भारत में सुरक्षा की बेहतर स्थिति कांग्रेस को पसंद नहीं आ रही, मसूद अजहर पर हुए फैसले पर वो खुशी मनाने के बजाय, कांग्रेस अपना मजाक उड़वाने में लग गई है: प्रधानमंत्री मोदी
कांग्रेस का पंजा हमेशा मलाई के चक्कर में रहता है, जहां मलाई नहीं, वहां कांग्रेस कभी गई नहीं: पीएम मोदी
देश को सही दिशा देने के लिए, देश के तेज गति से विकास के लिए मजबूत सरकार बहुत जरूरी होती है: प्रधानमंत्री

भारत माता की जय, भारत माता की जय।

मंच पर विराजमान भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री बहन वसुंधरा जी, मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठ नेता गण, हमारे दोनों उम्मीदवार और विशाल संख्या में हमें आशीर्वाद देने के लिए आए हुए मेरे प्यारे भाइयो और बहनो। आप सबको मेरी नमस्कार। इतनी गर्मी में करौली के साथ ही भरतपुर के लोग भी हम सभी को आशीर्वाद देने पहुंचे हैं, आपका बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।

साथियो, आज जब हम सभी यहां एकत्र हुए हैं तो उसी समय देश के पूर्वी और दक्षिणी तटीय इलाकों में रहने वाले हमारे लाखों परिवार एक भीषण चक्रवात का मुकाबला कर रहे हैं। उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, आन्ध्रप्रदेश, तमिलनाडू और पुदुच्चेरी की सरकारों के साथ केंद्र सरकार लगातार संपर्क में है। अब से कुछ देर पहले ही मैंने अफसरों से ताजा अपडेट लिया है। हालात से निबटने के लिए कल भी मैंने विस्तार से, चुनाव की अपनी आपा-धापी के बीच एक विस्तार से समीक्षा बैठक की गई थी। कल ही हमने संबंधित राज्य सरकारों को एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा एडवांस में राशि रिलीज कर चुके हैं। एनडीआरएफ, भारतीय कोस्ट गार्ड, भारतीय नौ-सेना पूरी मुस्तैदी के साथ प्रशासन के साथ जुटी हुई है। मैं चक्रवात प्रभावित सभी राज्य सरकारों को और वहां के लोगों को भरोसा देना चाहता हूं की पूरा देश, केंद्र सरकार, संकट के इस समय में हमारे उन सभी साथियों के साथ है, उन सभी परिवारों के साथ है, उन सभी राज्य सरकारों के साथ है, जहां चक्रवात की आपदा आई है।

साथियो, बड़ी से बड़ी मुश्किल में हम सभी भारतीयों का एकजुट होकर मुकाबला करना एक भारत- श्रेष्ठ भारत की ही पहचान है। भाइयो-बहनो, पांच वर्ष पहले आप सभी ने, पूरे देश ने एक भरोसे के साथ अपने इस सेवक को देश के लिए काम करने का अवसर दिया था। राष्ट्रवाद से ओत-प्रोत इस माटी के एक-एक जन ने ये सोचकर सभी की सभी सीटें भाजपा को दी थी की देश की धाक दुनिया में हो। आपकी उम्मीदों पर आज ये सेवक, मैं जरा आपसे पूछना चाहता हूं, जवाब देंगे, सब के सब जवाब देंगे? आप ने मुझे 25 की 25 सीटें दी थीं, ये राजस्थान का प्यार कम नहीं है भाई, गजब प्यार किया आपने, सेवक पर आपने भरोसा किया लेकिन आज पांच साल हो गए, तो आपका हक बनता है और मेरी जिम्मेदारी बनती है। आप मुझे बताइए, क्या ये आपका सेवक आपकी उम्मीदों पर खरा उतरा कि नहीं उतरा? आपको संतोष है, आप खुश हैं, पहले से ज्यादा आशीर्वाद मिलेगा, पूरी ताकत से मिलेगा? आज पूरी दुनिया भारत की आवाज सुन रही है कि नहीं सुन रही है? दुनिया में भारत का डंका बज रहा है कि नहीं बज रहा है, आप खुश हैं? 

 

साथियो, अभी दो दिन पहले ही भारत के बहुत बड़े दुश्मन आतंकवादियों के सरगना, मसूद अजहर को दुनिया की सबसे बड़ी संस्था ने अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित किया है। पाकिस्तान में बैठा आतंकियों का ये आका कई वर्षों से भारत को घाव पर घाव दे रहा था। मेरे राजस्थान की अनेक वीर माताओं ने अपने वीर बेटे खोए। राजस्थान के अनेक सपूत शहीद हुए, इन आतंकियों के पीठ पर घाव करने के कारण लेकिन अब इस आतंकी का पाकिस्तान में मौज करना मुश्किल हो गया है। साथियो, सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और उसके बाद ये तीसरी, पाकिस्तान के मंसूबों पर, आतंकियों के मंसूबों पर, आतंकियों के सरगना पर ये तीसरी बड़ी अंतरराष्ट्रीय स्ट्राइक हुई है। आप मुझे बताइए, पाकिस्तान की हेकड़ी निकल गई है कि नहीं निकल गई है? आपको अच्छा लगा, यही होना चाहिए ना, मोदी यही रास्ते पर है? आपके आशीर्वाद है ना? 

