प्रधानमंत्री लगभग 7500 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे
प्रधानमंत्री विशेष पिछड़ी जनजातियों की लगभग दो लाख महिला लाभार्थियों को आहार अनुदान की मासिक किस्त वितरित करेंगे
प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के लाभार्थियों को 1.75 लाख अधिकार अभिलेख वितरित करेंगे
प्रधानमंत्री उच्च आदिवासी सघनता वाले जिलों के लिए समर्पित टंट्या मामा भील विश्वविद्यालय की आधारशिला रखेंगे
प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत 550 से अधिक गांवों के लिए धनराशि हस्तांतरित करेंगे
प्रधानमंत्री रतलाम और मेघनगर रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास की आधारशिला भी रखेंगे
प्रधानमंत्री सड़क, रेल, बिजली और जल क्षेत्र से संबंधित अनेक परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 11 फरवरी, 2024 को मध्य प्रदेश का दौरा करेंगे। दोपहर लगभग 12:40 बजे वे मध्य प्रदेश के झाबुआ में लगभग 7500 करोड़ रुपये की अनेक विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे।

अंत्योदय की परिकल्पना प्रधानमंत्री द्वारा की गई पहलों के लिए मार्गदर्शक रही है। यह सुनिश्चित करने पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है कि विकास के लाभ आदिवासी समुदाय तक पहुंचें, जिनमें से अधिकांश वर्ग स्वतंत्रता के कई दशकों बाद भी इन लाभों को प्राप्त करने से वंचित रहे थे। इसके अनुरूप, प्रधानमंत्री कई पहलों का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे, जिससे क्षेत्र के जनजातीय समुदाय को लाभ होगा।

प्रधानमंत्री लगभग दो लाख महिला लाभार्थियों को आहार अनुदान योजना के अंतर्गत आहार अनुदान की मासिक किस्त का वितरण करेंगे। इस योजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश की विभिन्न विशेष पिछड़ी जनजातियों की महिलाओं को पौष्टिक आहार के लिए 1500 रुपये प्रति माह प्रदान किए जाते हैं।

प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के लाभार्थियों को 1.75 लाख अधिकार अभिलेख वितरित करेंगे। इससे लोगों को उनकी जमीन के अधिकार के लिए दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध हो जाएंगे।

प्रधानमंत्री टंट्या मामा भील विश्वविद्यालय की आधारशिला रखेंगे। यह एक समर्पित विश्वविद्यालय है, जो क्षेत्र में उच्च जनजातीय बहुलता वाले जिलों के युवाओं को सुविधाएं प्रदान करेगा। 170 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होने वाला यह विश्वविद्यालय छात्रों के समग्र विकास के लिए विश्वस्तरीय अवसंरचना प्रदान करेगा।

प्रधानमंत्री ‘प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना’ के अंतर्गत 559 गांवों के लिए 55.9 करोड़ रुपये जारी करेंगे। इस राशि का उपयोग आंगनवाड़ी भवन, राशन की दुकानों, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूलों में अतिरिक्त कमरे, आंतरिक सड़कों सहित विभिन्न प्रकार की निर्माण गतिविधियों के लिए किया जाएगा।

प्रधानमंत्री झाबुआ में 'सीएम राइज स्कूल' का शिलान्यास करेंगे। स्कूल छात्रों को स्मार्ट क्लास, ई- लाइब्रेरी आदि जैसी आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रौद्योगिकी को एकीकृत करेगा।

