प्रधानमंत्री श्री सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट में कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे
प्रधानमंत्री रघुबीर मंदिर में पूजा-अर्चना और दर्शन करेंगे
प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अरविंद भाई मफतलाल के शताब्दी जन्म वर्ष समारोह के उपलक्ष्य में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होंगे
प्रधानमंत्री तुलसी पीठ भी जाएंगे; कांच मंदिर में पूजा-अर्चना और दर्शन करेंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 27 अक्टूबर 2023 को मध्य प्रदेश के दौरे पर रहेंगे।

प्रधानमंत्री अपराह्न लगभग 1:45 बजे सतना जिले के चित्रकूट पहुंचेंगे और श्री सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट में आयोजित किए जाने वाले कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री रघुबीर मंदिर में पूजा-अर्चना और दर्शन करेंगे; श्री राम संस्कृत महाविद्यालय जाएंगे; स्वर्गीय श्री अरविंद भाई मफतलाल की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे और जानकीकुंड चिकित्सालय की नई शाखा या प्रकोष्‍ठ का उद्घाटन करेंगे।

प्रधानमंत्री इसके साथ ही स्वर्गीय श्री अरविंद भाई मफतलाल के शताब्दी जन्म वर्ष समारोह के अवसर पर आयोजित किए जाने वाले एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। श्री सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट की स्थापना वर्ष 1968 में परम पूज्य रणछोड़दासजी महाराज ने की थी। परम पूज्य रणछोड़दासजी महाराज से श्री अरविंद भाई मफतलाल अत्‍यंत प्रेरित थे और उन्होंने ट्रस्ट की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

श्री अरविंद भाई मफतलाल देश की आजादी के बाद भारत के अग्रणी उद्यमियों में से एक थे, जिन्होंने देश की विकास गाथा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

प्रधानमंत्री अपने चित्रकूट दौरे के दौरान तुलसी पीठ भी जाएंगे। प्रधानमंत्री अपराह्न लगभग 3:15 बजे कांच मंदिर में पूजा-अर्चना और दर्शन करेंगे। प्रधानमंत्री तुलसी पीठ के जगद्गुरु रामानंदाचार्य का आशीर्वाद लेंगे और एक सार्वजनिक समारोह में भाग लेंगे, जहां वह तीन पुस्तकों यथा ‘अष्टाध्यायी भाष्य’, ‘रामानंदाचार्य चरितम’ और ‘भगवान श्री कृष्ण की राष्ट्रलीला’ का विमोचन करेंगे।

मध्य प्रदेश के चित्रकूट में तुलसी पीठ एक अत्‍यंत महत्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक सेवा संस्थान है। इसकी स्थापना जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने वर्ष 1987 में की थी। तुलसी पीठ हिंदू धार्मिक साहित्य के प्रमुख प्रकाशकों में से एक है।

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प्रधानमंत्री 19 जून को PM-VBRY के तहत लगभग ₹2,400 करोड़ के इंसेंटिव जारी करेंगे
June 17, 2026
पहली बार रोजगार पाने वाले कर्मचारियों को 15,000 रुपये तक का प्रोत्साहन मिलेगा
सतत रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने के लिए, नियोक्ता प्रति अतिरिक्त कर्मचारी प्रति माह 3,000 रुपये तक के प्रोत्साहन के पात्र होंगे
पीएम-वीबीआरवाई योजना रोजगार सृजन, रोजगार के औपचारिकीकरण और सामाजिक सुरक्षा कवरेज के विस्तार को सुगम बनाने के लिए बनाई गई
इस योजना ने देश भर में 15 लाख लाभार्थियों को रोजगार प्रदान किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 19 जून 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में सायं 5 बजे आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) के अंतर्गत लगभग 2,400 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि का वितरण करेंगे।

यह राशि वितरण पीएम-वीबीआरवाई के कार्यान्वयन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। पीएम-वीबीआरवाई भारत सरकार की प्रमुख रोजगार-संबंधी प्रोत्साहन योजना है, जिसका उद्देश्य रोजगार सृजन में तेजी लाना, रोजगार को औपचारिक बनाना, रोजगार क्षमता बढ़ाना और सभी सेक्‍टरों में सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार करना है। इस योजना के माध्यम से देश भर में पहले ही 15 लाख रोजगार के अवसर सृजित किए जा चुके हैं।

पीएम-वीबीआरवाई योजना का उद्देश्य श्रमिकों और नियोक्ताओं दोनों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस योजना के तहत, पहली बार रोजगार पाने वाले कर्मचारियों को 15,000 रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाता है, जिससे उन्हें कार्यबल में शामिल होने में महत्वपूर्ण सहायता मिलती है। अतिरिक्त रोजगार सृजित करने वाले नियोक्ताओं को प्रति अतिरिक्त कर्मचारी प्रति माह 3,000 रुपये तक का प्रोत्साहन मिलता है, जिससे सतत रोजगार सृजन को प्रोत्साहन मिलता है। आर्थिक विकास को गति देने में विनिर्माण के कार्यनीतिक महत्व को देखते हुए, विनिर्माण क्षेत्र के नियोक्ता चार वर्षों की अवधि के लिए प्रोत्साहन प्राप्त करने के पात्र हैं, जबकि अन्य सभी सेक्‍टरों के नियोक्ता दो वर्षों के लिए प्रोत्साहन का लाभ उठा सकते हैं।

यह योजना रोजगार-आधारित विकास के लिए अनुकूल वातावरण को बढ़ावा देने और यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि भारत की आर्थिक प्रगति के लाभ उसके युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण औपचारिक रोजगार के अवसरों में परिवर्तित हों।

प्रधानमंत्री- विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) 1 अगस्त, 2025 से प्रभावी हुई। 99,446 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय वाली इस योजना का उद्देश्य दो वर्षों में 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार सृजित करने के लिए प्रोत्साहन देना है। इनमें से लगभग 1.92 करोड़ लाभार्थी पहली बार कार्यबल में प्रवेश करेंगे। कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों की सहायता करने के जरिये, यह योजना औपचारिक रोजगार के विस्तार, सामाजिक सुरक्षा कवरेज को सुदृढ़ करने और विकसित भारत के विजन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।