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भ्रष्टाचार और परिवारवाद विकास, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के सबसे बड़े दुश्मन हैं: तेलंगाना के बेगमपेट हवाई अड्डे पर पीएम मोदी
विपक्ष के पास जनता की समस्याओं का कोई समाधान नहीं है, वे केवल देश के विकास कर रहे लोगों को गालियां दे रहे हैं: तेलंगाना के बेगमपेट हवाई अड्डे पर पीएम मोदी
हमने पीएम आवास योजना के 3 करोड़ घर देश भर के गरीबों को दिए हैं... लेकिन यहां की सरकार ने तेलंगाना के गरीब लोगों से ये खुशियां भी छीन लीं: पीएम मोदी

नमस्कार ।

भारत माता की...

भारत माता की...

ये मेरा सौभाग्य है कि आज मुझे तेलंगाना में विकास को नई गति देने के लिए महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए आपके बीच आने का अवसर मिला है। आज रामागुंडम में फर्टिलाइजर प्लांट के साथ-साथ रेल और रोड से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स के लोकार्पण और शिलान्यास का कार्यक्रम है।लेकिन इसके साथ ही मैं भी आपकी तरह भाजपा का एक छोटा कार्यकर्ता हूं और जब कार्यकर्ता के नाते, हमारे संजय जी ने हुक्म कर दिया कि आप हैदराबाद में कार्यकर्ताओं को मिल कर के जाइए, जो मैं इसे अपना सौभाग्य मानता हूं कि कार्यकर्ता के रूप में आप सब कार्यकर्ताओं के बीच में आने का मुझे अवसर मिला है।

साथियों,
इस कार्यक्रम में आपको बधाई देने आया हूं। मैं वाकई बताता हूं कि मैं तेलंगाना के कार्यकर्ताओं से बहुत प्रभावित हूं। कदम-कदम पर आप लोग मां भारती के लिए समर्पण भाव से, निष्ठा भाव से, जिस प्रकार से डटे हो, हर जुल्म के खिलाफ, सर ऊंचा करके जंग लड़ रहे हो। निराशा के गर्त में डूबी हुई यहां की सरकार जिस प्रकार आप पर जुल्म ढा रही है, अत्याचार कर रही है। लेकिन आप बिना डरे, बिना थके, बिना झुके मां भारती की सेवा में लगे हैं, आपको बहुत-बहुत बधाई है।

भाइयों-बहनों,

मुझे अफसोस है कि तेलंगाना के नाम पर जो लोग फले-फूले, आगे बढ़े, सत्ता पाई, वो खुद तो आगे बढ़ गए लेकिन तेलंगाना को पीछे धकेल दिया। तेलंगाना का जो सामर्थ्य है, तेलंगाना के लोगों का जो टैलेंट है, उसके साथ यहां की सरकार , यहां के नेता लगातार नाइंसाफी करते रहते हैं। जिस दल पर तेलंगाना के लोगों ने सबसे ज्यादा भरोसा किया, उसी दल ने तेलंगाना के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात किया है।

लेकिन साथियों,
जब अंधेरा बहुत बढ़ जाता है, चारो तरफ घना अंधकार हो जाता है, उसी परिस्थिति में कमल का खिलना शुरू हो जाता है। भोर से ठीक पहले, उजियारे से पहले।आज तेलंगाना में भी ऐसे ही कमल खिलता नजर आ रहा है। बीजेपी के परिश्रमी, मेहनती कार्यकर्ताओं की वजह से अब तेलंगाना में अंधेरा छंटने की शुरुआत हो गई है। अभी मुनुगोड़े की जनता ने जिस प्रकार भाजपा पर भरोसा जताया है, वो अभूतपूर्व है।

मैंने देखा कि कैसे बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने पूरी की पूरी तेलंगाना राज्य सरकार को एक विधानसभा सीट पर लाकर खड़ा कर दिया। बड़े आकाओं को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया। ये दिखाता है कि जनता का आप पर आशीर्वाद है और आपकी मेहनत कैसे रंग ला रही है। हर बूथ पर कितनी ईमानदारी और लगन से काम किया है, इसका ये सबूत है भाइयों। बीते कुछ समय से जितने भी उपचुनाव हुए हैं, सभी उपचुनावों का एक ही संदेश है। तेलंगाना में सूर्योदय दूर नहीं है, तेलंगाना का अंधेरा दूर होगा, तेलंगाना में हर तरफ कमल खिलेगा।

