प्रधानमंत्री सर अनिरूद्ध जगन्‍नाथ मीडिया कर्मियों,

मैं गर्मजोशी से किये गये अपने स्‍वागत और असाधारण मेजबानी के लिए आपका हृदय से धन्‍यवाद करता हूं।

मैं मॉरीशस की जनता और आपका आभारी हूं, क्‍योंकि आपने मुझे कल आयोजित होने वाले राष्‍ट्रीय दिवस में मुख्‍य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया।

यह भारत की सवा करोड़ जनता के लिए एक सम्‍मान है। वे संबंधों की कद्र करते हैं। यह संबंध हमारे हृदय की गहराइयों से विकसित हुए हैं।

हम एक दूसरे के समर्थन और एकजुटता के लिए सदा तैयार रहते हैं। यह भावना हमारी मैत्री, साझा मूल्‍यों और समान क्षेत्रीय और वैश्विक हितों से स्‍वत: विकसित होती है।

684-14 PM Modi media statement  after delegation level talks (2)

हम आर्थिक प्रगति में भागीदार हैं।

हमने अतुलनीय शक्ति और स्‍वरूप के संबंध बनाए हैं।

मेरी और यहां के प्रधानमंत्री के बीच मुलाकात सचमुच शानदार रही। आज के निष्‍कर्ष और फैसले वाकई महत्‍वपूर्ण हैं।

हमने सुरक्षित और संरक्षित हिंद महासागर और स्थिर और समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र में अपने साझा हितों पर चर्चा की। इस क्षेत्र में मॉरीशस की अग्रणी भूमिका की कद्र करते हैं।

आज मुझे मॉरीशस की असैन्‍य बुनियादी परियोजनाओं के लिए 500 मिलियन अमरीकी डॉलर के रियायती ऋण की पेशकश करते हुए प्रसन्‍नता हो रही है।

हम मॉरीशस में पेट्रोलियम भंडारण और भूमिगत भंडारण सुविधा का तेजी से निर्माण करने के भी इच्‍छुक हैं। इससे न केवल मॉरीशस को फायदा होगा, अपितु क्षेत्रीय बड़े केन्‍द्र के रूप में इसकी भूमिका भी बढ़ेगी।

भारत ने एक दशक पहले मॉरीशस को पहले साइबर सिटी के निर्माण में सहायता दी थी। इसकी उल्‍लेखनीय सफलता से मॉरिशस में अर्थव्‍यवस्‍था के विविधिकरण से जुड़ी सामरिक दूरदृष्टि परिलक्षित होती है। हमने आज दूसरे साइबर सिटी के निर्माण के लिए सहायता का प्रस्‍ताव किया है।

अगालेगा द्वीप के विकास के लिए किया गया आज का समझौता बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में हमारे सहयोग में एक बड़ा कदम है। इससे हमारे आपसी विश्‍वास की गहराई का पता चलता है।

मॉरीशस ने अपनी सामुद्रिक अर्थव्‍यवस्‍था के विकास में बड़ी सोच का प्रदर्शन किया है। सामुद्रिक अर्थव्‍वस्‍था में सहयोग के बारे में हमारा समझौता हमारी वैज्ञानिक और आर्थिक भागीदारी में एक महत्‍वपूर्ण कदम है। इससे सामुद्रिक पारिस्थितिकी की हमारी समझ-बूझ में सुधार होगा।

इससे सामुद्रिक अर्थव्‍यवस्‍था के नये क्षेत्रों के विकास में हमें मदद मिलेगी और साथ ही हम अपनी सामुद्रिक परिसंपत्तियों के इस्‍तेमाल में स्‍थायी प्रक्रियाओं का पालन कर सकेंगे।

पिछले कुछ वर्षों में हमने दोहरा कर वंचन संधि में संशोधन पर चर्चा की है। यह संधि के दुरूपयोग को रोकने के साझा उद्देश्‍य पर आधारित है और इसके साथ-साथ मॉरीशस को इस व्‍यवस्‍था से पूरा फायदा मिल सकेगा। हमने इस चर्चा को जारी रखने पर सहमति व्‍यक्‍त की है।

मैंने यहां के प्रधानमंत्री को भरोसा दिलाया है कि हम विश्‍व में अपनी सबसे मजबूत सामरिक भागीदारी में कोई ऐसा कदम नहीं उठएंगे, जिससे इस क्षेत्र को कोई नुकसान हो।

