भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 370 और 35 (ए) को निरस्त करने पर 11 दिसंबर को ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में भारत की संप्रभुता और अखंडता को बरकरार रखा है, जिसे प्रत्येक भारतीय द्वारा सदैव संजोया जाता रहा है। सुप्रीम कोर्ट का यह कहना पूरी तरह से उचित है कि 5 अगस्त 2019 को हुआ निर्णय संवैधानिक एकीकरण को बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया था, न कि इसका उद्देश्य विघटन था। सर्वोच्च न्यायालय ने इस तथ्य को भी भलीभांति माना है कि अनुच्छेद 370 का स्‍वरूप स्थायी नहीं था।

जम्मू, कश्मीर और लद्दाख की खूबसूरत और शांत वादियां, बर्फ से ढके पहाड़, पीढ़ियों से कवियों, कलाकारों और हर भारतीय के दिल को मंत्रमुग्ध करते रहे हैं। यह एक ऐसा अद्भुत क्षेत्र है जो हर दृष्टि से अभूतपूर्व है, जहां हिमालय आकाश को स्पर्श करता हुआ नजर आता है, और जहां इसकी झीलों एवं नदियों का निर्मल जल स्वर्ग का दर्पण प्रतीत होता है। लेकिन पिछले कई दशकों से जम्मू-कश्मीर के अनेक स्थानो पर ऐसी हिंसा और अस्थिरता देखी गई, जिसकी कल्‍पना तक नहीं की जा सकती। वहां के हालात कुछ ऐसे थे, जिससे जम्मू-कश्मीर के परिश्रमी, प्रकृति प्रेमी और स्नेह से भरे लोगों को कभी भी रू-ब-रू नहीं होना चाहिए था।

लेकिन दुर्भाग्यवश, सदियों तक उपनिवेश बने रहने, विशेषकर आर्थिक और मानसिक रूप से पराधीन रहने के कारण, तब का समाज एक प्रकार से भ्रमित हो गया। अत्‍यंत बुनियादी विषयों पर स्पष्ट नजरिया अपनाने के बजाय दुविधा की स्थिति बनी रही जिससे और ज्यादा भ्रम उत्‍पन्‍न हुआ। अफसोस की बात यह है कि जम्मू-कश्मीर को इस तरह की मानसिकता से व्‍यापक नुकसान हुआ।

देश की आजादी के समय तब के राजनीतिक नेतृत्व के पास राष्ट्रीय एकता के लिए एक नई शुरुआत करने का विकल्प था। लेकिन तब इसके बजाय उसी भ्रमित समाज का दृष्टिकोण जारी रखने का निर्णय लिया गया, भले ही इस वजह से दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों की अनदेखी करनी पड़ी।

मुझे अपने जीवन के शुरुआती दौर से ही जम्मू-कश्मीर आंदोलन से जुड़े रहने का अवसर मिला है। मेरी अवधारणा सदैव ही ऐसी रही है जिसके अनुसार जम्मू-कश्मीर महज एक राजनीतिक मुद्दा नहीं था, बल्कि यह विषय समाज की आकांक्षाओं को पूरा करने के बारे में था। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को नेहरू मंत्रिमंडल में एक महत्वपूर्ण विभाग मिला हुआ था और वे काफी लंबे समय तक सरकार में बने रह सकते थे। फिर भी, उन्होंने कश्मीर मुद्दे पर मंत्रिमंडल छोड़ दिया और आगे का कठिन रास्ता चुना, भले ही इसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। लेकिन उनके अथक प्रयासों और बलिदान से करोड़ों भारतीय कश्मीर मुद्दे से भावनात्मक रूप से जुड़ गए।

कई वर्षों बाद अटल जी ने श्रीनगर में एक सार्वजनिक बैठक में ‘इंसानियत’, ‘जम्हूरियत’ और ‘कश्मीरियत’ का प्रभावशाली संदेश दिया, जो सदैव ही प्रेरणा का महान स्रोत भी रहा है।

मेरा हमेशा से दृढ़ विश्वास रहा है कि जम्मू-कश्मीर में जो कुछ हुआ था, वह हमारे राष्ट्र और वहां के लोगों के साथ एक बड़ा विश्वासघात था। मेरी यह भी प्रबल इच्छा थी कि मैं इस कलंक को, लोगों पर हुए इस अन्याय को मिटाने के लिए जो कुछ भी कर सकता हूँ, उसे जरूर करूँ। मैं हमेशा से जम्मू-कश्मीर के लोगों की पीड़ा को कम करने के लिए काम करना चाहता था।

