Hon. Chief Minister's Speech at Fergusson College, Pune

Published By : Admin | July 14, 2013 | 16:29 IST

श्रीमान डॉ. श्रीकृष्ण कानेटकर जी, डॉ. रविन्द्र सिंह परदेशी जी, मेरे साथी श्रीमान श्याम जाजू जी, उपस्थित सभी महानुभाव और सौ नौजवान मित्रों..! जो लोग इस सभा गृह में नहीं पहुंच पाए हैं और जिन्हें दूर से ही इस कार्यक्रम को देखने का अवसर आया है, उन मित्रों से मैं प्रार्थना करता हूँ कि आप कार्यक्रम के बाद रूकिए, मैं आपके पास आऊंगा। मैं श्रीमान विजय शिरके जी के परिवार को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ, उन्होंने इस ऐतिहासिक स्थल को सुरक्षित और संवर्धन करने के लिए अपने परिवार का योगदान दिया और इस पवित्र कार्य को करने के लिए जिस परिवार ने योगदान दिया, उस परिवार का सम्मान करने का मुझे सौभाग्य मिला, इसलिए मैं आप सबका बहुत आभारी हूँ..!

ई वर्षों से फर्ग्यूसन कॉलेज के संबंध में, यहाँ की शिक्षा प्रवृत्ति के संबंध में, जब भी कुछ महापुरूषों के जीवन को पढ़ने का अवसर मिला, तो अवश्य रूप से फर्ग्यूसन कॉलेज का उल्लेख आया। मन में था ही कि कभी ना कभी इस पवित्र धरती की रज अपने माथे पर चढ़ाने का सौभाग्य मिले, और वो सौभाग्य मुझे आज मिला है। वीर सावरकर जी प्रशिक्षा काल में जिस जगह पर रह कर के स्वातंत्र्य देवी की उपासना करते थे, जहाँ से वो स्वातंत्र्य का संदेश अपने साथियों को सुनाते थे, उस कक्ष में जाने का मुझे सौभाग्य मिला। भारत माँ की उत्कृष्ट सेवा करने की तीव्रतम इच्छा के वाइब्रेशन्स उस कक्ष में अनुभव किए, ये भी मैं अपना सौभाग्य मानता हूँ। और जिस स्थान पर मैं अभी खड़ा हूँ, इतिहास गवाह है कि एक सौ साल पुरानी ये विरासत है, जहाँ पर देश के गणमान्य महानुभावों ने अपने विचारों से युवा पीढ़ी का और राष्ट्र का मार्गदर्शन किया है..! हम कुछ भी ना करें, किसी वक्ता को भी ना बुलाएं, सिर्फ मौन हो कर के सौ साल की उस विरासत का हम अनुभव करें और मन में फिर स्मरण करें कि इस भूमि पर गांधी आएं होंगें तो कैसा दृश्य होगा, रविन्द्रनाथ टागोर आए होंगे तो कैसा दृश्य होगा, श्री रमण आएं होंगें तो कैसा दृश्य होगा..! ऐसे-ऐसे महापुरुष जब इस कक्ष में आए होंगे तो वो पल कैसे होंगे..! अगर हम मौन रह कर के कुछ पल उस स्मृतियों का स्मरण करें, तो मित्रों मुझे विश्वास है कि उन महापुरूषों के शब्द भाव आज भी यहाँ आंदोलित होते होंगे। हम उस आंदोलित भावों को अनुभव कर सकते हैं, सिर्फ हमारे मन की स्थिति होनी चाहिए..! अगर हमारे मन की स्थिति हुई तो हम अनुभव कर सकते हैं। जैसे टीवी पर हम हमारे पंसद की चैनल चलाते हैं और वो चैनल हमारे पास आती है, वैसे ही मन की चैनल को उसके साथ जोड़ दिया जाए तो हम उसकी अनुभूति कर सकते हैं। और ऐसे स्थान पर मुझे कुछ कहने का सौभाग्य मिल रहा है, ये अपने आप में मेरे लिए एक बहुत बड़े सौभाग्य का पल है और मैं इसके लिए यहाँ के सभी व्यवस्थापकों का बहुत-बहुत आभारी हूँ..!