प्रधानमंत्री कई परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे, जो मध्य प्रदेश में जलापूर्ति और पीने के पानी की व्यवस्था को मजबूत करेगी। जिन परियोजनाओं की आधारशिला रखी जाएगी, उनमें 'तलवाड़ा परियोजना' शामिल है। यह धार और रतलाम के एक हजार से अधिक गांवों के लिए पेयजल आपूर्ति योजना है। इसके अलावा अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) 2.0 के तहत 14 शहरी जलापूर्ति योजनाएं, मध्य प्रदेश के कई जिलों में 50 हजार से अधिक शहरी परिवारों को लाभान्वित कर रही हैं। प्रधानमंत्री झाबुआ की 50 ग्राम पंचायतों के लिए 'नल जल योजना' भी राष्ट्र को समर्पित करेंगे, जिससे लगभग 11 हजार घरों को नल से जल उपलब्ध कराया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री कई रेल परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित करेंगे और उनकी आधारशिला रखेंगे। इनमें रतलाम रेलवे स्टेशन और मेघनगर रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास की आधारशिला रखना भी शामिल है। इन स्टेशनों का पुनर्विकास अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत किया जाएगा। राष्ट्र को समर्पित रेल परियोजनाओं में इंदौर-देवास-उज्जैन सी केबिन रेलवे लाइन के दोहरीकरण की परियोजनाएं शामिल हैं। इसके अतिरिक्त इटारसी-यार्ड रीमॉडलिंग के साथ उत्तर-दक्षिण ग्रेड सेपरेटर तथा बरखेरा-बुदनी-इटारसी को जोड़ने वाली तीसरी लाइन को भी इसमें रखा गया है। ये परियोजनाएं रेल अवसंरचना को मजबूत करने तथा यात्री और माल गाड़ियों, दोनों के लिए यात्रा के समय को कम करने में मदद करेंगी।

प्रधानमंत्री मध्य प्रदेश में 3275 करोड़ से अधिक की कई सड़क विकास परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इसमें एनएच-47 के किमी 0.00 से किमी 30.00 (हरदा-तेमगांव) तक हरदा-बैतूल (पैकेज-I) को चार लेन का बनाना; एनएच-752डी का उज्जैन देवास खंड; एनएच-47 के इंदौर-गुजरात एमपी सीमा खंड को चार लेन (16 किमी) और एनएच-47 के चिचोली-बैतूल (पैकेज-III) हरदा-बैतूल को चार लेन और एनएच-552जी का उज्जैन झालावाड़ खंड शामिल है। इन परियोजनाओं से सड़क संपर्क में सुधार होगा और क्षेत्र में आर्थिक विकास में भी मदद मिलेगी।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री अपशिष्ट डंपसाइट उपचार, विद्युत सबस्टेशन जैसी अन्य विकास पहलों का भी लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे।

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Text of PM’s remarks during inauguration of Swaminarayan Hindu Temple in Paris
September 06, 2026

पूज्य महंत स्वामी, फ्रांस सरकार के सम्मानित प्रतिनिधिगण, उपस्थित अतिथिगण, इंडियन कम्युनिटी के मेरे साथी, देश दुनिया से जुड़े सभी हरि भक्त, देवियों और सज्जनों, जय स्वामीनारायण!

आज फ्रांस की राजधानी पेरिस में भव्य स्वामीनारायण मंदिर का लोकार्पण हो रहा है। यह लोकार्पण भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों का नया युग स्तंभ है। पूज्य संत जनों और सनातन परंपरा के श्रेष्ठ जनों के आशीर्वाद के साथ आज इस लोकार्पण का मंच ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के भाव का मंच बन गया है। भगवान स्वामीनारायण की कृपा और हमारे संतों का स्नेह, संतों का आशीर्वाद, मेरा सौभाग्य है कि मुझे ऐसे पुण्य अवसरों से जुड़ने का अवसर हमेशा मिलता रहता है। आज भी मैं भले ही पेरिस में आप सबके बीच उपस्थित नहीं हूं, लेकिन मन से और हृदय से, मैं स्वयं को आपके बीच ही अनुभव कर रहा हूं।

साथियों,

आज इस अवसर पर मैं परम पूज्य प्रमुख स्वामी जी महाराज का भी श्रद्धापूर्वक स्मरण करता हूं। प्राचीन काल में भारत का जो सांस्कृतिक आध्यात्मिक वैभव था, उन्होंने उसके पुनर्जागरण का एक अभियान शुरू किया था। आज उसका प्रकाश यूरोप समेत पूरी दुनिया में फैल रहा है। 2024 में अबू धाबी में भव्य मंदिर का लोकार्पण हुआ था। आज वहां हजारों लोग दर्शन करने जाते हैं और अब यहां पेरिस में स्वामीनारायण मंदिर का निर्माण सृजन की यह निरंतरता, यह संतों की संकल्प शक्ति का ही प्रमाण है। मैं पुनीत कार्य के लिए पूज्य महंत स्वामी का आभार प्रकट करता हूं, मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं। मैं BAPS स्वामीनारायण संस्था को और करोड़ों हरि भक्तों को इस अवसर पर हृदय की गहराई से बधाई देता हूं।