सरल शब्दों में कहें तो, अनुच्छेद 370 और 35 (ए) जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के सामने बड़ी बाधाओं की तरह थे। ये अनुच्छेद एक अटूट दीवार की तरह थे तथा गरीब,वंचित, दलितों-पिछड़ों-महिलाओं के लिए पीड़ादायक थे। अनुच्छेद 370 और 35(ए) के कारण जम्मू-कश्मीर के लोगों को वह अधिकार और विकास कभी नहीं मिल पाया, जो उनके साथी देशवासियों को मिला। इन अनुच्छेदों के कारण, एक ही राष्ट्र के लोगों के बीच दूरियां पैदा हो गईं। इस दूरी के कारण, हमारे देश के कई लोग, जो जम्मू-कश्मीर की समस्याओं को हल करने के लिए काम करना चाहते थे, ऐसा करने में असमर्थ थे, भले ही उन लोगों ने वहां के लोगों के दर्द को स्पष्ट रूप से महसूस किया हो।

एक कार्यकर्ता के रूप में, जिसने पिछले कई दशकों से इस मुद्दे को करीब से देखा हो, वो इस मुझे मुद्दे की बारीकियों और जटिलताओं से भली-भांति परिचित था। मैं एक बात को लेकर बिल्कुल स्पष्ट था- जम्मू-कश्मीर के लोग विकास चाहते हैं तथा वे अपनी ताकत और कौशल के आधार पर भारत के विकास में योगदान देना चाहते हैं। वे अपने बच्चों के लिए जीवन की बेहतर गुणवत्ता चाहते हैं, एक ऐसा जीवन जो हिंसा और अनिश्चितता से मुक्त हो।

इस प्रकार, जम्मू-कश्मीर के लोगों की सेवा करते समय, हमने तीन बातों को प्रमुखता दी- नागरिकों की चिंताओं को समझना, सरकार के कार्यों के माध्यम से आपसी-विश्वास का निर्माण करना तथा विकास, निरंतर विकास को प्राथमिकता देना।

मुझे याद है, 2014 में, हमारे सत्ता संभालने के तुरंत बाद, जम्मू-कश्मीर में विनाशकारी बाढ़ आई थी, जिससे कश्मीर घाटी में बहुत नुकसान हुआ था। सितंबर 2014 में, मैं स्थिति का आकलन करने के लिए श्रीनगर गया और पुनर्वास के लिए विशेष सहायता के रूप में 1000 करोड़ रुपये की घोषणा भी की। इससे लोगों में ये संदेश भी गया कि संकट के दौरान हमारी सरकार वहां के लोगों की मदद के लिए कितनी संवेदनशील है। मुझे जम्मू-कश्मीर में विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से मिलने का अवसर मिला है और इन संवादों में एक बात समान समान रूप से उभरती है - लोग न केवल विकास चाहते हैं, बल्कि वे दशकों से व्याप्त भ्रष्टाचार से भी मुक्ति चाहते हैं। उस साल मैंने जम्मू-कश्मीर में जान गंवाने वाले लोगों की याद में दीपावली नहीं मनाने का फैसला किया। मैंने दीपावली के दिन जम्मू-कश्मीर में मौजूद रहने का भी फैसला किया।

जम्मू एवं कश्मीर की विकास यात्रा को और मजबूती प्रदान करने के लिए हमने यह तय किया कि हमारी सरकार के मंत्री बार-बार वहां जायेंगे और वहां के लोगों से सीधे संवाद करेंगे। इन लगातार दौरों ने भी जम्मू एवं कश्मीर में सद्भावना कायम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मई 2014 से मार्च 2019 के दौरान 150 से अधिक मंत्रिस्तरीय दौरे हुए। यह अपने आप में एक कीर्तिमान है। वर्ष 2015 का विशेष पैकेज जम्मू एवं कश्मीर की विकास संबंधी जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। इसमें बुनियादी ढांचे के विकास, रोजगार सृजन, पर्यटन को बढ़ावा देने और हस्तशिल्प उद्योग को सहायता प्रदान करने से जुड़ी पहल शामिल थीं।