मैंने कर के अदान-प्रदान की सूचना के लिए मॉरीशस द्वारा सहयोग और सहायता देने की पेशकश की भी सराहना की है।

हमें व्‍यापक आर्थिक भागीदारी समझौते पर अपनी चर्चा फिर शुरू करनी चाहिए।

मॉरीशस के प्रधानमंत्री और मैं यह समझते हैं कि हमारा सुरक्षा सहयोग हमारी सामरिक भागीदारी की बुनियाद होगा।

यह एक-दूसरे के प्रति हमारी जिम्‍मेदारी के कारण नहीं अपितु सामुद्रिक पड़ोस के लिए हमारी साझा सोच के कारण है।

मैं मॉरीशस की व्‍यापक विशिष्‍ट आर्थिक क्षेत्र की सुरक्षा के लिए उसके प्रयासों में सहयोग की भारत की वचनबद्धता दोहराता हूं।

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मॉरीशस में उसकी सुरक्षा सक्षमताओं के विकास के लिए पसंदीदा भागीदार होने का हमें गर्व है। हम कल मॉरीशस के तटरक्षक बल में बाराकूड़ा को चालू करेंगे।

मैंने मॉरीशस के प्रधानमंत्री को उनके देश द्वारा अन्‍य जहाजों और उपकरण उपलब्‍ध कराने समेत सभी क्षेत्रों में समय पर सहायता करने का आश्‍वासन दिया है।

हम इस बात पर सहमत हुए हैं कि विस्‍तृत क्षेत्रीय सहयोग से हमारे सामुद्रिक क्षेत्र में शांति और समृद्धि बढ़ेगी।

मैं इस संदर्भ में हिंद महासागर रिम एसोसिएशन और इसके सचिवालय के लिए स्‍थान देने में मॉरीशस की अनूकूल भूमिका के लिए यहां के प्रधानमंत्री को धन्‍यवाद देता हूं।

मैं अंतर्राष्‍ट्रीय मंचों पर मॉरीशस द्वारा दिए गए समर्थन के लिए आभारी हूं। इससे साझा हितों के मुद्दों पर भारत को विचार रखने में बल मिलता है।

संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा द्वारा थोड़े समय में ही बड़े समर्थन के साथ 21 जून, को अंतर्राष्‍ट्रीय योगा दिवस के रूप में मनाए जाने की मंजूरी देना, हमारी साझा विरासत के प्रति सम्‍मान है।

जलवायु परिवर्तन पर हमारे समान और प्रभावी विचार हैं। दोनों देश इस पर सशक्‍त राष्‍ट्रीय कार्रवाई करने के प्रति वचनबद्ध हैं। इन चुनौतियों के समाधान के लिए हम अपने आपसी सहयोग और वैश्विक भागीदारी को मजबूत बनाएंगे।

जनता के जनता के साथ संपर्क हमारे संबंधों का मूलाधार हैं।

हम सर्वोच्‍च स्‍तर की प्राथमिकता पर इसे समृद्ध बनाना जारी रखेंगे। हमने मॉरीशस के लिए इलेक्‍ट्रोनिक यात्रा प्राधिकृति शुल्‍क माफ करने का फैसला किया है।

हमने एक बहु विषयक युवा मंच शुरू करने का भी फैसला किया है। इससे दोनों देशों के युवाओं को और अधिक जोड़ा जाएगा और यह भविष्‍य में सशक्‍त भागीदारी का बीजारोपण करेगा।

मैं बहुत परिणामजनक और तथ्‍यपूर्ण बैठक के लिए प्रधानमंत्री सर जगन्‍नाथ और उनके दल के प्रति सचमुच आभार व्‍यक्‍त करता हूं।

मैं राष्‍ट्रीय दिवस समारोह को लेकर उत्‍साहित हूं। इसके अलावा राष्‍ट्रीय असेम्‍बली को संबोधित करने के गौरव और कल के लिए निर्धारित अन्‍य विशेष आयोजनों को लेकर भी उत्‍साहित हूं।

मेरे लिए ये सब हमारे संबंधों की समृद्धि के ध्‍योतक हैं।

मैं पुन: मॉरीशस के प्रधानमंत्री का धन्‍यवाद करता हूं।

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भारत की डेमोक्रेसी और डेमोग्राफी दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद है: संसद के बजट सत्र से पहले मीडिया को पीएम मोदी का वक्तव्य
January 29, 2026
राष्ट्रपति का संबोधन 140 करोड़ भारतीयों के आत्मविश्वास और आकांक्षाओं को दर्शाता है: प्रधानमंत्री
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता युवाओं, किसानों और निर्माताओं के लिए व्यापक अवसर खोलता है : प्रधानमंत्री
हमारी सरकार सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन में विश्वास करती है; देश तेजी से सुधार के मार्ग पर कदम बढ़ा रहा है : प्रधानमंत्री
भारत का लोकतंत्र और जनसांख्यिकी विश्व के लिए आशा की किरण है: प्रधानमंत्री
यह समाधानों, सशक्त निर्णय और सुधारों में तेजी लाने का समय है : प्रधानमंत्री

नमस्कार साथियों!

