"Shri Narendra Modi Addressing the Global Indian Diaspora Through Video Conferencing"

 

प सब को नमस्कार..! थैंक्यू..! आप सब को शिवरात्री की भी बहुत-बहुत शुभकामनाएं..! भारत में आज शिवरात्री के पर्व का शुभ दिवस है और महाकुंभ का आज समापन दिवस भी है। कभी-कभी लगता है कि भारत में जिस प्रकार से इस महाकुंभ का आयोजन होता है, वह महाकुंभ अगर विश्व के किसी और देश में हुआ होता, तो ना जाने कितने विद्-विद पहलुओं पर, इसकी श्रद्धा के संबंध में, इसकी योजना के संबंध में, इतनी बड़ी भारी तादाद में मिलीयन्स ऑफ मिलीयन लोगों का इक्कठा होना... यानि प्रति दिवस ऐसा लगता था कि यूरोप का कोई छोटा देश गंगा के किनारे पर रोज इक्कठा होता है। ये सामान्य घटना नहीं है, सामान्य रूप से उसको देखा नहीं जा सकता। लेकिन पश्चिम के देशों को जिस प्रकार से चीजों को ब्रांडिंग और मार्केटिंग करने का कौशल है। ये इवेंट इतना सामर्थ्यवान होने के बाद भी हम दुनिया के सामने हमारे देश के लोगों की इस शक्ति का परिचय नहीं करवा सकते हैं। आज शिवरात्री है, भगवान शिवजी को पूरा हिन्दुस्तान याद करता है।

मारे देश में अनेक देवी-देवताओं की कल्पना है और उन सभी देवी-देवताओं की कल्पना के माध्यम से हम जीवन से कुछ सीखने की कोशिश करते हैं। आज सारा विश्व ग्लोबल वार्मिंग के कारण परेशान है। हर कोई चिंतित है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण आने वाले दिनों में हालत क्या होगी..! हर एक के मन में एक चिंता का विषय है। लेकिन कभी-कभी हमारे पूर्वजों ने भगवान की जो कल्पना की है, ईश्वर के रूप के प्रति उनके मन का जो भाव जगा है, उसमें एक बात विशेष रूप से ध्यान में आती है। हिन्दुस्तान के जितने भी भगवानों की कल्पनाएं हैं उन सबको प्रकृति के साथ जोड़ा गया है। हमारे कोई ईश्वर की कल्पना ऐसी नहीं है जिनके साथ कोई वृक्ष ना जुड़ा हुआ हो, किसी ना किसी पेड़ को हर ना हर ईश्वर के साथ जोड़ा गया है। इतना ही नहीं, हर एक ईश्वर को, परमात्मा के हर एक रूप को, किसी ना किसी पशु के साथ या पंखी के साथ जोड़ा गया है। और इन चीजों से एक मैसेज देने का प्रयास हुआ है कि परमात्मा के जिस रूप की आप पूजा करते हो, वे परामात्मा प्रकृति को कितना प्रेम करते हैं, वे प्रकृति के साथ कितने जुड़े हुए रहते थे..! अगर आप को भी प्रकृति को छोड़ कर के सिर्फ परमात्मा की पूजा करनी है, तो वो पूर्ण नहीं है। ये टोटल पैकेज डील होता है। अगर शिव जी की पूजा करें, तो बिल्व के वृक्ष की भी, बिल्वा पत्र की भी पूजा होती है। और आप देखिए, शिवजी के परिवार का कमाल..! शिव जी के परिवार की एक विशेषता देखिए..! गणेशजी, कार्तिकेय, शिवजी, पार्वती जी... हमारे यहाँ मान्यता है कि सांप चूहे को खा जाता है। सांप का आहार चूहा होता है। लेकिन शिवजी के परिवार में सांप और चूहा साथ-साथ रहते हैं। गणेश जी का वाहन चूहा है, तो शिव जी के गले में सांप रहता है..! आप कल्पना कर सकते हैं कि को-एग्ज़िस्टेंस के लिए इससे बड़ा मैसेज क्या हो सकता है..! प्रकृति के प्रति प्रेम, प्रकृति का महात्म्य..! और जो वहाँ बैठे हुए लोगों में पुरानी पीढी के लोग होंगे, जो आयुर्वेद को जानते होंगे, उन्हें मालूम होगा कि बिल्वी का एक फल होता है। बिल्वी पत्र से हम शिवजी की पूजा करते हैं। लेकिन आज भी कहते हैं कि शिवजी ने जहर पीया था और जहर पीने के बाद एक बहुत बड़ी संकट की घड़ी से गुजरते हुए वो बाहर निकले थे। लेकिन आज हमारा आयुर्वेद कहता है कि बिल्वी पत्र के साथ एक बिल्वी का फल भी होता है, और उस फल का ज्यूस पेट की हर बीमारी के उत्तम उपचार के रूप में आज भी काम आता है। यानि सहज रूप से ईश्वर के रूप की साधना और आराधना करते-करते किस प्रकार से हमारे यहाँ लोक शिक्षा का काम होता है, पीढ़ियों तक लोगों प्रशिक्षित करने की कैसी परंपरा रही है..! और हिन्दुस्तान के हर कोने में, दुनिया के हर कोने में जहाँ-जहाँ भारतीय बंधु हैं, आज शिवजी की आराधना करते हैं। मैं इस शिवरात्री के शुभ पर्व पर आपको भी बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूँ..!

भाईयो-बहनों, ये 21 वीं सदी है, ज्ञान और विज्ञान की सदी है और आपको लगता होगा कि एक राजनेता, एक राज्य का मुख्यमंत्री, ये सुबह-सुबह शिवजी की कथा सुनाने लग गया..! आपके मन में सवाल उठना बहुत स्वाभाविक है। लेकिन भाइयों और बहनों, सार्वजनिक जीवन में शिवजी से एक प्रेरणा तो जरूर मिलती है, और वो प्रेरणा है जहर पीने की और जहर पचाने की..! ईश्वर हमें शक्ति दे कि हम भी हर प्रकार की कटुता, बुराइयाँ, विकृतियाँ के रूप में जो जहर है, उस जहर को पचा कर के हमारे भीतर से अमृत की वर्षा की संभावना पैदा हो, हमारा मन-मस्तिष्क, हमारा मन-मंदिर अमृत से भरा हुआ हो, ताकि हमारा हर शब्द, हमारी वाणी, हमारा व्यवहार, हमारा आचरण पूरी सृष्टि को अमृत मय अनुभूति करवा सके। और हम हिन्दुस्तानी जिन परंपराओं से जुड़े हुए हैं, हम अगर चाहें, अगर सोचें, अगर तय करें तो आज भी हम लोगों में वो सामर्थ्य है कि हम वो कर सकते हैं। हमारे पूर्वजों का तो वो मंत्र रहा था ‘वयम् अमृतस्य पुत्रा:’..! हम अमृत के रूप हैं, अमृतम् - ये सोच के हम लोग हैं और इसलिए भाइयों-बहनों, जिनके पास ये सामर्थ्य होता है वे बहुत कुछ कर सकते हैं।

भाइयों-बहनों, आज फिर एक बार मुझे शिवरात्री के पावन पर्व पर आपको मिलने का सौभाग्य मिला है। अनेक बार आप लोगों के बीच आने का अवसर मिला है। भारतीय समाज के, गुजराती समाज के अनेकविध कार्यक्रमों में आना हुआ है। इस बार ‘अम्ब्रेला ऑर्गनाइज़ेशन’ के रूप में ‘ओवरसीज फ़्रैंड्स ऑफ बीजेपी’ के मित्रों ने इनिश्यिेटिव लिया। मैं यहाँ सब के नाम तो नहीं गिना रहा हूँ क्योंकि किसी का नाम छूट जाता है तो बुरा लगता है। लेकिन सबने मिल कर के लगातार भारत से जुड़े रहने का प्रयास किया है, लगातार भारत की गतिविधियों के साथ अपने आप को जोड़ने का निरंतर प्रयास किया है ये अपने आप में एक शुभ निशानी है। मित्रों, हम किसी भी देश में रहते हों, कोई भी काम करते हों, लेकिन हमारी धरती के साथ हमारा नाता रहे, हमारी संस्कृति के साथ हमारा नाता रहे, हमारी परंपराओं के साथ हमारा नाता रहे, हमारी भाषा के साथ हमारा नाता रहे, इसका अपना एक माहात्म्य होता है। आज भी आप मॉरिश्यिस चले जाएं, वेस्ट इंडिज चले जाएं, सवा-सौ डेढ-सौ साल पहले मजदूर के रूप में जो लोग गए थे, एक रामायण की चौपाई ने उनको आज भी हिन्दुस्तान के साथ जोड़ कर रखा है। मुझे विश्वास है कि विश्व में फैले हुए मेरे भाई-बहन जिनका भारत के प्रति अपार प्रेम है, अगर उनके पास भारत से कोई भी बुरी खबर आए तो रात भर विदेश में रहने वाले भाई-बहन बैचेन हो जाते हैं, उन्हें पीड़ा होती है, ये आपका जो भारत प्रेम है, आपकी जो भारत भक्ति है, ये निरंतर बनी रहे, निरंतर बढ़ती रहे और ये आपका जो भाव विश्व है वो जब भी मौका मिले, भारत के विकास के लिए काम आए, भारत की उन्नति के लिए काम आए, भारत के गरीब से गरीब लोगों की भलाई के लिए काम आए..!