मेरा फर्ग्यूसन कॉलेज में आना जब तय हुआ, तो मैंने एक छोटा सा प्रयोग किया। मैं सोशल मीडिया में बहुत एक्टिव हूँ। ट्विटर, फेसबुक पर नई पीढ़ी के साथ जुड़ा रहता हूँ, उनके विचारों को जानने का मुझे बहुत अच्छा अवसर मिलता है। तो मैंने इस फर्ग्यूसन कॉलेज में आने से पहले फेसबुक पर एक रिक्वेस्ट लिखी थी कि मैं फर्ग्यूसन कॉलेज जा रहा हूँ, वहाँ के विद्यार्थी मित्रों से मिल रहा हूँ, तो आपको क्या लगता है कि मुझे क्या कहना चाहिए..? आप मुझे गाइड करें, मेरा मार्गदर्शन करें..! ऐसा मैंने सोशल मीडिया में जो नौजवान एक्टिव हैं उनसे प्रार्थना की थी। और मैं आज बड़े आनंद और गर्व से कहता हूँ कि देश के कोने-कोने से ढाई हजार से अधिक नौजवानों ने मुझे चिट्ठी लिखी। यहाँ पर क्या बोलना, क्या कहना, उनके मन में क्या व्यथा है, क्या पीड़ा है... इतने उत्तम शब्दों में उन्होंने लिखा..! मेरे भाषण में उन नौजवानों के विचारों की छाया रहेगी क्योंकि मैंने उसे पढा है। एक प्रकार से आज के मेरे भाषण को बांधने में बहुतेक मात्रा में सोशल मीडिया में मुझे एडवाइज करने वाले उन नौजवानों का योगदान है और एक प्रकार से ये भाषण मोदी का नहीं है, ये भाषण उन ढाई हजार सोशल मीडिया पर एक्टिव और प्रोएक्टिव उन नौजवानों का है, मैं सिर्फ उसको अपनी वाणी दे रहा हूँ और हो सकता है कुछ भाषा में मेरे अपने भाव प्रकट होंगे लेकिन मूल विचार उन नौजवानों ने दिए हैं। मैं फिर से एक बार उन नौजवानों का बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूँ..! और मैं एक संतोष व्यक्त करता हूँ। कभी-कभी चर्चा चलती है कि भई देश के नौजवान, देश की स्थिति, क्या चलता होगा..? ये ढाई हजार देश के हर कोने में से है। कश्मीर से भी लिखने वाले लोग हैं, नागालैंड और मिजोरम से भी लिखने वाले लोग हैं, कन्याकुमारी से भी लिखने वाले लोग हैं... देश के हर कोने से लिखने वाले लोग हैं। और मैं उसमें एक समान भाव देखता हूँ, मैं उसमें एक समान तंतु देखता हूँ। और वो समान तंतु ये नजर आता है कि ये सब के सब देश की हर बात से, हर घटना से बहुत ही कन्सर्न्ड है।

हम जो मानते हैं कि हमारे नौजवानों को कोई परवाह नहीं, वो तो बस जींस का पैंट पहनना और लंबे बाल रखना यही उसका काम है, ऐसा नहीं है..! वे सोचते हैं, वे कुछ करना चाहते हैं, वे कुछ कहना चाहते हैं और ये मैंने आज इस फर्ग्यूसन कॉलेज के मेरे लेक्चर के माध्यम से अनुभव किया कि नौजवानों के दिल में क्या आग है, क्या स्पार्क है, क्या सपने हैं, कितना सामर्थ्य पड़ा है, कठिनाइयों के बावजूद भी कुछ करने का कितना उमंग और उत्साह है..! और जिस देश का नौजवान इतना सामर्थ्यवान हो, कुछ करने के लिए प्रतिबद्घ हो, उस देश का भविष्य कभी भी अंधकारमय नहीं हो सकता है, ये मैं आज इस पवित्र धरती से कहना चाहता हूँ..! और हम बहुत भाग्यशाली हैं, हम विश्व के सबसे युवा देश हैं। हमारे देश की 65% जनसंख्या 35 से कम आयु की है। जिस देश के अंदर 65% से अधिक जनसंख्या 35 से कम आयु की हो, वो युवा देश दुनिया को क्या कुछ नहीं दे सकता है, दुनिया के लिए क्या कुछ नहीं कर सकता है..! एक प्रकार से ना सिर्फ हिन्दुस्तान की समस्याएं, बल्कि विश्व की समस्याओं के समाधान के लिए भी ये युवा शक्ति काम आ सकती है, बशर्ते कोई करने वाला हो, कोई सेाचने वाला हो, कोई दिशा देने वाला हो, कोई उंगली पकड़ कर चलने वाला हो, तो सब कुछ संभव है..!

