कांग्रेस हो, सपा हो, बसपा हो, इनका सिर्फ एक ही मंत्र है - जात-पात जपना - जनता का माल अपना: प्रधानमंत्री मोदी
जो लोग बाबा साहेब का अपमान करने का एक भी मौका नहीं छोड़ते थे, वो अब बहन जी के लिए माननीय-सम्माननीय हो गए हैं: पीएम मोदी
बुआ और बबुआ की दुकान पर ताला लग गया तो इस बार नया काउंटर खोल दिया, महामिलावट का काउंटर, मुझे पता है कि आप ये काउंटर भी बंद करने वाले हैं, आप आश्वस्त रहिए, गरीब को लूटने वालों से पाई-पाई वसूल की जाएगी: प्रधानमंत्री

भारत माता की जय, भारत माता की जय।

कन्नौज की महक देश और दुनिया में पहुँची हुई है, कन्नौज अपनी महक के लिए जाना जाता है लेकिन कुछ नवजवानों से मैं एक प्रार्थना करना चाहता हूं, मेरी प्रार्थना सुनेंगें क्या नवजवान? सुनेंगें ? तो सबसे पहले ये जो खंभे पे चढ़ गए हैं वो कृपया करके नीचे आ जाइये , शाबाश! देखिये, आपको कुछ भी हो गया तो मुझे चुनाव जीतने का आनंद नहीं आएगा, मुझको जीवन भर जब भी कन्नौज आऊंगा ये बच्चे याद आएंगे इनको अगर चोट लग गई तो , नीचे आओ भाई ओह्ह मेहरबान, देखिए अभी ओलंपिक की देर है, प्रैक्टिस यहाँ नहीं करो, उधर पीछे भी आप समझदार लोग हो भाई, और कभी-कभी इन उत्साहित लोगों से टेंट इधर-उधर हो गया तो कितने लोगों को चोट आ जाएगी , ज़रा पीछे जो भी हैं मेरी मदद करें उन बच्चों को उतारो, उनको समझाओ…. भारत माता की जय।

कन्नौज, इटावा और फर्रुखाबाद के सभी साथियों को मेरा नमस्कार। परसों काशी वालों ने अवसरवादियों महमिलावटियों के होश उड़ा दिए और आज आपने तो उनका हाल ही बेहाल कर दिया है, मैं कल्पना नहीं कर सकता भैया, इतनी गर्मी में इतनी भारी संख्या में वो भी प्रचार का आखिरी दिन, 5 बजे तो प्रचार पूरा हो जाएगा,।

भाइयो-बहनो, ऐसा लग रहा है आप सब विजयी डंका बजाने के लिए यहाँ आये हैं। इतनी बड़ी संख्या में आपका यहां आना ये दिखाता है कि 2014 का रिकॉर्ड तोड़ना आपने तय कर लिया है, तीसरे चरण के चुनाव के बाद ही जनता ने तय कर दिया है की फिर एक बार मोदी सरकार ? फिर एक बार मोदी सरकार? आज इसलिए ये महमिलावटी अब बौखलाए हुए हैं, साथियो, इन्होंने महाविलावट की, इन्होंने चौकीदार को गालियाँ दी, इन्होंने राम भक्तों को गालियाँ दी, लेकिन हुआ क्या इनका खेल खत्म हो गया, ये लोग अपने लिए प्रचार कर रहे थे, और उधर आप लोग देश की जनता सड़कों पर उतर आयी। आपके इस चौकीदार का प्रचार करने के लिए, मैं जब हेलीपैड पे उतरा तो वहां जो हमारे सीनियर लोग रिसीव करने आये थे मैंने ऐसे ही उनको पूछा कि भाई चुनाव का क्या हाल है, तो उन्होंने कहा साहब हम चुनाव लड़ ही नहीं रहे हैं। मैंने कहा मतलब, बोले भाजपा ना चुनाव लड़ रही है ना भाजपा का उम्मीदवार चुनाव लड़ रहा ना भाजपा का कार्यकर्ता चुनाव लड़ रहा है यह चुनाव तो उत्तर प्रदेश की जनता लड़ रही है। साथियो, आज मोदी का प्रचार वो बहन कर रही है जिसने पूरी ज़िंदगी चूल्हे में निकलने वाले धुएँ में गुजारी थी और उज्ज्वला योजना के तहत जिसे मुफ्त में गैस कनेक्शन मिला है। आज मोदी का प्रचार वो बेटी कर रही है जिसके घर में स्वच्छ भारत अभियान के तहत अब शौचालय बन गया। जवान बेटी के लिए एक इज्ज़त घर मिल गया। आज मोदी का प्रचार वो गरीब मेरा भाई बहन कर रहा है जिसे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर उसकी चाभी मिल गई और रहने चला गया। आज मोदी का प्रचार तो वो बूढ़े माँ-बाप कर रहे हैं जिसके बच्चे का आयुष्मान भारत योजना के तहत शहर के बड़े अस्पताल में ऑपरेशन हुआ और उसकी जिंदगी बच गई इलाज हुआ वो ताजा तैयार हो गया।

आज मोदी का प्रचार वो किसान कर रहा है जिसे पीएम किसान सम्मान योजना के तहत खाते में सीधे पैसे मिलना सुनिश्चित हुआ है। आज मोदी का प्रचार वो दिव्यांग जन कर रहे हैं जिन्हें सरकार ने दोबारा उपकरण उपलब्ध कराये गए हैं। पुरानी सरकारें कभी उनको अपंग कहती थी कभी अपाहिज़ कहती थीं मोदी ने उनको दिव्यांग जन कह कर के बहुत बड़ा सम्मान कर दिया। आज मोदी का प्रचार वो परिवार कर रहा है जिसके बेटे मातृभूमि की रक्षा के लिए खड़े हैं, जिन्हें बुलेटप्रूफ की जरूरत थी, मोदी ने पहुँचा दिया जिसे हथियार की जरूरत थी मोदी ने पहुंचा दिया। उस जवान बेटे के माँ बाप मोदी के लिए आज दुआ मांग रहे हैं। आज सभी एक मत होकर कह रहे हैं कि महमिलावटी लोगों, सारी कोशिश कर लो लेकिन आएगा तो मोदी ? आयेगा तो मोदी? आएगा तो मोदी? भाइयों और बहनों ये बलिदानियों का देश है तपस्वियों का देश है भारत के लोग जिस भी स्थिति में रहे लेकिन देश के स्वाभिमान और सुरक्षा से समझौता नहीं करते। आज हम ऐसी दुनिया में रह रहे हैं जहां आतंकवाद सबसे बड़ी समस्या है। भारत के लिए तो ये सबसे बड़ा खतरा है भारत तो आतंकवाद का सबसे बड़ा टारगेट रहा है और आज भी आतंक फैक्टरियाँ पाकिस्तान में चल रही है। आतंकवाद से देश की रक्षा होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? देश की रक्षा होनी चाहिए? इससे कैसे निपटेंगे? सपा-बसपा के पास कोई फार्मूला है क्या? सपा-बसपा के लोग इस पूरे चुनाव में एक बार भी आतंकवाद बोले हैं? मोदी को सौ गाली दी, आतंकवाद के खिलाफ दस गाली बोले हैं क्या ? क्यों भाई जरा सपा-बसपा वाले बताएं की आप आतंकवादियों से आप डरते हैं कि उनको बचाने के लिए चुप बैठे हैं? आज जितने भी लोग खुद को भावी प्रधानमंत्री बता रहे हैं जरा ये समझिये आप आज लोग प्रधानमंत्री बनने के पहले कतार लगा कर के बैठ गए हैं और घोषणाएं कर रहे हैं एक कहता है तुम बनोगे, दूसरा कहता है तुम बनोगे अहो रूपम अहो ध्वनि वाला चल रहा है।