हमने खेलशक्ति में युवाओं के सपनों को साकार करने की क्षमता को पहचानते हुए जम्मू एवं कश्मीर में इसका भरपूर सदुपयोग किया। विभिन्न खेलों के माध्यम से, हमने वहां के युवाओं की आकांक्षाओं और उनके भविष्य पर खेलों से जुड़ी गतिविधियों के परिवर्तनकारी प्रभाव को देखा। इस दौरान विभिन्न खेल स्थलों का आधुनिकीकरण किया गया, प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए और प्रशिक्षक उपलब्ध कराए गए। स्थानीय स्तर पर फुटबॉल क्लबों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाना इन सबमें एक सबसे अनूठी बात रही। इसके परिणाम शानदार निकले। मुझे प्रतिभाशाली फुटबॉल खिलाड़ी अफशां आशिक का नाम याद आ रहा है। वो दिसंबर 2014 में श्रीनगर में पथराव करने वाले एक समूह का हिस्सा थी, लेकिन सही प्रोत्साहन मिलने पर उसने फुटबॉल की ओर रुख किया, उसे प्रशिक्षण के लिए भेजा गया और उसने खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। मुझे ‘फिट इंडिया डायलॉग्स’ के एक कार्यक्रम के दौरान उसके साथ हुई बातचीत याद है, जिसमें मैंने कहा था कि अब ‘बेंड इट लाइक बेकहम’ से आगे बढ़ने का समय है क्योंकि अब यह ‘ऐस इट लाइक अफशां’ है। मुझे खुशी है कि अब तो अन्य युवाओं ने किकबॉक्सिंग, कराटे और अन्य खेलों में अपनी प्रतिभा दिखानी शुरू कर दी है।

पंचायत चुनाव भी इस क्षेत्र के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। एक बार फिर, हमारे सामने या तो सत्ता में बने रहने या अपने सिद्धांतों पर अटल रहने का विकल्प था। हमारे लिए यह विकल्प कभी भी कठिन नहीं था और हमने सरकार को गंवाने के विकल्प को चुनकर उन आदर्शों को प्राथमिकता दी जिनके पक्ष में हम खड़े हैं। जम्मू एवं कश्मीर के लोगों की आकांक्षाएं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। पंचायत चुनावों की सफलता ने जम्मू एवं कश्मीर के लोगों की लोकतांत्रिक प्रकृति को इंगित किया। मुझे गांवों के प्रधानों के साथ हुई एक बातचीत याद आती है। अन्य मुद्दों के अलावा, मैंने उनसे एक अनुरोध किया कि किसी भी स्थिति में स्कूलों को नहीं जलाया जाना चाहिए और स्कूलों की सुरक्षा की जानी चाहिए। मुझे यह देखकर खुशी हुई कि इसका पालन किया गया। आखिरकार, अगर स्कूल जलाए जाते हैं तो सबसे ज्यादा नुकसान छोटे बच्चों का होता है।

5 अगस्त का ऐतिहासिक दिन हर भारतीय के दिल और दिमाग में बसा हुआ है। हमारी संसद ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का ऐतिहासिक निर्णय पारित किया और तब से जम्मू, कश्मीर और लद्दाख में बहुत कुछ बदलाव आया है। न्यायिक अदालत का फैसला दिसंबर 2023 में आया है, लेकिन जम्मू, कश्मीर और लद्दाख में विकास की गति को देखते हुए जनता की अदालत ने चार साल पहले अनुच्छेद 370 और 35 (ए) को निरस्त करने के संसद के फैसले का जोरदार समर्थन किया है।

राजनीतिक स्तर पर, पिछले 4 वर्षों को जमीनी स्तर पर लोकतंत्र में फिर से भरोसा जताने के रूप में देखा जाना चहिये। महिलाओं, आदिवासियों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और समाज के वंचित वर्गों को उनका हक नहीं मिल रहा था। वहीं, लद्दाख की आकांक्षाओं को भी पूरी तरह से नजरअंदाज किया जाता था। लेकिन, 5 अगस्त 2019 ने सब कुछ बदल दिया। सभी केंद्रीय कानून अब बिना किसी डर या पक्षपात के लागू होते हैं, प्रतिनिधित्व भी पहले से अधिक व्यापक हो गया है। त्रिस्तरीय पंचायती राज प्रणाली लागू हो गई है, बीडीसी चुनाव हुए हैं, और शरणार्थी समुदाय, जिन्हें लगभग भुला दिया गया था, उन्हें भी विकास का लाभ मिलना शुरू हो गया है।

केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं ने शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया है, ऐसी योजनाओं में समाज के सभी वर्गों को शामिल किया गया है। इनमें सौभाग्य और उज्ज्वला योजनाएं शामिल हैं। आवास, नल से जल कनेक्शन और वित्तीय समावेशन में प्रगति हुई है। लोगों के लिए बड़ी चुनौती रही स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भी बुनियादी ढांचे का विकास किया गया है। सभी गांवों ने खुले में शौच से मुक्त-ओडीएफ प्लस का दर्जा प्राप्त कर लिया है। सरकारी रिक्तियां, जो कभी भ्रष्टाचार और पक्षपात का शिकार होती थीं, पारदर्शी और सही प्रक्रिया के तहत भरी गई हैं। आईएमआर जैसे अन्य संकेतकों में सुधार दिखा है। बुनियादी ढांचे और पर्यटन में बढ़ावा सभी देख सकते हैं। इसका श्रेय स्वाभाविक रूप से जम्मू-कश्मीर के लोगों की दृढ़ता को जाता है, जिन्होंने बार-बार दिखाया है कि वे केवल विकास चाहते हैं और इस सकारात्मक बदलाव के वाहक बनने के इच्छुक हैं। इससे पहले जम्मू, कश्मीर और लद्दाख की स्थिति पर सवालिया निशान लगा हुआ था। अब, रिकॉर्ड वृद्धि, रिकॉर्ड विकास, पर्यटकों के रिकॉर्ड आगमन के बारे में सुनकर लोगों को सुखद आश्चर्य होता है।

सुप्रीम कोर्ट ने 11 दिसंबर के अपने फैसले में 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को मजबूत किया है। इसने हमें याद दिलाया कि एकता और सुशासन के लिए साझा प्रतिबद्धता ही हमारी पहचान है। आज जम्मू, कश्मीर और लद्दाख में जन्म लेने वाले प्रत्येक बच्चे को साफ-सुथरा माहौल मिलता है, जिसमें वह जीवंत आकांक्षाओं से भरे अपने भविष्य को साकार कर सकता है। आज लोगों के सपने बीते समय के मोहताज नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाएं हैं। जम्मू और, कश्मीर में मोहभंग, निराशा और हताशा की जगह अब विकास, लोकतंत्र और गरिमा ने ले ली है।

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इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026: AI के लिए मानव-केंद्रित भविष्य का निर्माण
February 22, 2026

मानव इतिहास के एक निर्णायक दौर में, दुनिया नई दिल्ली में आयोजित ‘AI इम्पैक्ट समिट 2026’ में एक साथ जुटी। भारत के लिए यह बेहद गर्व और खुशी का अवसर था, जब हमने दुनिया भर से आए राष्ट्राध्यक्षों, सरकारों के प्रमुखों, प्रतिनिधियों और इनोवेशन से जुड़े लोगों का स्वागत किया।

भारत जो भी करता है, उसे बड़े पैमाने और पूरे उत्साह के साथ करता है, और यह समिट भी इससे अलग नहीं थी। 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए। इनोवेटर्स ने अत्याधुनिक एआई उत्पाद और सेवाएं पेश कीं। प्रदर्शनी हॉल में हजारों युवा नजर आए, जो सवाल पूछ रहे थे और नई संभावनाओं की कल्पना कर रहे थे। उनकी जिज्ञासा ने इसे दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे लोकतांत्रिक AI समिट बना दिया। मैं इसे भारत की विकास यात्रा का अहम पड़ाव मानता हूं, क्योंकि AI इनोवेशन और उसके इस्तेमाल को लेकर जन आंदोलन सच में शुरू हो चुका है।