साथियो, आतंक और आतंकियों से निपटने के कांग्रेस और भाजपा के तरीकों की तुलना नहीं हो सकती। कांग्रेस और भाजपा की कोई तुलना हो सकती है क्या? याद करिए, यही कांग्रेस थी जो कहती थी की हर एक आतंकी के हमले को रोकना मुमकिन नहीं है। कांग्रेस ये कहती थी की नहीं कहती थी? जब कि हमने ये साबित किया है की जम्मू-कश्मीर के दो या तीन जिले छोड़कर आतंकी अब अपनी मनमर्जी, सेना और नागरिकों पर कोई हमला नहीं कर सकते हैं। हमने आतंक के विरुद्ध अपने संकल्प को सिद्ध करके दिखाया है। भाइयो-बहनो, जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तो आतंकी हमले रोजाना की बात हो गए थे। कोई भी शहर कांग्रेस के कार्यकाल में सुरक्षित नहीं था। हर व्यक्ति जानता है की किस तरह 2008 में मुंबई में आतंकवादियों ने हमला किया था। उस समय जो मुंबई में हुआ, वो ना तो पहला आतंकी हमला था और ना ही आखिरी। साथियो, याद करिए, ये बात मैं इसलिए बताता हूं की मीडिया के मित्रों को भी याद रहे, अकेले 2008 में, मैं एक साल की घटना याद करना चाहता हूं। 2008 में जनवरी में, उत्तर प्रदेश के रामपुर में, सीआरपीएफ कैंप पर हमला किया, उन्होंने मई में राजस्थान में, जयपुर में बम धमाके किए, बाद में उन्होंने जुलाई में बेंगलूरू में सीरियल बम धमाके किए। बेंगलूरू को दहलाने के अलगे ही दिन उन्होंने अहमदाबाद में बम धमाके किए, फिर उन्होंने दिल्ली में, सिर्फ सितंबर महीने में दो अलग-अलग आतंकी हमले किए। इसके बाद अक्टूबर में पूर्वोत्तर के तीन बड़े शहर, गुवाहाटी, अगरतला, इम्फाल, सीरियल ब्लास्ट किए, ये सारा 2008 का हिसाब मैंने बताया। इतना होने के बाद 2008 नवंबर में 26/11 को मुंबई में भयानक बड़ा हमला हुआ, होटल में रहे लोगों को मार दिया, ताज पर हमला हुआ, सैकड़ों लोग मारे गए। अब सोचिए, पूरे साल भर हमले होते रहे और 26/11 को इतनी बड़ी घटना हो गई, सोचिए उस समय स्थिति क्या थी और अब क्या है। 

आप बताइए, क्या कारण है की आतंकवादी अब हिम्मत नहीं करते हैं। क्या कारण है? जरा पीछे वाले बताइए, क्या कारण है? ये महिलाएं बताएं, क्या कारण है? अरे मोदी कारण नहीं है, आपका जवाब गलत है। कारण आपका एक वोट है, ये आपके वोट की ताकत है जिसने राजस्थान में मोदी को 25 की 25 सीट दीं, उसकी ताकत है की मोदी मुकाबला करता है। आप मेरे साथ नहीं होते, राजस्थान की वीर भूमि नहीं होती, राजस्थान की वीर-माताओं के आशीर्वाद नहीं होते तो भाई कांग्रेस और मेरे में फर्क क्या होता। अब हमारी माताएं-बहने निश्चित हो कर शापिंग कर सकती हैं और बच्चे बिना किसी डर के खेल-कूद सकते हैं, रिश्तेदारों के यहां जा सकते हैं। भाइयो-बहनो, ये भी याद रखिए की भारत में आज तक दो बार ही ऐसा हुआ है। जब आईपीएल की इतनी बड़ी मैच, जिसमें लोगों को मजा आता है, पूरी युवा पीढ़ी आईपीएल में इंटरेस्ट रखती है लेकिन दो बार आईपीएल, हिंदुस्तान का खेल, हिंदुस्तान में नहीं खेला गया, साउथ-अफ्रीका में खेला। ये दो साल थे 2009 और 2014 और दिल्ली में बैठी हुई सरकार इतनी डरी हुई थी, आतंकवादियों से इतनी कांपती थी, ये सरकार में दम ही नहीं था। उन्होंने क्या किया, 2009 और 2014 में की चुनाव हैं, चुनाव में हमारी पुलिस और सुरक्षा के काम होते हैं इसलिए हम आईपीएल नहीं करेंगे। भाइयो-बहनो, इस बार भी चुनाव चल रहा है कि नहीं चल रहा है, नवरात्री आया कि नहीं आया, रामनवमी आई कि नहीं आई, हनुमान जयंती आई कि नहीं आई, आने वाले दिनों में रमजान आने वाला है कि नहीं आने वाला है, चुनाव चल रहा है कि नहीं चल रहा है फिर भी आईपीएल हो रहा है कि नहीं हो रहा है? ये फर्क होता है, ये पूछ दबाकर के भाग जाने वाली सरकार में बैठे थे, ये मोदी सीना तान कर के जाता है। आईपीएल होगा, डट कर होगा, देखते हैं। अगर आप गोली चलाओगे तो मोदी गोला चलाएगा। हमने दिखा दिया है की लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव और घरेलू क्रिकेट का सबसे बड़ा उत्सव, दोनों एक साथ मना सकता है। लेकिन भाइयो-बहनो, भारत में सुरक्षा की बेहतर स्थिति कांग्रेस को पसंद नहीं आ रही है। मसूद अजहर पर हुए फैसले पर वे खुशी मनाने के बजाए कांग्रेस अपना ही मजाक उड़वाने में लग गई है। कांग्रेस अब सवाल उठा रही है की मसूद अजहर को चुनाव के समय ही आतंकी घोषित क्यों किया, बताओ। ये दिल्ली में मेरी कैबिनेट ने निर्णय किया है क्या, ये बीजेपी की वर्किंग कमेटी में निर्णय हुआ है क्या? कांग्रेस वालों को परेशानी है की चुनाव चल रहे हैं और अबूधाबी, यूएई मोदी को अवॉर्ड देता है। कांग्रेस को परेशानी है की चुनाव चल रहे हैं और रशिया मोदी को अवॉर्ड दे रहा है। कांग्रेस को परेशानी है की चुनाव चल रहे हैं की युनाइटेड नेशन और दुनिया के सब देश मिलकर के मसूद को आतंकवादी घोषित कर देते हैं, उनको बड़ी परेशानी है। भाइयो-बहनो, आप मुझे बताइए, क्या संयुक्त राष्ट्र संघ को ये घोषित करने से पहले कांग्रेस को पूछना चाहिए था क्या? मैडम जी को पूछना चाहिए था क्या, संयुक्त राष्ट्रसंघ को ये पूछना चाहिए था क्या, की आप जिनको कभी जी कह कर के बुलाते हो, कभी साहब कह कर के बुलाते हो क्या हम उसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करें कि ना करें। क्या ये इजाजत लेनी पड़ेगी क्या? क्या उनको पूछना जरूरी था की वो इनको पूछें की आपको कोई दिक्कत तो नहीं है ना, कांग्रेस को कोई तकलीफ तो नहीं हैं ना? कांग्रेस को लगता है की मोदी ये सब अपने फायदे के लिए करवा रहा है। सही में कांग्रेस अपने फायदे और नुकसान के अलावा और कुछ भी सोच नहीं सकती है। जिस हेलीकॉप्टर घोटाले में नामदार का परिवार फंसा है उसके सबसे बड़े राजदार मिशेल मामा को भारत रातों-रात उठवाकर अपने यहां ले आता है तो कांग्रेस कहती है की मोदी ये अपने फायदे के लिए कर रहा है। 

