प्रधानमंत्री ने राष्ट्र निर्माण में रचनाधर्मियों के योगदान को सराहा
रचनाधर्मियों ने प्रधानमंत्री की ऊर्जा, सहजता और डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया के माध्यम से सक्षम वातावरण बनाने और आस्थास्थलों को पुनर्जीवित करने के लिए उनकी प्रशंसा की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज भारत मंडपम, नई दिल्ली में पहला नेशनल क्रिएटर्स अवॉर्ड प्रदान किया। उन्होंने विजेताओं के साथ संक्षिप्त बातचीत भी की। सकारात्मक बदलाव लाने के लिए रचनाधर्मिता का उपयोग करने के लिए इस पुरस्कार की कल्पना एक लंबी यात्रा की शुरूआत के रूप में की गई है।

'न्यू इंडिया चैंपियन' श्रेणी के लिए अभि और नियू को पुरस्कार दिया गया। प्रधानमंत्री ने उनसे पूछा कि वे रूखे तथ्य प्रस्तुत करते समय अपने दर्शकों की रुचि कैसे बनाए रखते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के प्रस्तुतिकरण के तरीके की तरह यदि तथ्यों को ऊर्जा के साथ प्रस्तुत किया जाए, तो दर्शक उसे स्वीकार करते हैं। प्रधानमंत्री ने चुनौतीपूर्ण लेकिन बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र को अपनाने के लिए उनकी सराहना की।

बेस्ट स्टोरीटेलर अवार्ड कीर्तिका गोविंदसामी को मिला, जिन्हें कीर्ति हिस्ट्री के नाम से जाना जाता है। जब उन्होंने प्रधानमंत्री के चरण स्पर्श किए तो, प्रधानमंत्री ने भी झुकते हुए कहा कि कला के क्षेत्र में पैर छूना अलग बात है, लेकिन निजी तौर पर वे तब परेशान हो जाते हैं, खासकर जब कोई बेटी उनके पैर छूती है। जब कीर्तिका गोविंदसामी ने हिंदी में अपनी सीमाओं के बारे में बात की, तो प्रधानमंत्री ने किसी भी पसंदीदा भाषा में बोलने के लिए कहा, क्योंकि 'यह एक विशाल देश है और कम से कम इस महान भूमि के किसी कोने में आपकी बात सुनी जाएगी'। उन्होंने महान तमिल भाषा को मान देने और प्रोत्साहित करने के लिए प्रधानमंत्री की सराहना की। उन्होंने प्रधानमंत्री को इतिहास और राजनीति की परस्पर जुड़ी प्रकृति और इसके परिणामस्वरूप सोशल मीडिया पर समय-समय पर होने वाली प्रतिक्रिया के बारे में बताया। प्रधानमंत्री ने जब इस संबंध में जिज्ञासा व्यक्त की, तो उन्होंने कहा कि आज के किशोर दर्शक भारत की महानता के बारे में जानना व सीखना पसंद करते हैं।

डिसरप्टर ऑफ द ईयर का पुरस्कार रणवीर इलाहाबादिया को प्रदान किया गया। प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि रणवीर नींद की कमी के बारे में जागरूकता पैदा करें और उन्होंने कहा कि वे पिछले कई वर्षों से केवल कुछ घंटों के लिए ही सोते हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने योग निद्रा के लाभ के बारे में भी बताया। उन्होंने रणवीर को उनकी सफलता के लिए बधाई दी।

 

इसरो की पूर्व वैज्ञानिक, अहमदाबाद की सुश्री पंक्ति पांडेय को मिशन लाइफ के संदेश को बढ़ाने के लिए ग्रीन चैंपियन पुरस्कार मिला। बातचीत के दौरान, प्रधानमंत्री ने अहमदाबाद के लोगों के बीच लोकप्रिय एक किस्सा सुनाया, जिस पर भीड़ ने खूब तालियां बजाईं। सुश्री पंक्ति ने लोगों को शून्य अपशिष्ट बनाने के प्रयास में अपने कचरे का विश्लेषण करने और घर से फेंके जाने वाले कचरे का अपशिष्ट ऑडिट करने की सलाह दी। प्रधानमंत्री ने उनसे मिशन लाइफ के बारे में विस्तृत अध्ययन करने को कहा और लोगों के जीवन को पर्यावरण अनुकूल बनाने के अपने आह्वान का स्मरण कराया।