साथियों,

बीजेपी का तेलंगाना के साथ बहुत पुराना और गहरा नाता रहा है।1984 में जब हमारी पार्टी को लोकसभा में सिर्फ 2 सीटों पर जीत मिली थी, उनमें से एक इसी राज्य की हनमकोंडा सीट थी। हमारे जंगा रेड्डी जी जीत कर आए थे। तेलंगाना के लोगों ने सबसे मुश्किल समय में हमारे जब बुरे दिन थे तब भी तेलंगाना ने हमारा साथ नहीं छोड़ा था।तेलंगाना के कार्यकर्ताओं ने जो तप किया, उसी के कारण आज बीजेपी लोकसभा में 300 से अधिक सीटों की पार्टी है।
आज तेलंगाना की जनता, बीजेपी को तेलंगाना की सबसे बड़ी पार्टी बनाने के लिए भी मन बना चुकी है।

साथियों,

21वीं सदी का भारत अपनी विरासत को संजोते हुए, आधुनिकता को अपनाते हुए तेज गति से आगे बढ़ रहा है।ये शहर तो इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी का किला है किला। जब मैं ये देखता हूं कि इस आधुनिक शहर में अंधविश्वास को बढ़ावा दिया जा रहा है, तो बहुत दुख होता है। ऐसा लग रहा है कि तेलंगाना की सरकार ने अंधविश्वास को राजश्रय दिया हुआ है।

यहां तेलंगाना में अंधविश्वास के नाम पर क्या-क्या हो रहा है, ये पूरे देश को लोगों को जानना चाहिए। कहां रहना है, किस दफ्तर में जाना है, किसे मंत्रिमंडल में रखना है, मंत्रिमंडल कब बनाना है, मंत्री में से किसको कब निकालना है। ये सारा अंधविश्वास तय करता है।तेलंगाना का विकास करना है, उसे पिछड़ेपन से निकालना है, तो हमें सबसे पहले यहां से हर तरह के अंधविश्वास को दूर करना होगा।

आज मैं देख रहा हूं, तेलंगाना में सुशासन और तेज़ विकास की आकांक्षा कितनी प्रबल है। अब तेलंगाना के लोग एक परिवार के बजाय, तेलंगाना के हर परिवार के लिए काम करने वाली सरकार चाहते हैं, भाजपा की सरकार चाहते हैं।
तेलंगाना की जनता Family First के बजाय People First की राजनीति चाहती हैं।

साथियों,

इस बार लाल किले से मैंने आह्वान किया है कि भ्रष्टाचार और परिवारवाद, ये विकास के, लोकतंत्र के, सामाजिक न्याय के सबसे बड़े दुश्मन हैं।आज मैं तेलंगाना में भ्रष्टाचार और परिवारवाद के विरुद्ध जो जनाक्रोश, जनता जनार्दन में जो गुस्सा है, नौजवानों में जो गुस्सा है वो आज हिंदुस्तान देख रहा है।और मैं आज तेलंगाना की जनता को आश्वस्त करता हूं- गरीब को लूटने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा।

आज आपने देखा होगा कुछ लोग कार्रवाई से बचने के लिए एकजुट होने का प्रयास कर रहे हैं। भ्रष्टाचारियों का गठजोड़ बनाने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन तेलंगाना की जनता, देश की जनता ये देख भी रही है, समझ भी रही है।

इसलिए भाजपा भ्रष्टाचार और परिवारवाद, दोनों से ही लगातार मोर्चा ले रही है। भाजपा सरकार भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।आप याद करिए, पहले राशन की दुकानों में कैसे गरीबों का राशन लुट जाता था। हमने जनधन, आधार और मोबाइल की त्रिशक्ति का उपयोग करके करोड़ों फर्ज़ी लाभार्थियों को हटा दिया।

अब सरकार का बेनिफिट सीधे गरीब के बैंक खाते में पहुंचता है। अब केंद्र सरकार की अधिकतर सेवाएं ऑनलाइन हैं। इससे घूसखोरी की आशंका कम हुई है।आज BHIM UPI के कारण देश में कैश लेनदेन की मजबूरी कम हुई है।
जब पेमेंट भी ऑनलाइन होती है, तो भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी कम हो जाती है।आखिर सरकार और जनता के बीच बिचौलियों की क्या जरूरत है भाई?