भाइयो-बहनो, ये आज प्रधानमंत्री बनने के सपने देख रहें हैं इन्होंने देश को मजबूत बनाने की हमारे जवानों के रक्षा की कोई योजना रखी है क्या? जो सिर्फ और सिर्फ मोदी को हराने के लिए पाकिस्तान के झूठ को सच मानते हों पाकिस्तान के हीरो बनने का ख्वाब पालते हों सर्जिकल स्ट्राइक करने वाले एयर स्ट्राइक करने वाले हमारे सपूतों से सबूत मांगते हो, ऐसे लोगों से क्या उम्मीद की जा सकती है क्या? मत भूलिए ये वही लोग है जो दिल्ली के बाटला हॉउस के आतंकी के मारे जाने पर आंसू बहाते हैं आतंकियों के साथ हमदर्दी जताते हुए ये लोग यूपी में लोगों से वोट मांगने आ रहे हैं क्या इन लोगों से कोई उम्मीद की जा सकती है। भाइयो और बहनो, ये महमिलावटी सिर्फ अपने ही वंश की अपने परिवारों का ही भविष्य सोच सकते हैं। देश के भविष्य की चिंता इनको नहीं है। आप आश्वस्त रहिये नया हिंदुस्तान अब डरेगा नहीं आपको भरोसा है ना? आपको मोदी पर भरोसा है ना ? अब नया हिंदुस्तान डरेगा नहीं, नया हिंदुस्तान आतंकियों के घर में घुस के मारेगा। जब देश सुरक्षित रहेगा तभी सामान्य मानव का जीवन सही से चलेगा। ये बात देश के युवा साथियों को, जो पहली बार दिल्ली में केंद्र सरकार चुनने जा रहें हैं वो भली-भांति समझते हैं। यही कारण है कि 23 मई को इतिहास बनने वाला है, नई पीढ़ी सपा-बसपा के अवसरवाद को भी अच्छी तरह पहचानती है। याद कीजिये, वो भूलना मत, पीरवा में समाजवादी पार्टी ने कैसे बाबा साहब अंबेडकर का अपमान किया था, ये बसपा ने भूला दिया है। 

साथियो, याद करिये बसपा ने बाबा साहब के नाम पर मेडिकल कालेज का नाम रखा था लेकिन समाजवादी सरकार आयी तो उसके बाबा साहब के नाम की पट्टी को उखाड़कर फेंक दिया था। अब आज बहन जी उसी समाजवादी पार्टी के लिए खुशी-खुशी वोट मंगा रही हैं। सत्ता के लिए कुर्सी के लिए, सिर्फ मोदी को हराने के लिए, बाबा साहब को अपमानित करने वाले लोगों को आप गले लगा रही हो। भाइयो और बहनो, इनकी यही सच्चाई है अपने स्वार्थ के लिए ये अपमान भी कुर्सी के नीचे छिपा देते हैं और कुर्सी पर चिपक जाते हैं। साथियो, मैं आज आपके बीच आया हूं, 2022 में आजादी के 75 साल होने वाले हैं हमारे देश के वीर शहीदों ने तिरंगे झंडे को लेकर के आजादी की लड़ाई लड़ी थी, स्वराज्य के लिए लड़े थे। हमें स्वराज्य के लिए लड़ना है। हम उस समय संकटों से निकलना चाहते थे अब हम समृद्धि की ऊंचाइयों को छूना चाहते हैं और इसीलिए तिरंगा झंडा ही हमारे आगे के काम की प्रेरणा है। आपको लगेगा ये मोदी तिरंगा झंडे वाली बात क्यों बता रहा है। मैं जरा समझता हूं, ज़रा ध्यान से सुनिए। हमारा तिरंगा उसमें 3 मुख्य रंग से हमारा झंडा बना है, केसरिया है, सफेद है, हरा है और बीच में नीले रंग का अशोक चक्र है। 4 हो गए और पांचवां मजबूत डंडा है जिस पर तिरंगा झंडा लहरता है। पांच चीजें हैं, पांच चीजें हैं तो भाईयो-बहनो, इन पांचों को लेकर के हम देश को आगे बढ़ाना चाहते हैं। एक, हम केसरिया क्रांति करना चाहते हैं और जब मैं केसरिया क्रांति कहता हूं तो जो अपने आप को हिंदू विरोध में ही सेक्युलरिज्म दिखता है उनके तो रोंगटे खड़े हो जाएंगे और पता नहीं आज रात तक मेरे बाल नोच लेंगे। लेकिन मैं केसरिया क्रान्ति का मेरा मतलब है, केसरी रंग ऊर्जा का रंग है देश में ऊर्जा की क्रांति चाहिए, चाहे कोयले से हो चाहे पानी से हो, चाहे हवा से हो, या सूरज की गर्मी से हो। हमें ऊर्जा के क्षेत्र में देश को बहुत आगे बढ़ाना है तो हमारा तिरंगे झंडे का एक केसरिया रंग हमें ऊर्जा क्रांति की प्रेरणा देता है। दूसरा है सफेद रंग, सफेद हमें श्वेत क्रांति की प्रेरणा देता है, ये हमारा श्वेत रंग दूध की क्रान्ति, अंडे हो, कॉटन हो, चीनी हो, इन सारे क्षेत्र में हमें एक नई क्रान्ति लाने की प्रेरणा देता है। तीसरा हरा रंग है, हरा रंग ग्रीन रेवोल्यूशन की प्रेरणा देता है, हमें कृषि क्रान्ति की प्रेरणा देता है और कृषि क्रान्ति अब आधुनिकता वाली कृषि, वैल्यू एडिशन वाली कृषि, टपक सिंचाई वाली कृषि, उसको हम बल देना चाहते हैं। और चौथा रंग है नीला, ब्लू रेवोल्यूशन हमारे मछवारे भाई बहन, हमारे नदी तट के मछवारे भाई बहन, हमारे पानी की ताकत, हमारे समुद्र तट की ताकत, हमारे नदियों की ताकत, इसको हम बल देकर के देश को आगे बढ़ाना चाहते है और ये झंडा आसमान में कब लहराएगा और ऊँचा कब जाएगा? जब डंडा मजबूत होगा, अगर डंडा ऐसा ही है तो कुछ नहीं होगा और ये मेरे लिए डंडे का मतलब है इंफ्रास्ट्रक्चर इतना ऊंचा हो इतना मजबूत हो दुनिया को भी मेरा तिरंगा झंडा दिखाई दे, रोड का इंफ्रास्ट्रक्चर, रेल का इंफ्रास्ट्रक्चर, हवाई अड्डों का इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे का इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल इंडिया का इंफ्रास्ट्रक्चर, गैस पाइप लाइन का इंफ्रास्ट्रक्चर, पाइप लाइन पानी का इंफ्रास्ट्रक्चर, हर प्रकार से ये डंडा आधुनिक भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर की पहचान है। तो ये पंच पथ पर 2022, आजादी के 75 साल इसी तिरंगे झंडे से प्रेरणा ले कर के हम देश को आगे बढ़ाना चाहते हैं। 