 

सामाजिक परिवर्तन के लिए बेस्ट क्रिएटिव फॉर सोशल चेंज पुरस्कार आधुनिक समय की मीरा कही जाने वाली जया किशोरी को दिया गया। वे भगवद्गीता और रामायण की कहानियां आंतरिक दृष्टि के साथ साझा करती हैं। उन्होंने 'कथाकार' के रूप में अपनी यात्रा के बारे में बताया कि कैसे वे भारतीय संस्कृति के महाकाव्यों की महान अंतर्दृष्टि प्रस्तुत करके युवाओं के बीच रुचि पैदा कर रही हैं। उन्होंने अपनी भौतिक जिम्मेदारियों को पूरा करते हुए एक सार्थक जीवन जीने की संभावना के बारे में भी बात की।

 

लक्ष्य डबास को मोस्ट इंपैक्टफुल एग्री क्रियेटर पुरस्कार प्रदान किया गया। यह पुरस्कार खेती के तौर-तरीकों में सुधार करने के लिए दिया गया। उनके भाई ने उनकी ओर से पुरस्कार प्राप्त किया और देश में प्राकृतिक खेती की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने 30 हजार से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती के तरीकों और फसलों को कीड़ों-मकोड़ों से बचाने के बारे में प्रशिक्षण देने की जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने वर्तमान समय में उनकी विचार प्रक्रिया की सराहना की और उनसे प्राकृतिक खेती पर अपने दृष्टिकोण पर चर्चा करने के लिए गुजरात के राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत जी से मिलने का आग्रह किया, जहां उन्होंने तीन लाख से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने श्री लक्ष्य से श्री देवव्रत के यूट्यूब वीडियो सुनने का भी आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक खेती और जैविक खेती से जुड़े मिथकों को दूर करने में भी उनकी सहायता मांगी।

 

कल्चरल एंबेसेडर ऑफ द ईयर का पुरस्कार मैथिली ठाकुर को दिया गया, जो कई भारतीय भाषाओं में मूल गीत और पारंपरिक लोक संगीत प्रस्तुत करती हैं। प्रधानमंत्री के अनुरोध पर उन्होंने महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव का एक भजन प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री ने कैसेंड्रा माय स्पिटमैन को याद किया जिनकी चर्चा प्रधानमंत्री ने अपने मन की बात कार्यक्रम में की थी। वह कई भारतीय भाषाओं में गीत, विशेषकर भक्ति गीत गाती हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री श्री मोदी के समक्ष अच्युतम केशवम और एक तमिल गीत प्रस्तुत किया था।

 

बेस्ट इंटरनेशनल क्रिएटर पुरस्कार में तीन रचनाधर्मी शामिल थे - तंजानिया से किरी पॉल, अमेरिका से ड्रयू हिक्स, जर्मनी से कैसेंड्रा माय स्पिटमैन। ड्रयू हिक्स को प्रधानमंत्री के हाथों पुरस्कार प्राप्त हुआ। ड्रयू हिक्स ने अपनी धाराप्रवाह हिंदी और बिहारी उच्चारण के साथ भारत में भाषाई प्रतिभा के लिए सोशल मीडिया पर लोकप्रियता और प्रसिद्धि अर्जित की है। पुरस्कार के लिए अपनी खुशी जाहिर करते हुए ड्रयू ने कहा कि वह चाहते हैं कि लोग खुश हों और भारत का नाम ऊंचा करें। उन्होंने बताया कि उनके पिता के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और पटना से जुड़ाव के कारण भारतीय संस्कृति में उनकी रुचि बढ़ी। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने उन्हें शुभकामनाएं दीं और कहा कि उनका हर वाक्य देश के युवाओं को प्रेरित करेगा।

 