मित्रों, आज जो देश में निराशा का माहौल है..! चारों तरफ, कोई भी मिले तो कहता है, छोड़ो यार, पिछले जन्म में क्या पाप किये होंगे जो हिन्दुस्तान में पैदा हुए..! छोड़ो यार, कुछ होना नहीं है..! अरे छोड़ो यार, तुम क्यों औरों की परवाह करते हो, तुम अपना कर लो..! ये ही भाषा सुनाई देती है। मित्रों, मैं इस भाषा को, इस निराशा के स्वर को एन्डोर्स नहीं करता हूँ। ये बहुरत्ना वसुंधरा है, हजारों सालों की सांस्कृतिक विरासत के हम धनी हैं। 1200 साल की गुलामी के बाद भी सीना तान कर खड़े रहने का सामर्थ्य इस धरती का है। क्या कारण है..? लोकमान्य तिलक ने अंग्रेज सल्तनत के सामने उस समय जो ललकार किया था, ‘स्वराज्य मेरा जन्म सिद्घ अधिकार है’, वो कौन सी ताकत थी, कौन सा आत्मविश्वास था..! अगर गुलामी के उस कालखंड में भी हमारे उस समय के नेताओं में वो सामर्थ्य था, तो आज तो देश स्वतंत्र है, निराशा किस बात की..? और इसलिए मित्रों, देश को इस निराशा के माहौल से ऊपर उठना बहुत आवश्यक है। और ऐसा नहीं है कि सब कुछ डूब चुका है, आज भी बहुत कुछ अच्छा होने की संभावना है..!

ज हमारी शिक्षा व्यवस्था की अगर हम चर्चा करें, तो ऐसे हालात क्यों हुए..? जो लोग हमारे देश के एज्यूकेशन के इतिहास को जानते हैं उनको पता होगा, हजारों वर्ष से हमारी कैसी महान परंपराएं थी..! मैं तो रिसर्च स्कॉलर्स से प्रार्थना करता हूँ कि हमारी गुरूकुल की शिक्षा परंपरा और आज की अमेरीका की मॉडर्न एज्यूकेशन सिस्टम, दोनों को आधुनिक तराजू पर तोल कर देखा जाए तो हमें ध्यान में आएगा कि जिस प्रकार से अमेरिकन एज्यूकेशन सिस्टम में व्यक्ति के भीतर की ताकत को उजागर करने के लिए एक प्रॉपर एन्वायरमेंट प्रोवाइड किया जाता है, उसकी रूचि, प्रकृति, प्रवृति के अनुसार उसको विकसित होने का माहौल दिया जाता है। उसको फ़ीड नहीं किया जाता है, उसको लर्निंग के लिए रास्ते दिखाए जाते हैं। अगर हम हमारी गुरूकुल पंरपरा को देखें, तो उसमें क्या था..? एक ही ऋषि की चर्चा हो, एक ही ऋषि के आश्रम की चर्चा हो, लेकिन उसी के वहाँ राजकुमार भी पढ़ता है, योद्घा भी पढ़ता है, राज व्यवस्था को संभालने वाले मंत्री लोग भी पढ़ रहे हैं, कर्मकाण्ड करने वाले पंडित भी पढ़ रहे हैं, वेद के ज्ञानी होना चाहते हैं वो भी पढ़ रहे हैं... क्या कारण होगा? एक ही छोटा सा आश्रम, एक ही ऋषि और वहाँ सब विधाओं को इस प्रकार से सामर्थ्यवान बनने के लिए अवसर मिलता होगा..! उसी एक जगह से राजकुमार, राजकुमार के लिए जो चाहिए वो शिक्षा-दीक्षा लेकर के निकलता था। योद्घा, योद्घा के लिए जरूरी शिक्षा-दीक्षा लेकर के निकलता था। टीचर, टीचर के लिए, क्राफ्ट मैन, क्राफ्ट मैन के लिए, पंडित, पंडित के लिए जरूरी शिक्षा-दीक्षा लेकर के निकलता था... क्या कारण था..? और आज उस पुरानी परंपराओं को देखें तो हम सोच सकते हैं कि हमारे पास कितना कुछ था, जो हमने गंवा दिया..! मित्रों, हमारा सपना होना चाहिए गुरूकुल से विश्वकुल तक की यात्रा का..! हम वो लोग हैं जिन्होंने उपनिषद से उपग्रह तक की यात्राएं की हैं, गुरूकुल से विश्वकुल तक के सपने संजोएं हैं..! लेकिन फिर भी आज विश्व जब 21वीं सदी किसकी का सवाल पूछता है तब हम सवालिया निशान के नीचे झुक कर के खड़े हो जाते हैं। ऐसी स्थिति कब तक..? मित्रों, जो यूनिवर्सिटी के इतिहास को जानते हैं उनको मालूम होगा। हमारे यहाँ यूनिवर्सिटीज़ में कॉन्वोकेशन की जो परंपरा होती है, सबसे पहले कॉन्वोकेशन का उल्लेख तैत्रेयी उपनिषद में मिलता है। दुनिया में मानव जात के इतिहास में सबसे पहला कॉन्वोकेशन तैत्रेयी उपनिषद में लिखा गया है जो कि हजारों साल पुरानी रचनाएं हैं..! मित्रों, यदि यूनिवर्सिटीज़ की अवेलेबल हिस्ट्री को देखा जाए तो कहा जाता है कि पूरी मानव संस्कृति की विकास यात्रा में यूनिवर्सिटी शिक्षा की उम्र करीब 2600 साल होगी, और आज मैं गर्व से कहता हूँ कि 2600 साल की इस शिक्षा-दीक्षा की यात्रा में 1800 साल तक एक चक्रीय शासन अगर किसी का रहा है, तो वो हिन्दुस्तान के हमारे शिक्षकों का रहा है, हमारी शिक्षा प्रणाली का रहा है। बीच के 800 साल जो हमारी गुलामी के थे, उस समय हमने सब गंवा दिया और विश्व की शिक्षा प्रणालियों ने अपना सिर ऊंचा किया।