साथियो, ये बाल गोपाल नंद लाल की धरती है ये गो पालकों की धरती है और ये आपका चौकीदार द्वारिकाधीश के यहां से आया है, द्वारिका की नगरी से आया है। अरे एक गो पालक ने ही तो द्वारका बनाई थी, एक गो पालक था जिसने द्वारका बनाई थी और द्वारका जहां है उस गुजरात से मैं पैदा होकर के आपके बीच आया हं भाइयो, और गो पालकों की धरती पर आया हूं। मैं उस धरती से आया हूँ जहाँ कृष्ण भगवान ने अपना शरीर छोड़ दिया और आज उस धरती की सेवा करने आया हूँ जिसने कृष्ण भगवान को जन्म दिया। आपको पशु धन से और धन मिले, इसके लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। भाजपा एनडीए सरकार ने पशु पालकों के लिए बैंक के दरवाजे खोल दिए हैं, अब किसानों की तरह पशु पालकों को भी किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा दी जा रही है। अब आप को गाय ख़रीदनी हो डेयरी से जुड़ा छोटा मोटा व्यवसाय शुरू करना हो तो किसी दूसरे से ज्यादा ब्याज पर कर्ज लेने की जरूरत नहीं है। गो वंश और दूसरे पशु धन की देख भाल के लिए सरकार द्वारा एक राष्ट्रीय कामधेनु आयोग बनाया जा रहा है। इस आयोग की ज़िम्मेदारी गो वंश की रक्षा सुरक्षा से लेकर गोशालाओं की देख रेख की होगी। हमारे पशुओं को तकलीफ ना हो और किसानों को भी समस्या ना हो यह सुनिश्चित करने का काम ये आयोग करने वाला है।

साथियो, पशु धन के साथ-साथ किसान परिवार के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए निरंतर प्रयास किए गये हैं। सिंचाई की परियोजना हों मण्डियों में सुधार की प्रकिया हो, यूरिया या दूसरे खाद से जुड़े कारखाने हो, कोल्डस्टोरेज हो हर मोर्चे पे बड़े पैमाने पर काम किया जा रहा है। आलू, प्याज और टमाटर जैसी सब्जियों में किसानों को नुकसान ना हो इसके लिए भी क्लस्टर भी बनाये जा रहे हैं। यहीं कन्नौज में, फर्रुखाबाद में, फिरोजाबाद में, हाथरस और अलीगढ़ में आलू के क्लस्टर बनाने का बीड़ा हमने उठाया है। कुछ महीने पहले ही कृषि उत्पादकों को निर्यात करने से जुड़ी एक नई नीति हमने बनाई है, इसी नीति को लागू करने पर काम चल रहा है। नई नीति के प्रभाव से यहाँ का आलू और आलू से बने उत्पाद, निर्यात करने में बहुत आसानी होगी और भाइयो-बहनो, हम ऐसे वादे नहीं करते कि जिसके कारण जानता हमारी बेचारी बेचैन हो जाए। वरना ऐसे भी लोग देश में हैं, ऐसे बुद्धिमान ऐसे तेजस्वी लोग हैं जो आलू से सोना बनाते हैं। वो काम हम नहीं कर सकते भाई, माफ करना। मैं आलू से सोना नहीं बना सकता, ना मेरी पार्टी बना सकती है और इसलिए जिसका मन करता है आलू से सोना बनाना वो जरूर उनके पास चले जाएं। हम आपको ये वादा नहीं दे सकते और ना ही हम ये वादा निभा सकते हैं। हम झूठ नहीं बोल सकते जी, हम तो जो कर सकते है उतना बताते हैं कि हम कोल्ड स्टोरेज बनाएंगे आलू का वेल्यू एडीशन करने के लिए काम करेंगे, आलू से चिप्स बन जाये, बाज़ार में बिक जाए। हम ऐसे काम करेंगे भाई जो आप भी समझते हैं मैं भी समझता हूं। आपको उपज का सही दाम भी मिलेगा और देश को विदेशी मुद्रा भी मिलेगी।

भाइयो और बहनो, आपके इस चौकीदार की नीयत और नीति बिल्कुल साफ है। हम किसानों को हर वो सुविधा देना चाहते हैं जिससे उनकी आय दो गुनी हो सके। इसी कड़ी में हमने पी एम किसान योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत यूपी में सवा करोड़ से अधिक परिवारों के खाते में पहली किश्त के पैसे आ भी चुके हैं, जिनको अभी तक नहीं मिले हैं उनको जल्द ही मिलने वाले हैं और एक बात मैं स्पष्ट करना चाहता हूं ये पैसे आपके हैं, ये पैसे आपके हैं, ये पैसे आपके हक के हैं, ये आपको लौटाने नहीं पढ़ेंगे। कुछ लोग अफवाह फैला रहे हैं की चुनाव के बाद मोदी ले लेगा, ये अफवाह फैलाने में, एक बात है ये तो मान लिया है की 23 मई को फिर से मोदी की सरकार बनेगी। यह तो मान लिया है इन लोगों ने, अब मैं वादा ये करता हूं ये पैसा जो दिया है ये आपका है आपकी मालिकी का है, कोई सरकार गांव का प्रधान हो या देश का प्रधान कोई भी वो रुपया ले नहीं सकता है। इतना ही नहीं ये एक बार नहीं है ये हर साल मिलेगा आपको, हर साल 3 बार, हर वर्ष 3 बार मिलेगा भाइयो।

साथियो, अब तो हमने इसको विस्तार देने का फैसला लिया है 23 मई को जब फिर एक बार मोदी सरकार, फिर एक बार मोदी सरकार, फिर एक बार मोदी सरकार। 23 मई को जब फिर एक बार मोदी सरकार आप बनाएंगे, तब यूपी के सभी किसानों को इसका लाभ दिया जाएगा। अभी जो नियम है वो 5 एकड़ तक का ही है, हमने नई सरकार बनने के बाद वो 5 एकड़ नियम वाला भी हटा देंगे, सब किसानों को मिलेगा। भाइयो और बहनो, किसानों के साथ-साथ इत्र और जरदोजी जैसे हमारे पुश्तैनी व्यवसाय भी देश की ताकत है। देश भर में यूपी सहित करीब 100 ऐसे स्थान हैं जहाँ इस तरह के व्यवसाय होते हैं। लिहाजा इनके विकास पर विशेष बल दिया जा रहा है। यहाँ भी योगी जी की एक जनपद-एक उत्पाद नाम से बढ़िया योजना चला रहे हैं, जिसका लाभ इत्र व्यवसाय करने वालों को भी होना सुनिश्चित हुआ है। साथियो, सबका साथ-सबका विकास हमारा मंत्र है और सबको सुरक्षा-सबको सम्मान ये हमारा प्रण। इसी सोच के साथ हमने काम किया है। साथियो, दिव्यांगजनों के बारे में आजादी के बाद पहली बार किसी सरकार ने गंभीरता से काम किया है तो वो भाजपा की सरकार है। सरकार ने सरकारी सेवाओं में अधिक भागीदारी तो सुनिश्चित की ही है, उनको असुविधा ना हो इसका भी ध्यान रखा है। दफ्तर से ले कर रेल के डिब्बों तक दिव्यागों के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। इसी तरह देश भर में दिव्यांगों को सहायता उपकरण आवंटित करने के लिए करीब आठ हजार शिविर बीते पांच वर्षों में लगाए गए हैं। आठ हजार की संख्या इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले की सरकार ने सिर्फ कुछ दर्जन कैंप लगाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी करना मान लिया था।

