"यह अस्पताल लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के प्रयास में सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच समन्वय का एक उदाहरण है"
"पिछले 8 वर्षों में गरीबों की 'सेवा', 'सुशासन' और 'गरीब कल्याण' को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है"
"पिछले 8 सालों में कोई ऐसा गलत काम नहीं हुआ, जिससे देश के लोगों को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा हो"
"सरकार ने योजनाओं में परिपूर्णता प्राप्त करने के लिए अभियान शुरू किया है"

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज राजकोट के एटकोट स्थित नवनिर्मित मातुश्री केडीपी मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल का दौरा किया। इस अस्पताल का प्रबंधन श्री पटेल सेवा समाज करता है। यह उच्च स्तरीय चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराएगा और इस क्षेत्र के लोगों को विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करेगा। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र भाई पटेल, केंद्रीय मंत्री श्री पुरुषोत्तम रूपाला, डॉ. मनसुख मांडविया, डॉ. महेंद्र मुंजापारा, संसद सदस्य, गुजरात सरकार के मंत्री और संत समाज के सदस्य उपस्थित थे।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक सभा को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने अस्पताल के उद्घाटन पर प्रसन्नता व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह अस्पताल सौराष्ट्र में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए है। यह अस्पताल लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के प्रयास में सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच समन्वय का एक उदाहरण है।

एनडीए सरकार के 8 साल सफलतापूर्वक पूरे करने पर प्रधानमंत्री ने देश की सेवा करने का अवसर देने के लिए लोगों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह उचित है कि मातृभूमि की सेवा के 8 वर्ष पूरे होने की पूर्व संध्या पर वह गुजरात की धरती पर हैं। प्रधानमंत्री ने गुजरात के लोगों को उन्हें देश की सेवा करने का अवसर और 'संस्कार' देने के लिए नमन किया। उन्होंने कहा कि यह सेवा हमारी संस्कृति में, हमारी मिट्टी की संस्कृति में और बापू व पटेल की संस्कृति में है। उन्होंने कहा कि पिछले 8 साल में कोई ऐसा गलत काम नहीं हुआ, जिससे देश की जनता को शर्मिंदगी का सामना करना पड़े। इन वर्षों में गरीबों की सेवा, 'सुशासन' और 'गरीब कल्याण' को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘सबका साथ- सबका विकास- सबका विश्वास- सबका प्रयास’ के मंत्र ने देश के विकास को गति दी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पूज्य बापू और सरदार पटेल ने गरीबों, दलितों, वंचितों, जनजातियों और महिलाओं आदि के सशक्तिकरण का सपना देखा था। एक ऐसा भारत, जहां स्वच्छता और स्वस्थ- राष्ट्र की चेतना का एक हिस्सा बन गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि बापू एक ऐसा भारत चाहते थे, जहां स्वदेशी समाधानों के जरिए अर्थव्यवस्था मजबूत हो। उन्होंने बताया कि अब 3 करोड़ से ज्यादा परिवारों को पक्का घर मिल चुका है, 10 करोड़ से ज्यादा परिवार खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं, 9 करोड़ से ज्यादा बहनों को रसोई में धुएं से मुक्ति मिली है, 2.5 करोड़ से ज्यादा परिवारों को बिजली कनेक्शन मिला है, 6 करोड़ से अधिक परिवारों को पेयजल कनेक्शन प्राप्त हुआ है और 50 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को 5 लाख रुपये तक का नि:शुल्क स्वास्थ्य बीमा मिला है। उन्होंने कहा कि ये केवल संख्या नहीं हैं, बल्कि गरीबों की गरिमा और देश की सेवा के लिए हमारे समर्पण का प्रमाण हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सदी की महामारी के दौरान भी उन्होंने यह सुनिश्चित किया है कि गरीबों को अपने जीवन में कोई कठिनाई महसूस न हो। जन धन बैंक खातों में धनराशि जमा की गई, गरीबों को नि:शुल्क सिलेंडर दिए गए और सभी का मुफ्त परीक्षण व टीकाकरण किया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अभी जब युद्ध (यूक्रेन-रूस) चल रहा है, तब भी हमने लोगों के जीवन को आसान बनाने के प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने योजनाओं में परिपूर्णता प्राप्त करने के लिए अभियान शुरू किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब सभी को उनका हिस्सा मिल जाता है तो भेदभाव और भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश नहीं रहती। उन्होंने कहा कि इस प्रयास से गरीब और मध्यम वर्ग का जीवन आसान होगा।

प्रधानमंत्री ने गुजराती भाषा में लोक सेवा के महान कार्य के लिए पटेल समुदाय की सराहना की। उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में बिताए अपने दिनों को याद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2001 में जब गुजरात के लोगों ने उन्हें सेवा का मौका दिया, उस समय केवल 9 मेडिकल कॉलेज थे, अब गुजरात में 30 मेडिकल कॉलेज हैं। उन्होंने कहा, “मैं गुजरात और देश के हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज देखना चाहता हूं। हमने नियमों में बदलाव किए हैं और अब मेडिकल व इंजीनियरिंग के छात्र अपनी मातृभाषा में पढ़ सकेंगे।”

श्री मोदी ने उद्योग के बारे में कहा कि पहले उद्योग केवल वड़ोदरा से वापी तक दिखाई देता था, अब यह गुजरात में हर जगह आगे बढ़ रहा है। गुजरात में राजमार्गों का विस्तार हुआ है और एमएसएमई इसकी एक बड़ी ताकत के रूप में सामने आया है। दवा उद्योग भी आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सौराष्ट्र की पहचान यहां के लोगों का साहसी चरित्र है।

अपने ऊपर की गई एक व्यक्तिगत टिप्पणी का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे गरीबी को जानते हैं और इस बात को समझते हैं कि परिवार की महिलाएं अस्वस्थ होने के बावजूद कैसे काम करती रहती हैं व इलाज कराने से बचती हैं, जिससे परिवार को असुविधा न हो। उन्होंने कहा, “आज दिल्ली में आपका एक बेटा है, जिसने यह सुनिश्चित किया है कि कोई भी मां बिना इलाज के न जाए। इसके लिए पीएमजेएवाई योजना शुरू की गई है।” प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के समापन में कहा कि इसी तरह सस्ती दवा के लिए जन औषधि केंद्र हैं और सभी के अच्छे स्वास्थ्य के लिए अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है।

 

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आपने सिर्फ पदकों की संख्या ही नहीं बढ़ाई, बल्कि पूरी पीढ़ी को तैयार किया: CWG चैंपियंस से पीएम मोदी
August 10, 2026

प्रधानमंत्री – मेरे यहां, मुझे यहां लगभग 12-13 साल हो गए इसी मकान में, अगर मैंने regularly और हर बार किसी को रिसिव किया है, किसी को मैं मिला हूं, तो खिलाड़ी हैं। पिछले 10-12 साल हो गए, आप लोगों के पुरुषार्थ के कारण, भारत को लगातार विजय दिलाने के आपके प्रयासों के कारण और उत्तरोत्तर सफलता में नई ऊंचाईयां पार करने की परंपरा के कारण, जो काम शायद हम स्कूलों में जाकर कहें कि नहीं नहीं भई खेलना चाहिए, ये करना चाहिए, वो काम स्कूलों में जाकर के हम कर सकते थे, उससे ज्यादा आपका मेडल उनको inspire करता है।

प्रधानमंत्री – तुमने मुझे वादा किया था पिछली बार कि तुम्हारी दोनों बेटियां खिलाड़ी बन जाएंगी?

खिलाड़ी - हाँ जी अभी वे उमर की छोटी हैं, अगले कॉमनवेल्थ में एक घर में तीन मेडल लाकर दिखाएंगी।

प्रधानमंत्री – पक्का।

खिलाड़ी – हाँ जी।

खिलाड़ी – जब मैं दौड़ रहा था, जब मेरा इवेंट था 29 को, तो उस दिन गुरुपूर्णिमा थी, तो उस दिन मेरे गुरू को मैंने एक गिफ्ट दे दिया।

प्रधानमंत्री – बड़ी शान बढ़ाई आपने। इतनी आंसू टपक रहे थे, मुझे लगता है कि आंसू के हर बूंद से जैसे गोल्ड मेडल टपक रहा है।

खिलाड़ी – मैं बहुत ज्यादा खुशी थी, इमोशनल भी थे उसी दिन, खुशी ज्यादा था और मैं इसलिए रोई थी कि मेरा पेरिस आलंपिक में मेरा 1 Kg में मेडल रह गई थी और एक प्लेयर्स की लाइफ में क्या क्या हमको फेस करना पड़ता है। तो ये 4 साल के अंदर में कितना क्या क्या कुछ मैंने फेस किया था, हर टाइम injury ही चल रहे थे और family problem, वो सब हो रहा था। तो बहुत मुश्किल से मैं ये 4 साल फेस किया था। तो वो सब जब पोडियम में जब मैं खड़ी थी सर और हमारी जो फ्लैग ऊपर जाते हैं और हमारे नेशनल एंथम जब बजते हैं तो सर हम रुक नहीं सकते सर, अपना आप आंसू निकलते हैं।

प्रधानमंत्री – बहुत बहुत बढ़िया

प्रधानमंत्री – आपके इस अचीवमेंट को सिर्फ आपका अचीवमेंट मानता हूं, ऐसा नहीं है, ये आपका विजय आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा बन जाता है।

खिलाड़ी – सब डर रहे थे हमसे कि इंडिया के साथ फाइट आ गई, अब तो हम पहली फाइट ही हार जायेंगे, हमारा मेडल भी नहीं आयेगा।

प्रधानमंत्री – यानी मान के चलते हैं।

खिलाड़ी – हाँ सर।

प्रधानमंत्री – क्या हुआ, वो restaurant वालों से झगड़ा कर रही थी?

