दिन: 02 (3 और 4 अगस्‍त 2014)

लोग मिले: राष्‍ट्रपति डा. रामबरन यादव, नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला, संविधान सभा के अध्‍यक्ष नेपाल के विदेश मंत्री महेन्‍द्र बहादुर पांडेय और नेपाली व्‍यवसायिक समुदाय और राजनीतिक दलों के अन्‍य नेता

श्री नरेन्‍द्र मोदी ने पशुपति नाथ मंदिर में सोमवार, 4 अगस्‍त 2014 को पूजा की

 प्रधानमंत्री ने अपनी दूसरी द्विपक्षीय यात्रा इस क्षेत्र में नेपाल में करते हए सहयोग बढ़ाने और द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने की प्रबिद्धता जतायी।

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भारत के पड़ोसी देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की दिशा में एक और सकारात्‍मक कदम बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने दो दिवसीय (3 से 4 अगस्‍त 2014) नेपाल यात्रा की। उन्‍हें नेपाल की सरकार ने वार्ताएं आगे बढ़ाने तथा रिश्‍ते मजबूत करने के लिए औपचारिक तौर पर आमंत्रित किया था।  नेपाल की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा, “यह सीता और जनक की भूमि है, नेपाल-भारत संबंध हिमालय और गंगा जितने पुराने हैं।”

इससे पूर्व नेपाल रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने हिमालयी राष्‍ट्र की यात्रा से पूर्व अपने भाव प्रकट किए। उन्‍होंने इस बात पर प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त की कि प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के कुछ ही सप्‍ताह के भीतर उन्‍हें नेपाल की यात्रा का अवसर मिला। यात्रा पर जाने से पहले उन्‍होंने कहा, “मेरी यात्रा हमारी प्रकृति, इतिहास, संस्‍कृति, अध्यात्म और धर्म की साझा विरासत को प्रदर्शित करती है। यह यात्रा नेपाल के साथ हमारे संबंधों की मेरी सरकार की उच्‍च प्राथमिकता और हमारे संबंधों को एक नये स्‍तर पर ले जाने के निश्चय को उजागर करती है।”

किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की बीते 17 साल में यह पहली द्विपक्षीय नेपाल यात्रा है। यात्रा के दौरान अपने विशेष विमान में प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं अपनी यात्रा के दौरान नेपाली नेतृत्‍व के साथ विभिन्‍न मुद्दों पर व्‍यापक विचार विमर्श करूंगा।मैं हमारे दो तेजी से उभरते देशों के बीच नयी सदी में नये संबंधों की शुरुआत के लिए नेपाल के नेतृत्‍व के साथ मिलकर काम करने की उम्‍मीद करता हूं।”

उन्‍होंने कहा, “हम व्‍यापार और निवेश, जलविद्युत, कृषि और कृषि प्रसंस्‍करण, पर्यावरण, पर्यटन, शिक्षा, संस्‍कृति और खेल सहित प्रमुख क्षेत्रों में अपने द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत बनाने के लिए कदमों की पहचान करेंगे। मैं नेपाली नेतृत्‍व और उनके व्‍यवासियक नेताओं के साथ इस बात पर भी विचार विमर्श करूंगा कि हम दोनों देशों के युवाओं के लिए नये अवसर सृजित करने और उन्‍हें सशक्‍त बनाने के लिए नए डिजिटल युग का किस तरह पूरी तरह दोहन कर सकते हैं।”

नेपाल की दो दिवसीय यात्रा 

प्रधानमंत्री पहले विदेशी नेता हैं जिन्‍होंने रविवार 3 अगस्‍त 2014 को नेपाल की संविधान सभा-सह-संसद को संबोधित किया। प्रधानमंत्री के साथ इस अवसर पर राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और विदेश सचिव सुजाता सिंह भी मौजूद थीं।