भाइयो-बहनो, ये तभी संभव हो सकता है जब नेक नीयत वाली सरकार हो, संवेदनशील सरकार हो वरना फर्रुखाबाद वाले तो भली-भांति जानते हैं की दिव्यांगों के नाम पर कैसे-कैसे खेल हुए। याद है ना कि याद कराऊं, दिव्यांग उपकरण घोटाला। कांग्रेस की करप्शन की किताब का एक और काला अध्याय है ये। भाइयो-बहनो, कांग्रेस हो, सपा हो, बसपा हो इनका सिर्फ एक ही मंत्र है, जात-पात जपना, जनता का माल अपना। पूरी ताकत से बोलिए। जात-पात जपना, जनता का माल अपना। जात-पात जपना, जनता का माल अपना। इतना बता दो लोगों को ये धंधा ये करते हैं और इसलिए उनको दिल्ली में एक ऐसी सरकार चाहिए जो मजबूर है। ताकी ये मन मर्जी कर सकें, लूट चला सकें, ठीक वैसे ही जैसे 2014 से पहले ये करते थे। लेकिन तीन चरणों के चुनाव के बाद आधा देश इनका ये सपना तोड़ चुका है, अब आप सभी चौकीदारों की बारी है। कमल के फूल के सामने जब आप बटन दबाएंगे तो आपका हर वोट मोदी के खाते में जाएगा। भाइयो-बहनो, आप ने देखा होगा, ये लोग जब चुनाव हारने की कगार पर आते हैं तब गाली-गलौज करने में इतने नीचे उतर आते हैं और आपने पिछले कई चुनाव देखे होंगे की एक, दो, तीन चरण पूरे चरण होने के बाद वो शुरू कर देते हैं, मोदी कौन जात का है। कोई कह देता है ये तो नीच जात का है, कोई कहता है ये तो नीच है, मैं हैरान हूं। मैं कभी जाति के नाम पर राजनीति के पक्ष का नहीं हूं। इस देश को जब तक मुझे मेरे विरोधियों ने गाली नहीं दी तब तक पता ही नहीं था की मेरी जाति कौन सी है लेकिन अब मैं बहन जी का आभारी हूं, अखिलेश जी का आभारी हूं, कांग्रेस का आभारी हूं, महामिलावटियों का आभारी हूं की अब वो खुल कर के मेरे पिछड़ेपन की चर्चा कर रहे हैं।

आपके लिए पिछड़ी जाति में पैदा होना राजनीति का खेल होगा, मेरे लिए पिछड़ी जाती में पैदा होना मां भारती की सेवा करने का सौभाग्य है और कुछ नहीं। और बहन जी, महामिलावटी लोग मेरी जाति तो इतनी छोटी है, गांव में एक-आध घर भी नहीं होता है और मैं तो पिछड़ा नहीं अति पिछड़े में पैदा हुआ हूं, आप मेरे मुंह से बुलवा रही हो इसलिए बोल रहा हूं। मैं कभी भी अगले-पिछड़े की राजनीति का पक्षकार नहीं हूं, जब मेरा देश पिछड़ा है तो अगड़ा क्या होता है, मुझे तो पूरे देश को अगड़ा बनाना है। लेकिन भाइयो-बहनो, जब आप अगड़े-पिछड़े की बात कर रही हो, मेरी जाति को लेकर प्रमाणपत्र बांट रहे हो। जो खेल मैंने कभी खेला नहीं लेकिन मैं बता देता हूं, मेरी जाति अति पिछड़ी जाति है और इतनी छोटी है। मुझे याद है अहमदाबाद में हमारे समाज के लोग बच्चों के लिए एक हॉस्टल बनाना चाहते थे तो पूरा समाज इकट्ठा हुआ था और दोनेशन के लिए कह रहे थे तो दोनेशन क्या आ रहा था? कोई 1 हजार रुपए देने के लिए आगे हुआ, ज्यादा से ज्यादा देने वाला कितना था, एक सज्जन निकले बोले मैं 51 हजार दूंगा। तो मेरे बगल में जिस जगह पर कार्यक्रम था उस स्कूल के एक सीनियर व्यक्ति बैठे थे, उन्होंने कहा मेरे समाज की मीटिंग हुई होती तो 10 मिनट में 10 करोड़ रुपया आ जाता। हम इतने सामान्य समाज से आए हैं लेकिन आप जाति पर हमें बोल रही हो। और देख लीजिए भाई नमक कितना भी कम क्यों ना हो लेकिन खाने में जब नमक आ जाता है ना तो खाने का स्वाद बढ़ जता है और जब इतना ही क्यों ना हो लेकिन जब खाने में नमक नहीं होता है तो बढ़िया से बढ़िया खाना खाने का मन नहीं करता है। और ये मोदी तो ऐसी अति पिछड़ी जाती का है, नमक का काम कर रहा है ताकी इस देश के हर गरीब का खाना स्वादिष्ट बने इसलिए काम कर रहा है। कृपा करके, मैं हाथ जोड़ क विनती करता हूं, ये जाति की राजनीति में मुझे मत घसीटिए, मैं मां भारती को, ये 130 करोड़ लोग मेरा परिवार है।

भाइयो-बहनो, आज चुनाव का आखिरी दिन है, चौथे चरण के मतदान का प्रचार ये आखिरी चरण है। मैं आज कन्नौज की जो महक है उसके इत्र से दुनिया महकती है उसी कन्नौज से चौथे चरण के मतदाताओं को, देश भर के मतदाताओं को आग्रह करता हूं। कन्नौज के इत्र की तरह मेरी बात भी आप तक पहुंच जाए। ज्यादा से ज्यादा मतदान कीजिए, कितनी भी गर्मी क्यों ना हो मतदान के रिकार्ड तोड़ दीजिए और जब कमल के फूल पर बटन दबाओगे ना तो आपका वोट सीध-सीधा मोदी के खाते में जाएगा। भाइयो-बहनो, आप मुझे बताइए, देश मजबूत होना चाहिए कि नहीं? मजबूत सरकार होना चाहिए कि नहीं? चौकीदार मजबूत होना चाहिए कि नहीं? तो हाथ ऊपर कर के मेरे साथ संकल्प लीजिए, दोनों हाथ ऊपर करके आपके बोलना है चौकीदार। क्या बोलेंगे? चौकीदार।

मेरे साथ बोलिए, गांव-गाव है चौकीदार, शहर-शहर है चौकीदार, बच्चा-बच्चा चौकीदार, बड़े-बुजुर्ग भी चौकीदार, माता-बहनें चौकीदार, घर-घर में चौकीदार, खेत-खलिहान में चौकीदार, बाग-बगान में चौकीदार, देश के अंदर चौकीदार, सरहद पर भी चौकीदार, डॉक्टर-इंजीनियर चौकीदार, शिक्षक-प्रोफेसर चौकीदार, लेखक-पत्रकार चौकीदार, कलाकार भी चौकीदार, किसान-कामगार चौकीदार, दुकानदार भी चौकीदार, वकील-व्यापारी भी चौकीदार, छात्र-छात्राएं भी चौकीदार।

भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय। बहुत-बहुत धन्यवाद।
 

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दुनिया भारत को ग्रोथ और उम्मीद की नई किरण के रूप में देख रही है: इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2026 में पीएम मोदी
August 21, 2026
दुनिया भारत को विकास और उम्मीद की एक नई किरण के रूप में देखती हैः प्रधानमंत्री
भारत नीतिगत स्तर पर अगली पीढ़ी के सुधार लागू कर रहा है, शासन में भी सुधार किए जा रहे हैं: प्रधानमंत्री
पहले उत्पादन बढ़ाने पर सजा मिलती थी लेकिन आज, हमारी सरकार उत्पादन बढाने के लिए प्रोत्साहन दे रही है
भारत में राजनीतिक स्थिरता और नीतियों में निरंतरता हैः प्रधानमंत्री
पहले नियमों का तरीका था ‘जब तक अनुमति नहीं मिले तब तक मना’, हम इसे बदल कर ‘जब तक मना न हो तब तक अनुमति’ कर रहे हैंः प्रधानमंत्री
सरकार और नागरिकों के बीच का रिश्ता शक पर नहीं, बल्कि भरोसे पर आधारित होना चाहिएः प्रधानमंत्री
हम ऐसी नीतियां बना रहे हैं जो जनता, विकास और प्रगति के पक्ष में होंः प्रधानमंत्री

World Leaders Forum का ये प्रतिष्ठित मंच, Business और Industry की दुनिया के सभी जाने माने दिग्गज, पॉलिसी मेकर्स, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों।

आप सबके बीच आकर के खुश होना बहुत स्वाभाविक भी है। इस साल समिट का फोकस Shared Future पर है। पिछले कुछ वर्षों में दुनिया ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं। और इन अनुभवों ने एक बात बहुत स्पष्ट कर दी है, कोई चाहे या ना चाहे, हर देश का भविष्य, उसका फ्यूचर, एक-दूसरे से जुड़ा हुआ ही है, Isolation में कुछ संभव नहीं है। इसीलिए Shared Futures की ये theme, आज और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है। और भारत तो हमेशा से इसी भावना को लेकर चला है। जी-20 की अध्यक्षता में इसलिए ही भारत का मंत्र रहा, One Earth, One Family, One Future. Shared Future की ये भावना और इसके साथ जुड़ा दायित्वबोध, 21वीं सदी के इस विश्व की अनेक समस्याओं का समाधान देता है।

साथियों,

आज दुनिया में growth को लेकर के कई तरह की चिंताएं हैं। दुनिया ने बड़ा भयंकर एक रूप देखा है इन दिनों। Resources का वेपनाइजेशन हो रहा है। अविश्वास का वातावरण विश्व के लिए अनेक नई चुनौतियां लेकर के आ रहा है। लेकिन ऐसे समय में भी, दुनिया भारत को growth और hope के bright spot के रूप में देख रही है। भारत ने पिछले 10-12 साल में अपनी 25 करोड़ आबादी को गरीबी से बाहर निकाला है। इतना ही नहीं, अगर आने वाले दिनों की चर्चा करें, तो IMF का forecast है कि भारत दुनिया की fastest growing major economy बना रहेगा। और भारत निरंतर वो कदम उठा रहा है, जो उसके विकास को गति दे रहे हैं।

Friends,

अभी पिछले हफ्ते ही, 15 अगस्त को मैंने लाल किले से सप्त-धारा की सप्त-शक्तियों की बात की है। मैन्यूफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, फूड प्रोसेसिंग, ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी समेत, मैंने ऐसे सात सेक्टर्स की बात की है, जिन पर भारत का आज बहुत ज्यादा फोकस है। और इसलिए भारत आज, Policy level पर, नेक्स्ट जनरेशन reforms कर रहा है, ताकि हमारा future सुरक्षित हो। Governance पर reforms कर रहा है, Ease of Living के लिए reforms कर रहा है। पिछली बार जब मैं इसी मंच के माध्यम से आपसे जुड़ा था, तब भी मैंने कहा था, ये Reforms हमारे लिए Compulsion नहीं है। ये हमारा commitment है, ये हमारा conviction है।

साथियों,

2014 में, जब हमारी सरकार बनी, तो उसके बाद से ही रिफॉर्म्स ने कैसे देश की दिशा और दशा बदली है, मैं इसका एक बहुत दिलचस्प उदाहरण आपको देना चाहता हूं। यहां मौजूद शायद ही किसी को PLP के बारे में पता होगा, कोई है, जिसको PLP के बारे में पता है? अपना हाथ उठाएं। यहां इतने मीडिया के दिग्गज बैठे हैं, PLP आपको पता है? और आप सुनकर के हैरान हो जाएंगे। PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट, इसके बारे में किसी को पता नहीं है। और एक दूसरा टर्म आपने जरूर सुना है PLI, ये ज्यादातर लोगों को पता होगा। PLI- यानी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव।

साथियों,

ये दोनों टर्म, भारत के दो अलग-अलग Time Period को डिफाइन करते हैं। आजकल Explainer का जमाना है, तो मैं आपको Explain करता हूं।

साथियों,

आज की युवा पीढ़ी को ये सुनकर हैरानी होगी, कि हमारे देश में एक समय ऐसा भी था, कि अगर कोई कंपनी तय लिमिट से ज्यादा प्रॉडक्शन कर दे, तो उसे पनिशमेंट दिया जाता था। ये पहले की लाइसेंस राज वाली सरकारों का, PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट मॉडल था। ऐसे भी उदाहरण रहे हैं कि अगर किसी फैक्ट्री ने ज्यादा डिमांड देखते हुए ज्यादा प्रॉडक्शन कर दिया, तो उसे नोटिस भेज दिया जाता था। मजबूरी में वो कंपनी अपना प्रॉडक्ट मार्केट में बेचने के बजाय, उसे खुद ही नष्ट कर देती थी।

साथियों,

आज जो लोग Make In India और आत्मनिर्भर भारत अभियान का मजाक उड़ाते हैं, उनके पुरखों की सोच यही थी, PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट। ऐसा करने के पीछे एक विशेष तरह की विकृत मानसिकता काम करती थी। ऐसी मानसिकता वाले लोग हमेशा चाहते थे कि जरूरी चीजों की किल्लत बनी रहे। देश के नागरिकों को अभाव में रखना उनकी पॉलिसी थी। वो चाहते थे कि जनता उनके सामने हाथ जोड़े, हाथ फैलाए, आप समझ गए मैं किन लोगों की बात कर रहा हूं। लोगों से हाथ जुड़वाने के बाद उपकार करना, उन सरकारों का तरीका था, इसलिए वो प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट मॉडल पर चलते थे। आप कल्पना कर सकते हैं, ऐसे करके उन लोगों ने Employment Generation के बेसिक principal का गला घोंट दिया था। और हैरानी ये, इन लोगों के दरबारियों ने again I repeat, इन लोगों के दरबारियों ने, कभी इसके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाई।