खिलाड़ी – हम लोगों का जो इतना अच्छा परफॉर्मेंस था, लास्ट डे था और सब जीत के गए थे और पूरा इंडिया के लोग थे। तो थोड़ा सा मुझे बुरा लग रहा। तो मैंने उनको अच्छे से बोला रिक्वेस्ट किया था सर, फिर उन्होंने मान भी लिया, अभी चेंज भी हो गया सर।

प्रधानमंत्री – इस विजय की परिस्थिति खुशी, आनंद, अपने साथियों के साथ और गेम पूरे हो चुके हैं। तो हसी मजाक मस्ती का मूड ऐसे समय उस मैप पर नजर जाना और उसको रजिस्टर करना और तुरंत सिर्फ मेडल लेते समय देश खड़ा हो जाता है ऐसा नहीं, भीतर से देश का भाव मैं सच बताता हूँ ये वीडियो सामान्य नहीं है आपका, लंबे समय तक लोगों को याद रहेगा। ये बॉक्सिंग वालों से भी दुनिया के खिलाड़ी अब डरने लगे हैं।

खिलाड़ी – जरूर सर, पुरे सभी डरे हुए थे। एक के बाद एक गोल्ड मेडल गोल्ड मेडल आ रहे थे और मतलब पूरा लास्ट में ऐसे धमाका जैसा हो गया बिल्कुल। जिस तरीके से हम लोगों को सपोर्ट मिल रहा है, हमें बैक टू बैक कंपटीशन मिल रहा है वो एक बहुत बड़ी बात है और हमारे जितने भी यंग एथलीट है वो लोग सभी जैसे खेलो इंडिया स्कीम से आए हुए हैं और ये एक बहुत बड़ा changes ला रहा है पूरे स्पोर्ट्स में ही।

प्रधानमंत्री – अगर आप लोग खेलो इंडिया की प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं और प्रतिष्ठा सिर्फ वहां जाकर के रिबिन काटने से नहीं होगी। आप वैसे ही खेलेंगे जैसे एक छोटा विद्यार्थी, एक छोटा नौजवान, छोटा खिलाड़ी खेलता है। यह बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन करेगा। क्योंकि अभी तो हमें बहुत आगे जाना है, बहुत मेडल लाना है। कारगिल विजय दिवस पर किसकी विजय हुई थी?

खिलाड़ी – उस दिन कारगिल डे था वैसे और जिस दिन मैंने पाकिस्तान के साथ फाइट किया था सर, वो उसी दिन का था। तो मैं एक इंडियन आर्मी से हूं, तो मैंने उस दिन मैं पहले से बहुत वो था कि सर पाकिस्तान को हराना है। तो मैंने वो पाकिस्तान एक तरफ मैंने 5-0 से हराया, तो मैंने हमारा इंडियन आर्मी का कारगिल हीरोज़ को मैंने डेडिकेट किया किया था सर।

प्रधानमंत्री – आपको यह याद रहना और आप स्वयं फौज से हैं तो, मैं जरूर मानता हूं कि देश के वीर जवानों को आपने जो भाव प्रकट किया ना कि, मैं कारगिल के विजेताओं को मेरा मेडल समर्पित करता हूं। उसने उस विजय पर चार चांद लगा दिए और जिसको पराजित करना था उसी को किया आपने।

खिलाड़ी – वो पाकिस्तान की बात चल रही है, मुझे किस्सा याद आ गया सर। 2015 वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे और मेरी पाकिस्तान के साथ पहली फाइट आ गई थी और वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे तो मिलिट्री वाले के फोन आए कि भई पाकिस्तान से नहीं हारना है। तो फिर मैं फर्स्ट राउंड 4-1 से जीत गया। सेकंड राउंड 3-2 से जीत गया, पर दोनों के सर लग गए आपस में, तो दोनों के लग गए कट और फाइट तो मैं जीत गया।

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – उसके बाद फिर दोनों चले गए हॉस्पिटल में टांके लगवाने के लिए। फिर 2014 में आप फर्स्ट टाइम प्रधानमंत्री जी बने थे और जो हमारे साथ आर्मी का कोच गया हुआ था उसका नाम नरेंद्र राणा था और फिर वो कई देर तक सोच के मेरे को बोला कि भाईजान एक बात बोलूं, मैं हां बोलो, बोला भाईजान आपका नाम नरेंद्र है। आपके कोच का नाम नरेंद्र है, आपके प्रधानमंत्री का नाम नरेंद्र है, तो मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई है।

प्रधानमंत्री – सिर्फ आपने मेडल की संख्या बढ़ाई ऐसा नहीं है। आपने एक पीढ़ी को तैयार किया।

खिलाड़ी – मेरे मन में भी धक-धक धक-धक हो रहा है सर।

प्रधानमंत्री – आप चिंता मत कीजिए।

खिलाड़ी – पर..