मित्रों, मैं इन दिनों देख रहा हूँ कि मुझे साल में 12-15 डेलिगेशन ऐसे मिलते हैं जो विदेश से आते हैं और कोई ना कोई प्रकल्प लेकर के आते हैं। वो वैकेशन में कहीं टहलने के लिए जाने के बजाए हिन्दुस्तान में आकर के कहीं हैल्थ का कैंप, कहीं डायग्नोसिस का कैंप, कहीं शिक्षा की प्रवृति करते हैं। ये अपने आप में एक अच्छा प्रारंभ हुआ है। इतना ही नहीं, मैं इन दिनों देख रहा हूँ कि जो अमेरिका में पैदा हुए हमारे भारतीय मूल के बच्चे हैं, जिनका उनका जन्म विदेश में कहीं हुआ और जिन्होंने हिन्दुस्तान को देखा भी नहीं था, वे 18-20 साल की उम्र होते होते, आज भारत आते हैं और भारत के गांव-गरीब की सेवा में अपना समय लगाते हैं, हर एक नौजवान एक-एक साल रहते हैं..! ये जो ललक है हमारे देश के लिए कुछ करने की, मैं उसका सम्मान करता हूँ। ऐसे जितने भी नौजवान हिन्दुस्तान के किसी भी कौने में कुछ करने के लिए आते हैं, देश के लिए कुछ ना कुछ करने का प्रयास करते हैं, मानवता के लिए कुछ ना कुछ करने का प्रयास करते हैं, उन सब का भी बहुत मन से अभिनंदन करता हूँ।

भाइयों-बहनों, पूरे विश्व में गत दो-तीन दशक से एक चर्चा लगातार चल रही है। और चर्चा ये चली है कि 21 वीं सदी का नेतृत्व कौन करेगा..? भाइयों-बहनों, 19 वीं शताब्दी यूरोप की रही। जब विश्व में औद्योगिक क्रांति हुई, तब हम गुलाम थे। हमारे पास सारी क्षमताएं होने के बावजूद भी... हमारा ढाका का मलमल सारे विश्व में प्रसिद्ध था, हम औद्योगिक दुनिया में अपनी एक जगह बना चुके थे, लेकिन चूंकि हम एक गुलाम देश थे, अंग्रेज हम पर शासन करते थे, हमें उस औद्योगिक क्रांति का लाभ नहीं मिला। अगर हम उस समय स्वतंत्र होते तो मैं पूरी संभवना देखता हूँ कि उस औद्योगिक क्रांति में पूरे विश्व का नेतृत्व करने का सौभाग्य हमने पाया होता। आज इतिहास के झरोखे से जो भी चीजें प्राप्त होती हैं उससे साफ नजर आता है कि हमारे भीतर वो क्षमता थी, हमने वो उन चीजों को अचीव किया था, हम उसको कर सकते थे लेकिन देश गुलाम होने के कारण वो अवसर हमारे हाथ से निकल गया। भाइयो-बहनों, 20 वीं शताब्दी में अमेरिका ने भांति-भांति अपनी व्यवस्थाओं के द्वारा पूरे विश्व में अपना दबदबा बनाए रखा। चीन ने भी अपना सिर ऊंचा करने की कोशिश की। लेकिन 20 वीं शताब्दी में भी हम आजादी के आंदोलन की तीव्रता पर थे, महात्मा गांधी के नेतृत्व में देश आजादी के आंदोलन में जुड़ा हुआ था, और उसके कारण 20 वीं सदी भी हमारे नसीब में नहीं आई। लेकिन 20 वीं शताब्दी के सेकन्ड हाफ में हम एक स्वतंत्र भारत के रूप में उभरे थे। सौ करोड का देश दुनिया का ध्यान आकर्षित करे वो होना स्वाभाविक था। विश्व हमारी ओर देख रहा था और 20 वीं शताब्दी का उतरार्ध आते आते पूरे विश्व के पंडितों ने मान लिया था कि 21 वीं सदी एशिया की सदी है। डिबेट ये होती थी कि चाइना लीड करेगा कि हिन्दुस्तान लीड करेगा..! भाइयों-बहनों, जब अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एन.डी.ए. की सरकार चल रही थी, 20 वीं शताब्दी के आखिरी दिन थे, एक बार देश में और पूरे विश्व में एक माहौल बन चुका था कि हाँ भाई, अब हिन्दुस्तान कुछ करेगा..! और विशेषकर के वाजपेयी जी ने सरकार बनाने के कुछ ही महीनों में जब न्यूक्लियर टैस्ट किया तो विश्व भर में भारत से प्रेम करने वाले लोगों में एक नया विश्वास पैदा हुआ था। उस एक घटना ने विश्व भर में फैले हुए हिन्दुस्तानी, जो बार-बार सिर नीचा करके जीने के लिए मजबूर होते थे, सीना तान कर के खड़े नहीं रह पाते थे, वाजपेयी जी के इस हिम्मत पूर्ण निर्णय के कारण पूरे विश्व में फैले हुए भारतीय समाज में एक नई चेतना का वातावरण बना था। और तब से लेकर के जो यात्रा का आरंभ हुआ था, ऐसा लग रहा था कि 21 वीं सदी का नेतृत्व भारत ही करेगा, हम काफी आगे निकल जाएंगे ये विश्वास पैदा हुआ था। लेकिन हमारा दुर्भाग्य रहा कि 21 वीं सदी के पहले दशक का पिछले छह-सात साल का समय उन घटनाओं की परंपराओं को सहता रहा है, जिसके कारण पूरे विश्व में हमें नीचा देखने की नौबत आई है। अभी एच. आर. शाह ट्रिपल-सी की बात कर रहे थे, वो मैं सुन रहा था।

भाइयों-बहनों, बहुत सी बातें हैं जिसके कारण एक चिंता का माहौल बना हुआ है। एक तरफ इस प्रकार की स्थिति और ऐसे माहौल में जब चारों तरफ अंधेरा हो, तो कहीं दूर-सुदूर भी एक दिया जलता है तो उस पर ध्यान जाना बड़ा स्वाभाविक है। ऐसे माहौल में गुजरात ने वो दिया जलाने का काम किया है। एक आशा का संचार पैदा करने का काम किया है। बहुत तेज गति से ऊपर उठा था हिन्दुस्तान, और 21 वीं सदी के प्रारंभिक वर्षों में ही इस प्रकार से उसकी हालत हो जाए तो किसी को भी चिंता हो जाना स्वाभाविक है। ऐसे समय में गुजरात के विकास यात्रा के चर्चे देश और दुनिया में पहुंचने लगी। विश्व के लोग गुजरात की तरफ देखने लगे। 21 वीं सदी के पहल दशक में पूरी अर्थ व्यवस्था पर दो-दो बार रिसेशन का बहुत बड़ा खतरा पैदा हुआ। अमेरिका जैसे देश भी रिसेशन के कारण हिल गए थे। आर्थिक संकट पूरे विश्व को दबोच रहा था। उस निराशा के माहौल में भी गुजरात ने आर्थिक विकास की कोशिशों को जारी रखा। उस संकट के काल में भी हमने वो स्थितियां अपनाने की कोशिश की, जिससे हम रुके नहीं। मित्रों, जब दुनिया में रिसेशन आया तो हमारे मन में एक विचार आया कि भले ही मंदी का माहौल क्यों ना हो, लेकिन जो व्यापारी है, उद्योगकार है वो अपने कारखाने बंद करना नहीं चाहता। वो कम्पीटिटिव वर्ल्ड के अंदर अपने प्रोडक्ट को सस्ते में तैयार करके खड़ा रहना चाहता है। और इसलिए, अगर मैन्यूफैक्चरिंग प्रोसेस को एफिशियेंट करना, सस्ते में तैयार करने के लिए अगर हम प्लेटफार्म क्रियेट करते हैं, तो दुनिया में मंदी का दौर होने के बाद भी लोग हमारी तरफ आएंगे। हमने इस व्यूह को अपनाया और उस व्यूह का परिणाम ये हुआ कि गुड गवर्नेस के कारण, एफीशियेंसी के कारण, पीसफुल लेबर के कारण, चीप लेबर के कारण, मैन्यूफेक्चरिंग सैक्टर को लगा कि अगर दुनिया में टिकना है और सस्ते में अपना माल तैयार करना है तो हिन्दुस्तान में एक अवसर है और गुजरात निमंत्रण दे रहा है। और उसका हमें फायदा मिला।

