प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय खेलों की सफलता केवल भौतिक इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर से परे एक व्यापक खेल संस्कृति के निर्माण पर निर्भर है
प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि पदक किसी भी मौखिक प्रोत्साहन से कहीं अधिक स्कूलों में युवा छात्रों को प्रेरित करते हैं
प्रधानमंत्री ने देश को गौरवान्वित करने के लिए एथलीटों को बधाई दी और भविष्य की उनकी जीत पर भरोसा व्यक्त किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के राष्ट्रमंडल खेलों के चैंपियनों के साथ बातचीत की। प्रधानमंत्री ने पिछले एक दशक में भारतीय खेलों के बदलते परिदृश्य के बारे में चर्चा करते हुए बताया कि उनके 12 से 13 साल के कार्यकाल के दौरान उनके आवास पर राष्ट्रीय खिलाड़ियों का स्वागत करना एक नियमित और पोषित परंपरा रही है। उन्होंने पुष्टि करते हुए कहा कि देश के लिए निरंतर जीत हासिल करने में भारतीय एथलीटों के समर्पित प्रयास और निरंतर सफलताएं युवा स्कूली छात्रों को नियमित प्रचार संबंधी सलाह की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी ढंग से प्रेरित करती हैं। श्री मोदी ने कहा, "आपका पदक उन्हें स्कूलों में जाकर जो कुछ भी कह सकता है, उससे कहीं अधिक प्रेरित करता है।" 

प्रधानमंत्री ने एक एथलीट के साथ बातचीत की, जिसने अपनी बेटियों के खेल को अपनाने, उसकी प्रगति के बारे में पूर्व-संकल्‍प को याद किया और यह आश्वासन प्राप्त किया कि उसकी बेटियां आगामी राष्ट्रमंडल खेलों में तीन पदक घर लाएंगी। उन्होंने गर्मजोशी से उसके आत्मविश्वास को महत्‍व दिया और उत्कृष्टता के प्रति उसके संकल्‍प को लेकर प्रोत्साहित किया।

प्रधानमंत्री ने एथलीटों की गहन भावनात्मक यात्रा की सराहना करते हुए गुरु पूर्णिमा पर हासिल की गई जीत को अपने कोच को समर्पित करने वाले खिलाड़ी और एक अन्य एथलीट की दृढ़ता पर टिप्पणी की, जो राष्ट्रीय ध्वज को फहराते हुए देखने के लिए चार साल की लगातार चोटों और व्यक्तिगत कठिनाइयों से उबरने के बाद पोडियम पर फूट-फूट कर रोने लगा। उन्होंने कहा कि इस तरह की राष्ट्रीय जीत व्यक्तिगत उपलब्धियों से परे भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का एक स्थायी स्रोत बन जाती है। श्री मोदी ने कहा, "आपकी यह जीत आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा बन गई है।"

प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय एथलीटों के बढ़ते सम्मान और भय पर चर्चा करते हुए कहा कि वैश्विक प्रतियोगी अब भारतीय विरोधियों के खिलाफ ड्रॉ होने पर भयभीत महसूस करते हैं। उन्होंने विशेष रूप से भारतीय मुक्केबाजों के बढ़ते कद पर प्रकाश डाला और खेलो इंडिया योजना जैसी जमीनी स्तर की पहलों और सरकार द्वारा प्रदान की गई बैक-टू-बैक प्रतिस्पर्धा सहायता द्वारा निभाई गई परिवर्तनकारी भूमिका के बारे में एथलीटों की प्रतिक्रिया को स्वीकार किया। श्री मोदी ने कहा, "विश्व के खिलाड़ी अब इन मुक्केबाजों से भी डरने लगे हैं।"