प्रधानमंत्री – आप चाहें तो आपको बोलने में भी मेडल मिलने वाला है।

खिलाड़ी – मेरे फ्रेंड सर्कल में किसी ने बोला था कि मैं उनको कुछ बोलती थी भई तुम्हारे अच्छे के लिए तुम करो। तो अक्सर मुझे वो बोलते थे कि तू के मोदी ते मिल रही है?

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – हरियाणवी में बोल देते हैं सर कि क्या तू मोदी से मिली हुई है, कि तेरी बात माने। तो आज मैं आपसे मिली हूं सर। मैं उनको बोल पाऊंगी कि हां मैं मोदी जी से मिली हूं।

खिलाड़ी – कॉमनवेंल्थ गेम्स में मैंने सिल्वर मेडल जीता, फिर मैंने क्रेडिट साहब को दिया, सपना तो था एक बार मेडल जीत के लेके आने के लिए, बट ट्रेनिंग का सेंटर नहीं था, मैंने SAI आने के बाद मैं बहुत ट्रेनिंग करके मेडल जीत पा रहा, इसलिए बहुत खुशी से मैंने सर को क्रेडिट दिया था क्योंकि बहुत इंप्रूव हुआ।

प्रधानमंत्री – मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान का विषय है, मेहनत आपने की और मुझे याद किया, मैं आपका बहुत आभारी हूं दोस्त।

प्रधानमंत्री – वाराणसी में खेल तुम प्रैक्टिस कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – कैसा बना है स्टेडियम?

खिलाड़ी – सर अच्छा बना है, वहां पर मैं 10-12 दिन के लिए ट्रेनिंग करने गई थी, क्योंकि मैं मंदिर गई थी तो वहां पर ही ट्रेनिंग करके आई थी। और मैं वहां पे मतलब सेटल भी होना चाहती हूं क्योंकि मुझे काशी विश्वनाथ बहुत अच्छा लगता है सर।

प्रधानमंत्री – भोपाल में ट्रेनिंग कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – तो उज्जैन जाते थे कि नहीं?

खिलाड़ी – जी सर उज्जैन भी गई थी सर।

प्रधानमंत्री – अच्छा महाकाल के पास भी गई।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – काशी विश्वनाथ के पास हो आई एक बार।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – सावन महीना तो अभी है।

खिलाड़ी – वहां घर जाके फिर उसके बाद जाऊंगी सर।

प्रधानमंत्री – ठीक है।

खिलाड़ी – साई ने भी सर बहुत सपोर्ट किया है मुझे। इसके कारण ही मैं यहां तक पहुंची हूं सर। और मैं खेलो इंडिया स्कीम में भी थी 2018 में जो फर्स्ट खेलो इंडिया हुआ था, उसमें मेरा सिल्वर मेडल था, वहां पे भी मैंने आपको देखा था ओपनिंग सेरेमनी में, तो उसमें मेरा मेडल था, तो मेरे को स्कीम भी मिल गया और मैं यहां तक पहुंची हूं सर।

प्रधानमंत्री – स्पोर्ट्स व्यवस्था एक बात है, लेकिन देश मेडल तब प्राप्त करता है जब देश में स्पोर्ट्स कल्चर बनता है। दोस्तों आपने बहुत बड़ा काम किया है। देश का नाम रोशन किया है। आपको मैं बहुत बधाई देता हूं और आप विश्वास कीजिए आगे भी आप विजयी होंगे और फिर से एक बार यहीं पर हम मिलेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

प्रधानमंत्री – ये लगातार तीसरी बार देश को मेडल दिलवाया है।

खिलाड़ी – थैंक यू सर।

प्रधानमंत्री – बहुत आशीर्वाद बेटा।

खिलाड़ी – और थैंक यू सो मच मैं सर के हाथ से लड्डू खा रही मेरा कल बर्थडे था तो आज सर के हाथ से…

प्रधानमंत्री – बहुत बधाई वाह।

प्रधानमंत्री – मुस्कुराओ यार ।

प्रधानमंत्री – जो खेलेगा वो खिलेगा।