जब देश को लूटकर भागने वालों को ब्रिटेन की अदालत जमानत नहीं देती, जेल भेज देती है तो कांग्रेस चिल्लाती है की ये भी मोदी ने अपने फायदे के लिए करवाया। जब हजारों करोड़ लूटने वाले को ब्रिटेन की सरकार भारत भेजने के लिए तैयार हो जाती है तो भी कांग्रेस कहती है की ये मोदी ने अपने फायदे के लिए किया है। जब भारत अंतरिक्ष में सैटेलाइट को मारने वाली मिसाइल का परीक्षण करता है तो भी कांग्रेसी कहते हैं की मोदी ने अपने फायदे के लिए करवाया। जब इस परीक्षण के बाद दुनिया भारत का गौरव करने लगी, कोई निगेटिव निर्णय नहीं हुआ, बैन नहीं लगाती, समर्थन नहीं करती तो कांग्रेस कहती है की ये भी मोदी ने अपने फायदे के लिए मैनेज कर लिया। जब ईज ऑफ दूइंग बिजिनेस में, कारोबार में, रैंकिंग में भारत 65 प्रतिशत का छलांग लगाता है तब भी कांग्रेसी कहते हैं मोदी ने विश्व बैंक इस संस्थाओं को भी खरीद लिया है। अरे भाई, कांग्रेस वालों को दिन में और रात में दिखता है, यार ये मोदी कितना ताकत वाला है, सब कुछ करवा लेता है। अरे भाई, अगर भारत के पास दुनिया पर दबाव डालने की इतनी शक्ति आ गई है, मुझे बताइए, हर हिंदुस्तानी खुश होगा कि नहीं होगा? भारत चाहे, ऐसा अगर दुनिया में होता है तो आप खुश होंगे कि नहीं होंगे? आपको आनंद होगा कि नहीं होगा, आपका माथा ऊंचा होगा कि नहीं होगा, आपका सीना चौड़ा होगा कि नहीं होगा? कांग्रेस वालों को बुरा लग रहा है, ये सब हो क्यों रहा है। वो जो काम 70 साल तक नहीं कर पाए, एक चाय वाला कैसे करता है। जरा कांग्रेस वाले गलती से भी घर से निकल कर के आपके यहां वोट मांगने के लिए आएं तो उनको एक छोटा सा रुमाल का टुकड़ा दे देना, कांग्रेस वालों को भेंट में। और उनको कहना, अरे यार इतना रोते क्यों हो, ले लो रुमाल ले जाओ आंसू पोंछने के काम आएगा। ये करोगे आप? सारे कांग्रेसी रो रहे हैं, मोदी ने ये किया, मोदी ने वो किया। आपने मुझे 25 सीटें दी थीं, आप राजस्थान के लोग मुझे बताइए, क्या मौज करने के लिए दी हैं क्या? सोने के लिए दी हैं क्या, ऐश-आराम करने के लिए दी हैं क्या? जो कर रहा हूं, यही करने के लिए दी है ना? मैं तो सेवक हूं, आप मेरे मालिक हैं। जो आप चाहेंगे, वही मोदी करेगा।

मैं तो कांग्रेस के मित्रों से भी कहूंगा की वो भी अब यही नारा लगाएं, नामुमकिन भी अब मुमकिन है। अरे कांग्रेस के लोगों अब रोना बंद करो, मोदी क्या कर रहा है उसका अध्ययन करो और खुद भी अब नारा लगाओ। नामुमकिन भी अब मुमकिन है। अरे आप में भी हो सकता है एक परसेंट, दो परसेंट हिम्मत आ जाए, आप मरे पड़े हो। भाइयो-बहनो, कांग्रेस की नीति नकारात्मक है, नेतृत्व में भ्रम है और नीयत में खोट है। इसी कांग्रेस ने, मैं वीरों की धरती पर ये बात याद कराना चाहूंगा। इसी कांग्रेस ने आपको वन रैंक-वन पेंशन के नाम पर भी धोका दिया था। जनता से झूठ और विश्वासघात ही, ये कांग्रेस और उसके साथियों की राजनीति का आधार है। राजस्थान तो इसका ताजा-ताजा गवाह रहा है। भाइयो-बहनो, चार महीने पहले ही इन्होंने ये कहकर वोट मांगे थे की दस दिन के भीतर किसानों के कर्ज माफ कर देंगे। जरा मुझे बताइए, कर्ज माफ हुआ क्या? मुझे चारों तरफ से सुनना है, जो बाहर धूप में खड़े हैं उनसे भी सुनना है, कर्ज माफ हुआ क्या? क्या किसी के साथ ऐसा धोखा करना चाहिए क्या? कांग्रेस वालों समझ लो, ये मेरा देश गलती को तो माफ कर सकता है, कोई चूक हो जाए तो माफ कर सकता है लेकिन मेरा देश और खासकर के राजस्थान की धरती विश्वासघात को कभी माफ नहीं करती। आप ने विश्वासघात किया है, झूठ बोला है।

साथियो, स्थिति ये है की कांग्रेस को किसानों के फायदे में अपना नुकसान दिख रहा है। केंद्र सरकार किसानों के खाते में पैसा जमा करने के लिए यहां की सरकार से उनके नामों की लिस्ट मांग रही है लेकिन यहां की कांग्रेस सरकार आनाकानी कर रही है। क्या ये राजस्थान के किसानों के साथ अन्याय है कि नहीं है? साथियो, कांग्रेस पर दबाव बनाने के लिए, ये अन्याय खत्म करने के लिए आपको इस लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हर सीट पर अपना आशीर्वाद देना हो, ये मैं आपसे प्रार्थना करता हूं।