मानव इतिहास में कई ऐसी तकनीकी क्रांतियां हुई हैं, जिन्होंने सभ्यता की दिशा बदल दी। आर्टिफिशियल-इंटेलिजेंस भी आग, लेखन, बिजली और इंटरनेट जैसी ही बड़ी खोजों की श्रेणी में आती है। लेकिन AI के साथ फर्क यह है कि जो बदलाव पहले दशकों में होते थे, वे अब कुछ ही हफ्तों में हो सकते हैं और पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकते हैं।

AI मशीनों को बुद्धिमान बना रहा है, लेकिन यह मानव की सोच और इरादों को कई गुना ताकत देने वाला साधन भी है। इसलिए AI को मशीन केंद्रित नहीं, बल्कि मानव केंद्रित बनाना बेहद जरूरी है। इस समिट में हमने ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत के साथ ग्लोबल AI चर्चा के केंद्र में मानव कल्याण को रखा।

मैं हमेशा मानता रहा हूं कि तकनीक लोगों की सेवा के लिए होनी चाहिए, न कि लोग तकनीक के लिए। चाहे बात UPI के जरिए डिजिटल भुगतान की हो या कोविड टीकाकरण की, हमने यह सुनिश्चित किया कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर हर व्यक्ति तक पहुंचे और कोई पीछे न छूटे। समिट में भी यही भावना साफ दिखी। कृषि, सुरक्षा, दिव्यांगजनों की सहायता और बहुभाषी समाज के लिए उपकरण जैसे क्षेत्रों में हमारे इनोवेटर्स के काम में यह सोच नजर आई।

भारत में AI की ताकत लोगों को सशक्त बनाने के कई उदाहरण पहले से मौजूद हैं। हाल ही में भारतीय डेयरी सहकारी संस्था AMUL द्वारा शुरू की गई AI आधारित डिजिटल सहायक ‘Sarlaben’ 36 लाख डेयरी किसानों, जिनमें ज्यादातर महिलाएं हैं, को उनकी अपनी भाषा में पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादन से जुड़ी रियल टाइम जानकारी दे रही है। इसी तरह ‘Bharat VISTAAR’ नाम का AI आधारित प्लेटफॉर्म किसानों को बहुभाषी जानकारी देता है। मौसम से लेकर बाजार भाव तक की जानकारी देकर यह उन्हें सशक्त बना रहा है।

इंसानों को डेटा पॉइंट, मशीनों के लिए कच्चा माल नहीं बनना चाहिए

इंसानों को कभी भी सिर्फ डेटा पॉइंट या मशीनों के लिए कच्चा माल नहीं बनना चाहिए। इसके बजाय, AI को दुनिया की भलाई के लिए एक टूल बनना चाहिए, जो ग्लोबल साउथ के लिए तरक्की के नए दरवाजे खोले। इस सोच को अमल में लाने के लिए, भारत ने मानव-केंद्रित AI गवर्नेंस के लिए MANAV फ्रेमवर्क पेश किया।

M – नैतिक और एथिकल सिस्टम: AI को एथिकल गाइडलाइंस पर आधारित होना चाहिए।
A – जवाबदेह गवर्नेंस: पारदर्शी नियम और मजबूत निगरानी।
N – राष्ट्रीय संप्रभुता: डेटा पर राष्ट्रीय अधिकारों का सम्मान।
A – सुलभ और समावेशी: AI पर मोनोपॉली नहीं होनी चाहिए।
V – वैध और प्रामाणिक: AI को कानूनों का पालन करना चाहिए और वेरिफाई किया जा सकने वाला होना चाहिए।

MANAV, जिसका मतलब है “इंसान”, ऐसे सिद्धांत बताता है जो 21वीं सदी में AI को इंसानी मूल्यों से जोड़ते हैं।

भरोसा ही वह नींव है जिस पर AI का भविष्य टिका है। जैसे-जैसे जेनरेटिव सिस्टम दुनिया को कंटेंट से भर रहे हैं, डेमोक्रेटिक समाजों को डीपफेक और गलत जानकारी से खतरा है। जैसे खाने की चीज़ों पर न्यूट्रिशन लेबल होते हैं, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर ऑथेंटिसिटी लेबल होने चाहिए। मैं दुनिया भर के लोगों से वॉटरमार्किंग और सोर्स वेरिफिकेशन के लिए शेयर्ड स्टैंडर्ड बनाने के लिए एक साथ आने की अपील करता हूं। भारत ने पहले ही इस दिशा में एक कदम उठाया है, जिसमें सिंथेटिक तरीके से बनाए गए कंटेंट की साफ लेबलिंग को कानूनी तौर पर ज़रूरी कर दिया गया है।