प्रधानमंत्री ने खेलों को बढ़ावा देने के पीछे के मूल दर्शन पर बल देते हुए कहा कि एथलीटों को खेलो इंडिया पहल की प्रतिष्ठा का विस्तार करते हुए एक युवा शिक्षार्थी की विनम्र भावना को बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खेलों की सच्ची सफलता केवल भौतिक इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर पर निर्भर नहीं करती है, बल्कि पूरे देश में एक व्यापक खेल संस्कृति के निर्माण पर भी निर्भर है। श्री मोदी ने कहा, "खेल का इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर एक बात है, लेकिन देश पदक तब हासिल करता है जब देश में एक खेल संस्कृति का निर्माण होता है।"

प्रधानमंत्री ने कारगिल विजय दिवस पर अपने पाकिस्तानी प्रतिद्वंद्वी को 5-0 से हराने वाले भारतीय सेना के एक एथलीट की देशभक्ति की सराहना की और अपनी जीत को भारतीय सेना के नायकों को समर्पित करते हुए कहा कि इस तरह का बेजोड़ राष्ट्रीय गौरव एथलेटिक जीत में असाधारण चमक जोड़ता है। उन्होंने एक एथलीट के साथ अपने सेना के कोच नरेन्‍द्र राणा और साझा नाम "नरेन्‍द्र" के बारे में एक हास्य किस्सा सुनाते हुए हल्के-फुल्के पल भी साझा किए। उन्होंने कहा, "आपने केवल पदकों की संख्या नहीं बढ़ाई है; आपने एक पीढ़ी तैयार की है।"

प्रधानमंत्री ने एक ऐसे एथलीट की प्रशंसा की, जिन्होंने उन्हें महत्वपूर्ण प्रशिक्षण सुविधाएं प्रदान करने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) का आभार व्यक्त किया, जिसने स्थानीय खेल केंद्रों से अंतरराष्ट्रीय पोडियम फिनिश में परिवर्तन को सक्षम बनाया। "यह मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है; आपने कड़ी मेहनत की और मुझे याद किया, और मैं आपका बहुत आभारी हूं।"

प्रधानमंत्री ने वाराणसी और भोपाल सहित विभिन्न क्षेत्रीय केंद्रों में उन्नत खेल इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर के बारे में पूछताछ की, जहां एथलीटों ने प्रशिक्षण और उज्जैन में काशी विश्वनाथ और महाकालेश्वर जैसे आध्यात्मिक स्थलों का दौरा करने में समय बिताया। उन्होंने 2018 में अपनी स्थापना के बाद से भारतीय खेल प्राधिकरण और खेलो इंडिया फ्रेमवर्क द्वारा प्रदान किए गए निरंतर समर्थन की सराहना की, जिसने युवा प्रतिभाओं को आसानी से विशिष्ट प्रतिस्पर्धी स्तरों पर स्थानांतरित करने में मदद की है। श्री मोदी ने कहा, "निश्चिंत रहिए, भविष्य में भी आप विजयी होंगे और एक बार फिर हम यहीं मिलेंगे।"

 

प्रधानमंत्री ने कई बार की पदक विजेता एक व्यक्ति को हार्दिक शुभकामनाएं और आशीर्वाद दिया, जिन्होंने बातचीत के दौरान अपना जन्मदिन मनाया, इस अवसर को चिह्नित करने के लिए व्यक्तिगत रूप से मिठाई की पेशकश की और सभी एथलीटों को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ अपनी जीत की गति को बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने मुस्कुराते हुए दल को लगातार तीसरी बार पदक जीतने के लिए आशीर्वाद दिया। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, "जो खेलता है, वह खिलता है।"

 

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आपने सिर्फ पदकों की संख्या ही नहीं बढ़ाई, बल्कि पूरी पीढ़ी को तैयार किया: CWG चैंपियंस से पीएम मोदी
August 10, 2026

