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प्रधानमंत्री टोनी एबॉट जी,
प्रतिपक्ष के नेता, मंत्रीगण,
विक्‍टोरिया के नेतागत, दोस्‍तों,
यहां आए हुए सभी प्रख्‍यात लोगों तथा हमारे महान क्रिकेट खिलाड़ी,
 
आस्‍ट्रेलिया की मेरी यह यात्रा बहुत ही असाधारण रही है। आपने एक भव्‍य जी-20 शिखर बैठक का आयोजन किया। यह आस्‍ट्रेलिया की वैश्विक भूमिका को प्रदर्शित करता है। पिछले चार दिनों में, मैंने वह सब कुछ महसूस कर लिया है जिसके लिए आस्‍ट्रेलिया को जाना जाता है – प्राकृतिक सुंदरता, धूप, महान शहर, मैत्रीपूर्ण एवं खुशमिजाज लोग, संगठनात्‍मक कौशल तथा ऐसी ताकतें जिनके बल पर आप विश्‍व में आर्थिक हस्‍ती बने हैं।
 
प्रधानमंत्री महोदय, अपने अतिथि सत्‍कार एवं मेहमाननबाजी में आपने सही मायने में पूरी उदारता दिखाई है। मैं इस बात से बहुत सम्‍मानित महसूस करता हूँ कि इतना भव्‍य स्‍वागत समारोह आयोजित करने के लिए आप मेलबोर्न आए हैं।
 
यह याद मेरे साथ जीवनभर बनी रहेगी। परंतु मैं आपको बता सकता हूँ कि सभी भारतीय इस स्‍वागत से बहुत ही प्रभावित हैं। अनेक भारतीय इस भव्‍य स्‍टेडियम में टीवी पर एक बॉक्सिंग डे टेस्‍ट को देखने के लिए दिसंबर की ठंड में सवेरे भोर में उठ गए! परंतु हम यहां 1985 की चैम्पियन्‍स ट्रॉफी जीते थे तथा गावस्‍कर एवं कपिलदेव यहां मौजूद हैं। यहां लक्ष्‍मण भी मौजूद हैं जिनको विशेष रूप से आस्‍ट्रेलिया के खिलाफ बल्‍लेबाजी करने में बहुत मजा आता है। इस ऐतिहासिक मैदान पर आप सभी से बात करके यहां मैं एक शतक बनाने के करीब पहुंच गया हूँ विशेष रूप से मैक्‍ग्राथ एवं ब्रेट ली के खिलाफ। कल उनसे मेरी मुलाकात हुई थी। सबसे बढि़या जो मैं कर पाया वह यह था कि मैं गुजरात क्रिकेट संघ का अध्‍यक्ष था।
 
यह क्रिकेट विश्‍व कप फाइनल 2015 के लिए बहुत योग्‍य जगह है। मुझे उम्‍मीद है कि हमारी दो टीमें यह मैच खेलेंगी। इस महान खेल पर चर्चा करने से भारत और आस्‍ट्रेलिया के लोगों को रोकने में कोई कार्य समर्थ नहीं है।
 
हम अन्‍य क्षेत्रों में आस्‍ट्रेलिया के मशहूर खेल कौशलों से भी सीख सकते हैं। और हमने भारत में एक खेल विश्‍वविद्यालय पर सहयोग स्‍थापित करने का निर्णय लिया है। हम लोगों के बीच संबंध को भी महत्‍वपूर्ण के रूप में देखते हैं। कहा जाता है कि मेलबोर्न रहने के लिए दुनिया का सबसे बढि़या शहर है।
 
हो सकता है कि सिडनी इससे सहमत न हो।
 
भारत आस्‍ट्रेलिया के अनुभव से सीख सकता है तथा आपकी विशेषज्ञता से लाभ उठा सकता है। भारत में तेज गति से शहरीकरण हो रहा है। अध्‍ययनों से पता चलता है कि 20131 तक विश्‍व की 11 प्रतिशत शहरी आबादी भारतीय शहरों में हो सकती है। हमारे पास पहले से ही 50 से अधिक ऐसे शहर हैं जिनकी आबादी एक मिलियन से अधिक है। शहरीकरण एक भव्‍य अवसर हो सकता है।
 
भारत में, हमें भविष्‍य के लिए अपनी शहरी अवसंरचना का अभी निर्माण करना है। हमारी योजनाओं के तहत 100 स्‍मार्ट शहर, विरासत शहरों का जीर्णोद्धार, 500 शहरों में आधुनिक ठोस अपशिष्‍ट एवं अपशिष्‍ट जल शोधन प्रणालियों का निर्माण करना और हमारी नदियों की सफाई करना शामिल है।
 
यह हमारे देश के लिए संपोषणीय विकास तथा हमारे लोगों की जीवन की गुणवत्‍ता में परिवर्तन लाने के लिए हमारे वृहद विजन का अंग है, शहरों एवं गांवों दोनों में समान रूप से। मैं ऐसे भविष्‍य का निर्माण करना चाहता हूँ जब हर भारतीय यह कह सके कि जी हां, मेरे जीवन में सुधार आया है तथा मेरा परिवेश बेहतर हो गया है।
 
मुझे पूरा यकीन है कि हम भारत के लोगों के समर्थन से तथा 35 साल से कम आयु के 800 मिलियन युवाओं की प्रतिभा एवं ऊर्जा के माध्‍यम से इसे प्राप्‍त करने में सफल होंगे, जो परिवर्तन के लिए लालायित है और इसके लिए काम करने हेतु कटिबद्ध है।
 