‘कर्ली टेल्स’ की कामिया जानी को बेस्ट ट्रैवल क्रिएटर का पुरस्कार दिया गया। वह भोजन, यात्रा और जीवन शैली पर ध्यान केंद्रित करती हैं और अपने वीडियो में भारत की सुंदरता व विविधता का प्रदर्शन करती हैं। उन्होंने भारत की खूबसूरती के बारे में बात की और कहा कि उनका उद्देश्य यह है कि भारत वैश्विक मानचित्र पर पहले नंबर पर आसीन हो। जब उन्होंने कहा कि वह लक्षद्वीप या द्वारका जाने को लेकर असमंजस में हैं तो प्रधानमंत्री ने कहा कि द्वारका के लिए उन्हें दर्शकों के बीच हंसी-मजाक के लिए बहुत गहराई तक जाना होगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने उस आनंद को याद किया जो उन्हें जलमग्न द्वारका नगर के दर्शन करने पर महसूस हुआ था। प्रधानमंत्री ने आदि कैलाश जाने का अपना अनुभव बताते हुए कहा कि उन्हें ऊंचाई और गहराई दोनों स्थानों का अनुभव हुआ। उन्होंने रचनाधर्मियों से कहा कि वे श्रद्धालुओं को इस तरह प्रेरित करें कि वे तीर्थ स्थानों को केवल दर्शन के लिए नहीं बल्कि उन्हें पूरी संपूर्णता के साथ आत्मसात करें। उन्होंने यह भी दोहराया कि कुल यात्रा बजट का 5-10 प्रतिशत स्थानीय उत्पादों पर खर्च किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के अलावा, यह एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना पर भी जोर देने में मदद करता है। कामिया ने देश में आस्था स्थलों का कायाकल्प करने के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया।

 

शीर्ष टेक यूट्यूबर 'टेक्निकल गुरुजी' गौरव चौधरी ने टेक क्रिएटर पुरस्कार जीता। उन्होंने अपने चैनल में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए डिजिटल इंडिया को श्रेय दिया। प्रधानमंत्री ने कहा, “उज्ज्वल भविष्य के लिए हमें प्रौद्योगिकी का लोकतांत्रिकीकरण करने की आवश्यकता है। यूपीआई इसका एक बड़ा प्रतीक है क्योंकि यह हर किसी का है। विश्व तभी प्रगति करेगा जब ऐसा लोकतांत्रिकीकरण होगा।” गौरव ने पेरिस में यूपीआई का उपयोग करने का अपना अनुभव बताया और कहा कि भारत के तकनीकी समाधान दुनिया की मदद कर सकते हैं।

 

मल्हार कलांबे को 2017 से सफाई अभियान का नेतृत्व करने के लिए स्वच्छता एंबेसेडर पुरस्कार मिला। वह प्लास्टिक प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन पर भी जागरूकता बढ़ाते हैं। वह 'बीच प्लीज़' के संस्थापक हैं। प्रधानमंत्री ने दुबले-पतले मल्हार से मजाक किया और उनसे कहा कि यहां कई रचनाधर्मी भोजन और पोषण के बारे में बात करते हैं। उन्होंने अपनी यात्रा और अभियानों के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि कचरा हटाने के प्रति नजरिया बदलना होगा। प्रधानमंत्री ने उनके प्रयासों की निरंतरता की सराहना की और स्वच्छता के लिए माहौल बनाने के लिए उनकी सराहना की।

 

हेरिटेज फैशन आइकन पुरस्कार 20 वर्षीय कंटेंट क्रिएटर जान्हवी सिंह को दिया गया, जो इंस्टाग्राम पर भारतीय फैशन के बारे में बताती हैं और भारतीय साड़ियों को बढ़ावा देती हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि कपड़ा बाजार फैशन के साथ चलता है और भारतीय वस्त्रों को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए उनकी प्रशंसा की। उन्होंने भारतीय विषयों को संस्कृति, शास्त्र और साड़ी के साथ आगे ले जाने के अपने आदर्श वाक्य को दोहराया। प्रधानमंत्री ने रेडीमेड पगड़ी, धोती और बांधने की जरूरत वाले ऐसे परिधानों के चलन की ओर इशारा करते हुए ऐसी चीजों को बढ़ावा देने पर उनकी राय पूछी। उन्होंने भारतीय वस्त्रों की सुंदरता पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हमेशा फैशन के मामले में अग्रणी रहा है।

बेस्ट क्रिएटिव क्रिएटर-फीमेल का पुरस्कार श्रद्धा को दिया गया जो अपने बहुभाषी कॉमेडी सेट के लिए प्रसिद्ध हैं तथा सभी पीढ़ियों के लिए आकर्षक और प्रासंगिक कंटेंट बनाती हैं। अपने ट्रेडमार्क 'अइयो' के साथ उनका स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दूसरी बार है जब वे श्रद्धा से मिले हैं। श्रद्धा ने कहा कि यह पुरस्कार उन लोगों को मान्यता देता है, जो अपने घरों से कंटेंट बना रहे हैं। उन्होंने गंभीर विषयों में हल्का हास्य खोजने के अपने दृष्टिकोण का भी जिक्र किया। श्रद्धा ने रचनाधर्मियों के साथ बातचीत में सहजता के लिए प्रधानमंत्री की सराहना की।

रेडियो-जॉकी रौनक को बेस्ट क्रिएटिव क्रिएटर-मेल का पुरस्कार मिला। रौनक ने कहा कि मन की बात के साथ प्रधानमंत्री रेडियो इंडस्ट्री का भी एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड तोड़ने वाली शख्सियत हैं। उन्होंने रेडियो इंडस्ट्री की ओर से प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। रौनक ने भी अपने ट्रेडमार्क 'बउआ' अंदाज में बात की।

फ़ूड श्रेणी में बेस्ट क्रिएटर का पुरस्कार ‘कबिताज़ किचन’ को दिया गया। वह एक गृहिणी हैं, जो अपने व्यंजनों और ट्यूटोरियल के साथ एक डिजिटल उद्यमी बन गई। मल्हार के दुबले शरीर के लिए अपनी चिंता जारी रखते हुए, प्रधानमंत्री ने मजाक में कबिता को उसका ख्याल रखने के लिए कहा। उन्होंने एक प्रमुख जीवन कौशल के रूप में खाना पकाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि सभी स्कूलों को छात्रों को कृषि के बारे में जागरूक करना चाहिए ताकि वे भोजन के महत्व को समझें और बर्बादी से बचें। प्रधानमंत्री ने कहा कि लोगों को यात्रा करते समय स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लेना चाहिए। प्रधानमंत्री ने भोजन से जुड़े रचनाधर्मियों से कहा कि वे बाजरा-श्रीअन्न को बढ़ावा दें और पोषण मूल्यों के बारे में जागरूकता को भी बढ़ावा दें। प्रधानमंत्री ने अपनी ताइवान यात्रा को याद किया जहां उन्हें शाकाहारी भोजन के लिए एक बौद्ध रेस्तरां की सिफारिश की गई थी। जब उन्होंने वहां मांसाहारी दिखने वाले व्यंजन देखे और पूछताछ की तो उन्हें बताया गया कि शाकाहारी व्यंजनों को चिकन मटन और उसी तरह के व्यंजनों का आकार दिया गया था ताकि स्थानीय लोग ऐसे भोजन की ओर आकर्षित हों।

 

नमन देशमुख को शिक्षा श्रेणी में बेस्ट क्रिएटर का पुरस्कार मिला। वह टेक और गैजेट क्षेत्र में एक इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर और कन्टेंट क्रिएटर हैं। वह प्रौद्योगिकी, गैजेट्स, वित्त, सोशल मीडिया मार्केटिंग को कवर करते हैं और दर्शकों को एआई तथा कोडिंग जैसे तकनीक से संबंधित विषयों पर शिक्षित करते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को विभिन्न ऑनलाइन घोटालों के बारे में लोगों को शिक्षित करने और सरकारी योजनाओं से लाभ उठाने के तरीकों पर अपने कंटेंट के बारे में बताया। प्रधानमंत्री ने सुरक्षित सर्फिंग और सोशल मीडिया व्यवहारों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए उनकी प्रशंसा की। प्रधानमंत्री ने रचनाधर्मियों से अटल टिंकरिंग लैब्स पर कंटेंट बनाने के लिए कहा। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों को विज्ञान अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए क्योंकि चंद्रयान जैसी सफलताओं ने बच्चों में एक नया वैज्ञानिक स्वभाव पैदा किया है।