सरकार सीधे जनता तक पहुंचे और जनता सीधे सरकार तक, इसलिए हमने टेक्नॉलॉजी का ब्रिज बनाया है।तेलंगाना में भी भाजपा ऐसा ही भ्रष्टाचार मुक्त सुशासन देने के लिए तैयार है।मैं बीजेपी के सभी कार्यकर्ताओं से कहूंगा कि आप तेलंगाना के बूथ-बूथ में जाएं।केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ जिनको अभी तक नहीं मिल पाया है, उनकी मदद करें।

और एक बात।

तेलंगाना के कार्यकर्ताओं से मेरी व्यक्तिगत प्रार्थना है और मैं विश्वास करता हूं कि आप मेरी बात मानोगे...देखिए कुछ लोग निराशा के कारण, हताशा के कारण, भय के कारण, अंधविश्वास के कारण सुबह शाम मोदी को गालियां देते हैं, भांति-भांति की गालियां देते हैं, सारी डिक्शनरी उन्होंने मोदी को गालियां देने के लिए खपा ली है। मेरी आपसे प्रार्थना है कि ऐसी बातों से आप परेशान मत होना। उनके पास गालियों के सिवा देने के लिए बचा क्या है भाई, आप बिल्कुल परेशान मत हो जाइए और मैं तो पिछले 20-22 साल से वेराइटी-वेराइटी की गालियां खा चुका हूं। मेहरबानी करके इससे जरा भी परेशान मत होइएगा। शाम को उन गालियों पर थोड़ी हंसी मजाक कीजिए, बढ़िया चाय पीजिए और दूसर दिन कमल खिलने वाला है, इस खुशी में आगे बढ़िए। तो दोस्तों आप मुझे बताइए, ये गालियों से आप परेशान नहीं होंगे न, बिल्कुल नहीं होंगे न...शाबास..अरे सीना चौड़ा करके चलिए दोस्तों। देखिए, हमें याद रखना है, राजनीति सामान्य मानवी की सेवा करने और उनकी समस्याएं सुलझाने का माध्यम है।

इसलिए राजनीति में हमारा एजेंडा, हमारा मकसद, हमेशा सकारात्मक होना चाहिए, सेवा भाव से भरा होना चाहिए।लेकिन यहां तेलंगाना में जिन लोगों को सत्ता मिली, उनका सारा ध्यान मोदी को गाली देने और भाजपा को कोसने में लगा रहता है।
मुझे कभी-कभी लोग पूछते हैं आप थकते नहीं हो। अब कल मैं दिल्ली में था सुबह, फिर कर्नाटक में, फिर तमिलनाडु में, फिर रात को आंध्र में और अभी तेलंगाना में, तो लोग मुझे पूछते हैं थकते नहीं हो। तो मैंने उनको समझाया देखो भाइयों मैं डेली 2 किलो, ढाई किलो तीन किलो गाली खाता हूं और परमात्मा ने मेरे भीतर ऐसी रचना कर दी है और ईश्वर ने ऐसे आशीर्वाद दिए हैं कि ये सारी गालियां मेरे अंदर Process होकर Nutrition में Convert हो जाती हैं। एक सकारात्मक ऊर्जा बन जाती हैं। जो जनता की सेवा में काम आती है भाइयों।

भाइयों-बहनों

जो दिन रात मुझे गाली देते हैं, रोज-रोज नई-नई गालियां खोजते रहते हैं। मैं उन्हें कहना चाहता हूं कि आप मोदी को कितनी ही गाली दीजिए, हम हजम कर जाएंगे। भाजपा को गाली दीजिए हमें कोई समस्या नहीं है, हम तो ऐसे ही बड़े हुए हैं, लेकिन अगर तेलंगाना के लोगों को गाली दी तो लेने के देने पड़ जाएंगे। यहां के लोगों के सपनों से खिलवाड़ किया तो मुकाबला बहुत संगीन हो जाएगा, ये समझ जाइए।

भाइयों-बहनों

मोदी और भाजपा को गाली देने से अगर तेलंगाना का भला होता है, तो देते रहिए, अगर यहां के लोगों की सुख सुविधा बढ़ती है, देते रहिए, ‘Ease of Living’ होता है देते रहिए। मोदी और भाजपा को गाली देकर अगर तेलंगाना के किसान समृद्ध हो रहे हों, तो जरूर दीजिए गाली। आज तेलंगाना के किसानों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है।आप खुद इस बात के साक्षी हैं कि यहां के हल्दी किसानों को सरकार ने किस हाल में छोड़ दिया है। आप इस बात के साक्षी हैं कि यहां विकास के रास्ते में किस तरह लगातार रोड़े अटकाए जा रहे हैं।मैं आज तेलंगाना के लोगों को भरोसा देना चाहता हूं- भाजपा तेलंगाना में पॉजिटीव एजेंडा के साथ आ रही है, हम मिलकर यहां विकास की नई गाथा लिखेंगे।

साथियों,

तेलंगाना, हैदराबाद मेरे लिए बहुत अहमियत रखता है।2013 में मैं यहां ‘नव भारत युवा भेरी’ में शामिल होने आया था।उस वक्त मैं अपनी पार्टी का पीएम उम्मीदवार भी नहीं था। मैं सिर्फ एक सीएम और प्रचार समिति का प्रमुख था।
लेकिन जो स्नेह आप लोगों से मुझे दिया, तेलंगाना ने मुझे दिया, हिंदुस्तान के लिए ये टर्निंग प्वांट बन गया है। और मैं आपके इस प्यार को कभी भूल नहीं सकता हूं और आपके इस प्यार को ब्याज समेत लौटाता रहता हूं, लौटाता रहूंगा। विकास करके लौटाता रहूंगा, भाइयों।

तब मैंने कहा था कि हमारी सरकार India First के विजन और संविधान को मजबूत करने की दिशा में काम करेगी।और सरकार बनाने के बाद हम निरंतर उसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर काम कर रहे हैं।बीते 8 वर्षों में देश ने सुशासन का एक नया रूप देखा है। पहली बार देश की जनता को लग रहा है कि गरीब की हर ज़रूरत, सरकार की प्राथमिकता बन गई है। यही कारण है कि जब 100 साल का सबसे बड़ा संकट आया तो केंद्र सरकार ने गरीबों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
पूरे देश में गरीब भूखा ना सोए, इसलिए अभी तक केंद्र सरकार 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर चुकी है।

इससे तेलंगाना के भी लगभग 2 करोड़ साथियों को मुफ्त राशन मिल रहा है। गरीब के जीवन की सुरक्षा हो, इसलिए हज़ारों करोड़ रुपए खर्च करके हमने मुफ्त वैक्सीन उपलब्ध कराई।केंद्र सरकार हर लाभार्थी तक पहुंचने की अप्रोच के साथ काम कर रही है, सैचुरेशन के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन आप ये भी जानते हैं कि तेलंगाना में यहां की सरकार को गरीब के लिए होने वाले विकास कार्यों से परेशानी है।

केंद्र सरकार की सारी कोशिशों के बावजूद, यहां की सरकार ने पीएम आवास योजना के घर बनने में रोड़े अटका दिए।देशभर में पीएम आवास योजना के 3 करोड़ घर गरीबों को बनाकर हम दे चुके हैं, उनके सिर पर पक्की छत हो गई है।लेकिन तेलंगाना के गरीबों से ये सुख भी यहां की सरकार ने छीन लिया। कहां ये लोग 2 BHK फ्लैट देने वाले थे, कहां पीएम आवास के घर भी नहीं बनने दिए। मैं जानता हूं तेलंगाना के लोग इस अपराध को कभी माफ नहीं करेंगे।

साथियों,

आज तेलंगाना पॉजिटिविटी चाहता है, प्रोग्रेस चाहता है, जो सिर्फ बीजेपी ही दे सकती है।तेलंगाना के लोग ये समझ रहे हैं इसलिए यहां बीजेपी का जनाधार लगातार बढ़ रहा है।और आज जो तेलंगाना में सबको दिख रहा है, ये बीते 8 वर्षों में पूरे देश का ट्रेंड है।त्रिपुरा में बीजेपी की गिनती नहीं होती थी। हमारे कार्यर्ताओं ने संघर्ष किया, जनता के मुद्दों को उठाया। आज वहां बीजेपी की मज़बूत सरकार है। इसी तरह असम, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा – इन सभी राज्यों में हम लोगों की सेवा में लगे रहे और जनता जनार्दन ने हमें भरपूर आशीर्वाद दिया।अब तो बीजेपी की सरकारें जहां एक बार बन जाती हैं, वहां बार-बार बीजेपी सरकार बन रही है।

