री इतने डरे हुए थे कि वो उस कार्यक्रम में नहीं आए और मुझे भी डराने की लोगों ने कोशिश की, कि नोएडा मत जाओ मोदी जी, अभी-अभी प्रधानमंत्री बने हो। मैंने कहा इस धरती का आशीर्वाद लेने जा रहा हूं, जो मुझे लंबे अर्से तक सेवा करने का मौका देगा। अब वही इलाका पूरी दुनिया का स्वागत करने के लिए तैयार है। ये पूरा क्षेत्र, आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सशक्त कर रहा है।

साथियों,

इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में, खेती-किसानी का बहुत महत्व है। मैं आज उन मेरे किसान भाई-बहनों का विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने इस प्रोजेक्ट को साकार करने के लिए अपनी जमीनें दी है। उन किसानों के लिए जोरदार तालियां बजाइये दोस्तों, मेरे किसान भाई-बहनों के लिए जोरदार तालियां बजाइये। मेरे किसान भाई-बहन, आपके इस योगदान से ही, इस पूरे क्षेत्र में विकास का एक नया दौर शुरु होने जा रहा है। आधुनिक कनेक्टिविटी का जो विस्तार यहां हो रहा है, उससे पश्चिमी यूपी में फूड प्रोसेसिंग की संभावनाओं को और बल मिलेगा। अब यहां के कृषि उत्पाद दुनिया के बाज़ारों में और बेहतर तरीके से जा पाएंगे।

साथियों,

यहां मैं अपने किसान साथियों का एक और बात के लिए भी आभार व्यक्त करना चाहता हूं। आपके गन्ने से जो इथेनॉल बनाया गया है, उससे कच्चे तेल, कच्चे तेल पर देश की निर्भरता कम हुई है। अगर इथेनॉल का उत्पादन ना बढ़ता, पेट्रोल में उसकी ब्लेंडिंग ना बढ़ती, तो देश को हर वर्ष साढ़े चार करोड़ बैरल, साढ़े चार करोड़ बैरल यानी लगभग 700 करोड़ लीटर कच्चा तेल विदेशों से मंगवाना पड़ता। किसानों के परिश्रम ने देश को इस संकट के समय में इतनी बड़ी राहत दी है।

साथियों,

इथेनॉल से देश को तो फायदा हुआ ही है, किसानों को भी बहुत बड़ा लाभ हुआ है। इससे करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा बची है। यानी इथेनॉल न बनाते तो ये पैसा विदेश जाना जय था। बीते वर्षों में इतना सारा पैसा, देश के किसानों को मिला है, गन्ना किसानों को मिला है।

साथियों,

यहां के गन्ना किसानों ने तो पहले के वो दिन भी देखे हैं, जब कई-कई सालों तक गन्ने का बकाया लटका रहता था। लेकिन आज भाजपा की डबल इंजन सरकार के प्रयासों से गन्ना किसानों की स्थिति बेहतर हुई है।

साथियों,

किसी भी देश में एयरपोर्ट सिर्फ एक सामान्य सुविधा नहीं होता। ये एयरपोर्ट प्रगति को भी उड़ान देते हैं। साल 2014 से पहले, देश में सिर्फ 74 एयरपोर्ट थे। आज 160 से अधिक एयरपोर्ट्स देश में हैं। अब महानगरों के अलावा, देश के छोटे-छोटे शहरों में भी हवाई कनेक्टिविटी पहुंच रही है। पहले जो सरकारें रही हैं, वे मानती थीं कि हवाई यात्रा सिर्फ अमीरों के लिए ही होनी चाहिए। लेकिन भाजपा सरकार ने, सामान्य भारतीय के लिए हवाई यात्रा को आसान बना दिया है। हमारी सरकार ने उत्तर प्रदेश में हवाई अड्डों के नेटवर्क का तेज़ी से विस्तार करते हुए उनकी संख्या बढ़ाकर सत्रह कर दी है।