 

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यूपी के विकास की नई लाइफ लाइन बनेगा गंगा एक्सप्रेसवे: हरदोई में पीएम मोदी
April 29, 2026
यह परिवर्तनकारी अवसंरचना परियोजना उत्तर प्रदेश में कनेक्टिविटी को बढ़ाएगी और विकास को गति देगी : प्रधानमंत्री
जैसे मां गंगा हजारों वर्षों से उत्तर प्रदेश और इस देश की जीवनरेखा रही है, वैसे ही आधुनिक प्रगति के इस युग में उनके पास से गुजरने वाला यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के विकास की नई जीवनरेखा बनेगा : प्रधानमंत्री
हाल ही में, मुझे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को राष्ट्र को समर्पित करने का अवसर मिला : प्रधानमंत्री
मैंने तब कहा था कि ये उभरते एक्सप्रेसवे विकासशील भारत के भाग्य को आकार देने वाली जीवनरेखाएं हैं और ये आधुनिक मार्ग आज भारत के उज्ज्वल भविष्य का संकेत दे रहे हैं : प्रधानमंत्री
गंगा एक्सप्रेसवे न केवल उत्तर प्रदेश के एक छोर को दूसरे छोर से जोड़ेगा, बल्कि यह एनसीआर की असीम संभावनाओं को भी करीब लाएगा : प्रधानमंत्री

भारत माता की जय।

गंगा मइया की जय।

गंगा मइया की जय।

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, यहां के मुख्यमंत्री श्रीमान योगी आदित्यनाथ जी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश जी पाठक, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी जितिन प्रसाद जी, पंकज चौधरी जी, यूपी सरकार के मंत्रीगण, सांसद और विधायकगण, अन्य जनप्रतिनिधि और विशाल संख्या में पधारे हुए मेरे प्यारे भाइयों और बहनों।

सर्वप्रथम, मैं भगवान नरसिंह की इस पुण्य भूमि को प्रणाम करता हूं। यहां से कुछ किलोमीटर की दूरी पर मां गंगा कृपा बहाती हुई गुजरती है। इसलिए, ये पूरा क्षेत्र ही तीर्थ से कम नहीं है। और मैं मानता हूं यूपी को एक्सप्रेसवे का ये वरदान, ये भी मां गंगा का ही आशीर्वाद है। अब आप कुछ ही घंटों में संगम भी पहुंच सकते हैं, और काशी में बाबा के दर्शन करके भी वापस आ सकते हैं।