भाइयो-बहनों, आज पूरे विश्व को भी इस स्पर्धा से झूझना पड़ता है। भारत एक ऐसा देश है जिसके पास सर्वाधिक नौजवान हैं। अमेरिका में बैठे मेरे भाइयों-बहनों, आपको ये जान कर खुशी होगी और आनंद होगा कि आज हिन्दुस्तान दुनिया का सबसे नौजवान देश है। हमारी 65% जन संख्या 35 वर्ष से कम उम्र की है। आप कल्पना कर सकते हो कि इतना यौवन से भरा हुआ देश, जिसके नौजवानों के नौजवान सपने होते हैं, जिसमें साहस होता है, सामर्थ्य होता है..! यदि उस शक्ति पर हम कान्सन्ट्रेट करें तो हम कितनी स्थितियों को बदल सकते हैं। भाइयो-बहनों, गुजरात ने युवाओं पर बल देने की दिशा में प्रयास किया है। ये वर्ष स्वामी विवेकानंद जी की 150 वीं जयंति मनाने का अवसर है। ये मेरा सौभाग्य रहा कि शिकागो में विश्व धर्म परिषद में स्वामी विवेकानंद जी के भाषण की जब शताब्दी मनाई जा रही थी, तब मैं अमेरिका में आपके बीच आ करके उस कार्यक्रम में मैं शरीक हुआ था। मेरा सौभाग्य रहा कि शिकागो के उस सभाखंड में जा कर के स्वामी जी को श्रद्धांजलि दे सका था। भाइयों-बहनो, 39 साल की छोटी आयु में स्वामी जी ने विदाई ले ली। लेकिन पूरे विश्व में जहाँ भी भारतीय समाज रहता है, आज भी युवा पीढ़ी स्वामी विवेकानंद जी से प्रेरणा लेती है। उन्होंने आध्यात्म को भारत भक्ति से जोड़ दिया था। उन्होंने भारत भक्ति को ही आध्यात्म की ऊचांई का रास्ता दिखा दिया था। और भाइयो-बहनों, एक गुजराती के नाते मुझे एक और भी गर्व होता है। शायद अमेरीका में रहने वाले बहुत से लोगों के लिए ये जानकारी शायद नई भी हो सकती है। स्वामी विवेकानंद जी जिस धर्म परिषद में आए थे, उस धर्म परिषद में हमारे गुजरात के भी एक नौजवान आए थे। वीरचंद गांधी, भावनगर जिले के रहने वाले थे। बड़े विद्वान थे। और जब वो अमेरिका आए थे तब विश्व धर्म परिषद में उनका भाषण हुआ था। 29 वर्ष की उनकी आयु थी। और अमेरिका में उन्होंने कई वर्षों तक रह कर अमेरिका के सभी बड़े शहरों में भारतीय संस्कृति की बात कही थी। वे विवेकानंद जी से बड़े निकट थे। उनकी पढाई गांधी जी के साथ हुई थी। और आज भी शिकागो में वीरचंद गांधी की प्रतिमा है, बहुत कम लोगों को मालूम होगा। और ये दुर्देव देखिए कि विवेकानंद 39 साल की आयु में हमें छोड़ कर चले गए और वीरचंद गांधी भी 37 साल की उम्र में हमें छोड़ कर चले गए। और हमारे गुजरात में तो एक किताब भी प्रसिद्घ हुई है, ‘गांधी बिफोर गांधी’। मोहनलाल करमचंद गांधी से पहले वीरचंद गांधी ने स्वामी विवेकानंद के साथ जा कर के अमेरिका में किस प्रकार से भारतीय संस्कृति का ध्वज लहराया था..! भाइयो-बहनों, ये इतिहास के पन्ने हैं जिसको पता नहीं क्यों अंधेरे में डाला हुआ है। इन सभी चीजों को उजागर करने से एक गौरव मिलता है, एक प्रेरणा मिलती है, एक आंनद मिलता है, एक नई ऊर्जा प्राप्त होती है।

भाइयो-बहनों, स्वामी विवेकानंद हमेशा कहते थे कि देश के नौजवान ही देश का भाग्य बदलेंगे। आज वक्त आया है। दुनिया का सबसे युवा देश यदि हिन्दुस्तान है तो युवा शक्ति के बल पर विश्व की भलाई के लिए अपनी शक्ति और सामर्थ्य को एक जुट कर के आगे बढ़ने की नौबत आई है। और मित्रों, भारत का आगे बढ़ना ये विश्व कल्याण का काम है। आज शिवरात्री है और शिव का दूसरा अर्थ भी कल्याण होता है। ‘तनमे मन: शिव संकल्पमस्तु’, ये हम कहते हैं। अच्छे संकल्पों का एक समय होता है। कल्याणकारी संकल्प का एक अर्थ होता है। मानव जात के कल्याण के लिए संकल्प बद्ध हमारे समाज और हमारी युवा पीढ़ी को लेकर के स्वामी विवेकानंद जी की 150 वीं जयंती मनाते हुए एक नई ऊर्जा के साथ देश को कैसे आगे बढ़ा सकते हैं। हमने गुजरात में स्वामी विवेकानंद जी की 150 वीं जयंती को युवा वर्ष के रूप में मनाना तय किया है। और युवा वर्ष भी ‘इन जनरल’ टर्म नहीं। कहने को युवा, इस प्रकार से नहीं। हमने एक स्पेशल फोकस रखा है और हमारा स्पेशल फोकस है, स्किल डेवलपमेंट। लगातार गुजरात के अंदर हमने स्किल डेवलपमेंट पर बहुत बड़ा जोर दिया है। हमारे देश के नौजवान को ईश्वर ने जो भुजाएं दी है उन भुजाओं में अगर स्किल डेवलपमेंट के ज़रिए अगर हम हुनर भर देते हैं, कौशल्य देते हैं, कुछ करने के लिए वैल्यू एडिशन करते हैं तो हमारा नौजवान बहुत बड़ी शक्ति के रूप में उभर सकता है और हिन्दुस्तान की शक्ति की धरोहर बन सकता है।

मैं यहाँ इस मंच का उपयोग किसी सरकार की आलोचना करने के लिए नहीं करना चाहता हूँ। लेकिन सत्य आप लोगों के सामने रखना जरूर चाहता हूँ। इन दिनों भारत सरकार का बजट आया और गुजरात सरकार का भी बजट आया। मैं समझता हूँ कि स्वस्थ मन से इसका तुलनात्मक अध्ययन हमें एक सही दिशा देगा। भाइयों-बहनों, आपको जानकर के हैरानी होगी कि इतना बड़ा हिन्दुस्तान, जिस हिन्दुस्तान के 65% नौजवान 35 साल से कम उम्र के हैं और पूरा विश्व इन दिनों जब स्किल डेवलपमेंट की बात कर रहा है। कुछ दिन पहले प्रेज़िडेंट ओबामा ने जब अपना नया कार्यकाल संभाला और उन्होंने अपने विज़न के रूप में जो अपना पहला भाषण दिया, उसके संबंध में मैंने इंटरनेट पर पढ़ा और देखा तो उसमें भी एक बात उन्होंने बड़े जोरों से कही थी। अमेरिका में स्किल डेवलपमेंट के माहात्म्य को उन्होंने बड़ी गंभीरता से पेश किया था। हम पिछले दो साल से लगातार स्किल डेवलपमेंट का अभियान चला रहे हैं। मैं कहना ये चाहता था कि भारत सरकार का बजट और गुजरात सरकार का बजट... मित्रों, जब कि 21 वीं सदी में सबसे नौजवान देश के रूप में स्किल डेवलपमेंट हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए, इतने बड़े हिन्दुस्तान का नेतृत्व कर रही हमारी भारत सरकार का जो बजट है उसमें एक हजार करोड रुपया स्किल डेवलपमेंट के लिए अलॉट किया गया है। गुजरात एक छोटा सा राज्य है, हिन्दुस्तान की तुलना में हम सिर्फ पांच प्रतिशत हैं और एक कोने में हैं। लेकिन भाइयों-बहनों, हमारा कमिटमेंट देखिए..! दिल्ली की भारत सरकार का स्किल डेवलपमेंट बजट 1000 करोड है, गुजरात जैसे छोटे राज्य का स्किल डेवलपमेंट का बजट 800 करोड़ रुपया है। इससे आपको अंदाज आएगा कि हमारा कमिटमेंट क्या है, देश के नौजवानों को किस प्रकार से हम भारत के विकास की यात्रा के अंदर जोड़ना चाहते हैं और हमने उस पर बल दिया है।

भाइयों-बहनों, लोग सेक्यूलरिज्म की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। एक हिन्दुस्तानी होने के नाते सेक्यूलरिज्म की मेरी बहुत सिम्पल डेफिनिशन है| मैं मानता हूँ मित्रों, एक हिन्दुस्तानी के नाते, हिन्दुस्तान को प्रेम करने वाले एक नागरिक के नाते आप भी मेरी इस डेफिनिशन से सहमत होंगे। मेरी सेक्यूलरिज्म की डेफिनिशन बहुत सिम्पल हैं, इंडिया फर्स्ट..! हम कोई भी निर्णय करें, कोई भी काम करें, तो उसमें भारत सर्वोपरि होना चाहिए, भारत की भलाई से कम कुछ भी नहीं होना चाहिए, अगर ये रहा तो सारा सेक्यूलरिज्म अपने आप हमारी रगो में दौड़ने लग जाएगा। हम भारत का नुकसान कत्तई नहीं होने देंगे। ना भारत की इज्जत का, ना भारत की प्रतिष्ठा का, ना भारत के सपनों का, ना भारत के नौजवानों के भविष्य का..! इंडिया फर्स्ट, इस मिजाज के साथ हिन्दुस्तान के सवा सौ करोड़ नागरिक एक ही मंत्र को लेकर के चलें, तो देखते ही देखते दुनिया के अंदर हमारा डंका बजने लगेगा। और मैं ये बात इसलिए भी कहता हूँ कि मेरी स्वामी विवेकानंद जी के प्रति एक विशेष श्रद्धा रही है, बचपन से मेरे मन पर एक प्रभाव रहा है। और हमने देखा है कि विवेकानंद जी ने अपने काल खंड में जो-जो कहा था वो सही निकला था। जीवन के अंत काल में उन्होंने कहा था कि मैं देश वासियों को कहता हूँ कि अपने सभी देवी-देवताओं को भूल जाओ..! मित्रों, ये छोटी बात नहीं है। एक सन्यासी के मुंह से ये सुनना कि तुम अपने देवी-देवताओं को भूल जाओ..! और ये कहा था कि सारे देवी-देवताओं को भूल जाओ, एक मात्र भारत माता को अपनी देवी के रूप में प्रस्थापित करो और पचास साल तक सारे अपने संप्रदाय, अपने देवी-देवताओं को छोड़ कर के एक मात्र भारत माता की पूजा करो। और आप देखिए, विवेकानंद जी ने कहा था उसके ठीक पचास साल के बाद 1947 में भारत आजाद हुआ था, ठीक पचास साल के बाद..! इस महापुरुष में एक दृष्टि थी। उन्होंने और एक बात कही थी। स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका जाने के उस काल खंड में कहा था कि मैं अपनी आंखों के सामने देख रहा हूँ कि मेरी भारत माता जगदगुरू के स्थान पर विराजमान होगी, मेरी भारत माता दैदिप्यमान होगी और मेरा देश विश्वगुरु के रूप में काम करेगा..! भाइयों-बहनों, विवेकानंद जी के कहने के बाद सवा सौ साल बीत गए। आज जब हम उनकी 150 वीं जंयति मना रहे हैं तब क्या एक हिन्दुस्तानी के नाते हम संकल्प कर सकते हैं, मानव कल्याण के मंत्र को लेकर के चलने वाले हम सभी लोग संकल्प कर सकते हैं कि मानव कल्याण के लिए, विश्व कल्याण के लिए 125 साल पहले स्वामी विवेकानंद जी ने जो सपना देखा था कि मैं भारत माता को जगत गुरू के स्थान पर विराजमान देखना चाहता हूँ, क्या हम अब भी वो संकल्प कर सकते हैं कि हमारे से बनता हर प्रयास करेंगे और विवेकानंद जी के सपने को पूरा करने के लिए हम कुछ ना कुछ करेंगे..! 125 साल भले बीत गए, लेकिन क्या हम इस 150 वीं जयंति के निमित्त वो संकल्प करके आगे बढ़ सकते हैं..?

