प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड के सांसदों से मुलाकात की और बाढ़ को ध्‍यान में रखते हुए दोनों राज्यों की स्थिति पर चर्चा की।

श्री मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार बाढ़ से उत्पन्न चुनौतियों के समाधान के लिए संबंधित राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करती रहेगी।

प्रधानमंत्री ने सभी के कुशल मंगल और सुरक्षित रहने की प्रार्थना की।

श्री मोदी ने एक पोस्ट में लिखा,

“अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड के सांसदों से मुलाकात की। हमने इन राज्यों में बाढ़ से उत्पन्न स्थिति पर चर्चा की। केंद्र सरकार चुनौतियों के समाधान के लिए संबंधित राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करती रहेगी। सभी के कुशल मंगल और सुरक्षित रहने की प्रार्थना करता हूं।”

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प्रधानमंत्री ने प्रकृति के प्रति सम्मान और पर्यावरण संरक्षण पर प्रकाश डालते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
July 30, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि प्रकृति, पर्यावरण और संपूर्ण सृष्टि के प्रति सम्मान हमारे अस्तित्व का मूल आधार है। उन्होंने सभी से स्वस्थ, समृद्ध और मजबूत राष्ट्र के निर्माण में कृतज्ञता और निस्वार्थ सेवा की भावना के साथ भाग लेने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने एक संस्‍कृत सुभाषितम् साझ किया

“शं नो द्यावापृथिवी पूर्वहूतौ शमन्तरिक्षं दृशये नो अस्तु।

शं न ओषधीर्वनिनो भवन्तु शं नो रजसस्पतिरस्तु जिष्णुः॥”

सुभाषितम् में कहा गया है कि सृष्टि के आरंभ से ही पूजनीय द्युलोक और पृथ्वी हमारे लिए सदा श्रद्धेय रहे हैं। ईश्‍वर करे, पृथ्वी और सूर्य के बीच का मध्यवर्ती भाग हमारे जीवन को लाभप्रद और ज्ञानवर्धक बनाए। सभी औषधीय जड़ी-बूटियां और वन के पौधे हमें स्वास्थ्य, पोषण एवं सुख प्रदान करें। समस्त लोकों के सर्वव्यापी और विजयी स्वामी हमें सदा कल्याण, शांति तथा समृद्धि प्रदान करें।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर लिखा;

“प्रकृति, पर्यावरण और समस्त सृष्टि का सम्मान हमारे अस्तित्व के मूल में है। आइए, हम इनके प्रति पूरी कृतज्ञता और सेवाभाव के साथ एक स्वस्थ, समृद्ध और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में सहभागी बनें।

शं नो द्यावापृथिवी पूर्वहूतौ शमन्तरिक्षं दृशये नो अस्तु।

शं न ओषधीर्वनिनो भवन्तु शं नो रजसस्पतिरस्तु जिष्णुः॥”