नेपाल के प्रधानमंत्री श्री सुशील कोइराला जिन्‍होंने अपने भारतीय समकक्ष के शपथ ग्रहण समारोह में पधारकर शोभा बढ़ाई थी, श्री मोदी के स्‍वागत के लिए काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्‍ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे।

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एक तीर्थयात्री के तौर पर नेपाल की अपनी यात्रा को याद करते हुए उन्‍होंने अपना भाषण हिन्‍दी में शुरु करने से पहले नेपाली भाषा में कहा, “मैं इस देश में मित्र के तौर पर आने पर खुश हूं और मैं यहां प्रधानमंत्री के रूप में आकर खुश हूं।”

उन्‍होंने जैसे ही नेपाली भाषा में संसद को संबोधित करना शुरु किया तो उनके शब्‍द नेपाली लोगों के दिल को छू गए।

अपनी यात्रा के बारे में उन्‍होंने कहा, “जिस दिन से मैं प्रधानमंत्री बना, नेपाल के साथ रिश्‍ते मजबूत करना मेरी सरकार की शीर्ष प्राथमिकता रही है।”

https://www.rediff.com/news/slide-show/slide-show-1-want-to-make-nepal-a-hit-top-10-quotes-from-modis-speech-in-nepals-parliament/20140803.htm

नेपाली संसद को संबोधित करते हए

नेपाली संसद को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने नेपाल को 10,000 करोड़ रुपये की ऋण सहायता देने की घोषणा की। विकास का हर फार्मूला जानने वाले व्‍यक्ति ने जलविद्युत की अपार क्षमता वाले नेपाल के विकास के लिए HIT फार्मूला दिया। भारतीय प्रधानमंत्री ने HIT का मतलब बताते हुए कहा- H: हाइवे, I: आई-वे और T- ट्रांसवेज। श्री मोदी ने कहा कि इन तीनों का एक साथ मिलन से देश के तीव्र विकास का मार्ग प्रशस्‍त होगा और भारत जल्‍द से जल्‍द यह तोहफा देना चाहता है।

श्री नरेन्‍द्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री कोइराला और विदेश मंत्री महेन्‍द्र बहादुर पांडेय से रविवार को नेपाल में बातचीत की।

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बैठक के बाद नेपाल के विदेश मंत्री महेन्‍द्र बहादुर पांडेय ने कहा, “मोदी परिणामोन्‍मुखी व्‍यक्ति हैं और वह आर्थिक समृद्धि को प्राथमिकता देते हैं। वह नेपाल के साथ संबंध मजबूत करना चाहते हैं।”

नेपाल के प्रधानमंत्री के विदेश नीति सलाहकार, दिनेश भट्टराई के अनुसार प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने भारतीय और नेपाली सरकार के अधिकारियों की मौजूदगी में कोइराला से कहा,“मेरी यात्रा विकास और दोनों देशों के बीच एक नई शुरुआत पर केंद्रित है।”

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श्री नरेन्‍द्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री को आश्‍वस्‍त किया कि नेपाल में जारी शांतिवार्ताएं नेपाल की जरूरत के हिसाब से पूरी होंगी क्‍योंकि यह पूरी तरह नेपाल का मामला है।

दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मौजूदगी में अधिकारियों ने तीन सहमति पत्रों पर हस्‍ता‍क्षर किए:

  • नेपाल में पर्यटन विकास
  • नेपाल में गोइत्रे नियंत्रण कार्यक्रम
  • सरकारी नियंत्रण वाले टीवी चैनल दूरदर्शन और नेपाल टेलीविजन के बीच परस्‍पर सहयोग

उन्‍होंने पंचेश्‍वर विकास प्राधिकरण के मुद्दे पर भी शर्तों का आदान प्रदान किया।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने हिमालयी राष्‍ट्र को सड़कें और जलविद्युत परियोजनाओं में में मदद के बतौर एक अरब डालर की मदद की घोषणा की।

श्री नरेन्‍द्र मोदी ने उम्‍मीद जतायी कि भारत-नेपाल संबंध दक्षिण एशिया की साझेदारी और समृद्धि के लिए “आदर्श और प्रेरकबल” का काम करेंगे।

