पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान भारत के बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से एक परिवर्तनकारी पहल के रूप में उभरा है: प्रधानमंत्री
गतिशक्ति के कारण भारत विकसित भारत के हमारे सपने को पूरा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के 3 वर्ष पूरे होने की सराहना की है।

प्रधानमंत्री ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल की एक पोस्ट और MyGov की एक थ्रेड पोस्ट को एक्स पर साझा करते हुए लिखा:

“पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान भारत के बुनियादी ढांचे में क्रांति लाने के उद्देश्य से एक परिवर्तनकारी पहल के रूप में उभरा है। इसने मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाया है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में तेज़ और अधिक प्रभावी विकास हुआ है।

विभिन्न हितधारकों के निर्बाध एकीकरण से लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा मिला है, विलंब कम हुआ है और कई लोगों के लिए नए अवसर उत्पन्‍न हुए हैं।”

“गतिशक्ति के कारण भारत विकसित भारत के हमारे सपने को पूरा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है यह प्रगति, उद्यमशीलता और नवाचार को प्रोत्साहित करेगा।”

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
Cabinet approves ₹8,970-crore Guwahati-Tezpur highway project in Assam

Media Coverage

Cabinet approves ₹8,970-crore Guwahati-Tezpur highway project in Assam
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
प्रधानमंत्री ने निःस्वार्थ सेवा भावना के महत्व को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
August 07, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने निःस्वार्थ सेवा के गुण और दूसरों के कल्याण के लिए बिना किसी अपेक्षा के कार्य करने के महान आदर्श को दर्शाने वाला एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया:

"किं चन्द्रमाः प्रत्युपकारलिप्सया करोति गोभिः कुमुदावबोधनम्।

स्वभाव एवोन्नतचेतसां सतां परोपकारव्यसनं हि जीवितम्॥"

प्रधानमंत्री ने ‘एक्‍स’ पर पोस्ट किया:

किं चन्द्रमाः प्रत्युपकारलिप्सया करोति गोभिः कुमुदावबोधनम्।

स्वभाव एवोन्नतचेतसां सतां परोपकारव्यसनं हि जीवितम्॥