साथियों,

जैसे मां गंगा हजारों वर्षों से यूपी की और इस देश की जीवन रेखा रही है, वैसे ही आधुनिक प्रगति के इस दौर में, उनके समीप से गुजरता ये एक्सप्रेसवे, ये यूपी के विकास की नई लाइफ लाइन बनेगा। ये भी अद्भुत संयोग है कि पिछले चार-पांच दिनों में, मैं मां गंगा के सानिध्य में ही रहा हूं। 24 अप्रैल को मैं जब बंगाल में था, तो मां गंगा के दर्शन किए थे, और फिर कल तो मैं काशी में था। आज सुबह ही फिर बाबा विश्वनाथ, मां अन्नपूर्णा और मां गंगा के दर्शन करने का सौभाग्य मिला है। और अब मां गंगा के नाम पर बने इस एक्सप्रेसवे के लोकार्पण का अवसर मिला है। मुझे खुशी है कि यूपी सरकार ने इस एक्सप्रेसवे का नाम मां गंगा के नाम पर रखा है। इसमें विकास का हमारा विजन भी झलकता है, और हमारी विरासत के भी दर्शन होते हैं। मैं यूपी के करोड़ों लोगों को गंगा एक्सप्रेसवे की बधाई देता हूं।

साथियों,

आज लोकतंत्र के उत्सव का भी एक अहम दिन है। बंगाल में इस समय दूसरे चरण का मतदान हो रहा है, और जो खबरें आ रही हैं, उनसे पता चलता है कि बंगाल में भारी मतदान हो रहा है। पहले चरण की तरह ही जनता वोट देने के लिए बड़ी संख्या में घरों से निकल रही हैं, लंबी-लंबी का कतारों की तस्वीरें सोशल मीडिया में छाई हुई हैं। पिछले 6-7 दशक में जो नहीं हुआ, जिसकी कल्पना भी मुश्किल थी, वैसे निर्भीक वातावरण में बंगाल में इस बार वोटिंग हो रही है। लोग भय मुक्त होकर वोट दे रहे हैं। ये देश के संविधान और देश के मजबूत होते लोकतंत्र का पुण्य प्रतीक है। मैं बंगाल की महान जनता का आभार व्यक्त करता हूं कि वो अपने अधिकार के प्रति इतनी सजग है, बड़ी संख्या में वोटिंग कर रही है। अभी वोटिंग खत्म होने में कई घंटे बाकी हैं, मैं बंगाल के जनता से आग्रह करूंगा कि लोकतंत्र के इस पर्व में ऐसे ही उत्साह से भाग लें।

साथियों,

कुछ समय पहले जब बिहार में चुनाव हुए, तो बीजेपी एनडीए ने प्रचंड जीत दर्ज की थी, एक इतिहास रच दिया था। अभी-अभी कल ही गुजरात में महा नगरपालिका, नगर पालिका, जिला पंचायतें, नगर पंचायतें, तहसील पंचायत, इन सबके चुनाव के नतीजे आए हैं। और आप मेरे उत्तरप्रदेश वासियों को खुशी होगी, 80 से 85 प्रतिशत नगर पालिका और पंचायतों को भाजपा ने जीत ली है। और मुझे विश्वास है कि इन पांच राज्यों के चुनाव में भी भाजपा ऐतिहासिक जीत की हैट्रिक लगाने जा रही है। 4 मई के नतीजे, विकसित भारत के संकल्प को मजबूत करेंगे, देश के विकास की गति को नई ऊर्जा से भरेंगे।

साथियों,

देश के तेज विकास के लिए हमें तेजी से आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का भी निर्माण करना है। दिसम्बर 2021 में गंगा एक्सप्रेसवे का शिलान्यास करने मैं शाहजहाँपुर आया था। अभी 5 साल से भी कम समय हुआ है, और आप देखिए, देश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवेज में शुमार यूपी का सबसे लंबा ग्रीन कॉरिडॉर एक्सप्रेसवे, ये 5 साल के भीतर-भीतर बनकर तैयार हो गया है। आज

हरदोई से इसका लोकार्पण भी हो रहा है। यही नहीं, एक ओर गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण पूरा हुआ है, तो साथ ही, इसके विस्तार की योजना पर काम भी शुरू हो गया है। जल्द ही, गंगा एक्सप्रेसवे, मेरठ से आगे बढ़कर हरिद्वार तक पहुंचेगा। इसके और बेहतर उपयोग के लिए फ़र्रुख़ाबाद लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण कर, इसे अन्य एक्सप्रेसवे से भी जोड़ा जाएगा। ये है, डबल इंजन सरकार का विजन! ये है भाजपा सरकार के काम करने की स्पीड! ये है, भाजपा सरकार के काम का तरीका!