साथियो, इस क्षेत्र में पानी की जो समस्या है उससे भी मैं भली-भांति परिचित हूं। ऐसी चुनौतियों को दूर करने के लिए हमने तय किया है और खासकर के मेरी माताएं-बहने, जरूर मोदी को आशीर्वाद देंगी। हमने तय किया है, हमारे संकल्प-पत्र में घोषित किया है की अब भारत सरकार में पानी के लिए एक अलग मंत्रालय बनाएंगे, जल शक्ति मंत्रालय। और इसके माध्यम से देश की पानी की समस्या को हम प्राथमिकता देना चाहते हैं। पांच साल, मैं अपने, पानी के लिए खपा देने के लिए निर्णय करके बैठा हूं। इसके माध्यम से देश की जो नदियां हैं, उसके पानी का उपयोग कैसे हो, समंदर के खारे पानी को मीठा करके कैसे उपयोग किया जाए। बरसात के पानी का सही उपयोग कैसे हो और पानी हर घर में कैसे पहुंचे और खेत में कैसे पहुंचे इसके लिए अलग डेडीकेटेड मंत्रालय बनेगा और ये काम हिंदुस्तान में पहली बार होगा। इसके अलावा इस क्षेत्र में ईस्टर्न कैनाल प्रोजेक्ट का काम भी आगे बढ़ाया जाएगा।

भाइयो-बहनो, पिछली बार हमने जिस तरह शौचालय के काम किया, घर में बिजली पहुंचाने का काम किया, रसोई में गैस पहुंचाने का काम किया। इस बार ये मोदी जी-जान से पानी पहुंचाने पर अपना पसीना बहाएगा। इन संकल्पों को पूरा करने के लिए आपको फिर से, पूरी शक्ति से, पूरी ताकत से कमल खिलाना है। पिछले चरण में आपने जिस प्रकार से मतदान किया। भाइयो-बहनो, आपने पहले मतदान-बाद में जलपान, इस मंत्र को चरितार्थ किया, हर बूथ को जीतने के संकल्प के साथ भारी मतदान किया।

भाइयो-बहनो, प्रथम चरण में आपने जो कमल खिलाया है, हमारा साथ दिया है। मैं राजस्थान की धरती को प्रणाम करता हूं, अभिनंदन करता हूं। और अब 6 तारीख को, बीच में दो-तीन दिन बचे हैं। आप हैरान होंगे, ये कांग्रेस वालों की मोडेस ऑपरेंडी क्या है। ये 20वीं सदी में जिस तरीके से खेल खेलते थे, 21वीं सदी में भी उसी तरह से खेल, खेलते हैं। लेकिन उनको मालूम नहीं है, 20वी सदी में उनको मोदी नहीं मिला था 21वीं सदी में ये मोदी उनको मिला है। ये उनके सब खेल जानता है। मैं बताता हूं, वो क्या करते हैं। ये आपके लिए बड़ा इंटरेस्टिंग है, सुनने जैसा है और मीडिया को भी जरा इंट्रेस्ट आ जाए तो देखें, ये क्या कमाल करते हैं और मैं सारी सत्य घटना बताता हूं। मैं गुजरात में था, ये कांग्रेस वाले झूठ बोलने में कितने माहिर हैं, लोगों की आंख में धूल कैसे झोंकते हैं और कितने बेपरवाह हैं, इसका नमूना बताता हूं। उन्होंने गुजरात में एक चुनाव में क्या किया, आदिवासी बेल्ट में पहुंच गए और आदिवासियों से फार्म भरवाए की आप फार्म भर के दे दो और बदले में आदिवासियों से 100-100 रुपया मार लिया। नकली फार्म, नकली योजना, नकली काम, 100-100 रुपया मार लिया और रुपए कहां गए भगवान जाने और आदिवासियों को भड़का दिया की देखो मैं तुम्हे जमीन का पट्टा दे रहा हूं। जब आदिवासी सरकारी दफ्तर में गए की हमें ये फार्म दिया है 100 रुपया हमसे लिया है, हमें जमीन का पट्टा कब मिलेगा। जब सरकार ने देखा तो आश्चर्य हुआ, फार्म झूठा, लोग झूठे और पैसे मार कर आदिवासियों को लूट कर चले गए, अभी तक उनका अता-पता नहीं है। दूसरा चुनाव आया, उसमें क्या किया। उन्होंने एक बड़े मैदान में हार्ड बोर्ड के मकान बनाए तीन, चार। 3-4 मकान बना कर के उन्होंने बोर्ड लगाया की हमारी सरकार आएगी तो ये मकान देगी और लोगों को फार्म दिए और हर तहसील में बड़ी-बड़ी कतार लग गई, मकान लेने के लिए फार्म। बाद में पता चला 250 रुपया मार लिया। झूठे फार्म और हार्ड बोर्ड का एक मॉडल बना कर के रुपए मारते रहे। इस बार मैंने देखा राजस्थान में वो चालाकी करना शुरू किया है, लोगों के पास जाते हैं और 72 हजार रुपए का फार्म भरवाते हैं की आपको 72 हजार रुपए मिलेंगे। लोगों को फार्म मिला और यहां की कुछ महिलाएं सरकारी दफ्तर में पहुंच गईं, सरकारी दफ्तर में जा कर के पूछा की ये 72 हजार हमको कब मिलेंगे, हमको फार्म मिला है। सरकार ने जांच की, ये यहां की सरकार के लोग उन्होंने जांच की और बताया ये फार्म झूठा है, ये लेने वाले झूठे हैं तो लोग रोने लगे। ये तो हमारे से 100 रुपया ले गया है।

भाइयो-बहनो, राजस्थान में ये चालाकी चलती होगी, ये झूठे फार्म भरवाते होंगे, आपसे पैसे मारते होंगे और आपको भड़काते होंगे। भाइयो-बहनो, आपको मालूम है, कर्जमाफी झूठ बोल कर के वसुंधरा जी की सरकार जो जी-जान से पांच साल से विकास के काम कर रही थी, आपको भ्रमित करके किसानों के नाम पर वोट ले गए और चुप हो गए, अब कर्जमाफी का नाम नहीं लेते, ये झूठ बोलने वाले लोग हैं, इस बार गलती मत करना। पिछली बार जो झूठ बोला है ना इसकी सजा भी इस बार देना है। देंगे? पूरे दम से देंगे? पूरी ताकत से देंगे?

भाइयो-बहनो, आप चाहते हैं, हिंदुस्तान मजबूत बने? भारत मजबूत होना चाहिए, हिंदुस्तान मजबूत होना चाहिए? तो एक शर्त है पहले अपान बूथ मजबूत बनाओ। बूथ मजबूत बनाओगे? घर-घर जाओगे, मतदाताओं को मिलोगे? गर्मी हो तब भी वोट देने जाओगे, ज्यादा से ज्यादा वोट कराओगे? मैं चाहूंगा जो बूथ सबसे ज्यादा मतदान करवाए, वो मुझे चिट्ठी लिखें की आपकी लोकसभा में मेरे बूथ ने सबसे ज्यादा पोलिंग करवाया है। वो मुझे चिट्ठी लिखे, सरकार बनने के बाद मैं उसे मिलने के लिए बुलाऊंगा। कमल निशान पर बटन दबाना है और कमल निशान पर जो बटन दबेगा, जो वोट पड़ेगा आपको मैं विश्वास दिलाता हूं, कमल को दिया सारा वोट सीधे-सीधे मोदी के खाते में आएगा। आपका कमल जब मोदी को मिलेगा, ये चौकीदार और मजबूत होगा और चौकीदार देश को मजबूत बनाएगा। इतनी बड़ी संख्या में आपने आशीर्वाद दिए, हम सब हृदय से आपके बहुत आभारी हैं और आप हमारे दोनों उम्मीदवारों को दिल्ली भेजिए। मेरे साथ बोलिए…

भारत माता की… जय, भारत माता की… जय, बहुत-बहुत धन्यवाद।

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21वीं सदी के इस दशक में भारत रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार है: ET Now ग्लोबल बिजनेस समिट में पीएम मोदी
February 13, 2026
Amid numerous disruptions, this decade has been one of unprecedented development for India, marked by strong delivery and by efforts that have strengthened our democracy: PM
In this decade of the 21st century, India is riding the Reform Express: PM
We have made the Budget not only outlay-focused but also outcome-centric: PM
Over the past decade, we have regarded technology and innovation as the core drivers of growth: PM
Today, we are entering into trade deals with the world because today's India is confident and ready to compete globally: PM

आप सभी का इस ग्लोबल बिजनेस समिट में, आप सबका मैं अभिनंदन करता हूं। हम यहां A Decade Of Disruption, A Century Of Change, इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं। विनीत जी का भाषण सुनने के बाद मुझे लगता है कि मेरा काम बहुत सरल हो गया है। लेकिन एक छोटी request करूं, इतना सारा आपको पता है, तो कभी ET में तो दिखना चाहिए।

साथियों,

21वीं सदी का बीता दशक अभूतपूर्व डिसरप्शन का रहा है। ग्लोबल Pandemic, ग्लोब के अलग-अलग हिस्सों में तनाव, युद्ध और ग्लोब के संतुलन को हिला देने वाले Supply Chain Breakdowns, दुनिया ने एक दशक के भीतर काफी कुछ देख लिया। लेकिन साथियों, कहते हैं, संकट के समय ही किसी देश के सामर्थ्य पता चलता है और मुझे बहुत गर्व है, अनेक Disruptions के बीच भी भारत के लिए यह दशक, अभूतपूर्व डेवलपमेंट का रहा है, शानदार डिलीवरी का रहा है और डेमोक्रेसी को मजबूत करने वाला रहा है। जब पिछला दशक शुरू हुआ था, तो भारत ग्यारहवें नंबर की अर्थव्यवस्था था। इतनी उथल-पुथल में पूरी आशंका थी कि भारत और नीचे चला जाएगा, लेकिन आज भारत, बहुत तेजी के साथ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने जा रहा है। और आप जिस Century Of Change की बात कर रहे हैं, उसका बहुत बड़ा आधार और यह मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं, इसका बहुत बड़ा आधार भारत ही होने जा रहा है। आज भारत, दुनिया की ग्रोथ में 16 परसेंट से ज्यादा योगदान दे रहा है। और मुझे विश्वास है, इस सेंचुरी के हर आने वाले साल में हमारा योगदान और भी बढ़ता रहेगा, निरंतर बढ़ता रहेगा। मैं वह मदान की तरह astrologer के रूप में नहीं आया हूं। भारत, दुनिया की ग्रोथ को ड्राइव करेगा, दुनिया की ग्रोथ का नया इंजन बनेगा।

साथियों,

दुनिया में सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद एक नई वैश्विक व्यवस्था बनी थी, एक नए वर्ल्ड ऑर्डर ने आकार लिया था। लेकिन सात दशक के बाद, वो व्यवस्था टूट रही है। दुनिया आज एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की तरफ बढ़ रही है। आखिर यह क्यों हो रहा है? ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि तब जो व्यवस्था बनी थी, उसकी नींव One Size Fits All, इसी सोच पर टिकी थी। तब ये माना गया कि World Economy Core में होगी, Supply Chains मजबूत और विश्वसनीय हो जाएगी। इस व्यवस्था में नेशन्स को केवल कंट्रीब्यूटर्स के रूप में ही देखा गया। लेकिन आज, इस मॉडल को चुनौती मिल रही है। यह अपनी प्रासंगिकता खोता जा रहा है। आज हर देश को यह पता चल रहा है कि उसे अपनी रज़ीलियन्स खुद बनानी होगी।

साथियों,

आज दुनिया जिसकी चर्चा कर रही है। उसको भारत ने 2015 में, आज से 10 साल से पहले, 2015 में ही अपनी नीति का हिस्सा बना लिया था। दस साल पहले जब नीति आयोग बना, तो उसके फाउंडिंग डॉक्यूमेंट में ही भारत ने अपना विजन क्लीयर कर दिया था और विजन यह कि भारत किसी दूसरे देश से कोई सिंगल डेवलपमेंट मॉडल इंपोर्ट नहीं करेगा। हम भारत के विकास के लिए भारतीय अप्रोच को लेकर ही चलेंगे। इस नीति ने भारत को अपने हिसाब से, अपनी रिक्वायरमेंट के हिसाब से, अपने हित में फैसले लेने का आत्मविश्वास दिया और यह एक बड़ा कारण है कि डिसरप्शन के दशक में भी भारत की इकोनॉमी कमजोर नहीं पड़ी, निरंतर मजबूत होती गई।

साथियों,

आज 21वीं सदी के इस दशक में भारत Reform Express पर सवार है और इस Reform Express की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हम इसे compulsion में नहीं, बल्कि conviction के साथ, Reform के कमिटमेंट के साथ गति दे रहे हैं। यहां तो बहुत बड़ी-बड़ी संख्या में बड़े-बड़े expert बैठे हैं, अर्थजगत के दिग्गज बैठे हैं। आपने भी 2014 से पहले का दौर देखा है। जब तक हालात मजबूर न कर दें, जब तक कोई संकट न आ जाए, जब कोई और रास्ता न बचे, तब मजबूरन रिफॉर्म्स किए जाते थे। आप याद करिए, 1991 का रिफॉर्म्स भी तब हुआ, जब देश पर दिवालिया होने का खतरा आ गया था। जब देश को सोना गिरवी रखना पड़ा था। पहले की सरकारों का यही तरीका था, वो reforms compulsion में ही किया करती थीं। जब 26/11 का आतंकी हमला हुआ, कांग्रेस सरकार की कलई खुल गई, तो NIA का गठन किया गया। जब पावर सेक्टर बर्बाद हो गया, ग्रिड फेल होने लगे, तब मजबूरी में कांग्रेस को पावर सेक्टर में याद आई।