हमारे बच्चों की भलाई हमारे दिल के बहुत करीब है। AI सिस्टम को ऐसे सेफगार्ड के साथ बनाया जाना चाहिए जो जिम्मेदार, फ़ैमिली-गाइडेड एंगेजमेंट को बढ़ावा दें, और वैसी ही केयर दिखाएं जैसी हम दुनिया भर के एजुकेशन सिस्टम में करते हैं।

टेक्नोलॉजी का सबसे ज़्यादा फ़ायदा तब होता है जब उसे शेयर किया जाता है, न कि उसे एक स्ट्रेटेजिक एसेट की तरह बचाकर रखा जाता है। ओपन प्लेटफ़ॉर्म लाखों युवाओं को टेक्नोलॉजी को ज़्यादा सुरक्षित और ज़्यादा ह्यूमन-सेंट्रिक बनाने में मदद कर सकते हैं। यह कलेक्टिव इंटेलिजेंस ही इंसानियत की सबसे बड़ी ताकत है। AI को एक ग्लोबल कॉमन गुड के तौर पर विकसित होना चाहिए।

हम एक ऐसे दौर में जा रहे हैं जहाँ इंसान और इंटेलिजेंट सिस्टम मिलकर बनाएंगे, मिलकर काम करेंगे और मिलकर आगे बढ़ेंगे। पूरी तरह से नए प्रोफेशन सामने आएंगे। जब इंटरनेट शुरू हुआ, तो कोई भी इसकी संभावनाओं के बारे में सोच भी नहीं सकता था। इसने बहुत सारे नए मौके पैदा किए, और AI भी ऐसा ही करेगा।

मुझे पूरा भरोसा है कि हमारे मज़बूत युवा AI युग के असली ड्राइवर होंगे। हम दुनिया के कुछ सबसे बड़े और सबसे अलग-अलग तरह के स्किलिंग प्रोग्राम चलाकर स्किलिंग, रीस्किलिंग और लाइफलॉन्ग लर्निंग को बढ़ावा दे रहे हैं।

भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी और टेक्नोलॉजी टैलेंट का घर है। हमारी एनर्जी कैपेसिटी और पॉलिसी क्लैरिटी के साथ, हम AI की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए खास स्थिति में हैं। इस समिट में, मुझे भारतीय कंपनियों को स्वदेशी AI मॉडल और एप्लिकेशन लॉन्च करते देखकर गर्व हुआ, जो हमारी युवा इनोवेशन कम्युनिटी की टेक्नोलॉजिकल गहराई को दिखाते हैं।

हमारे AI इकोसिस्टम की ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए, हम एक मज़बूत इंफ्रास्ट्रक्चर फाउंडेशन बना रहे हैं। इंडिया AI मिशन के तहत, हमने हज़ारों ग्राफ़िक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाए हैं और जल्द ही और लगाने वाले हैं। बहुत सस्ते रेट पर वर्ल्ड-क्लास कंप्यूटिंग पावर एक्सेस करके, सबसे छोटे स्टार्ट-अप भी ग्लोबल प्लेयर बन सकते हैं। इसके अलावा, हमने एक नेशनल AI रिपॉजिटरी बनाई है, जिससे डेटासेट और AI मॉडल तक एक्सेस सबको मिलता है। सेमीकंडक्टर और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर वाइब्रेंट स्टार्ट-अप और एप्लाइड रिसर्च तक, हम पूरी वैल्यू चेन पर फोकस कर रहे हैं।

भारत की विविधता, लोकतंत्र और डेमोग्राफिक गतिशीलता सबको साथ लेकर चलने वाले इनोवेशन के लिए सही माहौल देते हैं। भारत में सफल होने वाले समाधान हर जगह मानवता की सेवा कर सकते हैं। इसीलिए दुनिया से हमारा आह्वान है: भारत में डिजाइन और डेवलप करें। दुनिया तक पहुंचाएं। मानवता की सेवा में पहुंचाएं।

स्रोत: The Jerusalem Post

(लेखक भारत के प्रधानमंत्री हैं)