साथियों,

हर reform की शुरुआत सबसे पहले, आपके सोचने के तरीके, आपके मानसिक, किस रेंज में आप काम कर रहे हैं, इस सोच के reform से ही होती है। जहां पहले production बढ़ाने पर पनिशमेंट मिलता था, वहीं आज हमारी सरकार production बढ़ाने पर incentive दे रही है। और आज PLI स्कीम की सक्सेस दुनिया देख रही है। सिर्फ इस एक योजना की वजह से, मैं सारी योजनाओं की बात नहीं करता हूं, एक की बात करता हूं, करीब ढाई लाख करोड़ रुपए का actual investment हुआ है। 22 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का production और sales हुई है। 15 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का exports हुआ है, और 14 लाख से ज्यादा direct और indirect jobs बनी हैं। और मैं फिर याद दिलाउंगा, ये आंकड़े सिर्फ एक स्कीम के हैं। आप सोचिए, पहले का लाइसेंस राज वाली सरकार का पनिशमेंट मॉडल जहां बेरोजगारी बढ़ाता था, वहीं आज का हमारा incentive मॉडल लाखों नई जॉब्स क्रिएट कर रहा है।

साथियों,

आज भारत में ये तेज विकास, ये तेज रिफॉर्म इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि भारत में और जिसका अभी सत्य ने उल्लेख किया, political stability है, हमारी policy में continuity है। पहले देश में रिफॉर्म्स की बात करने वाले घोषणा तो कर देते थे, बाद में भूल जाते थे। लेकिन हमने रिफॉर्म्स को लेकर एक क्लियर रोडमैप बनाया। इस रोडमैप की प्रमुख दिशा रही है- गवर्नेंस लेवेल के रिफॉर्म्स हों! इसके लिए, आज 21वीं सदी के भारत में, हम सिर्फ regulations नहीं बदल रहे हैं, हम regulation की पूरी philosophy बदल रहे हैं। पहले regulations की अप्रोच थी- “Prohibited unless permitted.” यानी जब तक सरकार इजाजत ना दे, तब तक आप वो काम नहीं कर सकते। हम इस approach को बदलकर, “Permitted unless prohibited” की तरफ ले जा रहे हैं। यानी, जो काम कानून ने स्पष्ट रूप से मना नहीं किया है, उसके लिए हर कदम पर permission की कोई जरूरत नहीं होनी चाहिए। और इसके पीछे सोच बहुत सीधी है, सरकार और नागरिक के रिश्ते का आधार, Suspicion नहीं, trust होना चाहिए।

साथियों,

यही सोच आपको Jan Vishwas बिल में भी दिखाई देती है। मैं मानता हूं, हर procedural गलती को criminal offence मान लेना ठीक नहीं है। इसीलिए अनेक offences को decriminalise किया गया है। कई मामलों में जेल की जगह केवल आर्थिक penalty का प्रावधान किया गया है। Government और enterprise के रिश्ते में, हम इसी reform mindset को आगे बढ़ा रहे हैं। बीते वर्षों में 40 हजार से ज्यादा compliances हटाए गए हैं, 40 thousand. डेढ़ हजार से ज्यादा, 15 hundred, डेढ़ हजार से ज्यादा, पुराने और बेकार हो चुके कानून हमने खत्म किए, और जब इन सारे reforms को एक साथ देखते हैं, तो अंदाजा होता है, हमारी industries और businesses के कंधों से कितना बड़ा बोझ कम हुआ है।

साथियों,

गवर्नेंस रिफॉर्म्स की इस प्रक्रिया, उस पर हम निरंतर काम कर रहे है। अभी संसद के मॉनसून सत्र में हमने ‘बैंकर्स बुक एविडेंस बिल’ पारित किया है। और वो भी तब जब विपक्ष ने संसद में लगातार गतिरोध बनाया हुआ था। हमने देश की सेवा करने का काम रूकने नहीं दिया। अब इस कानून ने 19वीं सदी के अंग्रेजी कानून को रिप्लेस किया है। अब बैंकों के डिजिटल रिकॉर्ड्स की स्वीकार्यता को कानूनी मान्यता दी गई है। इससे कानूनी उलझनें कम होंगी, सिस्टम में पारदर्शिता होगी, Ease of Doing Business बढ़ेगा।

साथियों,

गवर्नेंस में रिफॉर्म का एक मतलब ये भी है कि सिस्टम ऐसे बनें, जिसमें एक-एक मानव जीवन और उसके समय के प्रति संवेदनशीलता हो। मैं रेलवे का उदाहरण देता हूं। हमारी रेलवेज में भी इसी अप्रोच के साथ काम हुआ है। आज साढ़े 6 हजार से ज्यादा रेलवे स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की व्यवस्था है। 10 हजार से ज्यादा लेवल क्रॉसिंग गेट्स को भी इंटरलॉकिंग से जोड़ा जा चुका है। इससे ह्यूमन एरर से होने वाले हादसों की आशंका बहुत कम हुई है।

साथियों,

जब 2014 में हमारी सरकार आई, तो करीब 9 हजार फाटक ऐसे थे जो Un-Manned थे। इन्हें हटाना कोई रॉकेट साइंस नहीं था। Un-Manned क्रॉसिंग्स की वजह से हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, लेकिन पहले की सरकारों को इससे बहुत फर्क नहीं पड़ता था। हमने मिशन मोड में, गत दस वर्ष में, इन Un-Manned क्रॉसिंग्स को समाप्त कर दिया। हमने रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज बनाने की गति भी कई गुना बढ़ा दी। और इसी का नतीजा है कि 2014 के पहले के मुकाबले ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या में Ninety Percent तक की कमी आई है, 90, Ninety Percent. 12 साल पहले जहां एक साल में करीब डेढ़ सौ रेल दुर्घटनाएं होती थीं, वहीं अब इनकी संख्या घटकर 15-20 रह गई है। और हम इसे और कम से कम करने का प्रयास लगातार कर रहे हैं।

साथियों,

Railways में स्वच्छता भी गवर्नेंस रिफॉर्म का एक बड़ा उदाहरण है। एक समय था, जब रेल पटरियों पर गंदगी और human waste एक बड़ी समस्या हुआ करती थी। आज स्थिति पूरी तरह बदल गई है। 2014 से पहले हमारी ट्रेनों में जहां लगभग 12 हजार बायो-टॉयलेट्स लगाए गए थे, वहीं 2014 के बाद ट्रेनों में 3 लाख 60 हजार से ज्यादा बायो-टॉयलेट्स लगाए गए हैं। यानी, 97 प्रतिशत से ज्यादा बायो-टॉयलेट्स पिछले 12 वर्षों में लगे हैं। ये बदलाव सिर्फ सफाई का नहीं, यात्रियों की गरिमा, स्वच्छता और आधुनिक भारत के निर्माण की दिशा में गवर्नेंस का एक नया मॉडल है। ये करोड़ों यात्रियों को बेहतर अनुभव देने का अभियान भी है।