भाइयों-बहनों, हम दुनिया बदल सकते हैं। एक आत्म विश्वास चाहिए, और हम गुजराती तो इसी के भरोसे चलते हैं, वी कैन एंड वी विल। हम कर सकते हैं और हम करके रहेंगे, इस मंत्र को लेकर के चलना पड़ता है। क्या नहीं है हमारे देश के पास..? विश्व के पास जो कुछ भी है वो सब कुछ हमारे पास भी है। सही समय पर, सही जगह पर, सही दिशा में चीजों को सिर्फ दौड़ाना है और देखते ही देखते परिवर्तन आता है। भाइयों-बहनों, मेरे 12-13 साल के गुजरात एक्सपीरियंस से मैं कहता हूँ कि विकास का मंत्र हमारी सब समस्याओं का समाधान दे सकता है। पहले माना जाता था कि विकास को लेकर के चुनाव नही जीता जा सकता है। मित्रों, गुजरात की जनता ने इस दीर्घदृष्ट्रा का दर्शन करवाया है। समाज कैसा विजनरी होता है ये गुजरात के मतदाताओं ने दिखाया है। और गुजरात के मतदाताओं ने विकास को वोट देने का संकल्प प्रकट किया। मित्रों, आज गुजरात विक्टरी के लिए आपने मेरा अभिनदंन करने के लिए वीडियो कान्फ्रेंसिंग पर मुझे निमंत्रित किया है। भाइयों-बहनों, ये विक्टरी नरेन्द्र मोदी की नहीं है। ये चुनाव विजय, निरन्तर चुनाव विजय, लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनना, तीन बार हैट्रिक करना... ये अपने आप में कोई नरेन्द्र मोदी का करिश्मा नहीं है। भाइयो-बहनों, अगर ये विजय है तो ये मेरे गुजरात के नागरिकों का विजय है, गुजरात के मेरे मतदाताओं का विजय है। जिन्होंने विकास पर विश्वास किया, जिन्होने विकास के महात्म को समझा और जिन्होंने पिछले दस-बारह साल के अंदर अनुभव किया कि देर कहीं होती होगी, कुछ कमी रहती होगी, कुछ कठिनाइयाँ रहती होगी लेकिन उसके बावजूद भी विकास का ही रास्ता है जो आज नहीं तो कल हमारी समस्याओं का समाधान करेगा, हमें कठिनाइयों से मुक्त करेगा, हमारे सपनों को साकार करने के लिए यही एक रास्ता काम आएगा, ये गुजरात के मतदाताओं ने स्वीकार किया है। और गुजरात के मतदाताओं ने पूरे देश के अंदर एक विश्वास पैदा करने का एक मैसेज दिया है कि बाकी सब छोड़ कर के एक मंत्र को पकड़ लो, डेवलपमेंट..! गुजरात को विकास भी करना है, गुजरात को आधुनिक भी बनना है। गुजरात को संस्कार की भी चिंता करनी है, गुजरात को संस्कृति की भी चिंता करनी है। और इन सबकी चिंता करते हुए आगे बढ़ने वाले मॉडल को हम प्रस्थापित करना चाहते हैं।

भाइयों-बहनों, कभी गुजरात ने ऐसा नहीं कहा है कि हमारे यहाँ कोई मुसीबत ही नहीं है, हमारे यहाँ कोई कमियाँ नहीं है। लेकिन हमने ये विश्वास पैदा किया है कि हम कमियों को दूर करने के लिए पूरा प्रयास करेंगे। और भाइयों-बहनों, मुझे एक बात की खुशी है, इन दिनों गुजरात की चर्चा क्या होती है..? नरेन्द्र मोदी की चर्चा क्या होती है..? गुजरात सरकार की चर्चा क्या होती थी..? मित्रों, हिन्दुस्तान के अंदर किसी सरकार के करप्शन की चर्चा होती है, किसी सरकार के कोई ना कोई भले-बुरे आचरण की चर्चा होती है, लेकिन गुजरात की चर्चा होती है तो क्या होती है..? कि भाई, गुजरात के अंदर चौबीस घंटे बिजली है लेकिन थोड़ी मंहगी है, कोई कहता है सस्ती है, कोई कहता है अच्छी है..! पानी है तो कोई कहता है कि पहले तो पानी नहीं पहुंचता था लेकिन अभी तो पहुंच रहा है, अभी इतना बाकी है। कोई मालन्यूट्रीशन की चर्चा करता है..! कहने का तात्पर्य ये है कि जब भी गुजरात की चर्चा होती है तो विथ रेफरन्स टू डेवलपमेंट होती है और उसमें हमारी कमियाँ भी उजागर होती है और मैं इसका स्वागत करता हूँ। क्योंकि कोई ये तो दावा नहीं कर सकता कि इतने सालों की सब बुराइयों को कोई एक आदमी ने एक दशक में ही पूरा कर दिया होगा। लेकिन लोग इतना विश्वास करते हैं कि यही रास्ता है जिससे अंधेरा छटने वाला है। और मित्रों, मैं कहता हूँ, ‘ऐश: पंथा:’..! यही रास्ता है और वो रास्ता है, डेवलपमेंट..!

मित्रों, राजनेता कभी-कभी डरते हैं। हमारे देश में पॉपूलरली कहा जाता है कि ‘गुड इकॉनॉमिक्स इज अ बैड पॉलिटिक्स’, ये बातें मानी गई हैं। डेवलपमेंट से चुनाव नहीं जीते जाते, चुनाव तो जोड़-तोड़ से जीते जाते हैं..! भाइयों-बहनों, चुनाव जीतें या हारें, ये मकसद नहीं होना चाहिए। मकसद ये होना चाहिए कि अगर आपको पाँच साल के लिए जनता ने काम दिया है, तो उन पाँच साल में आप जनता के काम को प्राथमिकता दीजिए, पूरा कीजिए। चुनाव तो बाय प्रोडक्ट होता है। अगर आप अच्छा काम करोगे, निरंतर अच्छा करोगे, बिना स्वार्थ के करोगे तो लोग आपकी गलतियाँ भी माफ कर देते हैं। मतदाता ज्यादा उदार होता है। ऐसा नहीं है कि हमारी सरकार ने कोई गलतियाँ नहीं की होगी। ऐसा नहीं है कि कहीं किसी इलाके में हमारे लिए शिकायत नहीं होगी। लेकिन हमने एक विश्वास पैदा किया है कि गलतियाँ होते हुए भी, कमियाँ रहते हुए भी, अच्छा करने की हमारी निष्ठा पर किसी को शक नहीं हुआ है। अच्छा करने के हमारे प्रयासों में किसी ने कभी हमें कोताही बरतते देखा नहीं है। भाइयों-बहनों, मनुष्य का स्वभाव होता है, एक जगह पर दो-चार साल रहने के बाद उसे एक आदत हो जाती है, एक रुटीन लाइफ बन जाती है। मित्रों, मुझे बारह साल हो चुके हैं लेकिन मैं जिस ऊर्जा से, जिस भक्ति से, जिस तन्मयता से 2001 में इस काम को करता था, इतने सारे विजयों की परंपरा के बाद भी उसी लगन, निष्ठा और तपस्या के साथ आप सब की सेवा में लगा हूँ। भाइयों-बहनों, कोई चंद्रक पाने के लिए नहीं कर रहा हूँ, कोई मान-सम्मान पाने के लिए नहीं कर रहा हूँ। मैं इसलिए कर रहा हूँ कि मैं मेरे गुजरात के गरीबों की गरीबी देख नहीं पाता। अगर किसी गाँव में पानी नहीं पहुंचा है तो मैं बेचैन हो जाता हूँ। किसी बेटी शिक्षा के अभाव में झूझती हो तो मैं उसे झेल नहीं पाता। छह करोड़ गुजरातियों को मैंने अपना परिवार माना है। उनका सुख मेरा सुख है, उनका दु:ख मेरा दु:ख है। और ये जीवन उनके कल्याण के लिए काम आ जाए, उनके जीवन में बदलाव लाने के लिए ये जो अवसर मिला है उसका उपयोग हो, इससे बड़ा जीवन का सपना क्या हो सकता है..! और अगर एक बार मेरे कार्यकाल में मैं कुछ अच्छा करूंगा, मेरे बाद किसी और का कार्यकाल होगा तो वो कुछ अच्छा करेगा, और अगर हमारी गति तेज होगी तो मित्रों, बहुत जल्द ही हम स्वामी विवेकानंद जी के सपनों को पूरा करने योग्य बन जायेंगे, और कम से कम मेरे गुजरात का हिस्सा तो मैं बना ही लूंगा..! मेरा गुजरात इस ताकत के साथ खड़ा होगा ये मेरा विश्वास है। भाइयों-बहनों, हमें एक नया संकल्प लेकर के आगे बढ़ना है, हमें एक नया विश्वास लेकर के आगे बढ़ना है।

