प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 11 अगस्त, 2024 को सुबह 11 बजे नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में उच्च उपज देने वाली, जलवायु अनुकूल और जैव-सशक्त फसलों की 109 किस्मों को जारी करेंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री किसानों और वैज्ञानिकों से बातचीत भी करेंगे।

प्रधानमंत्री 61 फसलों की 109 किस्मों को जारी करेंगे, जिनमें 34 खेती की फसलें और 27 बागवानी फसलें शामिल होंगी। खेती की फसलों में मोटे अनाज, चारा फसलें, तिलहन, दलहन, गन्ना, कपास, रेशा और अन्य संभावित फसलों सहित विभिन्न अनाजों के बीज जारी किए जाएंगे। बागवानी फसलों में फलों, सब्जियों, बागान फसलों, कंद फसलों, मसालों, फूलों और औषधीय फसलों की विभिन्न किस्में जारी की जाएंगी।

प्रधानमंत्री ने सदैव समावेशी खेती और जलवायु अनुकूल पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। उन्होंने भारत को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए मध्याह्न भोजन, आंगनबाड़ी आदि कई सरकारी कार्यक्रमों से जोड़कर फसलों की जैव-सशक्त किस्मों को प्रोत्साहन देने पर भी जोर दिया है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से कहा कि कृषि के क्षेत्र में उठाये गए इन कदमों से किसानों की अच्छी आय सुनिश्चित होगी और उनके लिए उद्यमिता के नए अवसर प्राप्‍त होंगे। उच्च उपज वाली 109 किस्मों को जारी करने का यह कदम इस दिशा में एक और कदम है।

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प्रधानमंत्री ने दुनिया की विविध संस्कृतियों के सम्मान पर जोर देते हुए एक संस्कृत सुभाषितम साझा किया
June 29, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया:

“देशाचारान् समयाञ्जातिधर्मान् बुभूषते यस्तु परावरज्ञः।

स तत्र तत्राधिगतः सदैव महाजनस्याधिपत्यं करोति॥" 

यह सुभाषितम दर्शाता है कि विश्व की विविध संस्कृतियों का सम्मान करने से लोगों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना बढ़ती है और आपसी समझ तथा भाईचारा मजबूत होता है।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर लिखा:

दुनिया की अलग-अलग संस्कृतियों का सम्मान करने से लोगों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना बढ़ती है। इससे आपसी समझ और भाईचारा और मजबूत होता है।

देशाचारान् समयाञ्जातिधर्मान् बुभूषते यस्तु परावरज्ञः।

स तत्र तत्राधिगतः सदैव महाजनस्याधिपत्यं करोति॥