प्रधानमंत्री- जो लखपति दीदी बन जाती हैं और जो नहीं बनी हैं उन दोनों के बीच में क्या संवाद होता है।

लखपति दीदी – जो लखपति दीदीयां बन जाती हैं तो उनके घर की स्थिति, उनका अनुभव कुछ और अलग उनको दिखता है कि वो अपना खुद आत्मनिर्भर हो जाती हैं। जिससे वो अपने परिवार का खर्च बहुत अच्छे से चला लेती हैं। और मैंने सर दो दिव्यांग दीदीयां हैं। उनको भी सपोर्ट किया है। उनको भी देखकर मुझे बहुत खुशी होती है सबसे पहले।

प्रधानमंत्री- वो दिव्यांग भी लखपति दीदी बन गईं?

लखपति दीदी – जी बिल्कुल उनको लखपति बना दिया।

प्रधानमंत्री – क्या काम करती हैं वो लोग?

लखपति दीदी – एक का दोना पत्तल का बिजनेस है, एक की किराना की दुकान है। मैं खुद लखपति सीआरपी हूं। साढ़े तीन से चार लाख रुपये कमा लेती हूं और मैंने अपनी दीदीयों को भी लखपति सीआरपी बनाया है मैंने।

लखपति दीदी – मैं तो लखपति हूं ही। मैंने दो 260 महिला को अभी लखपति बनाया है।

प्रधानमंत्री – आप लखपति दीदी बनी मतलब सालभर में कितना कमाती हैं?

लखपति दीदी – मैं सालभर में आठ लाख रुपया कमा लेती हूं।

प्रधानमंत्री – आठ लाख रुपया?

लखपति दीदी – हां सर।

प्रधानमंत्री – ये तो आपसे डबल है भई। कितने साल में ये achieve कर लिया ये आपने?

लखपति दीदी – मेरा तो अभी पांच साल हो गया सर।

प्रधानमंत्री – पूरे असम के लोग तो आपको बड़ा Inspiration के रूप में देखते होंगे।

लखपति दीदी – हां देखते हैं। अभी तो मैं सर जीरो से बढ़कर मैं हीरो बन गई हूं सर।

प्रधानमंत्री – शाबाश!।

लखपति दीदी – मेरे सखी मंडल का नाम है-अतिउत्तमम सखी मंडल। जिसमें हम लोग hand made और home made beauty product बनाते हैं। जो सारी घर की चीजों से बनती है। सरस मेला है, वाइब्रेंट गुजरात है, Monsoon festival है। उन सबने हम लोगों को इतना अच्छा platform दिया जिससे हमारे product की popularity बहुत बढ़ गई है। एक ही साल में हम लोगों ने करीब 30 लाख से भी ऊपर का टर्न ओवर कर लिया है।

प्रधानमंत्री – 30 लाख रुपये का।

लखपति दीदी – 30 लाख रुपये से ऊपर का टर्न ओवर और 12 लाख से भी ऊपर हम लोगों का net profit है सर।

लखपति दीदी – 10 महिला मिलकर sanitary napkin की कंपनी चलाते हैं सर।

प्रधानमंत्री – लातूर से कितना दूर है आपका गांव?

लखपति दीदी – 20 किलोमीटर है सर।

प्रधानमंत्री – 20 किलोमीटर। शुरू जब किया तब कितनी बहनें थीं?

लखपति दीदी – तब 10 बहने थीं। कोई आने के लिए तैयार नहीं था और वो बात भी बोलने के लिए तैयार नहीं था कि ये sanitary napkin ये हमें लज्जा आती है। हम ये बोल नहीं सकते ऐसा बोलती थी।

प्रधानमंत्री – कितना टर्न ओवर होता है?

लखपति दीदी – 5 लाख का टर्न ओवर होता है सर।

प्रधानमंत्री – आप इतनी बढ़िया हिन्दी कैसे बोल लेती हैं?

लखपति दीदी – ऐसे ही आ जाती है सर बोल बोल के।

प्रधानमंत्री – अच्छा, तो बेचने के लिए महाराष्ट्र के बाहर भी जाते हैं क्या?