प्रधानमंत्री – मेरे यहां, मुझे यहां लगभग 12-13 साल हो गए इसी मकान में, अगर मैंने regularly और हर बार किसी को रिसिव किया है, किसी को मैं मिला हूं, तो खिलाड़ी हैं। पिछले 10-12 साल हो गए, आप लोगों के पुरुषार्थ के कारण, भारत को लगातार विजय दिलाने के आपके प्रयासों के कारण और उत्तरोत्तर सफलता में नई ऊंचाईयां पार करने की परंपरा के कारण, जो काम शायद हम स्कूलों में जाकर कहें कि नहीं नहीं भई खेलना चाहिए, ये करना चाहिए, वो काम स्कूलों में जाकर के हम कर सकते थे, उससे ज्यादा आपका मेडल उनको inspire करता है।

प्रधानमंत्री – तुमने मुझे वादा किया था पिछली बार कि तुम्हारी दोनों बेटियां खिलाड़ी बन जाएंगी?

खिलाड़ी - हाँ जी अभी वे उमर की छोटी हैं, अगले कॉमनवेल्थ में एक घर में तीन मेडल लाकर दिखाएंगी।

प्रधानमंत्री – पक्का।

खिलाड़ी – हाँ जी।

खिलाड़ी – जब मैं दौड़ रहा था, जब मेरा इवेंट था 29 को, तो उस दिन गुरुपूर्णिमा थी, तो उस दिन मेरे गुरू को मैंने एक गिफ्ट दे दिया।

प्रधानमंत्री – बड़ी शान बढ़ाई आपने। इतनी आंसू टपक रहे थे, मुझे लगता है कि आंसू के हर बूंद से जैसे गोल्ड मेडल टपक रहा है।

खिलाड़ी – मैं बहुत ज्यादा खुशी थी, इमोशनल भी थे उसी दिन, खुशी ज्यादा था और मैं इसलिए रोई थी कि मेरा पेरिस आलंपिक में मेरा 1 Kg में मेडल रह गई थी और एक प्लेयर्स की लाइफ में क्या क्या हमको फेस करना पड़ता है। तो ये 4 साल के अंदर में कितना क्या क्या कुछ मैंने फेस किया था, हर टाइम injury ही चल रहे थे और family problem, वो सब हो रहा था। तो बहुत मुश्किल से मैं ये 4 साल फेस किया था। तो वो सब जब पोडियम में जब मैं खड़ी थी सर और हमारी जो फ्लैग ऊपर जाते हैं और हमारे नेशनल एंथम जब बजते हैं तो सर हम रुक नहीं सकते सर, अपना आप आंसू निकलते हैं।

प्रधानमंत्री – बहुत बहुत बढ़िया

प्रधानमंत्री – आपके इस अचीवमेंट को सिर्फ आपका अचीवमेंट मानता हूं, ऐसा नहीं है, ये आपका विजय आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा बन जाता है।

खिलाड़ी – सब डर रहे थे हमसे कि इंडिया के साथ फाइट आ गई, अब तो हम पहली फाइट ही हार जायेंगे, हमारा मेडल भी नहीं आयेगा।

प्रधानमंत्री – यानी मान के चलते हैं।

खिलाड़ी – हाँ सर।

प्रधानमंत्री – क्या हुआ, वो restaurant वालों से झगड़ा कर रही थी?

खिलाड़ी – हम लोगों का जो इतना अच्छा परफॉर्मेंस था, लास्ट डे था और सब जीत के गए थे और पूरा इंडिया के लोग थे। तो थोड़ा सा मुझे बुरा लग रहा। तो मैंने उनको अच्छे से बोला रिक्वेस्ट किया था सर, फिर उन्होंने मान भी लिया, अभी चेंज भी हो गया सर।

प्रधानमंत्री – इस विजय की परिस्थिति खुशी, आनंद, अपने साथियों के साथ और गेम पूरे हो चुके हैं। तो हसी मजाक मस्ती का मूड ऐसे समय उस मैप पर नजर जाना और उसको रजिस्टर करना और तुरंत सिर्फ मेडल लेते समय देश खड़ा हो जाता है ऐसा नहीं, भीतर से देश का भाव मैं सच बताता हूँ ये वीडियो सामान्य नहीं है आपका, लंबे समय तक लोगों को याद रहेगा। ये बॉक्सिंग वालों से भी दुनिया के खिलाड़ी अब डरने लगे हैं।

खिलाड़ी – जरूर सर, पुरे सभी डरे हुए थे। एक के बाद एक गोल्ड मेडल गोल्ड मेडल आ रहे थे और मतलब पूरा लास्ट में ऐसे धमाका जैसा हो गया बिल्कुल। जिस तरीके से हम लोगों को सपोर्ट मिल रहा है, हमें बैक टू बैक कंपटीशन मिल रहा है वो एक बहुत बड़ी बात है और हमारे जितने भी यंग एथलीट है वो लोग सभी जैसे खेलो इंडिया स्कीम से आए हुए हैं और ये एक बहुत बड़ा changes ला रहा है पूरे स्पोर्ट्स में ही।

प्रधानमंत्री – अगर आप लोग खेलो इंडिया की प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं और प्रतिष्ठा सिर्फ वहां जाकर के रिबिन काटने से नहीं होगी। आप वैसे ही खेलेंगे जैसे एक छोटा विद्यार्थी, एक छोटा नौजवान, छोटा खिलाड़ी खेलता है। यह बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन करेगा। क्योंकि अभी तो हमें बहुत आगे जाना है, बहुत मेडल लाना है। कारगिल विजय दिवस पर किसकी विजय हुई थी?

खिलाड़ी – उस दिन कारगिल डे था वैसे और जिस दिन मैंने पाकिस्तान के साथ फाइट किया था सर, वो उसी दिन का था। तो मैं एक इंडियन आर्मी से हूं, तो मैंने उस दिन मैं पहले से बहुत वो था कि सर पाकिस्तान को हराना है। तो मैंने वो पाकिस्तान एक तरफ मैंने 5-0 से हराया, तो मैंने हमारा इंडियन आर्मी का कारगिल हीरोज़ को मैंने डेडिकेट किया किया था सर।

प्रधानमंत्री – आपको यह याद रहना और आप स्वयं फौज से हैं तो, मैं जरूर मानता हूं कि देश के वीर जवानों को आपने जो भाव प्रकट किया ना कि, मैं कारगिल के विजेताओं को मेरा मेडल समर्पित करता हूं। उसने उस विजय पर चार चांद लगा दिए और जिसको पराजित करना था उसी को किया आपने।

खिलाड़ी – वो पाकिस्तान की बात चल रही है, मुझे किस्सा याद आ गया सर। 2015 वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे और मेरी पाकिस्तान के साथ पहली फाइट आ गई थी और वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे तो मिलिट्री वाले के फोन आए कि भई पाकिस्तान से नहीं हारना है। तो फिर मैं फर्स्ट राउंड 4-1 से जीत गया। सेकंड राउंड 3-2 से जीत गया, पर दोनों के सर लग गए आपस में, तो दोनों के लग गए कट और फाइट तो मैं जीत गया।

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – उसके बाद फिर दोनों चले गए हॉस्पिटल में टांके लगवाने के लिए। फिर 2014 में आप फर्स्ट टाइम प्रधानमंत्री जी बने थे और जो हमारे साथ आर्मी का कोच गया हुआ था उसका नाम नरेंद्र राणा था और फिर वो कई देर तक सोच के मेरे को बोला कि भाईजान एक बात बोलूं, मैं हां बोलो, बोला भाईजान आपका नाम नरेंद्र है। आपके कोच का नाम नरेंद्र है, आपके प्रधानमंत्री का नाम नरेंद्र है, तो मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई है।

प्रधानमंत्री – सिर्फ आपने मेडल की संख्या बढ़ाई ऐसा नहीं है। आपने एक पीढ़ी को तैयार किया।

खिलाड़ी – मेरे मन में भी धक-धक धक-धक हो रहा है सर।

प्रधानमंत्री – आप चिंता मत कीजिए।

खिलाड़ी – पर..

प्रधानमंत्री – आप चाहें तो आपको बोलने में भी मेडल मिलने वाला है।

खिलाड़ी – मेरे फ्रेंड सर्कल में किसी ने बोला था कि मैं उनको कुछ बोलती थी भई तुम्हारे अच्छे के लिए तुम करो। तो अक्सर मुझे वो बोलते थे कि तू के मोदी ते मिल रही है?

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – हरियाणवी में बोल देते हैं सर कि क्या तू मोदी से मिली हुई है, कि तेरी बात माने। तो आज मैं आपसे मिली हूं सर। मैं उनको बोल पाऊंगी कि हां मैं मोदी जी से मिली हूं।

खिलाड़ी – कॉमनवेंल्थ गेम्स में मैंने सिल्वर मेडल जीता, फिर मैंने क्रेडिट साहब को दिया, सपना तो था एक बार मेडल जीत के लेके आने के लिए, बट ट्रेनिंग का सेंटर नहीं था, मैंने SAI आने के बाद मैं बहुत ट्रेनिंग करके मेडल जीत पा रहा, इसलिए बहुत खुशी से मैंने सर को क्रेडिट दिया था क्योंकि बहुत इंप्रूव हुआ।

प्रधानमंत्री – मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान का विषय है, मेहनत आपने की और मुझे याद किया, मैं आपका बहुत आभारी हूं दोस्त।

प्रधानमंत्री – वाराणसी में खेल तुम प्रैक्टिस कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – कैसा बना है स्टेडियम?

खिलाड़ी – सर अच्छा बना है, वहां पर मैं 10-12 दिन के लिए ट्रेनिंग करने गई थी, क्योंकि मैं मंदिर गई थी तो वहां पर ही ट्रेनिंग करके आई थी। और मैं वहां पे मतलब सेटल भी होना चाहती हूं क्योंकि मुझे काशी विश्वनाथ बहुत अच्छा लगता है सर।

प्रधानमंत्री – भोपाल में ट्रेनिंग कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – तो उज्जैन जाते थे कि नहीं?

खिलाड़ी – जी सर उज्जैन भी गई थी सर।

प्रधानमंत्री – अच्छा महाकाल के पास भी गई।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – काशी विश्वनाथ के पास हो आई एक बार।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – सावन महीना तो अभी है।

खिलाड़ी – वहां घर जाके फिर उसके बाद जाऊंगी सर।

प्रधानमंत्री – ठीक है।

खिलाड़ी – साई ने भी सर बहुत सपोर्ट किया है मुझे। इसके कारण ही मैं यहां तक पहुंची हूं सर। और मैं खेलो इंडिया स्कीम में भी थी 2018 में जो फर्स्ट खेलो इंडिया हुआ था, उसमें मेरा सिल्वर मेडल था, वहां पे भी मैंने आपको देखा था ओपनिंग सेरेमनी में, तो उसमें मेरा मेडल था, तो मेरे को स्कीम भी मिल गया और मैं यहां तक पहुंची हूं सर।

प्रधानमंत्री – स्पोर्ट्स व्यवस्था एक बात है, लेकिन देश मेडल तब प्राप्त करता है जब देश में स्पोर्ट्स कल्चर बनता है। दोस्तों आपने बहुत बड़ा काम किया है। देश का नाम रोशन किया है। आपको मैं बहुत बधाई देता हूं और आप विश्वास कीजिए आगे भी आप विजयी होंगे और फिर से एक बार यहीं पर हम मिलेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

प्रधानमंत्री – ये लगातार तीसरी बार देश को मेडल दिलवाया है।

खिलाड़ी – थैंक यू सर।

प्रधानमंत्री – बहुत आशीर्वाद बेटा।

खिलाड़ी – और थैंक यू सो मच मैं सर के हाथ से लड्डू खा रही मेरा कल बर्थडे था तो आज सर के हाथ से…

प्रधानमंत्री – बहुत बधाई वाह।

प्रधानमंत्री – मुस्कुराओ यार ।

प्रधानमंत्री – जो खेलेगा वो खिलेगा।