श्री नरेन्‍द्र मोदी ने सोमवार 4 अगस्‍त, 2014 को प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की 

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मंदिर में दर्शन करने के बाद अपनी प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त करते हुए उन्‍होंने कहा, “आज सुबह पशुपतिनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करने का आशीर्वाद प्राप्‍त हुआ।”

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उन्‍होंने राष्‍ट्रपति डा. रामबरन यादव से भी मुलाकात की। डा. रामबरन यादव ने नेपाली भाषा में प्रधानमंत्री के भाषण के संबंध में कहा, “आपने कल संसद में अपने भाषण के जरिये हमारा दिल जीत लिया है।”

इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने नेपाली राजनीतिक दलों और व्‍यवसायिक समुदाय के नेताओं से भी मुलाकात की।

इसके अलावा श्री नरेन्‍द्र मोदी ने यूनीफाइड कम्‍युनिस्‍ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओवादी) के अध्‍यक्ष पुष्‍प कमल दहल से भी मुलाकात की।

नेपाल यात्रा के दौरान जीत बहादुर को उनके बिछुड़े परिवार से मिलाया

श्री मोदी की नेपाल यात्रा व्‍यक्तिगत मामले में भी एक ऐतिहासिक यात्रा थी। नेपाल की उनकी यात्रा के दौरान उनके साथ नेपाल का एक लड़का भी था जिसकी मदद प्रधानमंत्री बीते कई वर्षों से कर रहे हैं। उन सबके लिए यह बेहद भावुक क्षण था।

श्री मोदी ने ट्वीट किया, “… काफी यम पहले मेरी मुलाकात एक असहाय बालक से हुई जिसका नाम जीत बहादुर था। उसे अपने बारे में कुछ भी पता नहीं था और उसे कोई भी भाषा ठीक से समझ नहीं आती थी। भगवान की कृपा से मैने उसके भविष्‍य की चिंता करना शुरु किया। जल्‍द ही उसकी रुचि पढ़ाई में जाग गई और उसने गुजराती भाषा भी समझनी शुरु कर दी।

जीत बहादुर ने कई वर्ष पूर्व अपना घर छोड़ा था। वह किसी भी तरह अहमदाबाद पहुंचा जहां उसकी मुलाकात श्री मोदी से हुई। इसके बाद श्री मोदी ने उसकी शिक्षा की जिम्‍मेदारी संभाली। कुछ साल पहले नेपाल का एक व्‍यवसायी श्री मोदी से मिला। उन्‍होंने व्‍यवसायी को बताया‍ कि अगर इस लड़के के परिवार को पता चल जाये तो वह नेपाल की यात्रा पर अवश्‍य जायेंगे। निश्चित समय में परिवार का पता लगा लिया गया और जीत बहादुर को उसके बिछुड़े परिवार से मिलाया। इस यात्रा के दौरान श्री मोदी को नेपाल यात्रा पर जीत बहादुर को साथ ले जाने और उसके परिवार से मिलने का अवसर प्राप्‍त हुआ।

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भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के स्‍वागत के लिए उत्‍सुक था नेपाल 

नेपाल के लोगों को यह यात्रा शुरु होने से पहले ही काफी उम्‍मीदें थीं। सुशील कोइराला के विदेश संबंध सलाहकार दिनेश भट्टराई ने कहा, “मोदी की यात्रा के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।”

शहर के प्रमुख रास्‍तों और गलियों में भारत और नेपाल के झंडे लगाए गये थे।

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नेपाल में इस इस यात्रा को लेकर लोग इतने उत्‍साहित थे कि वे श्री मोदीजी की एक झलक पाने को सड़कों पर खड़े हो गये। श्री मोदी ने भी लोगों से जुड़ने के विशेष प्रयास किए। यह बेहद प्‍यारा नजारा था।

