प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने रूस के राष्‍ट्रपति श्री व्‍लादीमीर पुतिन से 2 जुलाई 2020 को टेलीफोन पर बातचीत की।

प्रधानमंत्री ने द्वितीय विश्व युद्ध में विजय की 75 वीं वर्षगांठ के अवसर पर मनाए जा रहे समारोहों की सफलता और पर रूस में संवैधानिक संशोधनों पर वोट के सफल समापन के लिए गर्मजोशी से बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने 24 जून 2020 को मास्को में आयोजित सैन्य परेड में एक भारतीय टुकड़ी की भागीदारी को याद करते हुए, इसे भारत और रूस की जनता के बीच स्‍थायी दोस्ती का प्रतीक बताया।

दोनों नेताओं ने कोविड -19 वैश्विक महामारी के नकारात्मक परिणामों को दूर करने के लिए दोनों देशों द्वारा किए गए प्रभावी उपायों की चर्चा की और कोविड के बाद की दुनिया की चुनौतियों से मिलकर मुकाबला करने के लिए भारत और रूस के करीबी रिश्‍तों के महत्व पर सहमति व्यक्त की।

दोनों नेता द्विपक्षीय संपर्क और परामर्शों की गति बनाए रखने पर सहमत हुए, जिससे इस वर्ष के अंत में भारत में होने वाले वार्षिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा सके। प्रधानमंत्री ने द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के लिए भारत में राष्ट्रपति पुतिन का स्वागत करने के लिए अपनी उत्सुकता व्यक्त की।

राष्ट्रपति पुतिन ने फोन कॉल के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया और सभी क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त सामरिक साझेदारी को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

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प्रधानमंत्री आंतरिक ज्ञान के महत्व को रेखांकित करते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
April 09, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें उन्होंने आंतरिक ज्ञान को ब्रह्मांड का सच्चा सार बताते हुए उसके महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत की विरासत और संस्कृति ने हमेशा यह सिखाया है कि सच्चा ज्ञान और उसका सही सदुपयोग ही किसी राष्ट्र की प्रगति के आधार हैं। उन्होंने बताया कि इसी मार्ग पर चलते हुए देश के युवा एक समृद्ध और सशक्त भारत के निर्माण में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह ज्ञान, जो हमारे भीतर ही स्थित है और सामान्य ज्ञान से कहीं अधिक श्रेष्ठ है, महान और विद्वान व्यक्तियों द्वारा पूजनीय माना जाता है।

प्रधानमंत्री ने एक्स(X) पर लिखा:

"हमारी विरासत और संस्कृति हमें यही सिखाती आई है कि सच्चा ज्ञान और उसका सदुपयोग ही राष्ट्र की प्रगति का आधार है। इसी मार्ग पर चलकर आज हमारे देश के युवा समृद्ध और सशक्त भारत को गढ़ने में जुटे हैं।

अन्तःस्थमेव यज्ज्ञानं ज्ञानादपि च यत्परम्।

तदेव सर्वसंसारसारं सद्भिरुपास्यते॥"

जो ज्ञान हमारे भीतर स्थित है और जो सामान्य या बाहरी ज्ञान से भी श्रेष्ठ है, वही इस समस्त संसार का असली सार है। श्रेष्ठ पुरूषों और ज्ञानियों द्वारा उसी आंतरिक ज्ञान की उपासना की जाती है।