 

प्रधानमंत्री द्वारा अंकित बैयनपुरिया को बेस्ट हेल्थ एंड फिटनेस क्रिएटर पुरस्कार दिया गया। अंकित एक फिटनेस इन्फ्लुएंसर हैं और अपनी 75 कठिन चुनौतियों को पूरा करने के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ मिलकर काम किया था। अंकित ने दर्शकों से कहा कि वे नियमित रूप से वर्कआउट करें और संतुलित जीवनशैली अपनाएं।

 

'ट्रिगर्ड इंसान' निश्चय को गेमिंग क्रिएटर पुरस्कार दिया गया। वह दिल्ली स्थित यूट्यूबर, लाइव-स्ट्रीमर और गेमर हैं। उन्होंने गेमिंग श्रेणी को मान्यता देने के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया।

अरिदमन को बेस्ट माइक्रो क्रिएटर का पुरस्कार दिया गया। वह वैदिक खगोल विज्ञान और प्राचीन भारतीय ज्ञान में विशेषज्ञ हैं। वह ज्योतिष, आध्यात्मिकता और व्यक्तिगत विकास की पड़ताल करते हैं। प्रधानमंत्री ने एक हल्का-फुल्का किस्सा सुनाया कि कैसे ट्रेन के अनारक्षित डिब्बे में हस्तरेखा पढ़ने का नाटक करने पर उन्हें हर बार सीट मिल जाती थी। अरिदमन ने कहा कि वह धर्मशास्त्र पर कंटेंट बनाते हैं और कहा कि ट्रॉफी में धर्म चक्र, वृषभ और सिंह के साथ शास्त्रों के कई तत्व हैं। उन्होंने कहा कि हमें धर्म चक्र के आदर्शों पर चलने की जरूरत है। अरिदमन ने भारतीय पोशाक को अपनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

बेस्ट नैनो क्रिएटर का पुरस्कार चमोली उत्तराखंड के पीयूष पुरोहित को दिया गया, जिन्होंने कम ज्ञात स्थानों, लोगों और क्षेत्रीय त्योहारों पर प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने मन की बात में अपने एक अनुरोध को याद किया जहां केरल की लड़कियों ने चमोली का एक गीत गाया था।

बोट के संस्थापक और सीईओ और शार्क टैंक इंडिया में अपनी भागीदारी के लिए प्रसिद्ध अमन गुप्ता को बेस्ट सेलिब्रिटी क्रिएटर का पुरस्कार दिया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि उन्होंने अपनी कंपनी तब शुरू की थी जब 2016 में स्टार्ट अप और स्टैंड-अप इंडिया लॉन्च हुए थे। उन्होंने बताया कि बहुत कम समय में, बोट दुनिया के सबसे बड़े ऑडियो ब्रांडों में से एक है।

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श्री रामनाथ कोविंद जी की ऑटो-बायोग्राफी भारतीय लोकतंत्र और भारतीय समाज के लिए एक अनमोल धरोहर बनेगी: पीएम मोदी
August 12, 2026
Today, we have the opportunity to release the autobiography of Shri Ram Nath Kovind ji; I am happy to be a part of this program: PM
His journey reflects a life dedicated to public service and the progress of our nation:PM
My prolonged acquaintance with Kovind Ji and his special affection and warmth towards me have been my greatest assets: PM
महात्मा गांधी, बाबासाहब अंबेडकर, ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले ने एक ऐसे नए भारत का सपना देखा था जहाँ सबसे गरीब और सबसे वंचित लोग भी शिखर तक पहुँच सकें: पीएम मोदी
कोविंद जी जैसे व्यक्तित्वों ने न केवल खुद का जीवन बदला है, बल्कि भारत के लिए अपने सपने और विजन को साकार करने में भी अहम भूमिका निभाई है: पीएम मोदी


