बालिकाओं की शिक्षा हो, दलितों का उत्थान हो या महिलाओं का सशक्तिकरण, इन सभी पहलुओं को पीएम मोदी के नेतृत्व में प्रमुखता मिली है।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मंत्री बाली भगत ने भारतीय राजनीति में नारी-शक्ति पर पीएम मोदी के जोर पर एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। बाली भगत ने बताया कि जब पीएम मोदी वर्ष 1997-98 में जम्मू-कश्मीर राज्य के प्रभारी थे, तो समिति की एक बैठक में उन्होंने पूछा कि क्या जिला और मंडल की टीमें बनाई गई हैं, जिसका सदस्यों ने 'हां' में जवाब दिया और फिर आगे युवाओं, एससी और एसटी के 'मोर्चे' के बारे में विस्तार से बताया।


फिर श्री मोदी ने आगे पूछा कि क्या कोई 'महिला मोर्चा' है या महिलाओं की टीम है। इस पर सदस्यों ने 'नहीं' में जवाब दिया, इस पर श्री मोदी ने पूछा कि उनके सशक्तिकरण के लिए विभिन्न मुद्दों को उठाने के लिए महिलाओं की एक समर्पित टीम क्यों नहीं है। सदस्यों ने जवाब दिया कि महिलाएं नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए तैयार नहीं हैं।


इसके लिए श्री मोदी ने सुझाव दिया कि 'महिला मोर्चा' का अत्यधिक महत्व है। उन्होंने कहा कि शादियों और संबंधित समारोहों के दौरान, आमतौर पर एक महिला, विभिन्न व्यवस्थाओं का नेतृत्व करती है जिसमें वह सभी प्रक्रियाओं को सुगम बनाती है। ऐसी गतिविधियाँ करने वाली महिलाओं में नेतृत्व के गुण होते हैं। 'महिला मोर्चा' का नेतृत्व करने के लिए इन महिलाओं से संपर्क किया जा सकता है, इससे महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।

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भारत के खेलों में बदलाव के लिए प्रधानमंत्री मोदी का प्रयास
May 09, 2024

भारत के खेल बजट में रिकॉर्ड वृद्धि, खेलो इंडिया गेम्स और टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम सहित तमाम इनिशिएटिव; भारत में खेल परिदृश्य पर मोदी सरकार के जोर को दर्शाते हैं। भारत में ‘युवा ओलंपिक’ और ‘ओलंपिक 2036’ की मेजबानी के लिए पीएम मोदी का प्रयास, पिछले दशक में भारत के खेलों के लिए अग्रणी बदलाव और विजन को दर्शाता है।

एथलीट अंजू बॉबी जॉर्ज ने खेलों के लिए प्रधानमंत्री मोदी के अभूतपूर्व समर्थन की सराहना की और बताया कि कैसे पीएम मोदी ने उनसे मुलाकात की और भारत में खेलों से जुड़े विषयों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस क्षेत्र के विभिन्न मुद्दों के बारे में गहराई से जानकारी ली और भारत के खेलों में बदलाव के लिए मिशन मोड पर इन मुद्दों को हल करने पर बल दिया।

मुद्दों को सुलझाने के इरादे के साथ-साथ, पीएम मोदी हमेशा विभिन्न एथलीटों के संपर्क में रहे और भारत में खेलों को देखने के तरीके में एक व्यवस्थित बदलाव लाने की कोशिश की। इसके अलावा, भारत के खेलों में बदलाव; देश में बेहतर खेल इंफ्रास्ट्रक्चर का भी परिणाम था।

उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी खेलों में वाकई दिलचस्पी रखते हैं। वह हर एथलीट को जानते हैं...उनके प्रदर्शन को जानते हैं। किसी भी बड़ी चैंपियनशिप से पहले, वह उन्हें व्यक्तिगत रूप से बुलाते हैं और उनसे बातचीत करते हैं...शानदार विदाई समारोह का आयोजन करते हैं और वापसी पर जीत को सेलिब्रेट भी करते हैं।"

उन्होंने कहा कि प्रत्येक एथलीट खुश है क्योंकि प्रधानमंत्री खुद उनके करियर, बेहतरी और परफॉरमेंस में गहरी दिलचस्पी ले रहे हैं।