भाइयों और बहनों,

बीजेपी के प्रति ये विश्वास- सुशासन के कारण है। वो सुशासन जिसके मूल में सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास का प्रण है।बीजेपी वो पार्टी है, जो युवाओं की पार्टी है, गरीब के हित में सरकार चलाती है।
अब तेलंगाना में भी हमें भाजपा को निरंतर मजबूत करना है। तेलंगाना को भ्रष्टाचार और परिवार के शिकंजे से मुक्त करना हमारा कर्तव्य है।मुझे भाजपा के लाखों कार्यकर्ता पर पूरा भरोसा है। और आप का जोश मैं देख रहा हूं, मुझे भी नई ऊर्जा मिलती है।मैं फिर एक बार आपको बहुत-बहुत बधाई देता हूं। बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं और आपकी निष्ठा को नमन करते हुए बोलिए...

भारत माता की....

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भारत माता की....

बहुत-बहुत धन्यवाद !

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Text of PM’s address at the Krishnaguru Eknaam Akhand Kirtan for World Peace
February 03, 2023
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“Krishnaguru ji propagated ancient Indian traditions of knowledge, service and humanity”
“Eknaam Akhanda Kirtan is making the world familiar with the heritage and spiritual consciousness of the Northeast”
“There has been an ancient tradition of organizing such events on a period of 12 years”
“Priority for the deprived is key guiding force for us today”
“50 tourist destination will be developed through special campaign”
“Gamosa’s attraction and demand have increased in the country in last 8-9 years”
“In order to make the income of women a means of their empowerment, ‘Mahila Samman Saving Certificate’ scheme has also been started”
“The life force of the country's welfare schemes are social energy and public participation”
“Coarse grains have now been given a new identity - Shri Anna”

जय कृष्णगुरु !

जय कृष्णगुरु !

जय कृष्णगुरु !

जय जयते परम कृष्णगुरु ईश्वर !.

कृष्णगुरू सेवाश्रम में जुटे आप सभी संतों-मनीषियों और भक्तों को मेरा सादर प्रणाम। कृष्णगुरू एकनाम अखंड कीर्तन का ये आयोजन पिछले एक महीने से चल रहा है। मुझे खुशी है कि ज्ञान, सेवा और मानवता की जिस प्राचीन भारतीय परंपरा को कृष्णगुरु जी ने आगे बढ़ाया, वो आज भी निरंतर गतिमान है। गुरूकृष्ण प्रेमानंद प्रभु जी और उनके सहयोग के आशीर्वाद से और कृष्णगुरू के भक्तों के प्रयास से इस आयोजन में वो दिव्यता साफ दिखाई दे रही है। मेरी इच्छा थी कि मैं इस अवसर पर असम आकर आप सबके साथ इस कार्यक्रम में शामिल होऊं! मैंने कृष्णगुरु जी की पावन तपोस्थली पर आने का पहले भी कई बार प्रयास किया है। लेकिन शायद मेरे प्रयासों में कोई कमी रह गई कि चाहकर के भी मैं अब तक वहां नहीं आ पाया। मेरी कामना है कि कृष्णगुरु का आशीर्वाद मुझे ये अवसर दे कि मैं आने वाले समय में वहाँ आकर आप सभी को नमन करूँ, आपके दर्शन करूं।