लखपति दीदी – नहीं नहीं सर, महाराष्ट्र में है अभी तो। मैं आपको बहुत-बहुत धन्यवाद करती हूं जो महिला लोग के लिए सशक्तिकरण कार्यक्रम चला और हम लोग को जो रोजगार मिला सर उसमें अहम भूमिका आप ही की है। हम लोग तो सिर्फ माध्यम जाने के लिए ये हैं। सारा चीज तो रास्ता तो बनाया आपका है। हम लोगों को तो सिर्फ चलना है।

लखपति दीदी – 2017 से मैं as a bank सखी काम किया।

प्रधानमंत्री – अभी कितना कमाती हैं?

लखपति दीदी – अभी मैं सर साढ़े चार से पांच लाख तक कमाती हूं।

प्रधानमंत्री – यहीं से हैं आप?

लखपति दीदी – हां।

प्रधानमंत्री – तो इन सबको घर ले जाइये।

लखपति दीदी – लेकर जाऊंगी सर, आप भी आईये।

प्रधानमंत्री – हां, मुझे कौन बुलाता है, कोई बुलाता नहीं है।

लखपति दीदी – मैं विशेषज्ञी हूं सर, मेरा काम जो है। जो महिलाएं हैं, ग्रामीण महिलाएं हैं जिनको बैंक जाने में दिक्कत आती है, घर में उनको problems होते हैं। उनके घर-घर जाकर मैं उनका खाता खुलवाती हूं।

लखपति दीदी – सर मैं आपको कल का example बताती हूं। सर कल मेरी गुड़िया से स्कूल में पूछा कि आपकी मम्मी कहां गई हुई हैं?

प्रधानमंत्री – हां।

लखपति दीदी – तो सर मेरे बच्चे ने बड़े proud से बोला कि मेरी मम्मी तो महाराष्ट्र गई हुई हैं और मोदी जी से मिलने गईं हैं। तो सर आप नहान आए थे सर। उस समय भी आपसे मिलना नहीं हुआ लेकिन आज आपसे मिलकर सर बहुत ही अच्छा लग रहा है सर हमार सौभाग्य है।

प्रधानमंत्री – मैं पहले सिरमौर बहुत आता था।

लखपति दीदी – जो 2023 में International Millets Year चला था। तो हमने millets का training लिए सर। Millets का training लेकर collectorate के पास जिला पंचायत है वहां हमको building मिली millets cafe चलाने का। तो हम लोग 38 दीदीयां वहां काम करती हैं।

प्रधानमंत्री – आप कितना कमाती है?

लखपति दीदी – मैं सर मेरी वहां सेलेरी 30 हजार है। तो मेरी total income साल की 3 लाख 30 हजार रुपये है।

लखपति दीदी – मैं एक पशु सखी और गुजरात वाले एनडीडी की तरफ से हेल्प वर्कर भी हूं और मैं एक खुद लखपति दीदी हूं और मेरे साथ 88 महिलाएं काम करती हैं।

लखपति दीदी – मेरे समूह का नाम जय माता दी है। और मैं समूह में और गाँव पाथरी से पशु सखी का काम करती हूं और मैं 500 farmer के साथ काम करती हूं।

प्रधानमंत्री – 500

लखपति दीदी – 500 farmer के साथ।

लखपति दीदी – तो मेरा काम है जो SAG दीदी लोग हैं, उन लोगों को मैं लोन देती हूँ और उन लोगों को आगे बढ़ने में help करती हूँ। लगभग 1 lakh 50 thousand साल में कमा लेती हूं।

प्रधानमंत्री – डेढ़ लाख।

लखपति दीदी – जी सर।

प्रधानमंत्री – वाह।

लखपति दीदी – हम अमेडियन हैं सर, तो हमारे समाज में बाहर निकलने का हमको इजाजत नहीं थी सर। मेरे घर के हालत बहुत नाजुक थी सर। और समूह में जुड़ने के बाद मुझे पशु सखी का गाँव पथरी में काम मिला। और आज मैं खुद लखपति दीदी हूं सर।

प्रधानमंत्री – कहां से हैं आप?

लखपति दीदी – मेघालय से।

प्रधानमंत्री – मेघालय, कितनी बहनें हैं आपके साथ?

