प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति डा अशरफ घानी से टेलीफोन पर बात की।

श्री मोदी ने उन्हें और वहां के लोगों को रमजान के पवित्र महीने की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने ईश्वर भक्ति और प्रार्थना के इस महीने के दौरान उनके देशों में शांति, सौहार्द और सद्भाव की आशा व्यक्त की।

उन्होंने बांग्लादेश की अपनी सफ़ल यात्रा और बांग्लादेश की जनता और सरकार की ओर से प्राप्त विशिष्ट आतिथ्य, मैत्री और सद्भावना के लिए प्रधानमंत्री शेख हसीना को धन्यवाद दिया। उन्होंने यह विश्वास जताया कि इस यात्रा ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग और क्षेत्रीय साझेदारी के लिए एक नए युग की शुरुआत की है।

उन्होंने प्रधानमंत्री शरीफ के साथ बातचीत में दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण, दोस्ताना और सहयोगात्मक संबंध के अपने संदेश को दोहराया।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति घानी को आश्वासन दिया कि भारत अफगानिस्तान के शांतिपूर्ण, स्थिर, सुरक्षित और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण करने के प्रयासों में उसका सहयोग करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

Prime Minister assured President Ghani of India's steadfast commitment to support Afghanistan in its efforts to build a peaceful, stable, secure and prosperous nation.

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प्रधानमंत्री ने करुणा और संतोष का महत्व बताने वाला संस्कृत सुभाषितम साझा किया
August 24, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि करुणा आत्म-सम्मान लाती है और संतोष सच्ची खुशी लाता है। यह भावना समाज में सहयोग और सद्भाव के बंधन को और मजबूत करती है।

श्री मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-

“कारुण्येनात्मनो मानं तृष्णां च परितोषतः।
उत्थानेन जयेत्तन्द्रीं वितर्कं निश्चयाज्जयेत्॥”

यह सुभाषितम् बताता है कि आत्म-सम्मान दूसरों पर दया या करुणा दिखाने से प्राप्त होता है। जीवन में अपने भाग्य पर संतुष्ट रहने से लालच पर काबू पाया जाता है। व्यक्ति को परिश्रम और उद्यमिता से आलस्य, सशंयात्‍मक तर्क और अनिर्णय पर विजय प्राप्त करनी चाहिए।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

“करुणा से आत्म-सम्मान और संतोष से सच्ची खुशी मिलती है। इसी भाव से समाज में सहयोग और सद्भाव की डोर और सशक्त होती है।

कारुण्येनात्मनो मानं तृष्णां च परितोषतः।
उत्थानेन जयेत्तन्द्रीं वितर्कं निश्चयाज्जयेत्॥”