हमारे पूर्व राष्ट्रपति श्रीमान रामनाथ कोविंद जी, लोकसभा के अध्यक्ष आदरणीय ओम बिरला जी, श्रीमती सविता कोविंद जी, सभाग्रह में सभी वरिष्ठ जन बैठे हैं, सबका उल्लेख नहीं कर पाऊंगा, लेकिन मेरे लिए बहुत आनंद है कि एक पारिवारिक कार्यक्रम लग रहा है।

भाइयों-बहनों,

आज हमें श्री रामनाथ कोविंद जी की आत्मकथा के विमोचन का अवसर मिला है। मुझे खुशी है कि मुझे भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला है। कोविंद जी से मेरा बहुत लंबा परिचय रहा है, उन्हें करीब से जानने का भी अवसर मिला और राष्ट्रपति के रूप में उनका मार्गदर्शन और इस सबके साथ-साथ उनका मेरे प्रति विशेष स्नेह, उनकी आत्मीयता, ये मेरी बहुत बड़ी पूंजी रही है। मैंने उनके जीवन को जितना समझा है, उनकी कार्यक्षमताओं को जितना जाना है, मैं पूरे विश्वास से कह सकता हूं कि श्री रामनाथ कोविंद जी की ऑटो-बायोग्राफ़ी अपने आप में भारतीय लोकतंत्र और भारतीय समाज के लिए एक धरोहर बनेगी। कोविंद जी की जीवन यात्रा, समाज और राष्ट्र के लिए उनका योगदान, ऐसा कितना कुछ है जिसके बारे में मैं विस्तार से बात कर सकता हूं, लेकिन बुक रिलीज़ में केवल ‘कर्टन रेज़र’ ही होना चाहिए। आप सब किताब का पूरा लाभ पढ़कर ही लें, तो ही ज्यादा अच्छा है।

साथियों,

कोविंद जी की जीवन यात्रा को आप उनके शब्दों में जानें, उनकी लेखनी को, उनके अनुभवों को देश की नई पीढ़ी पढ़े, इससे हर किसी को काफी कुछ सीखने को मिलेगा। मैं रामनाथ कोविंद जी को इस आत्मकथा के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

कोविंद जी ने अपनी इस पुस्तक को बहुत ही सटीक नाम दिया है- “Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles” कहने का भाव ये कि जीवन और जीवन के संघर्ष उनके व्यक्तिगत हैं, लेकिन उन संघर्षों के परिणामस्वरूप मिली जीत, भारत के गणतंत्र की है, भारत के लोकतंत्र की है।

साथियों,

हम सब अक्सर अनुभव करते हैं कि इंसान का एक स्वभाव होता है, लोग अपनी सफलता का श्रेय खुद को देते हैं और जीवन की मुश्किलों के लिए, कठिनाइयों के लिए समाज को जिम्मेदार ठहराते हैं। लेकिन, जब हृदय उदार हो, भारतीय संस्कार हों, तब व्यक्ति समाज की कमियाँ निकालने में समय नहीं गँवाता, वो उसके सकारात्मक पक्ष पर फोकस करता है, वो अपनी सफलता में समाज को बराबर का भागीदार मानता है। कोविंद जी की आत्मकथा और उसका शीर्षक इसके उदाहरण हैं। आप उनका जीवन देखिए, एक बेहद सामान्य परिवार में, कानपुर देहात में उनका जन्म हुआ। कोविंद जी ने अभी भी कुछ वर्णन किया और अपनी किताब में भी लिखा है, कैसे गर्मी के मौसम में एक दिन उनके घर में आग लग गई, उनकी माँ अपनी चिंता छोड़कर घर की चीजों को बचा रही थीं। आखिर, एक सामान्य परिवार में, माँ के लिए एक-एक चीज बच्चों के पालन-पोषण का जरिया होती है। उसी कोशिश में, आग में फंसकर उनकी माता जी की मृत्यु हो गई। आप कल्पना कर सकते हैं, छोटी सी उम्र में इस तरह की घटना, माँ को इस तरह खो देना, ये कितना दर्दनाक रहा होगा। मैं तो भाग्यशाली रहा हूं, मेरी मां 100 साल से भी अधिक जीवित रही और मुझे आशीर्वाद देती रही। उसके बावजूद भी, आज भी मैं मां की कमी महसूस करता हूं।