लखपति दीदी – समूह में तो हम तो 10 हैं।

प्रधानमंत्री – 10 हैं।

लखपति दीदी – लेकिन हम तो इतना SHG pharmacy में काम कर रहे हैं ना, मेरा तो SHG pharmacy में तीन लाख, तीन हजार install किया अभी।

लखपति दीदी – जब हम इस अभियान में नहीं थे , तो हमारा कुछ महत्व नहीं था। जब हम इस अभियान में आए तो हमारा मान बढ़ गया। कृषि के डॉक्टर बन गए और कृषि सखी का ट्रेनिंग मिल गया तो।

लखपति दीदी – हमें डाक्टर दीदी के नाम से जाना जाता है।

प्रधानमंत्री – कितने पशु होंगे जिनकी आपको चिंता करने की नौबत आती है?

लखपति दीदी – सर हमारे वहां पर जो भी है ना हमारा ब्लाक बहुत बड़ा है। तो वहां पर सब 20 हैं हम, सभी काम करती हैं जो। तो हमारे वहां पर 470 लखपति दीदी बनाई हैं हमने।

प्रधानमंत्री – 470?

लखपति दीदी – हां जी।

प्रधानमंत्री – वाह, आपने कमाल कर दिया है। बहुत बधाई है आपको।

प्रधानमंत्री – सर आपने 2021 में जो दस हजार farmer producer group बनाने का सर योजना बनाई थी। उसी के तहत सर हमने आत्मनिर्भर महिला farmer producer company Ltd Ichhawar का सर गठन किया सर। और सर पहले ही साल में हमने एक हजार farmer’s दीदीयों को कंपनियों में सर जोड़कर।

प्रधानमंत्री – एक हजार?

लखपति दीदी – जी सर।

प्रधानमंत्री – एक साल में।

लखपति दीदी – हां सर।

लखपति दीदी – आदाब सर, मेरा नाम राबिया बशीर है। मैं जम्मू कश्मीर के डिस्ट्रिक्ट कुपवाड़ा से हूं। मेरा डेयरी फार्म का बिजनेस है। और अभी मेरी साल की इनकम one lakh twenty thousand है। मैं खुद भी एक लखपति हूं और मैंने अपने साथ 160 members को लखपति बनाया है।

प्रधानमंत्री – कितने पशु की केयर करते हैं आप?

लखपति दीदी – हम अभी 10 पशु की केयर करते हैं।

लखपति दीदी – जय जोहार सर, जय छत्तीसगढ़।

प्रधानमंत्री – जय जोहार।

लखपति दीदी – सर हमारा एफपीओ है स्वर्णों पर (स्पष्ट नहीं)। जो भारत सरकार जिसका प्रोजेक्ट को बनाई है। और उसमें सर अभी तक हमारे पंद्रह हजार आठ सौ दीदीयां जुड़ी हुई हैं-किसान दीदीयां। तो हर दीदी 50 से 60 हजार रुपये से अपना कमीशन निकालती है।

प्रधानमंत्री – कितनी बहने हैं?

लखपति दीदी – अभी हम लोगों के साथ 100, 500 महिलाएं हैं।

प्रधानमंत्री – अच्छा।

लखपति दीदी – मैं ड्रोन दीदी हूं।

प्रधानमंत्री – ड्रोन दीदी है। तो आपको गांव में सब लोग ड्रोन पायलट बोलते होंगे।

लखपति दीदी – हां, उस जिला में 3 ड्रोन पायलट हैं, उसमें मैं भी हूँ।

लखपति दीदी – 2019 से मैं SHG जीवन स्वयं सहायता में सदस्य हूं। सर हमारे साथ 1500 महिला।

प्रधानमंत्री – 1500?

लखपति दीदी – हां सर। मेरे को मराठी, हिंदी नहीं आती सर ज्यादा।

प्रधानमंत्री – आप मराठी बोल सकती है।

लखपति दीदी – मेरे खेत में महुआ है। मैं महुआ का व्यवसाय करती हूँ और समूह में जो महिलाये हैं, उनसे भी मैं महुआ की खरीदारी करती हूँ। दो महीने में मुझे दो-ढाई लाख की प्राप्ति हुई है।

प्रधानमंत्री - दो लाख?

लखपति दीदी –हां

प्रधानमंत्री - और कुल महिलायें कितनी है? पाँच सौ ?

लखपति दीदी- पाँच सौ अड़तीस।

लखपति दीदी - सर, मैं मराठी में बोल रही हूँ।

प्रधानमंत्री – हां, चलेगा।

लखपति दीदी- मेरा टूरिज़म का कारोबार है। मेरे पास दो टूरिस्ट बोट है। इन नावों में पर्यटक को सैर करवाती हूँ। मैं खुद केरल गयी थी, वहां मैंने उन का कारोबार देखा। यहाँ हम महिलायें ही यह कारोबार करती हैं। मेरी खुद की टूरिस्ट बोट मैं पिछले तीन वर्षों से चला रही हूँ। उससे मुझे सालाना एक से देढ़ लाख की प्राप्ति होती है।

प्रधानमंत्री - वाह !

लखपति दीदी- हम सब महिला मिल कर इस कारोबार को और आगे लेके जाने वाले हैं।

लखपति दीदी- गोंदिया जिला से हूं। सालेकसा क्षेत्र आदिवासी एरिया से हूं, आदिवासी महिला हूं, और ई-रिक्शा मिला है मुझे और मैं ई-रिक्शा स्वयं चलाती हूं और उसी से गांव से भी खरीदी करती हूं और बिक्री करती हूं। 10 से 12 हजार रूपया महीने का मेरे को प्रॉफिट होता है।

प्रधानमंत्री – आप सबको सुनने के बाद मुझे लगता है कि अब देश में लखपति दीदीयों की संख्या बहुत बढ़ने वाली है। और जब लोग देखेंगे, आपकी बातें सुनेंगे, आप भी यहां पर औरों को भी बताना कि आपका क्या अनुभव रहा है, कैसा अनुभव रहा है और उसके कारण कितना आत्मनिर्भर आप बन सकते हैं, और पूरे परिवार को कितनी मदद कर सकते हैं। इतना ही नहीं आपकी शक्ति का उपयोग होता है और उसके कारण पूरे आपके आस-पास का जो वातावरण है, उसमें एक बहुत बड़ा बदलाव आता है। मालूम है मेरा क्या लक्ष्य है? देखिए 1 करोड़ दीदी लखपति दीदी बनी हैं और मुझे 3 करोड़ लखपति दीदी बनाना हैं, तो आप लोगों को औरों को समझाना पड़ेगा। करेंगे?

लखपति दीदी- हाँ सर

प्रधानमंत्री – पक्का।

लखपति दीदी- हाँ

प्रधानमंत्री – शाबाश। धन्यवाद।

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प्रधानमंत्री ने PRAGATI की 51वीं बैठक की अध्यक्षता की
May 27, 2026
प्रधानमंत्री ने रेलवे, बिजली और सड़क क्षेत्रों से जुड़ी सात अहम बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की
समीक्षा में शामिल कुल 30,000 करोड़ रुपये के निवेश वाली परियोजनाएं 9 राज्यों में फैली हुई हैं
प्रधानमंत्री ने केन-बेतवा लिंक परियोजना और स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 की भी समीक्षा की
प्रधानमंत्री ने कहा-केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को दूसरे राज्यों के लिए एक मॉडल के तौर पर काम करना चाहिए, ताकि वे राज्यों के बीच पानी से जुड़े मुद्दों को आपसी सहमति से सुलझा सकें
प्रधानमंत्री ने राज्यों से ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को जल्द से जल्द पूरा करने को कहा, जिसमें अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र और गोबरधन संयंत्र शामिल हैं
प्रधानमंत्री ने शहरी इलाकों में मिशन-मोड पर रूफटॉप सोलर कवरेज बढ़ाने का आह्वान किया
प्रधानमंत्री की सलाह पर अमल करते हुए, राज्य स्तर पर सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं की मासिक समीक्षा की व्यवस्था शुरू की गई है, जिसकी शुरुआत स्वच्छ भारत मिशन की समीक्षा से हुई है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों को सहज रूप से एकीकृत करके 'सक्रिय शासन और समय पर कार्यान्वयन' को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आज सुबह 'सेवा तीर्थ' में प्रगति (PRAGATI) की 51वीं बैठक की अध्यक्षता की। प्रगति एक आईसीटी-सक्षम, मल्टी-मॉडल प्लेटफॉर्म है।

बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री ने कुल लगभग ₹30,000 करोड़ की लागत वाली रेलवे, बिजली और सड़क क्षेत्रों से जुड़े सात महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की। ये परियोजनाएं नौ राज्यों में फैली हुई हैं। आर्थिक विकास और जन कल्याण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण इन परियोजनाओं की समीक्षा समय-सीमा, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और मुद्दों के समय पर समाधान पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए की गई। प्रधानमंत्री ने 'केन-बेतवा लिंक परियोजना' और 'स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0' की भी समीक्षा की।

बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए, प्रधानमंत्री ने शहरी क्षेत्रों में रूफटॉप सोलर को अपनाने की गति तेज करने की जरूरत पर जोर दिया, जिसमें शहरों, आवासीय समूहों और सार्वजनिक संस्थानों पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बिजली की लागत कम करने, ऊर्जा सुरक्षा को बेहतर बनाने और घरों व समुदायों के स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए रूफटॉप सोलर को मिशन मोड में चलाया जाना चाहिए।

सड़क और बंदरगाह कनेक्टिविटी परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए, इस बात पर जोर दिया गया कि वधावन बंदरगाह को 'बंदरगाह-आधारित, बहु-माध्यम विकास' के एक मॉडल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जहां एक भविष्य के लिए तैयार लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम बनाने के उद्देश्य से परिवहन के हर प्रमुख माध्यम को इस तरह से जोड़ा जाए। इस परियोजना को केवल एक बंदरगाह के रूप में नहीं, बल्कि एक 'राष्ट्रीय प्रवेश द्वार' के रूप में देखा जाना चाहिए, जो तटीय नौवहन, अंतर्देशीय जलमार्गों, समर्पित माल ढुलाई गलियारों, हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी, राजमार्गों और हवाई अड्डों से जुड़ा हो।

प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर जोर दिया और इस बात को रेखांकित किया कि इस मिशन को केवल बुनियादी ढांचा तैयार करने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नियमित निगरानी, ​​नागरिकों की भागीदारी और विभिन्न हितधारकों के बीच तालमेल के माध्यम से इसके ठोस परिणाम भी सुनिश्चित किए जाने चाहिए। उन्होंने राज्यों से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित बुनियादी ढांचे, जिसमें अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र और 'गोबर-धन' (GOBARdhan) संयंत्र शामिल हैं, के निर्माण कार्य में तेजी लाने को कहा।

केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की समीक्षा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि केन-बेतवा परियोजना को अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श के रूप में काम करना चाहिए, ताकि वे भी आपसी सहयोग, समय पर मंज़ूरी, प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी और 'मिशन-मोड' में काम करके राज्यों के बीच जल-संबंधी विवादों को सुलझा सकें। राज्यों को ऐसे ही अन्य अवसरों की पहचान करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जहां नदी जोड़ो, जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और कुशल सिंचाई जैसे कार्यों को एक एकीकृत तरीके से अपनाया जा सके, ताकि भविष्य के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि सार्वजनिक परियोजनाओं को लागू करने में देरी से न केवल लागत बढ़ती है, बल्कि नागरिकों को जरूरी सुविधाओं और विकास के लाभों तक समय पर पहुंचने से भी वंचित होना पड़ता है। उन्होंने कहा कि हर देरी का लोगों के जीवन, क्षेत्रीय विकास और सार्वजनिक संसाधनों पर सीधा असर पड़ता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मंत्रालयों, विभागों और राज्यों को लंबित मुद्दों को सुलझाने, रुकावटों को दूर करने और काम को तेजी से पूरा करने के लिए ज्यादा सक्रिय और समय-सीमा के भीतर काम करने का तरीका अपनाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि नहर नेटवर्क का नए तरीकों से इस्तेमाल करने के तरीकों पर विचार किया जाना चाहिए, जिसमें साफ बिजली बनाने के लिए नहरों के किनारे और उनके ऊपर सोलर पैनल लगाना भी शामिल है। इससे जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने, वाष्पीकरण से होने वाले नुकसान को कम करने, नवीकरणीय ऊर्जा बनाने और जल बुनियादी ढांचे से अतिरिक्त आर्थिक लाभ पैदा करने में मदद मिलेगी।

बैठक की शुरुआत में कैबिनेट सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री के निर्देशों के अनुसार, राज्य स्तर पर सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं की मासिक समीक्षा की एक प्रणाली भी शुरू कर दी गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य राज्य और जिला स्तरों पर नियमित निगरानी, ​​कार्यान्वयन संबंधी मुद्दों का त्वरित समाधान और अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इस पहल के एक हिस्से के रूप में, सबसे पहले राज्य स्तर पर समीक्षा के लिए 'स्वच्छ भारत मिशन' को चुना गया है।