साथियों,

गवर्नेंस की क्वालिटी का एक और पैमाना, और वो पैमाना है - समय। जो प्रोजेक्ट शुरू हो, वो समय पर पूरा हो। और जो सर्विस लोगों को मिले, वो भी समय की कसौटी पर खरी उतरे। दिल्ली-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल सिस्टम इसका बहुत अच्छा उदाहरण है। इस कॉरिडोर पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चल रही हैं। ये हमारे देश में पहले कभी सोचा नहीं जा सकता था। अब तक 4 करोड़ से ज्यादा यात्री इसमें ट्रैवल कर चुके हैं। और इसका एक और अहम फैक्टर है, जिसकी चर्चा नहीं होती है। दिल्ली मेरठ नमो भारत रैपिड रेल की पंक्चुअलिटी 99.9 परसेंट है। वरना हम तो हर चीज में कहते हैं, लेट हो तो कहते थे, ये तो इंडियन टाइम है। वक्त बदला है, ये मैं छोटी-छोटी चीजें इसलिए बताता हूं, कि हमें अंदाज आए कि कितने बड़े व्यापक स्तर पर काम हो रहा है। इसी तरह, Delhi Metro की पंक्चुअलिटी। Delhi Metro की पंक्चुअलिटी 99.9 परसेंट है। और ये punctuality, New York, Hong Kong और Paris जैसे शहरों की Metro से करीब-करीब बराबर हो चुकी है। ये सिर्फ समय पर चलती हुई Metro और नमो रेपिड रेल की कहानी नहीं है, ये समय के साथ बदलते हुए भारत की पहचान है। मैं जानता हूं कि अभी भी, और र्मैं कोई इतने से संतोष मानकर बैठने वाला व्यक्ति नहीं हूं, अभी भी इस दिशा में हमें बहुत कुछ करना है, बहुत कुछ बाकी है, लेकिन हम लगातार कर रहे हैं। लेकिन एक शुरूआत तो हुई है और ये शुरुआत सराहनीय है।

साथियों,

हमारे रिफॉर्म्स रोडमैप का एक और बड़ा आयाम है- पॉलिसी लेवल पर होने वाले रिफॉर्म्स! आज हम ऐसी policies बना रहे हैं, जो pro-people हों, Pro-growth हों, pro development हों! पॉलिसीज़ देश और देश के लोगों की जरूरत के हिसाब से होनी चाहिए न कि पॉलिसीज़ बनाकर देश को उनके हिसाब से चलने को मजबूर होना पड़े! मैं आपको एक और Interesting उदाहरण देना चाहता हूं। कुछ साल पहले तक हमारे यहाँ देश का नक्शा बनाना भी गैर-कानूनी था, मैप बनाए तो गैर कानूनी था, आप जेल चले जाएंगे। बिना परमिशन के आप देश में मैपिंग का काम भी नहीं कर सकते थे। आप सोचिए, विदेशी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के जरिए भारत के किसी भी कोने को मैप कर सकती थी, लेकिन भारत में भारतीयों पर भारत का मैप बनाने पर पाबंदी लगी हुई थी।

साथियों,

आज टेक्नोलॉजी के इस दौर में, इस एक पाबंदी से कितने स्टार्टअप्स की हत्या हो सकती थी! कितने ideas implement होने से वंचित रह सकते थे! हमने इस व्यवस्था को भी बदला। हमने Geospatial डेटा का Deregulation किया और आज Geospatial डेटा कितने ही स्टार्टअप्स का आधार बन रहा है।

साथियों,

आज आप लगातार ड्रोन्स की उपयोगिता बढ़ते हुए देख रहे हैं। एग्रीकल्चर में, डिफेंस में, डिलिवरी में, शूटिंग में, कंटेंट क्रिएशन में, ये सब संभव ही नहीं होता, अगर सरकार ने इससे जुड़े नियमों में Reform नहीं किए होते। पहले देश में ड्रोन फ्लाइंग पूरी तरह नियमों में, बंधनों में जकड़ी हुई थी। हमने उसे बंधनों से आजाद किया, और आज भारत की ड्रोन इंडस्ट्री, एक अभूतपूर्व उड़ान के साथ आगे बढ़ रही है।

साथियों,

पहले border areas को लेकर सरकारों की सोच थी कि बॉर्डर पर roads और infrastructure बढ़ेगा, तो उसका फायदा दुश्मन भी उठा सकता है। हमने इस सोच को बदला। हमने कहा, Border infrastructure कमजोरी नहीं, देश की ताकत है। और इसीलिए आज border areas में roads, bridges और tunnels का network तेजी से बढ़ रहा है। सिर्फ 2024 और 2025 में ही, BRO के 250 infrastructure projects देश को समर्पित किए गए हैं। सोच बदली, तो border infrastructure की तस्वीर भी बदल गई।

साथियों,

एक उदाहरण न्यूक्लियर रिफॉर्म्स का भी है। एक ऐसे समय में, जब विकास पूरी तरह से energy dependent है, बंदिशों और प्रतिबंधों के कारण, देश अपने न्यूक्लियर potential का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा था। हमने शांति बिल के जरिए इसमें भी बड़ा रिफॉर्म किया है। आज भारत में न्यूक्लियर एनर्जी में प्राइवेट सेक्टर के लिए रास्ता खुल चुका है। इसी तरह, हमने एक बड़ा पॉलिसी रिफॉर्म डिफेंस सेक्टर में भी किया। 200 साल के पहले जो व्यवस्था चली आ रही थी, उसे बदलकर हमने 40 से ज्यादा ordnance फैक्ट्रीज़ को मर्ज करके 7 फैक्ट्रीज़ बना दी। और उसका परिणाम हमें देखने को मिल रहा है। आज भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए भी आत्मनिर्भर बन रहा है, और 2014 की तुलना में, हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट 55 गुना बढ़ा है। और इसलिए, कई बार रिफॉर्म्स हमारे जीवन में इस तरह घुल-मिल जाते हैं कि हमारा उनकी तरफ ध्यान ही नहीं जाता। आप सोचिए, आपका कोई सामान्य दिन आज कैसे बीतता है। आप सुबह उठते हैं, फोन पर घर का सामान ऑर्डर कर देते हैं, और जब तक ऑफिस के लिए रेडी होते हैं, वो सारा सामान आपके घर आकर के पहुंच जाता है। आपकी गली के स्ट्रीट वेंडर से लेकर, आपकी गाड़ी के शो रूम तक, आपकी सारी पेमेंट्स, सिर्फ एक क्यूआर कोड स्कैन करके हो जाती है। अगर आपकी बेटी, किसी दूसरे शहर में पढ़ती है, तो आप फोन से उसे पैसे भेज सकते हैं, और वो पैसा, कुछ सेकंड्स में उसके पास भी पहुंच जाता है। कई बार तो बिटिया क्यूआर ही शेयर कर देती है कि ‘पापा-मां मैंने ये ड्रेस ले ली है, इसकी पेमेंट कर दीजिए, और आप उसकी शॉपिंग अपने घर बैठे-बैठे करवा देते हैं। ये चीजें Remarkable हैं, लेकिन अब ये कोई भारत के लोगों को कम से कम हैरानी नहीं होती, बाहर के लोग आते हैं, उनको आश्चर्य होता है, अच्छा ऐसे होता है। भारत के लोगों का रूटीन हो गया है। ये भारत के सामान्य मानवी के जीवन का हिस्सा बन चुका है। आप सोचिए, 2014 से पहले ऐसी कितनी ही बातें क्या पॉसिबल थीं?