विश्व भर में फैले मेरे भाइयो-बहनों, अब आपको भी गुजरात के प्रति आकर्षण होता होगा। वहाँ गुजरात के बाहर के भी बहुत लोग बैठे हैं। आपने देखा होगा कि गुजरात ने एक क्षेत्र में इन दिनों में अपनी जगह बनाई है। टूरिज्म के मैप पर गुजरात का कभी नामोनिशान नहीं था। द्वादश ज्योर्तिलिंग, दादा सोमनाथ हमारे यहाँ बैठे हुए हों। द्वारका, श्री कृष्ण की नगरी हमारे पास हो। महात्मा गांधी का पोरबंदर हमारे पास हो, साबरमती आश्रम हमारे पास हो। गिर के सिंह हो, कच्छ का सफेद रण हो, 1600 किलोमीटर लंबा समुद्री किनारा हो.. क्या नहीं है? सब कुछ है..! आज भी है और पहले भी था..! लेकिन भाइयो-बहनों, हमने उस तरफ ध्यान नहीं दिया था। गुजरातीज़ आर बेस्ट टूरिस्ट्स, बट गुजरात वाज नेवर अ टूरिस्ट डेस्टिनेशन..! और आप देखिए, दुनिया के किसी भी कोने में जाइए आप, आपको गुजराती लोग मिलेंगे, मिलेंगे और मिलेंगे..! किसी भी तीर्थ क्षेत्र में जाइए, कोई भी टूरिस्ट प्लेस पर जाइए, आपको गुजराती वहाँ मिलेगा ही मिलेगा..! और आप फाइव स्टार होटल में ठहरे होंगे तो आप देखना कि अपने डिब्बे में से थेपला निकाल कर के खाता हुआ गुजराती आपको फाइव स्टार होटल में दिखाई देगा..! वो अपने घर से सूखड़ी और थेपला लेकर आता है। भाइयों-बहनों, हम गुजराती बहुत अच्छे टूरिस्ट हैं, लेकिन गुजरात वाज नेवर अ टूरिस्ट डेस्टिनेशन। पिछले तीन-चार साल से हमने लगातार कोशिश की, और उसका नतीजा क्या है..? आज हर घर में एक बात होती है, ‘कुछ दिन तो गुजारो गुजरात में..!’, ‘कच्छ नहीं देखा तो कुछ नही देखा..!’, हर कोई बोलने लगा है। मित्रों, टूरिज्म का जो बढ़ावा हुआ है उसके कारण गुजरात में हॉस्पिटालिटी इन्डस्ट्री का बढ़ावा हुआ है। बहुत तेजी से गुजरात का अपना एक आकर्षण बनता जा रहा है। मैं आपको निमंत्रण देता हूँ, आप भी गुजरात को देखने के लिए आइए। फील गुजरात, एंजोय गुजरात..! आपको मैं निमंत्रण देता हूँ। और मैं विश्व में फैले हुए मेरे भारतीय भाइयों को हमेशा विनंती करता हूँ कि हम लोग व्रत मनाएं कि साल में कम से कम दस-पद्रंह नॉन इंडियन फैमिलीज़ को हिन्दुस्तान देखने के लिए प्रेरित करें। उनको भारत देखने के लिए भेजें, समझाएं, आग्रह करें। ताजमहल देखना हो तो ताजमहल देखें, जहाँ जाना है जाए... लेकिन उनको भेजें। मित्रों, सिर्फ विश्व में फैले मेरे हिन्दुस्तान के मित्रों के माध्यम से अगर एक साल में हमारा एक परिवार दस परिवारों को यहाँ भेजता है तो आज हिन्दुस्तान जो टूरिज्म के क्षेत्र में है उससे सौ गुना आगे बढ़ सकता है। आप मुझे कहिए, देश की इतनी बड़ी सेवा होगी की नहीं होगी..? आप कोई डॉलर यहाँ लगाएं तभी देश की सेवा होती है ऐसा नहीं है। आप भारत के प्रति लोगों को आकर्षित करें, भारत देखने के लिए भेजें..! और मित्रों, एक बार टूरिस्ट आने लगेगा तो व्यवस्थाएं भी विकसित होने लगेगी। क्योंकि जो व्यापारी होता है वो ग्राहक की आवश्यकता को समझता है, वो धीरे-धीरे अपना कल्चर और व्यवस्थाओं को विकसित करता है। और देखते ही देखते पूरे विश्व के लिए एक सुप्रीम टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में हिन्दुस्तान उभर सकता है। गरीब से गरीब को रोज़ी-रोटी देने का सामर्थ्य उसमें है। मैं आपसे आग्रह करता हूँ, हमारे होटल-मोटल एसोसिएशन के लोग अगर चाहें तो उनके हर क्लाइंट को रोज-रोज अपने रूम के विडियो पर हिन्दुस्तान का नजारा दिखा सकते हैं..! लोग आएंगे, टूरिज्म बढ़ेगा और इन दिनों बढ़ रहा है। बहुत बड़ी मात्रा में विदेश से लोग टूरिस्ट के रूप में हिन्दुस्तान आ रहे है, गुजरात भी आ रहे हैं। मित्रों, गरीब से गरीब लोगों को रोजी-रोटी देने की ताकत इस क्षेत्र में है, इसको बढ़ावा देने का हमारा प्रयास है। भारत का एवरेज जो टूरिज्म ग्रोथ है, उससे गुजरात का टूरिज्म ग्रोथ अनेक गुना ज्यादा होने लगा है। लेकिन उसको हमें और आगे बढ़ाना है। मैं आपको निमत्रंण देता हूँ कि आप इसमें सहयोग दीजिए।

मैं फिर एक बार शिकागो में बैठे हुए मेरे भाइयो-बहनों, न्यू जर्सी में बैठे हुए मेरे भाइयों-बहनों, अमरिका के भिन्न-भिन्न भागों में टी.वी. के माध्यम से इस लाइव कार्यक्रम को देख रहे मेरे भाइयो-बहनों, कनाडा में भी अनेक हिस्सों में देख रहे हैं और भाइयो-बहनों, भारत में भी मैं अभी जब आपके सामने बोल रहा हूँ, हिन्दुस्तान की बीस लीडिंग टीवी चैनल्स आपके इस कार्यक्रम को लाइव टेलिकास्ट कर रही है। पूरा हिन्दुस्तान भी इस कार्यक्रम को देख रहा है और इस अर्थ में ‘ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी’ का ये प्रयास अभिनंदनीय है, सराहनीय है। सभी समाज के लोग जुड़ें, अपने दायरे से ऊपर उठ कर के सबको जोड़ें, अधिकतम, जितने भी समाज हमारे विश्व में फैले हुए हैं, सबको जोड़ें। ‘भारत एकता’ का एक माहौल हम बनाएं और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का सपना ले कर के हम कैसे आगे बढ़ें..! विश्व में फैले हुए हम सभी भारतीय ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’, इस मंत्र को लेकर के आगे बढ़ें और स्वामी विवेकानंद जी को सच्ची श्रद्धांजलि दें, इसी एक अपेक्षा के साथ, आप लोगों ने मेरा सम्मान किया, ये सम्मान गुजरात की जनता का है, ये विजय गुजरात की जनता का है, ये विजय विकास के प्रयासों का है, ये विजय विकास के मंत्र का है और आपके कारण इस काम को करने की और नई ताकत मिलेगी और नया हौसला बुलंद होगा। फिर एक बार मित्रों, मैं आप सबका बहुत-बहुत आभारी हूँ, ओवरसिज फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी का, सभी आर्ग्रेनाइजर्स का, समाज के सभी लोगों का जो भी योगदान मिला है उन सबका मैं आभार व्यक्त करते हुए आपको निमंत्रण देता हूँ कि गुजरात आपका है, जब मन मर्जी पड़े आइए, अपना भाग्य अजमाइए, गुजरात का मजा लिजीए, गुजरात का टूरिज्म देखिए, हमारे शेर देखिए, दुनिया में जाकर के गुजरात के लायन का परिचय करवाइए, इसी अपेक्षा के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद..!

वंदे मातरम्..!

भारत माता की जय..!

य हिन्द..!