कल राष्ट्रपति जी का उद्बोधन 140 करोड़ देशवासियों के आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति था, 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ का लेखा-जोखा था और 140 करोड़ देशवासी और उसमें भी ज्यादातर युवा, उनके एस्पिरेशन को रेखांकित करने का बहुत ही सटीक उद्बोधन, सभी सांसदों के लिए कई मार्गदर्शक बातें भी, कल आदरणीय राष्ट्रपति जी ने सदन में सबके सामने रखी हैं। सत्र के प्रारंभ में ही और 2026 के प्रारंभ में ही, आदरणीय राष्ट्रपति जी ने सांसदों से जो अपेक्षाएं व्यक्त की हैं, उन्होंने बहुत ही सरल शब्दों में राष्ट्र के मुखिया के रूप में जो भावनाएं व्यक्त की हैं, मुझे पूरा विश्वास है कि सभी माननीय सांसदों ने उसको गंभीरता से लिया ही होगा और यह सत्र अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण सत्र होता है। यह बजट सत्र है, 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है, यह दूसरी चौथाई का प्रारंभ हो रहा है, और 2047 विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह महत्वपूर्ण 25 वर्ष का दौर आरंभ हो रहा है और यह दूसरे क्वार्टर का, इस शताब्दी के दूसरे क्वार्टर का यह पहला बजट आ रहा है और वित्त मंत्री निर्मला जी, देश की पहली वित्त मंत्री ऐसी हैं, महिला वित्त मंत्री ऐसी हैं, जो लगातार 9वीं बार देश के संसद में बजट प्रस्तुत करने जा रही है। यह अपने आप में एक गौरव पल के रूप में भारत के संसदीय इतिहास में रजिस्टर हो रहा है।

साथियों,

इस वर्ष का प्रारंभ बहुत ही पॉजिटिव नोट के साथ शुरू हुआ है। आत्मविश्वास से भरा हिंदुस्तान आज विश्व के लिए आशा की किरण भी बना है, आकर्षण का केंद्र भी बना है। इस क्वार्टर के प्रारंभ में ही भारत और यूरोपीय यूनियन का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आने वाली दिशाएं कितनी उज्ज्वल हैं, भारत के युवाओं का भविष्य कितना उज्ज्वल है, उसकी एक झलक है। यह फ्री ट्रेड फॉर एंबिशियस भारत है, यह फ्री ट्रेड फॉर एस्पिरेशनल यूथ है, यह फ्री ट्रेड फॉर आत्मनिर्भर भारत है और मुझे पक्का विश्वास है, खास करके जो भारत के मैन्युफैक्चरर्स हैं, वे इस अवसर को अपनी क्षमताएं बढ़ाने के लिए करेंगे। और मैं सभी प्रकार के उत्पादकों से यही कहूंगा कि जब भारत यूरोपियन यूनियन के बीच मदर ऑफ ऑल डील्स जिसको कहते हैं, वैसा समझौता हुआ है तब, मेरे देश के उद्योगकार, मेरे देश के मैन्युफैक्चरर्स, अब तो बहुत बड़ा बाजार खुल गया, अब बहुत सस्ते में हमारा माल पहुंच जाएगा, इतने भाव से वो बैठे ना रहे, यह एक अवसर है, और इस अवसर का सबसे पहले मंत्र यह होता है, कि हम क्वालिटी पर बल दें, हम अब जब बाजार खुल गया है तो उत्तम से उत्तम क्वालिटी लेकर के बाजार में जाएं और अगर उत्तम से उत्तम क्वालिटी लेकर के जाते हैं, तो हम यूरोपियन यूनियन के 27 देशों के खरीदारों से पैसे ही कमाते हैं इतना ही नहीं, क्वालिटी के कारण से उनका दिल जीत लेते हैं, और वो लंबे अरसे तक प्रभाव रहता है उसका, दशकों तक उसका प्रभाव रहता है। कंपनियों का ब्रांड देश के ब्रांड के साथ नए गौरव को प्रस्थापित कर देता है और इसलिए 27 देशों के साथ हुआ यह समझौता, हमारे देश के मछुआरे, हमारे देश के किसान, हमारे देश के युवा, सर्विस सेक्टर में जो लोग विश्व में अलग-अलग जगह पर जाने के उत्सुक हैं, उनके लिए बहुत बड़े अवसर लेकर के आ रहा है। और मुझे पक्का विश्वास है, एक प्रकार से कॉन्फिडेंस कॉम्पिटेटिव और प्रोडक्टिव भारत की दिशा में यह बहुत बड़ा कदम है।

