"PM Modi visits Airbus facility in Toulouse, France"
"PM Narendra Modi visits the Centre National d'Etudes Spatiales"
"Shri Modi remembers the valour and sacrifice of Indian soldiers martyred in First World War"
"Shri Narendra Modi reaches out to Indian Community at Carrousel du Louvre in Paris"
"India is the most youthful land
"प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस के टूलूज़ में एयरबस सुविधा का दौरा किया"
"प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस सरकार की अंतरिक्ष एजेंसी (Centre National d'Etudes Spatiales) का दौरा किया"
"श्री मोदी ने पहले विश्व युद्ध में शहीद भारतीय सैनिकों की वीरता और बलिदान को याद किया"
"श्री नरेन्द्र मोदी पेरिस के करोसेल डू लोवर में भारतीय समुदाय से मिले"
"भारत युवाओं का देश है

11 अप्रैल 2015 को फ्रांस में प्रधानमंत्री श्री मोदी का दूसरा दिन था। इस दिन कई गतिविधियां हुई और श्री नरेन्द्र मोदी दिन की शुरुआत में सबसे पहले टूलूज़ स्थित विमानन हब गये।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फ्रांस के विदेश मंत्री श्री लॉरेंट फेबिअस भी थे। श्री मोदी एयरबस सुविधा की यात्रा का अवसर मिलने पर अत्यंत उत्साहित थे। टूलूज़ के लिए निकलने से पहले उन्होंने ट्वीट भी किया था।

— Narendra Modi (@narendramodi) April 11, 2015

एयरबस सुविधा में श्री नरेन्द्र मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। उन्होंने पूरे एयरबस सुविधा का जायजा लिया और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवीनतम प्रयोगों के बारे में बताया। प्रधानमंत्री एयरबस द्वारा ‘मेक इन इंडिया’ पहल को दिये गए प्रोत्साहन से अत्यंत खुश थे। उन्होंने एयरबस हब की अपनी यात्रा की तस्वीरें ट्विटर पर साझा की।

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श्री नरेन्द्र मोदी ने टूलूज़ में फ्रांस सरकार अंतरिक्ष एजेंसी (सीएनईएस)का भी दौरा किया। प्रधानमंत्री मोदी को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में आविष्कार और तकनीकी उन्नयन से संबंधित नवीनतम जानकारी दी गई। उन्होंने वहां संस्थान की इमारत और नवीनतम यन्त्र एवं उपकरण देखे।

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सीएनईएसमेंश्री नरेन्द्र मोदी ने अपने प्रशंसकों के साथ कुछ हँसी के पल बिताये। उन्होंने सेल्फी क्लिक किया और कई युवा शोधकर्ताओं के साथ हंसमुख बातचीत की।

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प्रधानमंत्री ने Midi-Pyrénées क्षेत्र के निर्वाचित प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की।

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बाद में उसी दिन, प्रधानमंत्री ने नेव-शैपल स्मारक का दौरा किया। श्री मोदी ने पहले विश्व युद्ध में शहीद भारतीय सैनिकों की वीरता और बलिदान को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें याद किया। सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए प्रधानमंत्री ने आगंतुक डायरी में लिखा और अपनी यात्रा के दौरान गढ़वाल प्रथम विश्व युद्ध के स्मारक की प्रतिकृति भेंट की।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ युवाओं के साथ मिलकर नेव-शैपल स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। सब ‘शहीदों अमर रहो अमर रहो’ का नारा लगा रहे थे।

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शाम में श्री नरेन्द्र मोदी ने पेरिस के करोसेल डू लोवर में भारतीय समुदाय से मिले। उत्साह से लबरेज वहाँ सभी प्रधानमंत्री का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। भारी संख्या में इकट्ठे हुए लोग श्री मोदी की एक झलक पाना चाहते थे और उन्हें सुनना चाहते थे। प्रधानमंत्री के पहुंचने के बाद दर्शकों ने अपार खुशी प्रकट की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्होंने भारत को आगे ले जाने के सपने के साथ फ्रांस का दौरा किया। उन्होंने कहा कि पहले वह एक पर्यटक के रूप में फ्रांस आये लेकिन अब उन्होंने पर्यटकों को भारत आने को प्रोत्साहित करने के लिए फ्रांस का दौरा किया है।

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उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से विश्व शांति में विश्वास करता रहा है और शांति सेना में भारतीय सबसे बड़ी संख्या में हैं और भारतीय सैनिकों के त्याग को सभी अच्छी तरह से जानते हैं। श्री मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार के माध्यम से महात्मा गांधी और भगवान बुद्ध की इस जन्मभूमि को इसका उचित श्रेय देने का यह सबसे अच्छा अवसर है। उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध में भारतीय सैनिकों के बलिदान का उल्लेख किया। श्री मोदी ने फ्रांस को भारत के दीर्घकालीन भागीदारों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि अगर भारत के साथ कोई अन्याय होता था तो फ्रांस पहला देश था जो अपनी आवाज उठाता था।

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फ्रांस में ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा दिये जाने से खुश होकर प्रधानमंत्री ने कहा, “मैंने कल से मुश्किल से तीन बार ‘मेक इन इंडिया’ बोला होगा लेकिन फ्रांस के राष्ट्रपति के प्रत्येक तीसरे वाक्य में ‘मेक इन इंडिया’ का जिक्र था।” भारत को युवाओं का देश बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की युवा आबादी इसकी सबसे बड़ी ताकत है। प्रधानमंत्री के भाषण के समाप्त होने के बाद वहां सभी ‘भारत माता की जय’ का नारा लगा रहे थे।

अपने फ्रांस दौरे की समाप्ति पर उन्होंने यह आशा जताई कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सामरिक संबंधों और मजबूत होंगे। उन्होंने यह इच्छा जताई कि भारत और फ्रांस रक्षा, व्यापार और सुरक्षा के क्षेत्र में कंधे से कंधा मिलाकर चले। प्रधानमंत्री ने फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति श्री सरकोजी से भी मुलाकात की।

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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर प्रधानमंत्री ने विभाजन पीड़ितों के साहस को किया याद
August 14, 2026
प्रधानमंत्री ने परिश्रम और पुरुषार्थ के महत्व को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर हम विभाजन से प्रभावित सभी लोगों के साहस को याद करते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास का वह एक ऐसा क्षण था जिसने कई जिंदगियां तबाह कर दीं, लोगों के परिवार उजड़ गए, कई लोगों को अपनों को खोना पड़ा और लोगों ने अत्यधिक पीड़ा झेली।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी स्थिति में भी लोगों ने शून्य से शुरू कर अपना जीवन पुनर्स्थापित किया, विपरीत परिस्थितियों को उपलब्धियों में बदला और राष्ट्र की प्रगति में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि इन लोगों का जीवन सभी को मानवीय जिजीविषा की शक्ति की याद दिलाता है। श्री मोदी ने उम्मीद जताई कि यह दिन हमारे देश में सद्भाव और भाईचारा बनाए रखने तथा विकसित भारत के निर्माण की दिशा में सामूहिक रूप से काम करने के हमारे संकल्प को और मजबूत करे।

प्रधानमंत्री ने उस भयावह दौर से उबरकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान देने वाले सभी देशवासियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि अपने साहस और क्षमता से उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को साकार करने का उदाहरण प्रस्तुत किया। श्री मोदी ने सभी से सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने एक सुभाषितम् साझा करते हुए इस बात पर बल दिया कि परिश्रम, उद्यम और समर्पित प्रयासों से ही विविध कलाएं, विज्ञान, तकनीकी कौशल, शिल्प तथा नवाचार विकसित होते हैं और सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इसलिए, किसी को भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए बल्कि साहस, कर्मठता और निरंतर प्रयास के साथ अपने लक्ष्यों की ओर दृढ़ता से अग्रसर रहना चाहिए क्योंकि पुरुषार्थ ही भाग्य का निर्माता है।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर श्रृंखलाबद्ध पोस्ट में लिखा:

आज हम #PartitionHorrorsRemembranceDay मना रहे हैं। विभाजन से प्रभावित सभी लोगों के साहस को हम याद करते हैं। इतिहास का वह क्षण कई जिंदगियों को तहस-नहस कर देने वाला था…परिवार उजड़ गए, लोगों ने अपनों को खोया और असहनीय पीड़ा सहनी पड़ी।
इन सब पर विजय प्राप्त करते हुए, लोगों ने शून्य से अपना जीवन पुनर्स्थापित किया, विपत्ति को सफलता में परिवर्तित किया और राष्ट्र की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उनकी जीवन यात्राएं हमें मानवीय जिजीविषा की शक्ति की याद दिलाती हैं। आशा है कि यह दिन हमारे देश में सद्भाव और भाईचारे को बनाए रखने के हमारे संकल्प को और मजबूत करेगा और हम सब मिलकर एक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में काम करेंगे।

"विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन सभी देशवासियों का हृदय से नमन, जिन्होंने उस वीभत्स दौर से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने अपने साहस और सामर्थ्य से दिखाया कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को सिद्ध किया जाता है। आइए, सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करें।

उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः।
कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति॥”

It is through hard work, enterprise and dedicated effort that diverse arts, science, technological skills, craftsmanship and innovations flourish, paving the way for success. Therefore, one should not remain dependent on fate; rather, one should move steadily towards one's goals with courage, diligence and persistent effort, for it is human endeavor that shapes destiny.