श्री नरेन्‍द्र मोदी को विशेष स्‍वागत देते हुए नेपाल के स्‍पीकर सुभाष चंद्र नामबांग ने इलाम से एक विशेष चाय का आर्डर दिया। इलाम, नेपाल में एक जगह है जो विश्‍वस्‍तरीय चाय पैदा करता है।

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की नेपाल यात्रा को एक महत्‍वपूर्ण राजनियक कदम तथा हिमालयी राष्‍ट्र के साथ रिश्‍ते सुधारने की दिशा में एक सकारात्‍मक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

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जब राष्ट्र प्रथम के संकल्प वाली सरकार होती है, तो राष्ट्रीय नायकों को भी उचित सम्मान मिलता है: पीएम मोदी
July 06, 2026
हम भारत के उस महान सपूत को श्रद्धांजलि देते हैं, जिनकी राष्ट्रीय एकता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है: पीएम
जब सरकार, 'राष्ट्र प्रथम' के संकल्प वाली होती है, तो राष्ट्रीय नायकों को भी उचित सम्मान मिलता है: पीएम
डॉ. मुखर्जी ने देश में दो संविधान, दो प्रधानमंत्री और दो झंडों की बात का पुरज़ोर विरोध किया: पीएम
वे अच्छी तरह समझते थे कि राष्ट्र-निर्माण का मूल आधार संस्थानों का निर्माण है: पीएम
डॉ. मुखर्जी ने ऐसे राष्ट्रीय संस्थानों की नींव रखी, जो आने वाले दशकों तक भारत की आर्थिक ताकत बने: पीएम

केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी अमित भाई शाह, गजेंद्र सिंह शेखावत, पश्चिम बंगाल के ऊर्जावान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, भाजपा के वरिष्ठ सदस्य, हम जैसे लाखों कार्यकर्ताओं की प्रेरणा, श्रीमान माखनलाल जी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, श्री शॉमिक भट्टाचार्य, उपस्थित जनप्रतिनिधिगण, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सबको मेरा नमस्कार!

मैं अपने पूर्व नियोजित कार्यक्रम के कारण, इस समय प्रवास पर हूं। लेकिन टेक्नोलॉजी की मदद से इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में आपसे जुड़ रहा हूं।

साथियों,

आज देश की धरती, पश्चिम बंगाल की धरती, अपने एक महान सपूत, एक महान देशभक्त, भारत की अखंडता के लिए समर्पित एक युगदृष्टा को श्रद्धापूर्वक स्मरण कर रही है। आज हम उस विचार बीज का गुणगान कर रहे हैं, जो वर्तमान समय में चारों तरफ फल-फूल रहा है। जो, आधुनिक भारत को दिशा देने में बड़ी भूमिका निभा रहा है।

साथियों,

जहाँ जमीन से जुड़ी हुई वैचारिक शक्ति हो, साथ-साथ इरादे मजबूत हो और नीयत साफ़ हो और जब नए संकल्प के साथ संपूर्ण समर्पण हो और ये सारी कड़ियां जब आपस में जुड़ जाती हैं, तो संकल्प की सिद्धि होती ही होती है। और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने ऐसा ही जीवन जी करके दिखाया है। मैं डॉक्टर मुखर्जी की 125वीं जन्मजयंती के अवसर पर उन्हें नमन करता हूं, अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

साथियों,

आज का यह कार्यक्रम इस बात का भी साक्षी है कि जब राष्ट्र प्रथम के संकल्प वाली सरकार होती है, तो राष्ट्र नायकों को सम्मान भी मिलता है और उनके विजन पर चलने का भी प्रयास होता है। डॉक्टर मुखर्जी की 125वीं जन्मजयंती को, हमारी सरकार दो वर्षों के राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मना रही है। यह पिछले वर्ष 6 जुलाई को शुरू हुए थे और अगले साल 6 जुलाई तक चलेंगे। और अब तो बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद इस राष्ट्रीय सम्मान को, एक प्रेरणा पुरुष को याद करने में बंगाल ने अपने आप में रौनक बढ़ा दी है। कुछ दिन पहले ही 20 जून को भव्य तरीके से पश्चिम बंग दिवस का आयोजन किया गया था। यह बंगाल की धरती, बंगाल की विरासत को प्रणाम था। आज का यह कार्यक्रम अपनी विरासत के प्रति उसी सम्मान का हिस्सा है। मैं पश्चिम बंगाल सरकार को इतने भव्य कार्यक्रम के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

डॉक्टर मुखर्जी का जीवन, एक विचार से जन-आंदोलन तक की परिणति का प्रेरक है। उन्होंने भारत में एक वैचारिक आंदोलन को जन्म दिया। आप देखिए, जिस समय जनसंघ की स्थापना हुई थी, तब हर तरफ कांग्रेस का ही बोलबाला था, कांग्रेस का ही वर्चस्व दिखाई देता था। एक ऐसे दौर में, जब अलग विचार के लिए कोई जगह ही नहीं थी, बड़ी मुश्किल था पैर रखने के लिए भी जगह मिल जाए, तब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने उन सारी परिस्थितियों को चुनौती देते हुए एक नए विचार का साहस किया। यह केवल एक संगठन बनाने का निर्णय नहीं था, एक राजनीतिक दल को जन्म देने का काम नहीं था। यह लोकतंत्र में वैचारिक विविधता, राष्ट्रीय चिंतन और जनभागीदारी पर उनके अटूट विश्वास की अभिव्यक्ति थी। इसी विश्वास से भारतीय जनसंघ का जन्म हुआ। और साथियों, कोई भी विचार केवल स्थापना से अमर नहीं होता। विचार तब अमर होता है, जब पीढ़ियाँ उसे अपने जीवन से सींचती हैं। भारतीय जनसंघ के उस छोटे से दीये को जलाए रखने के लिए लक्षावधि कार्यकर्ताओं ने अपना जीवन खपा दिया। पल-पल, तिल-तिल, लाखों कार्यकर्ताओं के तप, त्याग और समर्पण ने, उस दीये की लौ को कभी बुझने नहीं दिया। आज वह दीया अपने मूल स्वरूप में भले न दिखाई देता हो, भारतीय जनसंघ आज उसी रूप में भले न हो, लेकिन उस दीये का जो प्रकाश-पुंज था, वो आज करोड़ों देशवासियों के विश्वास का प्रकाश बनकर फैल रहा है। उसी प्रकाश का विस्तार आज पूरे देश में खिले हुए करोड़ों कमल के रूप में दिखाई देता है। कभी जो भारतीय जनसंघ था, वही आज भारतीय जनता पार्टी के रूप में विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति बनकर जनसेवा कर रहा है।

साथियों,

अक्सर हम देखते हैं कि समय के साथ कुछ विचारों का आकर्षण फीका पड़ता जाता है। लेकिन आप सोचिए, यह कितना सशक्त विचार-बीज डॉक्टर मुखर्जी ने रोपा है कि आज इतने साल बाद भी उसका इतनी तेजी से विस्तार हो रहा है। मुझे पूरा विश्वास है, जब आने वाली पीढ़ियाँ भारतीय जनता पार्टी की इस यात्रा का इतिहास लिखेंगी, इसका अध्ययन करेंगी, तब वह निश्चित रूप से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों, उनके साहस और उनकी दूरदृष्टि का उल्लेख करेंगी। और मैं फिर कहूंगा, बंगाल के लिए तो यह डबल खुशी की बात है। एक तो डॉक्टर मुखर्जी की 125वीं जन्मजयंती और दूसरा, बंगाल में यह आयोजन, उनके विचार पुंज से निकली भाजपा सरकार में ये भव्य उत्सव हो रहा है। पश्चिम बंगाल की जनता की तरफ से अपने महान सपूत को ये बहुत ही आत्मीय श्रद्धांजलि है।