भाइयों-बहनों,

कुछ ही दिन पहले मुझे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के लोकार्पण का अवसर मिला था। तब मैंने कहा था कि ये नए बनते एक्सप्रेसवे, विकसित होते भारत की हस्तरेखाएं हैं और ये आधुनिक हस्तरेखाएं, आज भारत के उज्ज्वल भविष्य का जयघोष कर रही हैं।

साथियों

अब वो दौर चला गया, जब एक सड़क के लिए दशकों तक इंतज़ार करना पड़ता था! एक बार घोषणा हो गई, तो वर्षों तक फाइलें चलतीं थीं! चुनाव के लिए पत्थर लग जाता था, उसके बाद सरकारें आती रहतीं थीं, जाती रहतीं थीं, लेकिन, काम का कुछ अता-पता नहीं लगता था। कभी-कभी तो पुराने फाइलें ढूंढने के लिए बड़े-बड़े अफसरों को दो-दो साल तक मेहनत करनी पड़ती थी। डबल इंजन सरकार में शिलान्यास भी होता है, और तय समय में लोकार्पण भी होकर के रहता है। इसलिए ही, आज यूपी के एक्सप्रेसवेज़ से भी ज्यादा रफ्तार अगर कहीं है, तो वो यूपी के विकास की रफ्तार ही है।

साथियों,

ये एक्सप्रेसवे केवल एक हाइस्पीड सड़क नहीं है। ये नई संभावनाओं का, नए सपनों का, नए अवसरों का गेटवे है। गंगा एक्सप्रेसवे करीब 600 किलोमीटर लंबा है। पश्चिमी यूपी में मेरठ, बुलंदशहर, हापुड़, अमरोहा, सम्भल और बदायूँ। मध्य यूपी में शाहजहाँपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली। पूर्वी यूपी में प्रतापगढ़ और प्रयागराज, इनके आस पास के दूसरे जिले, गंगा एक्सप्रेसवे, इससे इन इलाकों के करोड़ों लोगों का जीवन बदलेगा।

साथियों,

इन क्षेत्रों को गंगा जी और उनकी सहायक नदियों की उपजाऊ मिट्टी का वरदान मिला है। लेकिन, पहले की सरकारों ने जिस तरह किसानों की उपेक्षा की, उसके कारण किसान परेशानियों में ही घिरकर के रह गए! यहाँ के किसानों की फसलें बड़े बाज़ारों तक नहीं पहुँच पाती थीं। कोल्ड स्टोरेज की कमी थी। लॉजिस्टिक्स का अभाव था। किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य नहीं मिलता था। अब उन कठिनाइयों का समाधान भी तेजी से होगा। गंगा एक्सप्रेसवे से कम समय में बड़े बाज़ारों तक पहुँच मिलेगी। यहाँ खेती के लिए जरूरी इनफ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा। इससे हमारे किसानों की आय बढ़ेगी।

साथियों,

गंगा एक्सप्रेसवे यूपी के एक छोर को दूसरे छोर से तो जोड़ता ही है। ये NCR की असीम संभावनाओं को भी करीब लाएगा। गंगा एक्सप्रेसवे पर गाड़ियाँ तो दौड़ेंगी ही, इसके किनारे नए औद्योगिक अवसर विकसित होंगे। इसके लिए हरदोई जैसे दूसरे जिलों में इंडस्ट्रियल कॉरिडॉर विकसित किए जा रहे हैं। इससे हरदोई, शाहजहाँपुर, उन्नाव समेत सभी 12 जनपदों में नए उद्योग आएंगे। अलग-अलग सेक्टर्स जैसे फार्मा, टेक्सटाइल आदि के क्लस्टर्स विकसित होंगे। युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे।

साथियों,

हमारे ये युवा मुद्रा योजना और ODOP जैसी योजनाओं, उसकी ताकत से खुद भी नए-नए कीर्तिमान गढ़ रहे हैं। यहाँ छोटे उद्योग, MSMEs को बढ़ावा मिल रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी की सुविधा से उनके लिए भी नए रास्ते खुलेंगे। मेरठ की स्पोर्ट्स इंडस्ट्री, संभल का handicraft, बुलंदशहर के सिरेमिक, हरदोई का हैंडलूम, उन्नाव का लेदर, प्रतापगढ़ के आंवला प्रॉडक्ट्स, ये सब बड़े स्केल में देश दुनिया के मार्केट में पहुंचेगे। लाखों परिवारों की इससे आमदनी बढ़ेगी। आप मुझे बताइए, क्या पुरानी सपा सरकार में हरदोई, उन्नाव जैसे जिलों में इंडस्ट्रियल कॉरिडॉर बनाने की कल्पना तक हो सकती थी क्या? हमारे हरदोई से भी एक्सप्रेसवे गुजरेगा, ये कोई सोच सकता था क्या कभी? ये काम केवल भाजपा सरकार में ही संभव है।