साथियों,

ऐसी एक लंबी सूची है, जो याद दिलाती है कि जब compulsion में, मजबूरी में reform होता है, तो न सही नतीजे मिलते हैं, न देश को सही परिणाम मिलते हैं।

साथियों,

आज मुझे गर्व है कि बीते 11 वर्षों में हमने पूरे conviction के साथ रिफॉर्म किए हैं और यह रिफॉर्म Policy में हुए हैं, Process में हुए, Delivery में हुए और इतना ही नहीं, Mindset में भी reform हुआ है। क्योंकि साथियों, अगर पॉलिसी बदले, लेकिन प्रोसेस वही रहे, माइंडसेट वही रहे, डिलीवरी ठीक से ना हो, तो रिफॉर्म्स सिर्फ और सिर्फ कागज का टुकड़ा बनकर रह जाता है। इसलिए हमने पूरे सिस्टम को बदलने के लिए ईमानदारी से कोशिश की है।

साथियों,

मैं प्रोसेस की बात करूं, तो एक साधारण लेकिन बहुत जरूरी प्रोसेस है, कैबिनेट नोट्स का। यहां कई लोगों को अंदाजा होगा कि पहले की सरकारों में एक कैबिनेट नोट बनने में ही कुछ महीने लग जाते थे, महीने। अब इस स्पीड से देश का विकास कैसे होता? इसलिए हमने इस process को बदला। हमने डिसीजन मेकिंग को time-bound और technology-driven बनाया। हमने यह तय कर दिया कि इस अफसर की टेबल पर यह कैबिनेट नोट इतने घंटे से ज्यादा रहेगा ही नहीं। या तो रिजेक्ट करो या निर्णय लो और इसका नतीजा आज देश देख रहा है।

साथियों,

मैं आपको रेलवे ओवर ब्रिज के अप्रूवल का भी उदाहरण दूंगा। पहले R.O.B का एक डिजाइन अप्रूव कराने के लिए कई वर्ष लग जाते थे, कई सारी क्लीयरेंस की ज़रूरत थीं, कई जगह चिट्ठियां लिखनी पड़ती थीं और यह मैं प्राइवेट के लिए नहीं कह रहा हूं, सरकार को। हमने इसको भी बदला और आज देखिए कितनी तेजी से रोड और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है। विनीत जी ने बहुत विस्तार से इस बात को बताया।

साथियों,

एक बड़ा Interesting उदाहरण बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर का है। अब बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर देश की security से जुड़ा हुआ होता है। आप कल्पना कर सकते हैं, एक समय था, जब बॉर्डर एरियाज़ में एक साधारण सी सड़क बनाने के लिए भी कुछ परमिशन दिल्ली से लेनी पड़ती थी। जिला स्तर पर निर्णय लेने के यानी इसके सामने एक प्रकार से उसका कोई अधिकारी ही नहीं थे, दीवार ही दीवार थीं, वो निर्णय नहीं कर सकता था और इसलिए तो दशकों बाद भी हमारे देश में बॉर्डर इंफ्रा इतना बेहाल रहा। 2014 के बाद हमने इस प्रोसेस में भी रिफॉर्म किया, हमने स्थानीय प्रशासन को Empower किया और आज हम देश के बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से डेवलप होते देख रहे हैं।

साथियों,

बीते दशक में भारत के जिस Reform ने दुनिया में हलचल मचा दी है, वो है UPI, भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम। यह सिर्फ एक App नहीं है, यह policy, process और delivery के एक शानदार कन्वर्जेंस का प्रमाण है। जो लोग कभी बैंकिंग और फाइनेंस से जुड़े बेनिफिट्स के बारे में सोच भी नहीं सकते थे, UPI देश के ऐसे नागरिकों को सर्व कर रहा है। यह जो डिजिटल इंडिया है, डिजिटल पेमेंट सिस्टम है, जनधन आधार मोबाइल की ट्रिनिटी है, यह रिफॉर्म किसी compulsion से नहीं हुआ, यह हमारा कन्विक्शन था। और कन्विक्शन यह था कि जिन लोगों तक पहले की सरकारें कभी नहीं पहुंची, हमें ऐसे नागरिकों का इंक्लूजन करना है। जिसे कोई नहीं पूछता, उसे मोदी पूजता है। और इसलिए यह रिफॉर्म्स किए गए हैं और आज भी हमारी सरकार इसी सोच के साथ चल रही है।

साथियों,

भारत का यह जो नया मिज़ाज है, वो हमारे बजट में भी रिफ्लेक्ट होता है। पहले जब बजट की चर्चा होती थी, तो फोकस सिर्फ Outlay पर होता था। कितना पैसा आवंटित हुआ, क्या सस्ता हुआ, क्या महंगा हुआ और उस दिन टीवी देखेंगे, तो पूरी टीवी एक ही यानी इनके लिए, बजट मतलब इंकम टैक्‍स ऊपर गया कि नीचे गया, इसके आगे उनको देश दिखता ही नहीं है। और होता क्‍या था, कितनी नई ट्रेनें घोषित हुईं, यही चलता रहता था, उन घोषणाओं का बाद में क्या हुआ, कोई पूछने वाला ही नहीं था। और इसलिए हमने बजट को Outlay के साथ-साथ Outcome सेंट्रिक बनाया।

साथियों,

बजट में एक और बड़ा बदलाव आया है। 2014 से पहले Off-Budget Borrowing पर बहुत अधिक चर्चा होती थी। लेकिन अब Off-Budget Reforms की चर्चा होती है। बजट से बाहर, नेक्स्ट जनरेशन GST रिफॉर्म्स हुए, प्लानिंग कमीशन की जगह नीति आयोग बनाया, आर्टिकल 370 की दीवार गिरा दी, तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाया, नारी शक्ति वंदन अधिनियम बनाया।

