प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज श्रीलंका के राष्ट्रपति महामहिम गोटबाया राजपक्षे से टेलीफोन पर बातचीत की। इस दौरान ‘कोविड-19’ महामारी के मौजूदा प्रकोप के साथ-साथ इस क्षेत्र में इसके संभावित स्वास्थ्य और आर्थिक प्रभावों पर विचार-विमर्श किया गया।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति को यह आश्वासन दिया कि भारत महामारी के प्रभावों को कम करने के लिए श्रीलंका को हरसंभव सहायता प्रदान करना निरंतर जारी रखेगा।

राष्ट्रपति श्री राजपक्षे ने प्रधानमंत्री श्री मोदी को अपने देश में आर्थिक गतिविधियों को फिर से शुरू करने के लिए अपनी सरकार द्वारा उठाए जा रहे विभिन्‍न कदमों के बारे में जानकारी दी। इस संदर्भ में दोनों ही राजनेताओं ने श्रीलंका में कार्यान्वित की जा रही भारतीय सहायता प्राप्त विकास परियोजनाओं में तेजी लाने की आवश्यकता पर सहमति जताई। इसके अलावा, दोनों राजनेताओं ने भारत के निजी क्षेत्र (प्राइवेट सेक्‍टर) द्वारा श्रीलंका में निवेश और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने श्रीलंका के लोगों के अच्‍छे स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं।

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प्रधानमंत्री ने धैर्य और दृढ़ता की शक्ति को उजागर करने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
July 08, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि साहस किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि साहस देश को कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए भी एकजुट रहने और प्रगति, समृद्धि तथा आत्मनिर्भरता की ओर निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

प्रधानमंत्री ने संस्कृत में सुभाषितम् साझा किया।

“चलन्ति गिरयः कामं युगान्तपवनाहताः।

कृच्छ्रेऽपि न चलत्येव धीराणां निश्चलं मनः।। ”

यह सुभाषितम बताता है कि प्रलय के समय तूफानी हवाओं से घिरे पहाड़ भी कांप उठते हैं और गतिमान हो जाते हैं, फिर भी सबसे गंभीर परीक्षाओं के बीच भी दृढ़ व्यक्ति का मन अविचल और स्थिर रहता है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखाः

"धैर्य किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है। इससे कठिन चुनौतियों के बीच भी देश को एकजुट रहने के साथ ही प्रगति, समृद्धि और आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।"

चलन्ति गिरयः कामं युगान्तपवनाहताः।

कृच्छ्रेऽपि न चलत्येव धीराणां निश्चलं मनः।"