साथियों,

भारत ने बीते 10-12 सालों में Ease of Living से जुड़े जो रिफॉर्म्स किए हैं, उसकी वजह से लोगों का, खासतौर पर हमारे मिडिल क्लास का जो जीवन बदला है, वो दुनिया के कई विकसित देशों में आज भी एक सपना ही है।

साथियों,

आज दुनिया का सबसे सस्ता डेटा भारत में है, हम सस्ते और अच्छे स्मार्टफोन्स बना रहे हैं। अभी सत्या ने उसका वर्णन किया। भारत दुनिया के fastest 5G rollouts करने वाले देशों में से एक है। हमने आधार को बैंकिंग, मोबाइल कनेक्टिविटी और सर्विसेज से जोड़कर, ई-के.वाई.सी और Digital Authentication जैसी सर्विसेज को पॉसिबल किया है। आज आपको अगर बैंक अकाउंट खोलना है, तो उसके लिए बैंक जाने तक की जरूरत नहीं है। सरकार ने बैंक को ही, आपके पास पहुंचा दिया है। आज चाहे कोई बिल जमा करना हो, कोई टिकट करानी हो, किसी सरकारी दफ्तर में जाने की जरूरत नहीं पड़ती, ये सारा काम ऑनलाइन हो जाता है। इनकम टैक्स की फाइलिंग का काम आसान हुआ है। ऐसी व्यवस्था बनी है कि फॉर्म में मैक्सिमम जानकारियां पहले से भरी होती हैं। आप ये इन्फॉर्मेशन वेरिफाई करते हैं, कुछ जोड़ना है तो जोड़ देते हैं, और सबमिट करते हैं, आपका काम पूरा हो जाता है। पहले जो रिफंड आने में महीनों लगते थे, अब वो भी कुछ ही दिनों में आ जाता है।

साथियों,

आज ई-संजीवनी की मदद से, शायद इसकी चर्चा अभी बहुत कम होती है, ई-संजीवनी की मदद से, गांव के दूर दराज के लोग भी, कहीं से भी डॉक्टर्स के साथ सीधी अपनी चर्चा करके अपने उपचार का रास्ता लेते हैं। और इससे जिन लोगों को अस्पताल जाने के लिए कई किलोमीटर का सफर करना पड़ता था, आज डॉक्टर उनके घर पर, उनकी स्क्रीन पर उपलब्ध है। अब तक ये आंकड़ा भी आपको जरूर आश्चर्य करेगा। यानी भारत ने टेक्नोलॉजी को किस प्रकार से अडाप्ट किया है, सामान्य मानवीय के जीवन को कैसे सरल किया है। अब तक ईं-संजीवनी के तहत करीब-करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशंस हो चुकी हैं।

साथियों,

आज भारत में Travel Experience बदल रहा है, भारत के नागरिकों की यात्राएं पूरी तरह बदल गई हैं। यहां इस हॉल में ऐसा व्यक्ति खोजना मुश्किल होगा, जिसने एयरपोर्ट पर डिजी यात्रा का इस्तेमाल ना किया हो। ऐसे ही आजकल बहुत सारा काम Seamless तरीके से हो रहा है। हाइवे पर फास्ट टैग चल रहे हैं, ताकि आप बिना रुके टोल देकर आगे बढ़ सकें। Ease of Living का सही अर्थ यही है। समय की बचत हो रही है, जीवन आसान हो रहा है, और करोड़ों लोग अपनी प्रगति पर फोकस कर पा रहे हैं।

साथियों,

Politics में अक्सर वही फैसले headlines बनते हैं, जिनका असर आज दिखाई दे, यानी उसकी उमर 24 घंटे हो। पहले की सरकारों ने इलेक्शन सामने देख कर भी घोषणाएं करने का फॉर्मूला अपनाया। लेकिन ऐसी घोषणाओं से देश नहीं बदला। देश बदलने वाले फैसले वो होते हैं, जिनका प्रभाव जमीन पर दिखे, जो वर्तमान और भविष्य, दोनों को ध्यान में रखकर के लिए गए होने चाहिए।

साथियों,

पीएम कुसुम योजना और पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना इसका बहुत बड़ा यूनीक Example है। कुसुम योजना से किसानों को बिजली की चिंता से मुक्ति मिली है। और सूर्यघर योजना से मिडिल क्लास को बहुत फायदा हुआ है।

साथियों,

मैं ये जानता हूं कि अगर मैंने ये अनाउंस कर दिया होता कि आज से लाखों-लाख परिवारों के लिए बिजली मुफ्त है, तो सारा मीडिया, सारी स्क्रीन्स, सारे न्यूजपेपर्स, बड़ी-बड़ी हेडलाइन बनाकर के खबर दे देते कि मोदी जी ने आज अनाउंस कर दिया है। लेकिन हमने कुछ दूसरे अप्रोच से काम शुरू किया। हमने हर घर की छत पर एक सूरज उगाने की ठान ली, और आज देश के 50 लाख से ज्यादा परिवार, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से जुड़े हैं। सरकार ने 22 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा इन परिवारों को दिए हैं, ये सोलर सिस्टम लगाने के लिए, ताकि उनकी छत पर सोलर प्लांट लगाकर सोलर पावर पैदा की जा सके। अब ये परिवार, एक्स्ट्रा बिजली को, बिजली ग्रिड में बेचकर, पैसे भी कमा रहे हैं। खुद का बिल तो जीरो हुआ, कमाई भी होने लगी। इस योजना से लोगों के सपनों को भी विस्तार मिल रहा है। बिजली बिल कम हुआ है, तो अब घर में फ्रिज, कूलर, वाशिंग मशीन, टीवी जैसी चीजें लोग खरीदकर रखने लगे हैं। अब ये डर नहीं होता कि बिजली कटौती की वजह से दूध फट जाएगा, अब चिंता नहीं रहती है। अब स्कूल जाने वाले बच्चे रातभर चैन से सो पाते हैं। मैं फिर कहता हूं- इलेक्शन हो या ना हो, लेकिन ये सूर्यघर और उसकी रोशनी बनी रहेगी, इस प्लांट का फायदा, सालों तक देश के परिवारों को होता रहेगा।

साथियों,

आने वाले समय में Ease of Living और Ease of Doing Business का और विस्तार होगा। देश के Youth के लिए, नारीशक्ति के लिए, Farmers के लिए, गरीब और Middle Class के लिए, हमारी सरकार लगातार काम करती रहेगी, हमारी Reform Express और अधिक गति से आगे बढ़ने वाली है। विकसित भारत का लक्ष्य पूरा करने के लिए, हम पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करते रहेंगे। और मैं, मेरे लिए भारत का future अगर सुनिश्चित हो गया ना, तो दुनिया के future में भी स्थिरता लाने का बहुत बड़ा काम इसी धरती से होने वाला है। इस आत्मविश्वास के साथ भारत जितना स्टेबल होगा, भारत का future जितना सुरक्षित होगा, विश्व को सुरक्षत्व का एहसास देने की ताकत यहीं से पैदा होने वाली है। इस सामर्थ्य के साथ, इसी संकल्प के साथ, मैं एक बार फिर, आज के इस कार्यक्रम में मुझे आमंत्रित करने के लिए, Economic Times की पूरी टीम का हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। वन्दे मातरम् !