साथियों,

देश का ध्यान बजट की तरफ होना बहुत स्वाभाविक है, लेकिन इस सरकार की यह पहचान रही है- रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म। और अब तो हम रिफॉर्म एक्सप्रेस पर चल पड़े हैं, बहुत तेजी से चल पड़े हैं और मैं संसद के भी सभी साथियों का आभार व्यक्त करता हूं, इस रिफॉर्म एक्सप्रेसवे को गति देने में वे भी अपनी सकारात्मक शक्ति को लगा रहे हैं और उसके कारण रिफॉर्म एक्सप्रेस को भी लगातार गति मिल रही है। देश लॉन्ग टर्म पेंडिंग प्रॉब्लम अब उससे निकल करके, लॉन्ग टर्म सॉल्यूशन के मार्ग पर मजबूती के साथ कदम रख रहा है। और जब लॉन्ग टर्म सॉल्यूशंस होते हैं, तब predictivity होती है, जो विश्व में एक भरोसा पैदा करती है! हमारे हर निर्णय में राष्ट्र की प्रगति यह हमारा लक्ष्य है, लेकिन हमारे सारे निर्णय ह्यूमन सेंट्रिक हैं। हमारी भूमिका, हमारी योजनाएं, ह्यूमन सेंट्रिक है। हम टेक्नोलॉजी के साथ स्पर्धा भी करेंगे, हम टेक्नोलॉजी को आत्मसात भी करेंगे, हम टेक्नोलॉजी के सामर्थ्य को स्वीकार भी करेंगे, लेकिन उसके साथ-साथ हम मानव केंद्रीय व्यवस्था को जरा भी कम नहीं आकेंगे, हम संवेदनशीलताओं की महत्वता को समझते हुए टेक्नोलॉजी की जुगलबंदी के साथ आगे बढ़ने के व्यू के साथ आगे सोचेंगे। जो हमारे टिकाकार रहते हैं साथी, हमारे प्रति पसंद ना पसंद का रवैया रहता है और लोकतंत्र में बहुत स्वाभाविक है, लेकिन एक बात हर कोई कहता है, कि इस सरकार ने लास्ट माइल डिलीवरी पर बल दिया है। योजनाओं को फाइलों तक नहीं, उसे लाइफ तक पहुंचाने का प्रयास रहता है। और यही हमारी जो परंपरा है, उसको हम आने वाले दिनों में रिफॉर्म एक्सप्रेस में नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म के साथ आगे बढ़ाने वाले हैं। भारत की डेमोक्रेसी और भारत की डेमोग्राफी, आज दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद है, तब इस लोकतंत्र के मंदिर में हम विश्व समुदाय को भी कोई संदेश दें, हमारे सामर्थ्य का, हमारे लोकतंत्र के प्रति समर्पण का, लोकतंत्र की प्रक्रियाओं के द्वारा हुए निर्णय का सम्मान करने का यह अवसर है, और विश्व इसका जरूर स्वागत भी करता है, स्वीकार भी करता है। आज जिस प्रकार से देश आगे बढ़ रहा है आज समय व्यवधान का नहीं है, आज समय समाधान का है। आज प्राथमिकता व्यवधान नहीं है, आज प्राथमिकता समाधान है। आज भूमिका व्यवधान के माध्यम से रोते बैठने का नहीं है, आज हिम्मत के साथ समाधानकारी निर्णयों का कालखंड है। मैं सभी माननीय सांसदों से आग्रह करूंगा कि वे आएं, राष्ट्र के लिए आवश्यक समाधानों के दौर को हम गति दें, निर्णयों को हम शक्ति दें और लास्ट माइल डिलीवरी में हम सफलतापूर्वक आगे बढ़ें, साथियों आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद, बहुत-बहुत शुभकामनाएं।