प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज अमेरिका के न्यूयॉर्क में अमेरिकी विचार मूलक विशेषज्ञों के एक समूह से मुलाकात की।

प्रधानमंत्री और विशेषज्ञों ने कई विकासात्मक और भू-राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की।

प्रधानमंत्री ने उन्हें भारत में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए आमंत्रित किया, क्योंकि यह अमृतकाल के दौरान अपने परिवर्तन की मुहिम चला रहा है।

बातचीत में भाग लेने वाले विभिन्न विचार मूलक विशेषज्ञों में शामिल हैं:

श्री माइकल फ्रोमैन, काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (सीएफआर), न्यूयॉर्क में राष्ट्रपति द्वारा नामित और प्रतिष्ठित फेलो

श्री डेनियल रसेल, एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट, न्यूयॉर्क में इंटरनेशनल सिक्योरिटी एंड डिप्लोमेसी के उपाध्यक्ष

डॉ. मैक्स अब्राम्स, नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी, बोस्टन में राजनीति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर

श्री जेफ एम. स्मिथ, निदेशक, एशियन स्टडीज सेंटर, द हेरिटेज फ़ाउंडेशन, डीसी

वाशिंगटन डीसी में स्थित 'द मैराथन इनिशिएटिव' के सह-संस्थापक श्री एलब्रिज कोल्बी

गुरु सोवेल, संस्थापक-सदस्य, निदेशक (इंडो-यूएस अफेयर्स), इंडस इंटरनेशनल रिसर्च फाउंडेशन, टेक्सास

 

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पीएम मोदी ने आत्म-सम्मान, साहस और दृढ़ता के महत्व को रेखांकित करने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
August 18, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आत्म-सम्मान, साहस और सम्मान के साथ जीने के महत्व पर जोर डालते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है। उन्होंने कहा कि सच्ची वीरता और ताकत किसी भी परिस्थिति में समझौता किए बिना अपने सिद्धांतों और मूल्यों पर दृढ़ रहने में निहित है।
प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया- 

“उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम्।

अप्यपर्वणि भज्येत न नमत्वेव कस्यचित्॥” 

इस सुभाषितम् का यह संदेश है कि व्यक्ति को सदैव आत्म-सम्मान, साहस और सम्मान के साथ जीना चाहिए। सच्ची वीरता और ताकत इसमें है कि किसी भी परिस्थिति में अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता किए बिना सत्य, धैर्य और आत्म-गौरव के साथ अपने आदर्शों पर दृढ़ रहें।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा; 

“उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम्।

अप्यपर्वणि भज्येत न नमत्वेव कस्यचित्॥”