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भारत के सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम ने खेती से लेकर मॉडर्न इनोवेटर्स तक, सभी की बहुत मदद की है: पीएम मोदी
हमारे न्यूक्लियर साइंटिस्ट्स ने एक और बड़ी कामयाबी के साथ भारत का गौरव बढ़ाया है, क्योंकि तमिलनाडु के कलपक्कम में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकैलिटी हासिल कर ली है: पीएम मोदी
मैं उन सभी को बधाई देता हूँ, जिन्होंने भारत के न्यूक्लियर प्रोग्राम में अपना कीमती योगदान दिया है: पीएम मोदी
भारत की विंड एनर्जी बनाने की कैपेसिटी अब 56 गीगावाट से ज्यादा हो गई है। पिछले एक साल में ही, लगभग 6 गीगावाट की नई कैपेसिटी जोड़ी गई है: पीएम मोदी
आज दुनिया जिस तनाव और टकराव से गुजर रही है, उसके बीच बुद्ध की शिक्षाएं और भी जरूरी हो गई हैं: पीएम मोदी
इस साल की बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी भी बहुत यादगार रही। एयरफोर्स, आर्मी, नेवी और CAPF बैंड ने शानदार परफॉरमेंस दी: पीएम मोदी
पहली बार, बीटिंग रिट्रीट का म्यूजिक WAVES OTT पर भी उपलब्ध है: पीएम मोदी
जब हम नेचर को समझते हैं, उसका सम्मान करते हैं और उसके साथ तालमेल बिठाकर रहते हैं, तो बदलाव साफ दिखता है: पीएम मोदी
आज, पूरे नॉर्थईस्ट में बाँस सेक्टर फल-फूल रहा है। लोग लगातार इसमें नए-नए बदलाव कर रहे हैं और इसकी वैल्यू बढ़ा रहे हैं: पीएम मोदी
मैं आप सभी से www.abhilekh-patal.in पर जाने का आग्रह करता हूँ। इससे आपको हमारे इतिहास का एक शानदार अनुभव मिलेगा: पीएम मोदी
हर साल देश भर से लगभग 6 लाख स्टूडेंट मैथमेटिकल ओलंपियाड प्रोग्राम में हिस्सा लेते हैं: पीएम मोदी
राष्ट्रीय जनगणना सिर्फ सरकारी काम नहीं है। यह हम सभी की जिम्मेदारी है: पीएम मोदी
आज, भारतीय चीज़ दुनिया भर में अपनी पहचान बना रहा है। चाहे ब्रेकफास्ट हो, लंच हो या डिनर, भारत का स्वाद दुनिया की थाली तक पहुँच रहा है: पीएम मोदी
कुछ ही दिनों में, 9 मई को, 'पोच्चीशे बोइशाख' के मौके पर, हम गुरुदेव टैगोर की जयंती मनाएंगे: पीएम मोदी

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार | ‘मन की बात’ के एक और episode में आप सबसे जुड़कर खुशी हो रही है | इधर, बीच, चुनाव की भागदौड़ रही है, लेकिन आपके पत्रों और संदेशों के माध्यम से हमने देश और देशवासियों की उपलब्धियों पर एक-दूसरे से अपनी खुशियाँ साझा भी की हैं | इस बार ‘मन की बात’ की शुरुआत देश की एक ऐसी ही बहुत बड़ी उपलब्धि से करते हैं |

साथियो, भारत ने विज्ञान को हमेशा देश की प्रगति से जोड़कर देखा है | इसी सोच के साथ हमारे वैज्ञानिक Civil Nuclear Programme को आगे बढ़ा रहे हैं | उनके प्रयासों से यह कार्यक्रम राष्ट्र निर्माण में अहम् योगदान दे रहा है | इससे हमारी industrial growth को, energy sector को, healthcare sector को बहुत लाभ हुआ है | खेती किसानी से लेकर आधुनिक innovators को भी भारत के Civil Nuclear Programme ने बहुत मदद की है | साथियो, कुछ ही दिन पहले, हमारे Nuclear Scientist ने एक और बड़ी उपलब्धि से भारत का गौरव बढ़ाया है | तमिलनाडु के कलपक्कम में Fast Breeder Reactor ने Criticality हासिल कर ली है | दरअसल, Criticality वह stage है, जिसमें reactor पहली बार self sustaining nuclear chain reaction में सफलता हासिल करता है | इस stage का मतलब है reactor का operation phase में पहुंचना | भारत की nuclear energy journey में यह एक ऐतिहासिक milestone है | और बड़ी बात ये भी कि परमाणु reactor पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित है |

साथियो, इसे Breeder Reactor क्यों कहते हैं? इसके पीछे भी एक वजह है | यह एक ऐसा system है, जो ऊर्जा के उत्पादन के साथ-साथ भविष्य के लिए नया ईंधन भी खुद ही तैयार करता है | साथियो, मुझे मार्च 2024 का वह समय भी याद है, जब मैं कलपक्कम में reactor की core loading का साक्षी बना था | मैं उन सभी को बधाई देता हूँ, जिन्होंने, भारत के परमाणु कार्यक्रम में अपना अमूल्य योगदान दिया है | देशवासियों का जीवन बेहतर और आसान बनाने के लिए उनका यह प्रयास बहुत ही सराहनीय है | इससे विकसित भारत के हमारे संकल्प को भी एक नई ऊर्जा मिलेगी |

मेरे प्यारे देशवासियो ‘मन की बात’ में आज मैं एक ऐसी शक्ति की बात करना चाहता हूँ, जो अदृश्य है, लेकिन, जिसके बिना हमारा जीवन एक पल भी ना चले | यही ताकत भारत को आगे बढ़ा रही है | यह हमारी पवन-शक्ति है | हमारे प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है –

‘वायुर्वा इति व्यष्टि:, वायुरवै समष्टि:|’  

अर्थात् वायु सिर्फ एक तत्व नहीं है, यह जीवन की ऊर्जा है, यह समष्टि की शक्ति है |

साथियो, आज यही पवन-शक्ति भारत के विकास की नई कहानी लिख रही है | भारत ने हाल ही में पवन-ऊर्जा यानि Wind Energy में बड़ी उपलब्धि हासिल की है | अब भारत का wind energy generation capacity 56 gigawatt से अधिक हो चुकी है | पिछले एक साल में ही करीब 6 gigawatt नई क्षमता जुड़ी है | Wind energy में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और दुनिया भी हमारी तरफ देख रही है | साथियो, आज भारत, wind energy capacity में दुनिया में चौथे स्थान पर है | यह हमारे इंजीनियरों की मेहनत है, यह हमारे युवाओं का परिश्रम है, यह देशी की सामूहिक इच्छाशक्ति का प्रतीक है |

साथियो, गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान देश के अनेक राज्य इस sector में अपना परचम लहरा रहे हैं | गुजरात के कच्छ, पाटन, बनासकांठा जैसे क्षेत्र जहाँ पहले सिर्फ रेगिस्तान नजर आता था, आज वहाँ, बड़े renewable energy park बन रहे हैं | इसका लाभ युवाओं को मिल रहा है, नए अवसर बन रहे हैं, नई skills विकसित हो रही हैं, रोजगार के नए रास्ते खुल रहे हैं | साथियो, भारत के विकास के लिए सौर और पवन ऊर्जा जरूरी हैं | ये सिर्फ पर्यावरण की बात नहीं है - ये हमारे भविष्य की सुरक्षा है | इसमें हम सबकी भूमिका है | हमें बिजली बचानी है, हमें स्वच्छ ऊर्जा, clean energy अपनानी है | देश में हर स्तर पर ऐसे प्रयास जरूरी हैं | क्योंकि इन्हीं से बड़ा बदलाव आता है |

साथियो, मई महीने की शुरुआत एक पावन अवसर के साथ होने जा रही है | कुछ ही दिनों में हम बुद्ध पूर्णिमा मनाएंगे | मैं आप सभी देशवासियों को अपनी अग्रिम शुभकामनाएं देता हूँ | भगवान गौतम बुद्ध का जीवन संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है | उन्होंने हमें सिखाया है कि शांति हमारे भीतर से शुरू होती है, उन्होंने बताया है कि स्वयं पर विजय सबसे बड़ी विजय होती है | आज दुनिया जिस तरह के तनावों और संघर्षों से गुजर रही है | ऐसे समय में बुद्ध के विचार और भी अहम हो गए हैं | साथियो, दक्षिण अमेरिका के चिली में एक संस्था भगवान बुद्ध के विचारों को आगे बढ़ा रही है | लद्दाख में जन्मे ड्रबपोन ओत्जर रिनपोचे (Drubpon Otzer Rinpoche) के मार्गदर्शन में काम हो रहा है | ये संस्था ध्यान और करुणा को लोगों के जीवन से जोड़ रही है   | कोचीगुआज घाटी में बना स्तूप लोगों को शांति का अनुभव कराता है | वाकई, यह देखकर गर्व होता है | भारत की प्राचीन धारा दुनिया तक पहुँच रही है | दूर-दराज के लोग भी इससे जुड़ रहे हैं |

साथियो, बौद्ध परंपरा हमें प्रकृति से जुड़ना भी सिखाती है | भगवान बुद्ध को ज्ञान एक वृक्ष के नीचे मिला था | प्रकृति हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है | देश में भी ऐसे प्रयास हो रहे हैं | कर्नाटक में Karma Monastery इसका अच्छा उदाहरण है | यह मठ एक जीवंत वन क्षेत्र है, जो, 100 एकड़ में फैला है | इस वन में 700 से अधिक देसी वृक्षों को संरक्षित किया गया है | साथियो, बुद्ध का संदेश सिर्फ अतीत नहीं है | यह आज भी प्रासंगिक है और भविष्य के लिए भी जरूरी है | बुद्ध पूर्णिमा का यह अवसर प्रेरणा देता है | हम अपने जीवन में शांति बढ़ाएँ, करुणा अपनाएं और संतुलन के साथ आगे बढ़ें |