साथियों,

उनके जीवन का एक ऐसा दर्दनाक ये घटनाक्रम था, कोई भी इससे टूट सकता था, लेकिन कोविंद जी को उन मुश्किलों ने मजबूत किया। पड़ोस की एक माता जी ने उनके पालन-पोषण में मदद की। इससे उन्होंने समाज की एकता और सौहार्द की ताकत को समझा। इस घटना के बाद कोविंद जी के जीवन में उनके पिता की भूमिका और बड़ी हो गई और जिस तरह से उन्होंने अपने परिवार को संभाला, बच्चों को संस्कार दिये, इसीलिए, कोविंद जी अपने पिता को अपना हीरो मानते हैं।

साथियों,

बचपन के इन संघर्षों के बीच, कोविंद जी ने शिक्षा को, अपने सामर्थ्य को बढ़ाने का मार्ग बनाया। उन्होंने मेहनत की, उन्होंने संसाधनों की कमी को कमजोरी नहीं बनने दिया। और, एक ऐसे मुकाम तक पहुंचे, जिसकी कल्पना भी तब लोगों ने नहीं की थी। वो भारत जैसे विशाल देश के राष्ट्रपति बने।

साथियों,

इतने बड़े पद पर पहुंचने के बाद भी कोविंद जी का विनम्र व्यक्तित्व, उनकी सादगी ऐसे ही कायम रही। मुझे याद है प्रधानमंत्री के तौर पर मैं राष्ट्रपति भवन में उनसे मिलने जाता था। प्रोटोकॉल के हिसाब से जो बातें नहीं हो सकती हैं, वो बातें वो करते थे। वो प्रधानमंत्री को छोड़ने के लिए गाड़ी के दरवाजे तक आते थे। मैं शुरू में उनको प्रार्थना करता रहता था, प्लीज आप ऐसा मत कीजिए, लेकिन उन्होंने जीवन के आखिर तक अपनी उस विनम्रता को कभी छोड़ा नहीं। राष्ट्रपति बनने के बाद जब वे अपने गांव परौंख गए, तो उन्होंने वहाँ अपने गुरुओं के पैर छूकर उन्हें प्रणाम किया। गाँव की मिट्टी को नमन करके उन्होंने गाँव के सामान्य लोगों का धन्यवाद किया। पूरे देश ने वो भावुक दृश्य देखा था। उनके इस आचरण ने दुनिया के सामने भारत के संस्कारों की ऐसी तस्वीर सामने रखी, जिस पर हर भारतवासी गर्व करता है।

साथियों,

गुलामी के सैकड़ों साल में हमारे देश ने आर्थिक और सामाजिक रूप से बहुत कुछ खोया था। हमारे पूर्वजों ने सदियों तक संघर्ष किया। महात्मा गांधी, बाबा साहब अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रबाई फुले, ऐसी कितनी ही महान विभूतियों ने भारत के नवनिर्माण का सपना देखा था। एक ऐसा भारत जहां गरीब से गरीब, वंचित से वंचित को शिखर तक पहुँचने का अवसर मिल सके। कोविंद जी जैसे व्यक्तित्वों ने अपने श्रम और काबिलियत से केवल खुद का जीवन ही बदला, इतना नहीं है, उन्होंने सदियों के उस स्वप्न को, उस विज़न को भी साकार करने में अपनी अहम भूमिका निभाई है। और इस दिशा में हम सबके प्रयास अभी भी जारी हैं। हमें भविष्य में कोविंद जी जैसे अनेकों युवा चाहिए, जो परेशानियों से परास्त न हों, जो मुश्किलों के सामने मायूस न हों, बल्कि अपनी मेहनत से हर मंजिल को आसान बनाने का हौसला रखें। इसी बदलाव से सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प पूरा होगा। यहीं से आत्मनिर्भर और विकसित भारत का रास्ता बनेगा।

साथियों,

ऐसे युवाशक्ति के निर्माण के लिए जो प्रेरणा चाहिए, कोविंद जी की ऑटोबायोग्राफ़ी उसका अहम स्रोत बन सकती है।

साथियों,

कोविंद जी ने अपनी जीवनी में मोरारजी भाई देसाई के साथ अनुभवों के बारे में भी इसमें विस्तार से बताया है। कोविंद जी के भीतर देशसेवा की जो भावना थी, मोरारजी भाई के साथ काम करके उन्हें जो सीखने को मिला, जो रास्ता मिला। कोविंद जी ने राजनीति और समाजसेवा को अपना मार्ग बनाया। वो अपने कर्तव्यों के लिए समर्पित रहे। सेवा को उन्होंने अपना लक्ष्य बनाकर काम किया। संसद में उनका कार्यकाल गवाह है। राज्यपाल के रूप में भी उन्होंने एक उदाहरण प्रस्तुत किया। राष्ट्रपति के रूप में भी हमें उनकी यही कर्तव्यनिष्ठा दिखाई देती रही। यहाँ तक कि राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद से सेवामुक्त होने के बाद भी उन्होंने विश्राम नहीं लिया है। वो अभी भी ‘एक देश, एक चुनाव’ One Nation, One Election जैसे महत्वपूर्ण विषय पर काम कर रहे हैं। देश को जगा रहे हैं। ये एक ऐसा विषय है, जिसका समाधान देश के लोकतंत्र का नया अध्याय शुरू कर सकता है। मैं मानता हूँ, कोविंद जी की इस कर्तव्यनिष्ठा और सेवाभाव से देश के लोग बहुत कुछ सीख सकते हैं।

साथियों,

सामाजिक जीवन में सक्रिय रहते हुये ऑटोबायोग्राफ़ी के लिए समय निकाल पाना बहुत मुश्किल होता है। कोविंद जी ने ये काम हम सबके लिए किया है, क्योंकि उनके जीवन में ऐसा कितना कुछ है, जिसमें गरीब वंचित तबके से आए तमाम लोग अपने जीवन की परछाई देख सकते हैं। कैसे एक साधारण परिवार मुश्किल हालातों में भी जीवन की शुचिता और ईमानदारी से समझौता नहीं करता, कैसे वही आदर्श आगे चलकर हमारे जीवन का आधार बनते हैं, हमारे कठिन समय के मूल्य किस तरह जीवनभर हमें रोशनी देते हैं, कैसे इस पवित्रता से हमें राष्ट्र सेवा की शक्ति मिलती है। अलग-अलग पदों का दायित्व निभाते हुए, कोविंद जी ने समाज को निरंतर इसकी प्रेरणा दी है।

साथियों,

मुझे विश्वास है, कोविंद जी की ऑटोबायोग्राफ़ी, इसमें उनके जीवन की ही नहीं, बल्कि हमारे लोकतंत्र की भी अहम स्मृतियाँ सुरक्षित होंगी। मैं एक बार फिर उन्हें उनकी आत्मकथा के लिए शुभकामनाएं देता हूं। और मैं खास करके युवा पीढ़ी से आग्रह करूंगा, रील का जमाना है, सोशल मीडिया में इनफ्लुएंसर आपको खींच के कहीं-कहीं ले जाते हैं। इस शॉर्टकट के युग में भी एक बात हम जरूर याद रखें, रेलवे स्टेशन पर लिखा हुआ होता है, कुछ लोगों को पटरी पर कूद कर के जाने की आदत होती है, ब्रिज पर नहीं जाते। तो वहां लिखा होता है, शॉर्टकट विल कट यू शॉर्ट। और अगर शॉर्टकट के रास्ते से भी कहीं बाहर निकलना है, तो मैं नौजवानों को कहूंगा आपको जिसका भी पसंद हो ऑटोबायोग्राफी जरूर पढ़ें। ऑटोबायोग्राफी उस कालखंड की इतिहास की घटनाओं को अलग तरीके से समझने का अवसर देती है। इतिहास से काफी निकट होता है वो कालखंड बायोग्राफी का और इसलिए मैं जरूर चाहूंगा कि कोविंद जी की जो मेहनत है, वो आने वाली पीढ़ियों को काम आए, युवा पीढ़ी को विशेष रूप से काम आए। बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बहुत-बहुत धन्यवाद।