साथियों,

बजट में घोषित हों, या बजट से बाहर, रिफॉर्म एक्सप्रेस लगातार गति पकड़ रही है। अगर मैं पिछले एक साल की ही बात करूं तो हमने Ports & Maritime सेक्टर में Reform किया, शिप बिल्डिंग इंडस्ट्री के लिए अनेक Initiative लिए, जन-विश्वास एक्ट के तहत रिफॉर्म्स को और आगे बढ़ाया, Energy Security के लिए Shanti Act बनाया, लेबर कानूनों से जुड़े रिफॉर्म्स को लागू किया, भारतीय न्याय संहिता लेकर आए, वक्फ कानून में Reform किया गया है, गांव में रोजगार के लिए नया G RAM G कानून बनाया, ऐसे अनेक Reforms साल भर होते रहे हैं।

साथियों,

इस साल के बजट ने रिफॉर्म एक्सप्रेस को और आगे बढ़ाया है। वैसे तो बजट के बहुत सारे आयाम हैं, लेकिन मैं दो Important फैक्टर्स की बात करूंगा। Capex और Technology, बीते वर्षों की भांति इस बजट में भी, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च को बढ़ाकर करीब 17 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है। और आप जानते हैं कि कैपेक्स का मल्टीप्लायर effect कितना बड़ा होता है। इससे देश की कैपेसिटी और प्रोडक्टिविटी बढ़ती है। अनेकों सेक्टर्स में बहुत बड़ी संख्या में जॉब क्रिएशन भी होती है। पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप का निर्माण, देश के टीयर-2, टीयर-3 शहरों के लिए सिटी इकोनॉमिक रीजन्स का निर्माण और सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, ऐसे बजट अनाउंसमेंट्स, सही मायने में युवाओं पर, देश के फ्यूचर पर, यह इन्वेस्टमेंट हैं।

साथियों,

बीते दशक में हमने टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को ग्रोथ का कोर ड्राइवर माना है। इसी सोच के साथ, देश में स्टार्टअप कल्चर, हैकाथॉन कल्चर, उसको हमने प्रमोट किया। आज देश में, दो लाख से अधिक स्टार्टअप, रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स हैं और यह डायवर्स सेक्टर्स में काम कर रहे हैं। हमने युवाओं को प्रोत्साहित किया, देश में रिस्क टेकिंग कल्चर को पुरस्कृत करने का भाव जगाया और परिणाम हमारे सामने है। इस साल का बजट, हमारी इसी प्राथमिकता को और मजबूत करता है। विशेष तौर पर बायोफार्मा, सेमीकंडक्टर और AI जैसे सेक्टर के लिए, इस बजट में महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं।

साथियों,

आज जब देश की आर्थिक ताकत बढ़ी है, तो हम राज्यों को भी उतना ही ज्यादा सशक्त कर रहे हैं। मैं एक और आंकड़ा आपको देना चाहता हूं। 2004 से 2014, 10 साल, इस दरमियान राज्यों को टैक्स डिवोल्यूशन के तौर पर 18 लाख करोड़ रुपए के आसपास ही मिले थे, 2004 से 2014 तक। जबकि 2014 से लेकर 2025 तक, राज्यों को 84 लाख करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। अगर मैं इस साल बजट में प्रस्तावित लगभग 14 लाख करोड़ का आंकड़ा और जोड़ दूं, तो हमारी सरकार में राज्यों को टैक्स डिवोल्यूशन के करीब-करीब 100 लाख करोड़ रुपए मिलने तय हुए हैं। यह राशि केंद्र सरकार की तरफ से अलग-अलग राज्य सरकारों को मिली है, ताकि वो अपने यहां विकास के कार्यों को आगे बढ़ा सकें।

साथियों,

आजकल आप लोग भारत के FTA’s यानि फ्री ट्रेड डील्स पर काफी चर्चा कर रहे हैं और मैं यहां enter हुआ, वहीं से शुरू हो गए लोग। दुनियाभर में इसका एनालिसिस हो रहा है। लेकिन मैं आज इसका एक और इंटरेस्टिंग एंगल आपको बताता हूं, मीडिया को जो चाहिए, वो तो इसमें नहीं होगा शायद, लेकिन हो सकता है कि कुछ काम में आ जाए। और मैं पक्का मानता हूं, जो बात मैं कहने जा रहा हूं, आपने भी इसके बारे में विचार नहीं किया होगा। क्या आपने कभी सोचा है कि आज इतने सारे विकसित देशों के साथ फ्री-फ्री ट्रेड डील्स हो रहे हैं, क्या यही काम 2014 से पहले क्यों नहीं हो पाए? देश वही, युवा शक्ति वही, सरकारी सिस्टम वही, तो बदला क्या? बदलाव, सरकार के विजन में आया है, नीति और नीयत में बदलाव आया है, भारत के सामर्थ्य में बदलाव आया है।

साथियों,

आप ज़रा सोचिए, फ्रेजाइल फाइव इकोनॉमी जब थी, तब कौन हमारे साथ डील करता? गांव में भी गरीब की बेटी को कोई रईस के परिवार वाला शादी करता है क्या? वो उसको छोटा मानता है, हमारा भी यही हाल था भाई दुनिया में। जब देश पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा था, चारों तरफ घोटाले और घपले थे, तब कौन भारत पर भरोसा कर पाता? 2014 से पहले भारत में मैन्युफैक्चरिंग का बेस बहुत कमजोर था और जिसके कारण, पहले की सरकारें भी डरती थी, एक तो कोई आता नहीं था और जरा सा भी कोई कोशिश करें, तो यह लोग भी डरते थे और डर यह था कि अगर विकसित देशों के साथ डील हो गई, तो वो हमारे बाजार पर कब्जा कर लेंगे, वो यहां अपने प्रोडक्ट डंप करने लगेंगे, हताशा-निराशा के उस माहौल में 2014 से पहले यूपीए सरकार सिर्फ चार देशों के साथ ही कॉम्प्रिहेंसिव ट्रेड एग्रीमेंट कर पाई थी। जबकि, बीते दशक में भारत ने जो ट्रेड डील्स की हैं, उनमें दुनिया के 38 कंट्री कवर होते हैं, 38 कंट्री। और यह दुनिया के अलग-अलग रीजन्स में हैं। आज हम इसलिए दुनिया के साथ ट्रेड डील्स कर रहे हैं क्योंकि आज का भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। आज का भारत, दुनिया के साथ कंपीट करने के लिए तैयार है। बीते 11 वर्षों में भारत ने मैन्युफैक्चरिंग का एक मजबूत इकोसिस्टम देश में विकसित किया है। इसलिए, आज भारत समर्थ है, सशक्त है और इसलिए दुनिया भी हम पर भरोसा करती है। यही बदलाव हमारी Trade Policy में आए Paradigm Shift का आधार बने और यही Paradigm Shift विकसित भारत की हमारी यात्रा का अनिवार्य स्तंभ बना है।