मेरे प्यारे देशवासियो, आप सभी जानते हैं, हमारे देश में अब 23 जनवरी, यानि, नेताजी सुभाष की जयंती से लेकर 30 जनवरी, यानि, गांधी जी की पुण्यतिथि तक गणतंत्र का महोत्सव मनाया जाता है | इसी महोत्सव का अहम हिस्सा होता है – Beating Retreat. आज मैं आपसे Beating Retreat की चर्चा कर रहा हूँ, क्योंकि, इसके पीछे एक खास वजह है | साथियो, आपने देखा होगा, यह समारोह अलग-अलग bands की विविध संगीत परंपराओं को दर्शाता है | बीते कुछ सालों से इसमें भारतीय संगीत का समावेश बढ़ा है और ये देश के लोगों को भी बहुत पसंद आ रहा है | इस साल की Beating Retreat ceremony भी बहुत यादगार रही थी | Air Force, Army, Navy और C.A.P.F के bands ने बहुत ही अच्छी performance दी थी |

साथियो, शानदार Music के साथ-साथ जानदार formations का ये कार्यक्रम, सबका ध्यान खींचता है | Air Force band ने सिंदूर formation बनाया | Naval Band ने मत्स्य यंत्र formation बनाया | वहीं, Army Band के performance में वंदे-मातरम् के 150 साल और cricket में भारत की सफलता को भी दर्शाया गया | साथियो, Beating Retreat के बीत जाने के बाद, ये सारी मेहनत, ये उपलब्धि धीरे-धीरे ओझल हो जाती थी, लेकिन, अब इसे लेकर बहुत ही अच्छा प्रयास हुआ है | Beating Retreat का music पहली बार WAVES OTT पर भी उपलब्ध है | आने वाले समय में यह दूसरे platforms पर भी मौजूद होगा - आप इसे जरूर सुनें | आपको अपनी Armed Forces और उनकी परंपराओं पर बहुत गर्व होगा |

साथियो, पिछले कुछ वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रकृति के संरक्षण की प्रेरक कहानियाँ सामने आई हैं | ये कहानियाँ हमें उम्मीद देती हैं और गर्व से भर देती हैं | मैं ‘मन की बात’ के श्रोताओं से कुछ उदाहरण साझा करना चाहता हूँ | इनको सुनकर आपका मन प्रसन्न हो जाएगा | पहले, बात कच्छ के रण की | बरसात खत्म होते ही यहां की धरती जीवंत हो जाती है | हर साल लाखों Flamingo यहां आते हैं | पूरा इलाका गुलाबी रंग से रंग जाता है, इसलिए इसे ‘Flamingo City’ कहा जाता है | ये पक्षी यहीं घोसलें बनाते हैं और अपने बच्चों को बड़ा करते हैं | कच्छ के लोग इन्हें ‘लाखा जी के बाराती’ कहते हैं | अब लाखा जी के ये बाराती कच्छ में पर्यावरण संरक्षण के बड़े सुंदर प्रतीक बन गए हैं|

साथियो, दूसरा किस्सा इंसान और वन्य-जीवों के सहयोग का है | और ये उत्तर प्रदेश से है | यहां के तराई इलाकों में फसल के समय हाथियों के झुंड गाँव की ओर आते हैं | इससे टकराव की आशंका बढ़ती है | लेकिन, अब यू.पी. में भी ‘गज मित्र’ जैसे प्रयास शुरू हुए हैं | गाँव के लोग ही टीम बनाकर हाथियों पर नजर रखते हैं | वे समय रहते लोगों को सतर्क करते हैं | इससे टकराव कम हो रहा है और लोगों में भरोसा बढ़ रहा है |

साथियो, मध्य भारत से भी एक अच्छी खबर आई है | छत्तीसगढ़ में blackbuck, यानि, काले हिरण फिर से दिखाई देने लगे हैं | एक समय इनकी संख्या बहुत कम हो गई थी, लेकिन लगातार प्रयास हुए, और संरक्षण बढ़ाया गया - आज ये फिर से खुले मैदानों में दौड़ते नजर आते हैं | यह हमारी खोती विरासत की वापसी है | ऐसी ही उम्मीद Great Indian bustard यानि गोडावण के संरक्षण में भी दिख रही है | ये पक्षी हमारे रेगिस्तानी इलाकों की पहचान हुआ करती थी | लेकिन, एक समय इसकी संख्या बहुत कम रह गई थी | हालत ये थी कि ये पक्षी लुप्त होने की कगार पर पहुँच गई थी | लेकिन अब इसके संरक्षण के लिए बड़ा अभियान चल रहा है | वैज्ञानिक तरीके अपनाए जा रहे हैं | प्रजनन केंद्र बनाए गए हैं और अब नए जीवन की शुरुआत दिखाई दे रही है |

साथियो, प्रकृति और मानव अलग नहीं हैं | हम एक-दूसरे के साथी हैं | जब हम प्रकृति को समझते हैं, उसका सम्मान करते हैं और उसके साथ मिलकर चलते हैं, तो बदलाव साफ दिखाई देता है | आज यही बदलाव देश के कोने-कोने से नई उम्मीद बनकर सामने आ रहा है |        

मेरे प्यारे देशवासियो, Northeast हम सब के लिए अष्टलक्ष्मी है | यहां भरपूर talent है और Northeast की प्राकृतिक सुंदरता भी सबका ध्यान खींचती है | ‘मन की बात’ में भी हम अक्सर Northeast के लोगों की उपलब्धियों पर चर्चा करते आए हैं | आज ऐसी ही एक और उपलब्धि की मैं आपसे चर्चा करूंगा और वो है - Bamboo sector में Northeast की सफलता | साथियो, जिस चीज को कभी बोझ के रूप में देखा जाता था, वह आज रोजगार, कारोबार और innovation को नई गति दे रही है | हमारी माताएं-बहनें इसकी सबसे बड़ी लाभार्थी हैं | आपको ये जानकर हैरानी होगी कि bamboo की परिभाषा बदल देने से कितना बड़ा परिवर्तन आया है | साथियो, अंग्रेजों के बनाए कानून के हिसाब से bamboo को पेड़ के रूप में परिभाषित किया गया था और इससे जुड़े नियम बहुत कड़े थे | कहीं पर भी bamboo को ले जाना बहुत मुश्किल था | ऐसे में यहां के लोग बांस से जुड़े काम-धंधे से दूर होते गए | साथियो, साल 2017 में कानून में बदलाव करके हमने bamboo को पेड़ की category से बाहर किया | जिसके नतीजे सबके सामने हैं | आज पूरे Northeast में bamboo sector फल-फूल रहा है | लोग लगातार innovation करके इसमें value addition कर रहे हैं |

साथियो, त्रिपुरा के गोमती district के बिजॉय सूत्रधार और south त्रिपुरा के प्रदीप चक्रवर्ती उन्हीं की बात करें | इन्होंने नए कानूनों को अपने लिए एक बड़े अवसर के रूप में देखा | फिर इन्होंने अपने काम को technology से जोड़ा | आज वे पहले से कहीं बेहतर और कहीं ज्यादा बांस के उत्पाद बना रहे हैं |

नागालैंड के दीमापुर और आसपास के इलाकों में कई ऐसे Self Help Groups हैं जिन्होंने bamboo से जुड़े food products में value addition किया है | वहां खोरोलो क्रिएटिव क्राफ्ट जैसी टीमें भी हैं, जो, बांस के furniture और handicrafts  पर काम कर रही हैं | साथियो, मिज़ोरम के मामित जिले में ऐसी टीमें हैं, जो, बांस के tissue culture और poly-house management पर काम कर रही हैं | मुझे सिक्किम में गंगटोक के करीब Lagastal Bamboo Enterprise Team के बारे में भी पता चला है | यह bamboo से handicrafts, अगरबत्ती sticks, furniture और interior decor items बनाती है |

साथियो, मैंने यहां पर कुछ ही उदाहरण दिए हैं | देश में bamboo sector की सफलता की यह list काफी लंबी है | मैं आप सभी से आग्रह करूंगा कि Northeast का कोई-न-कोई बांस का उत्पाद जरूर खरीदें | आप इसे gift के रूप में भी दे सकते हैं | आपके इस प्रयास से उन लोगों का हौसला बढ़ेगा, जो bamboo products को बनाने में अपना पसीना बहाते हैं |

मेरे प्यारे देशवासियो, तेजी से बदलते हुए इस समय में technology हमारी ज़िंदगी का बहुत बड़ा हिस्सा बन गई है | आज हम अपने अतीत को वर्तमान से जोड़ने में भी technology का कमाल देख रहें हैं | इस दिशा में हाल ही में एक ऐसा development हुआ है जिससे शिक्षा से जुड़े लोग और इतिहास में रुचि रखने वाले बहुत खुश हुए हैं | साथियो, कुछ दिन पहले ही National Archives of India ने एक विशेष portal पर एक अनोखा database शेयर किया है | इस संस्था ने 20 करोड़ से भी ज्यादा अमूल्य दस्तावेजों को digitize कर सार्वजनिक किया है | इनमें से कुछ तो बहुत ही दिलचस्प हैं - 7वीं शताब्दी की गिलगित पांडुलिपियाँ भोजपत्र पर लिखी हुई हैं | यहाँ आपको 8वीं शताब्दी का एक रोचक ग्रंथ श्री भुवालय भी देखने को मिलेगा | अंकों पर आधारित यह ग्रंथ एक grid के रूप में है | रानी लक्ष्मीबाई से जुड़े कुछ अहम् पत्र भी आप यहाँ देख सकते हैं | इनसे 1857 में उनके द्वारा लिए गए कुछ निर्णयों का पता चलता है; जो उनके पराक्रम को दर्शाते हैं | जो लोग नेताजी सुभाष के बड़े प्रशंसक हैं उनके लिए यहाँ नेताजी के जीवन, आजाद हिन्द फौज और उनकी speech से जुड़े कई documents हैं | आपको पंडित मदन मोहन मालवीय जी उनसे जुड़े कई documents भी मिलेंगे | इनमें BHU की स्थापना और हिन्दी साहित्य सम्मेलन से जुड़ी अहम् जानकारियाँ हैं | यहाँ हमारे संविधान सभा से जुड़े कई अनोखे दस्तावेज भी उपलब्ध हैं | मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ कि आप www.abhilekh-patal.in को जरूर visit करें | यह आपको अपने इतिहास का अद्भुत अनुभव देगा |