साथियों,

पहले यूपी को पिछड़ा और बीमारू प्रदेश कहा जाता था। वही उत्तर प्रदेश, आज 1 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनने के लिए आगे बढ़ रहा है। ये एक बहुत बड़ा लक्ष्य है। लेकिन, इसके पीछे उतनी ही बड़ी तैयारी भी है। क्योंकि, यूपी के पास इतनी असीम क्षमता है। देश की इतनी बड़ी युवा आबादी का potential यूपी के पास है। इस ताकत का इस्तेमाल हम यूपी को manufacturing हब बनाने के लिए कर रहे हैं। यूपी में नए उद्योग और कारखाने लगेंगे, यहाँ जब बड़ी मात्रा में निवेश आएगा, तभी यहाँ आर्थिक प्रगति के दरवाजे खुलेंगे, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

भाइयों-बहनों,

इसी विज़न को केंद्र में रखकर बीते वर्षों में लगातार काम हुआ है। आप सब खुद भी महसूस कर रहे हैं, जिस यूपी की पहचान पहले पलायन से होती थी, आज उसे इन्वेस्टर्स समिट और इंडस्ट्रियल कॉरिडॉर के लिए जाना जा रहा है। यूपी की इन्वेस्टर समिट में देश और दुनिया से कंपनियाँ आतीं हैं। यूपी में हजारों करोड़ रुपए का निवेश हो रहा है। आज अगर भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता है तो, उसमें बहुत बड़ा योगदान यूपी का है। आज भारत जितने मोबाइल बना रहा है, उसमें आधे मोबाइल हमारे यूपी में बन रहे हैं। अभी कुछ ही हफ्ते पहले, मैंने नोएडा में सेमीकंडक्टर प्लांट का शिलान्यास भी किया है।

साथियों,

आप सब जानते हैं, AI के इस दौर में, सेमीकंडक्टर कितनी बड़ी फील्ड बनती जा रही है। यूपी उसमें भी लीड लेने के लिए आगे बढ़ रहा है। भविष्य में असीम अवसरों वाला बहुत बड़ा क्षेत्र

यूपी के लोगों के लिए खुल रहा है।

साथियों,

उत्तर प्रदेश का औद्योगिक विकास आज भारत की सामरिक ताकत भी बन रहा है। आज देश के दो डिफेंस कॉरिडॉर्स में से एक यूपी में है। बड़ी-बड़ी डिफेंस कंपनियाँ यहाँ अपनी फ़ैक्टरी लगा रहीं हैं। ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें, जिनका लोहा दुनिया मानती है, आज वो यूपी में बन रहीं हैं। रक्षा उपकरणों के निर्माण में जो छोटे-छोटे पार्ट्स चाहिए होते हैं, उनकी सप्लाइ के लिए MSMEs को काम मिलता है। इसका बहुत बड़ा लाभ उत्तर प्रदेश के MSME सेक्टर को हो रहा है। छोटे-छोटे जिलों में भी अब युवा बड़े-बड़े उद्योगों से जुड़ने का सपना देख सकते हैं।

साथियों,

आज उत्तर प्रदेश इतनी तेज गति से विकास कर रहा है, क्योंकि, यूपी ने पुरानी सियासत को भी बदला है, और नई पहचान भी बनाई है। आप याद करिए, एक समय यूपी की पहचान गड्ढों से होती थी। आज वही यूपी, देश में सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवेज वाला प्रदेश बन चुका है। पहले यहाँ पड़ोस के जिले तक जाना भी बड़ा मुश्किल था। लेकिन आज उत्तर प्रदेश में 21 एयरपोर्ट हैं, 5 इंटरनेशनल एयरपोर्ट हैं। अब तो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन भी हो चुका है। गंगा एक्सप्रेसवे से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कुछ ही घंटों की दूरी पर है।