साथियों,

आज हमारी सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ देश के हर नागरिक को विकास में सहभागी बनाते हुए कार्य कर रही है। जो विकास की दौड़ में पीछे छूट गया, हम उसके विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं। पहले की सरकारों ने दिव्यांग जनों के लिए सिर्फ घोषणाएं कीं, हम भी उसी रास्ते को जारी रख सकते थे, लेकिन ये सरकार की संवेदनशीलता का उदाहरण है। आप में से शायद जो बातें मैं बता रहा हूं, आप जिस लेवल के लोग हैं, शायद उसमें फिट नहीं बैठती होगी। हमारे दिव्यांग जनों के लिए जैसे हमारे यहां Language में बिखराव है ना, Sign Language का भी वही हाल था जी। तमिलनाडु में जाओ तो एक Sign Language, उत्तर प्रदेश में जाओ तो दूसरी, गुजरात में जाओ तो तीसरी, असम में जाओ तो चौथी, अगर यहां का दिव्‍यांग असम गया, तो बेचारा समझ ही नहीं पाता था। अब यह कोई बड़ा काम तो नहीं था। अगर संवेदनशील सरकार होती है ना, तो उसको यह काम छोटा नहीं लगता है। और देश ने पहली बार Indian Sign Language को institutionalise किया, common किया, व्यवस्था बनाई है। ऐसे ही, देश की Transgender community कब से अपने अधिकारों के लिए लड़ रही थी। हमने उनके लिए भी कानून बनाकर उन्हें सम्मान से जीने का कवच दिया है। बीते दशक में ही देश की करोड़ों बहनों को तीन-तलाक की कुरीति से मुक्ति मिली, लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण पक्का हुआ।

साथियों,

आज सरकारी मशीनरी की सोच भी बदली है, उसमें संवेदनशीलता आई है। सोच का अंतर क्या होता है, यह हम जरूरतमंदों को मुफ्त अनाज देने वाली स्कीम में भी देखते हैं। विपक्ष के कुछ लोग हमारा मजाक उड़ाते हैं और कुछ अखबारों में जरा छपता भी ज्यादा है। कोई मजाक उड़ाता है कि जब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकल ही गए हैं, तो उनको मुफ्त राशन क्यों मिलता है? अजीबोगरीब सवाल है। अगर आप बीमार हैं, अस्पताल में गए और अस्पताल से आपको छुट्टी मिली, तो भी डॉक्टर कहता है कि सात दिन तक यह-यह संभालना, पंद्रह दिन तक यह-यह संभालना, कहता है कि नहीं कहता है? गरीबी से बाहर निकले हैं, लेकिन यह सवाल पूछ रहे हैं कि निकले हैं, तो फिर अनाज क्यों देते हो? ऐसी संकीर्ण मानसिकता वाले लोग, यह नहीं सोचते कि सिर्फ गरीबी से बाहर निकालना काफी नहीं होता, बल्कि जो व्यक्ति नियो मिडिल क्लास में आया है, वो फिर गरीबी के चंगुल में न फंस जाए, यह भी सुनिश्चित करना पड़ता है। इसलिए उसे आज अनाज मुफ्त की सुविधा मिल रही है, यह आवश्यक है। बीते वर्षों में केंद्र सरकार ने इस योजना पर लाखों करोड़ रुपए खर्च किए हैं, इससे गरीब और नियो मिडिल क्लास को बहुत बड़ा संबल मिला है।

साथियों,

सोच का एक और फर्क हम अपने आसपास भी देखते हैं। कुछ लोग हैं, जो कहते हैं कि ये मोदी 2047 की बात क्यों करता है? 2047 में विकसित भारत बनेगा, नहीं बनेगा, किसने देखा? हम रहें या ना रहें, उससे हमारा लेना देना क्या है? अब देखिए, यह सोच है और यह बड़े-बड़े लोगों की सोच है, यह कोई मैं अपने शब्द नहीं बता रहा हूं।

साथियों,

जिन लोगों ने आजादी के लिए लड़ाई लड़ी, लाठियां खाईं, कालापानी की सज़ाएं पड़ी, फांसी के तख्त पर चढ़ गए, अगर वो भी यही सोचते कि आजादी पता नहीं कब मिले, हम क्यों आज आजादी के लिए लाठी खाएं, तो सोचिए, क्या उस सोच के साथ देश कभी आजाद हो पाता क्या? जब राष्ट्र प्रथम का भाव हो, जब देश हित सर्वोपरि हो, तो हर निर्णय देश के लिए होता है, हर नीति देश के लिए बनती है। हमारी सोच स्पष्ट है, विजन साफ है, हमें देश को विकसित बनाने के लिए निरंतर काम करना है। 2047 तक हम रहें न रहें, लेकिन यह देश रहेगा, इस देश की संतानें रहेंगी। इसलिए हमें और इसलिए हमें अपना आज खपाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों का कल सुरक्षित रहे, उज्ज्वल रहे। मैं आज अपनी आज बो रहा हूं क्योंकि कल की पीढ़ी को फल खाने को मौका मिले।

साथियों,

दुनिया को अब डिसरप्शन के साथ जीने के लिए तैयार रहना होगा। समय के साथ इनके नेचर में बदलाव आएगा, लेकिन यह तय है कि अब व्यवस्थाएं बहुत तेजी से बदलेंगी। AI से जो Disruption हो रहे हैं, वो तो आप देख ही रहे हैं। आने वाले समय में AI और भी क्रांतिकारी बदलाव लेकर आने वाली है, भारत इसके लिए भी तैयार है। कुछ ही दिनों में भारत में ग्लोबल AI इम्पैक्ट समिट होने जा रही है। दुनिया के अनेक देश, दुनियाभर के टेक लीडर्स, इस समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं। सभी के साथ मिलकर, हम एक बेहतर विश्व बनाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे। इसी भरोसे के साथ, एक बार फिर इस Summit के लिए आप सभी को बहुत सारी मेरी शुभकामनाएं।

बहुत-बहुत धन्यवाद!

वंदे मातरम!