प्रधानमंत्री का जन दर्शन कार्यक्रम पांडेपुर चौराहे से शुरू होकर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ पर हुआ ख़त्म

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम के दूसरे दिन रविवार को भी काशी की गलियों की यात्रा की। यात्रा खत्म होने के बाद श्री मोदी ने काशी विद्यापीठ में काशीवासियों का आभार जताया। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘’ आपके लिए जितना करूं कम है। आपकी ये दी हुई शक्ति, आपका आशीर्वाद काशी की, पूर्वांचल की, उत्तर प्रदेश और हिंदुस्तान की सेवा करने के लिए मुझे अद्भुत ताकत दे रही है।‘’

‘जनता दर्शन’ यात्रा की शुरुआत पुलिस लाइन से हुई। यात्रा का पहला पड़ाव पांडेयपुर था जहां बड़ी तादाद में लोग आशीर्वाद देने पहुंचे थे। प्रधानमंत्री ने भी खुली गाड़ी में सवार होकर काशी की जनता का अभिवादन स्वीकार किया। यात्रा के दौरान भारी संख्या में बैनर, पोस्टर, कटआउट्स और बीजेपी के झंडे से अलग ही दृश्य उपस्थित हो रहा था।

प्रधानमंत्री की यात्रा पांडेयपुर से आगे बढ़ने के बाद हुकुलगंज पहुंची। पांच किलोमीटर की ये ‘जनता दर्शन’ यात्रा  चौकाघाट, तेलियाबाग, पटेल धर्मशाला  होते हुए मलदहिया में खत्म हुई। इस बीच प्रधानमंत्री ने अपनी गाड़ी से ही देश के पहले गृहमंत्री लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा को नमन किया। यात्रा खत्म होने के बाद श्री मोदी ने कहा, ‘’आज काशी वासियों के दर्शन करने का जो दृश्य था, इससे पहले कभी नहीं अनुभव किया।‘’

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प्रधानमंत्री ने निःस्वार्थ दान के गुण को उजागर करने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
April 23, 2026

The Prime Minister, Shri Narendra Modi, shared a Sanskrit Subhashitam highlighting the virtue of Selfless Giving:

“पद्माकरं दिनकरो विकचीकरोति चन्द्रो विकासयति कैरवचक्रवालम्।

नाभ्यर्थितो जलधरोऽपि जलं ददाति सन्तः स्वयं परहितेषु कृताभियोगाः।।"

The Subhashitam conveys, "The sun helps the lotus bloom, and the moon does the same for the lilies. Clouds shower water on their own; similarly, noble people do good to others without any expectation."

The Prime Minister wrote on X;

“पद्माकरं दिनकरो विकचीकरोति चन्द्रो विकासयति कैरवचक्रवालम्।

नाभ्यर्थितो जलधरोऽपि जलं ददाति सन्तः स्वयं परहितेषु कृताभियोगाः।।"