साथियो, जरा कल्पना कीजिए, आप दुनिया-भर के सबसे प्रतिभाशाली लोगों के बीच हैं, आपके पास गणित के बहुत ही कठिन सवाल हैं | इन्हें सुलझाने के लिए समय है – केवल साढ़े चार घंटे | यानि वक्त बहुत कम है और competition international है, बहुत तगड़ा है | ऐसी स्थिति में nervous होना बहुत स्वाभाविक है | लेकिन इन्हीं परिस्थितियों में हमारी बेटियों ने कमाल कर दिया | इस महीने की शुरुआत में फ़्रांस के बोरदो (Bordeaux) में European Girls Mathematical Olympiad का आयोजन हुआ था | Maths में गहरी रुचि रखने वाली स्कूली छात्राओं के लिए ये एक बड़ी प्रतियोगिता थी | यह दुनिया की सबसे सम्मानित प्रतियोगिताओं में से एक है | इस Olympiad में हमारी बेटियों ने अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया | मुझे इस प्रतिभाशाली टीम पर बहुत गर्व है | इसमें मुंबई की श्रेया मुंधड़ा, तिरुवनंतपुरम की संजना चाको, चेन्नई की शिवानी भरत कुमार और कोलकाता की श्रिमोयी बेरा शामिल थीं | इसमें हमारी टीम विश्व में छठे स्थान पर रही | श्रेया ने Gold Medal जीतकर इतिहास रच दिया, संजना ने Silver, तो शिवानी ने Bronze Medal अपने नाम किया |

साथियो, इस Olympiad के लिए भारत में जो selection की प्रक्रिया है, वो अपने आप में बहुत कठिन है | इसका एक multi-stage selection process है | इसमें Regional, State और National Level पर कठिन चुनौतियों को पार करना होता है | इसके बाद सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली छात्राएँ एक महीने के Mathematics Training Camp में शामिल होती हैं | यह camp Tata Institute of Fundamental Research के Homi Bhabha Center for Science Education में आयोजित होता है | इस camp के आखिर में team selection test होता है | इसमें performance के आधार पर ही भारत की टीम चुनी जाती है |

साथियो, हर वर्ष देश-भर की करीब 6 लाख students इस Mathematical Olympiad Program में हिस्सा लेती हैं | समय के साथ यह संख्या लगातार बढ़ रही है, यानि, देश की बेटियों के बीच Olympiad का यह culture तेजी से लोकप्रिय हो रहा है | इन होनहार बेटियों को support करने के लिए मैं उनके parents की भी सराहना करता हूँ |

मेरे प्यारे देशवासियो, हमारे देश में इस समय एक बहुत अहम् अभियान चल रहा है, जिसके बारे में हर भारतीय को जानकारी होनी जरूरी है | ये है जनगणना का अभियान, यह दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना है | साथियो, जो साथी पहले से इस तरह की प्रक्रिया से गुजरे हैं, इस बार जनगणना का उनका अनुभव, अलग होने वाला है | जनगणना 2027 को digital बनाया गया है | सारी जानकारी सीधे digital माध्यम में दर्ज हो रही है | घर-घर जाने वाले कर्मचारियों के पास mobile app है | वे आपसे बात करके उसी में जानकारी दर्ज करेंगे | साथियो, इस बार जनगणना में आपकी भागीदारी भी आसान बनाई गई है, आप खुद भी अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं | कर्मचारी के आने से 15 दिन पहले आपके लिए सुविधा शुरू होगी | आप अपने समय के अनुसार जानकारी भर सकते हैं | जब आप प्रक्रिया पूरी करते हैं, तो आपको एक विशेष ID मिलती है | ये ID आपके mobile या e-mail पर आती है | बाद में जब कर्मचारी आपके घर आता है, तो आप यही ID दिखाकर जानकारी की पुष्टि कर सकते हैं | इससे दोबारा जानकारी देने की जरूरत नहीं पड़ती | समय भी बचता है और प्रक्रिया आसान हो जाती है | साथियो, जिन राज्यों में स्व-गणना का काम पूरा हो गया है, वहां, गणना कर्मचारी द्वारा घरों के सूचीकरण का कार्य भी शुरू कर दिया गया है | अब तक लगभग 1 करोड़ 20 लाख परिवारों का मकान सूचीकरण का कार्य पूरा भी हो चुका है | साथियो, देश की जनगणना सिर्फ सरकारी काम नहीं है | यह हम सब की जिम्मेदारी है | आपकी भागीदारी बहुत जरूरी है | आपकी दी गई जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहती है, यह गोपनीय रखी जाती है, digital सुरक्षा के साथ इसे सुरक्षित किया जाता है | आइए, हम सब मिलकर इस प्रक्रिया में भाग लें | जनगणना 2027 को सफल बनाएं |

साथियो, हमारे देश में खाने-पीने की परंपरा सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं रही है | इसी परंपरा का एक दिलचस्प हिस्सा है भारत की Cheese.  कुछ दिन पहले मैंने tweet के माध्यम से एक जानकारी साझा की थी | ब्राजील में आयोजित एक अन्तर्राष्ट्रीय Cheese प्रतियोगिता में भारतीय Cheese के दो brands को प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले हैं | इस उपलब्धि की चर्चा social media पर भी खूब हुई | कई लोगों ने मुझसे कहा कि भारत में Cheese की जो विविधता है उस पर भी बात होनी चाहिए |

साथियो, भारत के dairy sector में बहुत बड़ा बदलाव आ रहा है | इस sector में Value addition ने हमारे पारंपरिक स्वाद को एक नई पहचान दी है | आज भारतीय cheese दुनिया-भर में अपनी जगह बना रही है | breakfast हो, lunch हो, या dinner, दुनिया की प्लेटों में भारत का स्वाद पहुंच रहा है | जम्मू-कश्मीर की कलारी cheese को ही लीजिए - इसे ‘कश्मीर का मोजेरेला’ कहा जाता है | गुज्जर-बकरवाल समुदाय के लोग, पीढ़ियों से इसे बनाते और खाते आए हैं | वहीं सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में ‘छुरपी’ बहुत प्रसिद्ध है | पहाड़ों की सादगी और कोमलता इसके स्वाद में भी महसूस होती है | इस cheese की खास बात यह है कि इसे याक के दूध से बनाया जाता है |

साथियो, महाराष्ट्र और गुजरात में ‘टोपली नु पनीर’ जिसे ‘सुरती cheese’ भी कहा जाता है | वह भी अपनी एक अलग पहचान रखता है | मैंने यहां सिर्फ कुछ नाम लिए हैं लेकिन हमारे देश में स्वाद की यह दुनिया बहुत व्यापक है | आज इस परंपरा को नई ताकत मिल रही है | अनेक भारतीय कंपनियां इस क्षेत्र में निवेश कर रही हैं | आधुनिक तकनीक आ रही है, बेहतर packaging हो रही है और हमारे उत्पाद world standard के साथ आगे बढ़ रहे हैं | इसी का परिणाम है कि भारतीय cheese अब देश की सीमाओं से निकलकर दुनिया के बाजारों और रेस्तरां तक पहुंच रही है | आज हम local से global की बात करते हैं, उसमें भारतीय cheese का उदाहरण, हमें, आगे की दिशा दिखाता है | मुझे विश्वास है भारत का स्वाद, भारत की परंपरा और भारत की गुणवत्ता दुनिया के लोगों को एक नया अनुभव देगी और भारत से एक नया जुड़ाव भी बनाएगी |

मेरे प्यारे देशवासियो, इस महीने देश के कई हिस्सों में नववर्ष सहित अनेक पर्व-त्योहार मनाए गए | कुछ ही दिन बाद 9 मई को ‘पोच्चीशे बोइशाख’ के अवसर पर हम गुरुदेव टैगोर की जन्म-जयंती मनाएंगे | गुरुदेव बहु-आयामी व्यक्तित्व के धनी थे | वे एक महान लेखक और विचारक तो थे ही, उन्होंने कई प्रसिद्ध संस्थानों को भी आकार दिया | गुरुदेव टैगोर लोगों के लिए ऐसे उद्योगों के पक्षधर थे, जिनमें स्थायी रोजगार मिलने के साथ ही गांवों का भी कल्याण हो | उनके रवींद्र संगीत का प्रभाव आज भी दुनिया-भर में बना हुआ है | मेरे लिए शांति निकेतन की यात्राएं अविस्मरणीय रहीं | यह वही institution है, जिसे उन्होंने पूरे समर्पण भाव से सींचा और संवारा था | उन्हें एक बार फिर मेरी विनम्र श्रद्धांजलि |

साथियो, मई का महीना 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की याद भी दिलाता है | मैं मां भारती की सभी वीर संतानों को नमन करता हूं, जिन्होंने लोगों में देश-भक्ति की भावना जागृत की थी | यह समय स्कूली बच्चों की छुट्टियों का भी होता है | मेरा आग्रह है कि वे अपनी छुट्टियों का भरपूर आनंद लें और कुछ नया सीखने का प्रयास करें | गर्मियों के इस मौसम में आप सभी अपने स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखें | अगले महीने आपसे फिर मुलाकात होगी | कुछ नए विषयों के साथ, देशवासियों की कुछ नई उपलब्धियों के साथ | बहुत-बहुत धन्यवाद |