सफल भारत एक बड़ा अवसर तथा पूरी दुनिया के लिए अच्‍छाई की एक ताकत होगा। हम आस्‍ट्रे‍लिया जैसे मित्रों के साथ घनिष्‍ठ साझेदारी की उम्‍मीद करते हैं। प्रधानमंत्री एबाट तथा मैंने दो देशों एवं चार शहरों में एक साथ इस सप्‍ताह के अच्‍छे भाग को बिताया।
 
मैंने राजनीतिक नेतृत्‍व, बिजनेस लीडर तथा जीवंत भारतीय समुदाय से भी मुलाकात की है। हमने पिछले कुछ दिनों में काफी उपलब्धि हासिल की है। एक बात जिस पर हम सभी सहमत हैं। देशों के बीच रिश्‍ते हमारे लोगों द्वारा आपस में हाथ मिलाने से मजबूत होते हैं। इसलिए, खेल, पर्यटन, शिक्षा एवं संस्‍कृति में हमारा आदान – प्रदान हमारे संबंध की मजबूती के लिए एक अच्‍छा स्रोत है।
 
आज तथा पिछले पांच दिनों से मैं भारत के लिए मैत्री एवं गर्मजोशी देख रहा हूँ। मुझे हमारे संबंध के भविष्‍य में काफी विश्‍वास महसूस हो रहा है।
 
आस्‍ट्रे‍लिया की मेरी यादगार यात्रा आज समाप्‍त हो रही है परंतु हमारे संबंध की एक नई यात्रा शुरू हो गई है।
 
आप सभी का धन्‍यवाद तथा उम्‍मीद है कि आप सभी शीघ्र ही भारत आएंगे।
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री महामहिम श्री सुगा योशीहिदे के बीच बैठक
September 24, 2021
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने क्वाड लीडर्स समिट के मौके पर 23 सितंबर 2021 को वाशिंगटन डीसी में जापान के प्रधानमंत्री महामहिम श्री सुगा योशीहिदे से मुलाकात की।

 

दोनों प्रधानमंत्रियों ने अपनी पहली व्यक्तिगत मुलाकात पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने सितंबर 2020, जब श्री सुगा ने जापान के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला था,के बाद से अपनी तीन टेलीफोन वार्ताओं को गर्मजोशी से याद किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने प्रधानमंत्री और मुख्य कैबिनेट सचिव, दोनों, के तौर पर पिछले कुछ वर्षों में भारत और जापान के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के मामले में महत्वपूर्ण प्रगति को संभव बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री सुगा की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता और नेतृत्व के लिए उनका धन्यवाद किया। उन्होंने वैश्विक महामारी के बीच टोक्यो ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की सफलतापूर्वक मेजबानी करने के लिए प्रधानमंत्री सुगा को बधाई दी।

 

दोनों प्रधानमंत्रियों ने दोनों देशों के बीच बहुआयामी संबंधों की समीक्षा की और अफगानिस्तान सहित हाल के वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी वचनबद्धता को दोहराया। वे रक्षा उपकरणों और प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने दोनों देशों के बीच बढ़ती आर्थिक भागीदारी का स्वागत किया। उन्होंने भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच इस साल की शुरुआत में लचीला, विविध और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला को संभव बनाने के उद्देश्य से एक सहयोगी तंत्र के रूप में आपूर्ति श्रृंखला संबंधी लचीली पहल (एससीआरआई) के शुभारंभ का स्वागत किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने विनिर्माण, सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्‍यम उद्यम (एमएसएमई) और कौशल विकास के क्षेत्र में द्विपक्षीय भागीदारी विकसित करने की जरूरत पर प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री श्री सुगा ने प्रधानमंत्री श्री मोदी को सूचित किया कि निर्दिष्ट कुशल श्रमिक (एसएसडब्ल्यू) समझौते, जिस पर इस साल की शुरुआत में हस्ताक्षर किए गए थे, को लागू करने के उद्देश्य से जापानी पक्ष 2022 की शुरुआत से भारत में कौशल और भाषा संबंधी जांच परीक्षाओं का आयोजन करेगा।

 

 

दोनों प्रधानमंत्रियों ने कोविड-19 महामारी और उससे निपटने के प्रयासों के बारे में चर्चा की। उन्होंने डिजिटल प्रौद्योगिकियों के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला और इस संबंध में भारत-जापान डिजिटल साझेदारी में, विशेष रूप से स्टार्ट-अप के क्षेत्र में, प्रगति का सकारात्मक मूल्यांकन किया। उन्होंने उभरती हुई विभिन्न प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में और आगे सहयोग के बारे में विचारों का आदान-प्रदान किया। जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों और हरित ऊर्जा संक्रमण एवं भारत के राष्ट्रीय हाइड्रोजन ऊर्जा मिशन के साथ जापानी सहयोग की संभावना पर भी चर्चा हुई।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (एमएएचएसआर) परियोजना के सुचारू और समय पर कार्यान्वयन को प्रोत्साहित करने की दिशा में प्रयासों को आगे बढ़ाने के प्रति अपनी वचनबद्धताको दोहराया।

दोनों नेताओं ने भारत-जापान एक्ट ईस्ट फोरम के तहत भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में द्विपक्षीय विकास परियोजनाओं में प्रगति का भी स्वागत किया और इस तरह के सहयोग को और आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया।

प्रधानमंत्री श्री सुगा ने विश्वास व्यक्त किया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत-जापान साझेदारी द्वारा हासिल की गई मजबूत गति जापान में नए प्रशासन के तहत भी जारी रहेगी। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने बताया कि वो निकट भविष्य में होने वाले भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए जापान के अगले प्रधानमंत्री का भारत में स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं।