आपदा तैयारी या प्रबंधन दुनिया भर के सभी देशों की एक मुख्य जिम्मेदारी है। भारतीय संदर्भ में, केंद्र सरकार; राज्य सरकारों के समन्वय से आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालती है। लचीलापन बढ़ाने के लिए, सरकार 2047 के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप आपदा जोखिम में कमी के लिए भारत के फ्रेमवर्क को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, आपदा प्रबंधन एक मानवीय दृष्टिकोण अपना रहा है और जनता की तैयारी पर जोर दे रहा है। भारत आपदाओं से कैसे निपटता है, इसमें पीएम मोदी द्वारा क्रांतिकारी बदलाव किए गए हैं। आपदा से पहले तैयारियों से लेकर बढ़े हुए फंड आवंटन और जमीनी स्तर के कर्मियों के साथ सक्रिय सहयोग ने मिलकर भारत में आपदा प्रबंधन के एक नए युग की शुरुआत की है। बाढ़, COVID-19 जैसी महामारी या विदेश में फंसे नागरिकों को निकालने जैसे आपदा राहत कार्यों में सरकार की पिछले एक दशक की परोपकारी और सक्रिय प्रतिक्रिया ने भारत की आपदा प्रबंधन में मजबूत स्थिति को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया है। हाल ही में सिलक्यारा सुरंग से सफल बचाव अभियान इस समर्पण का प्रमाण है।
आपदा प्रबंधन एक व्यापक और अच्छी तरह से लागू किए गए पॉलिसी फ्रेमवर्क पर निर्भर करता है। 2014 से, सरकार भारत में आपदा प्रबंधन परिदृश्यों को व्यवस्थित करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। वर्ष 2021-2022 से 2025-2026 के लिए, 15वें वित्त आयोग ने राज्य आपदा जोखिम प्रबंधन कोष (SDRMF) और राष्ट्रीय आपदा जोखिम प्रबंधन कोष (NDRMF) की स्थापना का सुझाव दिया। 5 फरवरी, 2021 को, केंद्र सरकार ने NDMF की स्थापना की। अब तक 21 राज्यों ने SDMF स्थापित करने का उल्लेख किया है।
आपदा प्रबंधन में समन्वय लाने के लिए, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने 2016 में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (NDMP) तैयार की, जिसे 2019 में संशोधित किया गया था ताकि प्राकृतिक आपदाओं के बाद राज्यों को वित्तीय सहायता में तेजी लाई जा सके। इसके अतिरिक्त, NDMA ने बाढ़ प्रभावित जिलों में 6,000 सामुदायिक स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करने के लिए "आपदा मित्र" योजना शुरू की, जिसमें अब तक 5,500 से अधिक स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इसी कड़ी में, भारत सरकार ने तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चक्रवात जोखिमों को कम करने के लिए राष्ट्रीय चक्रवात जोखिम शमन परियोजना (NCRMP) शुरू की है। जून 2023 में, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद और पुणे जैसे सात प्रमुख शहरों में शहरी बाढ़ के जोखिम को कम करने के लिए 2,500 करोड़ रुपये का एक नया प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।
प्राकृतिक आपदाओं के लिए लोगों को तैयार करने के लिए, मोदी सरकार ने कई सुरक्षा उपाय किए हैं। NDMA ने विभिन्न आपदाओं पर 26 दिशानिर्देश जारी किए हैं, राज्य और जिला आपदा प्रबंधन प्रणालियों को मजबूत किया है, बहुउद्देश्यीय चक्रवात आश्रयों का निर्माण किया है, तटीय लोगों को प्रशिक्षित किया है। इसके अलावा, जून 2023 में 5,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ "राज्यों में अग्निशमन सेवाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण योजना" का अनावरण किया गया।
आपदा प्रबंधन में मौसम पूर्वानुमान एक अहम भूमिका निभाता है। मौसम विभाग (IMD) ने बारिश और बाढ़ के अनुमान को तीन से पांच दिन तक बढ़ा दिया है, जिससे बचाव कार्यों के लिए अधिक समय मिलता है। इसके अलावा, इसरो ने पूर्वोत्तर में 271 आर्द्रभूमियों (wetlands) का पता लगाया है, जो बाढ़ प्रबंधन में मददगार साबित होगा। "वातावरण एवं जलवायु अनुसंधान-मॉडलिंग अवलोकन प्रणाली और सेवा (ACROSS)" कार्यक्रम के तहत किसानों के लिए "मेघदूत" और "मौसम" जैसे स्मार्टफोन ऐप मौसम की निगरानी और पूर्वानुमान क्षमता को बढ़ा रहे हैं। इंडिया डिजास्टर रिसोर्स नेटवर्क में एक लाख से अधिक नए रिकॉर्ड जोड़े गए हैं, और सामान्य चेतावनी प्रोटोकॉल के SMS कार्यान्वयन के लिए 354 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। आपदा प्रबंधन सूचना प्रणाली पोर्टल और 112 आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली जैसी पहल बहुआयामी उपायों के रूप में महत्वपूर्ण हैं। इन सभी प्रयासों के परिणामस्वरूप, प्राकृतिक आपदाओं के लिए लोगों को तैयार करने में उल्लेखनीय बदलाव देखा गया है।
पिछले एक दशक में आपदा प्रबंधन के त्वरित और मानवीय दृष्टिकोण ने कई लोगों की जान बचाई है। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में पीएम मोदी सरकार की प्रभावशीलता को दर्शाने वाले कुछ प्रमुख उदाहरण इस प्रकार हैं:
• 2014 में जब जम्मू-कश्मीर में बाढ़ आई थी, तब पीएम मोदी ने तुरंत राज्य का दौरा किया और इसे "राष्ट्रीय स्तर की आपदा" घोषित कर दिया। उन्होंने राहत कार्यों के लिए 1000 करोड़ रुपये की राशि जारी करने की भी घोषणा की।
• इसी तरह, 2015 में चेन्नई बाढ़ के दौरान, पीएम मोदी ने स्थिति की निगरानी की और नौसेना के INS ऐरावत के माध्यम से सहायता भेजी।
• वर्ष 2015 में भारत ने विनाशकारी भूकंप के बाद नेपाल की सहायता में सराहनीय कूटनीति का प्रदर्शन किया था। यह आपदाओं से निपटने की दिशा में प्रधानमंत्री मोदी के दयालु और मददगार रुख को प्रदर्शित करता है, यहां तक कि दुनिया भर के अन्य देशों को भी सहायता प्रदान करता है।
• 2017 के मध्य में गुजरात, राजस्थान, असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मणिपुर में बाढ़ से जानमाल का अपूरणीय क्षति हुई और पशुधन को भी नुकसान पहुंचा। केंद्रीय एजेंसियों और सरकारी विभागों को कार्रवाई में लगाया गया था, पीएम मोदी व्यक्तिगत रूप से आपदा प्रबंधन की निगरानी कर रहे थे।
• 2018 में केरल की भयावह बाढ़ ने सरकार को 600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता की घोषणा करने के लिए प्रेरित किया।
• 2019 में साइक्लोन ‘फानी’ के चलते ओडिशा को 340.87 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई और NDRF टीमों की तेजी से तैनाती सुनिश्चित की गई।
• इसी तरह, 2020 के सायक्लोन अम्फान के मामले में, सरकार ने पश्चिम बंगाल के छह जिलों में 36 NDRF टीमों को तैनात किया। इसके अलावा, केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल और ओडिशा को बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता भी प्रदान की।
• 2023 में आए साइक्लोन बिपरजॉय से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वित प्रयास देखे गए, जिससे तैयारी को बढ़ाया जा सका।
• वहीं जब 2023 में सिक्किम में विनाशकारी बाढ़ आई, तब मोदी सरकार ने SRDF के अपने आवंटित हिस्से को त्वरित जारी करने के लिए मंजूरी दी।
हम कह सकते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, भारत की आपदा प्रबंधन योजना में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है, जिसमें तैयारियों, लचीलेपन, क्षमता निर्माण, समुदाय की भागीदारी और आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर जोर दिया जाता है। इस प्रयास से, प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद, सभी को अधिक स्थिर और सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। आपदाओं से निपटने में मोदी सरकार का कामकाज शानदार रहा है। चाहे वो पहले से सचेत करना हो, तुरंत बचाव कार्य शुरू करना हो या फिर लोगों को उबारने के लिए जल्दी आर्थिक मदद पहुंचाना हो, हर काम में सरकार तत्पर दिखी है।