साथियों,

संसद में अपने एक भाषण में डॉक्टर मुखर्जी ने कहा था और यह डॉक्टर मुखर्जी का यह वाक्य आज भी हमें प्रेरणा देता है। डॉक्टर मुखर्जी ने पार्लियामेंट में कहा था- राष्ट्रीय एकता के धरातल पर ही सुनहरे भविष्य की नींव रखी जा सकती है। और देखिए, आज देश गर्व से कह सकता है कि डॉक्टर मुखर्जी अंतिम सांस तक इसी विश्वास को वो जीते थे, उन्होंने इसे जीया था। 1947 में जब देश का विभाजन हुआ, लगभग तय हो चुका था, तब एक और संकट सामने था। पूरे के पूरे बंगाल को ही भारत से अलग करने की साजिशें रची जा रही थीं। तब डॉक्टर मुखर्जी इन साजिशों के सामने चट्टान बनकर खड़े हो गए। उन्होंने जनमत तैयार किया, राजनीतिक संघर्ष किया और यह सुनिश्चित किया कि पश्चिम बंगाल भारत का अभिन्न हिस्सा बना रहे और तब डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने हुंकार भरी थी। उनके शब्द थे- कांग्रेस देश भाग कोरेछे, आमी पाकिस्तान के भाग कोरेछी। यानि कांग्रेस ने देश का बंटवारा किया, और मैंने पाकिस्तान का ही बंटवारा कर दिया।

साथियों,

यह जो हुंकार है, इसकी जो ताकत है, इसमें जिस बड़ी राजनीतिक इच्छाशक्ति के दर्शन होते हैं, उसका एहसास हमें तब भी होता है, जब हम आज की परिस्थितियों को देखते हैं।

साथियों,

डॉक्टर मुखर्जी, एक भारत श्रेष्ठ भारत के लिए पूरी तरह से समर्पित थे। और इसलिए, जब देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान की बात हुई, तो डॉक्टर मुखर्जी ने इसका भी जमकर विरोध किया। उन्होंने देश को मंत्र दिया- एक देशे दुई बिधान, दुई प्रोधान एबॉन्ग दुई निशान, आमरा कोखोनो मेने नेबो ना यानि "एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान— नहीं चलेंगे, नहीं चलेंगे।" यह केवल एक नारा नहीं था। यह समान अधिकार, समान संविधान और समान राष्ट्रीय चेतना का आह्वान था। उन्होंने अपने सिद्धांतों के लिए संघर्ष किया, जेल गए और अंततः कश्मीर के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। आज हमारी सरकार को इस बात का गर्व है कि आर्टिकल 370 की दीवार गिराकर हमने डॉक्टर मुखर्जी का सपना पूरा किया है।

साथियों,

आज जब हम एक भारत, श्रेष्ठ भारत की बात करते हैं, तो यह उसी राष्ट्रीय दृष्टि का विस्तार है, जिसे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपने जीवन से परिभाषित किया। एक ऐसा भारत-जहाँ उत्तर और दक्षिण के बीच कोई दूरी न हो, जहाँ पूर्व और पश्चिम, समान अवसरों के सहभागी हों, जहाँ हर राज्य अपनी विशिष्ट पहचान के साथ भारत की सामूहिक शक्ति बने। जहाँ हर नागरिक एक ही संविधान, एक ही राष्ट्रीय भावना और एक ही भविष्य के संकल्प से जुड़ा हो। मुझे खुशी है कि डॉक्टर मुखर्जी की प्रेरणा से आज भारत का संविधान पूरे देश में आन-बान-शान के साथ लागू है और कोटि-कोटि देशवासियों को प्रेरणा दे रहा है।