साथियों,

कृष्णगुरु जी ने विश्व शांति के लिए हर 12 वर्ष में 1 मास के अखंड नामजप और कीर्तन का अनुष्ठान शुरू किया था। हमारे देश में तो 12 वर्ष की अवधि पर इस तरह के आयोजनों की प्राचीन परंपरा रही है। और इन आयोजनों का मुख्य भाव रहा है- कर्तव्य I ये समारोह, व्यक्ति में, समाज में, कर्तव्य बोध को पुनर्जीवित करते थे। इन आयोजनों में पूरे देश के लोग एक साथ एकत्रित होते थे। पिछले 12 वर्षों में जो कुछ भी बीते समय में हुआ है, उसकी समीक्षा होती थी, वर्तमान का मूल्यांकन होता था, और भविष्य की रूपरेखा तय की जाती थी। हर 12 वर्ष पर कुम्भ की परंपरा भी इसका एक सशक्त उदाहरण रहा है। 2019 में ही असम के लोगों ने ब्रह्मपुत्र नदी में पुष्करम समारोह का सफल आयोजन किया था। अब फिर से ब्रह्मपुत्र नदी पर ये आयोजन 12वें साल में ही होगा। तमिलनाडु के कुंभकोणम में महामाहम पर्व भी 12 वर्ष में मनाया जाता है। भगवान बाहुबली का महा-मस्तकाभिषेक ये भी 12 साल पर ही होता है। ये भी संयोग है कि नीलगिरी की पहाड़ियों पर खिलने वाला नील कुरुंजी पुष्प भी हर 12 साल में ही उगता है। 12 वर्ष पर हो रहा कृष्णगुरु एकनाम अखंड कीर्तन भी ऐसी ही सशक्त परंपरा का सृजन कर रहा है। ये कीर्तन, पूर्वोत्तर की विरासत से, यहाँ की आध्यात्मिक चेतना से विश्व को परिचित करा रहा है। मैं आप सभी को इस आयोजन के लिए अनेकों-अनेक शुभकामनाएं देता हूँ।

साथियों,

कृष्णगुरु जी की विलक्षण प्रतिभा, उनका आध्यात्मिक बोध, उनसे जुड़ी हैरान कर देने वाली घटनाएं, हम सभी को निरंतर प्रेरणा देती हैं। उन्होंने हमें सिखाया है कि कोई भी काम, कोई भी व्यक्ति ना छोटा होता है ना बड़ा होता है। बीते 8-9 वर्षों में देश ने इसी भावना से, सबके साथ से सबके विकास के लिए समर्पण भाव से कार्य किया है। आज विकास की दौड़ में जो जितना पीछे है, देश के लिए वो उतनी ही पहली प्राथमिकता है। यानि जो वंचित है, उसे देश आज वरीयता दे रहा है, वंचितों को वरीयता। असम हो, हमारा नॉर्थ ईस्ट हो, वो भी दशकों तक विकास के कनेक्टिविटी से वंचित रहा था। आज देश असम और नॉर्थ ईस्ट के विकास को वरीयता दे रहा है, प्राथमिकता दे रहा है।

इस बार के बजट में भी देश के इन प्रयासों की, और हमारे भविष्य की मजबूत झलक दिखाई दी है। पूर्वोत्तर की इकॉनमी और प्रगति में पर्यटन की एक बड़ी भूमिका है। इस बार के बजट में पर्यटन से जुड़े अवसरों को बढ़ाने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। देश में 50 टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स को विशेष अभियान चलाकर विकसित किया जाएगा। इनके लिए आधुनिक इनफ्रास्ट्रक्चर बनाया जाएगा, वर्चुअल connectivity को बेहतर किया जाएगा, टूरिस्ट सुविधाओं का भी निर्माण किया जाएगा। पूर्वोत्तर और असम को इन विकास कार्यों का बड़ा लाभ मिलेगा। वैसे आज इस आयोजन में जुटे आप सभी संतों-विद्वानों को मैं एक और जानकारी देना चाहता हूं। आप सबने भी गंगा विलास क्रूज़ के बारे में सुना होगा। गंगा विलास क्रूज़ दुनिया का सबसे लंबा रिवर क्रूज़ है। इस पर बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी सफर कर रहे हैं। बनारस से बिहार में पटना, बक्सर, मुंगेर होते हुये ये क्रूज़ बंगाल में कोलकाता से आगे तक की यात्रा करते हुए बांग्लादेश पहुंच चुका है। कुछ समय बाद ये क्रूज असम पहुँचने वाला है। इसमें सवार पर्यटक इन जगहों को नदियों के जरिए विस्तार से जान रहे हैं, वहाँ की संस्कृति को जी रहे हैं। और हम तो जानते है भारत की सांस्कृतिक विरासत की सबसे बड़ी अहमियत, सबसे बड़ा मूल्यवान खजाना हमारे नदी, तटों पर ही है क्योंकि हमारी पूरी संस्कृति की विकास यात्रा नदी, तटों से जुड़ी हुई है। मुझे विश्वास है, असमिया संस्कृति और खूबसूरती भी गंगा विलास के जरिए दुनिया तक एक नए तरीके से पहुंचेगी।

साथियों,

कृष्णगुरु सेवाश्रम, विभिन्न संस्थाओं के जरिए पारंपरिक शिल्प और कौशल से जुड़े लोगों के कल्याण के लिए भी काम करता है। बीते वर्षों में पूर्वोत्तर के पारंपरिक कौशल को नई पहचान देकर ग्लोबल मार्केट में जोड़ने की दिशा में देश ने ऐतिहासिक काम किए हैं। आज असम की आर्ट, असम के लोगों के स्किल, यहाँ के बैम्बू प्रॉडक्ट्स के बारे में पूरे देश और दुनिया में लोग जान रहे हैं, उन्हें पसंद कर रहे हैं। आपको ये भी याद होगा कि पहले बैम्बू को पेड़ों की कैटेगरी में रखकर इसके काटने पर कानूनी रोक लग गई थी। हमने इस कानून को बदला, गुलामी के कालखंड का कानून था। बैम्बू को घास की कैटेगरी में रखकर पारंपरिक रोजगार के लिए सभी रास्ते खोल दिये। अब इस तरह के पारंपरिक कौशल विकास के लिए, इन प्रॉडक्ट्स की क्वालिटी और पहुँच बढ़ाने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किया गया है। इस तरह के उत्पादों को पहचान दिलाने के लिए बजट में हर राज्य में यूनिटी मॉल-एकता मॉल बनाने की भी घोषणा इस बजट में की गई है। यानी, असम के किसान, असम के कारीगर, असम के युवा जो प्रॉडक्ट्स बनाएँगे, यूनिटी मॉल-एकता मॉल में उनका विशेष डिस्प्ले होगा ताकि उसकी ज्यादा बिक्री हो सके। यही नहीं, दूसरे राज्यों की राजधानी या बड़े पर्यटन स्थलों में भी जो यूनिटी मॉल बनेंगे, उसमें भी असम के प्रॉडक्ट्स रखे जाएंगे। पर्यटक जब यूनिटी मॉल जाएंगे, तो असम के उत्पादों को भी नया बाजार मिलेगा।

साथियों,

जब असम के शिल्प की बात होती है तो यहाँ के ये 'गोमोशा' का भी ये ‘गोमोशा’ इसका भी ज़िक्र अपने आप हो जाता है। मुझे खुद 'गोमोशा' पहनना बहुत अच्छा लगता है। हर खूबसूरत गोमोशा के पीछे असम की महिलाओं, हमारी माताओं-बहनों की मेहनत होती है। बीते 8-9 वर्षों में देश में गोमोशा को लेकर आकर्षण बढ़ा है, तो उसकी मांग भी बढ़ी है। इस मांग को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप्स सामने आए हैं। इन ग्रुप्स में हजारों-लाखों महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। अब ये ग्रुप्स और आगे बढ़कर देश की अर्थव्यवस्था की ताकत बनेंगे। इसके लिए इस साल के बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। महिलाओं की आय उनके सशक्तिकरण का माध्यम बने, इसके लिए 'महिला सम्मान सेविंग सर्टिफिकेट' योजना भी शुरू की गई है। महिलाओं को सेविंग पर विशेष रूप से ज्यादा ब्याज का फायदा मिलेगा। साथ ही, पीएम आवास योजना का बजट भी बढ़ाकर 70 हजार करोड़ रुपए कर दिया गया है, ताकि हर परिवार को जो गरीब है, जिसके पास पक्का घर नहीं है, उसका पक्का घर मिल सके। ये घर भी अधिकांश महिलाओं के ही नाम पर बनाए जाते हैं। उसका मालिकी हक महिलाओं का होता है। इस बजट में ऐसे अनेक प्रावधान हैं, जिनसे असम, नागालैंड, त्रिपुरा, मेघालय जैसे पूर्वोत्तर राज्यों की महिलाओं को व्यापक लाभ होगा, उनके लिए नए अवसर बनेंगे।

साथियों,

कृष्णगुरू कहा करते थे- नित्य भक्ति के कार्यों में विश्वास के साथ अपनी आत्मा की सेवा करें। अपनी आत्मा की सेवा में, समाज की सेवा, समाज के विकास के इस मंत्र में बड़ी शक्ति समाई हुई है। मुझे खुशी है कि कृष्णगुरु सेवाश्रम समाज से जुड़े लगभग हर आयाम में इस मंत्र के साथ काम कर रहा है। आपके द्वारा चलाये जा रहे ये सेवायज्ञ देश की बड़ी ताकत बन रहे हैं। देश के विकास के लिए सरकार अनेकों योजनाएं चलाती है। लेकिन देश की कल्याणकारी योजनाओं की प्राणवायु, समाज की शक्ति और जन भागीदारी ही है। हमने देखा है कि कैसे देश ने स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया और फिर जनभागीदारी ने उसे सफल बना दिया। डिजिटल इंडिया अभियान की सफलता के पीछे भी सबसे बड़ी वजह जनभागीदारी ही है। देश को सशक्त करने वाली इस तरह की अनेकों योजनाओं को आगे बढ़ाने में कृष्णगुरु सेवाश्रम की भूमिका बहुत अहम है। जैसे कि सेवाश्रम महिलाओं और युवाओं के लिए कई सामाजिक कार्य करता है। आप बेटी-बचाओ, बेटी-पढ़ाओ और पोषण जैसे अभियानों को आगे बढ़ाने की भी ज़िम्मेदारी ले सकते हैं। 'खेलो इंडिया' और 'फिट इंडिया' जैसे अभियानों से ज्यादा से ज्यादा युवाओं को जोड़ने से सेवाश्रम की प्रेरणा बहुत अहम है। योग हो, आयुर्वेद हो, इनके प्रचार-प्रसार में आपकी और ज्यादा सहभागिता, समाज शक्ति को मजबूत करेगी।

साथियों,

आप जानते हैं कि हमारे यहां पारंपरिक तौर पर हाथ से, किसी औजार की मदद से काम करने वाले कारीगरों को, हुनरमंदों को विश्वकर्मा कहा जाता है। देश ने अब पहली बार इन पारंपरिक कारीगरों के कौशल को बढ़ाने का संकल्प लिया है। इनके लिए पीएम-विश्वकर्मा कौशल सम्मान यानि पीएम विकास योजना शुरू की जा रही है और इस बजट में इसका विस्तार से वर्णन किया गया है। कृष्णगुरु सेवाश्रम, विश्वकर्मा साथियों में इस योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाकर भी उनका हित कर सकता है।

साथियों,

2023 में भारत की पहल पर पूरा विश्व मिलेट ईयर भी मना रहा है। मिलेट यानी, मोटे अनाजों को, जिसको हम आमतौर पर मोटा अनाज कहते है नाम अलग-अलग होते है लेकिन मोटा अनाज कहते हैं। मोटे अनाजों को अब एक नई पहचान दी गई है। ये पहचान है- श्री अन्न। यानि अन्न में जो सर्वश्रेष्ठ है, वो हुआ श्री अन्न। कृष्णगुरु सेवाश्रम और सभी धार्मिक संस्थाएं श्री-अन्न के प्रसार में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। आश्रम में जो प्रसाद बँटता है, मेरा आग्रह है कि वो प्रसाद श्री अन्न से बनाया जाए। ऐसे ही, आज़ादी के अमृत महोत्सव में हमारे स्वाधीनता सेनानियों के इतिहास को युवापीढ़ी तक पहुंचाने के लिए अभियान चल रहा है। इस दिशा में सेवाश्रम प्रकाशन द्वारा, असम और पूर्वोत्तर के क्रांतिकारियों के बारे में बहुत कुछ किया जा सकता है। मुझे विश्वास है, 12 वर्षों बाद जब ये अखंड कीर्तन होगा, तो आपके और देश के इन साझा प्रयासों से हम और अधिक सशक्त भारत के दर्शन कर रहे होंगे। और इसी कामना के साथ सभी संतों को प्रणाम करता हूं, सभी पुण्य आत्माओं को प्रणाम करता हूं और आप सभी को एक बार फिर बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

धन्यवाद!