भाइयों-बहनों,

हमारा उत्तर प्रदेश भगवान राम और भगवान कृष्ण की धरती है। लेकिन, पिछली सरकारों ने अपनी करतूतों के कारण अपराध और जंगलराज को यूपी की पहचान बना दिया था। यूपी के माफियाओं पर फिल्में बनतीं थीं। लेकिन, अब यूपी की कानून व्यवस्था का देश भर में उदाहरण दिया जाता है।

भाइयों बहनों,

संसाधनों का बंदरबाँट करने वाले जिन सपाइयों के हाथ से सत्ता गई है, उन्हें यूपी की ये प्रगति

पसंद नहीं आ रही है। वो एक बार फिर यूपी को पुराने दौर में धकेलना चाहते हैं। वो एक बार फिर, समाज को बांटना और तोड़ना चाहते हैं।

साथियों,

समाजवादी पार्टी विकास विरोधी भी है और नारी विरोधी भी है। अभी बीते दिनों देश ने एक बार फिर सपा और काँग्रेस जैसी पार्टियों का असली चेहरा देखा है। केंद्र की NDA सरकार संसद में नारीशक्ति वंदन संशोधन लेकर आई थी। अगर ये संशोधन पास हो जाता, तो, साल 2029 के चुनाव से ही महिलाओं को विधानसभा और लोकसभा में आरक्षण मिलता! बड़ी संख्या में हमारी माताएँ बहनें सांसद विधायक बनकर दिल्ली-लखनऊ पहुँचती। वो भी, किसी और वर्ग की सीटें कम हुये बिना! लेकिन, सपा ने इस संशोधन बिल के खिलाफ वोट किया।

साथियों,

इस बिल से सभी राज्यों की सीटें भी बढ़तीं। हमने संसद में साफ साफ कहा था, सभी राज्यों की सीटें एक ही अनुपात में बढ़ेंगी। लेकिन यूपी को गाली देकर पॉलिटिक्स करने वाली DMK जैसी पार्टियां, उन्हें इस बात पर आपत्ति थी कि यूपी की सीटें क्यों बढ़ेंगी? आप देखिए, समाजवादी पार्टी संसद में उन्हीं के सुर में सुर मिला रही थी। ये सपा वाले यहाँ से आपके वोट लेकर संसद जाते हैं, और, संसद में यूपी के लोगों को गाली देने वालों के साथ खड़े होते हैं। इसीलिए, यूपी के लोग कहते हैं, समाजवादी पार्टी कभी सुधर नहीं सकती है। ये लोग हमेशा महिला विरोधी राजनीति ही करेंगे। ये हमेशा तुष्टीकरण और अपराधियों के साथ खड़े होंगे। सपा कभी भी परिवारवाद और जातिवाद से ऊपर नहीं उठ सकती। ये लोग हमेशा विकास विरोधी राजनीति ही करेंगे। यूपी को सपा और उसके सहयोगियों से सावधान रहना है।

साथियों,

आज देश एक ही संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है- विकसित भारत का संकल्प! इस संकल्प को पूरा करने में उत्तर प्रदेश की बहुत बड़ी भूमिका है। आप सब देख रहे हैं, आज पूरी दुनिया कैसे

युद्ध, अशांति और अस्थिरता में फंसी हुई है। दुनिया के बड़े-बड़े देशों में हालात खराब हैं। लेकिन, भारत विकास के रास्ते पर उसी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। बाहर के दुश्मनों को ये पसंद नहीं आ रहा। भीतर बैठे कुछ लोग भी सत्ता की भूख में भारत को नीचा दिखाने की कोशिशों में लगे हैं। फिर भी, हम न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि, विकास के नए-नए कीर्तिमान भी गढ़ रहे हैं। हम आत्मनिर्भर भारत अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। हम आधुनिक से आधुनिक इनफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहे हैं। गंगा एक्सप्रेसवे इसी दिशा में एक और मजबूत कदम है। मुझे विश्वास है, गंगा एक्सप्रेसवे, जिन संभावनाओं को हमारे दरवाजे तक लेकर आएगा, यूपी के लोग अपने परिश्रम और अपनी प्रतिभा से उन्हें साकार करके रहेंगे। इसी संकल्प के साथ, आप सभी को एक बार बहुत-बहुत बधाई। बहुत-बहुत धन्यवाद!

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

वंदे मातरम।

वंदे मातरम।

वंदे मातरम।

वंदे मातरम।

वंदे मातरम।

बहुत-बहुत धन्यवाद!