साथियों,

भाजपा सरकार का निंरतर प्रयास रहा है कि एयरपोर्ट भी बने और किराया-भाड़ा भी सामान्य परिवारों की पहुंच में रहे। इसलिए, हमने उड़ान योजना शुरु की थी। इस स्कीम के कारण, बीते कुछ सालों में एक करोड़ साठ लाख से अधिक देशवासियों ने उड़ान योजना से टिकट लेकर सस्ती दरों पर हवाई यात्रा की है। और मैं आपको एक और जानकारी देना चाहता हूं। हाल में ही केंद्र सरकार ने उड़ान योजना को और विस्तार दिया है। इसके लिए लगभग 29 हज़ार करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। आने वाले वर्षों में इसके तहत, छोटे-छोटे शहरों में 100 नए एयरपोर्ट और 200 नए हेलीपैड बनाने की योजना है। यूपी को भी इससे बहुत अधिक लाभ होगा।

साथियों,

भारत का एविएशन सेक्टर, बहुत तेज़ से गति और विकास कर रहा है। जैसे-जैसे भारत में नए-नए एयरपोर्ट बन रहे हैं, वैसे-वैसे नए हवाई जहाज़ों की ज़रूरत भी बढ़ती जा रही है। इसलिए देश की अलग-अलग एयरलाइन्स ने सैकड़ों नए जहाजों के ऑर्डर दिए हैं। ये जो नई सुविधाएं हैं, नए जहाज आ रहे हैं, इनको उड़ाने वाले, इनमें सर्विस देने वाले, मेंटनेस से जुड़े, ऐसे हर काम के लिए बहुत बड़ी संख्या में वर्कफोर्स की ज़रूरत रहेगी। ये युवाओं के लिए बहुत बड़ा अवसर है। इसलिए हमारी सरकार, एविएशन सेक्टर में ट्रेनिंग की सुविधाओं का भी विस्तार कर रही है।

साथियों,

आप जब अपनी कोई गाड़ी खरीदते हैं, तो ये जरूर देखते हैं कि उस गाड़ी बनाने वाली कंपनी का सर्विसिंग सेंटर आसपास है या नहीं है। आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि हमारे देश में हवाई जहाजों की सर्विसिंग, यानी उनके मैंटनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल की पुख्ता व्यवस्थाएं ही नहीं थीं। भारत के 85 एयरपोर्ट, 85 परसेंट हवाई जहाजों को आज भी मैंटनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल यानी MRO के लिए, इस काम के लिए विदेश भेजना पड़ता है। इसलिए हमारी सरकार ने ठाना है कि MRO सेक्टर में भी भारत को आत्मनिर्भर बनाएंगे। अब भारत में ही, बहुत बड़े पैमाने पर MRO सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। आज यहां जेवर में भी MRO सुविधा का शिलान्यास हुआ है। ये सुविधा जब तैयार हो जाएगी, तो ये देश-विदेश के विमानों को सेवा देगी। इससे देश को कमाई भी होगी, हमारा पैसा भी देश में ही रहेगा, और युवाओं को अनेक रोजगार भी मिलेंगे।

साथियों,

आज हमारी सरकार की प्राथमिकता देश के नागरिकों की सुविधा है। देश के नागरिक का समय बचे और उसकी जेब पर ज्यादा बोझ भी न पड़े, ये हमारा लक्ष्य है। मेट्रो और वंदे भारत जैसी आधुनिक रेल सेवाओं का इसी भाव से ही विस्तार किया जा रहा है। दिल्ली-मेरठ नमो भारत रेल, इसका कितना फायदा हो रहा है, ये भी हम सब देख रहे हें। अभी तक नमो भारत, ढाई करोड़ से अधिक लोग सफर कर चुके हैं। दिल्ली-मेरठ के जिस सफर में पहले घंटों लग जाते थे, अब वो सफर मिनटों में ही पूरा हो रहा है।

साथियों,

विकसित भारत के विकसित आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमारी सरकार अभूतपूर्व निवेश कर रही है। बीते 11 वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर का बजट छह गुणा से अधिक बढ़ाया गया है। इन वर्षों में 17 लाख करोड़ रुपये हाईवे और एक्सप्रेसवे पर खर्च किए गए हैं, एक लाख किलोमीटर से अधिक के हाईवे का निर्माण किया गया है। 2014 तक रेलवे में सिर्फ 20 हजार किलोमीटर रूट का बिजलीकरण हुआ था। जबकि 2014 के बाद से 40 हजार किलोमीटर से ज्यादा रेलवे ट्रैक का बिजलीकरण किया गया है। आज ब्रॉडगेज नेटवर्क का लगभग शत-प्रतिशत बिजलीकरण हो चुका है। आज कश्मीर घाटी हो या नॉर्थ ईस्ट की राजधानियां, ये पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़ रही हैं। पोर्ट यानी बंदरगाहों की क्षमता, बीते दशक में दोगुने से अधिक हुई है। देश में नदी जलमार्गों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। विकसित भारत के निर्माण के लिए जरूरी हर क्षेत्र में भारत तेज़ी से काम कर रहा है।

साथियों,

विकसित भारत बनाने के लिए सबका प्रयास बहुत ज़रूरी है। ये आवश्यक है कि 140 करोड़ देशवासी कड़े से कड़ा परिश्रम करे, और वैश्विक संकटों का एकजुट होकर सामना करें। अभी जो युद्ध चल रहा है, इससे पैदा हुए संकटों का सामना कैसे करना है, इसके बारे में मैंने संसद में भी विस्तार से बताया है। मेरी कल देश के सभी मुख्यमंत्रियों से भी लंबी चर्चा हुई है और बड़ी सकारात्मक चर्चा हुई है। मैं आज आप सभी जनता-जनार्दन से फिर कहूंगा, मैं देशवासियों से फिर से कहूंगा। हमें शांत मन से, धैर्य के साथ, एकजुटता के साथ, मिल जुलकर के, इस संकट का सामना करना है। ये पूरे विश्व में परेशानी पैदा करने वाला संकट है। हमें अपने देश की सबसे ज्यादा चिंता करनी है। और यही हम भारतीयों की सबसे बड़ी ताकत है। मैं यूपी के, देश के सभी राजनीतिक दलों से भी आग्रहपूर्वक कहना चाहता हूं, विनती पूर्वक कहना चाहता हूं, इस प्रकार के संकट में ऐसी बातें करने से बचें, जो देश के लिए नुकसानदायक हैं। जो भारतीयों के हक में है, जो भारत के हित में है, वही भारत सरकार की नीति और रणनीति है। राजनीति के लिए गलत बयानबाज़ी करने वाले, राजनीतिक बहस में तो कुछ नंबर पा लेंगे, लेकिन देश को नुकसान पहुंचाने वाली हरकतों को देश की जनता कभी माफ नहीं करती। कोरोना के महासंकट के दौरान भी, कुछ लोगों ने अफवाहें फैलाईं, वैक्सीन को लेकर झूठ बोले, ताकि सरकार का काम मुश्किल हो, देश को नुकसान हो। परिणाम क्या हुआ? जनता ने चुनावों के दौरान ऐसी राजनीति को नकार दिया, ठुकरा दिया। मुझे पूरा भरोसा है, कि देश के सभी राजनीतिक दल भी इससे सबक सीखेंगे और देश के एकजुट प्रयासों को वो बल देंगे, ताकत देंगे। इसी आग्रह के साथ, एक बार फिर से उत्तर प्रदेश को इस शानदार एयरपोर्ट के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

मेरे साथ बोलिये-

भारत माता की जय!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

बहुत-बहुत धन्यवाद।