साथियों,

BAPS के माध्यम से जब अलग-अलग देश में मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा होती है, तो वहां भारत के प्राचीन विचार और मानवीय मूल्य भी साथ-साथ ही जाते हैं और भारत का विचार कहता है ‘समानं मनः सह चित्तमेषाम्’ अर्थात हमारे मन समान हो, हमारे हृदय साथ जुड़े। इसलिए आज जब फ्रांस में इतना भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है, यह फ्रांस की विविधता को तो समृद्ध करेगा ही, इससे भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों को भी ऊर्जा मिलेगी।

साथियों,

बीते वर्षों में भारत और फ्रांस के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। मेरे मित्र, प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मिलकर दोनों देश एक Special Global Strategic Partnership बना रहे हैं। Technology, AI और Defence से लेकर Space और Climate Action तक हम एक नई गति और नई ऊर्जा के साथ मिलकर के आगे बढ़ रहे हैं। हम 2026 को India-France Year of Innovation के रूप में भी सेलिब्रेट कर रहे हैं। भारत-फ्रांस की ये Strategic Partnership इसलिए भी खास है, क्योंकि ये हमारे पुराने सांस्कृतिक-राजनैतिक सम्बन्धों की मजबूत बुनियाद पर टिकी है। इतिहास गवाह है, फ्रांस में भारतीय सैनिकों के बलिदान का इतिहास आज भी मन-मंदिर में जीवित है। भाषा से जुड़े विषयों में रुचि रखने वाले लोग यह भी जानते हैं कि फ्रेंच स्कॉलर्स ने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में कितनी अहम भूमिका निभाई है। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद पर रोमाँ रोलाँ की की लेखनी हमारी सोसाइटीज़ को और करीब लाई है। पेरिस से पुडुचेरी के अरबिंदो आश्रम तक 'The mother' की spiritual journey, उसने कितने ही भारतीय और फ्रेंच साधकों को inspire किया है।

साथियों,

दशकों पहले श्रील प्रभुपाद स्वामी भी फ्रांस आए थे। इस्कॉन के जरिए भारत फ्रांस के बीच आध्यात्मिक सम्बन्धों का नया अध्याय उन्होंने शुरू किया था। आज योग भी भारत-फ्रांस के people to people कनेक्ट का एक माध्यम बन चुका है। 'इंटरनेशनल योगा डे' पर एफिल टॉवर के सामने से आने वाली तस्वीरें फ्रांस में योग की लोकप्रियता का उदाहरण बनती हैं और अब BAPS के इस भव्य मंदिर के जरिए, हमारे उन सांस्कृतिक सम्बन्धों में एक नया अध्याय जुड़ रहा है।

साथियों,

इन दिनों, भारत फ्रांस Joint Ventures की संभावनाओं पर बातें होती हैं। स्वामीनारायण मंदिर ने इस संभावना में भी एक नया आयाम जोड़ा है। यह मंदिर 'मेड इन इंडिया' है और 'बिल्ट इन फ्रांस' है। इसके काफी पत्थरों को भारत में तराशा गया है। भारत की प्राचीन प्रतिभा यहाँ फ्रांस में आधुनिक इंजीनियरिंग से आकर जुड़ चुकी है। पेरिस में इस भव्य मंदिर ने आकार लिया है। इसलिए, मैं आशा करता हूँ, यह मंदिर सदियों तक भारत और फ्रांस के बीच सहयोग और संभावनाओं का भी प्रतीक बनकर उभरेगा।

साथियों,

स्वामीनारायण मंदिर हमेशा से भक्ति के साथ-साथ सेवा का माध्यम भी रहे हैं। मुझे बताया गया है, यह मंदिर भी सेवा प्रकल्पों का वैसा ही केंद्र बनेगा। मुझे विश्वास है कि यहाँ से भारतीय संस्कृति के जो स्वर निकलेंगे, उनका लाभ पूरे यूरोप में लोगों को मिलेगा। भविष्य में मुझे जब भी समय मिलेगा, मैं इस मंदिर में दर्शन करने का प्रयास अवश्य करूंगा। इन्हीं शब्दों के साथ, एक बार फिर आज के इस लोकार्पण समारोह में सम्मिलित सभी अतिथिगणों को, सभी परिवारों को, सभी हरि भक्तों को और पूरी Indian Diaspora को मेरी ओर से इस शुभारंभ पर्व की ढेरों शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

मर्सी बोकू!

जय स्वामीनारायण!