साथियों,

डॉक्टर मुखर्जी, इस बात को अच्छे से समझते थे कि संस्थाओं के निर्माण में ही राष्ट्र निर्माण का तत्व छुपा है। मात्र 33 वर्ष की आयु में डॉ. मुखर्जी, कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने। लेकिन उन्होंने उस पद को केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं माना। उन्होंने विश्वविद्यालय को भारत के भविष्य का निर्माण करने वाली संस्था के रूप में देखा। उन्होंने शिक्षा को गुलामी की सोच के दायरे के बाहर निकालने का प्रयास किया। उन्होंने कहा- बोंगो-जातिर आत्तोशोम्मान पुनोर-उद्धार, एबॉन्ग मातृ-भाषार माध्योमे शिख्खार प्रोशार एई आमादेर प्रोधान लोक्खो होवा उचित! यानि बंगाल के लोगों का आत्मसम्मान लौटाना और मातृभाषा में पढ़ाई, यह हमारा प्रथम उद्देश्य है। उनका विश्वास था कि यदि भारत को आत्मविश्वासी राष्ट्र बनना है, तो उसकी शिक्षा भी भारतीय आत्मा से जुड़ी होनी चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने भारतीय भाषाओं को सम्मान दिया। आज हमें इस बात का भी गर्व है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्थानीय भाषा में पढ़ाई पर बल दिया जा रहा है। जो सपना डॉक्टर मुखर्जी ने देखा था, वो हमारी सरकार ने पूरा किया है।

साथियों,

स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग मंत्री के रूप में उन्होंने औद्योगिक विकास का वृहद विजन रखा था। उन्होंने ऐसे राष्ट्रीय संस्थानों की नींव रखी, जो आने वाले दशकों तक भारत की आर्थिक शक्ति बनें। चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स ने भारत की रेल व्यवस्था को नई गति दी। सिंदरी फर्टिलाइजर प्लांट ने कृषि आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया। दामोदर वैली कॉरपोरेशन ने ऊर्जा और सिंचाई का नया अध्याय लिखा। इंडस्ट्रियल फाइनेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (IFCI) ने भारतीय उद्योगों को वित्तीय आधार दिया।

साथियों,

उनके लिए उद्योग, फैक्ट्रियां, यह केवल कुछ कल कारखाने नहीं थे। विश्वविद्यालय, केवल डिग्री देने वाले संस्थान नहीं थे। रिसर्च इंस्टीट्यूशंस, केवल वैज्ञानिक प्रयोगों की जगह नहीं थे। उनके लिए ये सभी, राष्ट्र निर्माण के साधना केंद्र थे। डॉक्टर मुखर्जी, ऐसी संस्थाओं के पक्षधर थे, जो टैलेंट को अवसर दें। ऐसी शिक्षा, जो इनोवेशन को प्रोत्साहन दे। ऐसे उद्योग, जो आत्मनिर्भरता का आधार बने। और ऐसी व्यवस्था, जो आने वाली पीढ़ियों को और अधिक सशक्त भारत सौंप सके। और यही स्पिरिट, आज विकसित भारत की भी प्रेरणा है।

साथियों,

आज के इस अवसर पर मैं, बंगाल के, पूरे देश के मेरे युवा साथियों से कहूंगा, डॉक्टर मुखर्जी ने एक भारत के लिए अपना जीवन समर्पित किया। हम सबको श्रेष्ठ भारत के लिए जीना है, हमें मिलकर विकसित भारत का संकल्प सिद्ध करना है। हमें देश को आत्मनिर्भर बनाना है। इसी आह्वान के साथ, एक बार फिर से मैं डॉक्टर मुखर्जी को नमन करता हूं। मैं उनके ही शब्दों में अपनी बात समाप्त करूंगा। यह डॉक्टर मुखर्जी के शब्द हैं, यह उनकी भाव भंगिमा है- जे काज एई हाते नाओ ना केनो, ता अत्योंतों गुरुत्तो शहोकारे कोरते होबे जो भी काम आरंभ करो, उसे पूरी गंभीरता से करो, तन्मयता से करो, पूरी निष्ठा से करो, कोई भी काम अधूरा ना छोड़ो, उसे जरूर पूरा करो। डॉक्टर मुखर्जी के शब्दों में यह प्रवाहित भावना के साथ, इनके ही इन शब्दों के साथ आप सभी को भी बहुत-बहुत शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद!